पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर अकीब ने बुमराह पर तंज कसा, उस्मान तारिक से की तुलना 

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लाहौर । भारतीय टीम के मुख्य तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को जहां अभी के समय में विश्व के सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजों में शामिल किया जाता है। वहीं पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर और चयनकर्ता अकीब जावेद ने बुमराह का मजाक उड़ाया है। अकीब के अनुसार बुमराह पाक के स्पिनर उस्मान तारिक जैसे गेंदबाज हैं। अकीब ने बुमराह को तेज गेंदबाजों का उस्मान तारिक बताया है। इससे पता चलता है कि अकीब बुमराह को मिल सफलतों से जलते हैं। बुमराह विश्वकप में सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शामिल रहे हैं। उनके नाम 500 अंतरराष्ट्रीय विकेट हैं। .
पिछले कई दिनों से बुमराह छाये हुए हैं। इससे आकिब खुश नहीं है। इसी कारण उन्होंने बुमराह की तुलना उस्मान तारिक जैसे नये गेंदबाज से की है। 
इससे प्रशंस भी हैंरान है क्योंकि तारीक ने अभी अभी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलना शुरू ही किया है जबकि बुमराह पिछले 10 सालों से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं।
वहीं अकीब का कहना है उनकी लक्ष्य बुमराह का मजाक उड़ाना नहीं था। जावेद ने कहा, ‘आज के दौर में, पूरे विश्व कप में बुमराह ही अलग तरह का गेंदाबाज था। मैं हमेशा कहता हूं कि वह तेज गेंदबाजो ंका उस्मान तारिक है. वह इतनी तेज और अनोखे अंदाज में गेंदबाजी करता है कि बल्लेबाज कभी भी उसके खिलाफ लय नहीं पकड़ पाते हैं।’वहीं पहली बार विश्वकप खेल रहे थे। उन्होंने हालांकि अच्छी गेंदबाजी की पर उनकी तुलना बुमराह से नहीं हो सकती। 

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असम विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने उम्मीदवारों की दूसरी सूची की जारी 

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नई दिल्ली। कांग्रेस ने असम में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए 23 उम्मीदवारों की अपनी दूसरी सूची शनिवार को जारी कर दी, जबकि पूर्वोत्तर राज्य में अपने गठबंधन सहयोगियों के लिए 15 सीटें छोड़ी हैं, असम में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होने हैं। इस घोषणा के साथ कांग्रेस ने अब तक 126-सदस्यीय असम विधानसभा के लिए 65 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल द्वारा जारी सूची के मुताबिक नूरुल इस्लाम श्रीजंग्राम से, अब्दुल खालेक मांडिया से, रकीबुद्दीन अहमद चमारिया से, डेविड फुकन तिनसुकिया से और बिपुल गोगोई तिनखोंग से चुनाव लड़ेंगे।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने 3 मार्च को असम विधानसभा चुनावों के लिए 42 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की थी, जिसमें पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को जोरहाट सीट से मैदान में उतारा था। चुनावों की घोषणा से पहले ही अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने में बढ़त बनाते हुए, कांग्रेस ने कहा कि असम में कांग्रेस विधायक दल के नेता देबब्रत सैकिया नाज़िरा सीट से चुनाव लड़ेंगे। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष रिपुन बोरा को बरछल्ला सीट से मैदान में उतारा है।
कांग्रेस ने चुनावों की औपचारिक घोषणा से पहले ही टिकट वितरण में बढ़त बनाकर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश की है। पार्टी के कई बड़े चेहरे मैदान में उतर चुके हैं जिनमें गौरव गोगोई जोरहाट सीट से ताल ठोक रहे हैं। देबब्रत सैकिया अपनी परंपरागत नाज़िरा सीट से चुनाव लड़ेंगे। रिपुन बोरा बरछल्ला सीट से मैदान में उतारे गए हैं। 
असम में बीजेपी विरोधी मतों के बिखराव को रोकने के लिए कांग्रेस ने महागठबंधन मॉडल को प्राथमिकता दी है। 15 सीटें सहयोगियों के लिए छोड़कर पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह क्षेत्रीय दलों को उचित सम्मान देने के पक्ष में है। अप्रैल में होने वाले इन चुनावों में यह गठबंधन सत्ता विरोधी लहर को भुनाने की कोशिश करेगा।

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रहाणे की कप्तानी में ही इस बार भी उतरेगी केकेआर 

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मुम्बई। इस माह के अंत में शुरु हो रहे इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के लिए कोलकाता नाइटराइडर्स (केकेआर) अपने कप्तान को नहीं बदलेगी। पिछली बार आजिंक्य रहाणे की कप्तानी में टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा था। टीम ने साल 2024 में खिताब जीता था पर पिछले साल 2025 में वह असफल रही। ऐेसे में माना जा रहा था कि केकेआर इस बार कप्तान बदल सकती है क्योंकि रहाणे टीम को जीत नहीं दिला पाये थे। वहीं ताजा रिपोर्ट के अनुसार फ्रेंचाइजी ने एक बार फिर रहाणे के अनुभव पर अपना भरोसा बरकरार रखा है। पिछले सत्र में टीम 13 में से केवल 5 मैचों में जीत मिली थी पर प्रबंधन का मानना है कि टीम के मौजूदा संतुलन को देखते हुए रहाणे ही नेतृत्व के लिए सबसे बेहतर रहेंगे। 
पिछले साल रहाणे ने केकेआर के लिए सबसे ज्यादा रन बनाये थे। नंबर 3 पर खेलते हुए उन्होंने शानदार प्रदर्शन किया था और माना जा रहा है कि वह इस साल भी इसी नंबर तीन पर ही खेलेंगे। टीम के लिए हालांकि सलामी जोड़ी की समस्या है। 

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आईसीसी ने पाकिस्तान के आगा को आचारसंहित उल्लंघन के लिए फटकार लगायी 

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ढाका। अंतरराष्ट्रीय क्रिेकेट परिषद ( आईसीसी) ने पाकिस्तान के बल्लेबाज सलमान अल आगा को आचारसंहित उल्लंघन के लिए कड़ी फटकार लगाते हुए उनके खाते में एक नकरात्मक अंक दर्ज किया है। आगा पर बांग्लादेश के खिलाफ दूसरे एकदिवसीय मैच के दौरान गुस्से में खेल उपकरणों को मैदान में पटकने का दोषी पाया गया है। आईसीसी इसी कारण आगा को कड़ी फटकार लगायी है। ढाका में खेले गए मैच के दौरान आगा को बांग्लादेशी कप्तान मेहदी हसन मिराज ने रन आउट किया था। जिसपर विवाद हो गया और आगा ने इससे खेल भावना के विपरीत मानते हुए अपना गुस्सा दिखाया। आउट होकर पवेलियन लौटते समय उन्होंने हेलमेट और ग्लव्स बाउंड्री के पास फेंक दिए थे। आईसीसी ने इसे आचार संहिता के अनुच्छेद 2.2 का उल्लंघन माना है। ये अनुच्छेद अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान खेल सामग्री या उपकरणों के साथ दुर्व्यवहार से संबंधित है। सजा के तौर पर उनके खाते में एक नकारात्मक अंक दर्ज किया गया है। 

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दिल्ली के नेयर बाजार में लगी भीषण आग, 50 दुकानें जलकर राख

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नई दिल्ली। दक्षिण दिल्ली के मशहूर नेचर बाजार में रविवार सुबह आग लगने से भारी तबाही हुई। इस भीषण आग में हस्तशिल्प और कलाकृतियों की करीब 50 दुकानें जलकर खाक हो गई हैं। दिल्ली अग्निशमन सेवा के मुताबिक आग लगने की सूचना सुबह 7:37 बजे मिली। चूंकि बाजार में ज्यादातर अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानें थीं, जिनमें लकड़ी, कपड़े और हस्तशिल्प का सामान भरा था, इसलिए आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते पूरे आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। दमकल विभाग ने तुरंत 10 गाड़ियां मौके पर भेजीं।
मीडिया रिपोर्ट में अधिकारी के हवाले से बताया कि आग लाडो सराय क्षेत्र में अंधेरिया मोड़ के पास स्थित नेचर बाजार में लगी जहां हस्तशिल्प और अन्य सामान बेचने वाली कई अस्थायी और अर्ध-स्थायी दुकानें लगी। दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पाने और उसे फैलने से रोकने के लिए व्यापक अभियान चलाया। इस घटना में लगभग 50 दुकानें जलकर नष्ट हो गईं। दमकलकर्मी आग को पूरी तरह बुझाने और इलाके में शीतलन अभियान चलाया। खबर लिखे जाने तक आग लगने के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। इस दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे ।

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पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान, मतदान 9, 23 और 29 अप्रैल को

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जानें पश्चिम बंगाल में कब हैं चुनाव 

असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को वोटिंग तो तमिलनाडु में 23 अप्रैल  

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने रविवार को पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि असम, केरला, पुडुचेरी, तमिलनाडु और वेस्ट बंगाल में विधानसभा चुनाव अप्रैल में होंगे, जबकि मतगणना 4 मई 2026 को की जाएगी। 
चुनाव आयोग द्वारा घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार असम, केरल और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान होगा, जबकि तमिलनाडु में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। वहीं पश्चिम बंगाल में चुनाव दो चरणों में संपन्न होंगे, पहला चरण 23 अप्रैल को जबकि दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा। सभी राज्यों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। 
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि इन पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में कुल 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। चुनाव के लिए लगभग 2.19 लाख मतदान केंद्र बनाए गए हैं और करीब 25 लाख ईवीएम मशीनों के जरिए कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के लिए निर्वाचन आयोग ने हाल ही में सभी चुनावी राज्यों का दौरा किया था। इस दौरान आयोग ने विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और प्रवर्तन एजेंसियों के नोडल अधिकारियों से मुलाकात कर सुझाव लिए। इसके अलावा संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों, पुलिस महानिदेशकों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ भी बैठकें आयोजित की गईं। 

फेक और गलत सूचना रोकने विशेष इंतेजाम  
चुनाव आयोग ने इस बार सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और गलत सूचना को रोकने के लिए भी विशेष दिशानिर्देश जारी किए हैं। आयोग का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। 

आदर्श आचार संहिता लागू 
चुनाव की घोषणा के साथ ही इन राज्यों में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। इसके तहत सरकारें नई योजनाओं की घोषणा या बड़े विकास कार्यों की शुरुआत नहीं कर सकेंगी। राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव काफी अहम माने जा रहे हैं। वर्तमान में पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की सरकार है, तमिलनाडु में दृविण मुनेत्रकणहम, केरल में लेफ्ट डेमो्क्रेटिक फ्रंट, असम में भारतीय जनता पार्टी और पुडुचेरी में आल इंडिया एनआर कॉंग्रेस-भाजपा गठबंधन सत्ता में है। 

हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू, AIIMS में बनाई गई विशेष चिकित्सक टीम

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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का एक परिवार अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से दूर जाता देख रहा है। ऐसी बीमारी जिसने बेटे को बेड पर ऐसा पटका, फिर उठ न पाया। 13 सालों से पेड़ की तरह यानी वेजिटेटिव अवस्था में पड़े बेटे को देखकर एक मां का दिल भी डूब गया। बूढ़ी होती हडि्डयों में बेटे को उठाने की क्षमता नहीं बची। देखभाल करने की ताकत कम पड़ने लगी, ऐसी स्थिति में कोर्ट जाना पड़ा। जिस बेटे को नौ महीने कोख में पाला। 19 सालों तक सामने बड़ा होते देखा। उसके बचपन से लेकर किशोरावस्था और फिर युवा होने तक की सारी बातें अब उस मां की आंखों के आगे तैर रही हैं। क्योंकि, अब वह बेटा जो घर के एक बेड पर पेड़ बना पड़ा था, नहीं है। एम्स में भर्ती कराया गया है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा की। अशोक राणा और निर्मला राणा का जीवन 13 सालों से जिस बेटे के आगे-पीछे घूमता रहा, अब वह घर में नहीं है। हरीश की इच्छामृत्यु याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रक्रिया को पूरी कराने के लिए। मां भावुक है। बचपन की यादें आंखों में तैरती है तो आंसुओं की धार फूट पड़ती है। सिसकियां एक जवान बेटे के बेड पर पड़े लाचार बनने की बात करते हुए फूट जाती है।

घर में प्यारा था हरीश

हरीश राणा में घर में प्यारा था। बड़ा था तो शैतानी भी करता था। मम्मी डांटने लगती तो घर के कोने में छिप जाता था। फिर चुपचाप आता। मां के गले लग जाता। उसके चेहरे को सहलाने लगता। मां उन क्षणों को याद करते हुए भावुक होती हैं। कहती हैं कि हमारा पहला बच्चा था। सबसे अधिक लाड़-प्यार उसे ही मिला। मां कहती हैं कि वर्षों से बिस्तर पर लेटा है। शरीर पर जगह-जगह घाव हो गया है। हम रोज उसकी सफाई करते थे। छोटे बच्चे की तरह। बचपन में जैसे करते थे। अब उसकी तकलीफ नहीं देखी जाती। इसलिए, हमने कड़े दिल से उसे जाने की इजाजत दे दी। भगवान से प्रार्थना है कि मेरे बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दे दें।

1993 में हुआ था जन्म

हरीश का जन्म 12 सितंबर 1993 को दिल्ली में हुआ था। निर्मला देवी बताती हैं कि बेटे के पैदा होने पर घर खुशियों से गूंज उठा था। घर में गीत गाए थे। वह कभी जिद्दी नहीं रहा। समझाने पर समझ जाता था। वह हंसमुख स्वाभाव का था। खुद हंसता और दूसरों को भी हंसाता रहता था। दिल्ली से 12वीं करने के बाद अपने सिविल इंजीनियरिंग के सपने को पूरा करने चंडीगढ़ गया था।मां कहती हैं कि 21 अगस्त 2013 का दिन मेरी दुनिया को उजाड़ने वाला दिन था। बेटे के पीजी की चौथी मंजिल से गिरने की खबर मिली। डॉक्टरों ने कहा कि ठीक नहीं हो सकता है। हमारा दिल नहीं माना। हमने हर जगह इलाज कराया। व्रत, पूजा-पाठ से लेकर तमाम जतन किए, लेकिन बेटा ठीक नहीं हो सका।

मौत मांगना आसान नहीं

13 साल से जिंदगी-मौत से जूझ बेटे की देखभाल में जुटे परिवार ने काफी संघर्ष किया। इलाज में पैसे बहाए, लेकिन उम्मीद टूटती रही। आखिरकार, मां-बाप ने इच्छा मृत्यु के लिए अर्जी दायर की। हरीश के इलाज पर हर महीने करीब 70 हजार रुपये तक का खर्च आता था। इलाज में पुरखों का घर और जमीन सब बिक गई। दिल्ली स्थित तीन मंजिला मकान तक बिक गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पिता अशोक राणा ने कहा था कि अपनी औलाद को ऐसे पल-पल तड़पते देखना बहुत मुश्किल होता है।

एम्स में शुरू हुई प्रक्रिया

एम्स में भर्ती कराए जाने के बाद हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को शुरू कराया गया है। एम्स प्रबंधन ने आंकोएनेस्थीसिया और पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञ डॉक्टर के नेतृत्व में एक कमिटी बनाई है। इसमें अलग-अलग कई विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। इस कमिटी की देखरेख में हरीश के स्वास्थ्य की देखभाल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल होगा। सीनियर डॉक्टर के अनुसार, पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा है। हरीश के स्वास्थ्य का मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगे।

डॉक्टर के मुताबिक, हरीश के गले में एक ट्यूब डली है। इसके माध्यम से वह सांस लेते हैं। 13 वर्ष पहले वेंटिलेटर सपोर्ट दिए जाने के दौरान यह ट्यूब डाली गई थी। इसके बाद से ही यह ट्यूब लगी हुई है। सांस लेने के लिए किसी तरह का कृत्रिम सपोर्ट नहीं दिया गया है। वह खुद से सांस ले पा रहे हैं। पेट में लगी ट्यूब के माध्यम से उन्हें पोषण दिया जाता है। साथ ही, उन्हें कैथेटर लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति के तहत हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

एम्स में डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी हरीश राणा की देखभाल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में उनका पैलिएटिव केयर होगा। जीवन बचाने के लिए कोई एक्टिव इलाज या वेंटिलेटर सपोर्ट उन्हें नहीं दिया जाएगा। पैलिएटिव केयर में मरीज को दर्द या किसी तरह की पीड़ा होने पर उससे राहत देना होता है। ऐसे में हरीश के कई दिनों तक एम्स में एडमिट रहने की उम्मीद की जा रही है।

ईरान से बातचीत के फैसले पर थरूर ने जताया समर्थन, बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के साथ बातचीत करने के भारत सरकार के फैसले का समर्थन (Government Support) किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत चुपचाप नहीं बैठ सकता और नई दिल्ली को शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी।

‘भारत को शांति की नई आवाज बनना चाहिए’

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि भारत की यह पहल सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत शांति की दिशा में पहल कर रहा है। ऐसे तनावपूर्ण समय में हमें सक्रिय रहना चाहिए। हम इस युद्ध को चुपचाप बैठकर नहीं देख सकते।”

दोनों पक्षों की गलती बताई

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में युद्ध को लेकर प्रस्ताव और वैश्विक प्रतिक्रिया पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि इस संघर्ष में दोनों पक्षों की गलतियां हैं। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किया गया शुरुआती हमला सही नहीं था।उन्होंने कहा कि जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय आत्मरक्षा के नाम पर हमला करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा उन देशों पर हमला करना, जो सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं, वह भी गलत है।

भारत के हित जुड़े हैं पश्चिम एशिया से

थरूर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत के कई महत्वपूर्ण हितों पर पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति से लेकर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों तक, कई मामलों में भारत इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयानों से संकेत मिलता है कि यह संघर्ष जल्द खत्म होने वाला नहीं है, इसलिए भारत को शांति स्थापित करने के प्रयासों में भूमिका निभानी चाहिए।

ऊर्जा संकट की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका भी गहराती जा रही है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने के संकेत दिए जाने के बाद कई देशों को तेल और गैस के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं।

हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश में ऊर्जा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके साथ ही सरकार वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्पों पर भी लगातार काम कर रही है।

तेल, गैस के बाद अब भारत की इंटरनेट व्यवस्था को चोट पहुंच सकता हैं मिडिल ईस्ट में जारी तनाव 

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नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच में एक नया खतरा सामने दिख रहा है, जिसका बहुत बड़ा असर भारत पर पड़ सकता है। दरअसल, तनाव का असर दुनिया की इंटरनेट व्यवस्था को भी पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तब उस इलाके के समुद्र के नीचे बिछी फाइबर-ऑप्टिक्स केबल्स को नुकसान पहुंच सकता है। ये वहीं केबल्स हैं, जिससे दुनिया का ज्यादातर इंटरनेट डेटा गुजरता है।
बात दें कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में तेल गुजरता है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि समुद्र की सतह के नीचे यहां से कई महत्वपूर्ण इंटरनेट केबल्स भी गुजरती हैं। ये केबल्स एशिया, पश्चिम एशिया और यूरोप को डिजिटल रूप से जोड़ती हैं। एक के अनुसार भारत से यूरोप को जोड़ने वाली कई बड़ी केबल्स इसी क्षेत्र से होकर गुजरती हैं। इसलिए यह इलाका भारत के लिए भी डिजिटल कनेक्टिविटी का बेहद अहम कॉरिडोर माना जाता है। 
इंटरनेट कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां और टेलीकॉम ऑपरेटर लगातार नए अंडरसी केबल नेटवर्क में निवेश कर रहे हैं। हाल ही में गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने नई दिल्ली की यात्रा के दौरान इंडिया-अमेरिका कनेक्ट प्रोजेक्ट की घोषणा की। इसका मकसद भारत को वैश्विक डिजिटल नेटवर्क से और मजबूत तरीके से जोड़ना है। 
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिम दिशा की इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं केबल्स के जरिए गुजरती है।  इसका मतलब अगर इस क्षेत्र में कोई बड़ी रुकावट आती है, तब भारत और यूरोप के बीच डेटा ट्रांसमिशन प्रभावित हो सकता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक इंटरनेट नेटवर्क में बैकअप सिस्टम भी मौजूद हैं। 
इस पूरे मामले से जुड़े एक जानकार ने कहा, समुद्री केबल्स में रेडंडेंसी होती है। अगर एक केबल कट भी जाए, तब डेटा दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है, लेकिन अगर कई केबल्स एक साथ प्रभावित हो जाएं, तब बाकी रूट्स पर ज्यादा लोड पड़ जाएगा। इसके बाद इंटरनेट की स्पीड स्लो हो सकती है और सर्विस में दिक्कतें आ सकती हैं। 
उन्होंने कहा कि इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देगा। दुनिया भर में इंटरनेट सर्वर रिजर्व में रखे जाते हैं। भारत के पास भी इसतरह के सिस्टम हैं। इस कारण कम से कम एक हफ्ते तक बड़ा असर देखने को नहीं मिलेगा। इसके अलावा अटलांटिक महासागर से आने वाले केबल्स भी विकल्प के रूप में मौजूद हैं। 
एक अन्य जानकार ने कहा कि, अभी तक इंटरनेट कनेक्टिविटी पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन अगर केबल्स काट दी गईं या टेलीकॉम और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला हुआ, तब स्थिति गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक भारत का अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट ट्रैफिक मुख्य रूप से दो बड़े गेटवे से बाहर जाता है। एक मुंबई में और दूसरा चेन्नई में। मुंबई के रास्ते जाने वाला डेटा अरब सागर और खाड़ी क्षेत्र से होकर यूरोप तक पहुंचता है, इसलिए इस इलाके में किसी भी तरह की गड़बड़ी भारत के डिजिटल नेटवर्क को प्रभावित कर सकती है।
साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ ने बताया कि दुनिया का इंटरनेट सैटेलाइट्स से नहीं बल्कि समुद्र के नीचे बिछी केबल्स से चलता है। उन्होंने कहा, दुनिया के 99 प्रतिशत से ज्यादा डेटा अंडरसी फाइबर-ऑप्टिक केबल्स से गुजरता है। यही डिजिटल अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ हैं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ के मुताबिक रेड सी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास का इलाका आज दुनिया का अहम डिजिटल हाईवे बन चुका है। अगर यहां कोई रुकावट आती है, तब इंटरनेट सर्विसेज़ स्लो हो सकती हैं और ग्लोबल कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि युद्ध की स्थिति में ये केबल्स बेहद असुरक्षित हो जाती हैं। उनके मुताबिक, अब दुनिया एक नए सीबेड इंफ्रास्ट्रक्चर वॉर की तरफ बढ़ रही है। जैसे तेल पाइपलाइन और समुद्री रास्ते रणनीतिक संपत्ति माने जाते हैं, वैसे ही अब इंटरनेट केबल्स भी वैश्विक शक्ति संतुलन का अहम हिस्सा बन गए हैं।

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‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’, BJP पर भी निशाना

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लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष (Leader of Opposition in Lok Sabha) और कांग्रेस सांसद (Rahul Gandhi) ने लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन (constitutional convention) में अपनी ही पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, लेकिन उसके कई बड़े नेता अमीर हैं।राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस गरीब पार्टी है, लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं वे बहुत अमीर हैं। हम अमीर पार्टी बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी, वह भाजपा बन जाएगी।”उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ढांचा Mahatma Gandhi के समय से ही तय किया गया था और पार्टी का उद्देश्य हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज बनना रहा है।

कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन

लखनऊ में Kanshi Ram की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ कमजोरियों के कारण ही बहुजन आंदोलन को ताकत मिली और कांशीराम राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर पाए।

उनका कहना था कि अगर कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव की दिशा में तेज़ी से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं मिलती।

केवल इच्छा से नहीं होता बदलाव

कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में केवल चाहने से कुछ नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि अन्याय को स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ खड़ा होना है, तब तक समाज में बदलाव संभव नहीं है।

संविधान और मौजूदा सरकार पर टिप्पणी

संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों साल पुरानी सभ्यता की आवाज़ है और इसकी मूल भावना सामाजिक न्याय और बराबरी की है।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सत्ता इस मूल भावना को स्वीकार नहीं करती।

अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का जिक्र

अपने संबोधन में राहुल गांधी ने B. R. Ambedkar और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों पर संघर्ष किया।

ऊर्जा नीति और सरकार पर आरोप

राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है।

समाज में असमानता का मुद्दा

राहुल गांधी ने कहा कि देश का समाज आज 15 प्रतिशत और 85 प्रतिशत में बंट गया है, जहां संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है।

2027 चुनाव की तैयारी

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति को बदलने का समय आ गया है और सबकी हिस्सेदारी वाली राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है।
गौरतलब है कि हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। अब यही गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सफलता को दोहराने की रणनीति पर काम कर रहा है।