एलपीजी संकट पर कांग्रेस पर हमलावार कंगना……….जनता को गुमराह करने की साजिश 

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नई दिल्ली। देश में एलपीजी संकट को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रानोत ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधकर कहा कि जनता को गुमराह करने की साजिश है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में महंगाई बढ़ रही है, लेकिन भारत में लगातार नई परियोजनाएं शुरू हो रही हैं। रनौत ने भरोसा जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को कथित एलपीजी संकट से उसी तरह बाहर निकलने वाले हैं, जैसे उन्होंने कोविड महामारी के दौरान देश का नेतृत्व किया था।
मंडी से सांसद कंगना रनौत ने कहा कि एलपीजी की स्थिति को लेकर केंद्र सरकार ने पूर्ण आश्वासन दिया है, लेकिन विपक्ष दहशत फैलाकर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनता को प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व पर विश्वास रखना चाहिए, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत लगातार प्रगति कर रहा है।
वहीं दूसरी ओर, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के नेताओं ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी रखा। विपक्ष का आरोप है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण देश में एलपीजी की कमी की स्थिति पैदा हो रही है और इस पर संसद में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

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100 शहरों में कल से शुरू होगा काउंटडाउन

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नई दिल्ली । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (Yoga Day 2026) अब सिर्फ 100 दिन दूर है। इसकी शुरुआत के तौर पर 13 मार्च 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का भव्य आयोजन होगा। आयुष मंत्रालय के अंतर्गत मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) 13 मार्च, 2026 को विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का आयोजन कर रहा है। 

100 संगठन 100 शहरों में होगा योग का प्रचार 
आपको बता दे कि, यह आयोजन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 के 100 दिन शेष रहने की शुरुआत का प्रतीक है। आयुष मंत्रालय ने अपने विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर 100 दिन शेष रहने के तहत कार्यक्रम तैयार किया है, जिसमें 100 संगठन 100 स्थानों/शहरों में योग का प्रचार कर रहे हैं । 13 मार्च, 2026 को विज्ञान भवन में प्रात: 9:00 बजे से एक भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

ये रहेंगे मौजूद 
इस कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव; आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा; बेंगलुरु स्थित एस-व्यासा सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. एचआर नागेंद्र; आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुश्री मोनालिसा दाश के साथ-साथ गणमान्य व्‍यक्तित्‍व, योग गुरु, योग विशेषज्ञ, आयुष विशेषज्ञ, आधुनिक चिकित्सा एवं संबद्ध विज्ञान के विशेषज्ञों के अलावा प्रतिनिधि, योग प्रेमी और योग साधक उपस्थित रहेंगे।

आयुष मंत्री ने कहा- योग हमारी सांस्कृतिक 
आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया था। योग की यह विश्वव्यापी स्वीकृति हमारे देश के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि योग हमारी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का अभिन्न अंग है। आयुष मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (आईडीवाई) के आयोजन के लिए नोडल मंत्रालय है। प्रत्येक वर्ष, अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य कार्यक्रम एक सामूहिक योग प्रदर्शन होता है, जिसका नेतृत्व स्वयं प्रधानमंत्री करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां पहले से ही चल रही हैं।

योग के संदेश को आमजन तक ले जाना 
मालूम हो कि. अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस से पूर्व के शेष दिवसों के लिए प्रत्येक वर्ष उत्सव की तैयारियों को एक महत्वपूर्ण चरण के रूप में मनाया जाता है। इस अवधि के दौरान, मंत्रालय अपने प्रचार-प्रसार को व्यापक बनाने और योग के संदेश को व्यापक रूप से बढ़ावा देने का प्रयास करता है, जिसका उद्देश्य देश भर के लोगों से जुड़ना और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 से पूर्व के 100 दिनों में जनता की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।

100 स्थानों पर मनाने का प्रस्ताव 
आगामी 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर, मंत्रालय ने देश भर के 100 प्रतिष्ठित स्थानों पर इस अवसर को मनाने का प्रस्ताव रखा है। 100 दिनों की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां गति पकड़ रही हैं, जो देश भर के लोगों को योग को समग्र कल्याण के मार्ग के रूप में अपनाने और मनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

Devendra Fadnavis और Eknath Shinde के नाम पर बनाए फर्जी आधार और जाति प्रमाणपत्र

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महाराष्ट्र की रमाई घरकुल योजना (Ramai Awas Gharkul Yojana) में बड़ा घोटाला होने का दावा एआईएमआईएम (AIMIM) नेता और पूर्व सांसद इम्तियाज जलील ने किया है। इम्तियाज जलील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि छत्रपति संभाजीनगर महानगरपालिका में पिछले कई वर्षों से इस योजना के नाम पर करोड़ों रुपये की धांधली की जा रही है। AIMIM नेता जलील के अनुसार इस कथित घोटाले की गंभीरता इतनी ज्यादा है कि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर फर्जी आधार कार्ड, राशन कार्ड और जाति प्रमाणपत्र तक बनाए गए और उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर घरकुल योजना का पैसा हड़पा गया।

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री के नाम पर बने फर्जी दस्तावेज
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इम्तियाज जलील ने कई दस्तावेज मीडिया के सामने पेश किए। उन्होंने दावा किया कि इन कागजात में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नाम पर ‘महार’ जाति का प्रमाणपत्र तक जारी किया गया है।इतना ही नहीं, जलील के मुताबिक एकनाथ शिंदे के नाम से फर्जी राशन कार्ड भी बनाया गया है, जिसमें उनके परिवार के सदस्यों के नाम भी जोड़े गए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर नकली आधार कार्ड तैयार कर रमाई घरकुल योजना के तहत आवेदन दाखिल किए गए और सरकारी पैसे की हेराफेरी की गई।

भाजपा नेताओं पर साधा निशाना
इम्तियाज जलील ने आरोप लगाया कि शहर के कुछ बड़े नेता दलालों के साथ मिलकर इसी तरह से कई वर्षों से गरीबों के हक का पैसा लूट रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंत्रियों के दबाव में महानगरपालिका के आयुक्त से करोड़ों रुपये की फाइलों पर हस्ताक्षर कराए गए।

2010 से चल रहा पूरा खेल?
पूर्व सांसद ने आंकड़ों के साथ दावा किया कि इस पूरे सिंडिकेट में कुछ बड़े रसूखदार चेहरे शामिल हैं जो गरीबों के हक का पैसा डकार रहे हैं। इस पूरे मामले में कुछ प्रभावशाली नेताओं ने संबंधित विभाग के प्रमुख अधिकारियों पर फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया था।उन्होंने आरोप लगाया कि 2010 से अब तक जिन हजारों घरों का वितरण दिखाया गया है, उनमें से कई जमीन पर अस्तित्व में ही नहीं हैं। योजना का लाभ वास्तविक गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है।

हाईकोर्ट में जाने की तैयारी
इम्तियाज जलील ने कहा कि जब प्रशासन के कुछ बड़े अधिकारी ही इस मामले में शामिल नजर आ रहे हैं तो केवल शिकायतों से न्याय मिलना मुश्किल है। इसलिए वह सभी दस्तावेज और सबूतों के साथ जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि निष्पक्ष जांच होती है तो रमाई घरकुल योजना में हुए कथित घोटाले की सच्चाई सामने आ सकती है।

 

ऊर्जा संकट और गैस की कमी पर सरकार को घेरने की तैयारी

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नई दिल्ली। संसद में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाया गया विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव भले ही गिर गया हो, लेकिन विपक्षी दलों ने अब सरकार को घेरने के लिए एक नई और आक्रामक रणनीति तैयार कर ली है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल अब पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से उपजे ईंधन संकट और देश में रसोई गैस (एलपीजी) की भारी किल्लत को लेकर सरकार पर हमलावर होने जा रहे हैं। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे भीषण संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिसका सीधा असर अब भारतीय रसोई और आम आदमी की जेब पर दिखने लगा है।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक में स्पष्ट किया कि अब पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की विदेश नीति तथा ऊर्जा सुरक्षा की विफलता को प्रमुखता से उठाएगी। राहुल गांधी का तर्क है कि यह संकट सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा है, क्योंकि युद्ध के कारण न केवल रसोई गैस की कमी हुई है, बल्कि ईंधन संकट के चलते महंगाई और हवाई किराए में भी अप्रत्याशित उछाल आया है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अमेरिका के दबाव में झुक रही है और अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करने में नाकाम रही है। गौरतलब है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक पश्चिम एशिया पर निर्भर है और वहां जारी युद्ध ने कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई को बाधित कर दिया है।
संसद के भीतर इस मुद्दे पर घमासान पहले ही शुरू हो चुका है। सोमवार और मंगलवार को विपक्ष ने एलपीजी संकट को लेकर सदन में भारी हंगामा किया, जिसके चलते कार्यवाही को स्थगित करना पड़ा। विपक्षी सांसदों ने सदन में स्लोगन लिखे थे। कांग्रेस सांसद कुमारी शैलजा ने मांग की है कि सरकार को अन्य सभी मुद्दों को छोड़कर सबसे पहले रसोई गैस की कीमतें कम करने और आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, तो सरकार के भीतर इतनी घबराहट क्यों है? वहीं, सीपीआई(एम) नेता जॉन ब्रिट्टास ने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार पर्याप्त स्टॉक होने का झूठा दावा कर रही है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को युद्ध रोकने के लिए प्रभावी कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए थे, लेकिन वह केवल मूकदर्शक बनी हुई है। अब देखना यह होगा कि सरकार संसद में विपक्ष के इन तीखे सवालों का क्या जवाब देती है।

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सरकार का बयान- घबराहट के कारण बढ़ी सिलेंडर बुकिंग

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भारत सरकार के विदेश, शिपिंग, पेट्रोलियम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने गुरुवार को देश में कच्चे तेल और गैस की किल्लत को लेकर जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने माना कि देश में हालात चुनौतीपूर्ण हैं और घबराहट के कारण देशभर में सिलेंडर बुकिंग में कई गुना बढ़ोतरी देखी गई है।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि भारत अपनी जरूरत का करीब 60% LPG आयात करता है, जिसमें से लगभग 90% सप्लाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आती है। देश में रोजाना करीब 50 लाख LPG सिलेंडर की डिलीवरी की जाती है।

हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि देश में कच्चे तेल की सप्लाई की स्थिति पूरी तरह संतोषजनक है और देश के करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी पर भी ईंधन खत्म होने (ड्राई-आउट) की स्थिति नहीं है।

अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग के बीच भारत में LPG की डिमांड बढ़ गई है। देशभर में गैस सिलेंडर एजेंसियों के बार लम्बी लाइनें लग रही हैं। सिलेंडरों की कालाबाजारी भी होने लगी है। राज्यों में ₹900 के घरेलू गैस सिलेंडर के लिए ₹1800 तक वसूले जा रहे हैं।
 

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संसद में क्यों नहीं दिख रहे पीएम मोदी?

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वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों पर लोकसभा में चर्चा. राज्यसभा में भी सामान्य रूप से चर्चा जारी.भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद जगदंबिका पाल ने वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों को वर्तमान वैश्विक परिस्थिति में एक समाधान करार देते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि सरकार ने इसके तहत करीब एक लाख करोड़ रुपये की एक आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाई है.वर्ष 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच पर चर्चा की शुरूआत करते हुए पाल ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट (इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध) के कारण पूरे विश्व में अनिश्चितता की स्थिति है.उन्होंने कहा कि होरमुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति श्रृंखला टूट जाने का असर कच्चा तेल की ढुलाई पर पड़ा है. उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन केवल भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे ईरान ने उस समुद्री मार्ग से तेल की ढुलाई की अनुमति दी है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कच्चा तेल के दाम बढ़े हैं और यह 88 अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 119 डॉलर हो गया है, जिसका सीधा असर गैस, उर्वरक और परिवहन क्षेत्र पर पड़ेगा. पूरे विश्व में इसका असर पड़ने जा रहा है.पाल ने कहा, ‘‘इन परिस्थितियों में और इस तरह की वैश्विक चुनौती को ध्यान में रखते हुए यह केवल अनुपूरक मांग नहीं है, बल्कि दुनिया के समक्ष उत्पन्न हुए संकट का एक समाधान है.’’भाजपा सांसद ने कहा कि अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच का कुल आकार 2.81 लाख करोड़ रुपये है और इसमें दो लाख करोड़ रुपये नया नकद व्यय है जो दर्शाता है कि विकास कार्यों को गति दी जाएगी.उन्होंने उल्लेख किया कि इसमें एक लाख करोड़ रुपये ‘टेक्निकल सप्लीमेंट्री टोकन’ प्रावधान के लिए है.

पाल ने कहा, ‘‘अनुपरक मांगों के दूसरे बैच में, वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला व समाधान करने के लिए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आर्थिक स्थिरीकरण निधि बनाया है, जो मौजूदा संकट को दूर करेगा. यह भविष्य में आने वाले किसी भी संकट के लिए एक ढाल का काम करेगा.’’उन्होंने कहा कि यह निधि नये वित्त वर्ष के बजट के लिए एक मजबूत नींव रखेगा. यह वित्त वर्ष 2026-27 के बजट के लिए एक बफर का काम करेगा, ताकि किसी भी वैश्विक संकट का भारत पर असर न पड़े.

विपक्षी सदस्यों के शोरगुल के बीच, पाल ने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2013-14 में 304 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो बढ़कर वर्तमान में 686 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है.उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि संप्रग के शासनकाल के दौरान विदेशी निवेश देश से निकाला जा रहा था और यह 308 अरब अमेरिकी डॉलर था, लेकिन वर्तमान में 748 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया है, जिसपर विपक्ष के सदस्यों ने कड़ा विरोध जताया.विपक्षी सदस्यों का शोरगुल नहीं थमने पर, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि वर्तमान में, विश्व में जिस तरह की समस्या है उसे ध्यान में रखते हुए सबको एकजुट होकर उसका समाधान करना होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘जब कभी देश में संकट आए तो पूरे देश को एकजुट होकर उसका समाधान करना चाहिए, राजनीति नहीं करनी चाहिए.’’इसके बाद, पाल ने कहा कि देश के किसानों के लिए उर्वरक की आपूर्ति बनाये रखने के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांग के दूसरे बैच में 19,230 करोड़ रुपये उर्वरक सब्सिडी के लिए प्रावधान किया गया है क्योंकि आयात किये जाने वाले प्राकृतिक गैस की लागत दोगुनी हो गई है.

देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है: जेडीयू सांसद संजय कुमार
जेडीयू सांसद संजय कुमार झा ने कहा, ‘140 करोड़ लोग प्रधानमंत्री पर भरोसा करते हैं. जनता प्रधानमंत्री की कही बातों पर भरोसा करती है. दुनिया ने देखा कि उन्होंने कोविड के दौरान देश को संकट से कैसे निकाला. इतनी बड़ी लड़ाई चल रही है. यह भारत के कंट्रोल में नहीं है और कोई नहीं जानता कि यह कब तक चलेगी. देश में कहीं भी एलपीजी या पेट्रोल की कमी नहीं है. लोग लाइन में लग रहे हैं और घर में 4-4 सिलेंडर रख रहे हैं, इसी से दिक्कत हो रही है.’

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, ये कहा
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि वह (राहुल गांधी) चाहते हैं कि प्रधानमंत्री सुबह डोनाल्ड ट्रंप, दोपहर में व्लादिमीर पुतिन और शाम को शी जिनपिंग को गाली दें. अगर प्रधानमंत्री तीनों का अपमान करेंगे, तो राहुल गांधी की आत्मा को शांति मिलेगी. जब रूस, अमेरिका और चीन मिलकर भारत का बॉयकॉट करेंगे या हमला भी करेंगे, तो उन्हें खुशी होगी क्योंकि जॉर्ज सोरोस का भारत को कमजोर करने का एजेंडा सफल हो जाएगा.’

होर्मुज स्ट्रेट भारत के लिए ही खुला – हरदीप पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया

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Loksabha Session: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव बुधवार को खारिज कर दिया गया. इस पर सदन में भारी बहस और हंगामे देखने को मिले, लेकिन ध्वनि मत (Voice Vote) से खारिज कर दिया गया. पिछले चार दशकों में यह पहली बार था जब किसी स्पीकर को पद से हटाने के लिए ऐसा प्रस्ताव लाया गया. गुरुवार यानी कि 12 मार्च को ओम बिरला फिर से सदन में लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी पर विराजमान हुए. हालांकि, सदन की शुरु होते ही हंगामे की वजह से दिन के बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.

Parliament Session Update:-

  • ‘भारत को इजाज़त की ज़रूरत क्यों है?’ राहुल का केंद्र पर हमला
    लोकसभा के LoP ने आगे कहा कि, “हर देश की नींव उसकी एनर्जी सिक्योरिटी होती है; अलग-अलग तेल सप्लायर के साथ हमारे रिश्ते तय करने के अधिकार की अदला-बदली की गई है.”
  • राहुल गांधी ने लोकसभा में ईरान विवाद का मुद्दा उठाया
    राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच जंग चल रही है; इस जंग के दूरगामी नतीजे होंगे. राहुल ने मिडिल ईस्ट संकट पर बात करते हुए होर्मुज स्ट्रेट का ज़िक्र किया. उन्होंने कहा, “होर्मुज स्ट्रेट, वह सेंट्रल रास्ता जहां से दुनिया का 20% तेल बहता है, बंद है; इसके बहुत बुरे नतीजे होंगे.”
  • एलपीजी के दाम पर विरोध
    संसद में लोकसभा के अंदर विपक्षी सांसदों की तरफ़ से, जहां वो बैठते हैं वहां से बर्तन बजाने की आवाज़ सुनाई दी है. विपक्षी सांसद बढ़े हुए एलपीजी के दाम को लेकर लोकसभा सदन में विरोध कर रहे थे. सदन के भीतर प्लेट बजाने की आवाज़ सुनाई दी दोपहर 2.25 बजे. उस वक्त स्पीकर चेयर पर बैठी संध्या राय ने विपक्षी सांसदों को टोकते हुए कहा कि ये ठीक नहीं.
  • चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं है: वेस्ट एशिया विवाद पर कांग्रेस के परम्बिल
    केरल के INC के शफील परम्बिल ने कहा कि ट्रेजरी बेंच ने आज सुबह तक सप्लीमेंट्री ग्रांट की डिटेल्ड मांगों को सर्कुलेट नहीं किया, जो प्रोसीजर के नियमों के खिलाफ है. उन्होंने कहा, ‘प्रोसीजर के नियम सिर्फ विपक्ष पर लागू नहीं होते. हमारी करेंसी एशिया में सबसे खराब परफॉर्म करने वाली करेंसी है.’ उन्होंने विवाद की वजह से वेस्ट एशिया में फंसे भारतीयों की मदद करने में सरकार के शामिल होने पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा, ‘इस संकट में, चुप्पी डिप्लोमेसी नहीं; यह पूरी तरह सरेंडर है. सरकार को इन मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, लेकिन प्रधानमंत्री चुनाव प्रचार में बिज़ी हैं.’
  • ईरान संकट के गहराते साये के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर है, जिसके मद्देनजर अब चार मंत्रालयों की महत्वपूर्ण जॉइंट ब्रीफिंग शाम 5:30 बजे आयोजित की जाएगी. इस पूरे संकट पर गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में गठित एक उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय मंत्री समूह पैनी नजर बनाए हुए है, जिसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी भी शामिल हैं. यह पावरफुल समूह अब तक कई दौर की रणनीतिक बैठकें कर चुका है. आने वाले समय में ये तीनों मंत्रालय अन्य संबंधित विभागों और राज्य सरकारों के साथ मिलकर देश की सुरक्षा एवं ऊर्जा हितों की रक्षा के लिए समन्वय स्थापित करेंगे.
  • लंच के बाद पार्लियामेंट फिर से शुरू हुई. ब्रेक के बाद लोकसभा और राज्यसभा फिर से शुरू हुईं. राज्यसभा में फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSCs), टूरिज्म और आर्कियोलॉजी, और कम्युनिकेशन कनेक्टिविटी पर चर्चा होनी है. लोकसभा में वोटिंग से पहले ग्रांट की सप्लीमेंट्री डिमांड पर चर्चा हुई.
  • सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, नियम से चलना होगा- ओम बिरला
    लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि चाहे सदन का नेता हो या विपक्ष का नेता या कोई भी मंत्री, सभी को नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार सदन में बोलने का अधिकार है. कुछ लोगों का मानना ​​था कि विपक्ष का नेता हमेशा बाकियों से ऊपर रहा है और किसी भी विषय पर बोल सकता है; किसी को यह विशेष अधिकार नहीं है.
  • ‘किसी भी माइक को चालू या बंद करने के लिए चेयर के पास कोई बटन नहीं है’: स्पीकर ओम बिरला
    स्पीकर ओम बिरला ने अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा कि मेंबर के माइक को अपनी मर्ज़ी से कंट्रोल करने और अपोज़िशन के माइक बंद करने के आरोपों पर बात करते हुए कहा कि चेयर के पास माइक को कंट्रोल करने के लिए कोई बटन नहीं है. उन्होंने कहा कि मेंबर तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी हो. अपोज़िशन की महिला MPs के विरोध के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह फैसला संसद की गरिमा की रक्षा के लिए किया, जब MPs प्लेकार्ड लेकर ट्रेजरी बेंच पर चढ़ गए.
  • स्पीकर ओम बिरला ने कल अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बात की.  उन्होंने 10 मार्च, 2026 को अपने खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर बात करते हुए कहा कि वह पार्लियामेंट के सभी सदस्यों के आभारी हैं कि उन्होंने उनके काम में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दे उठाए. उन्होंने कहा कि वह पार्लियामेंट में संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे. इस आरोप का जवाब देते हुए कि स्पीकर ने विपक्ष को बोलने नहीं दिया, उन्होंने कहा कि सदन नियमों और कानूनों का पालन करता है जिसके तहत बोलने से पहले स्पीकर की इजाजत लेना जरूरी है. बिरला ने कहा कि पार्लियामेंट में पेश करने से पहले सभी तस्वीरों, प्रिंटेड चीजों, कोट्स और डॉक्यूमेंट्स को स्पीकर की मंजूरी लेनी होगी. उन्होंने इशारा किया कि विपक्ष ने इस नियम का पालन नहीं किया, जिससे उन्हें मुश्किल फैसले लेने पड़े.
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बीजेपी के बटुए से निकले 146.71 करोड़, सबसे ज्यादा 89 विधायक जीते

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नई दिल्ली। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के लिए बीजेपी ने सभी पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है। बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।  बीजेपी ने जमा पूंजी का 2 फीसदी खर्च किया, जबकि कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी पैसा खर्च किया है। बीजेपी ने बीते बिहार विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार ज्यादा पैसा खर्च किया। 2020 में बीजेपी ने करीब 54 करोड़ खर्च किए थे, लेकिन इस बार 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 
बिहार में बीजेपी को पैसा खर्च करने का फल भी मिला। राज्य में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में भले ही पैसा कम खर्च किया हो, लेकिन अपनी जमा पूंजी का बहुत बड़ा हिस्सा बिहार में खर्च किया। 
चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खर्च की हिसाब देती हैं। इसके तहत बिहार चुनाव में खर्च किए पैसे का लेखा-जोखा सियासी दलों ने चुनाव आयोग को दिया हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार चुनाव खर्च की रिपोर्ट 10 फरवरी को चुनाव आयोग को सौंपी है, जिसमें पार्टी ने बताया है कि उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, तब सीपीआई (एम) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए हैं। बहुजन समाज पार्टी ने बिहार चुनाव में सिर्फ 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। आरजेडी और जेडीयू सहित दूसरे दलों के खर्च का लेखा-जोखा अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराया हैं। 
बीजेपी ने चुनाव प्रचार के विज्ञापन पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल इंडिया लिमिटेड पर किया, जिसे पार्टी ने 14.27 करोड़ रुपये दिए। इसके अलावा बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर दिया है। कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च किए गए 35 करोड़ रुपये में से 12.83 करोड़ रुपये स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर दिए। इसके अलावा कांग्रेस ने सोशल मीडिया कैंपने के लिए 11.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पर भी खर्च किए। 
रिपोर्ट से पता चलता है कि बीते साल नवंबर में बिहार चुनाव खत्म होने पर बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये था। इसके मुताबिक चुनाव से पूर्व बीजेपी के पास 7235.26 करोड़ रुपये था, जिसमें से 146.71 करोड़ खर्च किया। इसके बाद 7,088.58 करोड़ रुपये बचे थे। इस तरह बीजेपी ने अपनी जमापूंजी का करीब 2 फीसदी पैसा ही बिहार चुनाव में खर्च किया है। 
वहीं, कांग्रेस के पास बिहार चुनाव के बाद कुल 89.13 करोड़ रुपये बचे थे। कांग्रेस ने चुनाव में 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। इस लिहाज से कांग्रेस के चुनाव से पहले 124.2 करोड़ रुपये था, जिसमें से 35.07 करोड़ रुपये खर्च करने का मतलब साफ है कि पार्टी ने अपनी जमापूंजी का 28.23 फीसदी पैसा बिहार चुनाव में खर्च किया।
बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 विधायक जीतने में सफल रही, जबकि कांग्रेस को महज 6 सीटें मिली हैं। बिहार चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा खर्च किए गए पैसे को विधायकों की संख्या के लिहाज से बीजेपी को एक विधायक 1 करोड़ 64 लाख का पड़ा। वहीं कांग्रेस के सिर्फ 6 विधायक जीते हैं, इसके बाद कांग्रेस को एक विधायक 5 करोड़ 83 लाख का पड़ा। 

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News Desk

एमपी में राज्यसभा की एक सीट पर सस्पेंस, कांग्रेस को क्रॉस वोटिंग का डर

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भोपाल।  मध्यप्रदेश में 19 जून को राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनाव होने जा रहा है। इनमें दो सीटें भाजपा के पास हैं, जिन पर डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन सांसद हैं। वहीं एक सीट कांग्रेस के खाते की है, जिस पर फिलहाल दिग्विजय सिंह सांसद हैं। दिग्विजय सिंह पहले ही राज्यसभा जाने से इनकार कर चुके हैं, जिसके बाद कांग्रेस में इस सीट के लिए कई दावेदार सामने आ गए हैं।

कांग्रेस में बढ़ी दावेदारी

दिग्विजय सिंह के इनकार के बाद कांग्रेस के भीतर इस सीट के लिए कई नेताओं ने दावा ठोक दिया है। इनमें प्रमुख नाम हैं:

जीतू पटवारी – प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मीनाक्षी नटराजन – पूर्व सांसद
कमलनाथ – पूर्व मुख्यमंत्री
अरुण यादव – पूर्व केंद्रीय मंत्री
कमलेश्वर पटेल – पूर्व मंत्री, विंध्य क्षेत्र का बड़ा चेहरा
सज्जन सिंह वर्मा और प्रदीप अहिरवार – दलित वर्ग के नेता
दलित वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेजने की मांग भी उठ रही है। इस संबंध में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पत्र लिखकर मांग की है।

कांग्रेस को क्यों है खतरा

कांग्रेस के भीतर सबसे बड़ा डर क्रॉस वोटिंग का है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक यदि 5–6 विधायक भी इधर-उधर हो गए तो कांग्रेस की सीट खतरे में पड़ सकती है। बताया जा रहा है कि भाजपा की ओर से विधायकों को अगले चुनाव में टिकट और अन्य ऑफर देने की चर्चा भी पार्टी के अंदर चल रही है।

विधानसभा के आंकड़े

मध्यप्रदेश विधानसभा में फिलहाल भाजपा के पास 164 विधायक हैं। यदि भाजपा को एक-दो अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है तो उसके लिए समीकरण और मजबूत हो सकते हैं। कांग्रेस को आशंका है कि उसके कुछ विधायक क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं।

पहले भी हो चुकी है क्रॉस वोटिंग

2022 के राष्ट्रपति चुनाव में भी मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग देखने को मिली थी। उस समय विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा को अपेक्षा से काफी कम वोट मिले थे। अनुमान था कि उन्हें करीब 103 वोट मिलेंगे, लेकिन उन्हें केवल 79 वोट ही मिले। माना गया कि लगभग 19–20 विधायकों ने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया था।

विपक्ष और भाजपा के बयान

इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि भाजपा हमेशा तोड़फोड़ की राजनीति करती है, लेकिन कांग्रेस के विधायक मजबूत हैं और राज्यसभा सीट कांग्रेस की ही रहेगी। वहीं भाजपा विधायक अभिलाष पांडे का कहना है कि भाजपा के पास पर्याप्त विधायक हैं और पार्टी अपने संगठन और काम पर भरोसा करती है।

जीत का गणित

इस बार राज्यसभा चुनाव 230 विधायकों के गणित पर होगा। एक उम्मीदवार को जीतने के लिए लगभग 58 वोटों की जरूरत होगी। ऐसे में थोड़ी सी भी क्रॉस वोटिंग पूरे चुनाव का समीकरण बदल सकती है।

निष्कर्ष:

मध्यप्रदेश की इस राज्यसभा सीट पर चुनाव से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के भीतर कई दावेदार हैं, वहीं क्रॉस वोटिंग की आशंका ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर 19 जून को होने वाले मतदान पर टिकी हुई है।

हार्दिक पांड्या पर राष्ट्रीय ध्वज के अनादर का आरोप

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भारत की टी20 वर्ल्ड कप जीत के जश्न के बाद स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या एक नए विवाद में घिर गए हैं। उनके खिलाफ राष्ट्रीय ध्वज के कथित अपमान को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई है। यह शिकायत पुणे के वकील वाजिद खान बिडकर ने दी है, जिन्होंने मामले में उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने पुलिस को लिखित आवेदन सौंपकर क्रिकेटर के खिलाफ जांच और कार्रवाई की अपील की है। न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, यह शिकायत बंगलूरू के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है, वहीं न्यूज एजेंसी पीटीआई ने बताया है कि यह शिकायत पुणे के शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई है। इस मामले में वाजिद ने पुलिस से हार्दिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर शिकायत

शिकायत के मुताबिक, भारत की जीत के बाद खिलाड़ियों के जश्न के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं। इन वीडियो में पांड्या को कंधे पर तिरंगा लपेटकर मैदान पर दौड़ते और डांस करते हुए देखा जा सकता है। वकील का आरोप है कि जश्न के दौरान एक वीडियो में पांड्या अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंच पर लेटे हुए दिखाई देते हैं, जबकि उस समय भी उनके कंधे पर तिरंगा लिपटा हुआ था। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस तरह का व्यवहार राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के खिलाफ है।

वकील ने कानून का हवाला दिया

वाजिद खान बिडकर ने कहा कि भारत के राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है और इसके लिए कानून भी मौजूद है। उन्होंने बताया कि उन्होंने इस मामले में राष्ट्रीय ध्वज से जुड़े कानून का हवाला देते हुए शिकायत दर्ज कराई है।उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘आपने टी20 वर्ल्ड कप देखा होगा। हार्दिक पांड्या अपनी जीत का जश्न मनाते हुए अपनी गर्लफ्रेंड के साथ डांस कर रहे थे। उनके पीछे राष्ट्रीय ध्वज बंधा हुआ था। 1971 के राष्ट्रीय ध्वज कानून की धारा दो के अनुसार हमें राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा का सम्मान करना चाहिए। लेकिन हार्दिक पांड्या जीत के जश्न में इतने खो गए थे कि वे अपनी गर्लफ्रेंड के साथ लेटे हुए थे और उस समय भी राष्ट्रीय ध्वज उनके शरीर पर था। मुझे लगता है कि यह राष्ट्रीय ध्वज का अपमान है।’

शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया

वकील ने बताया कि शुरुआत में पुलिस ने कहा कि घटना अहमदाबाद में हुई है, इसलिए वहां शिकायत करनी चाहिए। हालांकि उन्होंने यह तर्क दिया कि राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश का प्रतीक है और इसकी गरिमा से जुड़ा मामला कहीं भी उठाया जा सकता है।उन्होंने कहा, ‘मैंने शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई है। जब मैं शिकायत करने गया तो उन्होंने कहा कि घटना यहां नहीं हुई है। तब मैंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज पूरे देश का प्रतीक है, इसलिए यहां भी शिकायत की जा सकती है। उन्होंने मेरी शिकायत स्वीकार कर ली और उसकी कॉपी भी दी है। अब देखते हैं आगे क्या होता है।’

पांड्या ने जीत को बताया व्यक्तिगत वादा पूरा होना

दूसरी ओर हार्दिक पांड्या ने टी20 वर्ल्ड कप जीत को अपने व्यक्तिगत संकल्प की पूर्ति बताया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और टीम आगे भी ट्रॉफियां जीतना चाहती है। पांड्या ने कहा, ‘2024 में बारबाडोस में मिली जीत के बाद मैंने खुद से वादा किया था कि जिस भी टूर्नामेंट में खेलूंगा, जीतने के लिए खेलूंगा और ट्रॉफी उठाऊंगा। अहमदाबाद में न्यूजीलैंड के खिलाफ मिली यह जीत इस बात का प्रमाण है कि मेरा वह वादा सच हो गया। और यह तो बस शुरुआत है।’

टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन

32 वर्षीय पांड्या ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में बल्ले और गेंद दोनों से शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में नौ विकेट लिए और अहम मौकों पर मैच जिताने वाली गेंदबाजी की। बल्लेबाजी में भी उनका योगदान अहम रहा। कई मैचों में उन्होंने छोटी मगर तेज और प्रभावशाली पारी खेली। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्हें आईसीसी की टी20 वर्ल्ड कप 2026 टीम ऑफ द टूर्नामेंट में भी जगह मिली।

भारत ने रचा इतिहास

दूसरी ओर भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर खिताब अपने नाम किया। इस जीत के साथ भारत कई बड़ी उपलब्धियां हासिल करने में सफल रहा। किसी टीम ने पहली बार अपने घरेलू मैदान पर टी20 वर्ल्ड कप जीता। इसके अलावा यह लगातार दूसरी बार खिताब जीतने का रिकॉर्ड भी बन गया। भारत अब तीन बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन गई है। इससे पहले भारत ने 2007 में पहला खिताब जीता था और फिर 2024 में दूसरी बार चैंपियन बना था। ऐतिहासिक जीत के बीच अब हार्दिक पांड्या से जुड़ा यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है, जिस पर आगे पुलिस की कार्रवाई के बाद स्थिति साफ हो सकेगी।