असम में चुनावी तैयारी तेज, NDA में सीट बंटवारे पर 10 मार्च तक अंतिम मुहर

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गुवाहाटी। असम में आगामी विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Elections) से पहले सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच गई है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) ने गठबंधन के फार्मूले को अंतिम रूप देने के लिए नई तारीख 10 मार्च तय की है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सहयोगी दलों के साथ चर्चा जारी है और कुछ बिंदुओं पर सहमति बननी बाकी है। उन्होंने कहा कि बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट के साथ बातचीत एक-दो दिन में पूरी होने की उम्मीद है, जबकि असम गण परिषद के साथ 9–10 मार्च तक सभी मुद्दों पर सहमति बन जाएगी। इसके बाद गठबंधन औपचारिक रूप से सीट बंटवारे की घोषणा करेगा।

 

कुछ दलों से सहमति, कुछ से बातचीत जारी
सरमा के अनुसार, राभा हासोंग जौथा संग्राम समिति के साथ सीटों को लेकर समझौता पहले ही हो चुका है। देरी की एक वजह हाल में हुए राज्यसभा चुनाव भी बताए गए, जिनके कारण सहयोगी दल रणनीतिक रूप से सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

 

असम में एनडीए के प्रमुख घटक दलों में
भारतीय जनता पार्टी
असम गण परिषद
यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल
बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट शामिल हैं।
इसके अलावा जनशक्ति पार्टी भी गठबंधन का हिस्सा है, हालांकि वर्तमान विधानसभा में उसका प्रतिनिधित्व नहीं है।

पहले कई बार बदली समयसीमा
मुख्यमंत्री इससे पहले भी सीट बंटवारे को लेकर अलग-अलग समयसीमाएं घोषित कर चुके थे। फरवरी और जनवरी में भी समझौते की बात कही गई थी, लेकिन अंतिम सहमति टलती रही। अब 10 मार्च को निर्णायक तारीख माना जा रहा है।

परिसीमन के बाद बदला चुनावी गणित
2023 के परिसीमन के बाद राज्य के कई निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदली हैं। कुछ सीटें सामान्य से आरक्षित श्रेणी में गई हैं, जबकि कुछ आरक्षित सीटों को सामान्य श्रेणी में परिवर्तित किया गया है। इससे दलों के बीच सीट समायोजन और अधिक जटिल हो गया है।

वर्तमान विधानसभा की स्थिति
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि उसके सहयोगी दल भी सत्ता संतुलन में अहम भूमिका निभाते हैं। विपक्षी खेमे में

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
शामिल हैं, जिनके पास सीमित संख्या में विधायक हैं।

चुनाव से पहले ताकत का संतुलन साधने की कवायद
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिसीमन के बाद बदले सामाजिक और भौगोलिक समीकरणों को देखते हुए एनडीए सहयोगियों के बीच सीटों का संतुलन साधना रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। 10 मार्च की प्रस्तावित घोषणा को राज्य की चुनावी राजनीति का निर्णायक पड़ाव माना जा रहा है।

अरविंद केजरीवाल दिल्ली शराब मामले में बरी, अदालत के फैसले के बाद भावुक

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दिल्ली| के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल को कथित शराब घोटाले मामले में बड़ी राहत मिली है. दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल को बरी कर दिया है. कोर्ट का फैसला सुनते ही केजरीवाल भावुक हो गए, उनकी आंखों से आंसू बहने लगे. कोर्ट के इस फैसले को उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए सत्य की जीत बताया.अरविंद केजरीवाल ने कहा, “पिछले कुछ सालों से भाजपा जिस तरह से शराब घोटाले के बारे में कह रही थी और हमारे ऊपर आरोप लगा रही थी, तो आज कोर्ट ने सभी आरोप खारिज कर दिए और सभी आरोपियों को बरी कर दिया है. हमें न्यायपालिका पर भरोसा है. सत्य की जीत हुई. AAP को खत्म करने के लिए सभी बड़े नेताओं को जेल में डाल दिया गया था. यह पूरा फर्जी केस था. केजरीवाल भ्रष्ट नहीं है. मैंने अपने जीवन में केवल ईमानदारी कमाई है. कोर्ट ने कहा है कि केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और AAP कट्टर ईमानदार है. अच्छा काम करके सत्ता में आइए और झूठे केस करके हमें जेल में डालना प्रधानमंत्री को शोभा नहीं देता 

केजरीवाल-सिसोदिया समेत 23 आरोपी बरी

राउज एवेन्यू कोर्ट ने केजरीवाल और पूर्व उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया समेत कुल 23 लोगों को बरी किया है. कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए मनीष सिसोदिया बोले, “आज एक बार फिर देश के संविधान पर गर्व हो रहा है और आज सत्य की जीत हुई है.”

क्या है मामला?

यह मामला दिल्ली सरकार की एक्साइज पॉलिसी से जुड़ा है, जो साल 2022-23 का है. इस दौरान दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार थी. जिसके सीएम अरविंद केजरीवाल और डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया थे. इस मामले में पहले सीबीआई ने फिर इसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में मामला दर्ज किया था. जिसके बाद कई नेता जेल भी गए थे. लेकिन आज शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केस की सुनवाई करते हुए कहा कि सीबीआई की चार्जशीट के आधार पर अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के खिलाफ मामला नहीं बनता है. कोर्ट ने सुनवाई करते हुए इस केस से जुड़े सभी आरोपियों को बरी कर दिया.

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News Desk

‘घूसखोर पंडित’ से ‘केरल स्टोरी 2’ तक, टाइटल पर उठे विवाद पर क्या बोले जानकार? कैसे तय होता है फिल्मों का नाम

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इन दिनाें फिल्मों के टाइटल बड़ी बहस की वजह बन गए हैं। थोड़ा सा भी विवादित नाम आते ही सोशल मीडिया पर विरोध शुरू हो जाता है। किसी को टाइटल आपत्तिजनक लगता है। किसी को धार्मिक भावनाएं जुड़ी दिख जाती हैं। वहीं, कई लोग इसमें राजनीतिक संदेश भी खोज लेते हैं। यही वजह रही कि ‘द केरल स्टोरी 2’, ‘घूसखोर पंडित’ और ‘यादव जी की लव स्टोरी’ जैसी फिल्मों के मामले सीधे अदालत तक जा पहुंचे। अब इस मामले को लेकर अमर उजाला ने इन फिल्मों से जुड़े कलाकारों या मेकर्स से और कुछ जानकारों से बात की और पता लगाया कि कैसे तय होते हैं टाइटल?

कैसे तय होता है फिल्मों का टाइटल?

इंडस्ट्री में चार बड़े संगठन मिलकर यह नियम देखते हैं- इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन, प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया और इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स काउंसिल।
फिल्म निर्माताओं को अपना शीर्षक इन संस्थाओं में रजिस्टर कराना पड़ता है।
यदि कोई नाम पहले से किसी ने रजिस्टर करा रखा है, तो वह दूसरे को नहीं मिल सकता। इसके लिए एसोसिएशन से ‘क्लीयरेंस’ लेनी होती है।
बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी फिल्म के नाम और फ्रेंचाइजी (जैसे धूम, गोलमाल) को सुरक्षित रखने के लिए उसे ट्रेडमार्क के रूप में भी रजिस्टर कराते हैं।

हाल ही की विवादित फिल्मों पर अब तक क्या हुआ?

‘द केरल स्टोरी 2’ के मामले में केरल हाई कोर्ट ने कहा कि टाइटल दर्शकों को भ्रमित कर सकता है, इसलिए मामला साफ होने तक रिलीज राइट्स रोक दिए जाएं।
‘घूसखोर पंडित’ पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान सख्त रुख अपनाया। विरोध बढ़ा तो मेकर्स ने टाइटल वापस ले लिया और नया नाम तय करने पर सहमति दी।
‘यादव जी की लव स्टोरी’ के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि टाइटल से किसी समुदाय का अपमान नहीं होता ।कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
हालांकि, तीनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया बहस अब भी जारी है।

फिल्म रिलीज से पहले ही मुझे धमकियां मिलने लगीं: डायरेक्टर अंकित भड़ाना

फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के निर्देशक अंकित भड़ाना कहते हैं, ‘फिल्म अभी रिलीज भी नहीं हुई है और कुछ लोग सिर्फ नाम देखकर फैसला सुना रहे हैं। मैंने नहीं सोचा था कि टाइटल पर इतनी गर्मी पैदा हो जाएगी। कई लोग बिना कहानी समझे ही माहौल बिगाड़ने में लगे हैं। मेरी गाड़ी पर हमला हुआ। मुझे थप्पड़ मारने के लिए इनाम रखा गया और जान से मारने की भी धमकी दी जा रही है। लेकिन सत्य को रोका जा सकता है, हराया नहीं। मुख्य किरदार अभीमन्यु यादव है। टाइटल उसी से है। इसे ऐसे दिखाया जा रहा है जैसे पूरा समुदाय निशाने पर हो। यह सीधी-सीधी गलतफहमी फैलाना है। सिर्फ नाम देखकर किसी फिल्म को ‘कम्युनिटी टारगेट’ कहना नाइंसाफी है। फिल्म आएगी तब असली बात सामने होगी।’

मजेदार कहानी थी, पर टाइटल देखकर लोग कुछ और समझे: घूसखोर पंडित एक्टर सुमीत

‘ये एक मजेदार कहानी है। इतनी सीरियस बात नहीं थी। हमें खुद यकीन नहीं हुआ कि सिर्फ नाम पर इतना बड़ा विवाद हो सकता है। जब शूट कर रहे थे, हमें टाइटल तक नहीं पता था। बाद में पता चला तो विवाद शुरू हो चुका था। मनोज सर का किरदार बेहद फन-लविंग है, लेकिन टाइटल देखकर लोग कुछ और समझ बैठे। अब उम्मीद है कि नया टाइटल कहानी के हिसाब से होगा और अनावश्यक विवाद से बाहर निकलेगा।’

पहले इतना तमाशा नहीं होता था: अभय सिन्हा, इम्पा के अध्यक्ष

‘आज फिल्म का टाइटल पास करना सबसे मुश्किल काम हो गया है। पहले नामों पर इतना विवाद नहीं होता था। आज हर नाम पर लोग धार्मिक या राजनीतिक एंगल ढूंढ लेते हैं। इसके चलते हमें भी बहुत सावधानी रखनी पड़ती है।’

कुछ लोग 10–10 टाइटल बुक कर लेते थे: संग्राम शिर्के, अध्यक्ष, वेस्टर्न इंडिया फिल्म एंड टीवी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन

‘टाइटल पर आज पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता बरती जाती है। हम IMPAA के साथ मिलकर टाइटल बुक करते हैं। सबसे पहले देखते हैं कि कहीं दो फिल्मों का नाम एक जैसा न हो, वर्ना सीधे प्रोड्यूसर का नुकसान होता है। पहले तो कई लोग 10 टाइटल बुक कराकर बैठ जाते थे और बाद में दूसरों को ब्लैकमेल करते थे। ऐसे में अब हमने हर टाइटल को तीन साल के लिए ही मान्य कर दिया है। अगर फिल्म नहीं बनती तो टाइटल वापस ले लेते हैं।’

इन फिल्मों के नाम पर भी हुए विवाद 

पद्मावती – इतिहास गलत दिखाने का आरोप, टाइटल बदलकर ‘पद्मावत’ रखा गया।
राम गोपाल वर्मा की ‘श्रीदेवी’ – श्रीदेवी और बोनी कपूर ने नोटिस भेजा, फिल्म रिलीज ही नहीं हुई।
बजरंगी भाईजान – वीएचपी और बजरंग दल की आपत्ति, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की।
सिंह साब द ग्रेट – एसजीपीसी ने आपत्ति जताई पर टाइटल नहीं बदला गया।
रैंबो राजकुमार – कॉपीराइट विवाद हुआ। नाम बदलकर ‘आर राजकुमार’ हुआ।
मैं हूं रजनीकांत – रजनीकांत ने कोर्ट में चुनौती दी, नाम बदलकर ‘मैं हूं रजनी’ हुआ।
लक्ष्मी बॉम्ब – धार्मिक विरोध के कारण नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ हुआ। 
गोलियों की रासलीला राम-लीला – कोर्ट केस हुआ। रिलीज से 48 घंटे पहले टाइटल बदलकर राम-लीला किया गया।
पृथ्वीराज – ऐतिहासिक सम्मान दिखाने के लिए टाइटल ‘सम्राट पृथ्वीराज’ में बदला गया।
बिल्लू बार्बर – नाई समुदाय की आपत्ति के बाद ‘बार्बर’ हटाकर फिल्म का नाम ‘बिल्लू’ किया गया।

महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा बदलाव, सुनेत्रा पवार बनीं NCP की राष्ट्रीय अध्यक्ष

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मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति (Maharashtra politics) में बड़ा बदलाव सामने आया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी एनसीपी में नेतृत्व परिवर्तन के साथ नया राजनीतिक अध्याय शुरू हो गया है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और राज्य की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार (Sunetra Pawar) को सर्वसम्मति से एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया है। पार्टी बैठक में लिया गया यह फैसला राज्य की राजनीति में अहम माना जा रहा है। अजित पवार की विमान हादसे में मौत के बाद पार्टी और सत्ता दोनों की जिम्मेदारियों में बड़ा बदलाव देखने को मिल।

अजित पवार के निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति अचानक नए मोड़ पर आ गई थी। उपमुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी सुनेत्रा पवार को सौंपी गई और अब उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय कमान भी मिल गई है। पिछले कुछ दिनों से एनसीपी के दोनों गुटों के संभावित विलय की चर्चा चल रही थी, लेकिन अजित पवार गुट के वरिष्ठ नेताओं ने इसमें खास रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद पार्टी ने संगठन को मजबूत करने के लिए नया नेतृत्व तय किया और सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का फैसला लिया गया।

मुंबई अधिवेशन में सर्वसम्मति से फैसला
एनसीपी का राष्ट्रीय अधिवेशन 2026 मुंबई के वर्ली इलाके में आयोजित किया गया, जिसमें पार्टी के सभी बड़े नेता और पदाधिकारी शामिल हुए। अधिवेशन के दौरान सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव रखा गया। इस प्रस्ताव को सभी नेताओं ने एकमत से मंजूरी दी। पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल ने औपचारिक रूप से उनके नाम की घोषणा की। साथ ही यह भी तय किया गया कि प्रफुल्ल पटेल पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रहेंगे, जबकि महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सांसद सुनील तटकरे संभालेंगे।

बारामती से विधायक बनने की चर्चा तेज
राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा तेज हो गई है कि सुनेत्रा पवार जल्द ही बारामती विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ सकती हैं। यह सीट अजित पवार की राजनीतिक पहचान मानी जाती रही है। अगर उपचुनाव होता है तो सांसद सुप्रिया सुले ने उम्मीद जताई है कि यह चुनाव निर्विरोध भी हो सकता है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में सुनेत्रा पवार विधानसभा पहुंचकर राज्य की राजनीति में और मजबूत भूमिका निभा सकती हैं।

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News Desk

कांग्रेस में टिकट के लिए खींचतान, एक-एक सीट पर कई दावेदार

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नई दिल्ली: आगामी राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस में खींचतान शुरू हो गई है, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ युवा चेहरे भी नामांकन की उम्मीद कर रहे हैं. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव 16 मार्च को होंगे. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस, जिसके 27 सदस्य हैं, अपने दम पर आसानी से पांच सीटें जीत सकती है, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा से एक-एक और तेलंगाना से दो सीटें, क्योंकि वहां उसके पास जरूरी संख्या में विधायक हैं जो राज्यसभा चुनाव में वोट करेंगे.

कांग्रेस को तमिलनाडु से भी एक सीट मिल सकती है, क्योंकि उसे राज्य की सत्ताधारी पार्टी DMK का समर्थन मिल सकता है. महाराष्ट्र में, विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA), जिसमें शिवसेना (UBT), कांग्रेस और एनसीपी (एसपी) शामिल हैं, को भी एक राज्यसभा सीट मिल सकती है.

कांग्रेस के जिन चार राज्यसभा सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में खत्म हो रहा है, उनमें अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, फूलो देवी नेताम और रजनी पाटिल शामिल हैं. इनमें से, सुप्रीम कोर्ट के वकील और कांग्रेस वर्किंग कमेटी के सदस्य सिंघवी को फिर से मौका मिलने की सबसे अधिक संभावना है, क्योंकि वे कई जरूरी मामलों में पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं और वरिष्ठ प्रवक्ता भी हैं.

सिंघवी का वर्तमान कार्यकाल 28 अगस्त 2024 को शुरू हुआ और 9 अप्रैल 2026 को समाप्त होने वाला है. के. केशव राव के इस्तीफे के बाद उन्हें तेलंगाना से निर्विरोध चुना गया था. इससे पहले कांग्रेस ने सिंघवी को हिमाचल प्रदेश से उच्च सदन भेजने की कोशिश की थी, लेकिन पार्टी के कुछ विधायकों के क्रॉस वोटिंग करने के कारण वह चुनाव हार गए थे.

हिमाचल में संभावित नाम
यही वजह है कि कांग्रेस के रणनीतिकार हिमाचल प्रदेश से मिलने वाली एक सीट के लिए किसी स्थानीय चेहरे को मैदान में उतारने पर विचार कर रहे हैं. पार्टी सूत्रों ने बताया कि पूर्व केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा और राज्य इकाई की पूर्व अध्यक्ष प्रतिभा सिंह को कांग्रेस शासित पहाड़ी राज्य से मौका मिल सकता है.

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस रणनीतिकारों के सामने मुश्किल चुनाव है कि वे आदिवासी नेता फूलो देवी नेताम को फिर से चुनें या पूर्व मुख्यमंत्री और OBC नेता भूपेश बघेल, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष दीपल बैज या पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंह देव में से किसी एक को चुनें.

हरियाणा से कांग्रेस को जो एक सीट मिल सकती है, उसके लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं, जिनमें कांग्रेस महासचिव जितेंद्र सिंह, मीडिया हेड पवन खेड़ा, सोशल मीडिया हेड सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस विधायक दल के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा के करीबी माने जाने वाले वरिष्ठ नेता राज बब्बर शामिल हैं. खेड़ा और श्रीनेत नियमित रूप से पार्टी का बचाव करते हैं और अलग-अलग मुद्दों पर मोदी सरकार पर हमला करते हैं, जबकि सिंह असम कांग्रेस के प्रभारी हैं.

जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी के नाम पर विचार
तेलंगाना में दूसरी सीट के लिए, कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट पूर्व न्यायाधीश जस्टिस बी सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतार सकती है, जो 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव में इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार थे, लेकिन सीपी राधाकृष्णन से हार गए.

सूत्रों ने बताया कि अगर यह बात नहीं बनी, तो जस्टिस रेड्डी को तमिलनाडु से राज्यसभा भेजा जा सकता है और तेलंगाना से अल्पसंख्यक समुदाय के नेता या वरिष्ठ नेता हनुमंत राव को चुना जा सकता है. कांग्रेस (AICC) के पदाधिकारी प्रवीण चक्रवर्ती की संभावित उम्मीदवारी पर भी कुछ चर्चा हुई है, लेकिन DMK शायद उनका समर्थन न करे क्योंकि उन्होंने गठबंधन के मुद्दों पर राज्य सरकार पर निशाना साधा था.

तेलंगाना के लिए प्रभारी कांग्रेस सचिव रोहित चौधरी ने ईटीवी भारत को बताया, “ये बहुत जरूरी चुनाव हैं. बातचीत हो रही है. पार्टी शीर्ष नेतृत्व जल्द ही नामों को अंतिम मंजूरी देगा.”

महाराष्ट्र में एमवीए के बीच होगी बैठक
महाराष्ट्र में, ऐसी अटकलें हैं कि एनसीपी (एसपी) के वरिष्ठ नेता शरद पवार राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन करने को उत्सुक हैं, लेकिन कांग्रेस यह साफ करना चाहती है कि क्या वह अपनी पार्टी को एनसीपी में विलय करने की योजना बना रहे हैं, जिसका नेतृत्व हाल तक उनके बागी भतीजे और दिवंगत उपमुख्यमंत्री अजित पवार कर रहे थे. शिवसेना (UBT) भी अपने नेता को उच्च सदन भेजना चाहती है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि नाम पर मुहर लगाने के लिए जल्द ही एमवीए गठबंधन की बैठक होगी. अगर उम्मीदवार पर कोई सहमति नहीं बनती है, तो कांग्रेस वरिष्ठ नेता रजनी पाटिल को फिर से मैदान में उतार सकती है.

महाराष्ट्र के प्रभारी कांग्रेस सचिव यूबी वेंकटेश ने बताया, “सभी तरफ से दावे हैं. MVA के भीरत बातचीत होगी और फिर हमारा शीर्ष नेतृत्व इस मामले में आखिरी फैसला लेगा.”

‘मेरा मकसद कठोर सच्चाई पर बात करना’, सुदीप्तो सेन ने बताया क्यों बनाई ‘चरक

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आगामी फिल्म ‘चरक – फेयर ऑफ फेथ’ ‘द केरल स्टोरी’ के निर्देशक सुदीप्तो सेन द्वारा समर्थित फिल्म है। अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र पर बात करने वाली इस फिल्म को लेकर सुदीप्तो सेन का कहना है कि यह फिल्म सच्ची मानवीय कहानियों को बयां करती है और समाज की कठोर सच्चाइयों को उजागर करती है। उनका मानना है कि इस फिल्म का उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं, बल्कि घटनाओं को वैसे ही दिखाना है जैसे वे घटी थीं, भले ही वास्तविकताएं असहज क्यों न हों। उन्होंने कहा कि कोई भी मानवीय कहानी मुझे बहुत आकर्षित करती है। ‘द केरल स्टोरी’ की शुरुआत चार लड़कियों से हुई और मैं 3,500 लड़कियों से मिला। इसलिए, मैंने सोचा कि मुझे उनकी कहानी बतानी चाहिए। जिस तरह से मैं अपनी कहानी कहता हूं, मैं सच्चाई के जितना करीब हो सकता हूं, उतना पहुंच सकता हूं। हालांकि, मेरा उद्देश्य कभी भी विवादास्पद फिल्में बनाना नहीं रहा है, बल्कि असहज सच्चाइयों को प्रकाश में लाना रहा है। एक कलाकार के रूप में,  एक कहानीकार के रूप में, मुझे लगता है कि यह कहानी सुनाई जानी चाहिए। किसी को तो इसे सुनाना ही चाहिए था। इसलिए शायद मैंने इसे चुना है।

बहस और चर्चा के बाद मिली सेंसर से मंजूरी

निर्माता ने आगे बताया कि उनकी फिल्म को सेंसर बोर्ड ने विस्तृत बहस और चर्चा के बाद मंजूरी दी है। जब मैं सेंसर बोर्ड से मिला, तो कई बहसें हुईं, जो मुझे बहुत महत्वपूर्ण लगीं। पैनल में 30 वर्ष की आयु के युवा सदस्य और 70-75 वर्ष की आयु के वरिष्ठ सदस्य दोनों शामिल थे। शुरू में कुछ लोगों को लगा कि फिल्म साधु-संतों की आलोचना करती है। लेकिन वे समझ गए कि यह समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद शोषणकारी प्रथाओं को दिखाती है।

ओटीटी अब सेफ खेलता है

सुदीप्तो सेन ने संवेदनशील विषयों से निपटने में ओटीटी प्लेटफॉर्म के दृष्टिकोण पर भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीतिक या कमर्शियल सक्सेस के दबाव के बजाय कहानी पर ध्यान देना चाहिए। मुझे लगता है कि ओटीटी अब सेफ खेल खेल रहा है। अगर कोई धार्मिक या सामाजिक मुद्दा आता है, तो वे उससे बचते हैं। चाहे वह पॉजिटिव हो या नेगेटिव। मैं बचपन से ही लोगों के दर्द के बारे में बात करता आया हूं। हमें हमेशा सच्चाई के साथ रहना चाहिए। चाहे कुछ भी हो जाए, सच्चाई की जीत होगी।

6 मार्च को रिलीज होगी फिल्म

शीलादित्य मौलिक द्वारा निर्देशित ‘चरक: आस्था का मेला’ भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रचलित अंधविश्वास और रीति-रिवाजों पर बात करती है। फिल्म के ट्रेलर में तंत्र-मंत्र और अंधविश्वास की भयावह सच्चाइयों को दिखाया गया है। सुदीप्तो सेन द्वारा निर्मित यह फिल्म 6 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। यह पवित्र मेले की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जो एक पारंपरिक त्योहार है जिसमें गहरी भक्ति और खतरनाक अनुष्ठान शामिल होते हैं। फिल्म में अंजली पाटिल, साहिदुर रहमान, सुब्रत दत्ता, शशि भूषण, नलनीश नील, शंखदीप और शौनक श्यामल सहित कई दमदार कलाकार हैं।

संजय राउत को राहत, BJP नेता की पत्नी की मानहानि मामले में कोर्ट ने किया बरी

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मुंबई। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत (Sanjay Raut) को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सत्र अदालत ने उनकी पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए भाजपा नेता किरिट सोमैया (Kirit Somaiya)  की पत्नी मेधा सोमैया (Medha Somaiya) द्वारा दायर शिकायत में उन्हें बरी कर दिया।

इससे पहले पिछले वर्ष मजिस्ट्रेट अदालत ने राउत को भारतीय दंड संहिता की मानहानि से जुड़ी धारा के तहत दोषी ठहराते हुए 15 दिन के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। हालांकि, सजा पर रोक लगा दी गई थी ताकि वे उच्च अदालत में आदेश को चुनौती दे सकें। इसके बाद राउत ने सत्र अदालत में अपील दायर की थी।

मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। सुनवाई कर रहे न्यायाधीश महेश जाधव ने इस महीने की शुरुआत में अंतिम बहस पूरी होने के बाद राउत की याचिका मंजूर कर ली।

राउत की ओर से अधिवक्ता मनोज पिंगले ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने किसी व्यक्ति विशेष की मानहानि करने का उद्देश्य नहीं रखा था। वहीं, मेधा सोमैया की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मण कनाल ने कहा कि जिस कथित घोटाले का आरोप लगाया गया, जांच में उसका कोई आधार नहीं मिला, इसलिए सार्वजनिक आरोप मानहानिकारक थे।

 

दरअसल, विवाद उस समय शुरू हुआ जब राउत ने मीडिया से बातचीत में मीरा-भायंदर नगर निगम क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण परियोजना में 100 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया था और इसमें सोमैया दंपत्ति के जुड़े होने की बात कही थी।

शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, वर्ष 2007 में निविदा प्रक्रिया के जरिए यह काम पांच गैर-सरकारी संगठनों को सौंपा गया था, जिनमें से एक संस्था सोमैया परिवार से संबंधित थी। परियोजना की कुल लागत लगभग 22 करोड़ रुपये बताई गई, जिससे 100 करोड़ रुपये के घोटाले का दावा तथ्यात्मक रूप से संभव नहीं बताया गया।

मजिस्ट्रेट अदालत ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि मेधा सोमैया एक शिक्षित और प्रतिष्ठित व्यक्तित्व हैं तथा आरोपों से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा और मानसिक पीड़ा हुई। साथ ही यह भी टिप्पणी की गई थी कि एक सांसद होने के नाते सार्वजनिक बयान देते समय राउत पर उच्च स्तर की जिम्मेदारी होती है।
अब सत्र अदालत के फैसले के बाद राउत को इस मामले में राहत मिल गई है।

विंडीज पर जीत से सेमीफाइनल पक्का; पाकिस्तान का समीकरण क्या?

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टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में तस्वीर लगभग साफ हो चुकी है। सेमीफाइनल के लिए दो टीमें तय हो चुकी हैं, लेकिन आखिरी दो टीमें तय होनी बाकी हैं। हालांकि, बाकी बचे दो सेमीफाइनल टिकट के लिए रोमांच चरम पर है। सुपर-8 के ग्रुप-1 से दक्षिण अफ्रीका ने और ग्रुप-2 से इंग्लैंड ने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है। अब सबकी निगाहें भारत बनाम वेस्टइंडीज मुकाबले और इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड मैच पर टिकी हैं, जिनसे सेमीफाइनल की अंतिम तस्वीर तय होगी।

पहले सुपर-8 के दोनों ग्रुप की अंक तालिका देखें

सुपर 8, ग्रुप 1

टीम मैच जीत हार बेनतीजा अंक नेट रन रेट
दक्षिण अफ्रीका (Q) 2 2 0 0 4 +2.890
वेस्टइंडीज 2 1 1 0 2 +1.791
भारत 2 1 1 0 2 -0.100
जिम्बाब्वे (E) 2 0 2 0 0 -4.475

सुपर 8, ग्रुप 2

टीम मैच जीत हार बेनतीजा अंक नेट रन रेट
इंग्लैंड (Q) 2 2 0 0 4 +1.491
न्यूजीलैंड 2 1 0 1 3 +3.050
पाकिस्तान 2 0 1 1 1 -0.461
श्रीलंका (E) 2 0 2 0 0 -2.800

भारत-वेस्टइंडीज नॉकआउट मुकाबला

सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में भारत ने जिम्बाब्वे को 72 रन से हराकर अपनी उम्मीदें जिंदा रखी हैं, लेकिन राह अभी आसान नहीं है। सुपर-8 के आखिरी मैच में भारत का सामना वेस्टइंडीज से कोलकाता में होना है।इस मुकाबले की अहमियत साफ है, जो टीम जीतेगी, वह सीधे सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी। अब ग्रुप-1 में नेट रन रेट का कोई मतलब नहीं रह गया है। दोनों टीमों के लिए हार का मतलब होगा टूर्नामेंट से बाहर होना होगा। यह मैच किसी फाइनल से कम नहीं होगा। अब भारत के सामने सिर्फ जीत ही एकमात्र विकल्प है। बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संतुलन बनाए रखना टीम के लिए बेहद जरूरी होगा।

न्यूजीलैंड की दमदार वापसी, श्रीलंका बाहर

वहीं, दूसरे ग्रुप में समीकरण और भी दिलचस्प हो गए हैं। न्यूजीलैंड ने कोलंबो में श्रीलंका को 61 रन से हराकर न सिर्फ टूर्नामेंट से बाहर कर दिया, बल्कि अपना नेट रन रेट +3.050 तक पहुंचा लिया। 169 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम 107/8 पर सिमट गई और लगातार पांचवीं बार सेमीफाइनल में पहुंचने से चूक गई। 2014 में खिताब जीतने के बाद से श्रीलंका की टीम अंतिम चार में जगह नहीं बना पाई है।न्यूजीलैंड की इस बड़ी जीत ने उन्हें सेमीफाइनल की रेस में मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है।

इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड: तय करेगा किस्मत

अब असली फैसला इंग्लैंड और न्यूजीलैंड के बीच होने वाले मुकाबले से होगा। अगर न्यूजीलैंड इंग्लैंड को हरा देता है, तो वह पांच अंकों के साथ सीधे सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। न सिर्फ न्यूजीलैंड सेमीफाइनल में पहुंचेगा, बल्कि ग्रुप-2 में अंक तालिका पर शीर्ष स्थान पर भी रहेगा। इंग्लैंड दूसरे स्थान पर रहते हुए क्वालिफाई करेगी। उस स्थिति में पाकिस्तान का श्रीलंका के खिलाफ आखिरी मैच औपचारिकता बनकर रह जाएगा।

पाकिस्तान के लिए क्या है पूरा समीकरण?

हालांकि, अगर इंग्लैंड जीतता है, तो न्यूजीलैंड तीन अंकों पर रुक जाएगा और पाकिस्तान के लिए दरवाजा खुल जाएगा। पाकिस्तान के पास फिलहाल सिर्फ एक अंक है। उसे अपने आखिरी मैच में श्रीलंका को हराना ही होगा। जीत के बाद पाकिस्तान तीन अंकों तक पहुंचेगा। हालांकि, पाकिस्तान के लिए सिर्फ जीत काफी नहीं होगी, इसमें नेट रन रेट का खेल होना तय है। मौजूदा अनुमान के मुताबिक, अगर इंग्लैंड न्यूजीलैंड को 50 रन से हराता है, तो पाकिस्तान को लगभग 20 रन से जीत दर्ज करनी होगी (मान लें पहली पारी का स्कोर 170 के आसपास हो)। अगर पाकिस्तान लक्ष्य का पीछा करता है, तो उसे लगभग 17.5 ओवर के भीतर लक्ष्य हासिल करना होगा ताकि वह न्यूजीलैंड के नेट रन रेट से आगे निकल सके। जरा सी भी धीमी जीत उसे बाहर कर सकती है।

नेट रन रेट का गणित

न्यूजीलैंड का नेट रन रेट फिलहाल +3.050 है, जो काफी मजबूत स्थिति है। पाकिस्तान को न सिर्फ जीत दर्ज करनी होगी, बल्कि बड़ी जीत की जरूरत होगी। यही कारण है कि पाकिस्तान के लिए चुनौती दोगुनी हो गई है, उसे खुद भी शानदार प्रदर्शन करना है और इंग्लैंड से भी मदद की उम्मीद रखनी है। हालांकि, अगर न्यूजीलैंड की टीम जीत गई, तो सारे अगर मगर के खेल खत्म हो जाएंगे। फिर न्यूजीलैंड-इंग्लैंड की टीमें सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगी और पाकिस्तान की टीम विश्वकप से बाहर हो जाएगी।

पाकिस्तान के क्वालिफिकेशन के समीकरण
(मान लें इंग्लैंड न्यूजीलैंड को हरा देता है)

केस-1: यदि इंग्लैंड लक्ष्य का पीछा करते हुए जीतता है

इंग्लैंड की
जीत का अंतर
(NZ के खिलाफ)
यदि पाकिस्तान
पहले बल्लेबाजी करे
(कितने रन से जीते)
यदि पाकिस्तान
लक्ष्य का पीछा करे
(कितने ओवर में जीते)
1 ओवर शेष
रहते जीत
61 रन 13.5 ओवर
3 ओवर शेष
रहते जीत
46 रन 15.1 ओवर
5 ओवर शेष
रहते जीत
28 रन 16.5 ओवर
7 ओवर शेष
रहते जीत
9 रन 19 ओवर

केस-2: यदि इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी कर जीतता है

इंग्लैंड की
जीत का अंतर
(NZ के खिलाफ)
यदि पाकिस्तान
पहले बल्लेबाजी करे
(कितने रन से जीते)
यदि पाकिस्तान
लक्ष्य का पीछा करे
(कितने ओवर में जीते)
1 रन
से जीत
68 रन 13.3 ओवर
20 रन
से जीत
50 रन 14.5 ओवर
40 रन
से जीत
30 रन 16.4 ओवर
60 रन
से जीत
11 रन 18.5 ओवर

किसके बीच हो सकता है सेमीफाइनल?

अगर भारत वेस्टइंडीज को हरा देता है तो वह ग्रुप-1 में दूसरे स्थान पर रहते हुए सेमीफाइनल में पहुंचेगा। इस स्थिति में भारत का मुकाबला ग्रुप-2 की शीर्ष स्थान पर रहने वाली टीम से होगा। अगर न्यूजीलैंड की टीम इंग्लैंड को हरा देती है, तो भारत का सामना सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड से होगा। वहीं, दक्षिण अफ्रीका का सामना इंग्लैंड से होगा। अगर भारत वेस्टइंडीज को हरा देता है, वहीं दूसरी तरफ अगर इंग्लैंड की टीम न्यूजीलैंड को हरा देती है तो फिर भारत का सामना सेमीफाइनल में इंग्लैंड से होगा। फिर यह देखना होगा कि पाकिस्तान श्रीलंका के बीच मुकाबले का नतीजा क्या होता है और पाकिस्तान क्वालिफाई कर पाता है या नहीं। अगर पाकिस्तान नहीं क्वालिफाई कर पाया तो दक्षिण अफ्रीका-न्यूजीलैंड दूसरे सेमीफाइनल में भिड़ेंगे। अगर पाकिस्तान क्वालिफाई कर जाता है तो फिर दक्षिण अफ्रीका का सामना सेमीफाइनल में पाकिस्तान से होगा।

पाकिस्तान के क्वालिफिकेशन के समीकरण
(मान लें इंग्लैंड न्यूजीलैंड को हरा देता है)

केस-1: यदि इंग्लैंड लक्ष्य का पीछा करते हुए जीतता है

इंग्लैंड की
जीत का अंतर
(NZ के खिलाफ)
यदि पाकिस्तान
पहले बल्लेबाजी
करे (कितने रन से जीते)
यदि पाकिस्तान
लक्ष्य का पीछा
करे (कितने ओवर में जीते)
1 ओवर शेष
रहते जीत
61 रन 13.5 ओवर
3 ओवर शेष
रहते जीत
46 रन 15.1 ओवर
5 ओवर शेष
रहते जीत
28 रन 16.5 ओवर
7 ओवर शेष
रहते जीत
9 रन 19 ओवर

केस-2: यदि इंग्लैंड पहले बल्लेबाजी कर जीतता है

इंग्लैंड की
जीत का अंतर
(NZ के खिलाफ)
यदि पाकिस्तान
पहले बल्लेबाजी
करे (कितने रन से जीते)
यदि पाकिस्तान
लक्ष्य का पीछा
करे (कितने ओवर में जीते)
1 रन से जीत 68 रन 13.3 ओवर
20 रन से जीत 50 रन 14.5 ओवर
40 रन से जीत 30 रन 16.4 ओवर
60 रन से जीत 11 रन 18.5 ओवर

सिर्फ सेमीफाइनल की टीमें नहीं, वेन्यू भी तय होंगे

अगले दो-तीन सुपर-8 मैच सिर्फ सेमीफाइनल की टीमें नहीं, बल्कि वेन्यू भी तय करेंगे। आईसीसी ने कुछ शर्तें रखी थीं। आईसीसी ने एक सेमीफाइनल मैच वानखेड़े में तय किया है और दूसरा सेमीफाइनल के वेन्यू का अब तक एलान नहीं हुआ है। अगर पाकिस्तान सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करता है तो वह अपना सेमीफाइनल मैच कोलंबो में खेलेगा। फिर अगर पाकिस्तान की टीम फाइनल में पहुंचती है तो फाइनल भी कोलंबो में होगा। हालांकि, अगर पाकिस्तान बाहर होता है तो एक सेमीफाइनल वानखेडे़ और दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला कोलकाता में खेला जाएगा। फिर फाइनल अहमदाबाद में होगा।

रोमांचक अंत की ओर बढ़ता टूर्नामेंट

इंग्लैंड की लगातार जीतों ने ग्रुप की तस्वीर साफ कर दी है, लेकिन श्रीलंका के बाहर होने से आखिरी सेमीफाइनल टिकट का फैसला बेहद रोमांचक हो गया है। भारत और वेस्टइंडीज का मुकाबला जहां सीधे सेमीफाइनल की राह तय करेगा, वहीं इंग्लैंड बनाम न्यूजीलैंड मैच पाकिस्तान की किस्मत लिखेगा। अब देखना यह है कि क्या भारत अपने मौके को भुनाएगा और क्या पाकिस्तान चमत्कार कर पाएगा।

 

 

भारत-US व्यापार समझौते के खिलाफ बड़ा आंदोलन

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संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने गुरुवार को दो राष्ट्रव्यापी अभियानों की घोषणा की। इनका उद्देश्य राज्य सरकारों पर प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध करने, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को बर्खास्त करने की मांग करने और राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता बहाल करने के लिए जीएसटी कानून में संशोधन करने का दबाव बनाना है।एसकेएम ने कहा कि उसकी राज्य और राष्ट्रीय समितियों के सदस्यों वाले प्रतिनिधिमंडल सभी राज्यों में मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मिलेंगे। इस मुलाकात में किसान संगठन की ओर से उठाए गए मुद्दों पर प्रस्ताव पारित करने के लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाने की मांग करेंगे। 

राज्य सरकारों से व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का किया अनुरोध

एसकेएम ने एक ज्ञापन में राज्य सरकारों से आग्रह किया कि वे केंद्र से अमेरिका के साथ उस व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर न करने का अनुरोध करें, जिसे उसने ‘राष्ट्र-विरोधी’ समझौता बताया है। इसमें पीयूष गोयल को ‘किसानों के हितों के साथ विश्वासघात’ करने के लिए बर्खास्त करने और केंद्रीय वित्त मंत्रालय के उस पत्र को वापस लेने की मांग की गई है, जिसमें राज्यों को गेहूं और धान पर बोनस भुगतान समाप्त करने के लिए कहा गया है।भारत और अमेरिका ने इस महीने की शुरुआत में एक अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की, जिसके तहत वाशिंगटन टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। द्विपक्षीय व्यापार समझौते के पहले चरण पर हस्ताक्षर करने और उसे लागू करने के लिए इस रूपरेखा को कानूनी दस्तावेज में परिवर्तित करना होगा।

श्रम कानूनों और वीबीजीआरएएमजी अधिनियम को निरस्त करने की मांग

एसकेएम ने चारों श्रम कानूनों और वीबीजीआरएएमजी अधिनियम को निरस्त करने और अब निरस्त हो चुके महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (एमजीएनआरईजी अधिनियम) के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून को बहाल करने की भी मांग की।संविधान के तहत कृषि को राज्य का विषय बताते हुए एसकेएम ने कहा कि राज्यों को सभी फसलों के लिए 2+50 प्रतिशत पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी देने और सुनिश्चित खरीद के लिए कानून बनाने चाहिए। इसके साथ ही ग्रामीणों पर कर्ज और किसान आत्महत्याओं से निपटने के लिए व्यापक ऋण माफी देनी चाहिए।

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News Desk

19 साल बाद साथ नजर आए अल्लू अर्जुन और काजल

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मुंबई । साउथ के सुपरस्टार अल्लू अर्जुन और अभिनेत्री काजल अग्रवाल लगभग 19 साल बाद 70वें फिल्मफेयर अवार्ड्स साउथ में एक साथ नजर आए। यह मुलाकात सिर्फ एक फोटो तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन दिनों की यादें भी ताजा कर गई जब दोनों ने अपने करियर की शुरुआत में साथ काम किया था। दर्शकों को उनकी लोकप्रिय फिल्मों आर्या और आर्या 2 की यादें फिर से ताज़ा हो गईं। यह अनोखा पल तब देखने को मिला जब दोनों कलाकार फिल्मफेयर अवार्ड्स साउथ के रेड कार्पेट पर मौजूद थे। 
भव्य समारोह में कई बड़े सितारे पहुंचे थे, लेकिन जैसे ही अल्लू अर्जुन और काजल अग्रवाल की साथ में मौजूदगी सामने आई, सोशल मीडिया पर मानो यादों की बाढ़ आ गई। दोनों की कैमिस्ट्री और पुरानी दोस्ती को फैंस ने एक बार फिर प्यार से याद किया। अल्लू अर्जुन ने इस मुलाकात को सोशल मीडिया पर भी साझा किया। उन्होंने अपने इंस्टाग्राम स्टोरी में काजल अग्रवाल के साथ एक मुस्कुराती हुई सेल्फी पोस्ट की, जिसने इंटरनेट पर खूब चर्चा बटोरी। इसके साथ उन्होंने लिखा “19 साल बाद फिर से मुलाकात हुई।” यह छोटा सा कैप्शन हजारों फैंस के दिल तक पहुंच गया और लोगों ने इस पल को खूब सराहा। फिल्मफेयर अवार्ड्स की यह शाम अल्लू अर्जुन के लिए और भी खास साबित हुई। 
उन्हें अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म पुष्पा 2: द रूल के लिए ‘बेस्ट एक्टर इन ए लीडिंग रोल (मेल) – तेलुगु’ का प्रतिष्ठित अवॉर्ड मिला। फिल्म में उनके दमदार और गहराई से भरे प्रदर्शन ने न सिर्फ दर्शकों, बल्कि समीक्षकों से भी जमकर तारीफ बटोरी। अल्लू अर्जुन ने एक नोट शेयर करते हुए फिल्मफेयर और अपने प्रशंसकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि उन्हें जहां इतना अनोखा प्यार और सम्मान मिलता है, वहां यह अवॉर्ड पाना उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने यह सम्मान अपने फैंस को समर्पित करते हुए उनके निरंतर सहयोग और प्यार के लिए धन्यवाद दिया। 

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