आयुष्मान खुराना और ताहिरा कश्यप की शादी की सालगिरह पर छलका प्यार, पोस्ट में लिखा दिल छू लेने वाला संदेश

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मुंबई: आयुष्मान खुराना अपनी फिल्म ‘थामा’ की वजह से सुर्खियों में हैं। इस बीच आज उनकी शादी की सालगिरह है। इस मौके पर उनकी पत्नी ताहिरा कश्यप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर दोनों की तस्वीरें शेयर की हैं और एक बेहतरीन पोस्ट लिखी है। आइए देखते हैं उनकी पोस्ट में क्या है?

ताहिरा ने शेयर की तस्वीरें
ताहिरा कश्यप ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उसमें वह दुल्हन की तरह नजर आ रही हैं। उनके पति आयुष्मान खुराना उनके माथे को चूम रहे हैं। ताहिरा ने अपने पति के सीने पर दोनों हाथ रखे हैं। एक दूसरी तस्वीर में ताहिरा कश्यप ने आयुष्मान के कंधे पर हाथ रखे हैं और दोनों सुकून के पल बिता रहे हैं।

ताहिरा ने लिखी बेहतरीन पोस्ट
तस्वीरें शेयर करते हुए ताहिरा कश्यप ने पोस्ट में लिखा है ‘कानूनी शादी की सालगिरह की शुभकामनाएं। 17 साल पहले इसी दिन हमारी शादी हुई थी। दुनिया की हलचल और उतार चढ़ाव के बीच तुम मेरा ठहराव हो। ऐसा लगता है जैसे आप हमेशा से ऐसे ही रहे हैं। सबसे बुरे दौर में भी आप मेरे लिए सबसे अच्छा करते रहे। आपने मेरे लिए वह किया जो कोई नहीं कर सकता, शायद कोई और नहीं करेगा।’

ताहिरा की पोस्ट पर सेलेब्स ने किए कमेंट
ताहिरा की पोस्ट को कई यूजर्स ने लाइक किया है। इस पर कई सेलेब्स ने कमेंट किए हैं। अभिनेत्री नीना गुप्ता ने लिखा ‘तुम पर आशीर्वाद।’ रकुल प्रीत सिंह ने लिखा ‘सबसे प्यारे कपल को शुभकामनाएं।’ ट्विंकल खन्ना ने दिल वाले और ताली बजाने वाला इमोजी कमेंट किया है। सोनाली बेंद्रे ने दिल वाला इमोजी कमेंट किया है।

आयुष्मान खुराना की शादी
आयुष्मान खुराना ने साल 2008 में अपनी बचपन की दोस्त, फिल्म निर्माता और पत्रकारिता की अध्यापिका ताहिरा कश्यप से शादी की थी। दोनों ने एक बेटा और एक बेटी का स्वागत किया है।

आयुष्मान खुराना का काम
आयुष्मान को आखिरी बार 21 अक्तूबर को रिलीज हुई फिल्म ‘थामा’ में देखा गया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 111 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। वह जल्द ही फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ का हिस्सा होंगे।

इस सर्दी में मौसम होगा बेहद कड़क, पंसारी से लाएं ये 4 जरूरी चीजें, वरना ठंड से मुश्किलें बढ़ेंगी

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साइंटिस्ट मान रहे हैं कि इस बार लोगों को कड़ाके की ठंड देखने को मिल सकती है। जिस वजह से सांस और फेफड़ों से जुड़े रोग बढ़ सकते हैं। खुद को ठंड से बचाने के लिए पंसारी से कुछ आयुर्वेदिक जड़ी बूटी लाकर रख लें और सेवन करें।

2025 में ठंड को लेकर वैज्ञानिकों की चेतावनी
इस साल की सर्दी को लेकर साइंटिस्ट चेतावनी जारी करने में लगे हैं। ला नीना इफेक्ट के कारण इस बार के मानसून में भारी बारिश देखने को मिली है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह इफेक्ट जारी रहता है तो इस बार उत्तर भारत में भयंकर ठंड देखने को मिल सकती है। इसके साथ पॉल्यूशन, इंफेक्शन आदि का खतरा अरबों लोगों पर मंडरा सकता है।

पंसारी से लेकर आएं 4 सामान
ज्यादा सर्दी और प्रदूषण होने से लोगों को फ्लू, इंफेक्शन, खांसी, बुखार, ठंड लगना, अपर रेस्पिरेटरी इंफेक्शन आदि हो सकता है। खासकर छोटे बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत ज्यादा बिगड़ सकती है क्योंकि उनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है। इसलिए पंसारी से 4 चीज लाकर घर में रख लें और सर्दी के दौरान इस्तेमाल करें।

पीपली पाउडर
देश के जाने माने आयुर्वेदिक एक्सपर्ट डॉक्टर अबरार मुल्तानी के मुताबिक पीपली का सेवन सर्दी में जरूर करना चाहिए। रोज इसका पाउडर कुछ चुटकी लेकर शहद के साथ खाएं। इसकी तासीर काफी गर्म होती है, जो सर्दी-खांसी से बचाती है। साथ में पेट की अग्नि बढ़ाती है, जो कि ठंड में आमतौर पर कम होती है।

मुलेठी
ठंड लगने की वजह से गले में खराबी, सूजन, दर्द हो सकती है। इसके लिए मुलेठी या उसके पाउडर का सेवन करें। इससे ना केवल आपके गले को आराम मिलेगा, बल्कि खांसी और अपर रेस्पिरेटरी सिस्टम भी हेल्दी रहेगा।

सोंठ
अदरक को सूखाकर जो पाउडर बनाया जाता है, उसे सोंठ कहते हैं। यह अदरक के मुकाबले ज्यादा गर्म होता है। इस वजह से सर्दी में सेवन किया जाता है और बुखार, फ्लू, कमजोर पाचन आदि से बचा सकता है। इसमें एंटी बैक्टीरियल, एंटी इंफ्लामेटरी और एंटी माइक्रोबियल गुण होते हैं।

गुड़
डॉक्टर अबरार मुल्तानी ने ठंड के मौसम में गुड़ खाने की सलाह दी है। क्योंकि इस दौरान प्रदूषण का बढ़ना फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। रात में थोड़ा सा गुड़ खाने से मुंह और सांस की नली में अटके प्रदूषक कण से राहत मिल सकती है। हालांकि डायबिटीज के रोगी इसका सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

इन मसालों का करें इस्तेमाल
ऊपर दी गई 4 चीजों के अलावा खाने में मसालों का इस्तेमाल करें। दालचीनी, हल्दी, अदरक, काली मिर्च आपके रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और बीमार पड़ने से बचाती है। रोज तुलसी और नीम की कुछ पत्तियां चबाकर जरूर खाएं।

 अमेरिका जाने के खतरनाक ‘डंकी रूट’ पर हरियाणा के 18 वर्षीय युवराज की मौत 

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नई दिल्ली । हरियाणा के कैथल जिले के मोहना गांव के 18 वर्षीय युवराज की मौत अमेरिका जाने के खतरनाक ‘डंकी रूट’ पर हो गई। परिजनों ने शनिवार को बताया कि युवराज पिछले साल अक्टूबर में नौकरी की तलाश में निकला था, लेकिन ग्वाटेमाला में मानव तस्करों  ने उसे बंधक बना लिया और कथित रूप से मार डाला। युवराज के पिता किसान हैं, और वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए विदेश जाना चाहता था।
परिवार को युवराज की मौत की जानकारी कुछ दिन पहले मिली, जब एक  मानव तस्कर  ने उसकी मौत का सर्टिफिकेट और तस्वीरें भेजीं। तस्वीरों में युवराज और पंजाब के एक अन्य युवक को मृत दिखाया गया था। युवराज के मामा गुरपेज सिंह ने बताया कि हरियाणा के तीन ट्रैवल एजेंटों ने परिवार से सुरक्षित यात्रा का झांसा देकर भारी रकम ली थी। एजेंट अपने नेटवर्क के ज़रिए युवराज को विदेश भेजने की कोशिश कर रहे थे। पहली किस्त देने के बाद युवराज से परिवार का संपर्क टूट गया। कुछ महीनों बाद परिवार को वीडियो मिले, जिनमें युवराज और पंजाब का एक अन्य युवक ग्वाटेमाला में बंधक बनाए गए दिख रहे थे। इसके बाद  मानव तस्करों  ने फिरौती की मांग की। 

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वुमेंस क्रिकेट के स्टार पल: 21वीं सदी की 7 सबसे बड़ी वनडे जीतें

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नई दिल्ली: भारत ने 2025 महिला वनडे विश्व कप में इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हराते हुए महिलाओं के वनडे इतिहास में सबसे बड़ा सफल चेज पूरा किया। इस जीत ने न केवल ऑस्ट्रेलिया की 15 मैचों की जीत का सिलसिला तोड़ा, बल्कि भारत को फाइनल में पहुंचाकर यह सुनिश्चित किया कि इस बार फॉर्मेट में नया चैंपियन मिलेगा।

यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार जीतों में से एक बन गई, लेकिन यह पहली बार नहीं था जब भारत ने असंभव को संभव किया। आइए नजर डालते हैं 21वीं सदी की उन ऐतिहासिक जीतों पर जिन्होंने भारत के महिला क्रिकेट की पहचान बदली।

2005 में भारत ने पहली बार महिला विश्व कप के फाइनल में कदम रखा और वह भी मौजूदा चैंपियन न्यूजीलैंड को 40 रनों से हराकर। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत खराब रही। दो शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए, लेकिन अंजुम चोपड़ा और कप्तान मिताली राज ने साझेदारी से पारी को संभाला। दोनों के बीच 66 रनों की साझेदारी हुई। अंजुम के आउट होने के बाद मिताली ने जिम्मेदारी खुद उठाई और नाबाद 91 रन बनाते हुए भारत को 204/6 तक पहुंचाया।

जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 13 पर दो विकेट गंवा चुकी थी, फिर नूशिन अल खदीर ने अपने पहले ही ओवर में दो विकेट निकालकर मैच का रुख पलट दिया। मारिया फाही (73 रन) ने संघर्ष किया, लेकिन भारत की अनुशासित गेंदबाजी ने दक्षिण अफ्रीका को 164 पर रोक दिया। इस जीत ने भारत को पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचाया और महिला क्रिकेट के लिए एक नया युग शुरू हुआ।

बारिश से बाधित रहे इस सेमीफाइनल में हरमनप्रीत कौर का तूफान आया। 42 ओवर के मुकाबले में हरमनप्रीत ने 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन ठोके, जो भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध पारियों में से एक बनी। भारत 35/2 पर संघर्ष कर रहा था, जब हरमनप्रीत क्रीज पर आईं। उन्होंने पहला पचासा 64 गेंदों में और अगले दो 50 रन केवल 43 गेंदों में पूरे किए। भारत ने 281/4 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत में कोशिश की, एलिस विलानी (75) और एलेक्स ब्लैकवेल (90) ने संघर्ष किया, लेकिन अंत में दीप्ति शर्मा ने ब्लैकवेल को बोल्ड कर भारत को जीत दिलाई। यह जीत सिर्फ फाइनल तक का टिकट नहीं थी, बल्कि महिला क्रिकेट को भारत के घर-घर तक पहुंचाने का मोड़ थी। जेमिमा रॉड्रिग्स को भी इसी मैच ने प्रेरित किया था।

2017 विश्व कप फाइनल के बाद भारत और इंग्लैंड की पहली भिड़ंत फिर से रोमांच से भरी रही। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 207 रन बनाए। भारत ने जवाब में स्मृति मंधाना (86 रन) के दम पर 166/3 तक पहुंचते हुए जीत की ओर कदम बढ़ाए, लेकिन मिडिल ऑर्डर के ढहने से टीम 190/9 पर संकट में आ गई। आखिर में एकता बिष्ट और पूनम यादव ने आखिरी विकेट के लिए 18 रनों की नाबाद साझेदारी की और भारत को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। यह जीत इंग्लैंड जैसे चैंपियन को मात देने के साथ भारत के आत्मविश्वास की नई कहानी थी।

ऑस्ट्रेलिया लगातार 26 मैच जीत चुका था, लेकिन भारत ने यह सिलसिला तोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 264/9 बनाए, जिसमें बेथ मूनी और एश्ले गार्डनर ने अर्धशतक जड़े।

भारत ने शेफाली वर्मा और यस्तिका भाटिया की साझेदारी से शानदार शुरुआत की। दोनों के बीच शतकीय साझेदारी हुई। मुकाबला आखिरी ओवर में पहुंच गया। भारत को एक वक्त चार रन की जरूरत थी और दो विकेट बाकी थे। झूलन गोस्वामी ने निकोल कैरी की गेंद पर ऊंचा ड्राइव खेला और भारत ने जीत हासिल की। यह न सिर्फ झूलन का लम्हा था, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के आत्मविश्वास का भी प्रतीक बना।

यह मैच भारत की 1999 के बाद इंग्लैंड में पहली वनडे सीरीज जीत बना। साथ ही यह झूलन गोस्वामी के शानदार करियर का आखिरी मैच भी था। भारत ने शुरुआती झटकों के बावजूद स्मृति मंधाना (50) और दीप्ति शर्मा (50) की मदद से 169 रन बनाए। इंग्लैंड की टीम शुरुआत में ही चार विकेट गंवा बैठी, लेकिन चार्ली डीन (47) ने संघर्ष किया। 44वें ओवर में जब डीन नॉन-स्ट्राइकर एंड पर आगे बढ़ गईं, दीप्ति शर्मा ने उन्हें रन आउट कर दिया और भारत ने जीत दर्ज की। मैदान पर झूलन की आंखों में आंसू थे और भारत ने एक दिग्गज को जीत के साथ विदाई दी।

इस मुकाबले में कुल चार शतक बने और 646 रन बने, महिलाओं के वनडे इतिहास में एक अद्भुत दृश्य। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 325/3 का विशाल स्कोर बनाया। स्मृति मंधाना (136) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (103)* ने रन बरसाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका 67/3 पर जूझ रहा था, लेकिन लौरा वोल्वार्ट (135) और मारीजाने कैप (109) ने 184 रनों की साझेदारी से मुकाबला बराबरी पर ला दिया। आखिरी ओवर में 10 रन चाहिए थे। पूजा वस्त्राकर ने दो विकेट झटके और आखिरी गेंद पर वोल्वार्ट को धीमी गेंद से छकाते हुए जीत भारत के नाम की।

और अब, इतिहास की सबसे बड़ी जीत, महिलाओं के वनडे इतिहास की सबसे बड़ी सफल रनचेज। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 338 रन बनाए। फीबी लिचफील्ड ने शानदार शतक ठोका, जबकि एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने अर्धशतक जड़े। भारत ने जब पीछा शुरू किया तो शुरुआती झटके लगे और स्कोर 60/2 हो गया। लेकिन फिर जेमिमा रॉड्रिग्स (127 नाबाद) और हरमनप्रीत कौर (89) ने पारी को संभालते हुए इतिहास लिखा। दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष और अमनजोत कौर के छोटे, लेकिन तेज योगदान ने भारत को जीत तक पहुंचाया। इस जीत ने न सिर्फ भारत को फाइनल में पहुंचाया, बल्कि महिला क्रिकेट में नया चैंपियन तय कर दिया।

 एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया- प्रियंका गाँधी 

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‎‎बेगूसराय। एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया। 20 साल से प्रदेश की सत्ता में बैठी पार्टी ने आपके लिए कुछ नहीं किया। आपको सिर्फ गरीबी, बेरोजगारी और पलायन दिया है। आज वे आपको बरगलाने में लगे हैं। भविष्य और अतीत की बातों में आपको उलझाते हैं लेकिन आपके संघर्षशील वर्तमान की बातें नहीं करते। सोच समझकर अपने भविष्य का फैसला ​कीजिए और ऐसी सरकार चुनिए जो आपके वर्तमान के लिए काम करे। यह बात शनिवार को बिहार के बेगूसराय जिले के बछवाड़ा में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कही। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती ने आजादी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाई। इस आंदोलन ने हमें हमारा संविधान और वोट का अधिकार दिया। आज नरेंद्र मोदी और एनडीए की सरकार इसी अधिकार को छीन रही है। बिहार में एसआईआर के तहत लाखों वोट काट दिए गए। 20 साल से चल रही एनडीए सरकार ने बिहार को गरीबी, बेरोजगारी व पलायन की विभीषिका में धकेल दिया है और अब जनता का वोट चोरी करके सत्ता बचाने की कोशिश कर रही है। बिहार की जागरूक जनता इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेगी। 

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मेटा को झेलना पड़ सकता है करोड़ों का जुर्माना!

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Meta: सिंगापुर सरकार ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा को रेड अलर्ट जारी किया है। सरकार का संदेश साफ है – फर्जी अकाउंट और ऑनलाइन स्कैम रोकने के लिए मेटा को इस महीने के अंत तक फेस रिकग्निशन जैसी हाई-टेक तकनीक लागू करनी होगी, नहीं तो भारी जुर्माना झेलना होगा।

जुर्माना धमाका

अगर मेटा ने समय पर कदम नहीं उठाया, तो कंपनी पर करीब 6.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा।
और इससे भी बड़ा खतरा – हर दिन 1 लाख डॉलर (लगभग 77 लाख रुपये) का अतिरिक्त जुर्माना बढ़ता रहेगा।
यह चेतावनी सिंगापुर के गृह मंत्रालय ने बुधवार को जारी की।

मेटा का बचाव

मेटा का कहना है:

“फेसबुक पर किसी भी मशहूर शख्स की फोटो या नाम का गलत इस्तेमाल हमारी पॉलिसी के खिलाफ है। ऐसे फेक अकाउंट और विज्ञापन तुरंत हटाए जाते हैं।”

कंपनी ने कहा कि उनके पास स्पेशल सिस्टम हैं जो नकली अकाउंट पकड़ते हैं और पुलिस के साथ मिलकर स्कैमर्स पर कार्रवाई करते हैं।

ऑनलाइन धोखाधड़ी का बढ़ता खतरा

जून 2024 से जून 2025 तक फेसबुक पर फर्जी अकाउंट और विज्ञापन तेजी से बढ़े।
स्कैमर्स सरकारी अधिकारियों की फोटो और वीडियो का इस्तेमाल करके लोगों को ठग रहे हैं।
सरकार का कहना है कि मेटा ने कदम उठाए हैं, लेकिन स्कैम की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

Meta: नए कानून के तहत सख्ती

यह आदेश फरवरी 2024 से लागू ऑनलाइन क्रिमिनल हार्म्स एक्ट के तहत दिया गया है।
मेटा के लिए यह पहला बड़ा केस है।
सिंगापुर ने साफ कर दिया है: सोशल मीडिया कंपनियों पर अब कोई ढीलाई नहीं – वरना करोड़ों का भारी जुर्माना भुगतना पड़ेगा।

स्कूल डांस पार्टी में हुई पहली मुलाकात, शाहरुख-गौरी की लव स्टोरी किसी फिल्म से कम नहीं

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मुंबई: आज 2 नवंबर को शाहरुख खान अपना 60वां जन्मदिन मना रहे हैं। बॉलीवुड में शाहरुख खान और गौरी की लव स्टोरी सबसे खास है। उन्हें सबसे सुंदर कपल कहा जाता है। इस खास अवसर पर जानिए शाहरुख और गौरी खान की दिलचस्प प्रेम कहानी।

पहली मुलाकात कैसे हुई
शाहरुख और गौरी की पहली मुलाकात 1984 में दिल्ली में एक दोस्त की पार्टी में हुई थी। शाहरुख उस समय 18 साल के थे और गौरी 13 साल की। शाहरुख को गौरी पहली नजर में पसंद आ गईं। पार्टी में गौरी किसी और लड़के के साथ डांस कर रही थीं। शाहरुख ने हिम्मत करके गौरी को डांस के लिए कहा, लेकिन गौरी ने मना कर दिया। फिर भी शाहरुख ने बात शुरू की और दोनों दोस्त बन गए।

शाहरुख का प्यार और पजेसिवनेस
शाहरुख गौरी से बेहत प्यार करते थे। शाहरुख, गौरी के लिए काफी पजेसिव भी थे। उन्हें पसंद नहीं था कि गौरी बाल खुला रखें या अकेले किसी लड़के से बात करें। यहां तक की वह गौरी को व्हाइट शर्ट भी नहीं पहनने देते थे। इससे गौरी को लगा कि रिश्ते में ब्रेक लेना चाहिए। लेकिन शाहरुख नहीं माने।

परिवार की नाराजगी
गौरी हिंदू ब्राह्मण परिवार से थीं और शाहरुख मुस्लिम। दोनों के घरवाले शादी से राजी नहीं थे। गौरी के माता-पिता को शाहरुख पसंद नहीं थे क्योंकि वे एक्टर बनना चाहते थे। गौरी के पापा शुद्ध शाकाहारी थे। शाहरुख उस समय फिल्मों में स्ट्रगल कर रहे थे। एक बार गौरी मुंबई चली गईं तो शाहरुख दिल्ली से उन्हें ढूंढने पहुंच गए।
 
शादी कैसे हुई
शाहरुख और गौरी की शादी में सबसे बड़ी समस्या धर्म की थी। शाहरुख ने गौरी के परिवार को मनाने में बहुत मेहनत की और आखिर सफल हो गए। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 26 अगस्त 1991 को दोनों ने कोर्ट में शादी कर ली। फिर निकाह हुआ, जिसमें गौरी का नाम आयशा रखा गया। 25 अक्टूबर 1991 को हिंदू रीति से शादी हुई। शादी दोनों धर्मों के रिवाज से हुई। गौरी ने शाहरुख के लिए अपना नाम गौरी खान रखा।
 
शादी के बाद की कहानी
शादी के बाद शाहरुख सुपरस्टार बने और गौरी उनका सबसे बड़ा सहारा बनीं। अब उनके तीन बच्चे हैं – आर्यन खान, सुहाना खान और अबराम खान। उनकी जोड़ी 30 साल से ज्यादा मजबूत है। शाहरुख खान जल्द ही फिल्म ‘किंग’ में नजर आएंगे। इस फिल्म में शाहरुख के साथ उनकी बेटी सुहाना खान भी नजर आएंगी।

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ये दो आम आदतें बढ़ा रही हैं दिल की बीमारियों का खतरा, हार्ट अटैक से बचने के लिए तुरंत सुधार करें

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नई दिल्ली। इन दिनों दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले तेजी से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। पहले जहां बुजुर्गों में इसके मामले सामने आते थे, वहीं अब युवा भी तेजी से इसकी चपेट में आने लगे हैं। खासकर भारत में युवाओं में दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले चिंता का विषय बने हुए हैं। ऐसे में इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है। साथ ही इसकी वजहों के बारे में जानना भी जरूरी है। दरअसल, युवाओं की 2 आदतें दिल से जुड़ी समस्याओं का कारण बन रही है। यह आदतें खानपान से जुड़ी हुई है, जिसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है। आइए आपको बताते हैं कौन-सी दो आदतें कर रही हैं युवाओं के दिल को बीमार-

दिल को बीमार कर रही दो आदतें
हेल्थ एक्सपर्ट की मानें, तो खानपान से जुड़ी ये दो आदतें हार्ट डिजीज का प्रमुख कारण बन रही है। हैरानी की बात यह है कि ये आदतें उन लोगों के दिल को भी बीमार बना रही है, जिनकी हार्ट डिजीज का कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं रही है। इन दो आदतों में नाश्ता स्किप करना और देर रात डिनर करना शामिल हैं। अक्सर सुबह की भागदौड़ और रात को काम से लेट फ्री होने की वजह से अक्सर कई युवा जाने-अनजाने में इस आदत को अपनी रूटीन में शामिल कर चुके हैं, जो अब उनके लिए हानिकारक साबित हो रही है। आइए जानते हैं कैसे दिल के लिए खतरनाक हैं ये दो आदतें

नाश्ता स्किप करना
सुबह की भागदौड़ के बीच अक्सर नाश्ता स्किप करना एक आसान और सुविधाजनक फैसला लगता है, लेकिन इसकी वजह से आपके दिल को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। नाश्ता करने से हार्मोन असंतुलित हो जाते हैं और प्लाक जमा होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ब्रेकफास्ट स्किप करने वाले युवाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ने और असामान्य मेटाबॉलिज्म रिएक्शन का खतरा ज्यादा होता है, जो एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ावा देते हैं और आर्टरीज में प्लाक जमने का कारण बनते हैं। साथ ही सुबह का खाना न खाने से शरीर को लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है, जिससे कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन बढ़ते हैं और हार्ट के लिए रिस्क फैक्टर बढ़ जाते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिकत बार-बार नाश्ता स्किप करने से दिल का दौरा और हार्ट डिजीज से जुड़ी मौत का खतरा 27-35 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।

देर रात डिनर करना
इन दिनों लोगों का लाइफस्टाइल काफी ज्यादा बदल चुका है। इसकी वजह से अक्सर रात में खाना खाते-खाते लेट हो जाता है। ऐसे में देर रात डिनर करने के बाद तुरंत सो जाना आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे शरीर में सूजन आ जाती है। सोने से दो घंटे से कम समय पहले भोजन करने से शरीर की इंटरनल मेटाबॉलिज्म प्रोसेस बिगड़ जाती है, ग्लूकोज मैनेजमेंट बाधित होता है और ज्यादा सूजन होती है, जो सभी मायोकार्डियल डैमेज के लिए के खतरे बढ़ाते हैं। अब, अगर आप नियमित रूप से इन आदतों को फॉलो करते हैं, तो आप खुद ही अपने दिल को बीमार बना रहे हैं और जाने-अनजाने हार्ट अटैक को बुलावा दे रहे हैं। इसलिए हेल्दी रहने के लिए आज ही इन आदतों में बदलाव कर लें।

इंडिगो की फ्लाइट को मिली बम से उड़ाने की धमकी, एयरपोर्ट पर मचा हड़कंप

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नई दिल्ली: हैदराबाद (Hyderabad) के राजीव गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे (Rajiv Gandhi International Airport) के अधिकारियों के मुताबिक,शनिवार सुबह उन्हें एक बम की धमकी वाला ईमेल मिला. इस ईमेल में किसी “लिट्टे-आईएसआईएस के सदस्य” द्वारा इंडिगो के विमान को बम से उड़ाने की धमकी दी गई थी. इसके बाद इंडिगो के विमान को डायवर्ट कर दिया गया.

बताय गया कि ईमेल में 1984 में चेन्नई हवाई अड्डे पर हुए बम विस्फोट जैसे हमले की चेतावनी दी गई थी, जिसके बाद हवाई अड्डे के अधिकारियों ने अलर्ट जारी कर दिया. RGI हवाई अड्डे के एक अधिकारी ने बताया कि शनिवार 1 नवंबर, 2025 को सुबह लगभग 5:25 बजे हवाई अड्डा परिचालन नियंत्रण केंद्र को धमकी भरे मेल की जानकारी मिली.

इंडिगो के प्रवक्ता ने पुष्टि की कि हैदराबाद जाने वाली उड़ान संख्या 6ई 68 को 1 नवंबर को सुरक्षा संबंधी धमकी मिली थी, जिसके कारण विमान को डायवर्ट कर दिया गया. प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, “1 नवंबर को जेद्दा से हैदराबाद जा रही इंडिगो की उड़ान 6E 68 के लिए सुरक्षा संबंधी खतरा पाया गया और विमान को मुंबई की ओर मोड़ दिया गया. प्रोटोकॉल का पालन करते हुए हमने संबंधित अधिकारियों को तुरंत सूचित किया और विमान को आगे के संचालन के लिए मंजूरी देने से पहले आवश्यक सुरक्षा जांच में उनका पूरा सहयोग किया.”

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देश के लिए नहीं खेल पाए, कोच बनकर भारतीय टीम को फाइनल में पहुँचाया—अमोल मजूमदार की कहानी

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नई दिल्ली: अमोल मजूमदार की कहानी सिर्फ एक कोच की नहीं है, यह उस खिलाड़ी की गाथा है जिसने कभी भारतीय टीम की जर्सी नहीं पहनी, पर उसने वह कर दिखाया जो शायद भारत के लिए खेलने वाले भी नहीं कर पाए। उन्होंने खुद मैदान पर मौका नहीं पाया, लेकिन दूसरों को वह मौका दिलाया और उसी से भारत को विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया। भारत की महिला क्रिकेट टीम 2005 और 2017 के बाद सिर्फ तीसरी बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची है और इस बार उसके चैंपियन बनने की संभावना पहले से कहीं ज्यादा प्रबल है।

फाइनल दो नवंबर को दक्षिण अफ्रीका से नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में है। भारतीय टीम ने सेमीफाइनल में एक ऐसी ऑस्ट्रेलियाई टीम को हराया जिसे हराना मुश्किल माना जाता है। हालांकि, अमोल मजूमदार के लिए ऐसा करना आसान नहीं था। उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा, न सिर्फ बतौर कोच, बल्कि अपने खेलने के दिनों में भी। आइए उनकी कहानी जानते हैं…

बचपन और इंतजार की शुरुआत
मजूमदार का जीवन एक इंतजार से शुरू हुआ। 1988 में वह 13 साल के थे, जब स्कूल क्रिकेट के टूर्नामेंट हैरिस शील्ड के दौरान नेट्स में अपनी बल्लेबाजी की बारी आने का इंतजार कर रहे थे। उसी दिन अमोल की टीम से ही खेल रहे सचिन तेंदुलकर और विनोद कांबली ने 664 रनों की ऐतिहासिक साझेदारी की। दिन खत्म हो गया, पारी घोषित कर दी गई, लेकिन अमोल को बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला। यह घटना उनके जीवन का प्रतीक बन गई। बैटिंग की बारी हमेशा उनसे कुछ दूर ही रही।

1993 में जब उन्होंने बॉम्बे (अब मुंबई) के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में डेब्यू किया, तो पहले ही मैच में 260 रनों की ऐतिहासिक पारी खेल डाली। यह तब विश्व में किसी भी खिलाड़ी की डेब्यू पारी में सबसे बड़ा स्कोर था। लोग कहने लगे- यह अगला सचिन तेंदुलकर बनेगा। पर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। दो दशक से भी अधिक लंबे करियर में उन्होंने 11,000 से ज्यादा रन बनाए, 30 शतक जड़े, लेकिन कभी भी भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेल सके। वो एक सुनहरे युग के खिलाड़ी थे, जब टीम में तेंदुलकर, द्रविड़, गांगुली, लक्ष्मण जैसे सितारे थे। मजूमदार उनके साए में खो गए।

हार नहीं मानी: पिता की एक बात ने सब बदल दिया
2002 तक आते-आते उन्होंने लगभग हार मान ली थी। चयनकर्ता बार-बार नजरअंदाज करते रहे। वो खुद कहते हैं, ‘मैं एक खोल में चला गया था, समझ नहीं आ रहा था अगली पारी कहां से निकलेगी।’ तभी उनके पिता अनिल मजूमदार ने कहा, ‘खेल छोड़ना नहीं, तेरे अंदर अभी क्रिकेट बाकी है।’ यह एक वाक्य उनकी जिंदगी बदल गया। उन्होंने वापसी की और 2006 में मुंबई को रणजी ट्रॉफी जिताई। इसी दौरान उन्होंने एक युवा खिलाड़ी रोहित शर्मा को पहली बार फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में मौका दिया। फिर भी, दो दशकों में 171 मैच, 11,167 प्रथम श्रेणी रन, 30 शतक के बावजूद उन्होंने भारत के लिए एक भी मैच नहीं खेला।

कोच बनने की नई राह
सचिन तेंदुलकर ने 2014 में अमोल के संन्यास के वक्त कहा था, ‘मजूमदार सच्चे अर्थों में खेल के सेवक हैं।’ पर अमोल के मन में एक खालीपन रह गया और वह बताते हैं, ‘मैंने भारत के लिए कभी नहीं खेला, यही एक कमी रह गई।’ 2014 में क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद उन्होंने कोचिंग का रास्ता चुना। उन्होंने नीदरलैंड, दक्षिण अफ्रीका और राजस्थान रॉयल्स जैसी टीमों के साथ काम किया। उनकी पहचान एक ऐसे कोच की बनी जो कम बोलता है, लेकिन बहुत गहराई से हर चीज को समझता है। अक्तूबर 2023 में जब उन्हें भारतीय महिला क्रिकेट टीम का मुख्य कोच नियुक्त किया गया, तो कई लोगों ने सवाल उठाए कि जिसने भारत के लिए कभी नहीं खेला, वो कोच कैसे बनेगा? लेकिन दो साल बाद, वही लोग उनके सामने सिर झुका रहे हैं।

कबीर खान की तरह टीम को बदला
2025 महिला विश्व कप के ग्रुप स्टेज में भारत का प्रदर्शन खराब रहा। इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया से टीम को हार मिली। सोशल मीडिया पर मीम्स बन रहे थे, आलोचना चरम पर थी। तभी मजूमदार ने टीम के सामने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया दी। हरमनप्रीत कौर बाद में बोलीं, ‘मैंने इंग्लैंड मैच के बाद एक शब्द नहीं बोला। सर ने कहा- आप लोगों को यह मैच आसानी से खत्म करना चाहिए था। हम सबने उसे सही भावना में लिया क्योंकि अमोल सर जो भी कहते हैं, दिल से कहते हैं।’ मजूमदार ने उस समय कहा, ‘वह बात भावना से आई थी, लेकिन मकसद टीम को आगे बढ़ाना था।’ यह वही पल था जिसने पूरी टीम की सोच बदल दी। उस एक बातचीत ने आपको उस आदमी के बारे में सब कुछ बता दिया, जिसने चक दे! इंडिया में शाहरुख खान के कबीर खान की तरह व्यक्तिगत अस्वीकृति को सामूहिक जीत में बदल दिया।

सेमीफाइनल: बस एक रन ज्यादा चाहिए
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले, उन्होंने ड्रेसिंग रूम की व्हाइटबोर्ड पर सिर्फ एक लाइन लिखी, ‘हमें फाइनल में पहुंचने के लिए बस उनसे एक रन ज्यादा चाहिए, बस इतना।’ साधारण वाक्य, लेकिन गहरी सोच। फिर चमत्कार हुआ। जेमिमा रॉड्रिग्स ने नंबर तीन पर बल्लेबाजी की, जैसा कि मजूमदार ने तय किया था। उन्होंने 127 रनों की नाबाद पारी खेली, जबकि कप्तान हरमनप्रीत कौर ने 89 रन बनाए। भारत ने 339 रनों का पीछा कर ऑस्ट्रेलिया को हरा दिया। महिलाओं के वनडे इतिहास का सबसे बड़ा सफल चेज किया। टीम उछल पड़ी, लेकिन अमोल मजूमदार खामोश खड़े रहे। उनकी आंखों में नमी थी और चेहरा शांत था। उन्होंने कोई जश्न नहीं मनाया। उनके लिए यह जीत नहीं, एक अधूरी कहानी का अंत थी। कहानी यह कि- जिसने कभी भारत की जर्सी नहीं पहनी, उसने कोच बनकर भारतीय टीम को विश्व कप फाइनल तक पहुंचा दिया।

असल जिंदगी का ‘कबीर खान’
समानताएं खुद-ब-खुद लिखी जाती हैं। चक-दे इंडिया के कबीर खान की तरह ही अमोल मजूमदार ने भी अनदेखे और गलत समझे जाने के जख्म अपने भीतर सहे। कबीर की तरह उन्होंने भी एक ऐसी टीम को संभाला, जिसे अक्सर अस्थिर और असंगत कहकर आलोचना की जाती थी। लेकिन अमोल ने उन खिलाड़ियों को स्पष्टता दी, दिशा दी और विश्वास दिलाया। लेकिन फर्क इतना है कि मजूमदार की कहानी किसी पटकथा लेखक की नहीं, जिंदगी की अपनी कलम से लिखी गई है। उनके सबक किसी किताब से नहीं आए, वे आए हैं वर्षों के इंतजार, खामोशी से जद्दोजहद करने और उस संवेदना से जो केवल वही महसूस कर सकता है, जिसने खुद कभी भुलाए जाने का दर्द झेला हो। ऑलराउंडर स्नेह राणा ने कहा, ‘वो सबसे मिलनसार कोच हैं जो हमारे साथ रहे। वो कभी चिल्लाते नहीं, बस सुनते हैं। और जब बोलते हैं, तो आप बेहतर करना चाहते हैं।’ मजूमदार ने टीम को सिर्फ तकनीक नहीं सिखाई, उन्होंने विश्वास करना सिखाया। उन्होंने खिलाड़ियों को यह महसूस कराया कि वो किसी भी मंच पर खड़ी होकर जीत सकती हैं।

अमोल मजूमदार: एक प्रतीक बन चुके हैं
अब चाहे भारत फाइनल जीते या हार जाए, लेकिन अमोल मजूमदार की कहानी पूरी हो चुकी है। जिस बच्चे को 13 साल की उम्र में बल्लेबाजी का मौका नहीं मिला था, आज वही कोच बनकर पूरी टीम को चैंपियन बनने का मौका दे रहा है। कभी जो इंतजार उनका सबसे बड़ा दर्द था, वही अब उनकी पहचान बन गया है। उन्होंने दिखाया कि क्रिकेट सिर्फ मैदान पर खेलने वालों का खेल नहीं, बल्कि उन लोगों का भी है जो दिल से खेलते हैं। कभी-कभी खेल उन्हें याद नहीं रखता जिन्होंने खेला, बल्कि उन्हें याद रखता है जिन्होंने उसे बदल दिया, और अमोल मजूमदार ने सचमुच उसे बदल दिया है। जिसे बैटिंग की बारी कभी नहीं मिली, उसने पूरी टीम को जीत की बारी दे दी।