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Thursday, August 6, 2026
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नई स्मार्ट तकनीक से कम होगा बिजली बिल, जानिए कैसे काम करती है

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आज के AI युग में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER) ने बिजली बचाने के लिए एक शानदार तकनीक विकसित की है. इस तकनीक के जरिए अब यह आसानी से पता चल जाएगा कि कमरे में कितने लोग मौजूद हैं. उसी संख्या के आधार पर लाइट और पंखे जैसी बिजली की जरूरतों को खुद-ब-खुद कंट्रोल किया जा सकेगा. IISER के एसोसिएट प्रोफेसर हारून आर. लोन द्वारा तैयार की गई इस तकनीक से न सिर्फ बिजली की भारी बचत होगी, बल्कि बिल्डिंग मैनेजमेंट भी काफी स्मार्ट हो जाएगा. आसान शब्दों में कहें तो अब कमरे में लोगों की मौजूदगी के हिसाब से ही बिजली खर्च होगी, जिससे फिजूलखर्ची रुकेगी.

IISER की नई स्मार्ट तकनीक कैसे काम करता है?

हारून आर. लोन द्वारा विकसित इस तकनीक में कम कीमत वाले कैमरों का इस्तेमाल किया गया है. ये स्मार्ट कैमरे हॉल या कमरे में मौजूद लोगों की संख्या को काउन्ट करते हैं. इसके बाद एक विशेष कंप्यूटर एल्गोरिद्म उस जानकारी के आधार पर यह पता लगाता है कि बिल्डिंग में कितनी बिजली की जरूरत है और उसी के अनुसार बिजली की खपत को नियंत्रित किया जाता है.

IISER की नई तकनीक की खास बात क्या है?

इस तकनीक की एक खास विशेषता यह है कि यह सीमित डेटा के आधार पर भी ऊर्जा की खपत का सटीक अनुमान लगा सकती है. इस पहल के तहत बड़ी इमारतों, कार्यालयों, मॉल और संस्थानों में बिजली की व्यर्थ खपत को कम किया जा सकेगा, जिससे न केवल मकान मालिक को बिजली का अधिक बिल नहीं चुकाना होगा, बल्कि बिजली विभाग पर भी अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा.

स्मार्ट तकनीक के बारे में विशेषज्ञों ने क्या कहा?

वहीं इस स्मार्ट तकनीक के संबंध में विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी. विशेषज्ञों ने आगे बताया कि भविष्य में स्मार्ट सिटी और ग्रीन बिल्डिंग्स में इस तकनीक का अधिक से अधिक उपयोग किया जाएगा.

IISER की नई तकनीक से क्या फायदा होगा?

  • इस तकनीक (Electricity Bill Tension Over) का सबसे बड़ा फायदा यह है कि बिल्डिंग मैनेजर को बार-बार बिजली की खपत जांचने की ज़रूरत नहीं होगी. क्योंकि सारा काम ऑटोमैटिक होगा.
  • यह सिस्टम अपने आप तय कर लेगा कि कब लाइट जलानी है और कब एसी (AC) की कूलिंग को कम या ज्यादा करना है.
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News Desk

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