क्या किसान का बेटा बदलेगा जिम्बाब्वे की तकदीर? IPL खेलना सपना

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जब जिम्बाब्वे क्रिकेट अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था, तब देश को एक नए चेहरे, एक नई उम्मीद की तलाश थी। बड़े नाम विदा ले चुके थे, सपने बिखर चुके थे और भरोसा डगमगा रहा था। ऐसे समय में हरारे के एक साधारण घर से उठी गेंद-बल्ले की आवाज अब विश्व मंच तक गूंज रही है। 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट आज जिम्बाब्वे की नई सुबह का प्रतीक बन चुके हैं। वह जिम्बाब्वे क्रिकेट के टूटते सपनों के बीच एक नई किरण बनकर उभरे हैं। वह न तो किसी अकादमी से उभरे, न किसी बड़े वादे से जाने गए, बल्कि घर के पिछले हिस्से में लगे छोटे से नेट पर अभ्यास कर विश्व मंच तक पहुंचे। उस नेट में वह और उनके भाई घंटों क्रिकेट खेलते थे, बिना यह सोचे कि एक दिन वह देश की नई उम्मीद बन जाएंगे।

क्यों चर्चा में हैं ब्रायन बेनेट?

जब से टी20 विश्वकप टूर्नामेंट (2007 से) शुरू हुआ है, कभी ऐसा नहीं हुआ कि कागज पर कमजोर दिखने वाली टीम का बल्लेबाज टूर्नामेंट के शीर्ष पांच सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में शामिल हो। पर ब्रायन बेनेट ने यह कर दिखाया।

वह टूर्नामेंट के इस संस्करण में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने पांच मैचों की पांच पारियों में 277 की औसत से 277 रन बनाए। इनमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट 135.78 का रहा।

इस दौरान उन्होंने 31 चौके और छह छक्के लगाए। ये सभी छह छक्के उन्होंने गुरुवार को भारत के खिलाफ पारी के दौरान लगाए हैं। भारत के खिलाफ उन्होंने 59 गेंद में आठ चौके और छक्के की मदद से और 164.41 के स्ट्राइक रेट से नाबाद 97 रन की पारी खेली।

22 साल का यह लड़का ओपनिंग करने उतरा और नॉटआउट रहा। यह पहली बार नहीं था कि ब्रायन ओपनिंग करने उतरे और आखिरी तक नॉटआउट रहे। इस विश्वकप में उनकी पांच पारियों में चार बार ऐसा हुआ, जब वह नॉटआउट पवेलियन लौटे।

वह एक बार आउट सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए। 22 साल में इतनी मैच्योरिटी शायद ही किसी बल्लेबाज में दिखी हो। उनकी बाकी पारियों में एक भी छक्का नहीं था, लेकिन भारत की मजबूत गेंदबाजी लाइन अप के सामने उन्होंने यह कमी भी पूरी कर दी।

वह शतक से चूक गए, लेकिन पूरी दुनिया के फैंस के दिल जीत गए। इस विश्वकप में ब्रायन की पारियां- नाबाद 48 रन, नाबाद 64 रन, नाबाद 63 रन, पांच रन और नाबाद 97 रन की रही हैं।

ब्रायन बेनेट ने कैसे थामा बल्ला?

ब्रायन बेनेट कभी टीवी के सामने बैठकर कवर ड्राइव गिनने वाला बच्चों में नहीं गिने जाते थे। न ही दीवारों पर क्रिकेटरों के पोस्टर लगाने वालों में रहे, न ही उन्होंने बचपन में कोई बड़ी घोषणा कि मैं देश के लिए खेलूंगा, ये करूंगा, वो करूंगा। उनके लिए क्रिकेट की शुरुआत घर के पिछले हिस्से में लगे एक छोटे से नेट से हुई, जहां सामने उनके जुड़वां भाई खड़े होते थे और गेंद-बल्ले की आवाज घंटों गूंजती रहती थी। आज वही 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट जिम्बाब्वे क्रिकेट की नई पहचान बन चुके हैं।

टी20 विश्वकप 2026 में पांच में से चार पारियों
में नॉटआउट रहे बेनेट

खिलाफ पारियां गेंदबाजी मैदान
भारत 97* 0/16 चेन्नई
वेस्टइंडीज 5 मुंबई
श्रीलंका 63* कोलंबो
ऑस्ट्रेलिया 64* कोलंबो
ओमान 48* 0/18 कोलंबो
नोट: (*) का मतलब नॉटआउट

साधारण शुरुआत, असाधारण सफर

हंबनटोटा में ट्रेनिंग कैंप के दौरान बेनेट ने कहा, ‘मैं बचपन में क्रिकेट को ज्यादा फॉलो नहीं करता था। स्कूल में अपने भाइयों और पिताजी के साथ खेलता था। अंडर-19 के आसपास आकर ही मैंने जिम्बाब्वे क्रिकेट को गंभीरता से फॉलो करना शुरू किया।’ उनके पिता, जो एक ब्लूबेरी किसान हैं, खुद क्लब क्रिकेट खेल चुके हैं और यंग मशोनालैंड के लिए कुछ फर्स्ट क्लास मैच भी खेले। बेनेट बताते हैं, ‘उन्होंने एंड्रयू वॉलर, डेव हॉटन, एंडी फ्लावर, ग्रांट फ्लावर जैसे खिलाड़ियों के साथ खेला था। हीथ स्ट्रीक और हेनरी ओलोंगा के किस्से सुनाते थे।’ घर के पिछले हिस्से में लगा नेट ही उनका पहला कोच था। ब्रायन बताते हैं, ‘मेरा एक जुड़वां भाई है। पिताजी ने हमारे लिए घर पर नेट लगाया था। स्कूल के बाद और छुट्टियों में हम घंटों खेलते थे, एक बल्लेबाजी करता, दूसरा गेंदबाजी।’

बहुमुखी प्रतिभा वाले खिलाड़ी हैं ब्रायन

क्रिकेट के अलावा बेनेट ने हॉकी, स्क्वैश और रग्बी भी खेला। स्कूल में दो खेल जरूरी थे, गर्मियों में क्रिकेट और सर्दियों में हॉकी। यही अनुभव उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती की नींव बना। कोविड के कारण स्कूल के आखिरी दो साल प्रभावित हुए, तो 2022 में वह दक्षिण अफ्रीका के किंग्सवुड कॉलेज चले गए, ताकि ज्यादा मैच खेल सकें। ब्रायन ने बताया, ‘कोविड में खेल नहीं हो पा रहे थे, इसलिए वहां जाकर फिर से लय मिली।’

ब्रायन बेनेट के बल्लेबाजी आंकड़े

प्रारूप मैच रन सर्वोच्च
स्कोर
औसत स्ट्राइक रेट शतक अर्धशतक
टेस्ट 11 509 139 29.94 71.48 2 2
वनडे 11 348 169 31.63 96.13 1 0
टी20I 57 1873 111 36.72 143.96 1 12

अंडर-19 विश्व कप से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

2022 का अंडर-19 विश्व कप उनके करियर का भावनात्मक मोड़ रहा। वह बताते हैं, ‘पाकिस्तान के खिलाफ 83 रन और वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने जुड़वां भाई के साथ 100 रन की साझेदारी मेरी सबसे बड़ी यादें हैं।’ दिसंबर 2023 में टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बाद उन्होंने अगले 12 महीनों में तीनों फॉर्मेट में शतक जड़ दिए। इस उपलब्धि के साथ वह ब्रेंडन टेलर और सिकंदर रजा के बाद ऐसा करने वाले तीसरे जिम्बाब्वे खिलाड़ी बने।

ट्रेंट ब्रिज की यादगार पारी

इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में 139 रन की पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। ट्रेंट ब्रिज पर दो दशक बाद जिम्बाब्वे का टेस्ट खेलना ऐतिहासिक था। ब्रायन कहते हैं, ‘वह अद्भुत अनुभव था। भरे हुए स्टेडियम में खेलना, हर गेंद को प्रोसेस के साथ खेलना, वह बहुत खास पल था।’ तकनीक के सवाल पर ब्रायन कहते हैं, ‘मैं चीजों को सरल रखता हूं। गेंद को देखो, मजबूत पोजिशन में रहो, सिर स्थिर रखो और देर से खेलो। ज्यादा सोचता नहीं हूं।’ टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम साफ झलकता है। वह कहते हैं, ‘रेड बॉल क्रिकेट मुझे पसंद है। इसमें समय मिलता है, मानसिक और शारीरिक दोनों परीक्षा होती है।’

ब्रायन बेनेट के गेंदबाजी आंकड़े

प्रारूप मैच विकेट सर्वश्रेष्ठ
गेंदबाजी
इकोनॉमी
टेस्ट 11 6 5/95 3.80
वनडे 11 0 10.20
टी20I 57 6 2/20 8.35

गेंदबाजी और नेतृत्व की जिम्मेदारी

बल्लेबाजी के अलावा वे घरेलू लीग में नियमित गेंदबाजी भी करते हैं। ब्रायन बताते हैं, ‘मैं अपनी गेंदबाजी पर भी काम करता हूं। सब कुछ बल्लेबाजी पर नहीं छोड़ रहा।’ जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें टेस्ट और वनडे में उपकप्तान भी बनाया है। इस फैसले पर ब्रायन का कहना है, ‘यह बोर्ड का फैसला था। मैं सीखना चाहता हूं और सीनियर खिलाड़ियों से फायदा उठाना चाहता हूं।’

खेतों से आईपीएल तक का सपना

मैदान के बाहर बेनेट सादगी पसंद हैं। हरारे के पास रूवा में उनके परिवार का फार्म है, जहां वे समय बिताते हैं। गोल्फ खेलना उनका शौक है। उनके आदर्श एबी डिविलियर्स और विराट कोहली हैं। आईपीएल खेलना उनका सपना है। ब्रायन बताते हैं, ‘मैं हर साल आईपीएल देखता हूं। मेरी पसंदीदा टीम आरसीबी है। आईपीएल खेलना मेरी बकेट लिस्ट में है।’

जिम्बाब्वे की नई उम्मीद

टी20 विश्वकप 2026 जिम्बाब्वे के लिए नए युग की शुरुआत है। पिछली दो वनडे विश्व कप और 2024 टी20 विश्व कप में जगह न बना पाने के बाद अब टीम वापसी की कोशिश में है। बेनेट का लक्ष्य साफ है और वह बताते हैं, ‘मैं जिम्बाब्वे को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाना चाहता हूं। बड़े टीमों को चुनौती देना और हर विश्व कप में खेलना चाहता हूं।’

भारतीय नौसेना को मिला नया दम, युद्धपोत ‘अंजदीप’ से बढ़ी ताकत

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भारतीय नौसेना की समंदर में ताकत बढ़ चुकी है। नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिल गया है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत 27 फरवरी को चेन्नई में नौसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी शामिल हुए। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है।

किस पर रखा गया युद्धपोत का नाम अंजदीप?

अंजदीप नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बना है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता को बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। अंजदीप नौसेना के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था।77 मीटर लंबे इस जहाज में एक हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। नौसेना ने कहा कि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित, आईएनएस अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।पनडुब्बी रोधी युद्ध की भूमिका के अलावा यह युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने के लिए भी सुसज्जित है।

मुख्य विशेषताएं

  • रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसे डॉल्फिन हंटर के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • करीब 77 मीटर लंबे इस श्रेणी के युद्धपोत वॉटरजेट से चलने वाले नौसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत हैं।
  • इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी में काम करने वाला सोनार सिस्टम लगाया गया है।
  • इससे समुद्र के काफी अंदर तक मौजूद दुश्मन के खतरों का पता लगाने और उनको नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • यह जहाज नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को भी मजबूत करेगा।
     
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News Desk

क्यों शादी से डरती हैं डेजी शाह? करवाए अपने एग्स फ्रीज, कहा- परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं

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डेजी शाह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शादी को डरावना बताया है और उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं है। साथ ही मां बनने को लेकर भी उन्होंने बड़ा फैसला लिया है। 

आजकल शादी डरावनी लगती है

फिल्मीग्यान को दिए एक इंटरव्यू में, ‘जय हो’ की एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने अपने एग्स फ्रीज करवा लिए हैं, ताकि भविष्य में जब भी वे चाहें, वे मां बन सकें। उनका कहना है कि वे अपनी जिंदगी के फैसले अपनी शर्तों पर लेना चाहती हैं।डेजी ने माना कि आजकल रिश्तों से जुड़ी खबरें उन्हें परेशान करती हैं। उन्होंने कहा, ‘हर दिन कुछ ना कुछ हो रहा है, कपल्स के ब्रेकअप या वो ‘ब्लू ड्रम’ जैसे चौंकाने वाले मामले। ये सब बहुत डरावना है।’हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने शादी को लेकर ज्यादा सोचा नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह शादी करेंगी, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह फैसला उन्होंने ‘ऊपरवाले पर छोड़ दिया है।’

क्या चुनेंगी डेजी…प्यार या पैसा?

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे ‘प्यार’ और ‘पैसा’ में से एक चुनने को कहा गया, तो 41 साल की एक्ट्रेस ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें दोनों चाहिए। उनका मानना है कि रिश्ते में इमोशनल कनेक्शन के साथ-साथ आर्थिक रूप से मजबूत होना भी जरूरी है। वे चाहती हैं कि उनका पार्टनर खुद से आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्वतंत्र हो।

परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं

मदरहुड पर बात करते हुए डेजी ने साफ कहा, ‘परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं है।’ उन्होंने बताया कि उन्होंने एग फ्रीज करवाने का फैसला इसलिए लिया, ताकि वे जब भी चाहें, बच्चे कर सकें।

वर्कफ्रंट

वर्कफ्रंट की बात करें, तो डेजी शाह आखिरी बार वेब सीरीज ‘रेड रूम’ में नजर आईं थी। वे अब पलाश मुच्छल के निर्देशन में बनी फिल्म में नजर आएंगी, जिसमें उनके साथ श्रेयास तलपडे नजर आएंगे।

असम में चुनावी तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

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गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) से पहले सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा।

 

कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी
सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

 

असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में
भारतीय जनता पार्टी
असम गण परिषद
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

पहले कई बार बदली समयसीमा
मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है।

परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित
2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है।

वर्तमान विधानसभा की स्थिति
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं।

चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब मामले में बरी, अदालत के फैसले के बाद भावुक

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दिल्ली| के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले मामले में बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को बरी कर दिया है. कोर्ट का फैसला सुनते ही केजरीवाल भावुक हो गए, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. कोर्ट के इस फैसले को उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए सत्य की जीत बताया.अरविंद केजरीवाल ने कहा, “पिछले कुछ सालों से भाजपा जिस तरह से शराब घोटाले के बारे में कह रही थी और हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी, तो आज कोर्ट ने सभी आरोप खारिज कर दिए और सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. हमें न्यायपालिका पर भरोसा है. सत्य की जीत हुई. AAP को खत्म करने के लिए सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. यह पूरा फर्जी केस था. केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है. मैंने अपने जीवन में केवल ईमानदारी कमाई है. कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और AAP कट्टर ईमानदार है. अच्छा काम करके सत्ता में आइए और झूठे केस करके हमें जेल में डालना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता 

केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 आरोपी बरी

राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 लोगों को बरी किया है. कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मनीष सिसोदिया बोले, “आज एक बार फिर देश के संविधान पर गर्व हो रहा है और आज सत्य की जीत हुई है.”

क्या है मामला?

यह मामला दिल्ली सरकार की एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है, जो साल 2022-23 का है. इस दौरान दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी. जिसके सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया थे. इस मामले में पहले सीबीआई ने फिर इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मामला दर्ज किया था. जिसके बाद कई नेता जेल भी गए थे. लेकिन आज शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए कहा कि सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला नहीं बनता है. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस केस से जुड़े सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

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News Desk

‘घूसखोर पंडित’ से ‘केरल स्टोरी 2’ तक, टाइटल पर उठे विवाद पर क्या बोले जानकार? कैसे तय होता है फिल्मों का नाम

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इन दिनाें फिल्मों के टाइटल बड़ी बहस की वजह बन गए हैं। थोड़ा सा भी विवादित नाम आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो जाता है। किसी को टाइटल आपत्तिजनक लगता है। किसी को धार्मिक भावनाएं जुड़ी दिख जाती हैं। वहीं, कई लोग इसमें राजनीतिक संदेश भी खोज लेते हैं। यही वजह रही कि ‘द केरल स्टोरी 2’, ‘घूसखोर पंडित’ और ‘यादव जी की लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के मामले सीधे अदालत तक जा पहुंचे। अब इस मामले को लेकर अमर उजाला ने इन फिल्मों से जुड़े कलाकारों या मेकर्स से और कुछ जानकारों से बात की और पता लगाया कि कैसे तय होते हैं टाइटल?

कैसे तय होता है फिल्मों का टाइटल?

इंडस्ट्री में चार बड़े संगठन मिलकर यह नियम देखते हैं- इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स काउंसिल।
फिल्म निर्माताओं को अपना शीर्षक इन संस्थाओं में रजिस्टर कराना पड़ता है।
यदि कोई नाम पहले से किसी ने रजिस्टर करा रखा है, तो वह दूसरे को नहीं मिल सकता। इसके लिए एसोसिएशन से ‘क्लीयरेंस’ लेनी होती है।
बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी फिल्म के नाम और फ्रेंचाइजी (जैसे धूम, गोलमाल) को सुरक्षित रखने के लिए उसे ट्रेडमार्क के रूप में भी रजिस्टर कराते हैं।

हाल ही की विवादित फिल्मों पर अब तक क्या हुआ?

‘द केरल स्टोरी 2’ के मामले में केरल हाई कोर्ट ने कहा कि टाइटल दर्शकों को भ्रमित कर सकता है, इसलिए मामला साफ होने तक रिलीज राइट्स रोक दिए जाएं।
‘घूसखोर पंडित’ पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। विरोध बढ़ा तो मेकर्स ने टाइटल वापस ले लिया और नया नाम तय करने पर सहमति दी।
‘यादव जी की लव स्टोरी’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि टाइटल से किसी समुदाय का अपमान नहीं होता ।कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
हालांकि, तीनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया बहस अब भी जारी है।

फिल्म रिलीज से पहले ही मुझे धमकियां मिलने लगीं: डायरेक्टर अंकित भड़ाना

फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के निर्देशक अंकित भड़ाना कहते हैं, ‘फिल्म अभी रिलीज भी नहीं हुई है और कुछ लोग सिर्फ नाम देखकर फैसला सुना रहे हैं। मैंने नहीं सोचा था कि टाइटल पर इतनी गर्मी पैदा हो जाएगी। कई लोग बिना कहानी समझे ही माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। मेरी गाड़ी पर हमला हुआ। मुझे थप्पड़ मारने के लिए इनाम रखा गया और जान से मारने की भी धमकी दी जा रही है। लेकिन सत्य को रोका जा सकता है, हराया नहीं। मुख्य किरदार अभीमन्यु यादव है। टाइटल उसी से है। इसे ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे पूरा समुदाय निशाने पर हो। यह सीधी-सीधी गलतफहमी फैलाना है। सिर्फ नाम देखकर किसी फिल्म को ‘कम्युनिटी टारगेट’ कहना नाइंसाफी है। फिल्म आएगी तब असली बात सामने होगी।’

मजेदार कहानी थी, पर टाइटल देखकर लोग कुछ और समझे: घूसखोर पंडित एक्टर सुमीत

‘ये एक मजेदार कहानी है। इतनी सीरियस बात नहीं थी। हमें खुद यकीन नहीं हुआ कि सिर्फ नाम पर इतना बड़ा विवाद हो सकता है। जब शूट कर रहे थे, हमें टाइटल तक नहीं पता था। बाद में पता चला तो विवाद शुरू हो चुका था। मनोज सर का किरदार बेहद फन-लविंग है, लेकिन टाइटल देखकर लोग कुछ और समझ बैठे। अब उम्मीद है कि नया टाइटल कहानी के हिसाब से होगा और अनावश्यक विवाद से बाहर निकलेगा।’

पहले इतना तमाशा नहीं होता था: अभय सिन्हा, इम्पा के अध्यक्ष

‘आज फिल्म का टाइटल पास करना सबसे मुश्किल काम हो गया है। पहले नामों पर इतना विवाद नहीं होता था। आज हर नाम पर लोग धार्मिक या राजनीतिक एंगल ढूंढ लेते हैं। इसके चलते हमें भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।’

कुछ लोग 10–10 टाइटल बुक कर लेते थे: संग्राम शिर्के, अध्यक्ष, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन

‘टाइटल पर आज पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता बरती जाती है। हम IMPAA के साथ मिलकर टाइटल बुक करते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि कहीं दो फिल्मों का नाम एक जैसा न हो, वर्ना सीधे प्रोड्यूसर का नुकसान होता है। पहले तो कई लोग 10 टाइटल बुक कराकर बैठ जाते थे और बाद में दूसरों को ब्लैकमेल करते थे। ऐसे में अब हमने हर टाइटल को तीन साल के लिए ही मान्य कर दिया है। अगर फिल्म नहीं बनती तो टाइटल वापस ले लेते हैं।’

इन फिल्मों के नाम पर भी हुए विवाद 

पद्मावती – इतिहास गलत दिखाने का आरोप, टाइटल बदलकर ‘पद्मावत’ रखा गया।
राम गोपाल वर्मा की ‘श्रीदेवी’ – श्रीदेवी और बोनी कपूर ने नोटिस भेजा, फिल्म रिलीज ही नहीं हुई।
बजरंगी भाईजान – वीएचपी और बजरंग दल की आपत्ति, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।
सिंह साब द ग्रेट – एसजीपीसी ने आपत्ति जताई पर टाइटल नहीं बदला गया।
रैंबो राजकुमार – कॉपीराइट विवाद हुआ। नाम बदलकर ‘आर राजकुमार’ हुआ।
मैं हूं रजनीकांत – रजनीकांत ने कोर्ट में चुनौती दी, नाम बदलकर ‘मैं हूं रजनी’ हुआ।
लक्ष्मी बॉम्ब – धार्मिक विरोध के कारण नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ हुआ। 
गोलियों की रासलीला राम-लीला – कोर्ट केस हुआ। रिलीज से 48 घंटे पहले टाइटल बदलकर राम-लीला किया गया।
पृथ्वीराज – ऐतिहासिक सम्मान दिखाने के लिए टाइटल ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में बदला गया।
बिल्लू बार्बर – नाई समुदाय की आपत्ति के बाद ‘बार्बर’ हटाकर फिल्म का नाम ‘बिल्लू’ किया गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव, सुनेत्रा पवार बनीं NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra politics) में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। पार्टी बैठक में लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। अजित पवार की विमान हादसे में मौत के बाद पार्टी और सत्ता दोनों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल।

अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अचानक नए मोड़ पर आ गई थी। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को सौंपी गई और अब उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कमान भी मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा चल रही थी, लेकिन अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए नया नेतृत्व तय किया और सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया।

मुंबई अधिवेशन में सर्वसम्मति से फैसला
एनसीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन 2026 मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। अधिवेशन के दौरान सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को सभी नेताओं ने एकमत से मंजूरी दी। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे, जबकि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सांसद सुनील तटकरे संभालेंगे।

बारामती से विधायक बनने की चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुनेत्रा पवार जल्द ही बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अजित पवार की राजनीतिक पहचान मानी जाती रही है। अगर उपचुनाव होता है तो सांसद सुप्रिया सुले ने उम्मीद जताई है कि यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में सुनेत्रा पवार विधानसभा पहुंचकर राज्य की राजनीति में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।

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News Desk

कांग्रेस में टिकट के लिए खींचतान, एक-एक सीट पर कई दावेदार

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नई दिल्ली: आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में खींचतान शुरू हो गई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरे भी नामांकन की उम्मीद कर रहे हैं. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, जिसके 27 सदस्य हैं, अपने दम पर आसानी से पांच सीटें जीत सकती है, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा से एक-एक और तेलंगाना से दो सीटें, क्योंकि वहां उसके पास जरूरी संख्या में विधायक हैं जो राज्यसभा चुनाव में वोट करेंगे.

कांग्रेस को तमिलनाडु से भी एक सीट मिल सकती है, क्योंकि उसे राज्य की सत्ताधारी पार्टी DMK का समर्थन मिल सकता है. महाराष्ट्र में, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA), जिसमें शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) शामिल हैं, को भी एक राज्यसभा सीट मिल सकती है.

कांग्रेस के जिन चार राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, उनमें अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, फूलो देवी नेताम और रजनी पाटिल शामिल हैं. इनमें से, सुप्रीम कोर्ट के वकील और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य सिंघवी को फिर से मौका मिलने की सबसे अधिक संभावना है, क्योंकि वे कई जरूरी मामलों में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वरिष्ठ प्रवक्ता भी हैं.

सिंघवी का वर्तमान कार्यकाल 28 अगस्त 2024 को शुरू हुआ और 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है. के. केशव राव के इस्तीफे के बाद उन्हें तेलंगाना से निर्विरोध चुना गया था. इससे पहले कांग्रेस ने सिंघवी को हिमाचल प्रदेश से उच्च सदन भेजने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी के कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने के कारण वह चुनाव हार गए थे.

हिमाचल में संभावित नाम
यही वजह है कि कांग्रेस के रणनीतिकार हिमाचल प्रदेश से मिलने वाली एक सीट के लिए किसी स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और राज्य इकाई की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को कांग्रेस शासित पहाड़ी राज्य से मौका मिल सकता है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस रणनीतिकारों के सामने मुश्किल चुनाव है कि वे आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को फिर से चुनें या पूर्व मुख्यमंत्री और OBC नेता भूपेश बघेल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपल बैज या पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव में से किसी एक को चुनें.

हरियाणा से कांग्रेस को जो एक सीट मिल सकती है, उसके लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह, मीडिया हेड पवन खेड़ा, सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता राज बब्बर शामिल हैं. खेड़ा और श्रीनेत नियमित रूप से पार्टी का बचाव करते हैं और अलग-अलग मुद्दों पर मोदी सरकार पर हमला करते हैं, जबकि सिंह असम कांग्रेस के प्रभारी हैं.

जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर विचार
तेलंगाना में दूसरी सीट के लिए, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतार सकती है, जो 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार थे, लेकिन सीपी राधाकृष्णन से हार गए.

सूत्रों ने बताया कि अगर यह बात नहीं बनी, तो जस्टिस रेड्डी को तमिलनाडु से राज्यसभा भेजा जा सकता है और तेलंगाना से अल्पसंख्यक समुदाय के नेता या वरिष्ठ नेता हनुमंत राव को चुना जा सकता है. कांग्रेस (AICC) के पदाधिकारी प्रवीण चक्रवर्ती की संभावित उम्मीदवारी पर भी कुछ चर्चा हुई है, लेकिन DMK शायद उनका समर्थन न करे क्योंकि उन्होंने गठबंधन के मुद्दों पर राज्य सरकार पर निशाना साधा था.

तेलंगाना के लिए प्रभारी कांग्रेस सचिव रोहित चौधरी ने ईटीवी भारत को बताया, “ये बहुत जरूरी चुनाव हैं. बातचीत हो रही है. पार्टी शीर्ष नेतृत्व जल्द ही नामों को अंतिम मंजूरी देगा.”

महाराष्ट्र में एमवीए के बीच होगी बैठक
महाराष्ट्र में, ऐसी अटकलें हैं कि एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने को उत्सुक हैं, लेकिन कांग्रेस यह साफ करना चाहती है कि क्या वह अपनी पार्टी को एनसीपी में विलय करने की योजना बना रहे हैं, जिसका नेतृत्व हाल तक उनके बागी भतीजे और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार कर रहे थे. शिवसेना (UBT) भी अपने नेता को उच्च सदन भेजना चाहती है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि नाम पर मुहर लगाने के लिए जल्द ही एमवीए गठबंधन की बैठक होगी. अगर उम्मीदवार पर कोई सहमति नहीं बनती है, तो कांग्रेस वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल को फिर से मैदान में उतार सकती है.

महाराष्ट्र के प्रभारी कांग्रेस सचिव यूबी वेंकटेश ने बताया, “सभी तरफ से दावे हैं. MVA के भीरत बातचीत होगी और फिर हमारा शीर्ष नेतृत्व इस मामले में आखिरी फैसला लेगा.”

‘मेरा मकसद कठोर सच्चाई पर बात करना’, सुदीप्तो सेन ने बताया क्यों बनाई ‘चरक

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आगामी फिल्म ‘चरक – फेयर ऑफ फेथ’ ‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन द्वारा समर्थित फिल्म है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र पर बात करने वाली इस फिल्म को लेकर सुदीप्तो सेन का कहना है कि यह फिल्म सच्ची मानवीय कहानियों को बयां करती है और समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर करती है। उनका मानना है कि इस फिल्म का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि घटनाओं को वैसे ही दिखाना है जैसे वे घटी थीं, भले ही वास्तविकताएं असहज क्यों न हों। उन्होंने कहा कि कोई भी मानवीय कहानी मुझे बहुत आकर्षित करती है। ‘द केरल स्टोरी’ की शुरुआत चार लड़कियों से हुई और मैं 3,500 लड़कियों से मिला। इसलिए, मैंने सोचा कि मुझे उनकी कहानी बतानी चाहिए। जिस तरह से मैं अपनी कहानी कहता हूं, मैं सच्चाई के जितना करीब हो सकता हूं, उतना पहुंच सकता हूं। हालांकि, मेरा उद्देश्य कभी भी विवादास्पद फिल्में बनाना नहीं रहा है, बल्कि असहज सच्चाइयों को प्रकाश में लाना रहा है। एक कलाकार के रूप में,  एक कहानीकार के रूप में, मुझे लगता है कि यह कहानी सुनाई जानी चाहिए। किसी को तो इसे सुनाना ही चाहिए था। इसलिए शायद मैंने इसे चुना है।

बहस और चर्चा के बाद मिली सेंसर से मंजूरी

निर्माता ने आगे बताया कि उनकी फिल्म को सेंसर बोर्ड ने विस्तृत बहस और चर्चा के बाद मंजूरी दी है। जब मैं सेंसर बोर्ड से मिला, तो कई बहसें हुईं, जो मुझे बहुत महत्वपूर्ण लगीं। पैनल में 30 वर्ष की आयु के युवा सदस्य और 70-75 वर्ष की आयु के वरिष्ठ सदस्य दोनों शामिल थे। शुरू में कुछ लोगों को लगा कि फिल्म साधु-संतों की आलोचना करती है। लेकिन वे समझ गए कि यह समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद शोषणकारी प्रथाओं को दिखाती है।

ओटीटी अब सेफ खेलता है

सुदीप्तो सेन ने संवेदनशील विषयों से निपटने में ओटीटी प्लेटफॉर्म के दृष्टिकोण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक या कमर्शियल सक्सेस के दबाव के बजाय कहानी पर ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है कि ओटीटी अब सेफ खेल खेल रहा है। अगर कोई धार्मिक या सामाजिक मुद्दा आता है, तो वे उससे बचते हैं। चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव। मैं बचपन से ही लोगों के दर्द के बारे में बात करता आया हूं। हमें हमेशा सच्चाई के साथ रहना चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए, सच्चाई की जीत होगी।

6 मार्च को रिलीज होगी फिल्म

शीलादित्य मौलिक द्वारा निर्देशित ‘चरक: आस्था का मेला’ भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित अंधविश्वास और रीति-रिवाजों पर बात करती है। फिल्म के ट्रेलर में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की भयावह सच्चाइयों को दिखाया गया है। सुदीप्तो सेन द्वारा निर्मित यह फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यह पवित्र मेले की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो एक पारंपरिक त्योहार है जिसमें गहरी भक्ति और खतरनाक अनुष्ठान शामिल होते हैं। फिल्म में अंजली पाटिल, साहिदुर रहमान, सुब्रत दत्ता, शशि भूषण, नलनीश नील, शंखदीप और शौनक श्यामल सहित कई दमदार कलाकार हैं।

संजय राउत को राहत, BJP नेता की पत्नी की मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

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मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया (Kirit Somaiya)  की पत्नी मेधा सोमैया (Medha Somaiya) द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया।

इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।

राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे।

 

दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी। परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया।

मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।