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Wednesday, September 16, 2026
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ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पीएम ने की पीएम मोदी की जमकर तारीफ

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दिल्ली। में आयोजित होने वाले वैश्विक मंच रायसीना डायलॉग को लेकर ऑस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी एबॉट ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की जमकर तारीफ की है। एबॉट ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह कार्यक्रम साल 2016 से हर साल मार्च में आयोजित किया जा रहा है और अब यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संवाद मंचों में शामिल हो चुका है। उनके मुताबिक, इस तरह का मंच तैयार करना भारत की एक शानदार सोच का परिणाम है, जहां दुनिया भर के नेता, विशेषज्ञ और नीति निर्माता वैश्विक मुद्दों पर खुलकर चर्चा करते हैं। एबॉट ने रायसीना डायलॉग की तुलना दुनिया के अन्य बड़े मंचों से भी की। उन्होंने कहा कि यह मंच स्विट्जरलैंड में होने वाले World Economic Forum और चीन के बोआओ फोरम जैसे आयोजनों से भी बेहतर है। उनका कहना था कि दावोस जैसे मंचों पर अक्सर अमीर और प्रभावशाली लोगों का ज्यादा दबदबा रहता है, जबकि रायसीना डायलॉग में विभिन्न विचारों और देशों को बराबरी से अपनी बात रखने का अवसर मिलता है। यहां चर्चा सिर्फ किसी सरकार की तारीफ करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और कूटनीति जैसे अहम मुद्दों पर खुली बहस होती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए एबॉट ने कहा कि मोदी दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनमें दूसरों को सुनने की खास क्षमता है। उन्होंने बताया कि रायसीना डायलॉग के दौरान प्रधानमंत्री मोदी हर साल मुख्य अतिथि के भाषण को ध्यान से सुनने के लिए कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं, लेकिन खुद भाषण देने की बजाय दूसरे नेताओं को बोलने का मौका देते हैं। पिछले साल उन्होंने न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री Christopher Luxon को धैर्यपूर्वक सुना था, जबकि इस साल उन्होंने फिनलैंड के राष्ट्रपति Alexander Stubb के विचारों को ध्यान से सुना। एबॉट ने यह भी कहा कि शायद प्रधानमंत्री मोदी के जीवन में आध्यात्मिक अनुभवों का असर है। एक समय मोदी ने एक हिंदू संन्यासी की तरह जीवन बिताया था और शायद इसी कारण सत्ता में इतने लंबे समय तक रहने के बावजूद उनमें अहंकार नहीं आया। एक दशक से ज्यादा समय से देश का नेतृत्व करने के बाद भी मोदी का व्यवहार विनम्र और संतुलित दिखाई देता है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है। भारत में तानाशाही के आरोपों को लेकर भी एबॉट ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन आरोपों को पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताया। एबॉट ने कहा कि जिस देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव होते हों, जहां मीडिया और न्यायपालिका अपनी भूमिका स्वतंत्र रूप से निभाते हों, वहां तानाशाही की बात करना सही नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रायसीना डायलॉग में कई ऐसे देशों के प्रतिनिधि भी खुलकर अपनी बात रखते हैं जिनके आपसी संबंध अच्छे नहीं हैं। इस मंच पर इजरायल और ईरान जैसे देशों के प्रतिनिधियों को भी अपनी राय रखने का पूरा अवसर मिला। पूर्व ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने बताया कि वह खुद साल 2022 से लगातार इस कार्यक्रम में व्यक्तिगत रूप से शामिल हो रहे हैं और उन्होंने देखा है कि यहां अलग-अलग विचारधाराओं और देशों के लोग बिना किसी दबाव के अपनी बात रखते हैं। उनके अनुसार, इतना खुला और स्वतंत्र मंच किसी भी तानाशाही व्यवस्था वाले देश में संभव नहीं हो सकता। यही वजह है कि रायसीना डायलॉग आज वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक ताकत और लोकतांत्रिक मूल्यों का महत्वपूर्ण प्रतीक बन चुका है।

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News Desk

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