भारतीय वायुसेना का सुखोई-30 विमान रडार से गायब होकर क्रैश, दोनों पायलट शहीद

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नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना का एक सुखोई एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान गुरुवार रात असम के कार्बी आंगलोंग जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुखद हादसे में वायुसेना के दो जांबाज अधिकारियों, स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर का निधन हो गया है। वायुसेना ने आधिकारिक तौर पर इस क्षति की पुष्टि करते हुए बताया कि विमान एक नियमित प्रशिक्षण मिशन पर था, जब यह हादसा हुआ। इससे पहले विमान रडार से गायब हो गया था।
घटनाक्रम के अनुसार, इस दो सीटों वाले लड़ाकू विमान ने असम के जोरहाट से अपनी उड़ान भरी थी।

गुरुवार, 5 मार्च की शाम करीब 7 बजकर 42 मिनट पर विमान का रडार और नियंत्रण कक्ष से अंतिम बार संपर्क हुआ था। इसके बाद विमान अचानक लापता हो गया, जिससे वायुसेना में हड़कंप मच गया। रात लगभग 9 बजकर 34 मिनट पर विमान के लापता होने की आधिकारिक सूचना साझा की गई, जिसके तुरंत बाद व्यापक खोज और बचाव अभियान (सर्च ऑपरेशन) शुरू किया गया। कठिन प्रयासों के बाद वायुसेना को विमान का मलबा जोरहाट से लगभग 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के दुर्गम इलाके में मिला। जांच में सामने आया कि विमान क्रैश हो चुका था और उसमें सवार दोनों पायलटों को जानलेवा चोटें आई थीं, जिसके कारण उन्हें बचाया नहीं जा सका। रूसी कंपनी सुखोई द्वारा निर्मित यह विमान भारतीय वायुसेना के बेड़े का एक अत्यंत शक्तिशाली और आधुनिक विमान माना जाता है। भारतीय वायुसेना ने अपने सोशल मीडिया हैंडल के जरिए शहीद पायलटों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। वायुसेना ने कहा कि पूरा सैन्य परिवार इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों के साथ मजबूती से खड़ा है। फिलहाल हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह दुर्घटना देश के लिए एक बड़ी रक्षा क्षति है, जिसने पूरे सैन्य समुदाय को शोक में डुबो दिया है।

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पुतिन से तेल ले सकते हैं, लेकिन अमेरिकी ब्लैकमेल कब तक चलेगा?

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नई दिल्ली। ईरान के होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से पैदा हो रहे ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अमेरिका ने भारत को एक वैकल्पिक रास्ते का ऑफर दिया है। अमेरिका ने कहा है कि भारत फिलहाल 30 दिनों तक रूस से कच्चा तेल खरीद सकता है, लेकिन इस अमेरिकी घोषणा पर कांग्रेस भड़क गई है। कांग्रेस ने अमेरिका की ओर से मिली छूट को भारतीय संप्रभुता पर हमला बताया, बल्कि केंद्र सरकार की यह कहकर आलोचना कर रही है कि आखिर अमेरिका इस तरह से हमें कबतक ब्लैकमेल करता रहेगा।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर हिंदी में पोस्ट कर लिखा- ट्रंप का नया खेल, दिल्ली दोस्त को कहा, पुतिन से ले सकते हो तेल, कब तक चलेगा ये अमेरिकी ब्लैकमेल। वहीं कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने तो इसे देश की संप्रभुता तक से जोड़ दिया है। उन्होंने भी एक्स पर अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के बयान के जवाब में लिखा  कि 30 दिन की छूट जारी करना, दबाव की पाखंडी भाषा, नव-साम्राज्यवादी अहंकार से भरा है…क्या हम बनाना रिपब्लिक हैं, जो हमें अपने लिए तेल खरीदने के लिए अमेरिकी अनुमति की जरूरत है? वैसे ज्यादा बोलने वाली सरकार की चुप्पी कुछ ज्यादा है। क्या इसे नहीं पता कि संप्रभुता का मतलब क्या है?

इससे पहले अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने एक्स के जरिए जानकारी दी थी कि भारतीय रिफाइनरों को रूसी तेल खरीदने के लिए ट्रेजरी विभाग 30 दिनों के लिए अस्थाई छूट जारी करता है।…इस छोटे समय के उपाय से रूसी सरकार को ज्यादा वित्तीय फायदा नहीं मिलेगा…भारत, अमेरिका का एक जरूरी पार्टनर है और हमें पूरा अंदाजा है कि नई दिल्ली अमेरिकी तेल खरीद बढ़ाएगा…। बता दें अमेरिका ने यह फैसला भारत की ओर से उसके साथ तेल ढोने वाले समुद्री टैंकरों की सुरक्षा के लिए इंश्योरेंस कवर पर हो रही चर्चा के बीच लिया। अमेरिकी सरकार ने यहां तक कहा था कि अगर जरूरी हुआ तो उसकी नौ सेना होमुर्ज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों को एस्कॉर्ट करके सुरक्षित निकालेगी।

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वेबिनार में बोले प्रधानमंत्री मोदी- कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा देना जरूरी  

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ‘कृषि और ग्रामीण परिवर्तन’ विषय पर बजट के बाद आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के कृषि क्षेत्र को नई ऊर्जा से भरना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास को गति देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं और वेबिनार में सामने आए सुझाव इन प्रावधानों को तेजी से जमीन पर उतारने में मदद करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक बाजार तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया में कृषि उत्पादों की मांग भी नए रूप में सामने आ रही है। ऐसे में भारतीय किसानों को ध्यान में रखते हुए खेती को अधिक से अधिक निर्यात उन्मुख बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत की विविध जलवायु परिस्थितियां और अनेक एग्रो-क्लाइमेटिक जोन देश को कृषि उत्पादन में विशेष बढ़त देते हैं, जिनका बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए।उन्होंने बताया कि केंद्रीय बजट में हाई-वैल्यू एग्रीकल्चर पर विशेष जोर दिया गया है। इसके तहत ऐसे कृषि उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिनकी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक मांग है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, कि केरला और तमिलनाडु के किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए इस बार नारियल उत्पादन को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इसके अलावा पूर्वोत्तर क्षेत्र की फसलों को भी बढ़ावा देने का प्रस्ताव बजट में शामिल किया गया है। 

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बजट के प्रावधानों का पूरा लाभ देश को मिले, इसके लिए विशेषज्ञों के अनुभव और सुझाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बजट में आवंटित हर रुपये का लाभ वास्तविक पात्र लाभार्थियों तक जल्द से जल्द पहुंचे, इसके लिए ठोस रणनीति बनानी होगी। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि, ग्रामीण कारीगर और श्रम आधारित गतिविधियां भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव हैं। उन्होंने कहा कि कृषि भारत की दीर्घकालिक विकास यात्रा का एक रणनीतिक स्तंभ भी है और इसी सोच के साथ सरकार लगातार इस क्षेत्र को मजबूत करने के प्रयास कर रही है।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लगभग 10 करोड़ किसानों को अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सहायता दी जा चुकी है। वहीं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में किए गए सुधारों से किसानों को लागत से डेढ़ गुना तक लाभ मिल रहा है। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपये के दावों का निपटान किया गया है, जिससे किसानों का जोखिम कम हुआ है और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिली है। वेबिनार में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित संबंधित मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ भी शामिल हुए।

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नेपाल के अगले पीएम हो सकते हैं बालेन शाह, भारत के खिलाफ रहे विवादित बयान

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नई दिल्ली। नेपाल में अगले पीएम के चुनाव के लिए वोटिंग के एक दिन बाद देश इतिहास रचने जा रहा है। रैपर से नेता बने बालेन शाह पीएम बनने की राह पर हैं। नेपाल की सियासत में उभरते चेहरे बालेन शाह अक्सर भारत को लेकर अपने बयानों और फैसलों की वजह से चर्चा में रहते हैं। काठमांडू के मेयर बनने के बाद बालेन ने कई ऐसे कदम उठाए, जिन्हें भारत के खिलाफ सख्त रुख के तौर पर देखा गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सबसे बड़ा विवाद तब हुआ, जब उन्होंने अपने दफ्तर में ‘ग्रेटर नेपाल’ का नक्शा लगवाया, जिसमें यूपी, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत भारत के कई इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। यह नक्शा भारत की नई संसद में लगे ‘अखंड भारत’ के भित्तिचित्र के जवाब के तौर पर देखा गया। बालेन शाह के इस कदम ने भारत-नेपाल संबंधों पर नई बहस छेड़ दी थी। इसके अलावा उन्होंने फिल्म ‘आदिपुरुष’ के एक डायलॉग को लेकर काठमांडू में हिंदी फिल्मों की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने की चेतावनी भी दी थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक जून 2023 में काठमांडू के मेयर बालेंद्र शाह ने अपने ऑफिस में नेपाल का नया मैप लगाया, जिस पर भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस मैप में भारत के कई राज्यों के कुछ हिस्सों को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया था। जून 2023 में बालेंद्र शाह ने बॉलीवुड फिल्मों को निशाने पर लिया था। प्रभास, कृति सैनन और सैफ अली खान स्टारर फिल्म आदिपुरुष की रिलीज से यह विवाद शुरू हुआ था। फिल्म में एक डायलॉग है- सीता भारत की बेटी हैं। इस पर बालेन भड़क गए और उन्होंने इसे नेपाल की सांस्कृतिक पहचान पर हमला बता दिया था। ऐसी भी कई मान्यताएं हैं कि सीता का जन्म नेपाल के दक्षिण-पूर्व स्थित जनकपुर में हुआ था। बालेन ने कहा था कि जब तक फिल्म से डायलॉग नहीं हटाया जाता, काठमांडू में आदिपुरुष ही नहीं बल्कि कोई भी भारतीय फिल्म रिलीज नहीं होगी।

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चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू, तीन तरीकों से घर बैठे कराएं पंजीकरण

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देहरादून । उत्तराखंड में चारधाम यात्रा 2026 के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।  चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालु अब घर बैठे मोबाइल, कंप्यूटर, मोबाइल एप या वॉट्सएप के माध्यम से पंजीकरण कर सकते हैं। इस बार रजिस्ट्रेशन सभी यात्रियों के लिए अनिवार्य किया गया है, ताकि प्रशासन यात्रियों की संख्या, सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को सुचारू रूप से संभाल सके। इस साल यात्रा की शुरुआत 19 अप्रैल 2026 से हो रही है। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट इसी दिन श्रद्धालुओं के लिए खुलने है। जबकि केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल और बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खुलने है। 
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन तीन तरीकों से होगा है। पहला, उत्तराखंड सरकार की वेबसाइट पर जाकर अकाउंट बनाना और यात्रा की जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन स्लिप डाउनलोड करना। दूसरा, टूरिस्ट केयर उत्तराखंड मोबाइल एप के जरिए अकाउंट बनाने के बाद यात्रा विवरण भरकर यात्रा पास डाउनलोड करना। तीसरा, वॉट्सएप के माध्यम से रजिस्ट्रेशन: 8394833833 पर “यात्रा” मैसेज भेजने के बाद चैटबॉट आवश्यक जानकारी लेकर रजिस्ट्रेशन पूरा करता है। उन यात्रियों के लिए जिन्होंने इंटरनेट की सुविधा नहीं है, हरिद्वार और ऋषिकेश सहित कई प्रमुख स्थानों पर बायोमैट्रिक रजिस्ट्रेशन काउंटर लगाए जाएंगे। ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की शुरुआत 17 अप्रैल से होगी।
उत्तराखंड सरकार ने यात्रियों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर 0135-1364 भी जारी किया है। इस नंबर पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, यात्रा मार्ग, व्यवस्थाओं और अन्य जरूरी जानकारी की सहायता प्राप्त की जा सकती है।
इस साल बद्रीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल 2026 को सुबह 6:15 बजे श्रद्धालुओं के लिए खुलने वाले है। यह तिथि नरेंद्रनगर राजदरबार में पंचांग गणना के बाद तय की गई। चमौली के बद्रीनाथ धाम के कपाट पिछले वर्ष की तुलना में 11 दिन पहले खुल रहे हैं। यमुनोत्री और गंगोत्री धाम के कपाट 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के अवसर पर विधि-विधान के साथ भक्तों के लिए खोले जाएंगे। इस तरह, श्रद्धालु अब आसानी से ऑनलाइन पंजीकरण कर सुरक्षित और सुव्यवस्थित चारधाम यात्रा का आनंद ले सकते हैं। यात्रा में शामिल होने से पहले रजिस्ट्रेशन और हेल्पलाइन की जानकारी अवश्य प्राप्त करना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

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सतीश नंगल ने निर्दलीय भरा नामांकन, मुकाबला त्रिकोणीय हुआ

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चंडीगढ़। हरियाणा राज्यसभा चुनाव में बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नंगल ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल कर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। राज्य की दो राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब मैदान में तीन उम्मीदवार हैं। इसके साथ ही हरियाणा राज्यसभा चुनाव दिलचस्प हो गया है। इस सीट पर पहले से ही बीजेपी के आधिकारिक उम्मीदवार संजय भाटिया और कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध मैदान में हैं, लेकिन सतीश नंगल ने अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ ताल ठोक कर सबको हैरान कर दिया है। 
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अब बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दलों के लिए वोटों का गणित बैठाना चुनौतीपूर्ण हो गया है, क्योंकि निर्दलीय के रूप में नामांकन के समय उनके साथ स्वतंत्र विधायक सावित्री जिंदल, देवेंद्र कादियान और राजेश जून मौजूद थे। संजय भाटिया बीजेपी से करनाल के सांसद रह चुके हैं और उन्हें पूर्व सीएम मनोहर लाल खट्टर का करीबी माना जाता है और संगठन में उनकी मजबूत पकड़ है। उन्होंने सीएम नायब सैनी और कई बीजेपी विधायकों की मौजूदगी में अपना पर्चा दाखिल किया।

वहीं कांग्रेस ने अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले कर्मवीर सिंह बौद्ध को मैदान में उतारा है। कर्मवीर बौद्ध हरियाणा विधानसभा के पूर्व सचिव रह चुके हैं और दलित अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय हैं। हाल ही में हुए कुछ विवादास्पद मामलों में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही है। कांग्रेस ने उन्हें एक मजबूत दलित चेहरा के रूप में चुना है, ताकि जातिगत समीकरणों को संतुलित किया जा सके।
सतीश नंगल की बात करें तो वह रोहतक के रहने वाले हैं और वे पहले आईएनएलडी में थे, लेकिन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए। साल 2019 विधानसभा चुनाव में उन्होंने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ गरही-संपला-किलोई सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन हार गए थे। हरियाणा राज्यसभा चुनाव के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि नंगल को किन विधायकों का गुप्त समर्थन मिलता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अदालत के आदेशों का पालन न करने और अवमानना याचिका दायर होने पर देरी से अपील दाखिल करने की प्रवृत्ति पर कड़ी नाराजगी जता दी है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यदि इसतरह के मामलों में सख्ती नहीं दिखाई गई, तब न्यायपालिका में लोगों का भरोसा कमजोर पड़ सकता है।  जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्‍ला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा कि हाल के वर्षों में देखने में आया हैं कि अदालत के आदेशों का लंबे समय तक पालन नहीं होता और जब अवमानना याचिका दायर होती है, तब उसके बाद काफी देरी के साथ अपील या पुनर्विचार याचिका दाखिल होती है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अपील में देरी अपवाद होनी चाहिए, लेकिन अब यह करीब-करीब नियम बनती जा रही है। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि इस तरह की प्रवृत्ति को स्वीकार नहीं कर सकते है। शीर्ष अदालत के अनुसार, जब कोई पक्ष जानबूझकर अदालत के आदेशों का पालन नहीं करता, इस आचरण से न्यायपालिका की गरिमा और कानून के शासन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस तरह के मामलों में यह आचरण कई बार आपराधिक अवमानना की सीमा तक पहुंच सकता है। अदालत ने कहा कि यदि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट इन मामलों में दृढ़ता नहीं दिखाते, तब देश के आम नागरिकों का न्यायपालिका में अटूट विश्वास कमजोर पड़ सकता है। 

अदालत के अनुसार, आदेश की जानकारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष जानबूझकर उस आदेश का पालन नहीं करता, तब वहां अवमानना के दायरे में आएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अवमानना की कार्यवाही केवल अदालत में पक्षकार रहे व्यक्तियों तक सीमित नहीं होगी। दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी छत्‍तीसगढ़ सरकार के अधिकारियों के खिलाफ दायर अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान की। मामला कर्मचारियों की सेवाओं के नियमितीकरण से जुड़े आदेश के पालन न करने से जुड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिकारियों को आदेश लागू करने के लिए अंतिम मौका देकर 15 दिन का समय दिया है।

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विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सुस्त, संगठन की निष्क्रियता से कार्यकर्ता निराश

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लखनऊ|यूपी विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर प्रदेश के सभी राजनीतिक दल सक्रिय हो गए हैं, लेकिन कांग्रेस में इसको लेकर कोई हलचल नहीं है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी लंबे समय से भंग चल रही है और प्रदेश में संगठनात्मक मजबूती को लेकर कोई कार्य नहीं हो रहा है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी यूपी चुनाव को लेकर कोई सक्रियता नहीं दिखाई पड़ रही है। इससे आशंका जताई जा रही है कि यूपी चुनाव में कांग्रेस और कमजोर पड़ सकती है। यूपी चुनावों को लेकर कोई सक्रियता न होने से पार्टी के कार्यकर्ताओं में मायूसी का माहौल है। पार्टी ने पूरे देश की तरह यूपी में भी ‘संविधान बचाओ’ यात्रा के अंतर्गत जनवरी में कुछ कार्यक्रम किए थे। संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत भी प्रदेश में संगठन को मजबूत करने का कार्य शुरू किया गया था। इसके अंतर्गत फरवरी माह में कुछ बैठकें आयोजित की गई थी, लेकिन इसके अलावा संगठन का पूरा कामकाज ठप पड़ा हुआ है। जिला से लेकर ब्लॉक और मंडल स्तर पर पार्टी में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं चल रही है।

‘मतदाताओं को जोड़ने के लिए कोई प्लान नहीं’

यूपी में कांग्रेस के पास अब मुसलमानों को छोड़कर कोई दूसरा ‘डेडीकेटेड वोटर वर्ग’ नहीं है। पार्टी की किसी सियासी गतिविधि से ऐसा भी नहीं लगता कि वह समाज के किसी दूसरे वर्ग को अपने साथ लाने के लिए किसी खास योजना पर काम कर रही है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लेकर दलितों-पिछड़ों में एक भावनात्मक लहर पैदा हुई थी। इसे मजबूती के साथ अपने पाले में लाने की कोशिश की जाती तो कांग्रेस का परंपरागत दलित-पिछड़ा वोट बैंक का एक हिस्सा उसके साथ वापस आ सकता था। ऐसा होने पर पार्टी प्रदेश में खड़ी हो जाती, लेकिन पार्टी ने ऐसी कोई कोशिश नहीं किया। 

‘भारी पड़ेगी सियासी शून्यता’

नेता के अनुसार, ब्राह्मण वर्ग इस समय सत्तारूढ़ दल से नाराज है और अपने लिए विकल्प तलाश रहा है। समाजवादी पार्टी और बसपा इस नाराज वर्ग को अपने पाले में लाने के लिए तमाम सियासी संदेश दे रहे हैं, लेकिन कांग्रेस अपने इस पुराने परंपरागत वोट बैंक को अपने पास वापस लाने के लिए कोई प्रयास करती नहीं दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सियासी शून्यता पार्टी को भारी पड़ सकती है।

बिहार में हुआ था नुकसान

कांग्रेस के शीर्ष नेता ने बताया कि पार्टी प्रदेश में अब तक सक्रिय नहीं हुई है। समाजवादी पार्टी से गठबंधन को लेकर भी अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। बिहार में अंतिम समय तक इसी तरह की अनिश्चितता के कारण पार्टी को नुकसान हुआ था। अब उत्तर प्रदेश में भी पार्टी उसी तरह काम करती दिखाई दे रही है। इससे पार्टी को नुकसान हो सकता है।

दूसरे दलों की सक्रियता 

सत्तारूढ़ भाजपा यूपी को लेकर सबसे ज्यादा सक्रिय है। भाजपा-आरएसएस के शीर्ष नेता लगातार इसको लेकर बैठकें कर रहे हैं। पार्टी सरकार के स्तर पर कई उद्घाटन कार्यक्रम कर जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने की कोशिश कर रही है। 8 मार्च को भी प्रदेश में कई बड़े कार्यक्रम कर जनता को अपने से जोड़ने की तैयारी है। भाजपा-आरएसएस की समन्वय बैठक आयोजित कर बेहतर काम काज करने और कार्यकर्ताओं से सरकार के कामकाज पर जमीनी फीडबैक लेने की कोशिश की जा रही है। वहीं, बहुजन समाज पार्टी लखनऊ में बड़ी रैली आयोजित कर अपने राजनीतिक विरोधियों को संदेश दे चुकी है। उसके कार्यकर्ता निचले स्तर पर छोटी-छोटी बैठकें कर पार्टी को दुबारा मजबूत करने के लिए जी जान से जुटे हुए हैं। मायावती लगातार सांगठनिक गतिविधियों को लेकर सक्रिय हैं और विधानसभा प्रभारियों की नियुक्ति को लेकर काम हो रहा है। बसपा में इन प्रभारियों को ही बाद में प्रत्याशी बनाने की परंपरा है। यानी बसपा अभी से प्रत्याशियों के चयन के स्तर पर काम कर रही है।भाजपा को सबसे तगड़ी चुनौती दे रही समाजवादी पार्टी जिला-ब्लॉक स्तर तक संगठन को मजबूत करने का कार्यक्रम चला रही है। 15 मार्च को कांशीराम के जन्मदिन को मनाने के साथ 28 मार्च से अखिलेश यादव नोएडा से शुरू करते हुए पूरे प्रदेश में चुनावी अभियान की शंखनाद करने जा रहे हैं। पार्टी निचले स्तर पर अपना विस्तार करने की कोशिश कर रही है।लेकिन दूसरे दलों की इन चुनावी गतिविधियों के बीच कांग्रेस की अनुपस्थिति लोगों को चौंका रही है। यूपी जैसे राजनीतिक तौर पर सबसे महत्त्वपूर्ण राज्य में कमजोर पार्टी को मजबूत किए बिना उसकी राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं को जमीन नहीं मिल सकती है। 

NSG-NIA समेत 4 केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति अब 7 साल तक

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नई दिल्ली|केंद्रीय गृह मंत्रालय ने नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) सहित चार एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति की अवधि बढ़ा दी है। अब इन एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिक पांच वर्ष की बजाए, सात साल तक तैनात रहेंगे। बाकी दो एजेंसियों में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) शामिल हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में पुलिस 2 प्रभाग (कार्मिक-नीति अनुभाग) की तरफ से पांच मार्च को उक्त निर्देश जारी किए गए हैं। बता दें कि एनएसजी द्वारा गृह मंत्रालय से अनुरोध किया गया था कि केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर आने वाले कार्मिकों के कार्यकाल की अवधि पांच वर्ष से बढ़ाकर सात साल कर दी जाए। इस मामले को लेकर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों ‘सीएपीएफ’ और असम राइफल ‘एआर’ के साथ परामर्श किया गया। उसमें यह बात सामने आई कि प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाए जाने से  एनएसजी में कार्मिकों के संस्थागत ज्ञान को बनाए रखने में मदद मिलेगी। इसी तरह से दूसरी एजेंसियों को लेकर फीडबैक मिला है। इसके मद्देनजर यह निर्णय लिया गया कि ‘सीएपीएफ’ और ‘एआर’ कर्मियों को प्रारंभिक नियुक्ति के समय ही सात वर्ष की अवधि के लिए एनएसजी सहित चारों केंद्रीय एजेंसियों में प्रतिनियुक्त किया जाएगा। इसके लिए मंत्रालय द्वारा 22 नवंबर 2016 के नीतिगत दिशानिर्देशों में संशोधन किए गए हैं। पैराग्राफ 3 (बी) (2) में ‘प्रतिनियुक्ति की अवधि’ शीर्षक के तहत कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है। विशेष कार्यक्षेत्र वाली जॉब, जैसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी), राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और एनएसजी में अब प्रतिनियुक्ति की अवधि सात वर्ष कर दी गई है। यह अवधि उक्त एजेंसियों में प्रवेश करने के समय से लागू होगी। इन संगठनों को उपयुक्त प्रतिस्थापन नियुक्त करने के लिए काफी पहले से ही अग्रिम कदम उठाने की आवश्यकता होती है। ये आदेश केंद्रीय गृह मंत्री की स्वीकृति से जारी किए गए हैं। 

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केंद्रीय मंत्री शाह के हरिद्वार दौरे की तैयारियां तेज, सीएस और डीजीपी ने किया जायजा

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हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के 7 मार्च को प्रस्तावित हरिद्वार भ्रमण कार्यक्रम को लेकर शासन-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। आयोजन की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए शनिवार को मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ और गृह सचिव शैलेश बगौली सहित प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों ने बैरागी द्वीप स्थित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने कार्यक्रम की सुरक्षा से लेकर बुनियादी सुविधाओं तक की गहन समीक्षा की और संबंधित विभागों को समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करने के सख्त निर्देश दिए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने निरीक्षण के दौरान कार्यक्रम स्थल पर बनाए गए विशाल पांडाल, मंच, अतिथियों की बैठक व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और विद्युत व्यवस्था का बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने आयोजन स्थल पर स्वच्छता और सुरक्षा प्रबंधों पर विशेष जोर दिया। इसके साथ ही, कार्यक्रम स्थल पर राज्य की विकास यात्रा और नए कानूनों से संबंधित प्रस्तावित प्रदर्शनी की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय गृह मंत्री का यह दौरा अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी व्यवस्थाएं त्रुटिरहित और सुव्यवस्थित होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि किसी भी व्यवस्था में कमी न रहे, इसके लिए कार्यक्रम से पूर्व सभी प्रबंधों का दोबारा परीक्षण कर लिया जाए। सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को लेकर पुलिस महानिदेशक ने अधिकारियों को पुख्ता प्लान लागू करने के निर्देश दिए। मुख्य सचिव ने कहा कि कार्यक्रम में भारी संख्या में लोगों की भागीदारी संभावित है, ऐसे में आम नागरिकों की सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। इसके लिए एक प्रभावी ट्रैफिक प्लान तैयार किया गया है ताकि स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं को आवाजाही में किसी प्रकार की कठिनाई न हो। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरतने की चेतावनी दी है। निरीक्षण के दौरान आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डे, एडीजी अजय प्रकाश अंशुमन और जिलाधिकारी मयूर दीक्षित सहित प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक की तैयारियों की विस्तृत जानकारी साझा की। बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव, सूचना महानिदेशक और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सहित सिडकुल के प्रबंध निदेशक भी मौजूद रहे। बैरागी द्वीप में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई है।

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News Desk