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Thursday, August 6, 2026
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हरीश राणा की इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू, AIIMS में बनाई गई विशेष चिकित्सक टीम

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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का एक परिवार अपने कलेजे के टुकड़े को खुद से दूर जाता देख रहा है। ऐसी बीमारी जिसने बेटे को बेड पर ऐसा पटका, फिर उठ न पाया। 13 सालों से पेड़ की तरह यानी वेजिटेटिव अवस्था में पड़े बेटे को देखकर एक मां का दिल भी डूब गया। बूढ़ी होती हडि्डयों में बेटे को उठाने की क्षमता नहीं बची। देखभाल करने की ताकत कम पड़ने लगी, ऐसी स्थिति में कोर्ट जाना पड़ा। जिस बेटे को नौ महीने कोख में पाला। 19 सालों तक सामने बड़ा होते देखा। उसके बचपन से लेकर किशोरावस्था और फिर युवा होने तक की सारी बातें अब उस मां की आंखों के आगे तैर रही हैं। क्योंकि, अब वह बेटा जो घर के एक बेड पर पेड़ बना पड़ा था, नहीं है। एम्स में भर्ती कराया गया है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन निवासी हरीश राणा की। अशोक राणा और निर्मला राणा का जीवन 13 सालों से जिस बेटे के आगे-पीछे घूमता रहा, अब वह घर में नहीं है। हरीश की इच्छामृत्यु याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रक्रिया को पूरी कराने के लिए। मां भावुक है। बचपन की यादें आंखों में तैरती है तो आंसुओं की धार फूट पड़ती है। सिसकियां एक जवान बेटे के बेड पर पड़े लाचार बनने की बात करते हुए फूट जाती है।

घर में प्यारा था हरीश

हरीश राणा में घर में प्यारा था। बड़ा था तो शैतानी भी करता था। मम्मी डांटने लगती तो घर के कोने में छिप जाता था। फिर चुपचाप आता। मां के गले लग जाता। उसके चेहरे को सहलाने लगता। मां उन क्षणों को याद करते हुए भावुक होती हैं। कहती हैं कि हमारा पहला बच्चा था। सबसे अधिक लाड़-प्यार उसे ही मिला। मां कहती हैं कि वर्षों से बिस्तर पर लेटा है। शरीर पर जगह-जगह घाव हो गया है। हम रोज उसकी सफाई करते थे। छोटे बच्चे की तरह। बचपन में जैसे करते थे। अब उसकी तकलीफ नहीं देखी जाती। इसलिए, हमने कड़े दिल से उसे जाने की इजाजत दे दी। भगवान से प्रार्थना है कि मेरे बेटे को इस पीड़ा से मुक्ति दे दें।

1993 में हुआ था जन्म

हरीश का जन्म 12 सितंबर 1993 को दिल्ली में हुआ था। निर्मला देवी बताती हैं कि बेटे के पैदा होने पर घर खुशियों से गूंज उठा था। घर में गीत गाए थे। वह कभी जिद्दी नहीं रहा। समझाने पर समझ जाता था। वह हंसमुख स्वाभाव का था। खुद हंसता और दूसरों को भी हंसाता रहता था। दिल्ली से 12वीं करने के बाद अपने सिविल इंजीनियरिंग के सपने को पूरा करने चंडीगढ़ गया था।मां कहती हैं कि 21 अगस्त 2013 का दिन मेरी दुनिया को उजाड़ने वाला दिन था। बेटे के पीजी की चौथी मंजिल से गिरने की खबर मिली। डॉक्टरों ने कहा कि ठीक नहीं हो सकता है। हमारा दिल नहीं माना। हमने हर जगह इलाज कराया। व्रत, पूजा-पाठ से लेकर तमाम जतन किए, लेकिन बेटा ठीक नहीं हो सका।

मौत मांगना आसान नहीं

13 साल से जिंदगी-मौत से जूझ बेटे की देखभाल में जुटे परिवार ने काफी संघर्ष किया। इलाज में पैसे बहाए, लेकिन उम्मीद टूटती रही। आखिरकार, मां-बाप ने इच्छा मृत्यु के लिए अर्जी दायर की। हरीश के इलाज पर हर महीने करीब 70 हजार रुपये तक का खर्च आता था। इलाज में पुरखों का घर और जमीन सब बिक गई। दिल्ली स्थित तीन मंजिला मकान तक बिक गया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद पिता अशोक राणा ने कहा था कि अपनी औलाद को ऐसे पल-पल तड़पते देखना बहुत मुश्किल होता है।

एम्स में शुरू हुई प्रक्रिया

एम्स में भर्ती कराए जाने के बाद हरीश राणा की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को शुरू कराया गया है। एम्स प्रबंधन ने आंकोएनेस्थीसिया और पैलिएटिव केयर के विशेषज्ञ डॉक्टर के नेतृत्व में एक कमिटी बनाई है। इसमें अलग-अलग कई विभागों के डॉक्टर भी शामिल हैं। इस कमिटी की देखरेख में हरीश के स्वास्थ्य की देखभाल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अमल होगा। सीनियर डॉक्टर के अनुसार, पैलिएटिव केयर वार्ड में छह बेड की सुविधा है। हरीश के स्वास्थ्य का मूल्यांकन शुरू कर दिया गया है। डॉक्टर आगे की प्रक्रिया निर्धारित करेंगे।

डॉक्टर के मुताबिक, हरीश के गले में एक ट्यूब डली है। इसके माध्यम से वह सांस लेते हैं। 13 वर्ष पहले वेंटिलेटर सपोर्ट दिए जाने के दौरान यह ट्यूब डाली गई थी। इसके बाद से ही यह ट्यूब लगी हुई है। सांस लेने के लिए किसी तरह का कृत्रिम सपोर्ट नहीं दिया गया है। वह खुद से सांस ले पा रहे हैं। पेट में लगी ट्यूब के माध्यम से उन्हें पोषण दिया जाता है। साथ ही, उन्हें कैथेटर लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च के पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति के तहत हरीश के जीवन रक्षक उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा।

एम्स में डॉक्टर और नर्सिंग कर्मचारी हरीश राणा की देखभाल कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अस्पताल में उनका पैलिएटिव केयर होगा। जीवन बचाने के लिए कोई एक्टिव इलाज या वेंटिलेटर सपोर्ट उन्हें नहीं दिया जाएगा। पैलिएटिव केयर में मरीज को दर्द या किसी तरह की पीड़ा होने पर उससे राहत देना होता है। ऐसे में हरीश के कई दिनों तक एम्स में एडमिट रहने की उम्मीद की जा रही है।

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