जयपुर एयरपोर्ट में महिला पैसेंजर पर कुत्ते ने किया हमला, लहु-लुहान हुआ पैर 

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जयपुर। जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पर रविवार दोपहर करीब 2:20 बजे एक महिला पैसेंजर पर कुत्ते ने हमला कर दिया। महिला के पैर से खून बहने लगा, लेकिन पास मौजूद लोगों और एयरपोर्ट प्रशासन की मदद से उसे तुरंत प्राथमिक उपचार के लिए पास के प्राइवेट हॉस्पिटल पहुंचाया गया। डॉक्टरों ने महिला का इलाज कर उसे छुट्टी दे दी, और फिलहाल उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
एयरपोर्ट प्रबंधन ने बताया कि महिला दिल्ली से जयपुर आई थी और अराइवल एरिया के गेट के पास बाहर निकल रही थी, तभी कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते का वैक्सीनेशन पहले ही हो चुका था, इसलिए किसी गंभीर संक्रमण का खतरा नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुत्ते ने अचानक महिला पर हमला किया। 
यह पहला मामला नहीं है जब जयपुर एयरपोर्ट पर कुत्तों ने पैसेंजर्स पर हमला किया। इससे पहले भी कई बार ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी के बाद उसी स्थान पर छोड़ना चाहिए। एयरपोर्ट प्रबंधन ने फेंसिंग का काम शुरू किया है और परिसर में मौजूद कुत्तों का टीकाकरण भी करवाया जा रहा है, लेकिन हाई-सिक्योरिटी एरिया में कुत्तों की मौजूदगी सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती रही है। 

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राहुल गांधी को संसद के कामकाज में कोई रुचि नहीं……..वे काम को बाधित करते 

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नई दिल्ली। मोदी सरकार में संसदीय कार्य मंत्री किरन रीजिजू ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को संसद के कामकाज में कोई रुचि नहीं है, वे केवल सदन के काम को बाधित करते हैं। केंद्रीय मंत्री रीजिजू ने कहा कि कुछ गैर सरकारी संगठनों ने राहुल गांधी को यह सिखाया है कि उनकी पार्टी के “अच्छे दिन” आएंगे, इसलिए वह केवल मुद्दे बनाने में ही व्यस्त हैं। केंद्रीय मंत्री रीजीजू ने कहा, राहुल गांधी को सदन की कार्यवाही में कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्हें सिर्फ मुद्दे बनाने में दिलचस्पी है। उनके समय की संभावना नहीं है, और अगले चुनाव में उनकी सीटें और कम होगी। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन ने विपक्ष से स्थिति को शांत करने के कई प्रयास किए, लेकिन कांग्रेस को मनाने के लिए अब कोई अतिरिक्त कदम नहीं उठाया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस हताश है, क्योंकि पार्टी लगातार चुनाव हार रही है और वह स्थिति बदलने के लिए बेताब है। उन्होंने दावा किया कि छोटी पार्टियां राहुल गांधी से नाखुश हैं और कुछ ने अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव पर हस्ताक्षर तक नहीं किए है। रीजिजू ने कहा, पूरा विपक्ष कांग्रेस के साथ नहीं है। छोटी पार्टियां अपने समय का सदुपयोग नहीं कर पा रही हैं और वे चाहते हैं कि सदन का कामकाज जारी रहे।
लोकसभा में बजट सत्र के पहले भाग में लगातार व्यवधान और स्थगन की स्थिति रही। दरअसल, राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित लेख का हवाला देना चाहते थे, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ने उन्हें इसका उल्लेख करने से रोक दिया। इसके बाद सदन में अनुशासनहीनता के लिए विपक्ष के आठ सदस्यों को शेष सत्र के लिए निलंबित किया गया। 
इसके बाद विपक्ष ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी पेश कर पक्षपातपूर्ण आचरण का आरोप लगाया। लोकसभा अध्यक्ष ने इसके कुछ घंटों बाद सदन की अध्यक्षता से स्वयं को अलग कर लिया। संसद का बजट सत्र 28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के संबोधन के साथ शुरू हुआ था, और बजट 2026 1 फरवरी को पेश किया गया। सत्र का दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक चलेगा।

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कोयंबटूर में बोले राजनाथ सिंह

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कोयंबटूर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, कि भारतीय सेना भगवान शिव से प्रेरणा लेकर कार्य करती है। जैसे भगवान शिव सृजन और संहार दोनों के प्रतीक हैं, वैसे ही भारतीय सशस्त्र बल मानवीय सहायता और कठोर कार्रवाई—दोनों में समान रूप से सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि संकट के समय सेना शिव की करुणा का रूप धारण कर लोगों की मदद करती है और आवश्यकता पड़ने पर रुद्र की गति से “ऑपरेशन सिंदूर” जैसी निर्णायक कार्रवाई भी करती है।

रक्षा मंत्री रविवार को ईशा फाउंडेशन द्वारा आयोजित महाशिवरात्रि कार्यक्रम में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव के साथ कुछ विशिष्ट व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भगवान शिव अनादि, अनंत और सत्य के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा जो सत्य है, वही शिव है। वेल्लंगिरी पहाड़ियों को शिव की पवित्र गुफाओं से जोड़ते हुए उन्होंने इसे ‘दक्षिण का कैलाश’ बताया और कहा कि यह भूमि आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण है। 

रक्षा मंत्री ने भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 और आदित्य-L1 जैसे अंतरिक्ष मिशन केवल तकनीकी उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि वे भारत की प्राचीन वैज्ञानिक परंपरा की आधुनिक अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत अंतरिक्ष में उपग्रह भेज रहा है, उसी तरह वह अपनी वैज्ञानिक संस्कृति को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहा है। राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सुरक्षा केवल हथियारों, तकनीक और सैनिकों की शारीरिक शक्ति तक सीमित नहीं है।

“सच्ची सुरक्षा एक मजबूत राष्ट्रीय सोच से आती है। उन्होंने कहा, डर पर आधारित समाज लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने काशी और तमिलनाडु के ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि एक ओर काशी दुनिया के सबसे प्राचीन शहरों में गिना जाता है, वहीं तमिल संस्कृति भी विश्व की सबसे प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। भाषा, संस्कृति और खानपान की समृद्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की पवित्र धरती पर आना उनके लिए आशीर्वाद जैसा है। अंत में उन्होंने कहा, मैं यहां एक अतिथि के रूप में नहीं, बल्कि एक साधक और आध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में आया हूं।  

मणिशंकर ने किया दावा, कहा- विजयन ही रहेंगे मुख्यमंत्री, इससे केरल में आ गया सियासी भूचाल

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तिरुआनंतपुरम। केरल विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। एक ओर जहां कांग्रेस नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) सत्ता में वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है, वहीं उनकी अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता ने वामपंथी मुख्यमंत्री पिनराई विजयन के पद पर बने रहने का भरोसा जताकर सबको चौंका दिया है। रविवार को एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अय्यर ने न केवल विजयन की कार्यप्रणाली की सराहना की, बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री राजीव गांधी के सपनों को पूरा करने वाला जननायक भी करार दिया।
यह वाकया विजन 2031: विकास और लोकतंत्र कार्यक्रम के दौरान हुआ, जिसका उद्घाटन स्वयं मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने किया था। इस मंच से बोलते हुए मणिशंकर अय्यर ने महात्मा गांधी के भारत संबंधी दृष्टिकोण को याद किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता ने एक ऐसे देश की परिकल्पना की थी जहां गरीब से गरीब व्यक्ति भी राष्ट्र निर्माण में अपनी प्रभावी भूमिका महसूस कर सके। अय्यर ने तर्क दिया कि यह विडंबना ही है कि इस लक्ष्य की दिशा में सबसे सराहनीय प्रगति करने वाला राज्य केरल है, जहां वर्तमान में मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा वाली पार्टी का शासन है। उन्होंने केरल को पंचायती राज के मामले में देश का अग्रणी राज्य बताया और कहा कि केरल ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की अपेक्षाओं को किसी भी अन्य राज्य की तुलना में कहीं अधिक बेहतर ढंग से धरातल पर उतारा है।

अपने संबोधन के दौरान अय्यर ने व्यक्तिगत टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें इस बात का पूरा विश्वास है कि पिनराई विजयन मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीधा निवेदन करते हुए कहा कि जो जिम्मेदारी कांग्रेस ने छोड़ी है, उसे अब विजयन संभालें और केरल को समृद्ध बनाने की दिशा में काम जारी रखें। उन्होंने केरल के पंचायती राज कानून में और सुधार की वकालत करते हुए थॉमस आइजैक की अंतर्दृष्टि और अपनी अध्यक्षता वाली पांच खंडों की रिपोर्ट के आधार पर संशोधन करने की अपील भी की। कार्यक्रम में अपने ही दल के सहयोगियों की अनुपस्थिति पर उन्होंने अफसोस जताते हुए इसे एक राष्ट्रीय अवसर बताया।

मणिशंकर अय्यर के इस रुख ने कांग्रेस आलाकमान को असहज कर दिया है। जैसे ही यह बयान सुर्खियों में आया, कांग्रेस ने तुरंत इससे किनारा कर लिया। पार्टी ने स्पष्ट रूप से कहा कि अय्यर पिछले कुछ वर्षों से सक्रिय रूप से पार्टी के सांगठनिक निर्णयों से नहीं जुड़े हैं और यह उनकी पूरी तरह से व्यक्तिगत राय है। कांग्रेस ने दावा किया कि केरल की जनता मौजूदा शासन से ऊब चुकी है और वह अधिक जवाबदेह शासन के लिए यूडीएफ को फिर से सत्ता में लाएगी। पार्टी नेताओं का तर्क है कि अय्यर का बयान चुनावी माहौल में कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित करने वाला है, जिसका सच्चाई से कोई लेना-देना नहीं है।केरल की राजनीति में अमूमन हर पांच साल में सत्ता परिवर्तन का रिवाज रहा है, लेकिन अय्यर की इस भविष्यवाणी ने एलडीएफ (वाम लोकतांत्रिक मोर्चा) को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपने इस वरिष्ठ नेता के बयानों से होने वाले नुकसान की भरपाई कर पाती है या फिर विजयन के नेतृत्व वाला वाम मोर्चा इस प्रशंसा को चुनावी रण में ढाल बनाकर इस्तेमाल करेगा।

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3.25 लाख करोड़ में भारत करेगा फ्रांस से 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील

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नई दिल्ली। भारत 114 राफेल लड़ाकू विमानों का फ्रांस के साथ सौदा 3.25 लाख करोड़ रुपए में करने जा रहा है। 17 फरवरी से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रॉ की तीन दिन की भारत यात्रा शुरू हो रही है। इस दौरान यह डील फाइनल होगी। इन 114 में से 24 विमान सुपर राफेल होंगे, जिन्हें फ्रांस की​ ​विमान निर्माता कंपनी दसॉ एविएशन एफ-5 नाम से बना रही है। अभी भारतीय वायुसेना के पास एफ-3 राफेल हैं, जो 4.5 जेनरेशन के लड़ाकू ​विमान हैं। इनमें स्टेल्थ क्षमता और परमाणु हथियार दागने की शक्ति है, लेकिन नए ​विमान एफ-4 पीढ़ी के हैं। इस​लिए इन्हें 5वीं जेनरेशन का कहा जा रहा है। 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक यूरोपीय मानकों के हिसाब से एफ-5 राफेल असल में छठी पीढ़ी के जेट होंगे। फ्रांस के बाद इस तरह के सबसे बेहतर ​विमान भारतीय वायुसेना के पास ही होंगे। एफ-5 ​अभी विकास के चरण में हैं। एफ-4 की आपूर्ति 2028-29 से शुरू होगी। 2030 के बाद जो भी ​विमान मिलेंगे, वो एफ-5 श्रेणी के सुपर राफेल होंगे। भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी ने बताया कि सुपर राफेल अमेरिका के एफ-35 और रूस के सुखोई-57 से अगली पीढ़ी का फाइटर होगा। इस सौदे के तहत 88 राफेल ​सिंगल सीटर और 26 डबल सीटर होंगे, जिन्हें प्रशिक्षण और लड़ाकू दोनों भूमिका में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक दसॉ एविएशन से 18 विमान उड़ने के लिए तैयार स्थिति में मिलेंगे। बाकी 96 भारत में बनेंगे। इनके 60फीसदी कलपुर्जे स्वदेशी होंगे। भारत का यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजा जाएगा। प्रस्ताव को जनवरी में रक्षा खरीद बोर्ड से मंजूरी दे दी थी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक नए राफेल विमानों की खरीद से एयर डिफेंस और बॉर्डर एरिया में तैनाती की क्षमता मजबूत होगी। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली कमेटी ने नेवी के लिए 6 अमेरिकी बोइंग पी8-आई सर्विलांस एयरक्राफ्ट, कॉम्बैट मिसाइलों और एयर-शिप बेस्ड हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट्स के प्रपोजल को भी मंजूरी दी है। इन सभी सौदों की कुल कीमत 3.60 लाख करोड़ रुपए है।

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आखिर राजपाल यादव को जमानत मिल ही गई, जानिए कितने करोड़ जमा करने पड़े

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Rajpal Yadav gets bail: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को आखिरकार जमानत मिल ही गई है. 8 दिन बाद राजपाल यादव तिहाड़ जेल से रिहा हो होंगे. अंतरिम जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के कहने पर राजपाल यादव के वकील ने करीब डेढ़ करोड़ जमा किए हैं. ये पैसे डिमांड ड्राफ्ट के जरिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड को जमा किए गए हैं.

भतीजी की शादी अटेंड करने के लिए दी थी अर्जी

अभिनेता ने अपनी भतीजी की शादी अटेंड करने के लिए हाई कोर्ट में अर्जी दी थी. राजपाल यादव ने बताया था कि 19 फरवरी को उनकी भतीजी की शादी थी और वे भतीजी की शादी में शामिल होना चाहते हैं. अभिनेता की जमानत याचिका पर कोर्ट ने कहा था कि अगर आज यानी 16 फरवरी तक डेढ़ करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा कर देते हैं, तो जमानत मिल जाएगी. अगर 16 फरवरी को 3 बजे तक पैसे नहीं जमा हुए तो मामले में फैसला 17 फरवरी को सुनाया जाएगा.

3 बजे सुनवाई शुरू होते ही मिल गई जमानत

16 फरवरी को हाई कोर्ट में दोपहर 2 बजे सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई शुरू होते ही राजपाल की तरफ से उनके वकील कोर्ट में पेश हुए. इस दौरान वकील ने कहा कि वे बिना शर्त डेढ़ करोड़ का डिमांड ड्राफ्ट जमा करने के लिए तैयार हैं. इसके बाद जब कोर्ट दर्ज किया कि कुल डेढ़ करोड़ का ड्राफ्ट जमा किया जा चुका है. इसके बाद दोपहर 3 बजे दोबारा सुनवाई शुरू होते ही अभिनेता राजपाल यादव को जमानत दे दी गई.

12 फरवरी को हुई थी जमानत को लेकर सुनवाई

इसके पहले एक्टर राजपाल यादव की जमानत याचिका को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में 12 फरवरी को सुनवाई हुई थी. इस दौरान तमाम दलीलों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने एक्टर को फटकार लगाई थी. कोर्ट ने कहा था कि आपने पहले ही पैसे लौटाने में इतनी देर लगा दी है. धनराशि वापस नहीं करने के कारण ही आपको सरेंडर करना पड़ा है. इसलिए अब इस पर बहस क्यों हो रही है. जिसके बाद कोर्ट ने सोमवार यानी 16 फरवरी को सुनवाई की अगली तारीख दी थी.

मॉं सरस्वती के भारत में हैं पांच प्राचीन और भव्य मंदिर, क्या कभी आप भी गए हैं यहां  

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नई दिल्ली। बसंत पंचमी ही नहीं अनेक शुभ अवसरों पर लोग अपने घरों और मंदिरों में मां सरस्वती की पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसे में आपके लिए यह जानना बेहद जरुरी हो जाता है कि भारत में मां सरस्वती के कुछ प्राचीन और भव्य मंदिर भी हैं, जहां आप साल में कभी भी दर्शन कर सकते हैं। ऐसे ही प्रमुख मंदिरों में राजस्थान के पुष्कर में स्थित है सावित्री देवी मंदिर। इसके अलावा सरस्वती मंदिर, राजस्थान (शारदा पीठ), माता सरस्वती मंदिर, उत्तराखंड, कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु और कर्नाटक का श्री शारदाम्बा मंदिर प्रमुख हैं।  

माता सरस्वती मंदिर, उत्तराखंड
उत्तराखंड के बद्रीनाथ से केवल 3 किलोमीटर दूर, माणा गांव के पास मौजूद यह मंदिर वेदों और शास्त्रों में विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यता है कि यह स्थान देवी सरस्वती का जन्मस्थान है। यहां सरस्वती नदी एक धारा के रूप में प्रकट होती है, इस कलकल धारा कहा जाता है। बताया जाता हैं कि यह धारा एक मुख के समान दिखाई देती है, जो देवी के दिव्य मूल का प्रतीक है। किंवदंतियों के अनुसार, इसी स्थान पर महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की थी और पांडवों ने अपनी स्वर्ग यात्रा के दौरान यहां का दौरा किया था। यहां पास में ही भीम शिला नामक एक अनोखी चट्टान भी मौजूद है।

सरस्वती मंदिर, राजस्थान (शारदा पीठ)
सफेद संगमरमर से बना शानदार मंदिर 1959 में बनाया गया था। यह 20वीं सदी की वास्तुकला और इंडो-आर्यन नागर शैली का एक बेहतरीन उदाहरण है। मकराना मार्बल से बना यह मंदिर 70 खंभों पर टिका है और इसका क्षेत्रफल लगभग 25,000 वर्ग फीट है। इस मंदिर का शिखर 110 फीट ऊंचा है, इस पर सोने की परत चढ़े तांबे के कलश लगे हैं। इसकी बनावट कुछ ऐसी है कि यह बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बीटस) के क्लॉक टॉवर की सीध में है, जहां ज्ञान की देवी और जी.डी. बिड़ला की प्रतिमा एक दूसरे के आमने-सामने दिखाती हैं।

सावित्री देवी मंदिर, पुष्कर (राजस्थान)
राजस्थान के अजमेर जिले के पुष्कर में रत्नागिरी पहाड़ी की चोटी पर मौजूद सावित्री देवी मंदिर देश के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। करीब 750 फीट की ऊंचाई पर बना यह मंदिर भगवान ब्रह्मा की पत्नियों सावित्री और गायत्री को समर्पित है। इस मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब 970 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं। यहां से पुष्कर झील का मनमोहक दृश्य दिखाता है। इस मंदिर के अंदर तीन मूर्तियां विराजमान हैं। 

कूथनूर महा सरस्वती मंदिर, तमिलनाडु
तमिलनाडु का कूथनूर मंदिर, इस पहले अंबलपुरी के नाम से जाना जाता था, मां सरस्वती को समर्पित एक अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। लोक कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा और सरस्वती के बीच विवाद के कारण उन्हें पृथ्वी पर भाई-बहन के रूप में जन्म लेना पड़ा था। बाद में भगवान शिव ने सरस्वती को गंगा नदी में मिला दिया, जो अब यहां अरसलार नदी के रूप में बहती है। राजा राज चोल ने यह भूमि कवि ओट्टक्कूथन को दान में दी थी, जिसके बाद इस गांव का नाम कूथनूर पड़ा। यहां देवी दुर्गा को गांव की रक्षक देवी के रूप में पूजा जाता है।

श्री शारदाम्बा मंदिर, कर्नाटक
दक्षिण के राज्य कर्नाटक के शृंगेरी में स्थित प्राचीन मंदिर की स्थापना 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य जी ने की थी। शुरुआत में यहां चंदन की लकड़ी से बनी शारदाम्बा (सरस्वती) की एक खड़ी प्रतिमा थी। बाद में, 14वीं शताब्दी के दौरान विजयनगर के शासकों और 12वें जगद्गुरु श्री विद्यारण्य ने लकड़ी की मूर्ति की जगह सोने की बैठी हुई प्रतिमा स्थापित की। यह मंदिर दक्षिण भारत में विद्या की देवी का एक प्रमुख केंद्र माना जाता है।

क्या फिर साथ आएंगे ‘बुआ-बबुआ’?

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर संभावित सामाजिक समीकरणों की चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव ने हालिया सार्वजनिक कार्यक्रम में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच रिश्तों के “गहरे होने” के संकेत देकर सियासी हलचल बढ़ा दी है। बसपा से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता के सपा में शामिल होने और मायावती पर नरम रुख अपनाने को राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अखिलेश यादव का ‘पीडीए’ पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फॉर्मूला अब केवल चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि दीर्घकालिक सामाजिक समीकरण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह प्रयास बसपा के पारंपरिक दलित वोट बैंक में विश्वास पैदा करने और साझा सामाजिक एजेंडा गढ़ने की कोशिश है। सपा नेतृत्व अब समावेशी छवि के साथ खुद को व्यापक सामाजिक गठबंधन के केंद्र में स्थापित करना चाहता है।

सपा-बसपा संबंधों का इतिहास उतार-चढ़ाव भरा रहा है। 1993 में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम के गठबंधन ने सत्ता समीकरण बदल दिए थे, लेकिन 1995 की घटनाओं ने दोनों दलों के बीच गहरी दूरी पैदा कर दी। 2019 में पुनः साथ आने के बावजूद गठबंधन टिक नहीं सका। इसलिए मौजूदा संकेतों को लेकर राजनीतिक वर्ग में उत्सुकता के साथ सावधानी भी दिखाई दे रही है।

हाल के चुनावी अनुभवों ने सपा नेतृत्व को दलित प्रतिनिधित्व के महत्व का एहसास कराया है। पार्टी अब वैचारिक समन्वय, प्रतीकात्मक सम्मान और संगठनात्मक साझेदारी के माध्यम से भरोसा मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है। यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो राज्य की सामाजिक संरचना आधारित राजनीति का नया मॉडल सामने आ सकता है। इसी बीच योगी आदित्यनाथ सरकार पर विपक्ष के हमले भी तेज हुए हैं। परंपरा, प्रतिनिधित्व और सामाजिक सम्मान जैसे मुद्दों पर राजनीतिक बयानबाज़ी ने माहौल को और गर्म कर दिया है।

फिलहाल औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन बदले हुए सुर, नए सामाजिक समीकरण और साझा राजनीतिक संदेश इस संभावना को जीवित रखते हैं कि 2027 के चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा पुनर्संयोजन देखने को मिल सकता है। यदि संवाद आगे बढ़ता है, तो राज्य की चुनावी बिसात पर समीकरण निर्णायक रूप से बदल सकते हैं।

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केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी के परिवार की विदेशी संपत्ति पर फिर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली । केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के परिवार की स्विट्ज़रलैंड में स्थित आवासीय संपत्ति एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। यह संपत्ति उनकी पत्नी और पूर्व राजनयिक लक्ष्मी एम. पुरी के नाम पर दर्ज है, जिसे वर्ष 2006 में खरीदा गया था। यह जानकारी न केवल सार्वजनिक दस्तावेजों में उपलब्ध है, बल्कि राज्यसभा नामांकन के दौरान दाखिल किए गए उनके शपथपत्र में भी दर्ज की गई है। शपथपत्र में इस फ्लैट को परिवार की संपत्ति बताते हुए खरीद वर्ष 2006 स्पष्ट उल्लेखित है, जिससे यह साफ होता है कि इसकी जानकारी पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में मौजूद रही है।
इस संपत्ति को लेकर समय-समय पर राजनीतिक आरोप सामने आते रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्टों और विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए कि क्या यह खरीद आय के अनुरूप थी और इसके लिए धन का स्रोत क्या था। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मी पुरी और उनकी कानूनी टीम ने स्पष्ट किया कि संपत्ति संयुक्त राष्ट्र में उनके कार्यकाल के दौरान प्राप्त कर-मुक्त वेतन, बैंक ऋण और पारिवारिक संसाधनों से खरीदी गई थी।
ताजा विवाद तब उभरा जब कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि यह संपत्ति कुख्यात अमेरिकी अपराधी जेफ़्री एपस्टीन के बंगले से लगभग दस मिनट की दूरी पर स्थित है। हालांकि इसका कोई प्रत्यक्ष संबंध संपत्ति खरीद से नहीं है, लेकिन राजनीतिक बयानबाजी में इस दूरी को लेकर भी प्रश्न उठाए जा रहे हैं। विपक्षी दल कांग्रेस का दावा है, पुरी परिवार एपस्टीन के संपर्क लंबे समय से है। उन्होंने कुछ मुलाकातों का उल्लेख किया है। अब आरोप-प्रत्यारोपों के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है, जहां पारदर्शिता, सार्वजनिक जीवन की नैतिकता और विदेशी संपत्तियों के खुलासे जैसे प्रश्न केंद्र में हैं। 
एपस्टीन फाइल का मामला अब विश्वव्यापी हो गया है। कई देशों के 2 दर्जन से अधिक नेताओं और अधिकारियों को अपना पद छोड़ना पड़ा है। हरदीप पुरी के पास लंबे समय से पेट्रोलियम मंत्रालय है। भारत कच्चे तेल का सबसे बड़ा आयातक है। जिसके कारण पुरी की विदेश में सम्पत्ति और कालेधन को लेकर विपक्ष के निशाने पर हरदीप पुरी का परिवार है। आने वाले दिनों में पुरी के लिये कठनाईयां बढ़ सकती है। 

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रोहित शेट्टी के घर गोलीबारी मामले में बड़ा एक्शन, क्राइम ब्रांच ने राजस्थान से छह आरोपियों को किया गिरफ्तार

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फिल्म निर्माता-निर्देशक रोहित शेट्टी के जुहू स्थित घर पर हुई गोलीबारी मामले में अब बड़ा एक्शन हुआ है। इसमें छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के अनुसार, आरोपियों को राजस्थान में पकड़ा गया और उन्हें मुंबई लाया जा रहा है। इस मामले में अब तक कुल 11 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

आईएमपीए ने सीएम फडणवीस को पत्र लिखकर जताई मामले पर चिंता

मुंबई क्राइम ब्रांच इस मामले में लगातार सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर जांच कर रही है। हाल ही में इस घटना को लेकर इंडियन मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीए) ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखा था। इसमें राज्य सरकार से तुरंत जांच और उचित सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की थी। अपने पत्र में आईएमपीए ने घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कहा कि इससे फिल्म जगत में चिंता और आशंका पैदा हो गई है। पत्र में आगे रोहित शेट्टी के लिए कहा गया कि रोहित शेट्टी ने न केवल भारतीय सिनेमा में अमूल्य योगदान दिया है, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्होंने हमेशा देश का साथ दिया है। उन्होंने समाज के हित में सामाजिक कार्यों और राष्ट्रीय पहलों में अपना समर्थन दिया है। इसलिए, उनके आवास पर ऐसी घटना का होना बेहद चिंताजनक है।

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News Desk