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Sunday, September 6, 2026
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श्री चैतन्य महाप्रभु ने अज्ञानता में डूबे लोगों को आध्यात्मिक रास्ता दिखाया

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कोलकाता। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल के नादिया जिले स्थित मायापुर में इंटरनेशनल सोसायटी फॉर कृष्णा कॉन्शसनेस (इस्कॉन) मंदिर में एक धार्मिक कार्यक्रम में अपनी आधिकारिक हैसियत से नहीं, बल्कि श्री चैतन्य महाप्रभु के अनुयायी के तौर पर शामिल हुए। 19वीं सदी के वैष्णव पुनरुत्थानवादी और गौड़ीय मठ के संस्थापक भक्तिसिद्धांत सरस्वती के 152वें पवित्र अवतरण दिवस के मौके पर इकट्ठा हुए लोगों को संबोधित करते हुए अमित शाह ने अपने छोटे से भाषण में समारोह में शामिल होने वाले भक्तों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से शुभकामनाएं भी दीं और इस मौके से जुड़े भक्ति के संदेश को शेयर किया।
उन्होंने कहा, मैंने सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की। मैंने उन्हें बताया कि आज मैं मायापुर में भक्तिसिद्धांत सरस्वती की 152वीं जयंती में शामिल होने जा रहा हूं। उन्होंने आप सभी का दिल से अभिवादन किया और आप सभी को ‘हरे कृष्ण’ का संदेश दिया। थोड़ी देर पहले मुझे भारत के गृह मंत्री के तौर पर संबोधित किया गया। मैं यहां भारत के गृह मंत्री के तौर पर नहीं आया हूं। मैं आज यहां चैतन्य महाप्रभु के एक विनम्र भक्त के तौर पर आया हूं।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा शुरू किए गए भक्ति आंदोलन को भक्तिसिद्धांत सरस्वती ने मजबूत और संस्थागत बनाया, जिन्होंने आधुनिक समय में वैष्णव दर्शन को फैलाने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, उस भक्ति आंदोलन को न सिर्फ आगे बढ़ाया गया, बल्कि युवाओं को दुनिया की भलाई में शामिल होने के लिए प्रेरित करने के एक आधुनिक माध्यम में भी बदला गया।
उन्होंने आगे कहा कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने अज्ञानता में डूबे लोगों को आध्यात्मिक रास्ता दिखाया और पूरे भारत और उससे आगे भक्ति का संदेश फैलाने में मदद की।
गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, इंसान में अच्छे और बुरे दोनों पहलू होते हैं, लेकिन जब कोई इंसान अपना वजूद खोकर भगवान कृष्ण में एक हो जाता है तो सब कुछ अच्छा हो जाता है। इसी रास्ते पर चलते हुए श्री चैतन्य महाप्रभु ने कीर्तन, डांस, भक्ति संगीत और गीता के संदेश के जरिए भारत के पूर्वी और उत्तर-पूर्वी हिस्सों में कई लोगों की जिंदगी में भक्ति का दीया जलाया।

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News Desk

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