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Wednesday, September 16, 2026
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असम में चुनावी तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

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गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) से पहले सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा।

 

कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी
सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

 

असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में
भारतीय जनता पार्टी
असम गण परिषद
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

पहले कई बार बदली समयसीमा
मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है।

परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित
2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है।

वर्तमान विधानसभा की स्थिति
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं।

चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

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