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Tuesday, September 8, 2026
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 पीएम मोदी बोलते हैं……….तब दुनिया भर के नेता ध्यान से सुनते, ये भारत की बढ़ती हुई ताकत 

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पुणे। आरएसएस की स्थापना के सौ साल पूरे होने के मौके पर में पुणे में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बोलते हैं, तब विश्व के नेता ध्यान से सुनते हैं। इसका मुख्य कारण भारत की ताकत सामने आ रही है और देश को उसका उचित स्थान मिल रहा है। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री मोदी को वैश्विक स्तर पर इतने ध्यान से इसलिए सुना जा रहा है, क्योंकि भारत की शक्ति अब उन जगहों पर दिखने लगी है, जहां भारत को उचित रूप से प्रकट होना चाहिए, और इसने दुनिया का ध्यान आकर्षित किया है। आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर, उन्होंने जोर दिया कि किसी को केवल जश्न मनाने के बारे में नहीं सोचना चाहिए, बल्कि दिए गए कार्य को निर्धारित समय के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ ने चुनौतियों और तूफानों से जूझते हुए 100 साल पूरे किए हैं, लेकिन अब आत्मचिंतन का समय है कि पूरे समाज को एकजुट करने के काम में इतना समय क्यों लगा।
भारत का महत्व और वैश्विक शांति: आमतौर पर यह माना जाता है कि जब भारत आगे बढ़ता है, तो वैश्विक समस्याएं हल हो जाती हैं, संघर्ष कम हो जाते हैं और शांति कायम होती है। उन्होंने कहा कि यह बात इतिहास में दर्ज है और हमें इसे फिर से साकार करना होगा, क्योंकि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां भारत से इसकी मांग करती हैं। उन्होंने आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के बलिदानों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ के स्वयंसेवकों ने कई बाधाओं और चुनौतियों के बीच अपना मिशन शुरू किया था, और उन्होंने सफलता के बीज बोए और अपना जीवन समर्पित करके परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त किया। भागवत ने कहा कि जब संघ संवाद और सामूहिक कार्य की ताकत की बात करता है, तो इसका तात्पर्य पूरे समाज से होता है। उन्होंने जोर दिया कि संघ की नींव विविधता में एकता में निहित है, और सभी को साथ मिलकर चलना होगा, जिसके लिए धर्म आवश्यक है। उनका मानना है कि भारत में सभी दर्शन एक ही स्रोत से उत्पन्न हुए हैं, और चूंकि सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है, इसलिए हमें सद्भाव के साथ आगे बढ़ना होगा।

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News Desk

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