ऐसा हुआ तो बिना जीते भी सेमीफाइनल में पहुंचेगा वेस्टइंडीज, क्या हैं समीकरण?

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टी20 विश्वकप 2026 अपने सबसे रोमांचक दौर में पहुंच चुका है। सेमीफाइनल के लिए जंग रोमांचक हो चली है। भारत के जिम्बाब्वे को हराते ही दक्षिण अफ्रीका की टीम अंतिम-चार में पहुंच गई। वहीं, इंग्लैंड की टीम पहले ही सेमीफाइनल में पहुंच चुकी है। अब दो स्थानों के लिए जंग है। भारत और वेस्टइंडीज के बीच एक मार्च को कोलकाता में नॉकआउट मुकाबला खेला जाएगा। वहीं, दूसरे स्थान के लिए न्यूजीलैंड और पाकिस्तान में टक्कर है।अगर न्यूजीलैंड ने शुक्रवार को इंग्लैंड को हरा दिया तो उनकी सीट पक्की हो जाएगी। वहीं, इस मैच में अगर इंग्लैंड जीता तो पाकिस्तान के लिए भी रास्ते खुल जाएंगे। फिर उन्हें एक तय मार्जिन से अपने आखिरी सुपर-8 मैच में श्रीलंका को हराना होगा। हालांकि, इन सबके बीच एक समीकरण ऐसा भी है, जिससे भारत को खतरा है। अगर ऐसा हुआ तो वेस्टइंडीज को भारत के खिलाफ जीत हासिल करने की जरूरत नहीं होगी, बिना जीते ही कैरिबियाई टीम सेमीफाइनल में पहुंच जाएगी। आइए जानते हैं वह समीकरण कौन से हैं..

भारत ने की बहुत बड़ी गलती

दरअसल, भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में एक बहुत बड़ी गलती की। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हार के बाद टीम ने बल्लेबाजी तो सुधारी, लेकिन गेंदबाजी फींकी पड़ गई। भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 256 रन बना दिए, लेकिन कागज पर कमजोर जिम्बाब्वे की बल्लेबाजी को भारतीय गेंदबाज जल्द से जल्द समेटने में कामयाब नहीं हो सके। भारत के 257 रन के लक्ष्य के जवाब में जिम्बाब्वे ने 20 ओवर में छह विकेट पर 184 रन बना डाले। टीम इंडिया ने यह मैच 72 रन से जरूर जीता, लेकिन नेट रन रेट अभी भी निगेटिव ही है। भारत -3.80 से -0.100 तक पहुंच पाया।

सुपर 8 ग्रुप 1- अंक तालिका

टीम मैच जीत हार बेनतीजा अंक नेट रन रेट
द. अफ्रीका (Q) 2 2 0 0 4 +2.890
वेस्टइंडीज 2 1 1 0 2 +1.791
भारत 2 1 1 0 2 -0.100
जिम्बाब्वे (E) 2 0 2 0 0 -4.475

भारत के पास नेट रन रेट बेहतर करने का मौका था

यह एक ऐसा मैच या फिर यूं कहें 256 का स्कोर एक ऐसा स्कोर था, जहां भारत को अपना नेट रन रेट बेहतर करने का मौका था। अगर भारतीय टीम जिम्बाब्वे को जल्द से जल्द समेटती तो नेट रन रेट वेस्टइंडीज के आसपास करने का मौका था। ऐसा इसलिए क्योंकि दक्षिण अफ्रीका ने वेस्टइंडीज को नौ विकेट से करारी शिकस्त दी थी। इससे वेस्टइंडीज का नेट रन रेट +5.35 से गिरकर +1.791 हो गया। 100+ रन से जीत भारत को नेट रन रेट में वेस्टइंडीज के आसपास ले जा सकती थी। हम ऐसा क्यों कह रहे हैं, आइए जानते हैं…

क्यों जल्दी न आउट करना चूक है?

भारत ने शिवम दुबे से जबरदस्ती दो ओवर करवाए, जबकि जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पांड्या के एक-एक ओवर बाकी थे। इन दो ओवरों में शिवम दुबे ने 46 रन खर्च कर दिए। उन्हें एक विकेट जरूर मिला, पर टीम मैनेजमेंट का यह फैसला समझ से परे था। जहां टीम इंडिया को रन रोकने थे, वहां जबरदस्ती रन लुटाए गए। अगर यही दो ओवर हार्दिक और बुमराह से कराए जाते तो हो सकता था कि सिर्फ 10-15 रन बनते और भारत की जीत 100+ रन की होती। हालांकि, ऐसा नहीं हुआ।
टीम इंडिया को इतने बड़े स्कोर के बाद जिम्बाब्वे पर दबाव बनाना चाहिए था, जैसा वेस्टइंडीज ने किया था और 254 के जवाब में 147 रन पर जिम्बाब्वे की पारी को समेट दिया था। तब वेस्टइंडीज ने 107 रन से जीत हासिल की थी और उनका नेट रन रेट +5.35 हो गया था। 110 या 120 रन से जीत भारतीय टीम को वेस्टइंडीज के मौजूदा नेट रन रेट के करीब या उसके पार ले जा सकती थी। भारत और वेस्टइंडीज , दोनों के अंक फिलहाल दो-दो हैं। पर भारत से रणनीति में भारी चूक हो गई। अब भारत-वेस्टइंडीज नॉकआउट तो है, लेकिन इस नॉकआउट के साथ एक खतरा और है और वह खतरा है-बारिश से मैच धुलने का डर। क्या टीम मैनेजमेंट को इस बारे में नहीं सोचना चाहिए था?

क्यों यह चूक पड़ सकती है भारी?

यह तो तय है कि भारत और वेस्टइंडीज के बीच कोलकाता के ईडन गार्डेन्स में एक मार्च को जो जितेगा, वह सेमीफाइनल में पहुंच जाएगा। पर अगर बारिश ने खलल डाला और मैच धुला तो भारत टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा। बारिश से बाधित मैच में डकवर्थ लुईस नतीजे के लिए दोनों पारियों में कम से कम पांच-पांच ओवर का खेल जरूरी है। हालांकि, ऐसा संभव नहीं हो पाया और पूरे मैच में बारिश हुई और खेल नहीं हो पाया तो वेस्टइंडीज बेहतर नेट रन रेट के दम पर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर जाएगा। इस मैच के लिए कोई रिजर्व डे भी नहीं है। वेस्टइंडीज को मैच खेलने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। दोनों टीमों को एक-एक अंक जरूर मिलेंगे, लेकिन नेट रन रेट नहीं बदलेगा और बेहतर नेट रन रेट के साथ वेस्टइंडीज दक्षिण अफ्रीका के साथ अंतिम-चार में पहुंच जाएगा। यह टीम इंडिया के लिए चिंताजनक है। ऐसे में भारतीय फैंस यही मना रहे होंगे कि मैच में बारिश न हो।

क्या कोलकाता में बारिश की संभावना है?

एक्यूवेदर की रिपोर्ट के मुताबिक, रविवार एक मार्च को कोलकाता का मौसम साफ रह सकता है। दिन में बारिश की फिलहाल कोई संभावना नहीं दिख रही है। हालांकि, रात में बारिश की दो प्रतिशत संभावना है। वहीं, 33 प्रतिशत बादल रहने की संभावना है। यह भारतीय फैंस के लिए अच्छी खबर है। फैंस यही मना रहे हैं कि पूरा मैच हो और भारत जीत के साथ सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई करे। पर चिंता की बात तो यह है कि जब जिम्बाब्वे ने इतने रन बनाए हैं, तो वेस्टइंडीज के बल्लेबाज, जो इतने शानदार फॉर्म में चल रहे हैं, वो क्या हश्र करेंगे। वेस्टइंडीज ने गुरुवार को 83 पर सात विकेट गिरने के बाद 176 रन बना दिए थे। टीम इंडिया के कोच और मैनेजमेंट को जल्द से जल्द रणनीति में बदलाव और गेंदबाजी में नए प्लान की जरूरत है।

शराब केस में जांच पर सवाल, जज बोले- त्रुटियों से भरी चार्जशीट चौंकाने वाली

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नई दिल्ली: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आबकारी नीति घोटाला मामले में कोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान कहाकि मैं पहली बार ऐसी चार्जशीट देख रहा हूं जिसमें इतनी खामियां हैं. कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी को तथ्य ठीक से रखने चाहिए थे. मैं पहली बार ऐसी चार्जशीट देख रहा हूं, जिसमें इतनी खामियां हैं. कोर्ट ने कहा कि CBI ने जो दस्तावेज दिए वो चार्जशीट से मेल नहीं खाते हैं. देश में सभी नागरिकों को फेयर ट्रायल का हक है.कभी जब आप बहुत फाइलें पढ़ते हैं तो फाइल आपसे बात करने लगती हैं.

कोर्ट ने जांच एजेंसी को डांट लगाते हुए कहा कि मैं पहले दिन से कबूलनामा मांग रहा हूं. लेकिन, चार्जशीट के साथ नहीं दी गई. कोर्ट ने कहा कि स्टार विटनेस की लिस्ट की मांगी की गई थी. कोर्ट की फटकार पर एजेंसी ने कहा कि सील बंद लिफाफे में जानकारी दी गई थी.

स्पेशल जज ने नाराजगी जताई कि अभी तक मुझे कन्फेशनल स्टेटमेंट की कॉपी तक नहीं दी गई. मैं सीबीआई के वकील से ईमानदारी की उम्मीद करता हूं. कोर्ट ने एजेंसी से कहा कि CBI ने सेम चार्जशीट चेन्नई कोर्ट में दाखिल किया था और उसको साउथ लॉबी कहा था , साउथ लॉबी शब्द कहां से आया?

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को CBI द्वारा जांच किए गए दिल्ली एक्साइज पॉलिसी मामले में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है. राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुनाया कि एक्साइज पॉलिसी बनाने में किसी क्रिमिनल साजिश या गलत काम का कोई सबूत नहीं मिला. स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने केजरीवाल को सिसोदिया और कई अन्य लोगों के साथ बरी कर दिया. कोर्ट ने कहा कि आरोपों में दम नहीं है और कोई क्रिमिनल इरादा साबित नहीं हो सका. इस मामले में केजरीवाल को आरोपी नंबर 18 बनाया गया था.

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नृत्यांगना शक्ति मोहन ने शुरु की वैश्विक सांस्कृतिक यात्रा 

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मुंबई । प्रसिद्ध भारतीय नृत्यांगना शक्ति मोहन ने अपने विशेष यूट्यूब प्रोजेक्ट ‘डांस अक्रॉस द वर्ल्ड’ के जरिए एक वैश्विक सांस्कृतिक यात्रा शुरू की है। यह सफर सिर्फ विभिन्न देशों तक सीमित नहीं, बल्कि अलग-अलग सभ्यताओं और उनकी नृत्य परंपराओं को नए दृष्टिकोण से समझने का प्रयास भी है।  हाल ही में उन्होंने इस प्रोजेक्ट का नया एपिसोड लॉन्च किया, जिसमें वह रूस की प्राचीन और शक्तिशाली लोकनृत्य शैलियों को एक्सप्लोर करती नजर आईं। लॉन्च इवेंट में उनके दोस्तों, परिवार और इंडस्ट्री के लोगों ने इस अनोखे विज़न की सराहना की। 
शक्ति मोहन के मुताबिक यह प्रोजेक्ट उनके दिल के बेहद करीब है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हजारों साल पुरानी नृत्य शैलियों को आज की युवा पीढ़ी से जोड़ना है, ताकि ये कला रूप जीवित रह सकें। पहले सीजन में वह कई देशों के पारंपरिक नृत्य रूप सीख चुकी हैं और उन्हें अपने दर्शकों तक पहुंचाया है। उनका मानना है कि दुनिया में अनगिनत नृत्य परंपराएं ऐसी हैं जो अपनी सुंदरता के बावजूद धीरे-धीरे गुमनाम होती जा रही हैं। ऐसे समय में जरूरी है कि इन नृत्य शैलियों को आधुनिक मंच और नए अंदाज़ में पेश किया जाए, ताकि युवा उनमें रुचि ले सकें। रूस के लोकनृत्य के अनुभव को उन्होंने अपने करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और यादगार अनुभव बताया। भारतीय शास्त्रीय नृत्य विशेषकर भरतनाट्यम से गहरी जुड़ाव रखने वाली शक्ति के लिए रूसी नृत्य बिल्कुल अलग दुनिया था, जिसमें तेज गति, अनोखी तकनीक और चेहरे की भाव-भंगिमाओं का खास महत्व है। 
इन दोनों शैलियों के बीच का अंतर उनके लिए सीखने की प्रक्रिया को और भी रोचक बनाता है। यात्रा के दौरान उन्हें रूसी संस्कृति की गर्मजोशी ने भी प्रभावित किया। उन्होंने बताया कि एक स्थानीय कोरियोग्राफर उनके समर्पण से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें रूसी परंपरा का विशेष हेडगियर भेंट में दिया। उनके लिए यह तोहफा सिर्फ यादगार वस्तु नहीं, बल्कि दो अलग संस्कृतियों के बीच बने सम्मान और जुड़ाव का प्रतीक है। शक्ति मोहन का यह वैश्विक नृत्य सफर साबित करता है कि कला की कोई सीमा नहीं होती। 

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उमंग सिंघार ने लोकायुक्त और CAG रिपोर्ट पर सदन में चर्चा की मांग उठाई

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राजनीति। मध्य प्रदेश विधानसभा में लोकायुक्त और नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्टों को लेकर सियासत तेज हो गई है. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को पत्र सौंपकर लोकायुक्त तथा CAG के प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा कराए जाने की मांग की है।

महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर चर्चा की आवश्यकता

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि लोकायुक्त और Comptroller and Auditor General of India (CAG) द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदनों पर अब तक विधानसभा में विस्तार से चर्चा नहीं हो सकी है. उन्होंने कहा कि ये प्रतिवेदन शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली, वित्तीय प्रबंधन और संभावित अनियमितताओं से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं, जिन पर सदन में विचार-विमर्श आवश्यक है।

पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर

उमंग सिंघार ने पत्र में आग्रह किया है कि जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही की दृष्टि से इन रिपोर्टों को चर्चा के लिए सूचीबद्ध किया जाए. उनका कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विधायिका की जिम्मेदारी है कि वह लोकायुक्त और CAG जैसी संवैधानिक संस्थाओं की रिपोर्टों पर गंभीरतापूर्वक विचार करे और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

वित्तीय अनुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा

उन्होंने यह भी कहा कि यदि इन प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा होती है तो न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूती मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी. इससे जनता के बीच सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता बढ़ेगी और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ आधार मिलेगा।

बजट सत्र में टकराव के आसार

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है. अब यह देखना होगा कि विधानसभा अध्यक्ष इस अनुरोध पर क्या निर्णय लेते हैं और क्या आने वाले दिनों में इन महत्वपूर्ण प्रतिवेदनों पर सदन में चर्चा होती है या नहीं।

आदेश का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार हमारे आदेशों का उल्लंघन करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हमने स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है। हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैंसुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से बताया गया कि चुनाव आयोग ने राज्य में मतदाता सूचियों के एसआईआर में तैनात न्यायिक अधिकारियों के लिए एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर टिप्पणी की कि वह अपने न्यायिक अधिकारियों को जानता है और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं होंगे।

न्यायिक अधिकारियों के लिए जारी किया प्रशिक्षण मॉड्यूल : बंगाल सरकार

पश्चिम बंगाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के सामने इस मामले का उल्लेख किया। उन्होंने पीठ से कहा, ‘चुनाव आयोग ने पीठ पीछे न्यायिक अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। एक प्रशिक्षण मॉड्यूल जारी किया है जिसमें कहा गया है कि उन्हें क्या स्वीकार करना चाहिए और क्या नहीं।’इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि राज्य में इस प्रक्रिया के लिए तैनात न्यायिक अधिकारी इस संबंध में फैसले लेंगे। सीजेआई ने कहा, ‘हम इस तरह की बातें बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसका अंत होना चाहिए। हम अपने न्यायिक अधिकारियों को जानते हैं और वे किसी भी चीज से प्रभावित नहीं हो सकते।’ इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि किन दस्तावेजों की जांच की जानी है।

हमारे आदेशों से आगे कोई नहीं जाएगा :सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमारे आदेश बिलकुल स्पष्ट हैं। पीठ ने कहा कि न तो चुनाव आयोग और न ही राज्य सरकार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पारित आदेशों से आगे जाएगी।

पश्चिम बंगाल सरकार और चुनाव आयोग के बीच चल रहे गतिरोध से निराश होकर शीर्ष अदालत ने 20 फरवरी को एक ‘असाधारण’ निर्देश जारी किया। इसमें राज्य में विवादित मतदाता सूचियों की एसआईआर में चुनाव आयोग की सहायता के लिए सेवारत और पूर्व जिला न्यायाधीशों को तैनात करने का निर्देश दिया गया।
 

‘अब फिल्मों में होती अधिक इंटिमेसी’, भाग्यश्री ने सिनेमा में बदलाव पर की बात; शादी के बाद नहीं मिलता था काम

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सलमान खान के साथ फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से अपनी शुरुआत करने वाली भाग्यश्री ने 90 के दशक की फिल्मों और आज की फिल्मों के बीच अंतर को लेकर बात की। उन्होंने मौजूदा वक्त में फिल्मों में अनावश्यक इंटिमेसी दिखाने पर नाराजगी जताई। साथ ही उनका मानना है कि इंटिमेसी के बिना भी फिल्म बनाई जा सकती है और सफल भी हो सकती है।

अब लोगों के पास एंटरटेनमेंट के कई विकल्प हैं

वैरायटी इंडिया के साथ बातचीत के दौरान भाग्यश्री ने 90 के दशक और आज के सिनेमा में आए बदलावों के बारे में बात की। जब उनसे पूछा गया कि आज के सिनेमा में कौन से बदलाव उन्हें पसंद हैं और कौन से नापसंद? इस पर एक्ट्रेस ने कहा कि सिनेमा समाज का प्रतिबिंब है।90 के दशक में यह मनोरंजन का एकमात्र साधन था, परिवार को एक साथ समय बिताने का एकमात्र मौका देने वाला मनोरंजन था। आज परिवार छोटे हो गए हैं, लोग अधिक व्यक्तिवादी हो गए हैं और क्रिएटिव आर्ट के माध्यम भी कई हो गए हैं। इसलिए अब लोगों के पास विकल्प भी बहुत हैं।

इंटिमेसी के बिना भी बन सकती हैं फिल्में

अभिनेत्री का मानना है कि हर तरह के दर्शक को खुश करना अब नामुमकिन हो गया है। फिल्में अलग-अलग गुटों, शैलियों, इंडी फिल्मों, आर्ट फिल्मों आदि में बंट गई हैं। मुझे सच में लगता है कि भले ही अब रियलिस्टिक सिनेमा ज्यादा बनता है।लेकिन ऐसी इंटिमेसी दिखाना जरूरी नहीं है, जिससे आप अपने माता-पिता या बच्चों के साथ बैठकर असहज महसूस करें। कहानियां समाज के प्रति विद्रोह दिखाए बिना भी साहसी, अलग और दिलचस्प हो सकती हैं।

90 के दशक में पेट्रियाकल किरदारों का था बोलबाला

भाग्यश्री ने कहा कि 90 के दशक में कहानियों में पेट्रियाकल किरदारों का बोलबाला था। इससे अभिनेत्रियों के लिए शादी के बाद काम फिल्में करने के मौके कम हो गए थे।हालांकि, अभी भी वर्किंग महिलाएं समाज के लिए एक अवधारणा ही हैं, लेकिन अधिक शिक्षित महिलाओं के आगे आने से महिलाओं के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। शादी के बाद महिलाओं को पढ़ने और काम करने के लिए प्रेरित करने के लिए पुरुष भी बधाई के पात्र हैं।

‘राजा शिवाजी’ में नजर आएंगी भाग्यश्री

भाग्यश्री ने 1989 में आई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। सूरज बड़जात्या द्वारा निर्देशित इस फिल्म में सलमान खान प्रमुख भूमिका में थे। शादी के बाद निजी जीवन पर ध्यान देने के लिए उन्होंने इंडस्ट्री से ब्रेक ले लिया। 2003 में उन्होंने ‘मां संतोषी मां’ से बॉलीवुड में वापसी की और बाद में ‘थलाइवी’, ‘राधे श्याम’ और ‘छत्रपति’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया। अब भाग्यश्री रितेश देशमुख की आगामी फिल्म राजा शिवाजी में नजर आएंगी। यह 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है।

भाजपा की राष्ट्रीय टीम में बड़े बदलाव की तैयारी, 60 साल से कम उम्र के नेताओं को मिलेगा मौका

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नई दिल्ली। भाजपा (BJP) में नए युवा अध्यक्ष नितिन नबीन (Nitin Nabin) के आने के बाद संगठन में युवा और नए नेतृत्व को जगह देने की तैयारी शुरू हो गई है। महासचिव और सचिव (General Secretaries and Secretaries) स्तर पर 60 साल से कम उम्र के नेताओं को तरजीह दी जाएगी, जबकि उपाध्यक्ष स्तर पर अनुभवी वरिष्ठ नेताओं को बनाए रखने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय संगठन में आधे से ज्यादा पदाधिकारियों के बदलाव की संभावना है और इनमें कई नए चेहरे विभिन्न राज्यों से केंद्रीय संगठन में शामिल किए जाएंगे।

नए नेतृत्व में युवा चेहरे
भविष्य की भाजपा को तैयार करने के प्रयास में अध्यक्ष समेत लगभग 40 राष्ट्रीय पदाधिकारियों में करीब 60 फीसदी नए चेहरों को शामिल करने की योजना है। महासचिव और सचिव स्तर पर उम्र सीमा 60 साल के आसपास रखी जाएगी, लेकिन उपाध्यक्ष स्तर पर कुछ लचीलापन रखा जाएगा ताकि अनुभवी नेताओं को संगठन में शामिल रखा जा सके। मौजूदा टीम के आधे से अधिक पदाधिकारी बदलने की संभावना है, जबकि 60 साल से अधिक उम्र वाले महासचिव और सचिवों को नई भूमिका दी जा सकती है।

पदों की संरचना और महिलाओं की भागीदारी
भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों में अध्यक्ष के अलावा 13 उपाध्यक्ष, 10 महासचिव, 15 सचिव और एक कोषाध्यक्ष शामिल होते हैं। सूत्रों के अनुसार, नई टीम में महिलाओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। पार्टी के संविधान में एक तिहाई महिला पदाधिकारियों की आवश्यकता होती है, लेकिन यह केवल राजनाथ सिंह के कार्यकाल में ही संभव हो पाया था। नई टीम में देश के सभी हिस्सों का प्रतिनिधित्व और जातीय व सामाजिक समीकरणों का संतुलन भी रखा जाएगा।

बदलाव पर प्रक्रिया और समय
भाजपा की नई टीम को लेकर तैयारी शुरू हो चुकी है, लेकिन इसकी आधिकारिक घोषणा में अभी समय लग सकता है। चूंकि बदलाव व्यापक स्तर पर होंगे, इसलिए कई स्तरों पर चर्चा और विचार-विमर्श अभी बाकी है। संसद सत्र और आगामी चुनावों पर पार्टी का ध्यान अधिक होने के कारण बदलाव की प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

 

क्या किसान का बेटा बदलेगा जिम्बाब्वे की तकदीर? IPL खेलना सपना

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जब जिम्बाब्वे क्रिकेट अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था, तब देश को एक नए चेहरे, एक नई उम्मीद की तलाश थी। बड़े नाम विदा ले चुके थे, सपने बिखर चुके थे और भरोसा डगमगा रहा था। ऐसे समय में हरारे के एक साधारण घर से उठी गेंद-बल्ले की आवाज अब विश्व मंच तक गूंज रही है। 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट आज जिम्बाब्वे की नई सुबह का प्रतीक बन चुके हैं। वह जिम्बाब्वे क्रिकेट के टूटते सपनों के बीच एक नई किरण बनकर उभरे हैं। वह न तो किसी अकादमी से उभरे, न किसी बड़े वादे से जाने गए, बल्कि घर के पिछले हिस्से में लगे छोटे से नेट पर अभ्यास कर विश्व मंच तक पहुंचे। उस नेट में वह और उनके भाई घंटों क्रिकेट खेलते थे, बिना यह सोचे कि एक दिन वह देश की नई उम्मीद बन जाएंगे।

क्यों चर्चा में हैं ब्रायन बेनेट?

जब से टी20 विश्वकप टूर्नामेंट (2007 से) शुरू हुआ है, कभी ऐसा नहीं हुआ कि कागज पर कमजोर दिखने वाली टीम का बल्लेबाज टूर्नामेंट के शीर्ष पांच सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में शामिल हो। पर ब्रायन बेनेट ने यह कर दिखाया।

वह टूर्नामेंट के इस संस्करण में सबसे ज्यादा रन बनाने वालों में दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने पांच मैचों की पांच पारियों में 277 की औसत से 277 रन बनाए। इनमें तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट 135.78 का रहा।

इस दौरान उन्होंने 31 चौके और छह छक्के लगाए। ये सभी छह छक्के उन्होंने गुरुवार को भारत के खिलाफ पारी के दौरान लगाए हैं। भारत के खिलाफ उन्होंने 59 गेंद में आठ चौके और छक्के की मदद से और 164.41 के स्ट्राइक रेट से नाबाद 97 रन की पारी खेली।

22 साल का यह लड़का ओपनिंग करने उतरा और नॉटआउट रहा। यह पहली बार नहीं था कि ब्रायन ओपनिंग करने उतरे और आखिरी तक नॉटआउट रहे। इस विश्वकप में उनकी पांच पारियों में चार बार ऐसा हुआ, जब वह नॉटआउट पवेलियन लौटे।

वह एक बार आउट सिर्फ वेस्टइंडीज के खिलाफ हुए। 22 साल में इतनी मैच्योरिटी शायद ही किसी बल्लेबाज में दिखी हो। उनकी बाकी पारियों में एक भी छक्का नहीं था, लेकिन भारत की मजबूत गेंदबाजी लाइन अप के सामने उन्होंने यह कमी भी पूरी कर दी।

वह शतक से चूक गए, लेकिन पूरी दुनिया के फैंस के दिल जीत गए। इस विश्वकप में ब्रायन की पारियां- नाबाद 48 रन, नाबाद 64 रन, नाबाद 63 रन, पांच रन और नाबाद 97 रन की रही हैं।

ब्रायन बेनेट ने कैसे थामा बल्ला?

ब्रायन बेनेट कभी टीवी के सामने बैठकर कवर ड्राइव गिनने वाला बच्चों में नहीं गिने जाते थे। न ही दीवारों पर क्रिकेटरों के पोस्टर लगाने वालों में रहे, न ही उन्होंने बचपन में कोई बड़ी घोषणा कि मैं देश के लिए खेलूंगा, ये करूंगा, वो करूंगा। उनके लिए क्रिकेट की शुरुआत घर के पिछले हिस्से में लगे एक छोटे से नेट से हुई, जहां सामने उनके जुड़वां भाई खड़े होते थे और गेंद-बल्ले की आवाज घंटों गूंजती रहती थी। आज वही 22 वर्षीय ब्रायन बेनेट जिम्बाब्वे क्रिकेट की नई पहचान बन चुके हैं।

टी20 विश्वकप 2026 में पांच में से चार पारियों
में नॉटआउट रहे बेनेट

खिलाफ पारियां गेंदबाजी मैदान
भारत 97* 0/16 चेन्नई
वेस्टइंडीज 5 मुंबई
श्रीलंका 63* कोलंबो
ऑस्ट्रेलिया 64* कोलंबो
ओमान 48* 0/18 कोलंबो
नोट: (*) का मतलब नॉटआउट

साधारण शुरुआत, असाधारण सफर

हंबनटोटा में ट्रेनिंग कैंप के दौरान बेनेट ने कहा, ‘मैं बचपन में क्रिकेट को ज्यादा फॉलो नहीं करता था। स्कूल में अपने भाइयों और पिताजी के साथ खेलता था। अंडर-19 के आसपास आकर ही मैंने जिम्बाब्वे क्रिकेट को गंभीरता से फॉलो करना शुरू किया।’ उनके पिता, जो एक ब्लूबेरी किसान हैं, खुद क्लब क्रिकेट खेल चुके हैं और यंग मशोनालैंड के लिए कुछ फर्स्ट क्लास मैच भी खेले। बेनेट बताते हैं, ‘उन्होंने एंड्रयू वॉलर, डेव हॉटन, एंडी फ्लावर, ग्रांट फ्लावर जैसे खिलाड़ियों के साथ खेला था। हीथ स्ट्रीक और हेनरी ओलोंगा के किस्से सुनाते थे।’ घर के पिछले हिस्से में लगा नेट ही उनका पहला कोच था। ब्रायन बताते हैं, ‘मेरा एक जुड़वां भाई है। पिताजी ने हमारे लिए घर पर नेट लगाया था। स्कूल के बाद और छुट्टियों में हम घंटों खेलते थे, एक बल्लेबाजी करता, दूसरा गेंदबाजी।’

बहुमुखी प्रतिभा वाले खिलाड़ी हैं ब्रायन

क्रिकेट के अलावा बेनेट ने हॉकी, स्क्वैश और रग्बी भी खेला। स्कूल में दो खेल जरूरी थे, गर्मियों में क्रिकेट और सर्दियों में हॉकी। यही अनुभव उनकी फिटनेस और मानसिक मजबूती की नींव बना। कोविड के कारण स्कूल के आखिरी दो साल प्रभावित हुए, तो 2022 में वह दक्षिण अफ्रीका के किंग्सवुड कॉलेज चले गए, ताकि ज्यादा मैच खेल सकें। ब्रायन ने बताया, ‘कोविड में खेल नहीं हो पा रहे थे, इसलिए वहां जाकर फिर से लय मिली।’

ब्रायन बेनेट के बल्लेबाजी आंकड़े

प्रारूप मैच रन सर्वोच्च
स्कोर
औसत स्ट्राइक रेट शतक अर्धशतक
टेस्ट 11 509 139 29.94 71.48 2 2
वनडे 11 348 169 31.63 96.13 1 0
टी20I 57 1873 111 36.72 143.96 1 12

अंडर-19 विश्व कप से अंतरराष्ट्रीय मंच तक

2022 का अंडर-19 विश्व कप उनके करियर का भावनात्मक मोड़ रहा। वह बताते हैं, ‘पाकिस्तान के खिलाफ 83 रन और वेस्टइंडीज के खिलाफ अपने जुड़वां भाई के साथ 100 रन की साझेदारी मेरी सबसे बड़ी यादें हैं।’ दिसंबर 2023 में टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू के बाद उन्होंने अगले 12 महीनों में तीनों फॉर्मेट में शतक जड़ दिए। इस उपलब्धि के साथ वह ब्रेंडन टेलर और सिकंदर रजा के बाद ऐसा करने वाले तीसरे जिम्बाब्वे खिलाड़ी बने।

ट्रेंट ब्रिज की यादगार पारी

इंग्लैंड के खिलाफ ट्रेंट ब्रिज में 139 रन की पारी ने उन्हें सुर्खियों में ला दिया। ट्रेंट ब्रिज पर दो दशक बाद जिम्बाब्वे का टेस्ट खेलना ऐतिहासिक था। ब्रायन कहते हैं, ‘वह अद्भुत अनुभव था। भरे हुए स्टेडियम में खेलना, हर गेंद को प्रोसेस के साथ खेलना, वह बहुत खास पल था।’ तकनीक के सवाल पर ब्रायन कहते हैं, ‘मैं चीजों को सरल रखता हूं। गेंद को देखो, मजबूत पोजिशन में रहो, सिर स्थिर रखो और देर से खेलो। ज्यादा सोचता नहीं हूं।’ टेस्ट क्रिकेट के प्रति उनका प्रेम साफ झलकता है। वह कहते हैं, ‘रेड बॉल क्रिकेट मुझे पसंद है। इसमें समय मिलता है, मानसिक और शारीरिक दोनों परीक्षा होती है।’

ब्रायन बेनेट के गेंदबाजी आंकड़े

प्रारूप मैच विकेट सर्वश्रेष्ठ
गेंदबाजी
इकोनॉमी
टेस्ट 11 6 5/95 3.80
वनडे 11 0 10.20
टी20I 57 6 2/20 8.35

गेंदबाजी और नेतृत्व की जिम्मेदारी

बल्लेबाजी के अलावा वे घरेलू लीग में नियमित गेंदबाजी भी करते हैं। ब्रायन बताते हैं, ‘मैं अपनी गेंदबाजी पर भी काम करता हूं। सब कुछ बल्लेबाजी पर नहीं छोड़ रहा।’ जिम्बाब्वे क्रिकेट बोर्ड ने उन्हें टेस्ट और वनडे में उपकप्तान भी बनाया है। इस फैसले पर ब्रायन का कहना है, ‘यह बोर्ड का फैसला था। मैं सीखना चाहता हूं और सीनियर खिलाड़ियों से फायदा उठाना चाहता हूं।’

खेतों से आईपीएल तक का सपना

मैदान के बाहर बेनेट सादगी पसंद हैं। हरारे के पास रूवा में उनके परिवार का फार्म है, जहां वे समय बिताते हैं। गोल्फ खेलना उनका शौक है। उनके आदर्श एबी डिविलियर्स और विराट कोहली हैं। आईपीएल खेलना उनका सपना है। ब्रायन बताते हैं, ‘मैं हर साल आईपीएल देखता हूं। मेरी पसंदीदा टीम आरसीबी है। आईपीएल खेलना मेरी बकेट लिस्ट में है।’

जिम्बाब्वे की नई उम्मीद

टी20 विश्वकप 2026 जिम्बाब्वे के लिए नए युग की शुरुआत है। पिछली दो वनडे विश्व कप और 2024 टी20 विश्व कप में जगह न बना पाने के बाद अब टीम वापसी की कोशिश में है। बेनेट का लक्ष्य साफ है और वह बताते हैं, ‘मैं जिम्बाब्वे को फिर से प्रतिस्पर्धी बनाना चाहता हूं। बड़े टीमों को चुनौती देना और हर विश्व कप में खेलना चाहता हूं।’

भारतीय नौसेना को मिला नया दम, युद्धपोत ‘अंजदीप’ से बढ़ी ताकत

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भारतीय नौसेना की समंदर में ताकत बढ़ चुकी है। नौसेना को एक और पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अंजदीप मिल गया है। उथले पानी में काम करने की क्षमता वाले आठ पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों की श्रृंखला का यह तीसरा युद्धपोत 27 फरवरी को चेन्नई में नौसेना में शामिल किया गया। इस समारोह में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी शामिल हुए। यह जहाज कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया है।

किस पर रखा गया युद्धपोत का नाम अंजदीप?

अंजदीप नाम कर्नाटक के कारवार तट के पास स्थित अंजदीप द्वीप के नाम पर रखा गया है। यह युद्धपोत 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ बना है। इससे देश की रक्षा निर्माण क्षमता को बल मिलेगा और आयात पर निर्भरता कम होगी। अंजदीप नौसेना के इसी नाम वाले पुराने युद्धपोत का नया अवतार है। पुराना युद्धपोत 2003 में रिटायर हो गया था।77 मीटर लंबे इस जहाज में एक हाई-स्पीड वाटर-जेट प्रोपल्शन सिस्टम लगा है, जो इसे त्वरित प्रतिक्रिया और निरंतर संचालन के लिए 25 समुद्री मील की अधिकतम गति प्राप्त करने में सक्षम बनाता है। नौसेना ने कहा कि कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स द्वारा निर्मित, आईएनएस अंजदीप एक अत्याधुनिक पोत है जिसे विशेष रूप से तटीय युद्ध वातावरण की चुनौतियों का सामना करने के लिए डिजाइन किया गया है।पनडुब्बी रोधी युद्ध की भूमिका के अलावा यह युद्धपोत तटीय निगरानी, कम तीव्रता वाले समुद्री अभियानों और खोज एवं बचाव अभियानों को अंजाम देने के लिए भी सुसज्जित है।

मुख्य विशेषताएं

  • रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसे डॉल्फिन हंटर के रूप में डिजाइन किया गया है।
  • जो तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बी का पता लगाकर उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।
  • करीब 77 मीटर लंबे इस श्रेणी के युद्धपोत वॉटरजेट से चलने वाले नौसेना के अब तक के सबसे बड़े युद्धपोत हैं।
  • इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट और उथले पानी में काम करने वाला सोनार सिस्टम लगाया गया है।
  • इससे समुद्र के काफी अंदर तक मौजूद दुश्मन के खतरों का पता लगाने और उनको नष्ट करने की क्षमता बढ़ेगी।
  • यह जहाज नौसेना की तटीय निगरानी और समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमता को भी मजबूत करेगा।
     
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News Desk

क्यों शादी से डरती हैं डेजी शाह? करवाए अपने एग्स फ्रीज, कहा- परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं

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डेजी शाह ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने शादी को डरावना बताया है और उन्होंने साफ कहा कि उनके लिए परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं है। साथ ही मां बनने को लेकर भी उन्होंने बड़ा फैसला लिया है। 

आजकल शादी डरावनी लगती है

फिल्मीग्यान को दिए एक इंटरव्यू में, ‘जय हो’ की एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने अपने एग्स फ्रीज करवा लिए हैं, ताकि भविष्य में जब भी वे चाहें, वे मां बन सकें। उनका कहना है कि वे अपनी जिंदगी के फैसले अपनी शर्तों पर लेना चाहती हैं।डेजी ने माना कि आजकल रिश्तों से जुड़ी खबरें उन्हें परेशान करती हैं। उन्होंने कहा, ‘हर दिन कुछ ना कुछ हो रहा है, कपल्स के ब्रेकअप या वो ‘ब्लू ड्रम’ जैसे चौंकाने वाले मामले। ये सब बहुत डरावना है।’हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने शादी को लेकर ज्यादा सोचा नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह शादी करेंगी, तो उन्होंने जवाब दिया कि यह फैसला उन्होंने ‘ऊपरवाले पर छोड़ दिया है।’

क्या चुनेंगी डेजी…प्यार या पैसा?

इंटरव्यू के दौरान जब उनसे ‘प्यार’ और ‘पैसा’ में से एक चुनने को कहा गया, तो 41 साल की एक्ट्रेस ने मुस्कुराते हुए कहा कि उन्हें दोनों चाहिए। उनका मानना है कि रिश्ते में इमोशनल कनेक्शन के साथ-साथ आर्थिक रूप से मजबूत होना भी जरूरी है। वे चाहती हैं कि उनका पार्टनर खुद से आर्थिक रूप से सुरक्षित और स्वतंत्र हो।

परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं

मदरहुड पर बात करते हुए डेजी ने साफ कहा, ‘परिवार शुरू करने के लिए शादी जरूरी नहीं है।’ उन्होंने बताया कि उन्होंने एग फ्रीज करवाने का फैसला इसलिए लिया, ताकि वे जब भी चाहें, बच्चे कर सकें।

वर्कफ्रंट

वर्कफ्रंट की बात करें, तो डेजी शाह आखिरी बार वेब सीरीज ‘रेड रूम’ में नजर आईं थी। वे अब पलाश मुच्छल के निर्देशन में बनी फिल्म में नजर आएंगी, जिसमें उनके साथ श्रेयास तलपडे नजर आएंगे।