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Wednesday, September 16, 2026
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सुप्रीम कोर्ट चीफ जस्टिस गवई का संदेश, कहा- संविधान में बसती है लोकतंत्र की आत्मा, मिट्टी से बनाए रखें जुड़ाव

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नई दिल्‍ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के मुख्य न्यायाधीश बी आर गवई (Chief Justice B.R. Gavai) ने शनिवार को भारत के संविधान और लोकतंत्र (Constitution and democracy) को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतंत्र की आत्मा संविधान में निहित है। इसी वजह से ही हमारे लोकतंत्र की नींव भी मजबूत है। इससे पहले एक कॉलेज के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इंसान चाहे कितनी भी बुलंदी पर पहुंच जाए मगर उसे अपनी मिट्टी से नाता नहीं तोड़ना चाहिये।

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए जस्टिस गवई ने कहा कि कई देशों में केंद्र और राज्यों में अलग-अलग संविधान कार्य करते हैं, लेकिन भारत में एक की संविधान राज्यों और केंद्र के लिए कार्य करता है। उन्होंने नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में हालिया समय में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए कॉलेजियम सिस्टम को सही ठहराया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस व्यवस्था में नियुक्तियों में राज्य सरकार और केंद्र सरकार और विभिन्न एजेंसियों के ‘इनपुट’ शामिल होते हैं और इसके आधार पर ही न्यायाधीशों की नियुक्ति होती है।

प्रधान न्यायाधीश ने भारत में न्याय की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि हमारे यहां न्यायिक व्यवस्था जिला स्तर से शुरू होकर, हाई कोर्ट होते हुए सुप्रीम कोर्ट में पहुंचती है। इसकी वजह से ही हमारे यहां न्याय की अवधारणा संभव हो पाई है।

बाबा साहब भीमराव आंबेडकर का जिक्र करते हुए चीफ जस्टिस ने कहा कि उन्हीं के प्रयासों की वजह से देश की शक्ति किसी एक केंद्र में न होकर तीन केंद्रों यानि विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका में समांतर रूप से बंटी हुई है। इस अवसर पर सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील न्यायाधीश विक्रमनाथ ने कहा कि आंबेडकर ने उदारवाद और सामाजिक न्याय के विचार को जन्म दिया और उनका मानना था कि कोई भी व्यक्ति भारतीय संविधान से ऊपर नहीं है। उन्होंने कहा कि आंबेडकर समाज में व्याप्त जाति, लैंगिक और समाज आधारित भेदभाव को समाप्त करने के पक्षधर थे। उन्होंने ही सभी के लिए सुलभ न्याय की अवधारणा को संविधान के जरिए रखा।

इससे पहले एक एक इंटर कॉलेज के छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए चीफ जस्टिस ने मिट्टी से जुड़ाव बनाए रखने की नसीहत दी। उन्होने कहा, “आप चाहे जितने बड़े बन जाएं लेकिन अपनी मिट्टी से नाता नहीं तोड़ना चाहिये। अपनी संस्कृति को नहीं भूलना चाहिये। आप लोग देश का भविष्य हैं। कल का भारत कैसा होगा यह आप पर निर्भर है। आप लोगों का सौभाग्य है कि आपने बुद्ध की धरती कौशांबी में जन्म लिया है।”

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