1 अप्रैल से महंगा होगा FASTag एनुअल पास, जेब पर पड़ेगा असर

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नई दिल्ली।  देशभर में नेशनल हाईवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालकों के लिए जल्द ही FASTag एनुअल पास महंगा होने वाला है। सरकार ने इसकी सालाना फीस में 2.5 प्रतिशत यानी 75 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है। इसके बाद इस पास की कीमत 3000 रुपये से बढ़कर 3075 रुपये हो जाएगी। नई दरें 1 अप्रैल से लागू होंगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने FASTag एनुअल पास की शुरुआत पिछले साल 15 अगस्त को की थी। यह पास जारी होने की तारीख से एक साल या 200 ट्रिप तक वैध रहता है, जो भी पहले पूरा हो जाए। यह सुविधा पूरे देश के नेशनल हाईवे पर लागू होती है, जबकि राज्य सरकारों के अधीन आने वाले हाईवे पर टोल सामान्य FASTag अकाउंट के जरिए ही कटता है।

1 अप्रैल से पहले खरीदने पर मिलेगा पुरानी कीमत पर

अधिकारियों के मुताबिक, FASTag एनुअल पास की कीमत में हर साल बदलाव का प्रावधान पहले ही तय किया गया था। यह बढ़ोतरी देशभर में टोल दरों में होने वाले वार्षिक संशोधन के फॉर्मूले के आधार पर की जाती है। ऐसे में जो लोग 1 अप्रैल से पहले इस पास को खरीद लेते हैं या रिचार्ज करवा लेते हैं, उन्हें इसे अभी भी 3000 रुपये की पुरानी कीमत पर ही मिल जाएगा। वहीं, 1 अप्रैल के बाद इसे खरीदने वाले लोगों को 3075 रुपये चुकाने होंगे। अनुमान है कि इस बदलाव का असर करीब 52 लाख यूजर्स पर पड़ेगा।

कहां से खरीदा जा सकता है FASTag एनुअल पास

FASTag एनुअल पास को केवल राजमार्ग यात्रा ऐप (Rajmarg Yatra App) या भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से खरीदा जा सकता है। भुगतान करने के लगभग दो घंटे के भीतर यह पास एक्टिवेट हो जाता है और इसकी पुष्टि के लिए रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस भेजा जाता है।

रिफंड नहीं मिलेगा

इस पास से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी है कि इसका भुगतान एकमुश्त किया जाता है और यह पूरी तरह नॉन-रिफंडेबल होता है। यानी यदि किसी कारण से पास का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, तब भी पैसे वापस नहीं मिलेंगे। हालांकि, जो लोग नियमित रूप से नेशनल हाईवे पर यात्रा करते हैं, उनके लिए FASTag एनुअल पास काफी फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि इससे बार-बार टोल भुगतान की झंझट कम हो जाती है।

आदित्य धर की फिल्मों की फैन बनीं भूमि पेडनेकर, बोलीं– उनके साथ काम करना सपना

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धुरंधर के पहले पार्ट को दर्शकों ने खूब पसंद किया था और फिल्म देखने के बाद लोग इसके अगले पार्ट का इंतजार कर रहे हैं। सिर्फ फैंस ही नहीं, कई सेलेब्स ने भी इस स्पाई-एक्शन थ्रिलर की तारीफ की। अब इस लिस्ट में एक्ट्रेस भूमि पेडनेकर का नाम भी जुड़ गया है।

मुझे ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट बहुत पसंद आया

हाल ही में द राइट एंगल विद सोनल कालरा के नए एपिसोड में भूमि ने माना कि ‘धुरंधर’ देखने के बाद वह आदित्य धर और रणवीर सिंह के साथ काम करना चाहती हैं। इंटरव्यू के दौरान सोनल कालरा ने उनसे पूछा, ‘भूमि, आपने कई शानदार लोगों के साथ काम किया है, लेकिन ऐसा कौन-सा एक डायरेक्टर और एक एक्टर है जो अभी भी आपकी बकेट लिस्ट में है?’इस पर भूमि पेडनेकर ने जवाब दिया, ‘एक डायरेक्टर चुनना मेरे लिए मुश्किल है, क्योंकि कई लोग हैं जिनके साथ मैं काम करना चाहती हूं। मैं जरूर संजय लीला भंसाली के साथ काम करना चाहती हूं। किसी भी तरह से उनके साथ काम करना मेरा सपना है।मुझे उम्मीद है कि मुझे उनके साथ काम करने का मौका मिलेगा, क्योंकि वह एक जीनियस हैं। इसके अलावा राजकुमार हिरानी के साथ भी काम करना चाहती हूं। और अब मैं आदित्य धर के साथ भी काम करना चाहती हूं, क्योंकि मुझे ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट बहुत पसंद आया।’भूमि ने आगे कहा, ‘मैं आमतौर पर बहुत ज्यादा मस्कुलिन फिल्मों की ऑडियंस नहीं हूं। ऐसी फिल्मों में मुझे नींद आने लगती है और मैं उनसे कनेक्ट नहीं कर पाती। लेकिन ‘धुरंधर’ मुझे बहुत पसंद आई। अगर एक्टर्स की बात करूं तो मैं रणवीर सिंह की बहुत बड़ी फैन हूं उनके साथ काम करने का मौका जरूर चाहूंगी। मुझे नहीं लगता कि उनकी कोई भी परफॉर्मेंस ऐसा रहा हो जिससे मैं, एक फैन के तौर पर, निराश हुई हूं। ‘रॉकी और रानी की प्रेम कहानी’ में तो मैं उन्हें देखकर पूरी तरह ऑब्सेस्ड हो गई थी।’वर्कफ्रंट की बात करें तो भूमि पेडनेकर जल्द ही इमरान खान की कमबैक फिल्म में उनके साथ नजर आने वाली हैं।

ईरान-अमेरिका टकराव से बढ़ सकता है तनाव और चिंता, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

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पश्चिम एशिया में जारी जंग दुनियाभर के लिए कई तरह की मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। वैश्विक स्तर पर ईंधन की डिमांड और सप्लाई बिगड़ने लग गई है। ईरान-अमेरिका के बीच जारी तनाव की आंच भारत में भी अब स्पष्ट तौर पर महसूस की जाने लगी है। सरकारें भले ही दावा करती रहें कि देश में एलपीजी गैस की कोई कमी नहीं है, पर गैस एजेंसियों के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारें कुछ अलग ही कहानी बयां कर रही हैं। मसलन देश ‘एलपीजी क्राइसेस’ का सामना कर रहा है, जिसे देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सेहत को लेकर भी लोगों को अलर्ट कर रहे हैं।ईरान-अमेरिका जंग से उपजी परिस्थितियों ने लोगों के सामने स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। विशेषतौर पर भारत में लोगों को फेफड़ों की समस्याओं को लेकर अलर्ट किया जा रहा है।अब आपके मन में भी सवाल आ रहा होगा कि ईरान-अमेरिका के बीच जारी विवाद, सुदूर भारत में बैठे लोगों की सेहत के लिए कैसे संकट पैदा करने वाला हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं

एलपीजी की कमी, बायोमास ईंधनों की तरफ बढ़ते लोग

देश के अलग-अलग हिस्सों से प्राप्त हो रही खबरों से साफ होता है कि लोग गैस सिलेंडर के लिए परेशान हैं। घंटों लाइन मे लगे रहने के बावजूद सिलेंडर नहीं मिल रहा है, मांग और सप्लाई में फिलहाल भारी कमी देखी जा रही है। लिहाजा बड़ी संख्या में लोग फिर से खाना पकाने के पारंपरिक तरीके लकड़ी-कोयले और उपलों की ओर बढ़ रहे हैं। एलपीजी की कमी के कारण लाखों परिवार बायोमास ईंधनों का इस्तेमाल करने पर मजबूर हो रहे हैं, इसी स्थिति को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं। दो दशकों पहले का फिर से लौटता दौर इनडोर प्रदूषण और इसके कारण सांस-फेफड़ों की समस्याओं के खतरे को लेकर चिंता बढ़ाने वाला हो सकता है।विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि अगर एलपीजी में कमी जारी रहती है और बायोमास ईंधनों का उपयोग फिर से बढ़ता है तो इसके परिणामस्वरूप लोगों में फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का संकट फिर से बढ़ सकता है।

बायोमास ईंधन सेहत के लिए हो सकते हैं खतरनाक

बायोमास ईंधन के इस्तेमाल को कम करने और इसके विकल्प के तौर पर एलपीजी गैस के उपयोग के बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने 1 मई 2016 प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना की शुरुआत की थी। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं को धुआं-मुक्त रसोई देना था ताकि उनमें सांस से जुड़ी समस्याओं के जोखिमों को कम किया जा सके।हालांकि अब फिर से मजबूरी में ही सही बायोमास ईंधनों के उपयोग की तरफ लोगों का फिर से बढ़ना सेहत के लिए खतरा बढ़ाने वाला हो सकता है।घर के अंदर खाना पकाने के लिए बायोमास ईंधन (लकड़ी, गोबर, फसलों के अवशेष) जलाने से होने इनडोर वायु प्रदूषण का खतरा होता है।इससे  गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं, जिसका  महिलाओं और बच्चों पर सीधा असर पड़ता है।बायोमास ईंधन और इससे होने वाले प्रदूषण के कारण श्वसन संक्रमण, क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), हृदय रोग, मोतियाबिंद जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

श्वसन रोगों का बढ़ता खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि बायोमास ईंधन से भारी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कण निकलते हैं, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब होती है। खाना पकाने के लिए इसके इस्तेमाल से इनडोर प्रदूषण का खतरा बढ़ता है।ईंधन से निकलने वाले धुंआ में हानिकारक गैसों के साथ सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस के माध्यम से फेफड़ों में जा सकते हैं। इससे श्वसन संबंधी गंभीर रोग, फेफड़ों को गंभीर क्षति होने और कैंसर तक का जोखिम बढ़ जाता है।बायोमास ईंधन के नियमित इस्तेमाल को सीओपीडी के जोखिम से जोड़कर देखा जाता रहा है। एक अध्ययन में पाया गया कि इस तरह के ईंधन का उपयोग करने वाले 91% प्रतिभागियों में श्वसन रोगों का उच्च जोखिम था।हालांकि जब इनमें से बड़ी संख्या में लोगों ने स्वच्छ ईंधन (एलपीजी) का उपयोग करना शुरू कर दिया तो श्वसन समस्याओं का खतरा भी धीरे-धीरे कम होने लगा।एलपीजी उपयोगकर्ताओं की तुलना में बायोमास उपयोगकर्ताओं में सांस फूलने, घरघराहट और क्रॉनिक खांसी का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

बिना रन, बिना विकेट और बिना कैच के भी बना प्लेयर ऑफ द मैच, जानिए वजह

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किसी भी क्रिकेटर के लिए एक मैच का सबसे बड़ा अवार्ड प्लेयर ऑफ द मैच का होता है. इसी वजह से ये अवार्ड किसी भी खिलाड़ी के लिए खास हो जाता है. आमतौर ये अवार्ड उन खिलाड़ियों को दिया जाता है, जो मैदान पर बहुत अच्छा प्रदर्शन करते हैं, चाहे वो बल्ले से हो या गेंद से. हालांकि, कभी-कभी फील्डिंग में भी जादुई परफॉर्मेंस के लिए भी ये अवार्ड मिल जाता है, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में एक ऐसा भी खिलाड़ी है, जिसके बल्ले से न तो एक रन बनाया, न ही उसने गेंदबाजी करते हुए एक विकेट चटकाया और तो और फील्डिंग में भी कुछ खास नहीं किया था. इसके बावजूद प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था. यहां हम इस क्रिकेटर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसके प्लेयर ऑफ द मैच बनने के पीछे की बड़ी दिलचस्प कहानी है|

कैमरन कफी को चुना गया था प्लेयर ऑफ द मैच

वेस्टइंडीज के पूर्व तेज गेंदबाज कैमरन कफी ने साल 2001 में प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड जीता था. कफी जिम्बाब्वे के खिलाफ एक वनडे मैच में प्लेयर ऑफ द मैच बने थे. दरअसल, कफी को ये अवॉर्ड उनकी गेंदबाजी में किए खास प्रदर्शन के लिए मिला था. हुआ यूं कि कैमरन कफी ने मुकाबले में सबसे किफायती गेंदबाजी की, जिस वजह से उन्हें प्लेयर ऑफ द मैच का अवार्ड दिया गया था. इस मुकाबले में भले ही कफी ने विकेट नहीं लिया था, लेकिन उनकी धारदार गेंदबाजी के सामने बल्लेबाजों के लिए रन बनाना बेहद मुश्किल साबित हुआ था. उन्होंने 10 ओवर में सिर्फ 20 रन दिए, जिसमें दो मेडन ओवर भी शामिल थे. उनकी इस गेंदबाजी ने वेस्टइंडीज के पक्ष में नतीजा तय करने में अहम भूमिका निभाई थी|

ऐसा रहा था इस मैच का हाल

हरारे में खेले गए इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज ने 50 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 266 रन बनाए. जवाब में, वेस्टइंडीज ने जिम्बाब्वे को नौ विकेट पर 239 रन पर ही रोक दिया और 27 रन से मैच अपने नाम कर लिया था. जिम्बाब्वे ने जीत के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन वे कफी ही थे, जिन्होंने विकेट न मिलने के बावजूद रन देने में कंजूसी दिखाई और वेस्टइंडीज को जीत दिलाई|

पीरियड्स लीव पर अनिवार्य छुट्टी की याचिका पर सुनवाई से इनकार, कहा—कानून बना तो महिलाओं को नौकरी देने से बचेंगे नियोक्ता

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महिलाओं कर्मचारियों और छात्राओं के लिए देशभर में मासिक धर्म अवकाश नीति की मांग करने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ऐसी नीति अनजाने में लैंगिक रूढ़िवादिता को बढ़ावा दे सकती है और इससे महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि और नियोक्ता महिलाओं को नौकरी देने से कतराने लगेंगे।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि ऐसी मांगें अनजाने में महिलाओं के बारे में रूढि़वादी सोच को भी मजबूत कर सकती हैं। अदालत ने टिप्पणी की कि मासिक धर्म को किसी कमजोरी या हीनता के रूप में पेश करना सही नहीं है। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित सक्षम प्राधिकारी इस विषय पर दी गई याचिकाकर्ता की प्रतिनिधित्व पर विचार कर सकते हैं और सभी हितधारकों से परामर्श करके नीति बनाने की संभावना की जांच कर सकते हैं। यह याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी, जिसमें महिलाओं के लिए छात्रों और कामकाजी महिलाओं दोनों के लिए मासिक धर्म अवकाश की राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग की गई थी।
मासिक धर्म अवकाश पर केरल का दिया उदाहरण
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एमआर शमशाद ने बताया कि कुछ राज्य और संस्थान पहले ही इस दिशा में कदम उठा चुके हैं। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां स्कूलों में कुछ राहत दी गई है और कई निजी कंपनियां भी स्वेच्छा से कर्मचारियों को यह अवकाश दे रही हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि स्वैच्छिक रूप से दी गई ऐसी सुविधाएं अच्छी हैं, लेकिन अगर इसे कानून के जरिए अनिवार्य बना दिया गया तो इसके सामाजिक और पेशेवर प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे यह धारणा बन सकती है कि महिलाओं को अतिरिक्त छुट्टियां मिलेंगी, जिससे उनके रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता पहले ही संबंधित अधिकारियों को इस विषय पर प्रतिनिधित्व दे चुके हैं, इसलिए बार-बार अदालत से आदेश  मांगने की आवश्यकता नहीं है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित अधिकारियों को प्रतिनिधित्व पर उचित निर्णय लेने का निर्देश दिया।

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राम गोपाल वर्मा ने किया सरकार 4 का ऐलान, बोले– ‘फिल्म मेरे सारे पाप धो देगी’

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पॉपुलर पॉलिटिकल-क्राइम फिल्म सीरीज ‘सरकार’ के तीन पार्ट आ चुके हैं, जिसमें अमिताभ बच्चन, अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय बच्चन और मनोज बाजपेयी जैसे कलाकार नजर आ चुके हैं। अब फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने इस फिल्म को लेकर बड़ा ऐलान किया है। 

‘मैं ‘सरकार 4’ बना रहा हूं

फिल्ममेकर राम गोपाल वर्मा ने अपनी पॉपुलर पॉलिटिकल-क्राइम फिल्म सीरीज ‘सरकार’ की अगली फिल्म ‘सरकार 4’ का ऐलान कर दिया है। निर्देशक ने बताया कि इस फिल्म की शूटिंग अगले महीने से शुरू होने वाली है।उन्होंने कहा, ‘मैं ‘सरकार 4’ बना रहा हूं। इसकी शूटिंग मैं अगले महीने से शुरू करने वाला हूं।’ उन्होंने अपने एक और प्रोजेक्ट ‘द सिंडिकेट’ के बारे में भी बात की। इस पर मजाक करते हुए राम गोपाल वर्मा ने कहा कि यह फिल्म मेरे सारे पाप धो देगी। राम गोपाल वर्मा ने यह जानकारी रेड लॉरी फिल्म फेस्टिवल के उद्घाटन के दौरान दी।

‘सरकार’ फ्रेंचाइजी  के बारे में 

सरकार’ सीरीज की शुरुआत साल 2005 में हुई थी, जिसमें अमिताभ बच्चन ने सुभाष नागरे का दमदार किरदार निभाया था। फिल्म में उनके साथ अभिषेक बच्चन भी नजर आए थे, जिन्होंने इस फिल्म में अमिताभ के बेटे ‘शंकर’ के किरदार निभाया था। इसके बाद इस फ्रेंचाइजी की दूसरी फिल्म ‘सरकार राज’ 2008 में रिलीज हुई, जिसमें ऐश्वर्या राय बच्चन भी अहम भूमिका में थीं। फिर 2017 में ‘सरकार 3’ आई, जिसमें अमिताभ और अभिषेक के अलावा यामी गौतम, मनोज बाजपेयी और अमित साध जैसे कलाकार दिखाई दिए थे।अब ‘सरकार 4’ की घोषणा के बाद फैंस में एक्साइटमेंट बढ़ गई है। हालांकि फिल्म की कास्ट और कहानी को लेकर अभी ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई है। 

मेहदी हसन से सुलह से इनकार, रन आउट घटना पर आगा का सख्त रुख

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बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच मैच के दौरान शुक्रवार को उस वक्त विवाद हुआ जब मेहदी हसन मिराज ने विवादित तरीके से सलमान अली आगा को रन आउट कर दिया। इस पूरे विवाद पर अब सलमान आगा का बयान सामने आया है। आगा ने स्पष्ट कहा है कि उन्होंने इस मामले को लेकर अभी तक मेहदी के साथ सुलह नहीं की है। यानी आगा अभी तक नाराज हैं। बांग्लादेश और पाकिस्तान के बीच शुक्रवार को ढाका के शेर-ए-बांग्ला स्टेडियम में वनडे सीरीज का दूसरा मुकाबला खेला गया। यह मैच सलमान अली आगा के रन-आउट के तरीके को लेकर चर्चा में है। आगा को जिस तरह आउट किया गया उसे खेल की भावना के खिलाफ माना जा रहा है। आगा ने इस पूरे मामले पर क्या कहा उससे पहला जानते हैं कि किस कारण इतना विवाद हो रहा है… 

कैसे रन आउट हुए आगा?

यह घटना पाकिस्तान पारी के 39वें ओवर में घटी।मेहदी हसन मिराज की गेंद चौथी गेंद पर मोहम्मद रिजवान ने शॉट खेला।गेंद को रोकने के लिए मिराज आगे बढ़े और अपने पैर से उन्होंने इसे रोका।इस दौरान नॉन स्ट्राइकर एंड पर खड़े सलमान आगा क्रीज से बाहर निकले हुए थे।चूंकि गेंद सलमान आगा के पास रुक गई थी तो उन्हें लगा कि गेंद पूरी हो गई है।लेकिन मिराज ने तत्परता दिखाते हुए गेंद को स्टंप्स की ओर मारा और रन आउट की अपील कर दी।सलमान इससे चौंक गए, लेकिन वह क्रीज से बाहर थे और इस कारण तीसरे अंपायर ने उन्हें आउट दिया।इससे सलमान बौखला गए और उन्होंने गुस्से में हेलमेट मैदान पर फेंक दिया और गुस्से से ड्रेसिंग रूम की ओर लौटे। पवेलियन लौटने से पहले सलमान ने मिराज के साथ बहस की, लेकिन बांग्लादेशी कप्तान उन्हें समझाते नजर आए।  

आगा बोले- हम ऐसा नहीं करते 

इस मामले पर सलमान आगा ने कहा, मुझे लगता है कि खेल भावना होनी चाहिए। मैं मेहदी को गेंद वापस देने की कोशिश कर रहा था। ऐसी स्थिति में इसे डेड करार दिया जा सकता था। गेंद मेरे पैड पर और फिर मेरे बल्ले पर लगी, इसलिए मुझे लगा कि वह अब मुझे रन-आउट नहीं कर सकते, क्योंकि गेंद पहले ही मेरे पैड और मेरे बैट पर लग चुकी थी। मैं बस उन्हें गेंद वापस देने की कोशिश कर रहा था। मैं रन नहीं ले रहा था, लेकिन उसने पहले ही रन आउट करने का फैसला कर लिया।आगा ने कहा, बांग्लादेश ने जो किया है वह नियम के अनुसार है। मुझे लगता है कि अगर उन्हें लगता है कि यह सही है, तो यह सही है। लेकिन मेरे नजरिए से मैं इसे अलग तरह से करता। मैं खेल भावना का पालना करता। हमने पहले ऐसा कुछ नहीं किया है और भविष्य में भी ऐसा कभी नहीं करेंगे।आगा रन आउट होने के बाद काफी गुस्से में नजर आए थे और उन्होंने बांग्लादेशी खिलाड़ियों के लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया था। इस पर उन्होंने कहा, उस पल मैंने गुस्से में रिएक्शन दिया था। कुछ चीजों को अलग तरह से हैंडल करना चाहिए। मुझे याद नहीं कि मैं क्या कह रहा था और लिटन दास क्या कह रहे थे। मुझे यकीन है कि मैं अच्छी बातें नहीं कह रहा था और वह भी अच्छी बातें नहीं कह रहे थे। मैंने मेहदी से अभी तक सुलह नहीं की है।

आगा को मिला कैफ का साथ

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी मोहम्मद कैफ ने इस पूरे मामले पर आगा का समर्थन किया है। कैफ ने इस मामले में बांग्लादेशी कप्तान मिराज की हरकत को गलत बताया है। कैफ ने एक्स पर लिखा, यह बिल्कुल सही नहीं था। विकेट लेने का यह तरीका किसी भी तरह से सही नहीं है। वो भी कप्तान ने ऐसा किया। युवाओं को ध्यान में रखो, अगर विश्व कप फाइनल भी दांव पर लगा हो तब भी वो नहीं करना जो बांग्लादेशी कप्तान ने किया। बिना खेल भावना के खेल नहीं है।

जज बनने के लिए 3 साल की वकालत अनिवार्य, Supreme Court of India का बड़ा आदेश

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सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक सेवा (सिविल जज जूनियर डिवीज़न) में नियुक्ति के लिए अनिवार्य 3 वर्ष के प्रैक्टिस नियम की समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह नियम लागू रहेंगे। अब सिर्फ यह तय करना है कि नियम लागू करने के तरीके क्या होने चाहिए। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने आदेश दिया कि जिन हाईकोर्टों ने पहले ही सिविल जज (जूनियर डिवीज़न) पदों के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है, वो आवेदन की अंतिम तिथि 30 अप्रेल 2026 तक बढ़ाएं।

अगले सप्ताह होगी सुनवाई
इसके साथ ही भविष्य में जारी होने वाले नए विज्ञापनों में भी यही अंतिम तिथि निर्धारित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। सुप्रीम कोर्ट के जजों की बेंच को बताया गया कि कुछ राज्यों में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि समीक्षा याचिकाओं पर अगले सप्ताह सुनवाई की जाएगी और आवेदन की तारीख बढ़ाने से फिलहाल उम्मीदवारों की तात्कालिक समस्या दूर हो जाएगी।

फैसले का सम्मान करने की अपील
वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने प्रैक्टिस की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित करने की मांग की थी। इसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त सुप्रीम कोर्ट के फैसले से तय हुई है। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। प्रैक्टिस की शर्त का उद्देश्य अभ्यर्थियों को अदालतों के कामकाज का व्यावहारिक अनुभव करना है।

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News Desk

शुक्रवार को गिरा ‘द केरल स्टोरी 2’ का कारोबार, कमाई में आई बड़ी कमी

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अगले हफ्ते फिल्म ‘धुरंधर 2’ रिलीज होगी। इसके आने की आहट से ही थिएटर में पहले से मौजूद फिल्मों का क्या हाल है? क्या इनके कलेक्शन पर असर दिखने लगाा है। जानिए, शुक्रवार को फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’, ‘अस्सी’ और ‘ओ रोमियो’ का कलेक्शन कितना रहा है। 

‘द केरल स्टोरी 2’ का शुक्रवार का कलेक्शन  

सैकनिल्क के अनुसार फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ ने शुक्रवार को 1.44 करोड़ रुपये कमाए हैं। जबकि गुरुवार को 1.52 करोड़ रुपये कमाए थे। फिल्म का कुल कलेक्शन भी अब तक 41.69 करोड़ रुपये हो चुका है। यह फिल्म विवादों में घिरने के बावजूद दर्शकों के बीच अपना क्रेज नहीं बना सकती है। इसका कलेक्शन अब तक 50 करोड़ रुपये से नीचे ही बना हुआ है। 

‘अस्सी’ का क्या है हाल? 

सैकनिल्क के अनुसार फिल्म ‘अस्सी’ का कलेक्शन रिलीज के 22वें दिन सिर्फ 8 लाख रुपये हुआ। अब इसका कलेक्शन दिखना बंद हो गया है। भारतीय बॉक्स ऑफिस पर फिल्म का कुल कलेक्शन भी अब तक 10.83 करोड़ रुपये रहा है। तापसी पन्नू स्टारर फिल्म को दर्शक नहीं मिल रहे हैं। इसकी कमाई शुरुआत से कमजोर रही है। 

‘ओ रोमियो’ को नहीं मिल रहे दर्शक 

फिल्म ‘ओ रोमियो’ को रिलीज हुए 29 दिन हो चुके हैं। इस फिल्म ने शुक्रवार को 15 लाख रुपये ही कमाए हैं। वहीं गुरुवार को 20 लाख रुपये कमाए थे। फिल्म का कलेक्शन अब तक 71.30 करोड़ रुपये है। निर्देशक विशाल भारद्वाज और एक्टर शाहिद कपूर की जोड़ी इस बार दर्शकों पर अपना जादू नहीं चला सकी है। फिल्म अब भी 100 करोड़ रुपये के कलेक्शन से काफी दूर है।   मौजूदा फिल्मों का घटता कलेक्शन बता रहा है कि इनका क्रेज खत्म हो चुका है। दर्शकों को अगले हफ्ते रिलीज होने वाली फिल्म ‘धुरंधर 2’ का इंतजार है। यह फिल्म अभी से सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी है।  

गांव में महिलाओं ने निशांत से कहा—परिवार बढ़ाइए, अब शादी कर लीजिए

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Bihar Politics जदयू में औपचारिक रूप से शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार सक्रिय हो गए हैं। वह पटना में पार्टी विधायकों से मुलाकात करने के साथ-साथ गांवों में कार्यकर्ताओं से भी मिल रहे हैं। इसी कड़ी में जदयू की सदस्यता लेने के बाद निशांत पहली बार अपने पैतृक गांव कल्याण बीघा पहुंचे। गांव पहुंचने पर पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

परिवार बढ़ाने की दी सलाह
कल्याण बीघा में लोगों से मुलाकात के दौरान एक दिलचस्प नजारा भी देखने को मिला। गांव की महिलाओं ने पहले निशांत को आशीर्वाद दिया और फिर उन्हें परिवार बढ़ाने की सलाह देते हुए कहा कि अब शादी कर लेनी चाहिए। हालांकि, शादी के सवाल पर निशांत ने मुस्कुराते हुए बात को टाल दिया। उन्होंने महिलाओं से बस इतना कहा, “सब बढ़िया है ना?” और आगे बढ़ गए। कल्याण बीघा पहुंचने पर निशांत ने कहा कि उनका बचपन इसी गांव में गुजरा है और इस गांव से उनकी कई यादें जुड़ी हुई हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि वे अपने पिता नीतीश कुमार द्वारा किए गए विकास कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास करेंगे।

दादा दादी का लिया आशीर्वाद
गांव पहुंचने के बाद निशांत सबसे पहले रामलखन सिंह वाटिका पहुंचे। वहां उन्होंने अपने दादा स्वर्गीय रामलखन सिंह, दादी परमेश्वरी देवी और अपनी मां स्वर्गीय मंजू सिंह की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और आशीर्वाद लिया। इस दौरान वे काफी भावुक भी नजर आए। इससे पहले निशांत के गांव पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका जोरदार स्वागत किया। इस दौरान “निशांत कुमार जिंदाबाद” और “बिहार का सीएम कैसा हो, निशांत भैया जैसा हो” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा।
 

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