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Friday, July 31, 2026
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बिहार चुनाव में खर्च के मामले में बीजेपी आगे, कांग्रेस से चार गुना ज्यादा खर्च

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पटना। बिहार में सत्ता परिवर्तन की खबरों के बीच विधायकों की कीमत की जोरदार चर्चा रहती है। बातें चाहे महाराष्ट्र की हो, मध्य प्रदेश की या फिर कर्नाटक की, हर जगह से मिलती जुलती ही खबरें सुनने को मिलती रही हैं। 2025 के बिहार चुनाव में हुए खर्च का हिसाब ज्यादातर राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग में जमा कर दिया है। मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किया है, लेकिन जेडीयू और आरजेडी के बैलेंसशीट जमा न करने के कारण उनके खर्च के आंकड़े उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। 
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किया। अगर कांग्रेस के चुनाव खर्च से तुलना करें तो चार गुणा से भी ज्यादा। कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी खर्च किया, जबकि बीजेपी ने सिर्फ 2 फीसदी। बीजेपी ने बिहार चुनाव कैंपेन पर कुल 146.71 करोड़ खर्च किए हैं। सबसे ज्यादा खर्च करने का एक फायदा तो यही है कि बीजेपी बिहार में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक ज्यादातर खर्च ट्रैवल पर हुआ है, जिसमें स्टार प्रचारकों के आने जाने और मीडिया में दिए गए विज्ञापन शामिल हैं। 
रिपोर्ट के मुताबिक कांग्रेस ने चुनाव खर्च का जो हिसाब आयोग को दिया है, उसके मुताबिक बिहार विधानसभा कैंपेन में 35.07 करोड़ खर्च हुए हैं। ये खर्च कांग्रेस उम्मीदवारों के प्रचार, स्टार प्रचारकों के ट्रैवल और बाकी चुनावी मुहिम में हुआ है। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के चुनाव कैंपेन का खर्च 26.75 लाख आया है। बहुजन समाजवादी पार्टी ने बिहार चुनाव पर 6.01 करोड़ खर्च किए। 
बता दें बिहार चुनाव बीजेपी 101 विधानसभा सीटों पर लड़ी थी और एनडीए के बैनर तले बीजेपी के सबसे ज्यादा 89 विधायक चुने गए। चुनाव प्रचार के दौरान विज्ञापन पर बीजेपी के खर्च की सबसे बड़ी रकम गूगल इंडिया को दी गई, जो 14.27 करोड़ रुपए थी। बीजेपी ने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपए खर्च किए हैं, जो चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर देखा जाता है। देखें तो बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपए चुनावों में खर्च करके 89 विधायक हासिल किए और इस हिसाब से एक विधायक पर खर्च की गई रकम हुई करीब 1.65 करोड़ रुपए।
कांग्रेस ने चुनाव प्रचार पर जो 35.07 करोड़ खर्च किए उसमें 12.83 करोड़ स्टार प्रचारकों की आवाजाही पर खर्च हो गए और 11.24 करोड़ सोशल मीडिया कैंपेन पर। चुनाव की घोषणा होने से पहले जो खर्च हुए होंगे उसका तो सिर्फ अंदाजा भर लगाया जा सकता है और, यह बात सभी राजनीतिक दलों पर लागू होती है। बिहार चुनाव में कांग्रेस ने 61 उम्मीदवार उतारे थे महज 6 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी। चुनाव से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व में वोटर अधिकार यात्रा भी निकाली गई थी, खर्च तो उसमें भी हुए ही होंगे। 
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को महागठबंधन में 4 सीटें मिली थीं, लेकिन जीत सीपीआई (एम) को एक ही सीट पर मिली। चुनाव खर्च की बात करें, तो सीपीआई (एम) ने बिहार चुनाव पर 26.75 लाख खर्च किए थे। इतना खर्च करके एक विधायक हासिल किया। वहीं मायावती की बहुजन समाज पार्टी ने तो बिहार चुनाव में 181 उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन जीत सिर्फ एक हो ही मिल पाई। और, बिहार चुनाव कैंपेन पर बीएसपी के खर्च हुए 6.01 करोड़ रुपए। चुनाव खर्चों की तुलना करें तो सबसे महंगा विधायक पड़ा है मायवती की बीएसपी को, और सबसे सस्ता एमएलए सीपीआई (एम) को।

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News Desk

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