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वुमेंस क्रिकेट के स्टार पल: 21वीं सदी की 7 सबसे बड़ी वनडे जीतें

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नई दिल्ली: भारत ने 2025 महिला वनडे विश्व कप में इतिहास रच दिया। ऑस्ट्रेलिया जैसी दिग्गज टीम को हराते हुए महिलाओं के वनडे इतिहास में सबसे बड़ा सफल चेज पूरा किया। इस जीत ने न केवल ऑस्ट्रेलिया की 15 मैचों की जीत का सिलसिला तोड़ा, बल्कि भारत को फाइनल में पहुंचाकर यह सुनिश्चित किया कि इस बार फॉर्मेट में नया चैंपियन मिलेगा।

यह जीत भारतीय महिला क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार जीतों में से एक बन गई, लेकिन यह पहली बार नहीं था जब भारत ने असंभव को संभव किया। आइए नजर डालते हैं 21वीं सदी की उन ऐतिहासिक जीतों पर जिन्होंने भारत के महिला क्रिकेट की पहचान बदली।

2005 में भारत ने पहली बार महिला विश्व कप के फाइनल में कदम रखा और वह भी मौजूदा चैंपियन न्यूजीलैंड को 40 रनों से हराकर। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत खराब रही। दो शुरुआती विकेट जल्दी गिर गए, लेकिन अंजुम चोपड़ा और कप्तान मिताली राज ने साझेदारी से पारी को संभाला। दोनों के बीच 66 रनों की साझेदारी हुई। अंजुम के आउट होने के बाद मिताली ने जिम्मेदारी खुद उठाई और नाबाद 91 रन बनाते हुए भारत को 204/6 तक पहुंचाया।

जवाब में न्यूजीलैंड की टीम 13 पर दो विकेट गंवा चुकी थी, फिर नूशिन अल खदीर ने अपने पहले ही ओवर में दो विकेट निकालकर मैच का रुख पलट दिया। मारिया फाही (73 रन) ने संघर्ष किया, लेकिन भारत की अनुशासित गेंदबाजी ने दक्षिण अफ्रीका को 164 पर रोक दिया। इस जीत ने भारत को पहली बार विश्व कप फाइनल में पहुंचाया और महिला क्रिकेट के लिए एक नया युग शुरू हुआ।

बारिश से बाधित रहे इस सेमीफाइनल में हरमनप्रीत कौर का तूफान आया। 42 ओवर के मुकाबले में हरमनप्रीत ने 115 गेंदों पर नाबाद 171 रन ठोके, जो भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे प्रसिद्ध पारियों में से एक बनी। भारत 35/2 पर संघर्ष कर रहा था, जब हरमनप्रीत क्रीज पर आईं। उन्होंने पहला पचासा 64 गेंदों में और अगले दो 50 रन केवल 43 गेंदों में पूरे किए। भारत ने 281/4 का बड़ा स्कोर खड़ा किया। ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआत में कोशिश की, एलिस विलानी (75) और एलेक्स ब्लैकवेल (90) ने संघर्ष किया, लेकिन अंत में दीप्ति शर्मा ने ब्लैकवेल को बोल्ड कर भारत को जीत दिलाई। यह जीत सिर्फ फाइनल तक का टिकट नहीं थी, बल्कि महिला क्रिकेट को भारत के घर-घर तक पहुंचाने का मोड़ थी। जेमिमा रॉड्रिग्स को भी इसी मैच ने प्रेरित किया था।

2017 विश्व कप फाइनल के बाद भारत और इंग्लैंड की पहली भिड़ंत फिर से रोमांच से भरी रही। इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 207 रन बनाए। भारत ने जवाब में स्मृति मंधाना (86 रन) के दम पर 166/3 तक पहुंचते हुए जीत की ओर कदम बढ़ाए, लेकिन मिडिल ऑर्डर के ढहने से टीम 190/9 पर संकट में आ गई। आखिर में एकता बिष्ट और पूनम यादव ने आखिरी विकेट के लिए 18 रनों की नाबाद साझेदारी की और भारत को जीत की मंजिल तक पहुंचाया। यह जीत इंग्लैंड जैसे चैंपियन को मात देने के साथ भारत के आत्मविश्वास की नई कहानी थी।

ऑस्ट्रेलिया लगातार 26 मैच जीत चुका था, लेकिन भारत ने यह सिलसिला तोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया ने पहले खेलते हुए 264/9 बनाए, जिसमें बेथ मूनी और एश्ले गार्डनर ने अर्धशतक जड़े।

भारत ने शेफाली वर्मा और यस्तिका भाटिया की साझेदारी से शानदार शुरुआत की। दोनों के बीच शतकीय साझेदारी हुई। मुकाबला आखिरी ओवर में पहुंच गया। भारत को एक वक्त चार रन की जरूरत थी और दो विकेट बाकी थे। झूलन गोस्वामी ने निकोल कैरी की गेंद पर ऊंचा ड्राइव खेला और भारत ने जीत हासिल की। यह न सिर्फ झूलन का लम्हा था, बल्कि भारतीय महिला क्रिकेट के आत्मविश्वास का भी प्रतीक बना।

यह मैच भारत की 1999 के बाद इंग्लैंड में पहली वनडे सीरीज जीत बना। साथ ही यह झूलन गोस्वामी के शानदार करियर का आखिरी मैच भी था। भारत ने शुरुआती झटकों के बावजूद स्मृति मंधाना (50) और दीप्ति शर्मा (50) की मदद से 169 रन बनाए। इंग्लैंड की टीम शुरुआत में ही चार विकेट गंवा बैठी, लेकिन चार्ली डीन (47) ने संघर्ष किया। 44वें ओवर में जब डीन नॉन-स्ट्राइकर एंड पर आगे बढ़ गईं, दीप्ति शर्मा ने उन्हें रन आउट कर दिया और भारत ने जीत दर्ज की। मैदान पर झूलन की आंखों में आंसू थे और भारत ने एक दिग्गज को जीत के साथ विदाई दी।

इस मुकाबले में कुल चार शतक बने और 646 रन बने, महिलाओं के वनडे इतिहास में एक अद्भुत दृश्य। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 325/3 का विशाल स्कोर बनाया। स्मृति मंधाना (136) और कप्तान हरमनप्रीत कौर (103)* ने रन बरसाए। जवाब में दक्षिण अफ्रीका 67/3 पर जूझ रहा था, लेकिन लौरा वोल्वार्ट (135) और मारीजाने कैप (109) ने 184 रनों की साझेदारी से मुकाबला बराबरी पर ला दिया। आखिरी ओवर में 10 रन चाहिए थे। पूजा वस्त्राकर ने दो विकेट झटके और आखिरी गेंद पर वोल्वार्ट को धीमी गेंद से छकाते हुए जीत भारत के नाम की।

और अब, इतिहास की सबसे बड़ी जीत, महिलाओं के वनडे इतिहास की सबसे बड़ी सफल रनचेज। ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 338 रन बनाए। फीबी लिचफील्ड ने शानदार शतक ठोका, जबकि एलिस पेरी और एश्ले गार्डनर ने अर्धशतक जड़े। भारत ने जब पीछा शुरू किया तो शुरुआती झटके लगे और स्कोर 60/2 हो गया। लेकिन फिर जेमिमा रॉड्रिग्स (127 नाबाद) और हरमनप्रीत कौर (89) ने पारी को संभालते हुए इतिहास लिखा। दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष और अमनजोत कौर के छोटे, लेकिन तेज योगदान ने भारत को जीत तक पहुंचाया। इस जीत ने न सिर्फ भारत को फाइनल में पहुंचाया, बल्कि महिला क्रिकेट में नया चैंपियन तय कर दिया।

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