कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आगामी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, 2026 के हिसाब से कचरा प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं करते.

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने यह बात भोपाल नगर निगम की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), सेंट्रल जोनल बेंच, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) को चुनौती दी गई थी. एनजीटी ने 31 जुलाई, 2023 और 11 अगस्त, 2023 के अपने विवादित आदेशों से भोपाल नगर निगम को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया था.

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले बदलते कानूनी सिस्टम पर ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (मैनेजमेंट और हैंडलिंग) रूल्स, 2000 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से बदल दिया गया था, जिनकी जगह अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 ने ले ली है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले हैं.

हालांकि, जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्राउंड लेवल पर लागू करने में कमी पर चिंता जताई. आदेश में कहा गया, “कोर्ट का मानना ​​है कि जमीनी स्तर पर कई कारणों से कानूनी प्रणाली से मनचाहा नतीजा नहीं मिल रहा है.”

नए नियमों को लागू करने को ‘अच्छा कदम’ बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि जब तक तैयारी का काम समय पर पूरा नहीं हो जाता, तब तक सिर्फ नए नियमों की अधिसूचना काफी नहीं होगी.

पीठ ने टिप्पणी की, “नए नियमों की शुरुआत, हालांकि एक स्वागत योग्य कदम है, अधिकारियों से प्रभावी तिथि निर्धारित होने से पहले काम पूरा करने की उम्मीद है, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं करेंगे.”

यह देखते हुए कि आगामी 2026 नियमों के अनुसार पर्याप्त बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना आवश्यक होगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि 2026 नियमों के अनुसार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाए.”

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अपीलकर्ता भोपाल नगर निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अधिकारियों को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए: अतिरिक्त मुख्य सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (मध्य प्रदेश) और प्रधान सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग (मध्य प्रदेश).

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह बदलाव करे और अगली सुनवाई के दिन या उससे पहले बदला हुआ केस टाइटल (मामले का विवरण) दे.”

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की है.

मनसे नेता देशपांडे ने उद्धव गुट के पार्षदों पर लगाए गंभीर आरोप… बोले- एक-एक करोड़ में बिके

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मुम्बई। महाराष्ट्र (Maharashtra) में पंचायत और नगर निकाय चुनाव (Panchayat and Municipal Elections) अब खत्म हो चुके हैं। चुनावों के खत्म होने के बाद ठाकरे बंधुओं की पार्टियों के बीच में एक बार फिर से तनाव देखने को मिल रहा है। राज ठाकरे (Raj Thackeray) की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के नेता संदीप देशपांडे ने गुरुवार को आरोप लगाया कि चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के पार्षदों ने महापौर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का समर्थन करने के लिए एक-एक करोड़ रुपये प्राप्त किए। हालांकि, उद्धव गुट (Uddhav Group) और भाजपा की तरफ से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

महाविकास आघाडी (एमवीए) गठबंधन में शामिल कांग्रेस और शिवसेना (उबाठा) के बीच उस समय से तनातनी चल रही है जब कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बावजूद, शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के समर्थन से चंद्रपुर नगर निगम में भाजपा प्रत्याशी महापौर चुन लिया गया।

राज ठाकरे के नेतृत्व वाली मनसे की मुंबई इकाई के अध्यक्ष देशपांडे ने उद्धव गुट को आड़े हाथों लिया। कल्याण डोंबिवली स्थानीय निकाय में मनसे नेताओं द्वारा शिवसेना शिंदे गुट का समर्थन करने पर संजय राउत द्वारा की गई आलोचना का जिक्र कते हुए उन्होंने कहा कि जब शिवसेना (उबाठा) भाजपा का समर्थन करती है तो उसे सही आचरण माना जाता है लेकिन जब मनसे ऐसा करती है तो उसे गलत ठहराया जाता है। देशपांडे ने दावा किया, “चंद्रपुर में शिवसेना (उबाठा) के प्रत्येक पार्षद को एक करोड़ रुपये मिले, इसके अलावा अन्य प्रस्ताव भी दिए गए। एक निर्दलीय पार्षद को 50 लाख रुपये दिए गए।”

मुंबई में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना (उबाठा) और मनसे ने गठबंधन करके चुनाव लड़ा था लेकिन वे भाजपा-शिवसेना गठजोड़ को बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर नियंत्रण हासिल करने से नहीं रोक सके। शिवसेना (उबाठा) के चंद्रपुर जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने कहा कि यदि देशपांडे पार्षदों को धन मिलने के आरोप का प्रमाण पेश कर दें तो वह इस्तीफा दे देंगे। उन्होंने स्थानीय कांग्रेस नेताओं पर शिवसेना (उबाठा) नेतृत्व का अपमान करने का भी आरोप लगाया।

देशपांडे ने संजय राउत पर भी निशाना साधते हुए पूछा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के दौरान क्या उन्हें अंधेरे में रखा गया था या उन्होंने आंखों पर पट्टी बांध रखी थी। वरिष्ठ भाजपा नेता सुधीर मुनगंटीवार ने कहा कि देशपांडे के आरोपों को कोई गंभीरता से नहीं ले रहा और यह शिवसेना (उबाठा) और मनसे के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाता है। इसी बीच, संजय राउत ने बृहस्पतिवार को मुंबई में मनसे प्रमुख राज ठाकरे से मुलाकात की। राउत ने संवाददाताओं से कहा कि चंद्रपुर में हुए घटनाक्रम के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है और उसे स्थानीय शिवसेना (उबाठा) पार्षदों के साथ अधिक गंभीरता से चर्चा करनी चाहिए थी।

 

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एपस्टीन फाइल्स में नाम होने का दावा, CEO के उड़ गए होश

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नई दिल्ली। आईआईटी हैदराबाद के एक छात्र की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है। वजह है ईमेल, जिसकी सब्जेक्ट लाइन ने सीधे सीईओ को चौंका दिया और इंटरनेट पर बहस छेड़ दी। लेगिट एआई के फाउंडर और सीईओ हर्षदीप रापाल को जो मेल मिला, उसकी सब्जेक्ट लाइन थी- आपका नाम एपस्टीन फाइलों में है। यह पढ़ते ही रापाल सन्न रह गए, लेकिन जब उन्होंने ईमेल खोला, तो कहानी कुछ और निकली। पहली ही लाइन थी- मजाक कर रहा था, मैं चाहता था कि आप मेल खोलें। यानी पूरा मामला सिर्फ अटेंशन पाने का था।
मेल भेजने वाला सीएसई का छात्र था उसने आगे लिखा कि कंपनी की वेबसाइट देखी और खासतौर पर स्मार्ट कॉन्ट्रैक्ट्स असिस्टेंट की अवधारणा में उसकी दिलचस्पी है। उसने अपना परिचय दिया, चर्चा की इच्छा जताई और अपना रिज्यूम भी भेजा। मकसद साफ तौर पर पेशेवर था, लेकिन शुरुआत इतनी चौंकाने वाली थी कि वही चर्चा का केंद्र बन गई। रापाल ने इस मेल का स्क्रीनशॉट शेयर किया, छात्र का नाम छुपाते हुए साफ संदेश दिया- दोस्तों, कृपया ऐसा न करें। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी अनुबंधों के कारोबार में काम करती है, जो बेहद गंभीर क्षेत्र है। यहां जवाबदेही, स्वामित्व और पेशेवर रवैया सबसे अहम है। अगर पहला ईमेल ही ऐसे सब्जेक्ट और ओपनिंग मैसेज से भरा हो, तो ज्यादातर फाउंडर जवाब देना पसंद नहीं करेंगे।
पोस्ट वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने छात्र के तरीके को अपरिपक्व बताया। किसी ने कहा कि इस सोच के साथ, भले ही उम्मीदवार कितना भी कुशल क्यों न हो, नौकरी मिलना मुश्किल है तो किसी ने इसे गैर-गंभीर और अस्वीकार्य करार दिया। इस पूरे मामले ने एक बार फिर साफ कर दिया-वायरल होने की कोशिश और प्रोफेशनल छवि बनाने में जमीन-आसमान का फर्क है। पहला ईमेल ही आपकी पहचान बनाता है। गलत शुरुआत और मौका शुरू होने से पहले ही खत्म।

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राम चरण और उपासना ने किया अपने जुड़वा बच्चों का नामकरण, बताया नाम का मतलब, बोले- ‘ये सिर्फ नाम नहीं…’

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राम चरण के परिवार में खुशियां दोगुनी हो गई हैं। कपल के घर में 31 जनवरी को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। अब अभिनेता राम चरण और उपासना कोनिडेला ने अपने जुड़वां बच्चों का नामकरण एक पारंपरिक नामकरण समारोह में किया, जिसमें परिवार और उनके करीबी दोस्त शामिल हुए।

रीति-रिवाजों के साथ किया नामकरण 

नामकरण समारोह में परिवार की परंपराओं और धार्मिक रीति-रिवाजों का खास ध्यान रखा गया। राम चरण ने बताया कि उनके लिए बच्चों का नाम रखना सिर्फ एक रस्म नहीं था, बल्कि एक बहुत ही निजी और आध्यात्मिक फैसला था।राम चरण ने वैरायटी से बातचीत में कहा, ‘बच्चों का नाम रखना हमारे लिए बहुत ही खास फैसला था। मैंने और उपासना ने इस बारे में काफी बातचीत की। हमारे माता-पिता भी इस फैसले का अहम हिस्सा थे। हमारी संस्कृति में बड़ों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन बहुत मायने रखता है।’

शिवराम और अनवीरा देवी रखा है नाम

उनके बेटे का नाम शिवराम रखा गया है। यह नाम भगवान शिव और भगवान राम से प्रेरित है। राम चरण ने बताया कि इस नाम में शक्ति, संयम, धर्म और करुणा का भाव जुड़ा है। साथ ही, यह नाम उनके पिता के जन्म के नाम ‘शिव शंकर वरा प्रसाद’ से भी जुड़ा हुआ है, जिससे परिवार की विरासत आगे बढ़ती है।वहीं बेटी का नाम अनवीरा देवी रखा गया है। इस नाम में साहस और नारी शक्ति की भावना है। राम चरण ने बताया, ‘वीरा का मतलब बहादुरी होता है और ‘अन’ इसे असीम बना देता है। ‘देवी’ शब्द हमने जानबूझकर जोड़ा है, ताकि यह याद रहे कि ताकत और सौम्यता साथ-साथ चल सकती हैं।’उन्होंने कहा कि उनके लिए ये नाम सिर्फ नाम नहीं हैं, बल्कि अपने बच्चों के लिए शक्ति, प्यार और हिम्मत की कामना हैं।

कौन थी ‘ओ रोमियो’ की असल सपना? हुसैन उस्तरा और दाउद से क्या रहा कनेक्शन? आखिर में मिली दर्दनाक मौत

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रिलीज के बाद से शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी स्टारर फिल्म ‘ओ रोमियो’ सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही है। यह फिल्म हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ पर आधारित है। फिल्म में शाहिद कपूर ने एक माफिया डॉन हुसैन उस्तरा का रोल किया है। वहीं सपना उर्फ सपना दीदी के रोल में तृप्ति डिमरी नजर आ रही हैं। लेकिन असल में सपना दीदी कौन थीं? क्यों वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को मारना चाहती थीं? जानिए सपना दीदी की असल कहानी? 

दाउद इब्राहिम से बदला था सपना दीदी का मकसद 

यह कहानी 80 के दशक के आखिरी वर्षों की है। सपना दीदी का असल नाम अशरफ था। वह अंडरवर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहिम को मारना चाहती थीं। दरअसल, अशरफ उर्फ सपना दीदी के शौहर की हत्या दाउद इब्राहिम की करवाई थी।ऐसे में सपना की जिंदगी का एक ही मकसद था कि वह दाउद इब्राहिम को खत्म करे। इसके लिए वह हुसैन उस्तरा की मदद लेती है। हुसैन की दुश्मनी भी दाउद इब्राहिम से थी। ऐसे में सपना और हुसैन उस्तरा साथ मिलकर काम करते हैं। हुसैन उस्तरा, सपना को सीखाता है कि कैसे किसी आदमी को मारा जाता है। 

दाउद के काम को पहुंचाया नुकसान 

सपना दीदी ने चुपचाप दाउद इब्राहिम के काले साम्राज्य काे चुनौती दी। उसने अपना एक गैंग बनाया, जो दाउद के खिलाफ लड़ने में उसकी मदद करता था। सपना दीदी ने मुंबई में डी कंपनी के जुए के अड्डे, डांस बार और दूसरे कई बुरे काम बंद करवाए। उसने 1990 के दशक में शारजहां में भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के दौरान दाऊद इब्राहिम की हत्या की साजिश रची थी। लेकिन सपना दीदी का प्लान लीक हो गया। वह दाउद को नहीं मार सकी। 

दाउद के लोगों ने सपना दीदी को बेरहमी से मारा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 1994 में दाउद इब्राहिम के गुड़ों ने सपना दीदी पर हमला किया। 22 बार चाकू मारा। सपना दीदी की कहानी यही पर खत्म हुई। वैसे फिल्म ‘ओ रोमियो’ में सपना और हुसैन उस्तरा के बीच एक लव स्टोरी भी दिखाई गई। जिस पर हुसैन उस्तरा के परिवार को आपत्ति है। 

हुसैन उस्तरा के परिवार को फिल्म ‘ओ रोमियो’ पर जताई थी आपत्ति

फिल्म ‘ओ रोमियो’ रिलीज हो चुकी है लेकिन इसकी रिलीज से पहले विवाद भी खड़ा हुआ। फिल्म ‘ओ रोमियो’ का एक गाना ‘हम तो तेरे ही लिए’ जब रिलीज हुआ था, इसमें सपना (तृप्ति डिमरी) और हुसैन उस्तरा (शाहिद कपूर) के बीच रोमांस दिखाया गया। इस बात पर हुसैन उस्तरा के परिवार को आपत्ति थी। एक मीडिया इंटरव्यू में हुसैन उस्तरा की बेटी ने कहा, ‘फिल्म में दिखाई गई कहानी गलत है।मेरे पिता ने सपना दीदी को ट्रेनिंग दी थी। वह उनके लिए बहन जैसी थीं। वह हमारे घर और हमारे ऑफिस आती थीं। सपना दीदी का कोई नहीं था। जब उनके पति की हत्या हुई, तो वह अकेली थीं। उनके कोई बच्चे नहीं थे। वह हर जगह मदद मांगने गईं। मेरे बाबा ने उनकी मदद की। दोनों ने मिलकर अपराधियों के खिलाफ काम किया। उनका तरीका गलत था लेकिन यह भी 28 साल पहले हुआ था। फिल्म उनकी इमेज को खराब करती है।’ 

राघव चड्ढा ने संसद में उठाया ‘राइट टू रिकॉल’ का मुद्दा” जानिए किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?

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नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (MP Raghav Chadha) ने बुधवार को संसद (Parliament) में ‘राइट टू रिकॉल’ पर चर्चा कर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने कहा कि अगर चुने हुए नेता जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप काम नहीं करते हैं, तो वोटर्स को उन्हें कार्यकाल पूरा होने से पहले हटाने का अधिकार होना चाहिए।

शून्यकाल के दौरान अपने संबोधन में चड्ढा ने कहा, “जैसे मतदाताओं को वोट डालने का अधिकार है, वैसे ही काम न करने पर उन्हें अपने जनप्रतिनिधि को हटाने का हक भी होना चाहिए। ‘राइट टू रिकॉल’ लोकतंत्र को मजबूत बनाएगा और नेताओं को जवाबदेह बनायेगा।”

राइट टू रिकॉल क्या है?
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर बताया कि राइट टू रिकॉल एक ऐसी प्रक्रिया है जो मतदाताओं को किसी चुने हुए जनप्रतिनिधि का कार्यकाल खत्म होने से पहले उन्हें पद से हटाने का अधिकार देती है। सरल शब्दों में, अगर मतदाता अपने नेता के काम से संतुष्ट नहीं हैं, तो वे उसे हटाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

राष्ट्रपति और जज को हटाया जा सकता है, नेताओं को क्यों नहीं?
चड्ढा ने तर्क दिया कि भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और न्यायाधीशों के लिए पहले ही महाभियोग की व्यवस्था है और सरकारों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया जा सकता है। ऐसे में चुने हुए नेताओं के लिए भी यही अधिकार होना चाहिए।

दुरुपयोग रोकने के उपाय
सांसद ने यह स्पष्ट किया कि राइट टू रिकॉल केवल लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाने का साधन है, किसी नेता के खिलाफ हथियार नहीं। इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए उन्होंने कुछ शर्तें सुझाईं:
जनप्रतिनिधि को हटाने के लिए लगभग 35–40% मतदाताओं के हस्ताक्षर आवश्यक हों।
नेता को 18 महीने का ‘परफॉर्मेंस पीरियड’ दिया जाए, ताकि वह सुधार कर सके।
ऐसा होने पर पार्टियां भी योग्य और काम करने वाले नेताओं को ही टिकट देंगी।

किन देशों में लागू है यह व्यवस्था?
चड्ढा ने बताया कि अमेरिका, स्विट्जरलैंड और कनाडा सहित दुनिया के 20 से अधिक लोकतांत्रिक देशों में राइट टू रिकॉल लागू है। भारत में कर्नाटक, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान की ग्राम पंचायतों में भी यह प्रावधान मौजूद है। इसके अलावा, इस अधिकार से मतदाता अमेरिका, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, वेनेज़ुएला, पेरू, इक्वाडोर, जापान, ताइवान और कनाडा में अपनी सरकार को जवाबदेह बना सकते हैं।

पाकिस्तान के खिलाफ खेलेंगे अभिषेक? वरुण चक्रवर्ती बोले- उन्होंने अभ्यास किया, स्थिति पहले से बेहतर

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भारत के सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है लेकिन 15 फरवरी को कोलंबो में पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण टी20 विश्व कप ग्रुप मुकाबले में उनके खेलने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। पेट के संक्रमण से जुड़ी समस्या से जूझ रहे अभिषेक को तेज बुखार और पेट दर्द की शिकायत के बाद दो दिन के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। उन्हें बुधवार को दिल्ली के एक अस्पताल से छुट्टी मिल गई, लेकिन गुरुवार को जब भारतीय टीम ने कोटला मैदान पर अभ्यास किया, तब अभिषेक ने बहुत ज्यादा ट्रेनिंग नहीं की क्योंकि वह अब भी थोड़ा कमजोरी महसूस कर रहे हैं।

अभिषेक का कम हुआ है वजन

अभिषेक का थोड़ा वजन भी कम हुआ है और पेट के गंभीर संक्रमण की स्थिति में पूरी तरह स्वस्थ होकर शीर्ष स्तर का क्रिकेट खेलने लायक ताकत और सहनशक्ति हासिल करने में समय लगता है। हालांकि, उनके स्वास्थ्य पर टीम इंडिया के मिस्ट्री स्पिनर वरुण चक्रवर्ती ने बड़ा अपडेट दिया है, जिससे फैंस को खुशी मिल सकती है।
 
चक्रवर्ती ने अभिषेक के स्वास्थ्य पर अपडेट दिया

चक्रवर्ती ने कहा कि अभिषेक अब बेहतर महसूस कर रहे हैं और उन्हें लगता है कि वह अगला मैच खेल सकते हैं। चक्रवर्ती ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अभिषेक अगला मैच खेलेंगे। मुझे उनकी स्थिति के बारे में पूरी तरह नहीं पता, लेकिन मैंने उनसे बात की है, वह अच्छी स्थिति में लग रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को कुछ अभ्यास भी किया। उन्होंने बताया कि वह वापसी की प्रक्रिया में हैं।’पाकिस्तान के खिलाफ कुछ नई गेंदें आजमा सकते हैं वरुण चक्रवर्ती ने साथ ही कहा कि वह पाकिस्तान के खिलाफ प्रेमदासा स्टेडियम में कुछ नई गेंदें भी आजमा सकते हैं क्योंकि वहां बाउंड्री लंबी हैं। नामीबिया के खिलाफ वरुण ने तीन विकेट झटके। अपनी फिरकी का जादू चलाने के बाद वरुण कहा कि वह अपनी गेंदबाजी में और विविधता लाने के अलावा मौजूदा गेंदों को बिलकुल सटीक बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। चक्रवर्ती ने कहा कि उन्होंने अपनी गेंदबाजी में विविधता (वेरिएशन) लाने के अलावा मौजूदा गेंदों को बेहतर करने पर अधिक ध्यान दिया है।’गति, स्पिन और गेंद पर अधिक रोटेशन…’उन्होंने कहा, ‘मैंने अपनी गेंदबाजी के कुछ पहलुओं पर काम किया है जैसे गति, स्पिन और गेंद पर अधिक रोटेशन। लोग वेरिएशन पर भी काम करते हैं लेकिन मैंने अपनी मौजूदा गेंदों को परफेक्ट बनाने पर काम किया जिससे बहुत मदद मिली।’ चक्रवर्ती ने नामीबिया के खिलाफ लंबे फॉलो थ्रू (गेंद फेंकते हुए आगे की ओर जाना) के साथ गेंदबाजी की और इस स्पिनर ने कहा कि अपनी गेंदों की गति बढ़ाने के लिए उन्होंने ऐसा किया।अपने फॉलो थ्रू पर काम किया’इस लेग स्पिनर ने कहा, ‘मैंने अपने फॉलो थ्रू पर काम किया जिससे कि मैं विकेट पर अधिक तेजी से गेंद डाल सकूं। मैंने आज पहली ही गेंद गुगली फेंकी जबकि आम तौर पर मैं अपनी स्टॉक गेंद के साथ शुरुआत करता हूं।’ चक्रवर्ती ने कहा, ‘अगर आप हमारे खेले गए मुकाबलों को देखें तो इस विश्व कप से पहले हुए सभी द्विपक्षीय मैच सपाट पिचों पर थे। यह निश्चित रूप से थोड़ा हैरान करने वाला था। पहले मैच का विकेट भी और यह विकेट भी। लेकिन हमें जो भी विकेट मिलता है हमें उसके हिसाब से खुद को ढालना होगा।

‘पाकिस्तान से मैच पर क्या बोले चक्रवर्ती?

चक्रवर्ती ने साथ ही कहा कि रात के मैच में दूसरी पारी में गेंदबाजी करते हुए ओस की भी भूमिका है और पाकिस्तान के खिलाफ कोलंबो में 15 फरवरी को होने वाले भारत के अगले मैच में भी ऐसा देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा, ‘ओस की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। जब आप दूसरी पारी में गेंदबाजी कर रहे होते हैं और आपको लक्ष्य का बचाव करना होता है तो कभी-कभी यह एक बड़ा मुद्दा होती है। आज भी बहुत ओस थी लेकिन हम अच्छा कर पाए। हम अनुभवी भी हैं क्योंकि हम आईपीएल में बहुत मैच खेलते हैं। हमें पता है कि अगर ओस आती है तो कैसे गेंदबाजी करनी है।’अच्छा प्रदर्शन करना वरुण का लक्ष्य चक्रवर्ती के लिए 2021 विश्व कप में पाकिस्तान के खिलाफ मैच बुरे सपने की तरह रहा था। इस मुकाबलें में भारत को चक्रवर्ती से काफी उम्मीदें थी, लेकिन वह एक भी विकेट नहीं चटका पाए और टीम को 10 विकेट से हार का सामना करना पड़ा। उस मैच से अब तक अपनी गेंदबाजी में आए बदलाव पर चक्रवर्ती ने कहा, ‘मैंने साइड स्पिन की जगह अपनी ओवर स्पिन और विकेट से अधिक गति और जिप पर काम किया है। कुछ वेरिएशन हैं जिन्हें मैं पिछले छह वर्ष से आजमा रहा हूं लेकिन अब भी परफेक्ट नहीं हुए जबकि कुछ काफी जल्दी काम कर जाते हैं। यह गेंद की जटिलता पर निर्भर करता है।’अभिषेक अब भी कमजोरी महसूस कर रहे कप्तान सूर्यकुमार यादव ने संकेत दिया कि पाकिस्तान के खिलाफ मैच में उनका खेलना संदिग्ध हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘अभिषेक अभी पूरी तरह ठीक नहीं हैं, एक-दो मैच लग सकते हैं।’ समझा जाता है कि कोलंबो में उनका अभ्यास सत्र इस बात का संकेत देगा कि वह किस स्थिति में हैं। यदि वह नेट्स में सामान्य रूप से लंबे समय तक बल्लेबाजी करते हैं तो इसे उनके खेलने के लिए फिट होने का संकेत माना जा सकता है। पिछले एक साल में भारतीय टीम के नेट सत्र पर नजर डालें तो अभिषेक कई बार बल्लेबाजी करते हैं और तीन घंटे के अभ्यास सत्र में वह लगभग 75 से 90 मिनट तक बल्लेबाजी करते हैं।

अमेरिका में छात्रा की मौत के बाद अब पिता का निधन, 262 करोड़ मुआवजा लंबित

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कुछ साल पहले अमेरिका में पुलिस की एक दुर्घटना में 23 वर्षीय भारतीय छात्रा जाह्नवी कंदुला का निधन हो गया था। अब उसके परिवार को उस समय दूसरा बड़ा झटका लगा जब 29 मिलियन अमेरिकी डॉलर के मुआवजे के समझौते की घोषणा से ठीक दो दिन पहले उनके पिता का निधन हो गया। 23 जनवरी, 2023 को जाह्नवी सड़क पार कर रही थी, उस समय एक तेज रफ्तार सिएटल पुलिस वाहन ने उसे टक्कर मार दी। उस समय संबंधित अधिकारी एक आपातकालीन कॉल का जवाब दे रहा था।शोक समय में मुआवजे की बात करने उचित नहीं जाह्नवी के एक रिश्तेदार ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि सेवानिवृत्त पुलिस कांस्टेबल कंदुला श्रीकांत का 10 फरवरी को कुरनूल जिले में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने आगे कहा कि  “श्रीकांत का अंतिम संस्कार बुधवार को अडोनी में किया गया, जबकि परिवार एक और विनाशकारी क्षति से जूझ रहा था।” परिवार इस समय शोक में है और मुआवजे की राशि के बारे में बात करना उचित नहीं है। वहीं, जाह्नवी नॉर्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी के सिएटल कैंपस में सूचना प्रणाली में मास्टर की छात्रा थीं।

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कौन था हुसैन उस्तरा जिसने दाऊद इब्राहिम को दी थी चुनौती? ‘ओ रोमियो’ में शाहिद कपूर ने निभाया उनका किरदार

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शाहिद कपूर और तृप्ति डिमरी की अदाकारी वाली फिल्म ‘ओ रोमियो’ आज, 13 फरवरी को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। ‘ओ रोमियो’ एक अंडरवर्ल्ड की कहानी है। फिल्म में शाहिद कपूर, गैंगस्टर हुसैन उस्तरा का रोल निभा रहे हैं। तृप्ति डिमरी अफशा का रोल निभा रही हैं। फिल्म ‘ओ रोमियो’ की कहानी हुसैन जैदी की किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ से इंस्पायर है। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि हुसैन उस्तरा कौन था?

कौन था हुसैन उस्तरा?

हुसैन उस्तरा का असली नाम हुसैन शेख था। वह मुंबई के आस-पास के इलाकों में पला बढ़ा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक हुसैन स्ट्रीट फाइट और जबरन वसूली के जरिए अंडरवर्ल्ड में आया। आखिर में वह एक कॉन्ट्रैक्ट किलर बन गया। हुसैन ने छोटे-मोटे काम से शुरुआत की। इसमें लोगों को डराना-धमकाना, जबरन वसूली, हिसाब बराबर करना शामिल था। अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ हुसैन उस्तरा की कथित दुश्मनी कई वर्षों से मुंबई के अंडरवर्ल्ड में चर्चा का विषय रही।

कैसे हुई हुसैन उस्तरा की मौत?

हुसैन उस्तरा और दाऊद के बीच झगड़ा हितों के टकराव की वजह से हुआ। कोई भी पक्ष अपने ऊपर दूसरे का अधिकार नहीं चाहता था। जब हुसैन अकेले काम करता था, तो दुश्मनी ताकत की लड़ाई में बदल गई। इससे अंडरवर्ल्ड में उस्तारा का रुतबा और मजबूत हो गया। हुसैन उस्तरा की 1998 में मौत हो गई। खबरों के मुताबिक हुसैन को छोटा शकील के गिरोह के लोगों ने मारा था। 

कौन है फिल्म का निर्देशक?

शाहिद कपूर की फिल्म ‘ओ रोमियो’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो गई। ऐसे में हुसैन उस्तरा की कहानी पर फिर से ध्यान गया है। फिल्म का निर्देशन ‘हैदर’ और ‘कमीने’ जैसी फिल्मों के लिए मशहूर विशाल भारद्वाज ने किया है। इसके निर्माता साजिद नाडियाडवाला हैं।

अखिलेश ने केंद्र–योगी रिश्तों पर उठाए सवाल

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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर दावा किया कि दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गई है. अखिलेश यादव ने इस दौरान सीएम योगी पर तीखा हमला बोलते हुए कटाक्ष किया. अखिलेश ने यह दावा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर किया है. उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सरकार है. ऐसे में अखिलेश यादव विपक्ष की भूमिका में हैं. अखिलेश यादव विपक्ष में होने के नाते सीएम योगी पर हमेशा बयानबाजी करते रहते हैं. अब उन्होंने केंद्र सरकार और सीएम योगी के बीच खटपट को लेकर बड़ा दावा किया है. सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए लिखा, “अब क्या बुलडोजर की जगह ब्रह्मोस भेजेंगे. दिल्ली-लखनऊ की लड़ाई कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ गयी है क्या?”

केंद्र और योगी सरकार के बीच टकराव का दावा

दरअसल, सीएम योगी के बुलडोजर एक्शन को लेकर पूरे देश में चर्चा रहती है. इसलिए अखिलेश यादव ने बुलडोजर का नाम लेते हुए कटाक्ष किए होंगे. हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और सीएम योगी के बीच खटपट का दावा किया है. इससे पहले भी वो कई बार सीएम योगी को आड़े हाथों ले चुके हैं. कुछ दिनों पहले ही अखिलेश ने सीएम योगी पर तंज कसते हुए बिना नाम लिए दावा किया कि पीएम मोदी अपने संसदीय क्षेत्र में मेट्रो रेल शुरू नहीं करवा पा रहे हैं. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री, पीएम के क्षेत्र में मेट्रो नहीं बनने दी. दोनों के बीच बहुत बड़ी खाई है।

सीएम योगी पर कसा तंज

इसके अलावा उन्होंने दावा किया था कि उत्तर प्रदेश के नेता दिल्ली वालों को सलाम तक नहीं ठोकते हैं और न ही नमस्ते करते हैं. अमेरिकी डील पर भी उन्होंने सीएम योगी को घेरते हुए कहा कि उनके ऊपर जो संकट आने वाला है उसे लेकर कोई तैयारी नहीं की है. बजट को लेकर भी सीएम योगी को घेरने का प्रयास किया. उन्होंने इस बजट को विदाई वाला बजट बताया।

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News Desk