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Wednesday, November 4, 2026
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PM मोदी का खुमड़ी पहनाकर हुआ स्वागत, ब्रह्माकुमारी शांति शिखर भवन का किया उद्घाटन

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रायपुर।  छत्तीसगढ़ में 25वें स्थापना दिवस की धूम है. प्रदेश में 5 दिनों तक राज्योत्सव मनाया जा रहा है. राज्योत्सव के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रायपुर पहुंचे. यहां उन्होंने नवा रायपुर के सेक्टर-20 में ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित शांति शिखर भवन का उद्घाटन किया. इस मौके पर उन्होंने संबोधित कहा- ‘राज्य के विकास से देश का विकास… इसी मंत्र पर चलकर हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं. विकसित भारत की अहम यात्रा में ब्रह्मकुमारी जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है. मैं अतिथि नहीं हूं. मैं आप ही का हूं.’

‘आज का दिन बहुत विशेष है‘ 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- ‘आज का दिन बहुत विशेष है. आज हमारा छत्तीसगढ़ अपनी स्थापना के 25 साल पूरे कर रहा है. छत्तीसगढ़ के साथ ही झारखंड और उत्तराखंड की स्थापना के भी 25 वर्ष पूरे हुए हैं. आज देश के और भी कई राज्य अपना स्थापना दिवस मना रहे हैं। मैं इन सभी राज्यों के निवासियों को स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई देता हूं. राज्य के विकास से देश का विकास, इसी मंत्र पर चलते हुए हम भारत को विकसित बनाने के अभियान में जुटे हैं.’

‘विकसित भारत की इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्था’

उन्होंने आगे कहा- ‘विकसित भारत की इस अहम यात्रा में ब्रह्माकुमारी जैसी संस्था की बहुत बड़ी भूमिका है. मेरा सौभाग्य रहा है कि मैं बीते कई वर्षों से आप सभी के साथ जुड़ा हुआ हूं. मैं जब भी आपके बीच आया हूं, मैंने आपके प्रयासों को बहुत गंभीरता से देखा है. मैंने हमेशा अनुभव किया है, जहां शब्द कम और सेवा ज्यादा है.’

‘आचारण ही सबसे बड़ा धर्म है’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- टहमारे यहां कहा जाता है, ‘आचारः परमो धर्म आचारः परमं तपः. आचारः परमं ज्ञानम् आचरात् किं न साध्यते. अत: आचारण ही सबसे बड़ा धर्म है, आचरण ही सबसे बड़ा तप है और आचरण ही सबसे बड़ा ज्ञान है. आचरण से क्या कुछ सिद्ध नहीं हो सकता. यानी बदलाव तब होता है जब अपने कथन को आचरण में भी उतारा जाए और यही ब्रह्माकुमारी संस्था की आध्यात्मिक शक्ति का स्रोत है.’

7 साल में बना शिखर भवन

जानकारी के मुताबिक ब्रह्माकुमारी संस्थान के नवनिर्मित शांति शिखर भवन को बनने में 7 साल का समय लग गया. संस्था की तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशिका राजयोगिनी बीके कमला के मार्गदर्शन में 15 जनवरी 2018 को इस भवन की नींव रखी गई थी. साल 2022 में उनके देवलोकगमन से पहले भवन का करीब 80% काम हो गया था. जमीन ठोस नहीं होने की वजह से काफी गहराई तक मिट्टी निकाल कर स्लैब ढाला गया. इसके बाद भवन के सारे कॉलम खड़े किए गए. जोधपुर के कारीगरों ने 7 साल में राजस्थानी शैली के इस भवन को तैयार किया है. यह भवन जोधपुर के पिंक स्टोन से तैयार किया गया है. इसके लिए जोधपुर से 150 से अधिक ट्रकों में पिंक स्टोन मंगाए गए थे.

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