18 C
London
Saturday, August 29, 2026
HomeLatest Newsअसम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित...

असम में ‘मिया’ मुसलमानों को लेकर क्यों तेज हुई सियासी मुहिम? विवादित वीडियो से बढ़ा राजनीतिक टकराव

#LatestराजनीतिNews #राजनीतिNews #राजनीतिUpdate #राजनीतिNews #BollywoodHindiNews

गुवाहाटी। असम (Assam) में तथाकथित “मिया” मुसलमानों को लेकर राजनीतिक विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। हाल ही में एक एआई-निर्मित वीडियो सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया, जिसमें मुख्यमंत्री (Himanta Biswa Sarma) को कथित तौर पर मुस्लिम पहचान वाले लोगों पर निशाना साधते हुए दिखाया गया था।

यह वीडियो राज्य इकाई Bharatiya Janata Party के सोशल मीडिया अकाउंट से साझा किया गया था, जिसके बाद विपक्ष ने इसे “भड़काऊ” बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। विवाद बढ़ने पर वीडियो हटा लिया गया और पार्टी ने कहा कि इसे बिना उचित अनुमति के पोस्ट किया गया था।

 

क्या है पूरा विवाद

 

सोशल मीडिया पर जारी इस वीडियो में “विदेशी-मुक्त असम” और “बांग्लादेशियों को कोई माफी नहीं” जैसे संदेश दिखाई दिए। विपक्षी दलों का आरोप है कि यह सामग्री सांप्रदायिक तनाव भड़काने वाली है।

मुख्य विपक्षी दल Indian National Congress ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जबकि वाम दलों—Communist Party of India (Marxist) और Communist Party of India—ने मामले को लेकर अदालत का रुख किया।
बताया गया कि वीडियो में दिखाया गया एक चेहरा कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi से मिलता-जुलता था, जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री Tarun Gogoi के पुत्र हैं।

मुख्यमंत्री और बीजेपी की सफाई

विवाद बढ़ने पर मुख्यमंत्री सरमा ने कहा कि उनका विरोध “असमिया मुसलमानों” से नहीं, बल्कि कथित तौर पर Bangladesh से अवैध रूप से आने वाले लोगों से है। पार्टी की ओर से भी बयान जारी कर कहा गया कि वीडियो “अपरिपक्व तरीके” से साझा हुआ और जिम्मेदार पदाधिकारी को हटा दिया गया है।

‘मिया’ शब्द क्यों बना राजनीतिक मुद्दा

असम में “मिया” शब्द का इस्तेमाल आम तौर पर बंगाली-भाषी मुसलमानों के लिए किया जाता है। आलोचकों का कहना है कि इसे कई लोग अपमानजनक मानते हैं। इस समुदाय पर लंबे समय से अवैध प्रवास के आरोप लगाए जाते रहे हैं। नागरिकता, मतदाता सूची और भूमि अतिक्रमण जैसे मुद्दों के साथ यह बहस जुड़ती रही है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे विवाद

यह पहली बार नहीं है जब राज्य की राजनीति में इस तरह की सामग्री को लेकर विवाद हुआ हो।
पिछले वर्ष भी एआई से तैयार एक वीडियो पोस्ट किया गया था, जिसमें कथित तौर पर “घुसपैठ” का दृश्य दिखाया गया था। उस मामले में भी अदालत के हस्तक्षेप के बाद सामग्री हटानी पड़ी थी। इससे जुड़े मामलों पर Supreme Court of India तक याचिकाएं पहुंच चुकी हैं।

जनसंख्या और राजनीतिक समीकरण

2011 की जनगणना के अनुसार असम में मुसलमानों की आबादी लगभग 34% थी, जो अब विभिन्न अनुमानों में अधिक बताई जाती है।
राज्य के कई सीमावर्ती जिले मुस्लिम-बहुल हैं, और इन्हीं इलाकों में अतिक्रमण विरोधी अभियान तथा नागरिकता से जुड़े मुद्दे सबसे अधिक राजनीतिक बहस का कारण बने हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों की क्या राय

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा सिर्फ असम की आंतरिक राजनीति तक सीमित नहीं है। इसका प्रभाव पड़ोसी राज्य West Bengal की राजनीति तक जोड़कर देखा जा रहा है। पहचान, प्रवास और मतदाता आधार से जुड़े सवालों को चुनावी रणनीति का हिस्सा बनाया जा रहा है।

आगे क्या?

विवादित वीडियो को हटाया जा चुका है और पुलिस में शिकायत दर्ज होने के बाद मामले की जांच जारी है।
हालांकि, “मिया” पहचान, अवैध प्रवास और नागरिकता जैसे मुद्दे असम की राजनीति में आने वाले समय में भी प्रमुख बने रहने के संकेत दे रहे हैं।

Javed Khan on Creating a Scalable Support Infrastructure for International Brokerage Companies

London / Dubai / India — August 2026: International brokerage companies often need to balance business growth with the practical demands of customer service,...

Amresh Majhi’s Journey from Banking Professional to Entrepreneur and Manufacturer

Sundergarh, Odisha: Amresh Majhi has built a diverse professional career that has taken him from banking and financial services to international corporate assignments and...