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Sunday, September 20, 2026
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लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग तेज, 12 मार्च को विरोध मार्च का आह्वान

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श्रीनगर: लद्दाख के संगठनों ने राज्य का दर्जा और अन्य मांगों को लेकर 12 मार्च को शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आह्वान किया है. राजनीतिक और धार्मिक निकायों के समूह, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने लद्दाख के लोगों से शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का आग्रह किया है. इसका उद्देश्य अपनी मांगों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के साथ बातचीत के एक और दौर के लिए दबाव बनाना है.एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भारतीय संविधान में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा पाने के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

गृह मंत्रालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के सदस्य और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि विरोध मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर अपनी मांगों पर बातचीत करने और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वानचुक की रिहाई के लिए दबाव डालना है. दो अन्य एक्टिविस्ट भी हिरासत में हैं.

दोरजे ने ईटीवी भारत से कहा, “बातचीत में देरी हो रही है. सरकार गंभीर नहीं लग रही है. पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद बनाया गया न्यायिक आयोग धीमा रहा है, जिससे युवा अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं. हम उनके केस वापस लेने की मांग कर रहे हैं.”

जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक के नेतृत्व में 14 दिन की भूख हड़ताल के बाद 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हुए, जो पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में बदल गया. इसमें चार लोग मारे गए और लगभग 90 घायल हो गए. तब से वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया है. वह राजस्थान के जोधपुर जेल में कैद हैं. हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है.

दोरजे ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली लद्दाख पर हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने फरवरी की मीटिंग में इन मांगों को ‘उपयुक्त’ नहीं पाया. उन्होंने कहा, “बातचीत बेनतीजा रही, क्योंकि वे हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं थे. उनके अनुरोध पर हमने अपनी मांगों को सही ठहराते हुए 26 पन्नों का मसौदा प्रस्ताव दाखिल किया. लेकिन उन्होंने बैठक में हमसे कहा कि मांगें संभव नहीं हैं. हमसे प्रस्ताव मांगने का क्या उद्देश्य था?”

पिछले साल अक्टूबर में लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के साथ तब तक बातचीत करने से मना कर दिया था, जब तक कि हत्याओं की न्यायिक जांच समेत उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं. तब HPC के साथ बातचीत रुक गई थी.

विरोध मार्च के शुरुआती प्लान के मुताबिक, लेह चौक से एक जुलूस शुरू होगा और पोलोग्राउंड पर इकट्ठा होगा. दोरजे ने कहा कि इजाजत मिलने के बाद लेह एपेक्स बॉडी के नेता दिन में मार्च को संबोधित करेंगे.

लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अधिकारियों ने विरोध मार्च के लिए इजाजत दी है या नहीं, क्योंकि लेह के उपायुक्त (DC) से संपर्क करने की बार-बार कोशिश करने पर भी बात नहीं हो पाई.

दूसरी ओर, न्यायिक जांच आयोग के संयुक्त सचिव रिगजिन स्पैलगन (Rigzin Spalgon) ने तीन सदस्यों वाले आयोग की प्रगति रिपोर्ट दी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच सही, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है और जिन लोगों ने हलफनामा जमा किया है, उन पर आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के हिसाब से ध्यान दिया जाएगा. उनके अनुसार, आयोग को आम जनता के साथ-साथ प्रशासन के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से बड़ी संख्या में हलफनामे मिले हैं और उनकी जांच की गई है.

स्पैलगन ने आगे कहा, “दिसंबर 2025 तक प्रशासन की तरफ से कुल 22 गवाहों से पूछताछ की गई थी. मार्च 2026 में जांच फिर से शुरू हुई और अब तक 18 प्रशासनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. इसके अलावा 45 पब्लिक एफिडेविट जमा किए गए हैं.”

उन्होंने कहा कि आयोग अभी प्रशासन के जमा किए गए एफिडेविट की जांच कर रहा है और सरकारी और नागरिक गवाहों से पूछताछ करेगा. स्पैलगन ने कहा, “उनके बयान चल रही न्यायिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में दर्ज किए जाएंगे.”

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