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Monday, November 2, 2026
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पिनाका रॉकेट सिस्टम बना भारत की ताकत, राफेल समझौते के बीच फ्रांस की नजर

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हैदराबाद: भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध बेहद गहरे हैं. दोनों देशों के बीच एक बड़ी ट्रेड डील होने वाली है. इसके लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत आए हुए हैं. मुंबई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मैक्रों के बीच द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्रों को लेकर डील होने की संभावना है. इन सबके बीच एक बड़ी बात भी सामने आ रही है कि फ्रांस अपनी सेना के लिए भारत से हथियार खरीदेगा.

खासकर भारत का पिनाका (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम. राफेल विमान के साथ अगर यह डील भी हो जाती है तो भारत के हथियार निर्यात के लिए एक बहुत बड़ी बात होगी. क्योंकि फ्रांस एक विकसित देश है. ग्लोबल आर्म्स मार्केट का एक बहुत बड़ा हिस्सा फ्रांस के पास है. वह नाटो का सदस्य होने के साथ एक सुपर पावर भी है. ऐसे में फ्रांस अगर पिनाका पर भरोसा करता है तो यह भारत के हथियारों की विश्वसनीयता के लिए बहुत बड़ी बात होगी. आईए जानते हैं, पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम की क्या खासियत है और इसे फ्रांस क्यों खरीद रहा है?

पिनाका (Pinaka) मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम क्या है: पिनाका भारत का एक बेहतरीन मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जो अपनी श्रेणी में दुनिया के किसी भी सिस्टम को कड़ी टक्कर देता है. इस सिस्टम का सीधा मुकाबला अमेरिकी रॉकेट सिस्टम हिमर्स (HIMARS) और रूसी टोर्नाडो-एस (Tornado-S) से है. पिनाका ने कारगिल और ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान पाकिस्तानी मिसाइल लॉन्चरों, तोपखाने और आपूर्ति लाइनों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया था.

पिनाका डील के लिए बातचीत कहां तक पहुंची: फ्रांस और भारत के बीच पिनाका रॉकेट सिस्टम के लिए बातचीत चल रही है. फ्रांसीसी सेना प्रमुख जनरल पियरे शिल ने अक्टूबर 2025 में अपनी भारत यात्रा के दौरान, अपनी सेना के लिए लंबी दूरी के रॉकेट लॉन्चर को अपग्रेड करने के लिए भारतीय पिनाका का परीक्षण किया था. उन्होंने विशेष रूप से भारत की पिनाका की संभावित खरीद का उल्लेख किया था. इससे पहले 2024 में एक फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ने पिनाका प्रणाली का मूल्यांकन किया था और इसके प्रदर्शन को संतोषजनक पाया था.

क्या फ्रांस के पास अपना कोई रॉकेट लॉन्चर नहीं है: मौजूदा समय में फ्रांस की आर्मी के पास एम270 लान्स रोक्यूट्स यूनिटेयर नामक रॉकेट लॉन्चर सिस्टम है, जो काफी पुराना हो चुका है. फ्रांस इसको अपग्रेड करना चाह रहा है. हालांकि, फ्रांस अपना नया रॉकेट सिस्टम फ्रैप लॉन्ग पोर्टी टेरेस्ट्री सिस्टम तैयार भी कर रहा है. लेकिन, माना जा रहा है कि उसके तैयार होने में काफी समय लगेगा. ऐसे में तब तक सेना की जरूरत को पूरा करने के लिए फ्रांस पिनाका खरीदना चाहता है.

पिनाका की खासियतें: दरअसल, पिनाका एक बहुत की किफायती रॉकेट सिस्टम है, जो अमेरिकी सिस्टम हिमर्स को क्वालिटी में टक्कर देता है. बीते करीब 3 दशक से पिनाका भारतीय सेना में है और लगातार अपग्रेड होता रहा है. इसने कारगिल युद्ध में अपनी क्षमता दिखाई थी. अर्मेनिया पहले ही भारत से यह सिस्टम खरीद चुका है.

पिनाका की मारक क्षमता कितनी है: मौजूदा समय में पिनाका की मारक क्षमता 75 से 90 किमी की रेंज की है. भारत ने पिनाका एमके3 भी डेवलप कर लिया है, जिसकी रेंज 120 से 130 किमी है. इसके अलावा पिनाका एमके4 पर भी काम चल रहा है, जिसकी रेंज 300 किमी तक रहने की उम्मीद है. मल्टी बैरल रॉकेट सिस्टम की ग्लोबल रैकिंग में पिनाका हमेशा से टॉप-5 में रहा है. अमेरिकी सिस्टम की रेंज 300 से 499 किमी है जबकि रूस की 120-200 किमी है. हालांकि, पिनाका की रेंज कम है लेकिन, उसकी रैपिड फायर क्षमता अन्य पर भारी पड़ती है. यह 44 सेकेंड में 12 रॉकेट फायर करता है जबकि अमेरिकी हिमर्स 45 सेकेंड में छह रॉकेट दागता है.

अमेरिकी रॉकेट लॉन्चर से काफी सस्ता है पिनाका: कीमत के मामले में भी पिनाका अन्य देशों को रॉकेट लॉन्चर से काफी सस्ता है. अमेरिकी रॉकेट सिस्टम की बात करें तो यह करीब 19.5 करोड़ रुपए का आता है. जबकि, भारत का पिनाका मात्र 2.3 करोड़ रुपए का है. यानी भारत का सिस्टम अमेरिका से करीब 8 गुना सस्ता है. डीआरडीओ ने इसको पूरी तरह देसी अंदाज में बनाया है. सभी कल-पुर्जे देश में ही बने हैं.

भारत फ्रांस से खरीदेगा 114 राफेल विमान: पीएम नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बातचीत में 4.5+ पीढ़ी के 114 राफेल विमानों की डील पर मुहर लग सकती है. जो करीब 3.25 लाख करोड़ की डील होगी. इस सौदे के तहत पहली बार राफेल का निर्माण भारत में किया जाएगा. लगभग 90 विमानों का निर्माण भारत में होगा और इनमें करीब 50% स्वदेशी उपकरण इस्तेमाल किए जाएंगे. ये विमान भारतीय वायुसेना की गिरती हुई स्क्वाड्रन संख्या (वर्तमान में 29, लक्ष्य 42) को सुधारने में मदद करेंगे.

भारत-फ्रांस मिलकर करेंगे हैमर (HAMMER) मिसाइलों का निर्माण: भारत और फ्रांस हैमर मिसाइलों के निर्माण के लिए एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाने पर भी बात करेंगे. यह समझौता भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और फ्रांस की सफरान (Safran) कंपनी के बीच होगा. हैमर हवा से जमीन पर मार करने वाली एक स्मार्ट मिसाइल है जो राफेल विमानों में इस्तेमाल होती है.

भारत के लड़ाकू विमानों के लिए जेट इंजन तैयार करेगा फ्रांस: फ्रांसीसी कंपनी सफरान भारत के लड़ाकू विमान के लिए 120kN क्षमता वाला जेट इंजन बनाने में मदद करेगा. सफरान कंपनी हैदराबाद में राफेल के M88 इंजन के लिए एक MRO (रखरखाव और मरम्मत) केंद्र भी बना रही है.

पनडुब्बियों पर भी होगी बात: इस वार्ता के जरिए दोनों देश अपने रणनीतिक रक्षा सहयोग समझौते को अगले 10 वर्षों के लिए बढ़ाएंगे. इसके साथ ही 3 अतिरिक्त स्कॉर्पीन (Scorpene) पनडुब्बियों के निर्माण को लेकर भी बातचीत होगी. ये पनडुब्बियां मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MDL) में बनाई जा सकती हैं.

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