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Tuesday, September 8, 2026
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‘आधी रात में याचिका लिखी थी क्या?’—PIL पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

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नई दिल्ली|सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक वकील की तरफ से दायर किए गए पांच याचिकाओं को ‘असंगत और बेवजह’ बताते हुए पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (पीआईएल) खारिज कर दिए। इनमें से एक याचिका में मांग की गई थी कि यह जांच की जाए कि प्याज और लहसुन में ‘तामसिक’ यानी नकारात्मक ऊर्जा होती है या नहीं। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील सचिन गुप्ता को फटकार लगाते हुए कहा कि क्या आप आधी रात को ये सारी याचिकाएं तैयार करते हो? सीजेआई ने इन याचिकाओं को अस्पष्ट, असंगत और बिना आधार वाली बताया।

इस पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची भी शामिल थे। उन्होंने वकील को कई पीआईएल दायर करने पर फटकार लगाई। बता दें कि प्याज और लहसुन वाली याचिका में यह भी कहा गया था कि जैन धर्म के लोग इसे ‘तामसिक’ भोजन मानते हैं और इन्हें नहीं खाते। इसपर सीजेआई ने पूछा कि आप जैन समुदाय की भावनाओं को क्यों आहत करना चाहते हैं?

वकील ने क्या दलील दी? सीजेआई की सख्त चेतावनी

सीजेआई के फटकार के बाद वकील ने जवाब दिया कि यह आम समस्या है और गुजरात में किसी ने खाने में प्याज इस्तेमाल करने पर तलाक भी लिया। इस पर सीजेआई ने सख्त नाराजगी जताते हुए कहा कि अगर अगली बार आप ऐसी बेवजह याचिका लाएंगे, तो आप देखेंगे कि हम क्या करेंगे।

अन्य याचिका भी की खारिज

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने गुप्ता की तरफ से दायर चार अन्य पीआईएल भी खारिज कर दीं। इनमें से एक में शराब और तंबाकू उत्पादों में हानिकारक सामग्री को नियंत्रित करने की मांग थी, दूसरी में संपत्तियों के पंजीकरण को अनिवार्य करने की बात थी, और तीसरी में शास्त्रीय भाषाओं के घोषणा के लिए दिशा-निर्देश मांगने की याचिका थी। पीठ ने कहा कि इन याचिकाओं में मांगे अस्पष्ट थीं और इनके लिए कोई कानूनी आधार नहीं था। सीजेआई ने कहा कि अगर गुप्ता वकील नहीं होते, तो उन्होंने उन पर उदाहरणात्मक जुर्माना लगाया होता।

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