भक्तों को प्रसाद में मिलेगा चढ़ावे का पैसा

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रतलाम। दीपोत्सव पर इस बार रतलाम शहर के माणकचौक स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर के साथ पहली बार कालिका माता मंदिर क्षेत्र स्थित श्री महालक्ष्मीनारायण मंदिर में धनलक्ष्मी से आकर्षक सजावट की गई है। सजावट में भक्तों द्वारा दी गई एक, दो, पांच 10, 20, 50, 100, 200, 5000 रुपये के नोटों की गड्डियों का उपयोग किया गया है।

दोनों मंदिर में इस बार केवल नोटों से ही सजावट की गई और भक्त दीपोत्सव तक सजावट को निहार सकेंगे। माणकचौक मंदिर में शनिवार से भक्तों में कुबेर पोटली का वितरण भी शुरू किया गया।

देशभर में प्रसिद्ध है यह मंदिर
दरअसल, माणकचौक स्थित महालक्ष्मी मंदिर नोट और आभूषणों की सजावट के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, लेकिन इस बार यहां केवल नोटों से ही सजावट गई है। नोट देने वाले भक्तों की ऑनलाइन एंट्री की गई है। नकदी लेकर आने वाले श्रद्धालुओं को ई-मेल पर टोकन नंबर दिए गए। टोकन प्राप्त करने के बाद ओटीपी बताने के बाद राशि ली गई। साथ ही मोबाइल नंबर, आधार नंबर भी लिए गए। जिन्हें जमा किया हुआ पैसा प्रसाद के रूप में दिया जाएगा।

नहीं लिए जा रहें आभूषण
राशि लौटाने के दौरान भी नया ओटीपी और टोकन नंबर बताना पड़ेगा। मंदिर की सुरक्षा को लेकर 22 सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। मंदिर के अश्विन पुजारी ने बताया कि सैकड़ों श्रद्धालुओं ने नकदी जमा करवाई है। इसमें एक से लेकर 500 रुपये के नोटों की गड्डियां शामिल हैं। इस बार आभूषण नहीं ले रहे हैं। केवल नोटों से मंदिर की सजावट की गई है। सुरक्षा को देखते हुए माणकचौक थाने के पुलिस जवान तैनात हैं।

पहली बार दमका महालक्ष्मीनारायण मंदिर
माणकचौक मंदिर की तर्ज पर पहली बार कालिका माता मंदिर क्षेत्र स्थित श्री महालक्ष्मीनारायण मंदिर में दीपोत्सव के लिए सजावट की गई। यहां भी सैकड़ों भक्तों द्वारा नोटों की गड्डियां जमा करवाई गई, जिससे सजावट की गई है।

सुरक्षा के लिए पुलिस जवान तैनात
पुजारी असीम और दीपक व्यास ने बताया कि भक्तों से आधार कार्ड की छायाप्रति लेकर रसीद दी गई है। इसमें कितनी राशि जमा करवाई गई है, उसका उल्लेख किया गया है। मंदिर परिसर में चार स्थाई सीसीटीवी कैमरे हैं। साथ ही छह अस्थाई कैमरे लगाए गए हैं। इससे मंदिर परिसर की सारी गतिविधियां कैद की जा रही है। पुलिस जवान भी तैनात है।

संविधान और लाल गुलाब के साथ 210 माओवादियों का आत्मसमर्पण, अबूझमाड़ का 4,400 वर्ग किमी क्षेत्र माओवाद मुक्त

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 नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में शुक्रवार को दंडकारण्यस्पेशलजोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) सदस्य भास्कर उर्फ राजमनमंडावी, रनीता, राजू सलाम सहित 210 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने मंच पर पहुंचे माओवादियों की बंदूकें झुकी थीं और उनके हाथों में संविधान की किताब व लाल गुलाब थे। यह प्रतीक था हिंसा से शांति की ओर यात्रा का।

इस मौके पर माओवादियों का नेतृत्व सेंट्रल कमेटी सदस्य व दंडकारण्यस्पेशलजोनल कमेटी के प्रवक्ता रूपेश उर्फ विकल्प ने किया। पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, आइजीपीसुंदरराज पी. और सुरक्षा बलों की मौजूदगी में कुल 153 हथियारों के साथ यह अब तक का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण है। इसके साथ ही अबूझमाड़ के 4400 वर्ग किलोमीटर, कांकेर जिले और महाराष्ट्र सीमा तक का क्षेत्र माओवाद मुक्त हो गया है।

210 माओवादियों का छत्तीसगढ़ में आत्मसमर्पण
माओवाद के सशस्त्र आंदोलन का यह सबसे निर्णायक मोड़ है, क्योंकि इसके साथ ही माड़ डिवीजन, गढ़चिरौली कमेटी, उत्तर-पूर्वी बस्तर डिविजन, कंपनी नंबर-1 और 10, संचार, प्रेस और डाक्टर टीम पूरी तरह संगठन से बाहर आ चुकी हैं। यह माओवादी आंदोलन के अंतिम अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है। अब बस्तर में सुकमा, बीजापुर और दंतेवाड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों में ही माओवादियों सिमट कर रह गए हैं।

अबूझमाड़ का 4400 वर्ग किमी क्षेत्र माओवाद मुक्त
कार्यक्रम स्थल पर सफेद कपड़े का आवरण हटते ही हथियारों का ढेर सामने आया। 19 एके-47, 17 एसएलआर(सेल्फलोडिंगराइफल), 23 इंसासराइफल, एक इंसासएलएमजी (लाइट मशीनगन), एक यूबीजीएल (अंडर बैरलग्रेनेडलांचर), 36 थ्री-नाट-थ्रीराइफल, चार कार्बाइन, 11 बीजीएल (बैरेलग्रेनेडलांचर), 41 नग 12 बोर बंदूकें और एक पिस्टल नजर आई।

सरकार द्वारा तीन वर्ष तक मिलेगी आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री बोले- तीन वर्ष तक मिलेगी आर्थिक सहायताइस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेवसाय और गृह मंत्री विजय शर्मा ने जगदलपुर में ही पुलिस कोआर्डिनेशन सेंटर से शांति का संदेश दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह दिन छत्तीसगढ़ के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। भटके हुए लोग महात्मा गांधी के अहिंसा मार्ग और सरकार की पुनर्वास नीति पर विश्वास जताकर लौटे हैं। हम उन्हें तीन वर्ष तक आर्थिक सहायता और जीवन पुनर्वास का संपूर्ण अवसरदेंगे। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व मेंबनी हमारी पुनर्वास और उद्योग नीति का यह परिणाम है।

पत्नी कांस्टेबल ने पहले गला, फिर पेट में मारा चाकू, पति की मौत

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कर्नाटक: कर्नाटक के बेलगाम जिले में हत्या की एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां एक कांस्टेबल पति ने अपनी पत्नी का बेरहमी से गला रेतकर मौत के घाट उतार दिया. सूचना मिलते ही मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. साथ ही फरार चल रहे आरोपी पति की तलाश तेज कर दी है. घटना से इलाके में दहशत का माहौल है. घर से बदबू आने से महिला के हत्याकांड का पुलिस को पता चला.

बेलगाम जिले के सवादत्ती कस्बे में कांस्टेबल पति संतोष कांबले ने अपनी पत्नी की गला रेतकर हत्या कर दी. मृतका की पहचान कशम्मा नेलिगानी (34) के तौर पर हुई है, जो कि केएसआरटीसी में बस कंडक्टर के तौर पर कार्यरत थी. संतोष और कशम्मा ने 13 साल पहले लव मैरिज की थी. शादी के कुछ समय बाद तक सब कुछ ठीक रहा, लेकिन संतोष के कशम्मा पर शक करने के चलते उनके रिश्ते में दरारें आती चली गई.

‘फोन कर गालियां देता था संतोष’
पति के शारीरिक और मानसिक शोषण से परेशान होकर कशम्मा ने पति को छोड़ दिया और अपने मायके आकर रहने लगी. इस बीच उनका ट्रांसफर सवादत्ती में हो गया और वह उस इलाके में किराए पर मकान रहकर रहने लगी. वैवाहिक जीवन में लगातार चल रहे कलह के चलते, कशम्मा ने बैलहोंगल कोर्ट में तलाक की अर्जी दी थी. 5 अप्रैल 2025 को उनका आधिकारिक रूप से तलाक हो गया. उनके परिवार ने बताया कि तलाक के बाद भी संतोष कशम्मा को फोन करके गालियां देता रहा.

पति ने गला रेतकर की पत्नी की हत्या
13 अक्टूबर की रात 8 बजे संतोष कशम्मा के घर गया और हंगामा करने लगा. गुस्से में आकर उसने कशम्मा का गला रेत दिया. साथ ही पेट में तीन बार चाकू घोंप दिया, जिससे उसकी तड़प-तड़पकर मौत हो गई. तीन दिन बाद घर से बदबू आने पर पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी. मौके पर पहुंचीसवादत्तीपुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पुलिस फरार आरोपी संतोष कांबले की तलाश में तलाशी अभियान चला रही है.

भारत में 55 हिम झीलों का आकार 27% बढ़ा, जल संकट दूर होने की उम्मीद

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नई दिल्ली। सिकुड़ते ग्लेशियरों के बीच केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट में अच्छी तस्वीर दिखी है। 55 हिमनद झीलों का विश्लेषण करने वाली इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हिमनद झीलों का आकार 2011 से जुलाई 2025 के बीच 27 प्रतिशत से अधिक बढ़ गया है। इससे पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की किल्लत दूर होने की उम्मीद जगी है।

 केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) द्वारा जारी ”हिमालयी क्षेत्र में हिमनद झीलों की मासिक निगरानी रिपोर्ट, जुलाई 2025 में कहा गया है कि भारत में हिमनद झीलों का कुल क्षेत्रफल 2011 में 1,952 हेक्टेयर से बढ़कर जुलाई 2025 में 2,496 हेक्टेयर हो गया है।

रिपोर्ट के अनुसार हिमनद झीलों के क्षेत्रफल में 27.87 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। 100 हिमनद झीलों में से केवल 55 हिमनद झीलों पर विचार किया गया था। शेष झीलों में 40 सुप्राग्लेशियल डेब्रिस कवर (एसडीसी) झीलें शामिल हैं, जिनका कोई विवरण नहीं है और साथ ही वे झीलें भी हैं जिनका विश्लेषण नहीं किया गया था।

 निगरानी के लिए चिन्हित झीलों में लद्दाख में आठ, जम्मू और कश्मीर में सात, हिमाचल प्रदेश में पांच, उत्तराखंड में छह, सिक्किम में 28 और अरुणाचल प्रदेश में चार हिमनद झीलें शामिल हैं।

 सीडब्ल्यूसी की निगरानी में यह भी पाया गया कि हिमालयी क्षेत्र में हिमनद झीलों का कुल क्षेत्रफल 2011 में 5,29,116 हेक्टेयर से बढ़कर 2025 में 5,61,014 हेक्टेयर हो गया, जो 6.03 प्रतिशत की समग्र वृद्धि को दर्शाता है।

 निगरानी गूगल अर्थ इंजन प्लेटफार्म के माध्यम से संसाधित सेंटिनल-1 और सेंटिनल-2 उपग्रह इमेजरी का उपयोग करके की गई थी। झीलों को उनके जल प्रसार क्षेत्र में परिवर्तन के आधार पर वर्गीकृत किया गया था।

 सीडब्ल्यूसी ने जुलाई 2025 के दौरान कुल 2,843 हिमनद झीलों और जल निकायों का अवलोकन किया। इनमें भारत में स्थित 581 हिमनद झीलें और सीमा पार क्षेत्र में 1,360 झीलें शामिल हैं, जो सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटियों को कवर करती हैं।

सेना में ग्रीन टेक्नोलॉजी की दस्तक, JBM ऑटो से खरीदी गई ई-बसें

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भारतीय सेना ने 17 अक्टूबर 2025 को ₹130.58 करोड़ की लागत से 113 इलेक्ट्रिक बसें और 43 फास्ट चार्जर खरीदने के लिए जेबीएम ऑटो लिमिटेड (JBM Auto Ltd) के साथ एक अनुबंध पर साइन किए हैं. यह सेना द्वारा इस तरह की पहली खरीद है, जो प्रधानमंत्री ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) पहल के तहत स्वच्छ और हरित पर्यावरण की दिशा में एक बड़ा कदम है. इन इलेक्ट्रिक बसों के शामिल होने से सेना के तीनों अंगों में तकनीकी और पर्यावरणीय सुधार का नया दौर शुरू होगा. इससे फॉसिल फ्यूल पर निर्भरता घटेगी और ग्रीन टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा.

यह खरीद बाय (इंडियन-IDDM) श्रेणी के तहत की गई है, जो भारत की स्वदेशी निर्माण क्षमता और आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण है. यह कदम न केवल रक्षा बलों को आधुनिक बनाएगा बल्कि आत्मनिर्भर भारत और नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण योगदान देगा.

113 इलेक्ट्रिक बसें हुईं शामिल
भारतीय सेना में पहली इलेक्ट्रिक बसों की एंट्री हुई है. इससे पहले कई तरह की बसें मौजूद थीं. हालांकि वे फ्यूल पर आधारित थीं. जो बसें हाल ही में शामिल की गई हैं, ये पूरी तरह से इलेक्ट्रिक हैं. मतलब अब फ्यूल का टेंशन खत्म होगा. इसके साथ ही पर्यावरण के लिए यह एक अच्छा कदम माना जा रहा है. यह बस 250 की माइलेज देती है. 40 सीटों वाली ये बस मुख्य रूप से मैदानी और पहाड़ी क्षेत्रों में तैनात की जाएगी.

सेना की तरफ से उठाए जा रहे कई कदम
भारतीय सेना लगातार खुद को एडवांस करने पर जोर दे रही है. यही कारण है कि पिछले कई महीनों के भीतर सेना में कई एडवांस हथियार शामिल हुए हैं. इसके अलावा कई ऐसी परियोजनाओं पर काम भी शुरू हुआ है जिससे आने वाले समय में सेना की ताकत में काफी इजाफा होगा. पिछले दिनों सेना ने यूके से लाइट वेट मॉड्यूलर मिसाइल (LMM) सिस्टम खरीदा है. यह हल्का और आसानी से ले जाने वाला मिसाइल सिस्टम है, जिसे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों समेत कहीं भी लगाया जा सकता है.

303 नक्सलियों ने 75 घंटे में डाले हथियार, PM मोदी बोले – अब बदल रहा है भारत

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस माओवादी आतंक को छुपाती है. इनके शासन में देश का करीब हर बड़ा राज्य नक्सली हिंसा और माओवादी आतंक की चपेट में था. उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा- मैं बहुत जिम्मेदारी से बोलता हूं, जो माथे पर संविधान लेकर नाचते हैं. वो आज भी माओवादियों की रक्षा में दिन रात लगे हैं, लेकिन इस बार की दिवाली काफी अलग होने वाली है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में जो अर्बन नक्सलियों का जो इकोसिस्टम है, ये जो अर्बन नक्सल्स है. वो कुछ इस कदर हावी थे, आज भी हैं, कि माओवादी आतंक का कोई भी घटना देश के लोगों तक न पहुंचे इसके लिए वो बहुत बड़ी सेंसरशिप चलाते रहते हैं वो. उन्होंने आगे कहा- हमारे देश में आतंकवाद की चर्चा होती थी. कांग्रेस के शासन में माओवादी आतंक पर पर्दा डाला गया. इस आतंक के कई पीड़ित दिल्ली आए थे. उनके अंग भंग थे. ये माओवादी के आतंक के शिकार थे. इनमें कई लोगों के दोनों पैर कट चुके थे. 7 दिन रहे, हाथ-पैर जोड़कर कहा कि हमारी बात दुनिया तक पहुंचाए. ये माओवादी आतंक के ठेकेदार जो बैठे हैं ना उन्होंने उस जुल्म के शिकार हुए, उनके दर्द की कथा भी हिंदुस्तान के लोगों तक नहीं पहुंचने दी.

75 घंटों में 303 नक्सलियों ने डाले हथियार
प्रधानमंत्री मोदी ने ने कहा, 11 साल पहले तक देश के सवा सौ जिले, 125 से ज्यादा, माओवादी आतंक से प्रभावित थे और आज ये संख्या सिर्फ 11 जिलों तक सिमट गई है. उस 11 में भी अब सिर्फ तीन जिले ही ऐसे बचे हैं, जो सबसे अधिक नक्सल प्रभावित हैं. सिर्फ पिछले 75 घंटों में 303 नक्सलियों ने हथियार डाले हैं. एक जमाने में जिनका 303 (गोली) चलता था, आज वो 303 सरेंडर हुए हैं. और ये कोई सामान्य नक्सली नहीं हैं, ये वो हैं जिनमें से किसी पर एक करोड़, किसी पर 25 लाख तो किसी पर 5 लाख का इनाम था.

उन्होंने कहा, नक्सली हिंसा के कारण मैं बेचैनी महसूस करता था, जुबान पे ताला लगा के बैठा था, आज पहली बार मेरे दर्द को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं. मैं उन माताओं को जानता हूं जिन्होंने अपने लाल खोए हैं. उन माताओं की अपने लाल से कुछ अपेक्षाएं थी. या तो वो ये माओवादी आतंकियों के झूठे बातों में फंस गए या तो माओवादी आतंक का शिकार हो गए. इसलिए, 2014 के बाद हमारी सरकार ने पूरी संवेदनशीलता के साथ भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया.

पीएम मोदी ने राहुल पर साधा निशाना
प्रधानमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राहुल गांधी पर भी हमला बोला है. उन्होंने कहा कि 11 साल पहले देश का करीब-करीब हर बड़ा राज्य माओवादी आतंक की चपेट में था. बाकी देश में संविधान लागू था, लेकिन लाल गलियारे में संविधान का कोई नाम लेने वाला नहीं था. पीएम ने राहुल गांधी का बिना नाम लिए कहा, जो लोग आज माथे पे संविधान की किताब लगाते हैं, वे आज भी माओवादी आतंकियों की रक्षा के लिए दिन रात लगा देते हैं.

सरहिंद में अमृतसर-सहरसा गरीब रथ में भीषण आग, सभी यात्री सुरक्षित

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पंजाब के सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास आज एक बड़ा रेल हादसा टल गया. अमृतसर से सहरसा जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस में अचानक आग लगने से यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई. घटना उस वक्त हुई जब ट्रेन अंबाला से आधा किलोमीटर आगे सरहिंद स्टेशन के पास पहुंची थी. ट्रेन के एक डिब्बे से धुआं उठता देख यात्रियों ने तुरंत इसकी जानकारी रेलवे कर्मियों को दी. चालक ने सूझबूझ दिखाते हुए ट्रेन को तुरंत रोक दिया, जिससे बड़ा हादसा होने से बच गया. घटना सुबह करीब 7:30 बजे की बताई जा रही है. रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं और किसी के हताहत या घायल होने की खबर नहीं है. आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं हुई है, लेकिन तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट को संभावित कारण माना जा रहा है.

ट्रेन जल्द रवाना होगी अपने गंतव्य की ओर

अधिकारियों ने बताया कि आग पर काबू पाने के बाद ट्रेन की स्थिति का निरीक्षण किया जा रहा है. क्षतिग्रस्त कोच की जांच के बाद ट्रेन को जल्द ही अपने गंतव्य सहरसा की ओर रवाना किया जाएगा. रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी की टीमों ने पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरा में ले लिया है और यात्रियों को सभी आवश्यक सुविधाएं मुहैया की जा रही हैं.

यात्रियों में घबराहट लेकिन सुरक्षा कर्मियों की तत्परता से मिली राहत

आग लगने की खबर फैलते ही यात्रियों में थोड़ी देर के लिए घबराहट फैल गई थी,लेकिन रेलवे और दमकलकर्मियों की तुरंत कार्रवाई ने सब कुछ संभाल लिया. इस घटना में रेलवे कर्मचारियों की तत्परता और फायर यूनिट की तेज़ प्रतिक्रिया ने संभावित बड़ा हादसा टाल दिया.

इंडियन रेलवे ने क्या बताया?

भारतीय रेलवे ने इस हादसे के बारे में ‘X’ (ट्विटर) पर जानकारी दी, जिस पर आईआर ने लिखा कि ट्रेन संख्या 12204 (अमृतसर-सहरसा) के एक कोच में आज सुबह (सुबह 7:30 बजे) सरहिंद स्टेशन पर आग लग गई. रेलवे कर्मचारियों ने तुरंत सभी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और आग बुझा दी. किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. प्रभावित कोच को अलग कर दिया गया है. आग लगने के कारणों की जांच जारी है.

स्वदेशी तेजस एमके 1ए की पहली उड़ान सफल, राजनाथ सिंह बोले – ये नया बेंचमार्क है

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 नई दिल्ली। भारत के स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एमके1ए ने आज अपनी पहली उड़ान भरी। हिंदुस्तान एयरोनोटिक्स लिमिटेड के नासिक स्थित एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरिंग डिविजन से तेजस ने ये उड़ान भरी। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मौजूद रहे और उन्होंने इस कदम को ऐतिहासिक बताया।

दरअसल, तेजस की ये उड़ान भारत में ऐसे लड़ाकू विमानों के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस खास मौके पर राजनाथ सिंह ने LCA Mk1A की तीसरी प्रोडक्शन लाइन का उद्घाटन किया।

राजनाथ सिंह ने की HAL की तारीफ
वहीं, इससे पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की तारीफ की। उन्होंने कहा कि एचएएल ने अपने नए ‘मिनी स्मार्ट टाउनशिप’ प्रोजेक्ट के साथ सस्टेनेबल डेवलपमेंट में एक मिसाल कायम की है।0

राजनाथ सिंह ने क्या कहा?
आज इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि HAL का मॉडल दूसरी इंडस्ट्रीज के लिए एक बेंचमार्क स्थापित हो रहा है। उन्होंने इस दौरान सस्टेनेबल टाउनशिप बनाने की उनकी कोशिशों के लिए पूरे HAL परिवार को बधाई दी।

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया पर्यावरण बचाने की बात कर रही है। इस दौर में, HAL ने इस टाउनशिप के जरिए एक मिसाल कायम की है। मेरा मानना है कि HAL का मॉडल अब दूसरी इंडस्ट्रीज के लिए एक बेंचमार्क बनेगा।

वायुसेना में कब शामिल होंगे तेजस?
तेजस एमके1ए को वायुसेना में कब शामिल होगा, इसको लेकर अभी तारीखों का एलान नहीं हुआ है। हालांकि, एचएएल का कहना है कि आने वाले चार साल में भारतीय वायुसेना को 83 तेजस मार्क1ए लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की जाएगी। बताया जा रहा है कि अमेरिकी इंजन की आपूर्ति में देरी के कारण इसके निर्माण में देरी हो रही है।

गौरतलब है कि नासिक स्थित एचएएल की एयरक्राफ्ट मैन्यूफैक्चरिंग डिविजन में हर साल आठ लड़ाकू विमानों का निर्माण करने की क्षमता है। वहीं, नासिक के अलावा बेंगलुरु में भी तेजस की दो प्रोडक्शन लाइन स्थित है। यहां पर हर साल 16 लड़ाकू विमान बनाए जाते हैं। 

समीर वानखेड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से केंद्र को झटका, फैक्ट छिपाने पर लगाया जुर्माना

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नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court)  ने आज शुक्रवार को भारतीय राजस्व सेवा (Indian Revenue Service) के अधिकारी समीर वानखेड़े (Sameer Wankhede) को प्रमोशन देने से संबंधित फैसले की समीक्षा याचिका में तथ्य छिपाने के लिए केंद्र सरकार (Central Government) पर जुर्माना लगाया. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस मधु जैन की डिवीजन बेंच ने केंद्र पर 20 हजार रुपये का जुर्माना लगाया और समीक्षा याचिका (Review Petition) खारिज कर दी.

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के आचरण की निंदा करते हुए कहा, “हमें उम्मीद है कि केंद्र सरकार याचिका दायर करने से पहले सभी तथ्यों का सच्चाई से खुलासा करेगी.” साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि केंद्र इस तथ्य का खुलासा करने में नाकाम रहा कि कैट ने अगस्त में वानखेड़े के खिलाफ विभागीय कार्यवाही पर रोक लगा दी थी.

कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि कैट का आदेश केंद्र द्वारा पुनर्विचार याचिका दायर करने से पहले ही पारित हो चुका था. दरअसल, केंद्र सरकार ने 28 अगस्त को पारित उस फैसले की समीक्षा की मांग की थी जिसमें UPSC की ओर से समीर वानखेड़े को उपयुक्त पाए जाने पर उन्हें प्रमोशन दिए जाने के निर्देश के खिलाफ उसकी याचिका खारिज कर दी गई थी.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (Central Administrative Tribunal) के आदेश को बरकरार रखा और केंद्र सरकार को 4 हफ्ते के भीतर निर्देश का पालन करने को कहा. आदेश के मुताबिक, कैट ने सरकार को समीर वानखेड़े को प्रमोशन दिए जाने से संबंधित सीलबंद लिफाफा खोलने का निर्देश दिया था और कहा था कि अगर UPSC द्वारा उनके नाम की सिफारिश की जाती है, तो उन्हें 1 जनवरी, 2021 से अतिरिक्त आयुक्त के पद पर प्रमोट किया जाएगा.

केंद्र सरकार का कहना था कि कैट इस फैक्ट को समझ पाने में नाकाम रहा कि समीर वानखेड़े के खिलाफ CBI और ED की ओर से मामले दर्ज किए गए थे. साथ ही एक शिकायत भी मिली हुई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए फर्जी जाति प्रमाण पत्र पेश किया था.

‘समय होता तो इलाज यहीं कराता’, भारत दौरे पर आए ब्रिक्स नेता ने की आयुर्वेद की तारीफ

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नई दिल्ली: ब्राजील (Brazil) के उपराष्ट्रपति गेराल्डो अल्कमिन (Geraldo Alkmin) बुधवार को तीन दिवसीय यात्रा (Three-Day Trip) पर भारत (India) आए हैं. इस यात्रा के दौरान उन्होंने नई दिल्ली (New Delhi) के ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (All India Institute of Ayurveda) का दौरा किया. उन्होंने आयुर्वेद को स्वास्थ्य और ज्ञान का 5,000 साल पुराना खजाना बताया और कहा कि अगर उनकी यात्रा इतनी छोटी न होती तो वह यहां अपनी पीठ का इलाज जरूर करवाते.

अल्कमिन ने आयुर्वेद को लेकर भारत की सराहना करते हुए कहा कि आयुर्वेद 5 हजार साल पुराना स्वास्थ्य और ज्ञान का खजाना है. उन्होंने AIIA को भी उसके शानदार काम के लिए बधाई दी और कहा कि यह संस्थान स्वास्थ्य को बढ़ावा देने और बीमारियों का इलाज करने के साथ-साथ शिक्षा और रिसर्च में भी अच्छा काम कर रहा है.

उपराष्ट्रपति अल्कमिन ने दुनिया भर में आयुर्वेद के महत्व को बताते हुए कहा कि लोगों की उम्र बढ़ रही है और आयुर्वेद जैसी प्राकृतिक रोकथाम वाली स्वास्थ्य प्रणालियों की मांग भी बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि अगर मेरा यह दौरा छोटा न होता तो मैं निश्चित रूप से अपने पीठ के दर्द का इलाज AIIA में ही करवाता. उन्होंने भारत सरकार और एआईआईए की टीम को उनके गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद दिया और उनके प्रति अपना आभार जताया. उपराष्ट्रपति के साथ उनकी पत्नी मारिया लूसिया अल्कमिन और 14 वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे.