RSS के 100 साल का सिनेमाई सफर

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Shatak Movie Review की शुरुआत एक अहम सवाल से होती है—क्या हम इतिहास को सिर्फ सुनी-सुनाई बातों से समझते हैं या तथ्यों के आधार पर? 20 फरवरी को रिलीज हुई फिल्म ‘शतक’ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 साल के सफर को पर्दे पर उतारने की कोशिश करती है। फिल्म 1925 में विजयादशमी के दिन नागपुर में हुई स्थापना से लेकर आज तक की यात्रा को सरल और सीधे अंदाज में दिखाती है।

कहानी की शुरुआत डॉक्टर केशव बालीराम हेडगेवार से होती है। उनके विचार, संघर्ष और संगठन की नींव को विस्तार से पेश किया गया है। इसके बाद गुरुजी एम. एस. गोलवलकर के दौर को दिखाया गया है, जहां संगठनात्मक विस्तार पर फोकस नजर आता है। फिल्म यह भी छूती है कि आजादी की लड़ाई, युद्धकाल और बाद के राजनीतिक दौर में संघ की भूमिका क्या रही। गांधी, नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे नेताओं का जिक्र आता है, लेकिन कहानी का केंद्र संघ ही रहता है।

निर्देशक आशीष मॉल ने विषय को भावनात्मक अतिशयोक्ति से बचाते हुए संतुलित रखा है। 1 घंटे 52 मिनट की यह फिल्म हाइब्रिड तकनीक यानी AI और रियल एक्टर्स के मेल से बनी है। कुछ जगह यह डॉक्यूमेंट्री जैसी लगती है और VFX थोड़ा कृत्रिम महसूस होता है, लेकिन जानकारी भरपूर है।

Shatak Movie Review के निष्कर्ष में कहा जा सकता है कि यह फिल्म प्रचार से ज्यादा एक विचार की निरंतरता दिखाने की कोशिश करती है। अगर आप RSS के इतिहास को समझना चाहते हैं, तो यह फिल्म देखी जा सकती है। मेरी ओर से 5 में से 3 स्टार।

हार के झटके के बाद क्या लिया जाएगा बड़ा फैसला, टीम इंडिया से बाहर होंगे फेल बल्लेबाज? कोच ने दिए संकेत

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सुपर-8 में 76 रन की करारी हार के बाद भारतीय टीम में मंथन तेज हो गया है। टीम मैनेजमेंट अब कम से कम एक आउट-ऑफ-फॉर्म बल्लेबाज को बाहर करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है। मुख्य कोच गौतम गंभीर के सहयोगी कोच रेयान टेन डेशकाटे और बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने संकेत दिए हैं कि अगले मैच में प्लेइंग-11 में बदलाव संभव है। भारत को अब सुपर-8 राउंड में 26 फरवरी को जिम्बाब्वे से चेन्नई में और एक मार्च को कोलकाता में वेस्टइंडीज से खेलना है।

फ्लॉप फॉर्म पर बढ़ी चिंता

सुपर-8 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम के शीर्ष क्रम पर सवाल उठे हैं। अभिषेक शर्मा ने चार मैचों में सिर्फ 15 रन बनाए हैं। तिलक वर्मा के पांच मैचों में 107 रन जरूर हैं, लेकिन स्ट्राइक रेट 118 रहा है। फिनिशर रिंकू सिंह का 29 गेंदों में 24 रन (स्ट्राइक रेट 82.75) भी निराशाजनक है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट के पास बदलाव पर विचार करने के अलावा विकल्प कम बचते दिख रहे हैं।

कोचिंग स्टाफ ने क्या कहा?

बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने साफ कहा, ‘अगर हेड कोच और टीम मैनेजमेंट को लगता है कि हमें कुछ अलग करना चाहिए, तो हम बदलाव करेंगे। अब हम उस मोड़ पर हैं जहां सोचना होगा कि क्या बदलें और कैसे बदलें।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमें यह तय करना होगा कि क्या उसी संयोजन के साथ जाएं या कुछ नया आजमाएं।’

डेशकाटे का बयान

वहीं, रेयान टेन डेशकाटे ने संकेत दिया कि दाएं-बाएं हाथ के बल्लेबाजों के संतुलन पर भी चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा, ‘क्या हम उन्हीं खिलाड़ियों के साथ बने रहें जिन्होंने पिछले 18 महीनों में अच्छा प्रदर्शन किया है या फिर संजू को मौका दें, जो एक शानदार खिलाड़ी हैं और रणनीतिक तौर पर टॉप ऑर्डर में दाएं हाथ का विकल्प देते हैं?’ उन्होंने यह भी जोड़ा, ‘अगले दो अहम मुकाबलों से पहले यह निश्चित तौर पर चर्चा का विषय रहेगा।’ 

रिंकू को लेकर क्या बोले कोच?

डेशकाटे के इस बयान के बाद संभावना जताई जाने लगी है कि सुपर-8 के अगले दो मैचों में अभिषेक या तिलक की जगह संजू सैमसन एक बार फिर से प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हो सकते हैं। टीम में विशेषज्ञ बैकअप बल्लेबाजों की कमी भी चिंता का विषय है। दाएं हाथ के बल्लेबाज को शामिल कर टॉप ऑर्डर की एकरूपता तोड़ी जा सकती है। रिंकू सिंह के संदर्भ में टेन डेशकाटे ने कहा, ‘नंबर सात-आठ पर बल्लेबाजी करना बेहद मुश्किल होता है। रिंकू को ज्यादा मौके नहीं मिले हैं, लेकिन अब समय प्रदर्शन का है। नेट्स में लय की बात करने का कोई फायदा नहीं।’

अभिषेक और तिलक पर खास नजर

टेन डेशकाटे ने अभिषेक की तैयारी पर भी बात की। उन्होंने कहा, ‘मैं अभिषेक के लिए बहाने नहीं बनाऊंगा, लेकिन फूड पॉइजनिंग ने उनकी तैयारी पर असर डाला। जब आप तीन बार शून्य पर आउट होते हैं, तो दबाव बढ़ना स्वाभाविक है।’ उन्होंने कहा कि तिलक वर्मा भी उम्मीद के मुताबिक रन नहीं बना पा रहे हैं। हालांकि, कोटक का मानना है कि ज्यादा सलाह देना उल्टा असर कर सकता है। कोटक ने कहा, ‘अभिषेक के लिए बहुत ज्यादा जानकारी अपने दिमाग में भरने के बजाय दिमाग साफ रखना बेहतर है। दो दिन में ज्यादा बदलाव संभव नहीं। अभी उसे गेंद देखनी है और अपनी पारी की बेहतर योजना बनानी है।’

बदलाव तय या भरोसा बरकरार?

अब टीम इंडिया के सामने जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ ‘करो या मरो’ के मुकाबले हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या टीम मैनेजमेंट संयोजन में बदलाव करेगा या खिलाड़ियों पर भरोसा बनाए रखेगा। सुपर-8 की हार ने टीम इंडिया को आत्ममंथन के दौर में ला खड़ा किया है। बल्लेबाजों की खराब फॉर्म और संतुलन की कमी को देखते हुए बदलाव की संभावना प्रबल है। हालांकि अंतिम फैसला मैच से ठीक पहले लिया जाएगा। आने वाले दो मुकाबले भारत के लिए परीक्षा की घड़ी साबित होंगे।
भारतीय टीम: ईशान किशन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव (कप्तान), हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, वॉशिंगटन सुंदर, अर्शदीप सिंह, वरुण चक्रवर्ती, जसप्रीत बुमराह, संजू सैमसन, मोहम्मद सिराज, कुलदीप यादव, अक्षर पटेल।

पोरबंदर तट पर ईरानी नाव पकड़ी

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पोरबंदर।भारतीय तटरक्षक बल ने एक बड़े समुद्री अभियान के तहत गुजरात के पोरबंदर के पास एक संदिग्ध विदेशी नाव को रोककर जांच की। इस नाव पर ईरानी चालक दल सवार था और इसमें तस्करी कर लाई जा रही विदेशी ब्रांड की बड़ी मात्रा में सिगरेट बरामद की गई। सिगरेट की बाजार कीमत 5 करोड़ के आसपास आंकी गई है। यह कार्रवाई कुछ दिन पहले हुए एक अन्य बड़े समुद्री अभियान के बाद हुई है। 17 फरवरी की रात भारतीय तटरक्षक बल ने गुजरात एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड के साथ मिलकर खुफिया सूचना के आधार पर एक संयुक्त ऑपरेशन चलाया था। नाव को आगे की जांच के लिए पोरबंदर लाया गया है।
तटरक्षक बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि 21 फरवरी को भारतीय तटरक्षक जहाज ने द्वारका से लगभग 115 समुद्री मील पश्चिम में भारतीय क्षेत्र के भीतर एक संदिग्ध विदेशी नाव को रोका था। जांच के दौरान नाव की पहचान ‘अल मुख्तार’ के रूप में हुई, जिस पर चार ईरानी नागरिक चालक दल के रूप में मौजूद थे। तलाशी लेने पर नाव के होल्ड में छिपाकर रखे गए 200 कार्टन बरामद किए गए, जिनमें करीब एक लाख पैकेट विदेशी ब्रांड की सिगरेट छिपाई गई थीं। पकड़ी गई नाव और चालक दल को हिरासत में लेकर आगे की पूछताछ के लिए पोरबंदर लाया जा रहा है, जहां अन्य एजेंसियों के साथ संयुक्त जांच की जाएगी।

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हर 20 मिनट की सच्चाई पर चोट…Anubhav Sinha की स्टोरी ने हिला दिया

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Assi Movie Review एक ऐसी फिल्म पर केंद्रित है, जो समाज के सबसे दर्दनाक सच को पर्दे पर लाती है। आंकड़े बताते हैं कि देश में हर 20 मिनट पर एक रेप होता है और 24 घंटे में यह संख्या 80 तक पहुंच जाती है। यही कड़वी हकीकत फिल्म ‘अस्सी’ की नींव है। यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि समाज के सामने रखा गया आईना है।

कहानी स्कूल टीचर परिमा (कनी कुश्रुति) की है, जिनका अपहरण कर सामूहिक दुष्कर्म किया जाता है। इसके बाद शुरू होती है इंसाफ की लंबी और कठिन लड़ाई। उनके साथ खड़ी होती हैं वकील रावी, जिसका किरदार तापसी पन्नू ने निभाया है। रावी का तेवर, कोर्टरूम में उनकी दलीलें और अन्याय के खिलाफ उनका गुस्सा कहानी को मजबूती देता है। परिमा के पति के रोल में मोहम्मद ज़ीशान अय्यूब संवेदनशील अभिनय से दिल छू लेते हैं। वहीं कुमुद मिश्रा का किरदार गहरा असर छोड़ता है।

फिल्म सिर्फ अपराध नहीं दिखाती, बल्कि न्याय व्यवस्था, समाज की सोच और बच्चों तक में फैलती संवेदनहीनता पर सवाल उठाती है। निर्देशक अनुभव सिन्हा ने रॉ कैमरा एंगल और संतुलित नैरेटिव के जरिए कहानी को वास्तविक बनाए रखा है। यहां कोई फिल्मी हीरो नहीं, बल्कि कहानी खुद नायक बनकर सामने आती है।

 

 राज्यसभा चुनाव में तेलंगाना से कांग्रेस को लग सकता है झटका…….केसीआर एक सीट पर दावा करने की तैयारी में 

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नई दिल्ली। देश की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने वाले हैं। बिहार में 5 सीटों पर चुनाव में एनडीए की जीत तय मानी जा रही है। वहीं तेलंगाना में भी 2 सीटों पर वोटिंग होनी है। इन दो सीटों पर कांग्रेस की जीत अब तक तय मानी जा रही थी, लेकिन अब खेल बदलता नाराज आ रहा है। इस राज्य में भाजपा इस स्थिति में नहीं है कि कांग्रेस को चुनौती दे, लेकिन भारत राष्ट्र समिति के नेता के. चंद्रशेखर राव ने एक उम्मीदवार खड़ा करने का फैसला लिया है। इन खबरों से कांग्रेस नेतृत्व को झटका लगाना लाजिमी है, जो पहले ही ज्यादातर राज्यों में सीटें जीतने की स्थिति में नहीं है। अप्रैल में दो सीटें खाली हो रही हैं। अब तक कांग्रेस तेलंगाना में मानकर चल रही थी कि इन दोनों सीटों पर आसानी से जीत मिल जाएगी।
लेकिन केसीआर ने जिस तरह से राज्य में राज्यसभा चुनाव को लेकर समीकरण बदलने की कोशिश की है, इससे कांग्रेस टेंशन में आ गई है। अब कांग्रेस के लिए स्पष्ट हो गया होगा कि मुकाबला गणित, गठबंधन और अन्य तमाम चीजों से तय होगा। मीडिया में खबरें हैं कि केसीआर किसी चर्चित व्यक्ति को उतारना चाहते हैं। विधानसभा रिकॉर्ड्स के अनुसार केसीआर के पास कुल 37 विधायक हैं। इसमें से 10 विधायक हैं, जो कांग्रेस के पास जा चुके हैं और उनकी अयोग्यता को लेकर मामला चल रहा है। इस मामले में 8 विधायकों पर  बीआरएस की आपत्ति को स्पीकर ने खारिज किया है। वहीं दो पर अभी ट्राइब्यूनल में मामला लंबित है।
यदि एक राज्यसभा सीट जीतनी है, तब किसी भी दल को 41 विधायकों की जरूरत है। कुल 37 विधायकों का दावा करने वाली बीआरएस के साथ यदि उसके अपने सभी विधायक बने रहते हैं, तब बीआरएस को अलग से सिर्फ 4 विधायकों की ही जरूरत होगी। फिलहाल खबर है कि बीआरएस की ओर से उन दलों से वार्ता हो रही है, जिनके समर्थन से इस आंकड़े को हासिल कर सकते है। राज्य में कांग्रेस के पास 66 विधायक हैं। इसके अलावा सीपीआई के भी एक विधायक का कांग्रेस को समर्थन है। अब तक वह मान रही थी कि बीआरएस मुकाबले से दूर रहेगी। लेकिन जब एक राज्यसभा सीट हासिल करने की स्थिति केसीआर को दिखी, तब उन्होंने मुकाबले में उतरना ही ठीक समझा है।
फिलहाल पूरा मामला इस बात पर अटक गया है कि आखिर वे 10 विधायक किसके साथ जाते हैं, जो बीआरएस से बागी हुए हैं। इसके अलावा भाजपा और ओवीसी के एआईएमआईएम पर भी नजरें टिक गई हैं। राज्य में ओवैसी के पास कुल 7 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास भी 8 का समर्थन है। इस तरह से मुकाबला काफी पेंचीदा हो सकता है। साफ है कि एक सीट भले कांग्रेस आसानी से पा जाए, लेकिन दूसरी सीट जीतना टेढ़ी खीर बन सकता है। दरअसल कांग्रेस की आंतरिक कलह भी उसके लिए हालात मुश्किल कर रही है। दो सीटों में से एक पर अभिषेक मनु सिंघवी को फिर से भेजा जा सकता है। अब रही बात दूसरी सीट की, तब उसके लिए सीएम के सलाहकार वी. नरेंद्र रेड्डी का नाम भी चर्चा में है। इसके अलावा रिटायर्ड जज जस्टिस सुदर्शन रेड्डी भी मुकाबले में हैं।
 

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इन सात वजहों से हारा भारत, टीम मैनेजमेंट सवालों में

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भारत को टी20 विश्व कप 2026 के सुपर-8 चरण के अपने पहले मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 76 रन की करारी हार का सामना करना पड़ा। 22 फरवरी 2026 को अहमदाबाद में खेले गए इस मैच में भारतीय टीम 188 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए बिखर गई। बल्लेबाजी में खराब शॉट चयन, साझेदारियों की कमी और गेंदबाजी में मध्य ओवरों की कमजोरी हार के बड़े कारण बने। भारतीय टीम 18.5 ओवर में 111 रन पर सिमट गई। आइए जानते हैं इस हार के पांच मुख्य कारण…

1. टॉप ऑर्डर का पूरी तरह फ्लॉप होना

भारत की हार की शुरुआत शीर्ष क्रम की नाकामी से हुई। सलामी बल्लेबाज ईशान बिना खाता खोले आउट हो गए, जिससे टीम पर शुरुआती दबाव आ गया। इसके बाद तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा ने अच्छी शुरुआत तो की, लेकिन उसे बड़ी पारी में नहीं बदल सके। पावरप्ले में विकेट गिरने से रन गति भी प्रभावित हुई और मध्यक्रम पर अतिरिक्त दबाव बन गया। शीर्ष क्रम दक्षिण अफ्रीका का भी फेल हुआ था और टीम ने 20 रन पर तीन विकेट गंवा दिए थे, लेकिन मध्यक्रम फॉर्म में होने की वजह से दक्षिण अफ्रीका ने अच्छा स्कोर खड़ा किया। वहीं, भारतीय टीम लगातार विकेट गंवाती चली गई। 51 रन पर पांच विकेट गंवा दिए थे। शिवम दुबे को छोड़कर कोई भी नहीं चला।

2. साझेदारियों का अभाव और जल्दबाजी

188 रनों के लक्ष्य का पीछा करते समय धैर्य की आवश्यकता थी, लेकिन भारतीय बल्लेबाज आक्रामकता दिखाने के प्रयास में लगातार गलत शॉट खेलते रहे। कोई भी जोड़ी लंबी साझेदारी नहीं बना सकी। मध्यक्रम के बल्लेबाजों ने परिस्थिति के अनुसार खेल दिखाने के बजाय जोखिम भरे शॉट खेले, जिससे रन चेज कभी पटरी पर नहीं आ पाया। बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय साझेदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है, जिसकी कमी साफ नजर आई। भारत के 10 विकेट कैच आउट से गिरे। कोई भी बोल्ड या रन आउट नहीं हुआ। यह दिखाता है कि खिलाड़ियों ने विकेट तोहफे के रूप में दिए।

3. स्पिन गेंदबाजी की नाकामी

दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ तेज गेंदबाज अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह ने अपना काम कर दिया था। 20 रन पर द. अफ्रीका के तीन विकेट गिर चुके थे। इसके बाद भारतीय स्पिन आक्रमण से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे। वरुण चक्रवर्ती ने अपने चार ओवरों में 47 रन (सिर्फ एक विकेट लिए) खर्च कर दिए, जिससे दक्षिण अफ्रीका के मध्यक्रम को खुलकर खेलने का मौका मिला। खासकर डेविड मिलर और डेवाल्ड ब्रेविस ने संयम और आक्रामकता का संतुलन दिखाते हुए पारी को संभाला और टीम को मजबूत स्कोर तक पहुंचाया। मध्य ओवरों में विकेट नहीं मिलना भारत के लिए महंगा साबित हुआ। चौथे ओवर में तीसरा विकेट गिरने के बाद दक्षिण अफ्रीका का चौथा झटका 13वें ओवर में जाकर लगा। वॉशिंगटन सुंदर ने सिर्फ दो ओवर गेंदबाजी की।

4. टीम चयन पर सवाल

इस मुकाबले में टीम मैनेजमेंट ने बहुत बड़ी गलती करते हुए उपकप्तान अक्षर पटेल को ही बेंच पर बैठा दिया। उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका देने का फैसला उल्टा पड़ गया। सुंदर अपने दो ओवरों में प्रभाव नहीं छोड़ सके और रन रोकने में नाकाम रहे। अक्षर की अनुपस्थिति से टीम को न तो अतिरिक्त बल्लेबाजी गहराई मिली और न ही कसी हुई गेंदबाजी। बल्ले से सुंदर सिर्फ 11 रन का योगदान दे सके। सुंदर का चयन आलोचकों के निशाने पर है। भारतीय टीम जहां इस मैच में चार तेज गेंदबाज और दो स्पिनर के साथ उतरी और दो स्पिनरों से ही गेंदबाजी कराई और स्पिनर्स सिर्फ एक विकेट ले सके, वहीं दक्षिण अफ्रीका ने भी दो ही स्पिनरों से गेंदबाजी कराई। एडेन मार्करम ने एक ओवर में पांच रन देकर एक विकेट लिया और केशव महाराज ने तीन ओवर में 24 रन देकर तीन विकेट झटके। यहीं मैच पलट गया। महाराज के अलावा यानसेन ने चार विकेट झटके।

5. डेथ ओवरों में महंगे साबित हुए गेंदबाज

मैच के अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों ने लय खो दी। विशेषकर हार्दिक पांड्या के एक ओवर में 20 रन जाने से दक्षिण अफ्रीका का स्कोर तेजी से बढ़ा। शुरुआती ओवरों में दबाव बनाने के बाद भी भारतीय गेंदबाज उस दबाव को अंत तक बरकरार नहीं रख सके। डेथ ओवरों में सटीक यॉर्कर और विविधता की कमी साफ दिखाई दी। मध्यक्रम में जहां ब्रेविस और मिलर ने मैच पलटा, तो आखिर में स्टब्स ने तूफानी पारी खेली। ब्रेविस ने 29 गेंद में तीन चौके और तीन छक्के की मदद से 45 रन, मिलर ने 35 गेंद में सात चौके और तीन छक्के की मदद से 63 रन बनाए। स्टब्स 24 गेंद में एक चौका और तीन छक्कों की मदद से 44 रन बनाकर नाबाद रहे। भारत की ओर से अर्शदीप ने दो और बुमराह ने तीन विकेट लिए। वरुण के अलावा दुबे को एक विकेट मिला।

6. ओपनर्स नहीं चले तो पूरी टीम फेल

टीम इंडिया के लिए ओपनिंग जोड़ी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में सबसे बड़ा सिरदर्द बन गई है। रविवार को नरेंद्र मोदी क्रिकेट स्टेडियम में द. अफ्रीका के खिलाफ खेले जा रहे मुकाबले में भी भारत की सलामी जोड़ी ने फैंस को निराश किया। भारत को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के पांच मुकाबलों में सलामी जोड़ी ने महज 34 रन दिलाए हैं। अभिषेक का बल्ला पूरी तरह खामोश है, जबकि ईशान जिस मैच में नहीं चले तो मध्यक्रम विफल हो जाता है।

7. इतने बाएं हाथ के बल्लेबाजों का होना

कुछ क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारतीय बल्लेबाजी में काफी बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं और इसी वजह से विपक्षी टीम इसका फायदा उठा सकती है। मुकाबले भारतीय सरजमीं पर हो रहे हैं, जहां स्पिन कुछ हद तक असरदार होती है। बाएं हाथ के बल्लेबाजों के सामने ऑफ स्पिनर्स कारगर साबित होते हैं और ऐसा ही हुआ भी। अगर पिच स्पिन को थोड़ी भी मदद दे रही है तो भारतीय बल्लेबाजों के लिए मुश्किल हो सकता है। मार्करम ने ईशान को पहले ही ओवर में आउट कर दबाव बना दिया। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय ऑफस्पिनर सुंदर कोई इम्पैक्ट डालने में विफल रहे।भारत की यह हार केवल एक खराब दिन का परिणाम नहीं थी, बल्कि सामूहिक विफलताओं का नतीजा थी। टॉप ऑर्डर की कमजोरी, साझेदारी का अभाव, स्पिन गेंदबाजी की असफलता और रणनीतिक गलतियां मिलकर भारी पड़ीं। सुपर-8 जैसे अहम चरण में ऐसी गलतियों की गुंजाइश कम होती है। आगे बढ़ने के लिए टीम को संतुलित संयम और बेहतर रणनीति की जरूरत होगी। भारत को अब 26 फरवरी को जिम्बाब्वे से और एक मार्च को वेस्टइंडीज से खेलना है। इसमें से एक भी हार भारत के सफर को सुपर-8 राउंड में ही समाप्त कर देगी।

 किश्तवाड़ में जैश के 2 आतंकी ढेर

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कश्मीर।जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चतरू इलाके में सुबह से सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। आधिकारियों ने 2 आतंकियों के ढेर होने की पुष्टि की है। सुरक्षाबलों ने उस ठिकाने को ही ब्लास्ट कर दिया, जहां आतंकी छिपे हुए थे। एनकाउंटर अभी भी जारी है।
अधिकारियों ने कहा कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 2 से 3 आतंकियों के यहां पर छिपे होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। तभी आतंकियों ने फायरिंग कर दी। इससे पहले 4 फरवरी को भी चतरू में ही सुरक्षाबलों ने जैश के ही एक आतंकी को मार गिराया था। वहीं, उधमपुर जिले में भी गुफा में छिपे जैश के 2 आतंकियों को ग्रेनेड विस्फोट में मार गिराया गया था।

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57 की उम्र में भी ‘मैंने प्यार किया’ वाली सादगी बरकरार

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Bhagyashree Birthday के मौके पर एक बार फिर 1989 की सुपरहिट फिल्म मैंने प्यार किया की यादें ताजा हो जाती हैं। इसी फिल्म से सलमान खान के साथ रोमांटिक जोड़ी बनाकर भाग्यश्री ने सुमन के किरदार में लाखों दिल जीते थे। पहली ही फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और वह रातोंरात स्टार बन गईं।

23 फरवरी 1969 को महाराष्ट्र के सांगली में जन्मीं भाग्यश्री शाही परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पिता विजय सिंहराव माधवराव पटवर्धन और मां राजलक्ष्मी पटवर्धन हैं। डेब्यू के दौरान ही वह हिमालय दासानी के साथ रिश्ते में थीं और उसी साल शादी कर ली। शादी के बाद उन्होंने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली और परिवार को प्राथमिकता दी।

भाग्यश्री के दो बच्चे हैं—अवंतिका दासानी और अभिमन्यु दासानी—जो अब एक्टिंग की दुनिया में कदम रख चुके हैं। लंबे ब्रेक के बाद उन्होंने कन्नड़ सिनेमा से वापसी की और हाल के वर्षों में ‘Radhe Shyam’, ‘Thalaivii’ और ‘Kisi Ka Bhai Kisi Ki Jaan’ जैसी फिल्मों में नजर आईं।

 

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क्या सैमसन की प्लेइंग-11 में होने वाली है वापसी? इन तीन बल्लेबाजों में से किसका कटेगा पत्ता

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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारतीय टीम को मिली हार के बाद टीम में बदलाव की मांग जोरों पर उठी है। भारत का टी20 विश्व कप में चला रहा जीत का सिलसिला अब टूट गया है। भारत के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे स्टार बल्लेबाजों का नहीं चल पाना है। ग्रुप स्टेज में अजेय रही टीम इंडिया को इस हार ने सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि क्या अब कड़े फैसले लेने का समय आ गया है?

सेमीफाइनल की राह हुई मुश्किल

दक्षिण अफ्रीका से मिली हार के बाद भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल के रास्ते मुश्किल हो गए हैं। सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाने के लिए टीम इंडिया को जिम्बाब्वे और वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने दो मुकाबले किसी भी कीमत पर बड़े अंतर से जीतने होंगे। इसके लिए टीम अपनी प्लेइंग इलेवन में बड़ा बदलाव कर सकती है। संजू सैमसन को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जा सकता है। लेकिन सवाल तो यही है कि सैमसन को किसकी जगह टीम को मौका दिया जाएगा।

टीम प्रबंधन लेगा कड़े फैसले?

मौजूदा प्लेइंग इलेवन के तीन बल्लेबाज, अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा और रिंकू सिंह खराब फॉर्म में चल रहे हैं। विश्व कप में लगातार मौका मिलने के बाद भी इन बल्लेबाजों के बल्ले से बड़ी पारी नहीं आई है इसलिए जिम्बाब्वे के खिलाफ अगले मैच में इन तीनों में से किसी एक को बाहर बैठना पड़ सकता है और संजू सैमसन की प्लेइंग इलेवन में एंट्री हो सकती है। संजू के आने से प्लेइंग इलेवन में एक दाएं हाथ का बल्लेबाज हो जाएगा। यह टीम के संतुलन के लिए भी जरूरी है। 

अभिषेक, तिलक और रिंकू का प्रदर्शन

अभिषेक शर्मा ने लगातार तीन पारियों में शून्य पर आउट होने के बाद दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 15 रन बनाए थे। तिलक लगातार पांच पारियों में 25, 25, 25, 31 और 1 रन बना सके हैं। वहीं, रिंकू सिंह का बल्ला भी फ्लॉप रहा है। रिंकू पिछली 5 पारियों में 6, 1, 11, 6, और 0 का स्कोर कर सके हैं। इन तीनों में किसी एक की जगह संजू की टीम में एंट्री हो सकती है। संभवत: उन्हें अभिषेक की जगह टीम में मौका दिया जाए। संजू पारी की शुरुआत के साथ ही मध्यक्रम में भी खेल सकते हैं। सैमसन ने ग्रुप स्टेज में नामीबिया के खिलाफ खेले एकमात्र मैच में आठ गेंदों पर 22 रन बनाए थे।

कश्मीर के मौसम में बड़ा उलटफेर………………….किसान परेशान

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बडगाम। साल 2026 में देश के कई हिस्सों में मौसम में असामयिक बदलाव देखने को मिल रहा हैं, और कश्मीर भी इस बदलाव से अछूता नहीं है। घाटी में फरवरी के पहले हफ्ते में हुई अच्छी खासी बर्फबारी के बाद अचानक मौसम में बदलाव आया है। जहां कुछ ही दिन पहले तक हर जगह बर्फ की सफेद चादर बिछी थी, अब वहीं पेड़ फूलों से सजने लगे हैं। खासकर बादाम के फूल सामान्य समय से करीब दो हफ्ते पहले ही खिल गए हैं। आमतौर पर ये फूल मार्च के पहले हफ्ते में खिलते हैं और सर्दी से बसंत के आने का संकेत देते हैं, लेकिन इस बार फसल के संकेत पहले ही दिखाई देने लेगा है। 
बादाम के फूल बसंत की पहली निशानी माने जाते हैं। इस बार फूलों का समय से पहले खिलना किसानों और मौसम विशेषज्ञों दोनों के लिए चिंता का कारण बना है। विशेषज्ञों का कहना है कि सर्दियों में तापमान अधिक रहने और बर्फ कम गिरने की वजह से फूल जल्दी खिले हैं। हालांकि यह दृश्य देखने में बहुत खूबसूरत है, लेकिन किसानों के लिए खतरे का संकेत भी है। यदि अचानक ठंड या पाला आए, तब नाजुक फूलों को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे बाद में फलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। घाटी में यह असामयिक मौसम परिवर्तन यह दर्शाता है कि हिमालयी क्षेत्र में मौसम का पैटर्न बदल रहा है। समय से पहले खिलने वाले फूल न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद दिलाते हैं, बल्कि यह भी याद दिलाते हैं कि जलवायु में बदलाव कितनी तेजी से हो सकता है। कश्मीर के अन्य मेवों के पेड़ों में भी, जैसे चेरी ब्लॉसम, फूल मार्च के पहले हफ्ते में खिलते हैं, लेकिन इस बार फरवरी के तीसरे हफ्ते में ही उनकी बहार नजर आने लगी।
इस असामयिक खिलने की प्रक्रिया ने घाटी में लोगों और पर्यटकों को आकर्षित किया है। लोग इन गुलाबी और सफेद फूलों की रंगीन चादर को देखने पहुंच रहे हैं, लेकिन किसान चिंतित हैं कि मौसम में अचानक बदलाव फसल को नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बाद समय से पहले आई यह बहार एक तरफ खूबसूरत है, लेकिन दूसरी तरफ भविष्य की पैदावार पर संभावित असर के लिए चेतावनी भी देती है। कुल मिलाकर, कश्मीर का यह मौसम परिवर्तन प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ किसानों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए भी चिंता का विषय बन गया है।

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News Desk