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Monday, November 2, 2026
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कश्मीर में होकरसर वेटलैंड का सीमांकन शुरू, यूरोपीय प्रवासी पक्षियों का फेमस स्पॉट

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श्रीनगर: जम्मू- कश्मीर सरकार ने श्रीनगर के बाहरी इलाके में होकरसर वेटलैंड की सीमा तय करना शुरू कर दिया है. इसे 2005 में रामसर साइट के तौर पर लिस्ट किया गया था. इस पर कब्जा होने और इसके पर्यावरण के खराब होने का खतरा था.

सर्दियों के महीनों में लाखों प्रवासी पक्षियों का घर, 13.75 वर्ग किलोमीटर में फैली ‘आर्द्रभूमि की रानी’ जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर से 10 किलोमीटर दूर बडगाम जिले में स्थित है. केंद्र शासित प्रदेश में सरकार के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने वेटलैंड और उससे सटे नंबली-नरकारा रिजर्व की सीमाओं का सीमांकन करने के लिए कई विभागों के अधिकारियों की 16 सदस्यों की एक टीम बनाई है.

बडगाम जिले के एक बड़े रेवेन्यू कमिश्नर जिनके अधिकार क्षेत्र में यह वेटलैंड आता है, उन्होंने टीम से फील्ड सर्वे करने और वेटलैंड की सीमाओं को साफ तौर पर मार्क करने को कहा है. यह वेटलैंड सुरक्षित इकोलॉजिकल और बायो-डायवर्सिटी वाले हैबिटैट में से एक है, लेकिन इसकी मिट्टी पर कब्जे और खनन का खतरा है.

फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के एक रेंज ऑफिसर की लीडरशिप में टीम में रेवेन्यू और फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी होंगे जो वेटलैंड के भविष्य के प्रोटेक्शन के लिए एसीआर बडगाम को अपनी रिपोर्ट सबमिट करेंगे. अधिकारियों ने कहा कि सीमांकन की इस प्रक्रिया में राजस्व रिकॉर्ड प्रमाणीकरण, सीमा सत्यापन, भू-संदर्भन, वेटलैंड एरिया का सीमांकन, और ज़मीन के मालिकाना हक के रिकॉर्ड में मौजूद गड़बड़ियों को दूर करना शामिल होगा, ताकि यह पक्का हो सके कि वेटलैंड अतिक्रमण और अनियमित गतिविधियों से सुरक्षित है.

वेटलैंड का पहला सीमांकन 1935 में किया गया था और 1946 में इसे नोटिफाई किया गया था. सामाजिक और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अतिक्रमण और हालात की वजह से वेटलैंड 13 वर्ग किमी से घटकर लगभग 10 वर्ग किमी रह गया है. हालांकि, अधिकारी अतिक्रमण से इनकार करते हैं और दावा करते हैं कि इसकी सुरक्षा और बचाव के लिए कदम उठाए गए हैं.

रामसर वेबसाइट के अनुसार होकरसर, झेलम बेसिन से सटा एक प्राकृतिक बारहमासी वेटलैंड है. यह कश्मीर के बचे हुए रीडबेड और साइबेरिया, चीन, मध्य एशिया और उत्तरी यूरोप से आने वाले लार्ज इग्रेट, ग्रेट क्रेस्टेड ग्रीब, लिटिल कॉर्मोरेंट, कॉमन शेल्डक, टफ्टेड डक और लुप्तप्राय व्हाइट-आइड पोचार्ड जैसी 68 जलपक्षी प्रजातियों के लिए एकमात्र जगह है.

वेबसाइट इस वेटलैंड को खाने का एक जरूरी सोर्स, मछलियों के अंडे देने की जगह और नर्सरी के तौर पर बताती है, साथ ही यह कई तरह के पानी के पक्षियों को खाना और ब्रीडिंग की जगह भी देता है. इसकी खास दलदली वनस्पति में टाइफा, फ्रैगमाइट, एलियोकेरिस, ट्रापा और निम्फोइड प्रजातियां पाई जाती हैं, जो कम गहरे पानी से लेकर खुले पानी में रहने वाले पानी के पौधों तक में पाई जाती हैं.

इसमें कहा गया है कि संभावित खतरों में घरों के कंस्ट्रक्शन से अतिक्रमण, फैला हुआ कचरा और टूरिस्ट सुविधाओं को बढ़ाने की मांग शामिल है. कुछ साल पहले, जम्मू- कश्मीर सरकार ने प्रवासी पक्षियों और दूसरे जानवरों और पेड़-पौधों को जिंदा रखने के लिए वेटलैंड में पानी का लेवल बनाए रखने के लिए एक वॉटर इनलेट सिस्टम बनाया था लेकिन, एनवायरनमेंट पॉलिसी ग्रुप, जो एक सिविल सोसाइटी ग्रुप है, ने हाल ही में जम्मू- कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने धान की खेती के लिए वेटलैंड से पानी निकालने और वेटलैंड से जुड़ी दूसरी दिक्कतों के बारे में बात की.

ईपीजी के संयोजक फैज बख्शी ने कहा, ‘होकरसर वेटलैंड को जरूरी वॉटर लेवल को रेगुलेट करने के लिए इनलेट और आउटलेट गेट बनाने पर बहुत सारा पैसा खर्च होने के बावजूद गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. वेटलैंड को ठीक करने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे माइग्रेटरी पक्षियों को रखने की इसकी क्षमता पर असर पड़ सकता है. इससे जरूरी इकोलॉजिकल साइकिल में रुकावट आ सकती है. वेटलैंड में गैर-कानूनी तरीके से मिट्टी की खुदाई हो रही है, जिससे माइग्रेटरी पक्षियों के रहने की जगह को खतरा होगा. ग्रुप ने जम्मू-कश्मीर सरकार से जम्मू-कश्मीर में वेटलैंड के गलत मैनेजमेंट और खराब होने पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की थी.’

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