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Friday, September 18, 2026
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सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली, हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी याचिका की डिस्पोज

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एक ही दिन सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में दायर की गई थी याचिका, सिंगल बेंच में सुनवाई के निर्देश; कंट्री लिकर टेंडर पर विवाद जारी

मध्यप्रदेश में कंट्री लिकर सप्लाई टेंडर को लेकर चल रहे विवाद के बीच याचिका दायर करने वाले डिस्टलरीज समूह को अदालतों से राहत नहीं मिल सकी। सूत्रों के अनुसार मामले में पहले सर्वोच्च न्यायालय में याचिका लगाई गई, जहां से इसे यह कहते हुए वापस भेज दिया गया कि मामले की सुनवाई हाईकोर्ट की सिंगल बेंच द्वारा ही की जाएगी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच (DB) के समक्ष भी पहुंचा, लेकिन वहां भी याचिका का निराकरण कर दिया गया और स्पष्ट किया गया कि प्रकरण की सुनवाई सिंगल बेंच में ही होगी। बताया जा रहा है कि याचिका लगाने वाले डिस्टलरीज और उनके मालिकों को अंततः पीछे हटना पड़ा। सूत्रों का यह भी दावा है कि इस मामले से जुड़े कई तथ्यों की जानकारी भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक भी पहुंचाई गई थी। बताया जा रहा है कि याचिका 09 मार्च को एक ही दिन सर्वोच्च न्यायालय और हाईकोर्ट दोनों जगह दायर की गई थी। इस बीच आबकारी आयुक्त द्वारा मध्यप्रदेश के 55 जिलों में अरबों रुपये के कंट्री लिकर सप्लाई टेंडर की तारीख बढ़ा दी गई है, जिससे शराब कारोबार में हलचल और तेज हो गई है।

 दो न्यायाधीश का मामले से अलग होना ऐतिहासिक 

हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान दो न्यायाधीशों ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था, जबकि तीसरे न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम राहत देने से इंकार कर दिया। अदालत ने राज्य शासन को दो सप्ताह के भीतर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें से लगभग एक सप्ताह का समय बीत चुका है।

 (MPSIDC) के अरबों रुपये तथा विभाग के करोड़ों रुपये बकाया बताए जा रहे है

सूत्रों के अनुसार याचिका से जुड़े डिस्टलर पर एमपीएसआईडीसी (MPSIDC) के अरबों रुपये तथा विभाग के करोड़ों रुपये बकाया बताए जा रहे हैं। साथ ही उन पर ब्लैकलिस्टेड और सजा प्राप्त होने के आरोप भी चर्चा में हैं। वहीं यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ अधिकारियों द्वारा कथित रूप से एक निजी कंपनी के पक्ष में खड़े होने की शिकायत लोकायुक्त तक पहुंचाई गई है।

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 जी एस टी चोरी में गए थे जेल 

सूत्रों का कहना है कि संबंधित कंपनी के मालिकों पर पहले भी फर्जीवाड़ा कर टैक्स चोरी करने के मामले दर्ज हो चुके हैं और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। इतना ही नहीं, आरोप है कि वे अक्सर आबकारी आयुक्त के कैंप कार्यालय भोपाल में देखे जाते रहे हैं। सूत्रों के अनुसार एक बार कैंप कार्यालय से हड़बड़ी में निकलने का उनका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसके बाद यह मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया।

 20 मार्च को होगी सुनवाई 

फिलहाल इस पूरे मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में आगे की सुनवाई और शासन के जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिससे मध्यप्रदेश के शराब कारोबार से जुड़े इस बड़े विवाद पर अगला फैसला तय होगा।

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