राज्यसभा चुनाव से एक दिन पहले कांग्रेस का नया आरोप

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बेंगलुरू। 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने हैं, इससे पहले ओडिशा कांग्रेस के एक नेता ने पार्टी के विधायकों को खरीदने का आरोप लगाया है। कांग्रेस नेता ने बेंगलुरु के बिदादी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। इसमें उन्होंने चार लोगों पर पार्टी के नेताओं को डराने-धमकाने का भी आरोप लगाया है। ओडिशा कांग्रेस विधायक दल के उपनेता अशोक कुमार दास ने अपनी शिकायत में कहा कि राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने के बाद, कांग्रेस को अपने विधायकों की खरीद-फरोख्त का डर था। इसीलिए कांग्रेस के आठ विधायक 12 मार्च से बेंगलुरु के वंडरला के पास एक होटल में रुके हुए हैं।
कांग्रेस नेता का आरोप है कि 15 मार्च को चार अनजान लोग होटल पहुंचे। ये लोग अपने साथ एक ब्लैंक चेक लेकर आए थे। दास ने दावा किया कि इन लोगों ने विधायकों को करोड़ों रुपये का लालच दिया ताकि वो राज्यसभा चुनाव में क्रॉस-वोटिंग करें।
विधायकों के साथ गाली-गलौच और धमकी
अशोक कुमार दास ने अपनी शिकायत में कहा कि जब विधायकों ने रिश्वत के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, तो आरोपियों ने धमकाने शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उन लोगों ने विधायकों के साथ गाली-गलौज की और उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। दास ने कहा कि जब हमारे विधायकों ने उनके प्रस्ताव को खारिज कर दिया, तो उन व्यक्तियों ने कथित तौर पर हमें जान से मारने की धमकी दी, अगर हम ओडिशा वापस लौटे। उन्होंने हमारे खिलाफ अपमानजनक और गंदी भाषा का भी इस्तेमाल किया।

आरोपियों की पहचान भी बताई
कांग्रेस ने पुलिस को दी गई शिकायत में चार व्यक्तियों की पहचान भी बताई है। उनके नाम बीरेंद्र प्रसाद, सुरेश, अजीत कुमार साहू और सिमाचल मोहकुड बताए गए हैं। बेंगलुरु पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है।

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छह गेंद में 6 छक्के या 175 रन की पारी? वैभव सूर्यवंशी ने चुना अपना पसंदीदा रिकॉर्ड

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नई दिल्ली में आयोजित बीसीसीआई के ‘नमन’ कार्यक्रम में क्रिकेट के कई सुपरस्टार्स पहुंचे। हाल ही में टी20 विश्वकप जीतने वाली सीनियर भारतीय टीम से लेकर इस साल अंडर-19 विश्वकप जीतने वाली भारतीय टीम तक, सभी टीमों को बोर्ड ने सम्मानित किया। भारत को अंडर-19 विश्वकप जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले वैभव सूर्यवंशी भी कार्यक्रम में पहुंचे। इस दौरान मंच का संचालन कर रहे कमेंटेटर हर्षा भोग्ले ने वैभव के सामने कुछ रिकॉर्ड्स रखे और पूछा कि इनमें से कौन से रिकॉर्ड को वह तोड़ना या बनाना चाहेंगे। इस पर वैभव ने जो चुना, उसने सभी का दिल जीत लिया। आइए जानते हैं…

कौन सा रिकॉर्ड बनाना चाहते हैं वैभव?

एक सेशन में हर्षा भोग्ले के साथ स्टेज पर वैभव, हार्दिक पांड्या, संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा मौजूद थे। इस दौरान हर्षा ने वैभव से कहा, ‘तीन चीजें बताता हूं आपको। आप बताइए कि इनमें सबसे बड़ी ख्वाहिश आपकी किस चीज की होगी? एक ओवर में छह छक्के? क्रिस गेल जो आपकी तरह लेफ्ट हैंडेड थे, उन्होंने 175 बनाए थे आईपीएल में? या फिर आईपीएल में सबसे तेज शतक? वैसे दूसरा सबसे तेज शतक किसने किया है, क्या ये आपको पता है?’ इस पर वैभव ने जवाब दिया, ‘मैंने ही किया है।’ इस पर हर्षा ने कहा, ‘तो तीन चीजें बताईं, आपकी ख्वाहिश सबसे ज्यादा किस चीज की है?’ इस पर वैभव ने जवाब दिया, ‘सर ख्वाहिश 175 रन के रिकॉर्ड को तोड़ने का है।’

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ओडिशा अग्निकांड पर राष्ट्रपति समेत कई नेताओं ने जताया शोक

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नई दिल्ली। ओडिशा के कटक में सोमवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एससीबी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के आईसीयू में अचानक भीषण आग लग गई। इस हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई और 11 लोग घायल हो गए। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना की जानकारी दी है। हादसे की खबर मिलते ही मुख्यमंत्री तुरंत अस्पताल पहुंचे और मौके पर हालात का जायजा लिया। 

राष्ट्रपति ने जताया दुख

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को ओडिशा के अस्पताल में आग लगने की घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने इस हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट कीं और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। घटना पर राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा, ‘ओडिशा के कटक में एक अस्पताल में आग लगने की दुखद घटना में लोगों की मौत से मुझे बहुत दुख हुआ है। शोक में डूबे परिवारों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के जल्द ठीक होने की प्रार्थना करती हूं।’

हादसे पर पूर्व मुख्यमंत्री ने जताया दुख

वहीं ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता नवीन पटनायक ने कटक के एससीबी मेडिकल अस्पताल में आग की घटना पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, ‘कटक के एससीबी मेडिकल अस्पताल में लगी आग की घटना, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई, बेहद दुखद है। मैं शोक संतप्त परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना करता हूं। इसके साथ ही, मैं आग में गंभीर रूप से घायल हुए लोगों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं। मैं राज्य सरकार से सभी घायलों के लिए सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करने का आग्रह करता हूं। कटक के मेयर और तंगी चौद्वार के विधायक को घटनास्थल पर पहुंचकर सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं।’

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एकेडमी अवॉर्ड को क्यों कहा जाता है ऑस्कर? जानें इसके नाम की दिलचस्प कहानी

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फिल्मी दुनिया के सबसे प्रमुख अवॉर्ड ऑस्कर के बारे में तो हर कोई जानता है। हर कलाकार का सपना होता है कि वो द गोल्डन बॉय ट्रॉफी को अपने नाम कर सके। लेकिन क्या आप ऑस्कर की ट्रॉफी के बारे में जानते हैं? कहां से आया इसका आइडिया, किस चीज की बनी होती है ट्रॉफी और किसके नाम पर है ऑस्कर? यहां जानिए ऑस्कर की ट्रॉफी के बारे में सबकुछ। 

कहां से आया अकादमी अवॉर्ड का आइडिया

ऑस्कर ट्रॉफी का विचार और डिजाइन 1927 में एक मीटिंग के दौरान सामने आया था। एमजीएम स्टूडियो के मालिक लुईस बी मेयर ने सबसे पहले इसके बारे में सोचा था। उनके दिमाग में आया कि क्यों न एक ग्रुप बनाया जाए, जिसमें पूरी फिल्म इंडस्ट्री को फायदा मिल सके।इसपर उन्होंने अपने साथ काम करने वाले और दोस्तों को बुलाकर एक मीटिंग की जिसमें डायरेक्टर फ्रैड निबलो, फिल्ममेकर फीड बिटसोन और एक्टर कॉनरेड नागेल शामिल हुए। उन लोगों को ये आइडिया पसंद आया और बाद में एक होटल में हॉलीवुड के 36 टॉप पर्सनैलिटी को बुलाया गया था। सबके सामने ये आडिया रखते हुए ‘अकादमी पुरस्कार’ नाम बताया गया, जिसे सभी ने पसंद किया।

कैसे तय हुई ट्रॉफी और क्या है इसका अर्थ?

जब ये सोचा गया कि सम्मान पाने वाले को दिया क्या जाएगा, तब ये तय हुआ कि एक ट्रॉफी दी जाए, जिसे अलग तरह का डिजाइन करना होगा। इसकी जिम्मेदारी एमजीएम स्टूडियो के आर्ट डायरेक्टर केड्रिक गिबोन्स को दी गई।गिबन्स ने एक नाइट (शूरवीर) का स्केच बनाया, जो एक फिल्म रील पर खड़ा है और उसने अपने हाथों में एक तलवार थामी हुई है। रील में पांच तीलियां होती हैं, जो एकेडमी की मूल पांच शाखाओं को दर्शाती हैं।अभिनेता, निर्देशक, निर्माता, तकनीशियन और लेखक। हाथ में पकड़ी हुई तलवार फिल्म इंडस्ट्री की प्रगति और कल्याण की रक्षा का प्रतीक है। गिबन्स के स्केच को वास्तविक मूर्ति का रूप लॉस एंजिल्स के मूर्तिकार जॉर्ज स्टेनली ने दिया था। उन्होंने इस डिजाइन को और अधिक स्लीक और आधुनिक बनाया, जो आज भी लगभग वैसा ही है।

मैक्सिकन अभिनेता ने ट्रॉफी के लिए दिया न्यूड पोज

कई रिपोर्ट्स के मुताबाकि, ऐसा कहा जाता है कि मैक्सिकन अभिनेता और फिल्म निर्माता एमिलियो ‘एल इंडियो’ फर्नांडिस ने इस ट्रॉफी के लिए मॉडल के रूप में बिना कपड़ों के पोज दिया था। हालांकि, एकेडमी ने कभी आधिकारिक तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की है।

कैसे पड़ा ऑस्कर नाम?

इस ट्रॉफी का आधिकारिक नाम ‘एकेडमी अवार्ड ऑफ मेरिट’ है। कहा जाता है कि एकेडमी की लाइब्रेरियन मार्गरेट हेरिक ने पहली बार इसे देखकर कहा था कि यह उनके अंकल ऑस्कर की तरह दिखती है, जिसके बाद ही इसका नाम ऑस्कर पड़ा और अब इसी नाम से यह ट्रॉफी ज्यादा प्रसिद्ध है।

कैसे तैयार की गई ट्रॉफी?

ऑस्कर की ट्रॉफी 13 इंच लंबी और 8.85 किलो की बनाई गई थी। इसमें 92.5 प्रतिशत टिन, 7.5 प्रतिशत तांबा लगाया गया और आखिर में सोने की परत चढ़ाई गई। एक ऑस्कर ट्रॉफी को बनाने में 400 डॉलर यानी लगभग 33 हजार 77 रुपये का खर्चा आया। आज यह ट्रॉफी तांबे की बनी होती है और इस पर 24 कैरेट सोने की परत चढ़ी होती है।

कब हुआ पहला ऑस्कर अवॉर्ड इवेंट?

16 मई 1929 को पहला अकादमी पुरस्कार आयोजित हुआ। इसमें करीब 270 हॉलीवुड सेलिब्रिटीज शामिल हुए। इन सभी सेलेब्स को हॉलीवुड रूजवेल्ट होटल के ब्लॉसम रूम में आने के लिए इनविटेशन भेजा गया। यहीं पर पहला ऑस्कर इवेंट हुआ, जिसमें कोई दर्शक नहीं थे और ये फंक्शन महज 15 मिनट में खत्म हो गया था। ये इवेंट पेड था जिसमें 5 डॉलर का एक टिकट बेचा गया था।

एक कुत्ते को मिली थी ऑस्कर की पहली दावेदारी

कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहला ऑस्कर जर्मन एक्टर एमिल जेनिंग्स ने जीता था। हालांकि, इस अवॉर्ड का पहला दावेदार एक कुत्ता था। जर्मन शेफर्ड डॉग, जिसका नाम टिन टिन बताया गया था।उसने हॉलीवुड की करीब 27 फिल्मों में काम किया, जिसमें से 4 फिल्में साल 1929 में ही रिलीज हो चुकी थीं। इनमें से दो फिल्मों उस डॉग ने बेहतरीन काम भी किया था। इसलिए अवॉर्ड कमेटी ने उसे पहला ऑस्कर मिलने का हकदार माना था।लेकिन अकादमी पुरस्कार के पहले प्रेसिडेंट फेयरबैंक्स ने सोचा कि पहला अवॉर्ड किसी डॉग को जाने से एक गलत संदेश जा सकता है। इसलिए कमेटी ने उस डॉग और जर्मन एक्टर एमिल जेनिंग्स को लेकर वोट किए, जिसमें सबसे ज्यादा वोट्स एमिल को मिले।

चुनावी विश्लेषण में जातिवाद पर रोक लगाई जाए

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चंडीगढ़। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (अखिल भारतीय प्रतिनिधियों की सभा) की तीन-दिवसीय बैठक रविवार को संपन्न हो गई। इस बैठक में जाति-आधारित भेदभाव को खत्म करने और चुनावों के दौरान मतदाताओं के जनसांख्यिकीय आंकड़ों का जाति-आधारित विश्लेषण करने की प्रथा को रोकने का आह्वान किया गया।
आरएसएस के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने हरियाणा के पानीपत जिले के समालखा में मीडिया वालों से कहा कि संघ सामाजिक सद्भाव का समर्थन करता है और समाज को जाति के आधार पर बांटने की कोशिशों का विरोध करता है। होसबले ने मौजूदा वैश्विक भू-राजनीतिक हालात के बीच केंद्र सरकार की कूटनीतिक कोशिशों की भी तारीफ की, और कहा कि संघ वैश्विक शांति और विकास का समर्थक है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने इस संगठन की स्थापना किसी खास समुदाय, धार्मिक संप्रदाय या पूजा-पद्धति का विरोध करने के इरादे से नहीं की थी।
उन्होंने कहा, पूजा-पद्धति और रीति-रिवाजों में अंतर से कोई बुनियादी फर्क नहीं पड़ता।
यह कहते हुए कि संगठन में सभी का स्वागत है, होसबले ने कहा, हम समाज की भलाई के लिए रचनात्मक काम में लगे किसी भी व्यक्ति को संघ का स्वयंसेवक (वॉलंटियर) मानते हैं।
संगठन की गतिविधियों के विस्तार पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि पिछले एक साल में संघ के काम में काफी बढ़ोतरी हुई है।
 

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ईरान-इजराइल संघर्ष से भारतीय किसान बेहाल, 1 लाख करोड़ रुपए के कृषि माल पर खतरा

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हैदराबाद: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध ने जहां भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर संकट ला दिया है. वहीं, कारोबार पर भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. इंपोर्ट-एक्सपोर्ट दोनों पर बुरा असर देखने को मिल रहा है. बात एक्सपोर्ट की करें तो भारत अपने कृषि उत्पाद सबसे ज्यादा मिडिल ईस्ट में भेजता है. 2025 में करीब 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का एक्सपोर्ट हुआ था.लेकिन, मिडिल ईस्ट संकट के चलते यह कारोबार ठप हो गया है. लाखों टन माल रास्ते में फंसा पड़ा है. क्योंकि, मिडिल ईस्ट के देशों को जाने वाले जल, थल और वायु मार्ग बंद पड़े हैं. इसके अलावा बीमा और शिपिंग लागत भी बढ़ गई है. इससे जहां निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं किसानों पर भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है. आईए, ETV Bharat की पहली कड़ी में जानते हैं कैसे और कितने कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट पर युद्ध का असर पड़ रहा है.

ईरान-इजराइल युद्ध का भारत के व्यापार पर असर: ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के कारण पश्चिम एशिया को लगभग 11.8 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपए) का कृषि-खाद्य निर्यात (चावल, फल, मसाले) खतरे में हैं. बंदरगाहों पर 3,000 से अधिक कंटेनर फंसे हुए हैं.

4 लाख टन बासमती चावल रास्ते में फंसा: ईरान-इजराइल/अमेरिका तनाव ने भारत से बासमती चावल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है. लगभग 4 लाख टन चावल पोर्ट्स या रास्ते में फंसा हुआ है. क्योंकि शिपिंग रूट बाधित हो गए हैं. युद्ध के कारण शिपिंग लागत दोगुनी हो गई है, जिससे निर्यातकों को नुकसान हो रहा है. दरअसल, ईरान, भारत के बासमती चावल का प्रमुख आयातक (25% से अधिक हिस्सा) है.लेकिन, युद्ध के कारण ईरान को होने वाली शिपमेंट ठप हो गई है. भारत वैश्विक बाजार में बासमती चावल का अग्रणी निर्यातक है. वर्ष 2024-25 के दौरान देश ने 50312.01 करोड़ रुपए (5944.42 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य का 60 लाख 65 हजार टन से अधिक बासमती चावल विश्व को निर्यात किया. CRISIL रेटिंग्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया के देशों का भारत के बासमती चावल निर्यात में लगभग 70-72% हिस्सा है, जो वर्ष 2024-25 में लगभग 60 लाख टन था.

कंटेनर का भाड़ा हुआ दोगुना, मुनाफा घटा: बासमती चावल और अन्य कृषि उत्पादों के ईरान समेत मिडिल ईस्ट के देशों से जो ऑर्डर 28 फरवरी 2026 के पहले मिले थे, उन्हें शिप कर दिया गया था. लेकिन, युद्ध-जोखिम बीमा और शिपिंग कंटेनरों की कमी के कारण अब भाड़ा दोगुना हो गया है, जिससे प्रति कंटेनर अतिरिक्त 2,000 डॉलर यानी 1.8 लाख रुपए का बोझ पड़ रहा है. जबकि, निर्यातकों को अपनी मार्जिन मनी से देना पड़ रहा है.

कंटेनर का भाड़ा हुआ दोगुना, मुनाफा घटा: बासमती चावल और अन्य कृषि उत्पादों के ईरान समेत मिडिल ईस्ट के देशों से जो ऑर्डर 28 फरवरी 2026 के पहले मिले थे, उन्हें शिप कर दिया गया था. लेकिन, युद्ध-जोखिम बीमा और शिपिंग कंटेनरों की कमी के कारण अब भाड़ा दोगुना हो गया है, जिससे प्रति कंटेनर अतिरिक्त 2,000 डॉलर यानी 1.8 लाख रुपए का बोझ पड़ रहा है. जबकि, निर्यातकों को अपनी मार्जिन मनी से देना पड़ रहा है.किसानों को नुकसान: शिपमेंट रुकने के कारण बासमती चावल समेत अन्य कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट देखने को मिल रही है. चावल में करीब 600-800 रुपए प्रति कुंतल की गिरावट आ गई है, जिससे किसानों और निर्यातकों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है. निर्यात रुकने से महाराष्ट्र, कर्नाटक और अन्य राज्यों में फलों/सब्जियों की आवक बढ़ गई है और घरेलू दाम गिर गए हैं. इससे फल-सब्जी किसानों को भी नुकसान हो रहा है. इसके अलावा निर्यातकों को भुगतान में देरी का भी सामना करना पड़ रहा है.

खादी देशों को मांस का एक्सपोर्ट रुका: ईरान-इजराइल तनाव के कारण भारत का पश्चिम एशिया को होने वाला मांस और समुद्री भोजन का 16730 करोड़ रुपए (लगभग 1.81 बिलियन डॉलर) का निर्यात प्रभावित हो रहा है. ग्लोबल ट्रेड एंड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 2025 में पश्चिम एशिया को 16730 करोड़ रुपए (लगभग 1.81 बिलियन डॉलर) मूल्य की मछली, मांस और प्रोसेस्ड उत्पादों का निर्यात किया.निर्यात किए गए प्रमुख उत्पादों में ताजा या ठंडा गोमांस, जमा हुआ गोमांस, भेड़ और बकरी का मांस, झींगा जैसे क्रस्टेशियन शामिल हैं. पश्चिम एशिया को ताजा या ठंडा गोमांस का निर्यात 2025 में 1,158.39 करोड़ रुपए (139 मिलियन डॉलर) तक पहुंच गया, जो इस उत्पाद के भारत के कुल निर्यात का 97.4 प्रतिशत है. वहीं, इस क्षेत्र को जमे हुए गोमांस का निर्यात 10,500 करोड़ (1.27 अरब डॉलर) रहा, जो भारत के वैश्विक निर्यात का 28.9 प्रतिशत है. भेड़ और बकरी के मांस का निर्यात 790 करोड़ (95.2 मिलियन डॉलर) तक पहुंच गया, जिसमें भारत के कुल निर्यात का 98.9 प्रतिशत पश्चिम एशिया को गया. खाड़ी बाजारों में किसी भी प्रकार की बाधा से भारत के भैंस के मांस और पशुधन निर्यातकों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है. विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और तेलंगाना में, जहां अधिकांश प्रोसेस्ड इकाइयां हैं. यदि संघर्ष लंबा चलता है, तो व्यापार के रुकने की आशंका है.

भारत किन देशों को करता है मांस का निर्यात: भारत मध्य पूर्व के देशों को गोमांस और मुर्गी के मांस का प्रमुख रूप से एक्सपोर्ट करता है. GTRI की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के निर्यात का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पश्चिम एशिया को जाता है. इनमें भेड़ और बकरी का मांस (98.9 प्रतिशत), ताजा या ठंडा गोमांस (97.4 प्रतिशत) शामिल है. पशु उत्पादों के निर्यात में भैंस का मांस, भेड़/बकरी का मांस, मुर्गी उत्पाद, पशु आंतें, दूध और दूध उत्पाद, शहद आदि शामिल हैं.

मुंबई पोर्ट पर 1200 करोड़ रुपए की फल-सब्जी फंसी: ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण पश्चिम एशिया को होने वाला भारत का फल-सब्जी निर्यात भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है. मुंबई (JNPA) बंदरगाह पर 1,200 करोड़ रुपए से अधिक का माल 1,000 से ज्यादा कंटेनर में फंसा हुआ है. इन कंटेनर में केला, अंगूर, अनार, प्याज लोड है. जेबेल अली पोर्ट (दुबई) पर जहाजों की आवाजाही रुकी है और माल भेजने में 20-25 दिन ज्यादा लग रहे हैं. यही नहीं, “वॉर रिस्क सरचार्ज” जो 2000-4000 डॉलर तक का है, से लागत बढ़ गई है. शिपमेंट रुकने से नासिक के अंगूर और महाराष्ट्र से भेजे गए केले, प्याज और अन्य ताजी सब्जियां बंदरगाहों पर सड़ रही हैं.

फल-सब्जियों का कितना होता है निर्यात: 2024-25 के दौरान, भारत ने 15,100 करोड़ रुपए (1818.56 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के ताजे फल और सब्जियों का निर्यात किया, जिसमें ताजे फल और सब्जियां शामिल थीं. ताजे फल और सब्जियां प्रमुख रूप से बांग्लादेश, यूएई, इराक, नीदरलैंड, नेपाल, मलेशिया, यूके, श्रीलंका, ओमान और उज्बेकिस्तान को निर्यात किए गए.

2360 करोड़ रुपए का डेयरी प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट प्रभावित: ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण भारत का लगभग 281.1 मिलियन डॉलर यानी 2360 करोड़ रुपए का (28.9% कुल डेयरी निर्यात) डेयरी और प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट प्रभावित हुआ है. समुद्री मार्ग बाधित होने और बीमा/शिपिंग लागत बढ़ने से खाड़ी देशों में माल की आपूर्ति रुक गई है, जिससे डेयरी उत्पादों के निर्यात पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है.

अंडा हुआ सस्ता: मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के चलते खाड़ी देशों से निर्यात रुकने के कारण भारत में अंडे की कीमतों में गिरावट आई है. सुरक्षा चिंताओं और परिवहन मार्गों में व्यवधान के चलते संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन जैसे देशों के साथ व्यापार ठप हो गया है. परिणामस्वरूप, अंडों की अधिकता के कारण घरेलू अंडों की कीमतों में अचानक गिरावट आई है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली है.कर्नाटक और तेलंगाना जैसे राज्यों में अंडे की कीमतें गिरी हैं. यहां एक अंडे की कीमत 7 रुपए से गिरकर 4.60 रुपए तक पहुंच गई है. इससे उन मुर्गी पालकों के लिए चुनौतियां खड़ी हो गई हैं जो निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर हैं.

तरबूज की कीमतों में गिरावट: पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण, मध्य पूर्वी बाजारों में निर्यात धीमा होने से भारत में तरबूज की कीमतों में लगातार गिरावट आई है. कुछ क्षेत्रों में कीमतें गिरकर 7 रुपए प्रति किलोग्राम तक हो गई हैं.
 

ममता बनर्जी को फिर से जीतते दिखा रहा जनता का रुख

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के ऐलान होने के साथ ही आईएएनएस-मैटराइज का ओपिनियन पोल भी आ गया है। ओपिनियन पोल में पश्चिम बंगाल में किसके सिर पर सत्ता का ताज सजेगा, इसको लेकर राज्य की जनता की राय ली गई है।
ओपिनियन पोल के मुताबिक, पश्चिम बंगाल में लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सत्ता पर काबिज होने का अनुमान जताया गया है। वहीं, भाजपा के पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले इस बार ज्यादा सीटें जीतने के आसार ओपिनियन पोल में जताए गए हैं।
ओपिनियन पोल के अनुसार, पश्चिम बंगाल की 294 सीटों में से ममता बनर्जी की टीएमसी के 155 से 170 सीटें जीतने का अनुमान लगाया गया है। इसके अलावा, भाजपा के 100 से 115 सीटें जीतने का दावा इस पोल में किया गया है। वहीं, अन्य के खाते में 5 से 7 सीटें आ सकती हैं।
ओपिनियन पोल में टीएमसी को 43-45 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान लगाया गया है। इसके साथ ही एनडीए के 41-43 प्रतिशत और अन्य को 13 से 15 प्रतिशत वोट शेयर मिलने की उम्मीद जताई गई है। बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होने हैं। 

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दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन हमला, इजराइल ने ईरान के 200 ठिकानों पर हमला किया

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हैदराबाद: ईरान पर अमेरिका और इजराइल का संयुक्त हमला अपने 17वें दिन में प्रवेश कर गया है. इस बीच युद्ध थमने का नाम नहीं ले रहा है. ईरान होर्मुज से जहाजों के गुजरने में बाधा डालना जारी रखा है. यह मसला गरमाता जा रहा है. इसे लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर नाटो (NATO) होर्मुज खोलने में अमेरिका की मदद नहीं करेगा तो इसका भविष्य बहुत बुरा होगा. इजराइली वायु सेना (IAF) ने रविवार को बताया कि उसने पिछले एक दिन में पश्चिमी और मध्य ईरान में 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए. इन हमलों में मिसाइल सिस्टम, रक्षा प्रतिष्ठान और ऑपरेशनल हेडक्वार्टर जैसे सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया गया. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि अमेरिका ने यूएई में दो जगहों—रास अल-खैमाह और दुबई के बहुत करीब स्थित एक जगह—से खार्ग द्वीप और अबू मूसा द्वीप पर हमला किया. उन्होंने इस कार्रवाई को खतरनाक बताया और कहा कि ईरान सावधानी बरतने की कोशिश करेगा ताकि वहाँ किसी भी आबादी वाले इलाके पर हमला न हो. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने कहा कि ईरान के इस दावे पर उसके पास कोई प्रतिक्रिया नहीं है. इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि देश ने खार्ग द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेहरान होर्मुज से जहाजों के गुजरने में बाधा डालना जारी रखता है, तो तेल से जुड़े बुनियादी ढाँचे भी अगला निशाना बन सकते हैं. वहीं तेल की कीमतों और सप्लाई को लेकर दुनिया भर में बढ़ती चिंता के बीच, ट्रंप ने शनिवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देश होर्मुज को खुला और सुरक्षित रखने के लिए युद्धपोत भेजेंगे. अराघची ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पड़ोसी देशों से विदेशी हमलावरों को बाहर निकालने का आग्रह किया और ट्रंप की इस अपील को भीख मांगना बताया.

होर्मुज में युद्धपोत भेजने की ट्रंप की गुजारिश पर ‘अभी कुछ तय नहीं’: जापान

जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची ने कहा कि उनकी सरकार को वॉशिंगटन से इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जापान समेत दूसरे देशों से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में मदद के लिए जहाज भेजने की जो अपील की है, उस पर क्या करना है. ताकाइची ने संसद के एक सत्र में बताया कि अधिकारी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि जापान इस क्षेत्र में अपने जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी कानूनी सीमाओं के दायरे में रहकर क्या-क्या कर सकता है. भले ही अमेरिका की तरफ से कोई गुजारिश आई हो या न आई हो.’ रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी ने कहा कि मौजूदा सुरक्षा हालात को देखते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य में युद्धपोत भेजने की उनकी कोई योजना नहीं है. 

ट्रंप के अनुरोध के बाद भी होर्मुज में नौसेना का जहाज नहीं भेजेंगे: ऑस्ट्रेलिया

ऑस्ट्रेलिया के परिवहन मंत्री ने सोमवार को कहा कि देश होर्मुज जलडमरूमध्य में नौसेना का कोई जहाज नहीं भेजेगा. यह फैसला तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दूसरे देशों से इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा में मदद के लिए युद्धपोत भेजने का आह्वान किया था. परिवहन मंत्री कैथरीन किंग ने राष्ट्रीय प्रसारक एबीसी से कहा, ‘हम होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई जहाज नहीं भेजेंगे.’ 

दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमलों में 5 लोगों की मौत: स्वास्थ्य मंत्रालय

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि रविवार को टायर जिले में हुए एक हमले में तीन लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए. मरजेयौन जिले में हुए एक अन्य हमले में दो लोगों की मौत हुई और चार अन्य घायल हो गए. मंत्रालय ने बताया कि 2 मार्च को हिजबुल्लाह द्वारा उत्तरी इजरायल की ओर रॉकेटों की बौछार करने के बाद, जब हिजबुल्लाह और इजराइल के बीच संघर्ष फिर से भड़का तब से इजराइली हमलों में लेबनान में 850 लोगों की मौत हो चुकी है. इनमें 107 बच्चे और 66 महिलाएं शामिल हैं. मंत्रालय ने आगे बताया कि इन हमलों में 2026 लोग घायल भी हुए हैं. 

अराघची ने ट्रंप के उन दावों को खारिज किया कि ईरान युद्धविराम चाहता है

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया कि ईरान युद्धविराम चाहता है. उन्होंने कहा कि ईरान जब तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा के लिए तैयार है. सीबीएस न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर किए गए हमलों का भी बचाव किया. अराघची ने कहा कि तेहरान तब तक सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा जब तक अमेरिका इस ‘अवैध युद्ध’ को खत्म नहीं कर देता. इस न्यूज चैनल को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी नेता ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि ईरान ने बातचीत या युद्धविराम की मांग की थी. अराघची ने कहा, ‘नहीं, हमने कभी युद्धविराम की मांग नहीं की और हमने बातचीत की भी कभी मांग नहीं की. हम जब तक जरूरी होगा, अपनी रक्षा के लिए तैयार हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि ईरान तब तक सैन्य अभियान जारी रखेगा जब तक अमेरिका अपना रुख नहीं बदल लेता.

इजराइल को उसके युद्ध अपराधों के लिए दंडित किया जाना चाहिए:ईरानी विदेश मंत्री

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इजराइल पर बड़ा आरोप लगाया है. उन्होंने एक्स पर कहा,’ईरान में ईंधन डिपो पर इजराइल की बमबारी अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और पर्यावरण विनाश के समान है. निवासियों के स्वास्थ्य और कल्याण को दीर्घकालिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है. मिट्टी और भूजल का प्रदूषण पीढ़ियों तक असर डाल सकता है. इजराइल को उसके युद्ध अपराधों के लिए दंडित किया जाना चाहिए.’

 

अंतिम ग्यारह से बाहर होने से हताश था : सैमसन

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नई दिल्ली। टी20 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन कर प्लेयर ऑफ द टूर्नोमेंट रहे बल्लेबाज संजू सैमसन ने कहा है कि वह शुरुआती दौर में टीम में जगह नहीं मिलने से हताश थे। सैमसन ने कहा कि उन्होंने तय किया था कि अवसर मिलने पर टीम की जरुरत के हिसाब से खेलेंगे। उसी कारण वह सफल रहे। इसी से उन्हें अंतिम ग्याह में जगह बनाने में भी सहायता मिली। इस बल्लेबाज ने कहा, ‘मैं अपने के लिए अच्छा प्रदर्शन करने की जगह पर दूसरों के लिए अच्छा करना पसंद करता हूं। मैं टीम में जगह बनाने के लिए अपने ही साथियों से मुकाबला करना चाहता था जो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।’ 
उन्होंने कहा, ‘मैं बहुत बेचैन था क्योंकि मुझे पता था कि मेरा सपना अब बहुत करीब है। परन्तु टीम अलग-अलग संयोजन आजमा रही थी, जिससे मुझे जगह मिलेगी या नहीं जैसी बातें मेरे दिमाग में थीं। ’ संजू ने कहा, ‘मैं पूरी तरह टूट गया था क्योंकि मेरा सपना विश्व कप जीतना था पर मैं अंतिम ग्यार में जगह नहीं बना पाया था।  इसलिए मैं पांच-छह दिन सबसे दूर चला गया और अपने को फिर से संभालना शुरू किया।’
उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने को तैयार करना शुरू कर दिया था, ये जानते हुए कि खेलने का अवसर मिलने की संभावना काफी कम है।’ उन्हें जिम्बाब्वे के खिलाफ सुपर आठ मैच में मिला उसमें वह हालांकि अधिक रन नहीं बना पाये पर प्रबंधन ने उन्हें टीम में बनाये रखा। सैमसन ने कहा, ‘मुझे पता था कि टीम मैनेजमेंट को मुझ पर भरोसा है। जिम्बाब्वे मैच से ही, हमें चार में से चार मैच जीतने थे और टीम को मेरी जरूरत थी. तभी से मेरे लिए चीजें सही दिशा में हो गईं और मैं उत्साहित हो गया।’ इस बल्लेबाज ने कहा, ‘जिस दिन से मैंने क्रिकेट खेलना शुरू किया, मेरा एक ही सपना था कि देश के लिए खेलूं जिसमें सफल रहा। साथ ही कहा कि  जब आप देश के लिए खेलते हैं तो सबसे बड़ा सपना अपने देश के लिए आईसीसी ट्रॉफी जीतना होता है।’
उन्होंने कहा, ‘शुरुआत वैसी नहीं थी जैसी मैं चाहता था, लेकिन फिर भी मैं खुश था क्योंकि टीम अच्छा कर रही थी और हम मैच जीत रहे थे।’ उन्होंने कहा, ‘मेरा सपना था कि मैं एक दिन विश्व चैंपियन बनूं। ये सिर्फ एक ट्रॉफी की बात नहीं है, बल्कि ये इस बात पर है कि मैं अपने देश के लिए कितनी ट्रॉफी जीत सकता हूं। मैं इसी सोच के साथ खेलता हूं।’ 

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बीजेपी तमिलनाडु में चुनाव से पहले टीवीके को एनडीए गठबंधन में चाहती है जोड़ना

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नई दिल्ली। तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी और टीवीके के बीच गठबंधन को लेकर बातचीत आखिरी दौर में है। बीजेपी की कोशिश है कि अभिनेता विजय की पार्टी को एनडीए के साथ जोड़ा जाए। इसके लिए पार्टी कई रास्तों से विजय से संपर्क कर रही है, जिसमें दूसरे राज्य के एक उपमुख्यमंत्री को बिचौलिया बनाया गया है। मीडिया रिपोर्ट में बीजेपी सूत्रों के हवाले से बताया कि विजय को एक बड़ा ऑफर दिया गया है। अगर गठबंधन चुनाव जीतता है, तो विजय को उपमुख्यमंत्री का पद मिल सकता है। साथ ही सीटों के बंटवारे को लेकर बीजेपी ने उनकी पार्टी को करीब 80 सीटें देने का प्रस्ताव रखा है। पेंच अभी इस बात पर फंसा है कि विजय खुद सीएम बनना चाहते हैं और इसी मुद्दे पर बातचीत अटकी है।
रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी को लगता है कि विजय के प्रशंसकों की भारी संख्या तमिलनाडु चुनाव में खेल कर सकती है। रणनीतिकारों का मानना है कि राज्य के कड़े मुकाबले में अगर सिर्फ 2 फीसदी वोट भी इधर-उधर होते हैं, तो जीत-हार का फैसला बदल सकता है। विजय के आने से बीजेपी को राज्य के चुनावी समीकरण अपने पक्ष में मुड़ने की उम्मीद है। दूसरी ओर विजय के करीबी सलाहकारों में इस गठबंधन को लेकर थोड़ी बेचैनी है। उन्हें डर है कि इतनी जल्दी किसी बड़े राष्ट्रीय गठबंधन का हिस्सा बनने से उनकी पार्टी की साख पर बुरा असर पड़ सकता है। विजय ने राजनीति में अपनी पहचान एक नए और स्वतंत्र विकल्प के रूप में बनाई है। सलाहकारों को चिंता है कि बीजेपी से हाथ मिलाने पर उनकी यह अलग पहचान कहीं फीकी न पड़ जाए।

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