7.8 C
London
Sunday, October 18, 2026
HomeLatest Newsकचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं...

कचरा प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव से जमीनी हकीकत में सुधार नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों में बार-बार बदलाव करने से जमीनी हकीकत में तब तक सुधार नहीं होगा, जब तक अधिकारी आगामी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों, 2026 के हिसाब से कचरा प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत नहीं करते.

जस्टिस पंकज मिथल और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने यह बात भोपाल नगर निगम की अर्जी पर सुनवाई करते हुए कही, जिसमें नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), सेंट्रल जोनल बेंच, भोपाल द्वारा लगाए गए भारी पर्यावरण क्षतिपूर्ति (Environmental Compensation) को चुनौती दी गई थी. एनजीटी ने 31 जुलाई, 2023 और 11 अगस्त, 2023 के अपने विवादित आदेशों से भोपाल नगर निगम को क्रमशः 1.80 करोड़ रुपये और 121 करोड़ रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति देने का निर्देश दिया था.

नगरपालिका ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को नियंत्रित करने वाले बदलते कानूनी सिस्टम पर ध्यान देते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि म्युनिसिपल सॉलिड वेस्ट (मैनेजमेंट और हैंडलिंग) रूल्स, 2000 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 से बदल दिया गया था, जिनकी जगह अब सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026 ने ले ली है, जो 1 अप्रैल, 2026 से लागू होने वाले हैं.

हालांकि, जस्टिस मिथल की अध्यक्षता वाली पीठ ने ग्राउंड लेवल पर लागू करने में कमी पर चिंता जताई. आदेश में कहा गया, “कोर्ट का मानना ​​है कि जमीनी स्तर पर कई कारणों से कानूनी प्रणाली से मनचाहा नतीजा नहीं मिल रहा है.”

नए नियमों को लागू करने को ‘अच्छा कदम’ बताते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी कि जब तक तैयारी का काम समय पर पूरा नहीं हो जाता, तब तक सिर्फ नए नियमों की अधिसूचना काफी नहीं होगी.

पीठ ने टिप्पणी की, “नए नियमों की शुरुआत, हालांकि एक स्वागत योग्य कदम है, अधिकारियों से प्रभावी तिथि निर्धारित होने से पहले काम पूरा करने की उम्मीद है, अन्यथा 2026 के नियम जमीनी हकीकत में सुधार नहीं करेंगे.”

यह देखते हुए कि आगामी 2026 नियमों के अनुसार पर्याप्त बुनियादी ढांचा सुनिश्चित करना आवश्यक होगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “इसलिए, मामले के तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए, यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि 2026 नियमों के अनुसार अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाए.”

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने अपीलकर्ता भोपाल नगर निगम को दोनों अपीलों में केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार के रूप में शामिल करने का निर्देश देकर कार्यवाही का दायरा बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. कोर्ट ने निर्देश दिया कि इन अधिकारियों को प्रतिवादी के रूप में जोड़ा जाए: अतिरिक्त मुख्य सचिव, आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (मध्य प्रदेश) और प्रधान सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग (मध्य प्रदेश).

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया, “अपीलकर्ता को निर्देश दिया जाता है कि वह बदलाव करे और अगली सुनवाई के दिन या उससे पहले बदला हुआ केस टाइटल (मामले का विवरण) दे.”

सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की है.

जलवायु विहार में धूमधाम से आयोजित हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम व डांडिया उत्सव; ADCP मनीषा सिंह ने ‘मिशन शक्ति’ के प्रति किया जागरूक

जलवायु विहार में धूमधाम से आयोजित हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम व डांडिया उत्सव; ADCP मनीषा सिंह ने 'मिशन शक्ति' के प्रति किया जागरूक ग्रेटर नोएडा /...

How Respect Network Approaches Harmful Social Media Posts and Videos

A harmful social media post can remain visible long after it has been reported, creating challenges for people attempting to protect their online reputation....