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ईरान से बातचीत के फैसले पर थरूर ने जताया समर्थन, बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता

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नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर (Shashi Tharoor) ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के साथ बातचीत करने के भारत सरकार के फैसले का समर्थन (Government Support) किया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में भारत चुपचाप नहीं बैठ सकता और नई दिल्ली को शांति के लिए सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार देर रात ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद दोनों नेताओं के बीच यह पहली सीधी बातचीत थी।

‘भारत को शांति की नई आवाज बनना चाहिए’

संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए थरूर ने कहा कि भारत की यह पहल सकारात्मक कदम है। उन्होंने कहा, “मुझे खुशी है कि भारत शांति की दिशा में पहल कर रहा है। ऐसे तनावपूर्ण समय में हमें सक्रिय रहना चाहिए। हम इस युद्ध को चुपचाप बैठकर नहीं देख सकते।”

दोनों पक्षों की गलती बताई

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में युद्ध को लेकर प्रस्ताव और वैश्विक प्रतिक्रिया पर बोलते हुए थरूर ने कहा कि इस संघर्ष में दोनों पक्षों की गलतियां हैं। उनके अनुसार अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किया गया शुरुआती हमला सही नहीं था।उन्होंने कहा कि जब बातचीत की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय आत्मरक्षा के नाम पर हमला करना उचित नहीं ठहराया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा उन देशों पर हमला करना, जो सीधे युद्ध में शामिल नहीं हैं, वह भी गलत है।

भारत के हित जुड़े हैं पश्चिम एशिया से

थरूर ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत के कई महत्वपूर्ण हितों पर पड़ सकता है। ऊर्जा आपूर्ति से लेकर खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों तक, कई मामलों में भारत इस क्षेत्र से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump के बयानों से संकेत मिलता है कि यह संघर्ष जल्द खत्म होने वाला नहीं है, इसलिए भारत को शांति स्थापित करने के प्रयासों में भूमिका निभानी चाहिए।

ऊर्जा संकट की आशंका

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका भी गहराती जा रही है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने के संकेत दिए जाने के बाद कई देशों को तेल और गैस के वैकल्पिक स्रोत तलाशने पड़ रहे हैं।

हालांकि भारत सरकार का कहना है कि देश में ऊर्जा संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता है। इसके साथ ही सरकार वैकल्पिक आपूर्ति के विकल्पों पर भी लगातार काम कर रही है।

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