एनसीपी विलय की चर्चाओं पर बोलीं सुप्रिया सुले- अधूरे सपने को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी 

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मुंबई। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम रहे अजित पवार के निधन के बाद पहली बार उनकी चचेरी बहन और एनसीपी-एसपी सांसद सुप्रिया सुले ने मीडिया से बातचीत की और पार्टी के भविष्य पर अपना नजरिया साझा किया। यहां सुप्रिया सुले ने कहा कि उनका मुख्य उद्देश्य अजित पवार के अधूरे सपने को पूरा करना है। 
यहां सुप्रिया सुले ने बताया कि अगर दादा आज हमारे बीच होते, तो एनसीपी के विलय की प्रक्रिया पूरी हो जाती। उन्होंने पुरानी बातें नहीं दोहराने और व्यक्तिगत मुद्दों को मीडिया में उजागर न करने की बात भी कही। सुप्रिया सुले से सीधे सवाल किया गया कि क्या वह एनडीए में जाएंगी। इस पर उन्होंने कहा, लोकतंत्र सभी को अपनी बात कहने का हक देता है। मेरी अपनी जानकारी है। उन्होंने इस सवाल को सीधे जवाब देने से बचते हुए इसे अपने और पार्टी की रणनीति से जोड़ा। 

पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय भूमिका
चर्चा है कि इस महीने के अंत तक सुनेत्रा पवार एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बन सकती हैं। साथ ही लंबे समय से अटकलें हैं कि सुप्रिया सुले केंद्र में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल सकती हैं।

विमान हादसे और सवाल
सुप्रिया सुले ने पहली बार अजित पवार के विमान क्रैश मामले पर भी बोला। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जांच की बात कही है और विधायक रोहित पवार की बेचैनी स्वाभाविक है। कई सवालों के जवाब अभी तक नहीं मिले हैं। रोहित पवार ने इस हादसे में साजिश की आशंका जताई और पहले प्रफुल्ल पटेल और फिर पार्टी के सलाहकार नरेश अरोड़ा को निशाने पर रखा है।
सुप्रिया सुले का बयान महाराष्ट्र में एनसीपी की भविष्य की राजनीतिक दिशा और पार्टी के विलय को लेकर अटकलों के बीच आया है। उनका फोकस फिलहाल अजित पवार के अधूरे सपने और पार्टी की एकजुटता पर केंद्रित है।

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सबरीमाला मंदिर मामले में पंकज भंडारी को राहत नहीं, गिरफ्तारी के खिलाफ याचिका खारिज

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तिरुवनंतपुरम। बहुचर्चित सबरीमाला सोना चोरी मामले में केरल हाईकोर्ट ने चेन्नई स्थित कंपनी स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ पंकज भंडारी की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट कहा कि गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत नहीं किए गए। न्यायमूर्ति ए बदरुद्दीन ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि गिरफ्तारी की प्रक्रिया में ऐसा कोई गंभीर उल्लंघन नहीं पाया गया, जिससे उसे अवैध ठहराया जा सके।

स्मार्ट क्रिएशंस के सीईओ पंकज भंडारी ने अपनी याचिका में दावा किया था कि उनकी गिरफ्तारी अवैध है, क्योंकि अनिवार्य प्रक्रियाओं (जैसे गिरफ्तारी की सूचना देना और कारण बताना) का पालन नहीं किया गया। हालांकि, अभियोजन पक्ष ने इन दावों को निराधार बताते हुए कहा कि सभी कानूनी औपचारिकताओं का पालन किया गया था। अदालत ने माना कि गिरफ्तारी अधिकारी द्वारा भंडारी को समय पर विशेष विजिलेंस अदालत, कोल्लम में पेश नहीं किया जा सका, लेकिन यह देरी चिकित्सकीय परीक्षण और तिरुवनंतपुरम से कोल्लम तक लगभग 71 किलोमीटर की दूरी तय करने के कारण हुई। न्यायालय ने कहा कि केवल इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता।

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 “हम जनप्रतिनिधि हैं, हमें जनता के बीच जाना……किसानों को लेकर भ्रम पैदा कर रहा विपक्ष 

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नई दिल्ली । केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री चिराग पासवान ने नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रेड डील, किसानों और देश की अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से केंद्र सरकार का पक्ष रखा। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री ने कहा कि अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर विपक्ष बेवजह भ्रम फैलने में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि कोई भी जिम्मेदार सरकार देश के सबसे बड़े और संवेदनशील वर्ग, यानी किसानों, के हितों से समझौता नहीं कर सकती। केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा, “हम भी जनप्रतिनिधि हैं और हमें भी जनता के बीच जाना है। किसानों के हितों की अनदेखी कर कोई भी राजनीतिक दल आगे नहीं बढ़ सकता।”
उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज कर कहा कि बीते एक दशक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने किसानों के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार की प्राथमिकता किसानों की आय बढ़ाना और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाना रही है। उनका कहना था कि विकसित भारत का सपना तभी साकार हो सकता है, जब देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत हो। देश में जारी आर्थिक सुधारों का उल्लेख कर केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि जनधन योजना, यूपीआई और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर जैसी पहलों ने देश की आर्थिक संरचना को नई मजबूती दी है। इन योजनाओं के माध्यम से सरकारी सहायता सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंची है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी और बिचौलियों की भूमिका घटी। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ा गया, जो लंबे समय तक हाशिए पर थे, परिणामस्वरूप टैक्सदाताओं की संख्या में भी वृद्धि हुई है। फूड प्रोसेसिंग सेक्टर को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए गेमचेंजर बताकर मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं की कमी के कारण किसानों को अक्सर अपनी उपज कम दामों पर बेचनी पड़ती है। यदि वैल्यू एडिशन और आधुनिक प्रोसेसिंग को बढ़ावा दिया जाए, तब फसलों की शेल्फ लाइफ बढ़ेगी, बेहतर कीमत मिलेगी और खाद्य अपव्यय में कमी आएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते है। 
केंद्रीय मंत्री पासवान ने कहा कि भारत के पास वैश्विक खाद्य सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता है और देश “ग्लोबल फूड बास्केट” बन सकता है। सरकार निवेश, बुनियादी ढांचे और नीतिगत सुधारों के माध्यम से कृषि और फूड प्रोसेसिंग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापार समझौतों और निवेश को बढ़ावा देते समय किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी।

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DGCA ने Air India पर लगाया 1 करोड़ का जुर्माना

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एयर इंडिया पर डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) ने 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। एविएशन रेगुलेटर ने गंभीर उल्लंघन को लेकर यह कार्रवाई की है। साथ ही सिक्योरिटी में चूक के लिए डीजीसीए ने एयर इंडिया के टॉप-लेवल मैनेजमेंट को जिम्मेदार भी ठहराया है। बता दें कि बिना वैलिड एयरवर्दीनेस परमिट के आठ बार एयरबस A320 प्लेन ऑपरेट करने पर 1 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। एविएशन रेगुलेटर ने इस उल्लंघन को ‘गंभीर’ बताया है।

डीजीसीए के ऑर्डर में क्या कहा गया?
जुर्माना लगाने वाले डीजीसीए के ऑर्डर में कहा गया है कि एयरबस A320 एयरक्राफ्ट को पिछले साल 24 और 25 नवंबर के बीच नई दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद को जोड़ने वाली फ्लाइट्स समेत कई सेक्टर्स पर बिना जरूरी एयरवर्दीनेस रिव्यू सर्टिफिकेट (एआरसी) के उड़ाया गया था।

एआरसी एक जरूरी सालाना सर्टिफिकेशन है जो एविएशन रेगुलेटर तब जारी करता है जब कोई एयरक्राफ्ट तय सेफ्टी और कम्प्लायंस चेक को सफलतापूर्वक पास कर लेता है। इसके बिना उड़ान भरना एविएशन सेफ्टी नॉर्म्स का गंभीर उल्लंघन है।

नियम तोड़ने पर एयर इंडिया ने क्या कहा?
सूत्रों के मुताबिक, डीजीसीए ने इस नियम तोड़ने पर सख्त रुख अपनाया और इसे एयरलाइन का लापरवाह रवैया बताया। उधर, डीजीसीए के ऑर्डर पर एयर इंडिया के एक स्पोक्सपर्सन ने जवाब दिया।

एक बयान में उन्होंने कहा- एयर इंडिया इस बात को मानता है कि उसे 2025 में रिपोर्ट की गई एक घटना के बारे में DGCA का ऑर्डर मिला था।

तब से सभी पहचानी गई कमियों को ठीक कर दिया गया है और अथॉरिटी के साथ शेयर किया गया है। एयर इंडिया ऑपरेशनल इंटेग्रिटी और सेफ्टी के सबसे ऊंचे स्टैंडर्ड बनाए रखने के अपने कमिटमेंट पर अडिग है।
 

आज से बदल गया PMO का पता, अब सेवा तीर्थ से चलेगी सरकार, पीएम मोदी ने किया उद्घाटन

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PM Modi Inauguration PMO: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को नए प्रधानमंत्री ऑफिस ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया है. आज से देश का पॉवर सेंटर बदल गया है. पीएम मोदी ने दोपहर करीब 1 बजकर 30 मिनट पर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया है. नया ऑफिस प्रशासनिक कार्यों को आधुनिक और भविष्य की जरूरतों को देखते हुए लगभग सभी सुविधाओं से लैस बनाया गया है.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नए कार्यालय में वित्त मंत्रालय, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय, कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, कानून और न्याय मंत्रालय, शिक्षा मंत्रालय, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय, रसायन और उर्वरक मंत्रालय तथा जनजातीय मामलों का मंत्रालय स्थित हैं. इसके अलावा इस परिसर में कई आधुनिक सुविधाएं दी गई हैं. डिजिटल रूप से जुड़े ऑफिस, जनता से संपर्क के लिए अलग और व्यवस्थित जोन और रिसेप्शन की भी व्यवस्था की गई है.

13 फरवरी 1931 में दिल्ली बनी थी राजधानी

‘सेवा तीर्थ’ में प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और कैबिनेट सचिवालय एक ही परिसर में आ गए हैं, जो पहले अलग-अलग स्थानों पर संचालित होते थे. बता दें, 13 फरवरी को ही नई दिल्ली 1931 में औपचारिक रूप से भारत की राजधानी बनी थी. आज से इसे 95 साल पूरे हो गए हैं. शायद यही वजह रही होगी कि ‘सेवा तीर्थ’ के उद्घाटन की डेट 13 फरवरी रखी गई.

1189 करोड़ की लागत से बना नया PMO

बता दें, साउथ ब्लॉक स्थित प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में पिछले 80 सालों से कैबिनेट मीटिंग होती आई है. लेकिन अब आज से साउथ ब्लॉक में कैबिनेट की मीटिंग नहीं होगी. नए कार्यालय सेवा तीर्थ-1 में प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ-2 में कैबिनेट सचिवालय और सेवा तीर्थ-3 में NSA एवं राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय बनाया गया है. जिसकी कुल लागत 1,189 करोड़ रुपए है. यह लगभग 2 लाख 26 हजार वर्ग फुट में फैला हुआ है.

पहले ही दिन मिली मंजूरी

पीएम मोदी नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में पहले ही दिन काम शुरू करते ही कई अहम फैसलों पर हस्ताक्षर किए हैं. जिसमें पीएम राहत योजना, लखपति दीदी का लक्ष्य दोगुना, किसानों के लिए बड़ा ऐलान और इसके अलावा स्टार्टअप इंडिया फंड 2.0 को मंजूरी दी है.

हथियार लहराते नजर आए विधायक, ‘धुरंधर’ पर बनी रील से बढ़ा राजनीतिक तापमान

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नई दिल्ली। कर्नाटक(Karnataka) के कलबुर्गी जिले(Kalaburagi district) में एक पारिवारिक समारोह(family function) के दौरान कांग्रेस विधायक मतीन पटेल (Congress MLA Matin Patel )का कथित तौर पर हथियार लेकर डांस करने का वीडियो सामने आने के बाद सियासी और सामाजिक हलकों में हंगामा मच गया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही इस रील ने न सिर्फ विधायक की कार्यशैली(MLA’s style of functioning) पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि सार्वजनिक आयोजनों (public events)में बढ़ती गन कल्चर को लेकर भी बहस छेड़ दी है।
वायरल वीडियो क्लिप में मतीन पटेल एक काली एसयूवी से उतरते दिखाई देते हैं। इसके बाद वह फिल्म धुरंधर के एक गाने पर पिस्टल जैसी दिखने वाली वस्तु हाथ में लेकर डांस करते नजर आते हैं। वीडियो में उनके कुछ समर्थक भी बंदूक जैसी वस्तुएं थामे दिख रहे हैं। जैसे ही यह क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर फैली लोगों ने इसे गैर जिम्मेदाराना करार देते हुए कड़ी आलोचना शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधियों को इस तरह का प्रदर्शन शोभा नहीं देता और इससे समाज में गलत संदेश जाता है।

मामले के तूल पकड़ने पर विधायक मतीन पटेल ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई दे रही वस्तु असली हथियार नहीं बल्कि खिलौना बंदूक थी। उनके अनुसार यह एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम था और उन्होंने बच्चों के आग्रह पर फिल्म के एक किरदार की तरह कपड़े पहनकर यह प्रस्तुति दी थी। पटेल का कहना है कि वीडियो को गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है और पुलिस इस संबंध में उनसे पहले ही पूछताछ कर चुकी है।

हालांकि विवाद बढ़ने के बाद पुलिस ने औपचारिक जांच शुरू कर दी है। कलबुर्गी शहर के पुलिस आयुक्त शरणप्पा एस डी ने बताया कि अधिकारियों को यह सत्यापित करने के निर्देश दिए गए हैं कि वीडियो में दिखाए गए हथियार असली थे या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि वीडियो किस स्थान पर शूट किया गया और वह क्षेत्र किस पुलिस स्टेशन के अंतर्गत आता है।

पुलिस आयुक्त ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में हथियार असली पाए जाते हैं तो यह देखा जाएगा कि उनके पास वैध लाइसेंस था या नहीं और क्या किसी नियम या शर्त का उल्लंघन हुआ है। अगर अवैध हथियार या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर हथियारों का प्रदर्शन करना कानूनन अपराध है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विस्तृत जांच की जाएगी।

 

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वाराणसी कचहरी में बम धमकी से हड़कंप, सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर

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वाराणसी। वाराणसी (Varanasi) जिले में उस समय हड़कंप (commotion) मच गया जब जिला जज (District Judge) के ई-मेल पर कचहरी को बम से उड़ाने (bomb threat) की धमकी मिली। इसकी जानकारी मिलते ही बार पदाधिकारियों ने बैठक की। वहीं कचहरी परिसर में गहमागहमी का माहौल हो गया। रात 1.30 बजे ई-मेल पर धमकी भरा मैसेज आने की जानकारी मिली है।

जिला जज को ई-मेल पर मिली धमकी के बाद कचहरी की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। डीसीपी वरुणा प्रमोद कुमार और कैंट इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा फोर्स और बम निरोधक दस्ते के साथ कचहरी में चेकिंग अभियान चला रहे हैं।

वहीं, अधिवक्ताओं ने भी अपने स्तर से चैंबर और संदिग्ध सामानों की जांच शुरू कर दी है। उधर, साइबर सेल की ओर से ई-मेल की जांच की जा रही है।

सेंट्रल बार अध्यक्ष प्रेमप्रकाश सिंह गौतम ने बताया कि जिला जज ने दोनों बार के अध्यक्ष महामंत्री को अपने चैंबर में बुलाकर जानकारी दी कि उनके यहां ई-मेल आया है, जिसमें डेढ़ बजे आतंकवादी संगठनों ने कचहरी को बम से उड़ाने की धमकी दी है। ऐसे में सभी मामलों में तारीखें दी जा रही हैं और कचहरी खाली करने का अनुरोध किया गया है।

बम निरोधक दस्ता ने मौके पर पहुंचकर गहनता से कचहरी परिसर की जांच की। इसकी जानकारी मिलते ही भारी संख्या में पुलिस फोर्स भी मौके पर पहुंची। साथ ही अपर पुलिस आयुक्त कानून व्यवस्था शिवहरि मीणा भी कचहरी पहुंचे। उन्होंने जरूरी दिशा-निर्देश दिए।

मौके पर भारी पुलिस फोर्स
मौके पर तीन कंपनी पीएसी, डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी और चार इंस्पेक्टर समेत 50 से अधिक पुलिस कर्मियों की टीम कचहरी में जांच अभियान चला रही है।

जिला जज को एक लाइन में ई-मेल पर धमकी मिली कि अधिवक्ताओं और जजों को बम से उड़ाया जाएगा। यह सूचना आग की तरह पूरे शहर में फैल गई है। सूचना पर जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार भी मौके पर पहुंचे।

वाराणसी कोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने के बाद कैंट रेलवे स्टेशन पर भी चेकिंग अभियान चलाया गया। काउंटर से लेकर प्रवेश द्वार तक और सभी प्लेटफार्म पर पहुंचकर सुरक्षाकर्मियों ने जांच की।

असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव

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गुवाहाटी। असम (Assam) में तथाकथित “मिया” मुसलमानों को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में एक एआई-निर्मित वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसमें मुख्यमंत्री (Himanta Biswa Sarma) को कथित तौर पर मुस्लिम पहचान वाले लोगों पर निशाना साधते हुए दिखाया गया था।

यह वीडियो राज्य इकाई Bharatiya Janata Party के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था, जिसके बाद विपक्ष ने इसे “भड़काऊ” बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर वीडियो हटा लिया गया और पार्टी ने कहा कि इसे बिना उचित अनुमति के पोस्ट किया गया था।

 

क्या है पूरा विवाद

 

सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो में “विदेशी-मुक्त असम” और “बांग्लादेशियों को कोई माफी नहीं” जैसे संदेश दिखाई दिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह सामग्री सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली है।

मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जबकि वाम दलों—Communist Party of India (Marxist) और Communist Party of India—ने मामले को लेकर अदालत का रुख किया।
बताया गया कि वीडियो में दिखाया गया एक चेहरा कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi से मिलता-जुलता था, जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Tarun Gogoi के पुत्र हैं।

मुख्यमंत्री और बीजेपी की सफाई

विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उनका विरोध “असमिया मुसलमानों” से नहीं, बल्कि कथित तौर पर Bangladesh से अवैध रूप से आने वाले लोगों से है। पार्टी की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया कि वीडियो “अपरिपक्व तरीके” से साझा हुआ और जिम्मेदार पदाधिकारी को हटा दिया गया है।

‘मिया’ शब्द क्यों बना राजनीतिक मुद्दा

असम में “मिया” शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर बंगाली-भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं। इस समुदाय पर लंबे समय से अवैध प्रवास के आरोप लगाए जाते रहे हैं। नागरिकता, मतदाता सूची और भूमि अतिक्रमण जैसे मुद्दों के साथ यह बहस जुड़ती रही है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहली बार नहीं है जब राज्य की राजनीति में इस तरह की सामग्री को लेकर विवाद हुआ हो।
पिछले वर्ष भी एआई से तैयार एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें कथित तौर पर “घुसपैठ” का दृश्य दिखाया गया था। उस मामले में भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद सामग्री हटानी पड़ी थी। इससे जुड़े मामलों पर Supreme Court of India तक याचिकाएं पहुंच चुकी हैं।

जनसंख्या और राजनीतिक समीकरण

2011 की जनगणना के अनुसार असम में मुसलमानों की आबादी लगभग 34% थी, जो अब विभिन्न अनुमानों में अधिक बताई जाती है।
राज्य के कई सीमावर्ती जिले मुस्लिम-बहुल हैं, और इन्हीं इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान तथा नागरिकता से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक राजनीतिक बहस का कारण बने हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की क्या राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सिर्फ असम की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पड़ोसी राज्य West Bengal की राजनीति तक जोड़कर देखा जा रहा है। पहचान, प्रवास और मतदाता आधार से जुड़े सवालों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

आगे क्या?

विवादित वीडियो को हटाया जा चुका है और पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच जारी है।
हालांकि, “मिया” पहचान, अवैध प्रवास और नागरिकता जैसे मुद्दे असम की राजनीति में आने वाले समय में भी प्रमुख बने रहने के संकेत दे रहे हैं।

जयपुर में दिल दहला देने वाली वारदात, पिता ने 8 महीने की मासूम की हत्या की

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जयपुर: राजधानी के मालपुरा गेट थाना इलाके में एक हैवान पिता ने अपनी मात्र 8 महीने की मासूम बेटी की कैंची से गला काटकर हत्या कर दी. इसके बाद आरोपी ने शव को कंबल में छुपाकर खुद भी आत्महत्या करने का प्रयास किया. पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है. जयपुर (पूर्व) डीसीपी संजीव नैन ने बताया कि लालापुरवा (उत्तर प्रदेश) निवासी शादाब मोहम्मद पर अपनी बेटी की हत्या का आरोप है. ये घटना 6 फरवरी की है, लेकिन पुलिस ने आरोपी को आज गिरफ्तार करके घटना का खुलासा किया है. पुलिस अब उससे पूछताछ और मामले की जांच जारी है. बच्ची की मां ने मालपुरा गेट थाने में मुकदमा दर्ज करवाया है.

ससुराल लौटने की बात पर शुरू हुआ विवाद: डीसीपी संजीव नैन ने बताया कि पीड़िता ने अपनी रिपोर्ट में जानकारी दी कि उसके पिता उसे और उसकी 8 महीने की बेटी शहनाज को लालपुरवा से सांगानेर लेकर आए थे. दो दिन बाद आरोपी शादाब भी पुणे से आ गया और उनके साथ रहने लगा. 6 फरवरी को सुबह करीब 10 बजे आरोपी ने पत्नी से ससुराल चलने को कहा. पत्नी ने तीन-चार दिन बाद चलने की बात कही तो कहासुनी हो गई और विवाद बढ़ गया.

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पत्नी से मारपीट, साले पर भी हमला: इसके बाद आरोपी ने पत्नी के साथ मारपीट की और गला दबाने का प्रयास किया. इस दौरान पीड़िता का छोटा भाई सोहिल बीच-बचाव करने आया तो शादाब ने केतली से उसके सिर पर हमला कर दिया. आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया और समझाइश की. लोगों के जाने के बाद शादाब मासूम बच्ची को कमरे में ले गया और कमरा बंद कर लिया.

कमरे में ले जाकर काटा बच्ची का गला: डीसीपी ने बताया कि कमरे में जाकर आरोपी ने कैंची से बच्ची का गला काटकर हत्या कर दी और खुद भी आत्महत्या करने का प्रयास किया. परिजनों और पड़ोसियों ने कमरे का दरवाजा तोड़कर आरोपी को संभाला, लेकिन जब कंबल हटाकर देखा तो बच्ची लहूलुहान पड़ी थी. सूचना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को जयपुरिया अस्पताल पहुंचाया और आरोपी को सवाई मानसिंह अस्पताल में भर्ती करवाया. जांच के बाद डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी शादाब मोहम्मद को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया है. मामले में आगे की जांच जारी है.

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राज्यसभा में कांग्रेस के भीतर तकरार, खरगे और जयराम रमेश के बीच तीखी बहस

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नई दिल्ली। संसद (Parliament) के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा (Rajya Sabha) में कांग्रेस (Congress) के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) और वरिष्ठ सांसद जयराम रमेश (Jairam Ramesh) आपस में भिड़ गए। यह झगड़ा औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान सामने आया, जब दोनों ने सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की बातों पर असहमति जताई।

विधेयक पर बहस
जयराम रमेश ने कहा कि बिल मजदूर विरोधी है, लेकिन विपक्ष को इसे समर्थन देने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके तुरंत बाद खरगे ने उनके बयान का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि विपक्ष इस बिल का समर्थन कभी नहीं कर सकता। खरगे के रुख के बाद विपक्षी सदस्य सदन से वॉकआउट कर गए।

श्रम एवं रोजगार मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि संशोधन विधेयक केवल तीन पुराने कानूनों को संहिता में वापस शामिल करने का प्रावधान है। नए श्रम कानूनों में सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम न करने का प्रावधान है, न्यूनतम मजदूरी अनिवार्य है और विश्व श्रम संगठन के मानकों के अनुरूप नियम हैं।

सोनिया गांधी ने दिया वाम का साथ
गुरुवार को संसद में कांग्रेस और वामपंथी दलों ने श्रम कानूनों के खिलाफ एकजुटता दिखाई। CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास ने ‘जीरो ऑवर’ में देशव्यापी आम हड़ताल का मुद्दा उठाया, और कांग्रेस की शीर्ष नेता सोनिया गांधी ने उनके समर्थन में फॉर्म पर हस्ताक्षर किए। यह कदम आम तौर पर शून्यकाल में हस्ताक्षर न करने वाली सोनिया गांधी के लिए आश्चर्यजनक रहा और कांग्रेस तथा वामपंथी सदस्यों दोनों को चौंकाया।

 

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