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Wednesday, September 16, 2026
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दिल्ली की हवा जहरीली, बमबारी के बाद भी तेहरान की हवा साफ क्यों?

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नई दिल्ली। ईरान में बीते दो हफ्तों से ताबड़तोड़ धमाके और बमों-मिसाइलों के धुओं से आमसान काला हो चुका है। तेल ठिकानों पर हमले के बाद कई मीडिया रिपोर्ट में तो यहां तक दावा किया गया कि ईरान के आसमान से जहरीली बारिश की बूंदे भी गिरने लगी हैं। इसके बावजूद भी आप यह जानकर हैरान हो जाएंगे कि चारों तरफ काले धुएं के बाद भी तेहरान की हवा भारत की राजधानी नई दिल्ली की हवा से ज्यादा साफ है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार तेहरान का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)  50-70 के अच्छा से मध्यम स्तर पर बना हुआ है। इसके ठीक उलट दिल्ली का एक्यूआई 150 से ऊपर, यानी खराब से अस्वस्थ स्तर पर बना हुआ है। चारों तरफ काला धुआं, काला आसमान, ताबड़तोड़ हमले, जहरीले हालात और आग के बावजूद तेहरान की साफ हवा ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है। इसके बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि भौगोलिक स्थिति, औद्योगिक गतिविधियां और कृषि प्रदूषण नागरिकों की सांसों को कितना गंभीर रूप से प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर युद्ध के बावजूद प्राकृतिक और मानवजनित प्रदूषण का वास्तविक असर कैसा होता है।

अब समझिए क्यों दिल्ली की हवा खराब है या रहती है?

इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि दिल्ली का खराब प्रदूषण युद्ध से नहीं बल्कि भौगोलिक और औद्योगिक कारणों से है। यह शहर इंडो-गैंगेटिक मैदान में स्थित है, जो दुनिया के सबसे प्रदूषित इलाकों में से एक माना जाता है। यहां भारी ट्रैफिक और उद्योग हैं, निर्माण कार्य और धूल भी खूब फैलती है। इसके साथ ही इस बात को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता है कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब और हरियाणा में कृषि अपशिष्ट (पराली) जलाना आम है। इन कारणों से पीएम2.5 जैसे सूक्ष्म कण वायु में फैलते हैं, जो सबसे जहरीली स्मॉग का कारण बनते हैं। ठंडी हवाओं और तापमान की उलटफेर (इनवर्जन) के कारण यह धुआं जमीन के पास फंसा रहता है। नतीजा यह होता है कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण अक्सर राष्ट्रीय मानकों से ऊपर रहता है।

अब बात तेहरान की हवा की

इस बात में कोई सच्चाई नहीं है कि तेहरान पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त है। तेहरान में भी प्रदूषण है, लेकिन यहां सबसे बड़ा स्रोत वाहनों से निकलने वाला धुआं है। यहां कृषि अपशिष्ट जलाने जैसी गतिविधियां नहीं हैं।  आसपास के इलाके में भारी उद्योगों का घना नेटवर्क कम है। हां यह बात जरूर है कि भूगोल के कारण सर्दियों में धुआं फंस सकता है, लेकिन औसत स्तर दिल्ली से कम है।  हालांकि, अमेरिका-इस्राइल-ईरान संघर्ष के दौरान तेल डिपो पर हुए हमलों से तेहरान की हवा में जहरीले तत्व आए हैं,  लेकिन फिर भी इसकी हवा दिल्ली से ज्यादा खराब नहीं हुई।

युद्ध प्रदूषण का मुख्य कारण नहीं

हालांकि कुछ विशेषज्ञों ने पहले सोचा था कि तेल ठिकानों की आग से पूरे क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ सकता है। लेकिन वायु गुणवत्ता विशेषज्ञ कहते हैं कि दिल्ली में हालिया धुंध का कारण बलूचिस्तान और थार मरुस्थल से उड़ता धूल है, ईरान के धुएं से नहीं। गौरतलब है कि ऐसे समय में दिल्ली और तेहरान की हवा का यह तुलना दिखाता है कि शहरी प्रदूषण, जो ट्रैफिक, उद्योग और कृषि गतिविधियों से पैदा होता है, छोटे समय के युद्ध प्रभावों से भी ज्यादा लगातार हवा को खराब करता है। दिल्ली में 2 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए साफ हवा की लड़ाई लंबी है, जिसे केवल नीति, तकनीक और क्षेत्रीय सहयोग से ही हल किया जा सकता है।

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