₹4,248 करोड़ का शिक्षा बजट पेश, BMC का बड़ा दांव

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बृहन्मुंबई| नगर निगम (बीएमसी) ने बुधवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना शिक्षा बजट पेश किया। इस बार कुल बजट 4,248.08 करोड़ रुपये रखा गया है, जो पिछले साल 2025-26 के 3,674 करोड़ रुपये से ज्यादा है। खास बात यह रही कि चार साल बाद यह बजट किसी प्रशासक की जगह चुने गए नगरसेवकों की आम सभा के सामने पेश किया गया। यह बजट अतिरिक्त नगर आयुक्त (पूर्वी उपनगर) डॉ. अविनाश ढाकने ने पेश किया।पूरे शिक्षा बजट को दो हिस्सों में बांटा गया है ताकि रोजमर्रा के खर्च और स्कूलों के विकास दोनों पर ध्यान दिया जा सके। राजस्व खर्च 3,758.08 करोड़ रुपये, इसमें शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन, स्कूलों की देखभाल और प्रशासनिक खर्च शामिल हैं। पूंजीगत खर्च 490 करोड़ रुपये यह रकम नए स्कूल बनाने और पुराने स्कूलों के बड़े सुधार कार्यों पर खर्च होगी।

बजट में क्या खास है, यहां समझिए

बता दें कि इस बजट में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। इसके तहत कक्षा 9 के 19,317 छात्रों को टैबलेट दिए जाएंगे। इसके लिए 21.83 करोड़ रुपये रखे गए हैं। 40 और स्कूलों में खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) लैब शुरू की जाएंगी। 20,000 छात्रों को साइबर सुरक्षा की ट्रेनिंग देने के लिए 11.08 करोड़ रुपये प्राथमिक और 11.08 करोड़ रुपये माध्यमिक वर्ग के लिए रखे गए हैं। यह प्रशिक्षण राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय के सहयोग से होगा।

कला और संगीत को बढ़ावा

स्कूलों में संगीत शिक्षा को मजबूत करने के लिए 1.35 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे हारमोनियम, तबला और सिंथेसाइज़र जैसे वाद्ययंत्र खरीदे जाएंगे। इस मौके पर नगर आयुक्त भूषण गगरानी ने शिक्षा और अधिकार के बात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अच्छी शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है, विशेषाधिकार नहीं।

छात्रों की सुरक्षा और सुविधाएं

इस बजट में छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं पर खासा ध्यान दिया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी देखभाल के लिए 42 करोड़ रुपये रखे गए हैं। स्कूल लाइब्रेरी को आधुनिक बनाने और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें उपलब्ध कराने के लिए 5 करोड़ रुपये दिए गए हैं। कक्षा 10 में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाने वाले छात्रों को 25,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।इसके साथ ही ‘चलो कार्ड’ का उपयोग करने वाले छात्रों के लिए मुफ्त बस यात्रा योजना जारी रहेगी, जिसके लिए 8.70 करोड़ रुपये का प्रावधान है। बीएमसी के अनुसार, चल रहे 72 स्कूल निर्माण और मरम्मत कार्यों में से 57 काम मार्च 2026 तक पूरे हो जाएंगे। इससे अगले शैक्षणिक सत्र में छात्रों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

‘मिशन एसएएफएएल’ की शुरुआत

इतना ही नहीं पिछले साल के ‘मिशन SAMPURN’ की सफलता के बाद अब बीएमसी ने ‘मिशन एसएएफएएल’ शुरू किया है। इसका पूरा नाम ताकत, एक्टिविटीज, भविष्य के बारे में सोचने वाला, महत्वाकांक्षी, सीखना है। यह योजना नई शिक्षा नीति 2020 के अनुसार पढ़ाई के साथ खेल, कला और अन्य गतिविधियों को जोड़ने पर जोर देगी।

संवेदनशील बच्चों के समग्र विकास पर नई अकादमिक रिपोर्ट

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TPM जर्नल में प्रकाशित यह शोध संवेदनशील बच्चों के समग्र विकास पर केंद्रित है। अध्ययन में बताया गया है कि देखभाल की संरचना बच्चों के दीर्घकालिक मानसिक और सामाजिक विकास को आकार देती है। परिवार आधारित देखभाल भावनात्मक सुरक्षा में अधिक प्रभावी पाई गई, जबकि संस्थागत देखभाल मुख्यतः संरचनात्मक सहयोग तक सीमित रहती है।

भारत | फरवरी 2026 — एक महत्वपूर्ण अंतःविषय शोध-पत्र जिसका शीर्षक “Orphan Care Versus Family Care: An Ideological Study on Children in Orphanages and Foster Care vs Children in Families” है, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीक्षित जर्नल TPM – Testing, Psychometrics, Methodology in Applied Psychology में प्रकाशित हुआ है।

इस शोध का लेखन विद्वान Mr. Alex Sam के साथ एक विशिष्ट और विविध शोधकर्ताओं की टीम — Dr. Rejoice Solomon, Dr. Lydia R. Conger, Dr. Shambu Kumar Yadav, और Dr. Sweety Marandi — द्वारा किया गया है। यह अध्ययन अनाथालयों और फोस्टर केयर प्रणालियों में पले-बढ़े बच्चों की सांस्कृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक कथाओं की व्यापक पड़ताल करता है, तथा उनकी तुलना पारंपरिक पारिवारिक वातावरण में पले-बढ़े बच्चों से करता है।

यह शोध इस बात का गंभीर विश्लेषण करता है कि देखभाल की संरचनाएँ किस प्रकार भावनात्मक विकास, पहचान निर्माण, सामाजिक एकीकरण और दीर्घकालिक कल्याण को प्रभावित करती हैं। साथ ही, यह उन व्यापक सामाजिक धारणाओं का भी अध्ययन करता है जो बाल कल्याण नीतियों और प्रथाओं को प्रभावित करती हैं।

अध्ययन में साहित्यिक विश्लेषण, समाजशास्त्रीय सिद्धांत और मनोवैज्ञानिक अनुसंधान को एकीकृत किया गया है, ताकि समाज द्वारा अनाथत्व को किस प्रकार देखा जाता है, इसका आलोचनात्मक मूल्यांकन किया जा सके। भावनात्मक लगाव, पहचान निर्माण, लचीलापन (resilience) और सामाजिक जुड़ाव जैसे पहलुओं की जांच करते हुए शोधकर्ता देखभाल प्रणालियों और उनके दीर्घकालिक विकासात्मक प्रभावों की सूक्ष्म समझ प्रस्तुत करते हैं।

वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध साहित्यिक कृतियों जैसे Oliver Twist, Jane Eyre, Adventures of Huckleberry Finn, और Harry Potter से अंतर्दृष्टि लेते हुए, यह शोध-पत्र यह भी विश्लेषण करता है कि काल्पनिक साहित्य में अनाथ बच्चों के चित्रण ने समय के साथ जनमानस और नीतिगत ढाँचों को किस प्रकार प्रभावित किया है।

मुख्य निष्कर्षों से पता चलता है कि जहाँ संस्थागत प्रणालियाँ संरचनात्मक सहयोग प्रदान करती हैं, वहीं परिवार-आधारित देखभाल वातावरण प्रायः अधिक मजबूत भावनात्मक स्थिरता और सुरक्षित लगाव प्रदान करते हैं। लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि संवेदनशील बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए बाल कल्याण प्रणालियों में प्रमाण-आधारित सुधार आवश्यक हैं।

पूरा शोध-पत्र शैक्षणिक और सार्वजनिक उपयोग के लिए TPM जर्नल के मंच पर उपलब्ध है।

साक्षात्कार, सहयोग या अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
Alex Sam
📧 alexpakur@gmail.com

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Gaurav Gogoi इंडिया-फिलीपींस संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष नामित

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असम कांग्रेस के अध्यक्ष और लोकसभा सदस्य गौरव गोगोई को इंडिया-फिलीपींस संसदीय मैत्री समूह का अध्यक्ष बनाने का नाकांकन हुआ है। उनके नामांकन पर असम के मुख्यमंत्री ने बयान दिया था कि गोगोई को पाकिस्तान से जुड़ी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।  इस पर गोगोई ने कहा कि सीएम के बयानों पर किसी गंभीर जवाब की जरूरत नहीं है।पत्रकारों से बात करते हुए गोगोई ने कहा कि पार्लियामेंट्री नियुक्ति पर राजनीतिक बयान बाजियां करने के बजाय गवर्नेंस और लोगों की भलाई पर ध्यान देना चाहिए।  उन्होंने आगे कहा मुख्यमंत्री के बयानों को गंभीरता से लेने की ज़रूरत नहीं है। सब कुछ साफ-साफ लिखकर बताया गया है, और ऐसे कमेंट्स को बेवजह अहमियत देने की कोई ज़रूरत नहीं है। गोगोई ने कहा मैं ऐसा इंसान नहीं हूं जो हर राजनीतिक बयान पर प्रतिक्रिया दे। मेरी ज़िम्मेदारी संसद और मुझे चुनने वाले लोगों के प्रति है।संसदीय मैत्री समूह एक तय संस्थागत प्रक्रिया के जरिए बनाए जाते हैं और इनका मकसद भारत के वैश्विक संसदीय जुड़ाव को मज़बूत करना है। उन्होंने आगे कहा, “फिलीपींस के साथ संसदीय मैत्री समूह दो लोकतांत्रिक देशों के बीच कोऑपरेशन और बातचीत बढ़ाने के लिए बनाया गया है। यह लोकसभा की सौंपी हुई ज़िम्मेदारी है, और मैं इसे पूरी ईमानदारी से निभाऊंगा।”

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रणजी फाइनल में बवाल! जम्मू-कश्मीर के कप्तान ने कर्नाटक के फील्डर को मारा सिर, मयंक ने किया बीच बचाव

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रणजी ट्रॉफी के फाइनल में बड़ा बवाल देखने को मिला है। जम्मू-कश्मीर और कर्नाटक के बीच हुबई में खेले जा रहे इस मुकाबले में तब विवाद बढ़ गया, जब जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा ने कर्नाटक के फील्डर को सिर दे मारा। इसके बाद बीच 
रणजी ट्रॉफी फाइनल में गरमाया माहौल यह घटना रणजी ट्रॉफी 2025-26 के फाइनल मुकाबले के दूसरे दिन घटी। जम्मू-कश्मीर के कप्तान पारस डोगरा टीम की पारी के दौरान 101वें अपना आपा खो बैठे और कर्नाटक के एक फील्डर से भिड़ गए। उनको ऐसा करते देख फुटबॉल के महान खिलाड़ी जिनेदिन जिदान की याद आ गई। फ्रांस के इस दिग्गज फुटबॉलर ने 2006 फीफा विश्वकप फाइनल में इटली के खिलाड़ी को सिर दे मारा था। इससे उन्हें रेड कार्ड मिला था। फ्रांस की टीम उस फीफा विश्वकप के फाइनल में हार गई थी।

कैसे शुरू हुआ विवाद?

डोगरा ने प्रसिद्ध कृष्णा की गेंद पर चौका जड़ा। गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर स्लिप में चार रन के लिए गई। हालांकि, गेंद स्लिप क्षेत्र में खड़े फील्डर के बस बगल से गुजरी। इसके तुरंत बाद स्ट्राइकर एंड पर खिलाड़ियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। स्टंप माइक में भी कुछ तीखी बातें सुनाई दीं। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और डोगरा और कर्नाटक के फील्डर केवी अनीश के बीच हाथापाई की नौबत आ गई। इसी दौरान पारस ने अनीश के हेल्मेट पर सिर मारा। इससे पहले कि अंपायर बीच-बचाव करते, कर्नाटक के सीनियर बल्लेबाज मयंक अग्रवाल दोनों खिलाड़ियों के बीच आ गए और स्थिति को संभालने की कोशिश की।
 
स्लेजिंग बनी वजह?

माना जा रहा है कि लगातार की जा रही स्लेजिंग से डोगरा नाराज हो गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोगरा ने बाद में अनीश से सिर मारने के लिए माफी भी मांगी, लेकिन कर्नाटक के खिलाड़ी ने उसे स्वीकार नहीं किया। इस घटना के बाद कर्नाटक के फील्डर और ज्यादा आक्रामक हो गए और डोगरा का ध्यान भटकाने की कोशिश करते रहे। मैच अधिकारियों ने तुरंत हस्तक्षेप कर माहौल शांत कराया और दोनों टीमों के खिलाड़ियों से बात की।

पहले दिन चोटिल हुए थे डोगरा

फाइनल के पहले दिन केएससीए हुबली क्रिकेट ग्राउंड पर डोगरा नौ रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तभी कर्नाटक के तेज गेंदबाज विजयकुमार वैशाक की उछाल लेती गेंद उनके दस्ताने पर लगी। चोट लगने के कारण उन्हें रिटायर हर्ट होना पड़ा। हालांकि, 41 वर्षीय डोगरा अगले दिन फिर से बल्लेबाजी करने उतरे और धैर्यपूर्ण अर्धशतक जमाया। वह 166 गेंद पर आठ चौके की मदद से 70 रन बनाकर आउट हुए। उन्हें श्रेयस गोपाल ने बोल्ड किया।

जम्मू-कश्मीर की मजबूत शुरुआत

अपने पहले रणजी ट्रॉफी फाइनल में खेल रही जम्मू-कश्मीर टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। पहले दिन टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 87 ओवर में 284/2 का मजबूत स्कोर खड़ा किया था। दूसरे दिन खबर लिखे जाने तक जम्मू-कश्मीर ने अपनी पहली पारी में छह विकेट गंवाकर 470 से ज्यादा रन बना लिए हैं। शुभम पुंडीर ने शानदार शतक लगाया, जबकि अब्दुल समद ने अर्धशतकीय पारी खेलकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। पुंडीर ने 247 गेंद में 12 चौके और दो छक्के की मदद से 121 रन की पारी खेली। वहीं, यावेर हसन ने 150 गेंद में 13 चौके की मदद से 88 रन बनाए। समद ने 104 गेंद में छह चौके और एक छक्के की मदद से 61 रन बनाए। इसके अलावा कनहैया वाधवान ने 109 गेंद में नौ चौके की मदद से 70 रन बनाए।
 

Himachal Pradesh में IPS अदिति सिंह पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन

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हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रसाशन ने एक बड़ा और शख्त कदम उठाते हुए 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनकी बार-बार की छुट्टियों के दौरान एक अधीनस्थ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में अदिति सिंह धर्मशाला में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरों(SV&ACB) की नोर्दर्न रेंज में एसपी के पद पर कार्यरत थी. बीते महीनों में उन्होंने बार-बार छुट्टियां ली, जिस वजह से हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रसाशन ने बड़ा निर्णय लिया है|

25 दिनों तक छुट्टी पर रहीं अदिति सिंह

राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों तक छुट्टी पर रहीं. डीजीपी ने पाया कि इतनी लंबी और बार-बार की छुट्टियों की वजह से उनके कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा था. प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधा को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है|

कब-कब ली अदिति सिंह ने छुट्टियां

मीडिया रिपोर्ट की माने तो अदिति सिंह को लेकर जारी आदेश में उनकी छुट्टियों की जानकारी भी दी गई है. अदिति सिंह ने 8 जनवरी से 1 2जनवरी तक दो दिन अचानक और दो दिन बीमारी की छुट्टी ली. इसके बाद 16 जनवरी से 19 जनवरी तक उन्होंने फिर 4 दिनों छुट्टी ली जिसमें 3 दिन अचानक ली हुई छुट्टी और एक बीमार अवकाश शामिल था। इसके बाद 8 से 22 फरवरी तक वह फिर छुट्टी पर रहीं|

किसे सौंपी गई अदिति जगह जिम्मेदारी?

डीजीपी अशोक तिवारी के आदेश अनुसार एडिशनल एसपी ब्रह्म दास भाटिया को अगली सूचना तक उनकी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए कहा गया है कि अदिति सिंह की मौजूदगी में भी वह उनसे जुड़े रहेंगे. ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है|

रिंकू नहीं खेले तो कौन लेगा उनकी जगह? जानिए जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की संभावित प्लेइंग 11

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IND vs ZIM: आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 के सुपर-8 चरण में भारत का अगला मुकाबला जिम्बाब्वे से होना है. दोनों टीमों के बीच यह मुकाबला 26 फरवरी को चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेला जाएगा. इस मैच में स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के खेलने को लेकर संशय बना हुआ है. ऐसे में अब सवाल है कि अगर रिंकू यह मैच नहीं खेलते हैं तो उनकी जगह प्लेइंग 11 में किस खिलाड़ी को मौका मिलेगा?

जिम्बाब्वे के खिलाफ क्यों नहीं खेलेंगे रिंकू सिंह?

दरअसल, भारतीय स्टार फिनिशर रिंकू सिंह पारिवारिक कारणों के चलते अपने घर लौट गए हैं. उनके पिता इन दिनों फोर्थ स्टेज लिवर कैंसर से जूझ रहे हैं. हालत खराब होने के कारण उन्हें ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में भर्ती कराया गया. पिता की तबीयत खराब होने की खबर सुनते ही रिंकू फौरन चेन्नई से अपने घर के लिए रवाना हो गए. ऐसे में जिम्बाब्वे के खिलाफ उनके खेलने को लेकर सस्पेंस बना हुआ है. कई रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वह आज भारतीय टीम के साथ वापस जुड़ सकते हैं. हालांकि अभी तक उनके खेलने को लेकर तस्वीर साफ नहीं हुई हैं.

कौन करेगा रिप्लेस?

जिम्बाब्वे के खिलाफ अगर रिंकू नहीं खेलते हैं तो भारत के पास उनके रिप्लेसमेंट के रूप में दो विकल्प हैं, जिसमें अक्षर पटेल और संजू सैमसन दो प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं. अगर अक्षर पटेल को रिंकू सिंह की जगह प्लेइंग 11 में मौका मिलता है तो चेन्नई की स्पिन फ्रेंडली पिच में भारत को एक अतिरिक्त स्पिनर मिल जाएगा. वहीं, अगर संजू रिंकू को रिप्लेस करते है तो भारतीय बल्लेबाजी को मजबूती मिलेगी.

जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत की संभावित प्लेइंग 11

अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, सूर्यकुमार यादव, तिलक वर्मा, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, वाशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल/संजू सैमसन, जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह.

25 दिन की छुट्टी लेना IPS अदिति सिंह को पड़ा भारी, DGP ने लिया बड़ा एक्शन

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Himachal Pradesh: हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रसाशन ने एक बड़ा और शख्त कदम उठाते हुए 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह की जिम्मेदारियां उनकी बार-बार की छुट्टियों के दौरान एक अधीनस्थ अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया है. वर्तमान में अदिति सिंह धर्मशाला में स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरों(SV&ACB) की नोर्दर्न रेंज में एसपी के पद पर कार्यरत थी. बीते महीनों में उन्होंने बार-बार छुट्टियां ली, जिस वजह से हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रसाशन ने बड़ा निर्णय लिया है.

25 दिनों तक छुट्टी पर रहीं अदिति सिंह

राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार आईपीएस अधिकारी अदिति सिंह 8 जनवरी से 22 फरवरी के बीच कुल 25 दिनों तक छुट्टी पर रहीं. डीजीपी ने पाया कि इतनी लंबी और बार-बार की छुट्टियों की वजह से उनके कार्यालय का कामकाज प्रभावित हो रहा था. प्रशासनिक कार्यों में आ रही बाधा को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है.

कब-कब ली अदिति सिंह ने छुट्टियां

मीडिया रिपोर्ट की माने तो अदिति सिंह को लेकर जारी आदेश में उनकी छुट्टियों की जानकारी भी दी गई है. अदिति सिंह ने 8 जनवरी से 1 2जनवरी तक दो दिन अचानक और दो दिन बीमारी की छुट्टी ली. इसके बाद 16 जनवरी से 19 जनवरी तक उन्होंने फिर 4 दिनों छुट्टी ली जिसमें 3 दिन अचानक ली हुई छुट्टी और एक बीमार अवकाश शामिल था। इसके बाद 8 से 22 फरवरी तक वह फिर छुट्टी पर रहीं.

किसे सौंपी गई अदिति जगह जिम्मेदारी?

डीजीपी अशोक तिवारी के आदेश अनुसार एडिशनल एसपी ब्रह्म दास भाटिया को अगली सूचना तक उनकी जिम्मेदारियां संभालने को कहा गया है. साथ ही यह भी कहा गया है कि कार्य की निरंतरता बनाए रखने के लिए कहा गया है कि अदिति सिंह की मौजूदगी में भी वह उनसे जुड़े रहेंगे. ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है.

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प्रयागराज केस पर सरकार सख्त, सिंधिया का बड़ा बयान

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बीएसएनएल के निदेशक विवेक बंजल के प्रस्तावित प्रयागराज दौरे वाला विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इसे अनुचित और अस्वीकार्य बताया। साथ ही यह भी कहा कि निदेशक को कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।दरअसल दौरे की तैयारी में करीब 50 अधिकारियों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपे जाने के निर्देश थे। निजी उपयोग की वस्तुओं तक की व्यवस्था के लिखित निर्देश थे। इसके बाद से ही ये पत्र वायरल हो गया। और मामले ने तूल पकड़ लिया।  

क्या बोले केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया?

सिंधिया ने साफ कहा कि स्थापित नियमों और प्रशासनिक परंपराओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि निदेशक को सात दिन में जवाब देने को कहा गया है। जवाब मिलने के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि यह 21वीं सदी है और इस तरह का व्यवहार चौंकाने वाला है। सरकार ने यह भी कहा कि संस्थागत अनुशासन और प्रोटोकॉल का पालन सर्वोपरि है।

दौरे की तैयारी में क्या-क्या लिखा गया था?

कार्यालय आदेश के अनुसार विवेक बंजल 25-26 फरवरी को दो दिवसीय दौरे पर प्रयागराज आने वाले थे। 19 फरवरी को जारी प्रोटोकॉल नोटिस में लगभग 50 अधिकारियों और कर्मचारियों को अलग-अलग कार्य सौंपे गए। कार्यक्रम में स्वागत, संगम स्नान, नौका विहार और बड़े हनुमान मंदिर, अक्षयवट तथा पातालपुरी मंदिर के दर्शन शामिल थे। हर स्थल पर किस अधिकारी की क्या भूमिका होगी, यह लिखित में दर्ज था।

स्नान किट से लेकर होटल व्यवस्था तक निर्देश

सबसे ज्यादा विवाद स्नान किट की सूची को लेकर हुआ। आदेश में संगम स्नान के समय तौलिया, अंडरवियर, चप्पल, कंघी, दर्पण और तेल की बोतल तक की व्यवस्था का उल्लेख था। पुरुषों के लिए छह किट और महिलाओं के लिए दो किट का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा घाट पर बेडशीट रखने और होटल व सर्किट हाउस में सूखे मेवे, फल, शेविंग किट, टूथपेस्ट, ब्रश, साबुन, शैम्पू और तेल की व्यवस्था करने की बात लिखी गई थी। कुल 20 कार्यों के लिए करीब 50 अधिकारियों को तैनात किया गया था।

आदेश वायरल होते ही दौरा रद्द

जैसे ही यह कार्यालय आदेश सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। इसके बाद आनन-फानन में निदेशक का प्रयागराज दौरा रद्द कर दिया गया। प्रयागराज के एक वरिष्ठ बीएसएनएल अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह विभाग की छवि खराब करने की कोशिश हो सकती है, लेकिन उन्होंने आदेश की सत्यता पर टिप्पणी करने से इनकार किया। एक अन्य अधिकारी ने भी कहा कि दौरा रद्द हो चुका है, पर आदेश पर कुछ नहीं कहा।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

यह पहला मामला नहीं है जब किसी अधिकारी के व्यवहार पर सवाल उठे हों। दिल्ली में स्टेडियम खाली कराकर कुत्ता घुमाने के आरोप में चर्चा में आए अधिकारी संजीव खैरवार का मामला पहले सुर्खियों में रहा था। तब उन्हें दिल्ली से बाहर तैनात किया गया था। अब बीएसएनएल प्रकरण ने फिर से प्रशासनिक मर्यादा और प्रोटोकॉल पर बहस छेड़ दी है। सरकार ने संकेत दिया है कि मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई होगी।

Supreme Court of India सख्त, CJI बोले- न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं

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सुप्रीम कोर्ट ने एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब में न्यायपालिका से जुड़ी सामग्री पर गंभीर आपत्ति जताई है। प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि वह किसी को भी न्यायपालिका की संस्था को बदनाम करने की इजाजत नहीं देंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कानून अपना काम करेगा और जरूरत पड़ी तो अदालत स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करेगी। वहीं, जस्टिस बागची ने इसे बुनियादी ढांचे के खिलाफ बताया।मामला उस पाठ से जुड़ा है जिसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित एक हिस्सा जोड़ा गया है। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने इस मुद्दे को अदालत के सामने उठाया। उन्होंने कहा कि स्कूल के बच्चों को इस तरह की सामग्री पढ़ाया जाना चिंताजनक है। इस पर सीजेआई ने कहा कि उन्हें इस विषय पर कई फोन और संदेश मिले हैं और वह पूरी तरह से मामले से अवगत हैं।

सीजेआई ने जताई नाराजगी

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि मैं इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। मुझे पता है कि इससे कैसे निपटना है।” उन्होंने संकेत दिया कि यह एक सुनियोजित और सोची-समझी कोशिश लगती है। उन्होंने कहा कि वह इस पर अभी ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहते, लेकिन उचित कदम उठाए जाएंगे।

वरिष्ठ वकीलों ने उठाया मुद्दा

कपिल सिब्बल ने अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की अपील की। अभिषेक मनु सिंघवी ने भी कहा कि ऐसी सामग्री छात्रों के मन में न्यायपालिका को लेकर गलत संदेश दे सकती है। सीजेआई ने दोनों वरिष्ठ वकीलों का धन्यवाद किया कि उन्होंने इस विषय को अदालत के संज्ञान में लाया।

क्या है विवाद का मूल कारण

एनसीईआरटी की कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक के एक अध्याय में “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” शीर्षक से सामग्री जोड़ी गई है। इसी हिस्से को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया गया है। अदालत ने भरोसा दिलाया कि उचित और कानूनी कदम उठाए जाएंगे। सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका की गरिमा और विश्वसनीयता को बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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विधानसभा चुनाव की तैयारियों का जायजा लेने पुडुचेरी पहुंचे मुख्य चुनाव आयुक्त

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नई दिल्ली|तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में अप्रैल और मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार चुनाव तैयारियों की समीक्षा के लिए पुडुचेरी और तमिलनाडु के दो दिवसीय महत्वपूर्ण दौरे पर जा रहे हैं। ज्ञानेश कुमार बुधवार दोपहर करीब 2 बजे पुडुचेरी पहुंचेंगे, जहां वे अपने मुख्य सचिव शरथ चौहान और पुलिस महानिदेशक शालिनी सिंह सहित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। चर्चा मुख्य रूप से सुरक्षा व्यवस्था, रसद संबंधी तैयारियों और केंद्र शासित प्रदेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उपायों पर केंद्रित होगी।पुडुचेरी और तमिलनाडु के दौरे पर मुख्य चुनाव आयुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त के दौरे से पहले, पुडुचेरी पुलिस ने मंगलवार को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ चुनाव संबंधी सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रवर्तन उपायों पर चर्चा करने के लिए एक बैठक बुलाई।पुडुचेरी पुलिस मुख्यालय में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता डीआईजी सत्या सुंदरम ने की और इसमें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।अधिकारियों ने चुनाव सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की, जिनमें कानून व्यवस्था प्रबंधन, संवेदनशील बूथों की निगरानी, तैनाती योजना और आदर्श आचार संहिता के लागू होने के बाद उसका पालन करना शामिल है।चुनावी व्यवस्था से संबंधित प्रतिक्रिया प्राप्त करने और चिंताओं को दूर करने के लिए मुख्य चुनाव आयोग द्वारा पुडुचेरी में मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने की भी उम्मीद है।पुडुचेरी की यात्रा के बाद, वह गुरुवार और शुक्रवार को तमिलनाडु की यात्रा करेंगे। उनके साथ सात उप चुनाव आयुक्त भी होंगे।26 फरवरी को चेन्नई में, वह तमिलनाडु की मुख्य निर्वाचन अधिकारी अर्चना पटनायक और वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों से मुलाकात करेंगे ताकि राज्य की तैयारियों का आकलन किया जा सके।27 फरवरी को, मुख्य चुनाव आयोग तमिलनाडु में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ परामर्श करेगा।यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब पिछले सप्ताह उप चुनाव आयुक्तों ने राज्य में प्रारंभिक निरीक्षण पूरा कर लिया था।मुख्य चुनाव आयुक्त की समीक्षा को चुनाव तिथियों की औपचारिक घोषणा से पहले एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसकी उम्मीद जल्द ही की जा रही है।

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News Desk