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Thursday, August 6, 2026
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PM मोदी ने मालदा रैली में की TMC सांसद के पिता की तारीफ, भाषण के दौरान दी श्रद्धांजलि

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कोलकाता। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने विभाजन के दौरान मालदा (Malda) को भारत (India) में शामिल कराने में भूमिका निभाने को लेकर अनुभवी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय (Shivendu Shekhar Rai) को अपने भाषण के दौरान श्रद्धांजलि दी। इसके बाद राय को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई। शिवेंदु के बेटे एवं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के राज्यसभा सदस्य सुखेन्दु शेखर राय (Sukhendu Shekhar Roy) ने संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

शिवेंदु शेखऱ के प्रयास से बचा मालदा
मोदी ने शनिवार को मालदा में एक जनसभा में अपने भाषण की शुरुआत शिवेंदु शेखर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए की। उन्होंने 1947 में शिवेंदु शेखर के योगदान को याद किया जब मुस्लिम लीग द्वारा जिले को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल करने की मांगों के बीच मालदा का भविष्य अनिश्चित बना हुआ था। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘मैं सर्वप्रथम मालदा के महान सपूत शिवेंदु शेखर राय को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं, जिनके प्रयासों से मालदा की पहचान बची रही।’’ उनके इस बयान से श्रोताओं में मौजूद कई लोग चकित हो गये।

इससे पूर्व दिन में, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई ने कार्यक्रम में पहले स्मृति चिन्ह के रूप में मोदी को शिवेंदु शेखर राय की एक फ्रेम की हुई तस्वीर भेंट की। यह तस्वीर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य और केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने प्रधानमंत्री को दी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया क्योंकि शिवेंदु शेखर राय के पुत्र तृणमूल सांसद हैं।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी थे शिवेंदु शेखर
स्वतंत्रता-पूर्व मालदा के एक प्रख्यात दीवानी वकील और हिंदू महासभा के नेता शिवेंदु शेखर राय, राजनीतिक विचारधाराओं से परे अपनी व्यापक लोकप्रियता के लिए जाने जाते थे। वह विश्वविद्यालय के दिनों से ही शिक्षाविद और महासभा नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी के घनिष्ठ सहयोगी थे और विभाजन वार्ता के दौरान उन्होंने पर्दे के पीछे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उनके बेटे सुखेन्दु शेखर राय का कहना है कि जब मालदा को पूर्वी पाकिस्तान में शामिल किए जाने की संभावना आसन्न प्रतीत हुई, तो उनके पिता ने पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के पिता, प्रख्यात बैरिस्टर एन सी चटर्जी से संपर्क करके इस कदम को चुनौती देने के प्रयास शुरू किए।

सुखेन्दु शेखर राय के अनुसार चूंकि एन सी चटर्जी दक्षिण बंगाल और कोलकाता को सुरक्षित रखने में व्यस्त थे, इसलिए शिवेंदु शेखर राय ने फिर श्यामा प्रसाद मुखर्जी से संपर्क किया, जिन्होंने उन्हें आगे की कार्रवाई के बारे में सलाह दी और उन्हें बंगाल सीमा आयोग के समक्ष मालदा का ऐतिहासिक, जनसांख्यिकीय और प्रशासनिक मामला व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत करने में सहयोग किया।

राज्यसभा सदस्य ने बताया कि बिधु शेखर शास्त्री और इतिहासकार सर जदुनाथ सरकार जैसे विद्वानों ने भी आयोग के सामने प्रस्तुत किये गये ज्ञापन तैयार करने में सहायता की।लप्रधानमंत्री की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुखेन्दु शेखर राय ने संयमित लेकिन भावुक स्वर में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, ‘‘यह इतिहास है और इसे नकारने की कोई गुंजाइश नहीं है।’’

उन्होंने कहा कि मालदा भारत में इसलिए बना हुआ है क्योंकि उनके पिता ने इसे भारत में बनाए रखने के आंदोलन का नेतृत्व किया था। उन्होंने कहा, ‘‘कोई राजनीतिक दल इतिहास को अपने हिसाब से ढालने या अस्वीकार करने की कोशिश कर सकता है, इससे मुझे कोई लेना-देना नहीं है। लेकिन एक ऐसे व्यक्ति के पुत्र के रूप में, जिन्होंने मालदा को भारत में बनाए रखने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई, अगर प्रधानमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, तो क्या मुझे दुखी होना चाहिए? बिल्कुल नहीं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘सिर्फ मैं ही नहीं, बल्कि मेरे भाई-बहन, रिश्तेदार और परिवार के सभी सदस्य गर्व महसूस करते हैं। सिर्फ इसलिए कि मैं तृणमूल कांग्रेस से जुड़ा हूं, क्या मुझे दुखी होना चाहिए? यह तो सरासर बेतुका होगा।’’ मोदी द्वारा भाजपा के मंच से तृणमूल सांसद के पिता का जिक्र करना राजनीतिक रूप से भले ही महत्वपूर्ण हो, लेकिन सुखेन्दु शेखर राय ने इसे समकालीन राजनीतिक संदेश के बजाय लंबे समय से प्रतीक्षित ऐतिहासिक मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना बेहतर समझा। उन्होंने कहा, ‘‘यह मालदा के विभाजन काल के इतिहास का एक ऐसा अध्याय है जिसे आज के राजनीतिक मतभेदों से परे याद रखा जाना चाहिए।’’

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