अंतरिक्ष में भारतीय सेना की नई ताकत, ISRO ने बाहुबली रॉकेट से लॉन्च किया नौसेना का सैटेलाइट

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नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय नौसेना के लिए CMS-03 (GSAT-7R) कम्युनिकेशन सैटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया है. ये सैटेलाइट नौसेना का अब तक का सबसे एडवांस्ड (उन्नत) सैटेलाइट है. इससे नौसेना की स्पेस-बेस्ड कम्युनिकेशन (अंतरिक्ष से संचार) और समुद्री इलाके की निगरानी (मैरिटाइम डोमेन अवेयरनेस) की क्षमता मजबूत हो जाएगी. GSAT-7R एक कम्युनिकेशन सैटेलाइट है, यानी ये संचार का माध्यम बनेगा.

ये पूरी तरह से भारत में ही डिजाइन और बनाया गया है. ये सैटेलाइट नौसेना के जहाजों, हवाई जहाजों, पनडुब्बियों और समुद्री ऑपरेशंस सेंटर्स के बीच तेज और सुरक्षित संचार करेगा. सबसे खास बात ये है कि ये भारत का अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. इसका वजन लगभग 4400 किलोग्राम है. इसमें कई देसी तकनीक वाले पार्ट्स लगे हैं, जो खास तौर पर नौसेना की जरूरतों के लिए बनाए गए हैं. ये आत्मनिर्भर भारत का एक बड़ा उदाहरण है, जहां हम अपनी ही तकनीक से मजबूत हो रहे हैं.

ये सैटेलाइट 2 नवंबर 2025 को सतीश धवन स्पेस सेंटर (SDSC- SHAR) श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश) के दूसरे लॉन्च पैड से शाम 5:26 मिनट पर लॉन्च होगा. ISRO का ये सेंटर रॉकेट लॉन्च करने के लिए मशहूर है. ISRO के वैज्ञानिकों ने इसे महीनों की मेहनत से तैयार किया है. GSAT-7R को बनाने में भारतीय इंजीनियरों ने कमाल किया है. आइए, इसके मुख्य फीचर्स को समझें…

वजन और साइज: 4400 किलोग्राम वजन वाला ये सैटेलाइट भारत का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है. इससे पहले के सैटेलाइट इससे हल्के थे.

ट्रांसपोंडर्स: इस सैटेलाइट के अंदर के संचार उपकरण हैं. ये आवाज (वॉइस), डेटा और वीडियो लिंक को कई तरह के बैंड्स (फ्रीक्वेंसी रेंज) पर सपोर्ट करेंगे. मतलब, नौसेना के लोग जहाज पर हो या हवा में, आसानी से बातचीत कर सकेंगे.

कवरेज एरिया: ये भारतीय महासागर क्षेत्र (Indian Ocean Region) में मजबूत टेलीकम्युनिकेशन कवरेज देगा. यानी, हिंद महासागर के बड़े हिस्से में सिग्नल मजबूत रहेगा.

हाई-कैपेसिटी बैंडविड्थ: ये सैटेलाइट ज्यादा डेटा ट्रांसफर करेगा. इससे जहाजों, विमानों, पनडुब्बियों और कंट्रोल सेंटर्स के बीच सुरक्षित और बिना रुकावट वाला कनेक्शन बनेगा. इन सबके कारण नौसेना को समुद्र में अपनी मौजूदगी और मजबूत होगी. अगर कोई खतरा आए, तो तुरंत जानकारी मिल जाएगी.

आज के समय में समुद्री सुरक्षा की चुनौतियां बहुत बढ़ गई हैं. चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की वजह से हिंद महासागर में तनाव रहता है. GSAT-7R नौसेना को अंतरिक्ष से नजर रखने और तुरंत कार्रवाई करने की ताकत देगा. नौसेना के चीफ ने कहा है कि ये सैटेलाइट राष्ट्र की समुद्री हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम है.

संचार मजबूत: पहले सैटेलाइट्स से कम्युनिकेशन सीमित था. अब ये ज्यादा तेज और सुरक्षित होगा.

निगरानी बढ़ेगी: समुद्री इलाके में दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना आसान हो जाएगा.

आत्मनिर्भरता: ये सैटेलाइट 100% भारतीय तकनीक से बना है. इससे हम विदेशी सैटेलाइट्स पर निर्भर नहीं रहेंगे.

राजद और कांग्रेस बिहार का भला कभी नहीं कर सकते – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

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आरा । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि राजद और कांग्रेस (RJD and Congress) बिहार का भला कभी नहीं कर सकते (Can never do any good to Bihar) ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निशाना साधते हुए कहा कि राजद और कांग्रेस में घमासान मचा हुआ है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती थी कि मुख्यमंत्री उम्मीदवार के लिए राजद के नेता का नाम तय हो, लेकिन राजद ने कांग्रेस की कनपटी पर कट्टा रखकर मुख्यमंत्री पद चोरी किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को बिहार के आरा में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “नामांकन वापस लेने से एक दिन पहले बिहार में बंद कमरे में गुंडागर्दी का खेल खेला गया था। कट्टा रखकर कांग्रेस से राजद नेता को मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार और उसको समर्थन की घोषणा कराई गई।” उन्होंने यह भी दावा किया कि राजद और कांग्रेस में झगड़ा भयंकर बढ़ गया है। न घोषणा-पत्र में कांग्रेस की सुनी गई, न प्रचार में उनकी पूछ हो रही है। पीएम मोदी ने कहा, “चुनाव से पहले ही इतनी घृणा बढ़ गई है कि चुनाव के बाद एक-दूसरे का सिर फोड़ने लगेंगे। इसलिए हमेशा याद रखिए, ऐसे लोग बिहार का भला कभी नहीं कर सकते हैं।”

राजद पर हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “एक तरफ एनडीए का सुशासन है और दूसरी तरफ ‘जंगलराज’ का कुशासन है। ‘जंगलराज’ वह अंधेरा था, जिसने बिहार को धीरे-धीरे खोखला कर दिया। राजद के जंगलराज की पहचान जिस चीज से होती है, वह ‘कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुसंस्कार, कुशासन और करप्शन’ है।”
पीएम मोदी ने कहा कि बिहार में राजद ‘जंगलराज’ लाई और तुष्टिकरण की राजनीति की, जबकि कांग्रेस की पहचान सिखों के कत्लेआम से जुड़ी है। 1984 में 1-2 नवंबर को कांग्रेस के लोगों ने सिख नरसंहार किया था। आज की कांग्रेस, सिख नरसंहार के गुनहगारों को पूरे सम्मान के साथ आगे बढ़ा रही है। उन्होंने आगे कहा, “कांग्रेस हो या राजद, इन्हें अपने पाप का कोई पछतावा नहीं है। राजद और कांग्रेस बिहार की पहचान खत्म करने में जुटी हैं। ये लोग बिहार में घुसपैठियों के समर्थन में यात्राएं कर रहे हैं। ये लोग घुसपैठियों को बचाने के लिए तन-मन से जुटे हैं।”

शास्त्री के शीर्ष एकदिवसीय क्रिकेटरों में विराट, सचिन सहित हैं ये दिग्गज

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कोच रवि शास्त्री ने भारतीय एकदिवसीय क्रिकेट के पांच दिग्गज क्रिकेटरों का चयन किया है। हैरानी की बात ये है कि शास्त्री ने इसमें विराट कोहली का नाम सचिन तेंदुलकर से पहले लिया है। शास्त्री का कहना है कि विराट ने एकदिवसीय में सचिन के कई रिकॉर्ड तोड़े हैं, इसी लिए उन्हें पहले रखा है। साथ ही कहा कि विराट इस प्रारुप में दुनिया में सबसे ज्यादा शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं, हालांकि वह अब भी एकदिवसीय में सचिन तेंदुलकर के सबसे ज्यादा रनों के रिकॉर्ड से काफी पीछे हैं। शास्त्री ने इस सूची में पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी, रोहित शर्मा और कपिल देव को भी रखा है। वहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को इस सूची में शामिल नहीं किये जाने को लेकर कहा कि अभी उनके पास खेलने के लिए समय है। उन्होंने इस सूची में पूर्व खिलाड़ियों के साथ ही उन खिलाड़ियों को शामिल किया है जो करियर के अंत की ओर हैं। शास्त्री ने विराट को शीर्ष पर रखने क लि एक दशक से भी ज़्यादा समय से उनके शानदार प्रदर्शन और मैच विजेता होने का कारण बताया है। शास्त्री ने तीन विश्व कप विजेता खिलाड़ियों – धोनी, तेंदुलकर और कपिल को भी अपनी इस सूची में रखा है।
शास्त्री ने कहा, मैं कोहली, तेंदुलकर, कपिल, धोनी और रोहित को चुनूंगा। साथ ही कहा कि अगर आप क्रिकेट इतिहास को देखें तो कई और अच्छे खिलाड़ी रहे हैं पर मेरे लिए ये खिलाड़ी सबसे अलग रहे हैं। इसलिए उन्हें जगह दी है। इस सूची में केवल दो ही सक्रिय खिलाड़ी विराट और रोहित है हालांकि ये भी अपने अंतिम दौर में हैं1

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मां की आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर सका: अरशद वारसी

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मुंबई । हाल ही में बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी अपनी निजी ज़िंदगी का एक ऐसा दर्द साझा किया जिसने सबको भावुक कर दिया। अभिनेता को अपनी बीमार मां की अंतिम इच्छा पूरी नहीं करने का आज भी अफसोस है। एक इंटरव्यू में अरशद वारसी ने यह भावूक करने देने वाला वाक्या बताया कि उन्होंने महज 14 साल की उम्र में अपने दोनों माता-पिता को खो दिया था। उन्होंने कहा कि वह बोर्डिंग स्कूल में पढ़ते थे, इसलिए अपने परिवार के साथ बहुत ज़्यादा समय नहीं बिता पाए। उन्होंने अपनी मां के आखिरी दिनों की यादें साझा करते हुए कहा कि वह आज भी उस पल को भूल नहीं पाए हैं।
अभिनेता ने बताया कि उनकी मां की किडनी खराब हो गई थी और वे डायलिसिस पर थीं। डॉक्टरों ने सख्त हिदायत दी थी कि उन्हें पानी नहीं देना चाहिए। लेकिन निधन से एक रात पहले उनकी मां ने बार-बार पानी मांगा था। अरशद ने कहा, “मैंने डॉक्टरों की बात मानते हुए उन्हें पानी नहीं दिया। उसी रात उनका निधन हो गया। आज भी मुझे यह सोचकर अपराधबोध होता है कि शायद अगर मैंने उन्हें पानी दे दिया होता, तो वे सुकून से चली जातीं।”
उन्होंने आगे कहा कि उस वक्त वे केवल एक बच्चे थे, लेकिन आज अगर ऐसी स्थिति होती तो वे अलग निर्णय लेते। उनके मुताबिक, “हम अक्सर बीमार व्यक्ति की भावनाओं से ज़्यादा अपने अपराधबोध के आधार पर फैसले लेते हैं। उस दिन मैंने डॉक्टर की बात तो मानी, लेकिन शायद अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी नहीं कर सका।” अरशद वारसी का यह बयान सुनकर उनके प्रशंसक भावुक हो उठे। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा कि मां और बेटे के रिश्ते की यह कहानी इंसानियत और संवेदना की गहराई को बयां करती है।
अरशद ने अपने जीवन के इस दर्दनाक अनुभव को साझा कर यह दिखाया कि सफलता और प्रसिद्धि के पीछे भी एक संवेदनशील इंसान छिपा होता है, जो आज भी अपनी मां की आखिरी याद में डूबा हुआ है। मालूम हो कि अरशद वारसी अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’, ‘जॉली एलएलबी’, ‘सलाम नमस्ते’ और ‘टोटल धमाल’ जैसी फिल्मों में उन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी है। हाल ही में वह आर्यन खान निर्देशित वेब सीरीज़ द बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड में गैंगस्टर ‘गफूर’ की भूमिका के लिए खूब सराहे गए थे।

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ऑस्ट्रेलिया में नस्लभेदी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा दिलजीत को

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मुंबई । हाल ही में सिडनी में परफॉर्मेंस से पहले पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ ने एक दर्दनाक अनुभव साझा किया, जिसने उनके फैंस को सोचने पर मजबूर कर दिया। अपने ग्लोबल म्यूजिक टूर ‘ऑरा’ को लेकर आस्ट्रेलिया पहुंचे सिंगर ने बताया कि यहां उन्हें नस्लभेदी (रेसिस्ट) टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
 दिलजीत ने खुलासा किया कि सिडनी कॉन्सर्ट से पहले उन्हें सोशल मीडिया पर कुछ लोगों द्वारा किए गए भेदभावपूर्ण कमेंट्स देखने को मिले। उन्होंने कहा, “जब मैं ऑस्ट्रेलिया पहुंचा, तो कुछ एजेंसियों ने इस खबर को कवर किया। किसी ने मुझे एक पैपराजी पोस्ट का कमेंट सेक्शन भेजा, जिसमें लोग ऐसी बातें लिख रहे थे ‘नया उबर ड्राइवर आ गया’, या ‘नया 7/11 कर्मचारी पहुंच गया।’ ऐसी टिप्पणियां देखकर दुख तो होता है, लेकिन मुझे गुस्सा नहीं आया।” दिलजीत ने कहा कि उन्होंने दुनिया भर में ऐसे लोगों को देखा है जिन्होंने नस्लभेद के खिलाफ लड़कर अपनी पहचान बनाई है। उनके मुताबिक, समाज में अब भी ऐसे पूर्वाग्रह मौजूद हैं, लेकिन बदलाव धीरे-धीरे आ रहा है।
 सिंगर ने कहा, “लोग इन बातों के खिलाफ खड़े हो रहे हैं क्योंकि उन्होंने अपनी जगह बनाने के लिए बहुत मेहनत की है।” दिलजीत दोसांझ ने अपने प्रशंसकों के लिए पर्दे के पीछे का एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें वह कॉन्सर्ट की तैयारी करते नजर आ रहे थे। उन्होंने बताया कि तकनीकी समस्या के कारण उनका बैकग्राउंड ट्रैक उनकी आवाज से मेल नहीं खा रहा था। उन्होंने कहा, “एक साल पहले दिल्ली में भी यही दिक्कत आई थी। लेकिन मेरा फोकस सिर्फ अपने दर्शकों को बेहतरीन अनुभव देने पर रहता है, क्योंकि वे पूरी उम्मीद और प्यार के साथ शो देखने आते हैं।” नस्लभेदी टिप्पणियों के बावजूद दिलजीत ने सकारात्मक रवैया अपनाया।
उन्होंने कहा, “मुझे टैक्सी ड्राइवर या ट्रक ड्राइवर से तुलना किए जाने पर कोई बुरा नहीं लगता। अगर वे न हों तो लोगों को घर तक रोटी नहीं मिल पाएगी। मुझे हर पेशे से जुड़ाव महसूस होता है और मेरा प्यार सबके लिए समान है, यहां तक कि उनके लिए भी जो मेरे बारे में ऐसी बातें कहते हैं।” दिलजीत दोसांझ का यह जवाब न केवल उनकी विनम्रता को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वे अपनी सफलता के बावजूद जमीन से जुड़े हुए इंसान हैं, जो नफरत के बदले हमेशा प्यार का संदेश देना पसंद करते हैं। बता दें कि दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपने ग्लोबल म्यूजिक टूर ‘ऑरा’ को लेकर चर्चा में हैं। दुनियाभर में उनके कॉन्सर्ट्स को जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है।

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3,988 पदों पर भर्ती, मोटी सैलरी और पावर आपके नाम!

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Banking Jobs: ग्रेजुएट्स, होश संभालिए! अगर आप लंबे समय से बैंकिंग सेक्टर में सरकारी नौकरी पाने का सपना देख रहे थे, तो अब आपका मौका सुपरहॉट गोल्डन टिकट के रूप में सामने है।
देश के चार बड़े बैंक – इंडियन बैंक, केनरा बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक – ने 3,988 पदों पर भर्ती का ऐलान कर दिया है।

मतलब ये सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि पावर, पैकेज और प्रेस्टिज सबकुछ आपके नाम!

इंडियन बैंक – SO भर्ती (171 पद)

  • पद: चीफ मैनेजर, सीनियर मैनेजर, मैनेजर
  • योग्यता: B.Tech, MCA, MBA, CA, CFA और प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन (AWS, CISSP, ITIL, FRM)
  • सैलरी: ₹64,820 – ₹1,20,940
  • आवेदन: 23 सितंबर – 13 अक्टूबर 2025

आईटी, सिक्योरिटी और कॉर्पोरेट क्रेडिट में करियर का VIP पास।

केनरा बैंक – ग्रेजुएट अप्रेंटिस (3,500 पद)

  • पद: ग्रेजुएट अप्रेंटिस
  • योग्यता: किसी भी विषय में स्नातक
  • स्टाइपेंड: ₹15,000/माह (₹10,500 बैंक + ₹4,500 सरकार)
  • आवेदन: 23 सितंबर – 12 अक्टूबर 2025

ट्रेनिंग + ₹15,000/माह – कितनी बढ़िया शुरुआत!

पंजाब एंड सिंध बैंक – क्रेडिट/एग्रीकल्चर मैनेजर (190 पद)

  • पद: क्रेडिट और एग्रीकल्चर मैनेजर
  • सैलरी: ₹64,820 – ₹93,960 + HRA, LTC, मेडिकल, पर्क्स
  • अंतिम तिथि: 10 अक्टूबर 2025

मोटी सैलरी के साथ बैंकिंग सेक्टर में सुपर ग्रोथ।

इंडियन ओवरसीज बैंक – SO भर्ती (127 पद)

  • पद: स्पेशलिस्ट ऑफिसर
  • योग्यता: B.Arch, B.Tech, M.Sc, MBA/PGDM, MCA आदि
  • अंतिम तिथि: 3 अक्टूबर 2025

टेक्निकल और मैनेजमेंट बैकग्राउंड वालों के लिए गोल्डन गेटवे।

आवेदन शुल्क

  • SC/ST/PwBD: ₹175
  • अन्य सभी: ₹1,000

Banking Jobs: खास बातें

  • 4 बड़े बैंकों में एक साथ बंपर भर्ती
  • मोटी सैलरी + सरकारी पर्क्स = फ्यूचर सिक्योर
  • IT, फाइनेंस, एग्रीकल्चर – हर बैकग्राउंड वालों के लिए मौका
  • अप्रेंटिस से लेकर मैनेजर – हर लेवल पर लाइफ-चेंजिंग जॉब

हीरो हॉकी लीग से प्रशंसक विश्वस्तरीय हॉकी का आनंद ले सकेंगे : दिलीप तिर्की

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हीरो हॉकी इंडिया लीग ने 2025-26 सत्र के लिए पुरुष और महिला टीमों का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। महिला लीग 28 दिसंबर से 10 जनवरी तक रांची में होगी जबकि पुरुष लीग 3 से 26 जनवरी तक चेन्नई, रांची और भुवनेश्वर में आयोजित की जाएगी।
हीरो हॉकी इंडिया लीग गवर्निंग कमेटी के अध्यक्ष डॉ. दिलीप तिर्की ने कहा, पिछले सत्र की सफलता के बाद हमें इस बार और भी रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। हमने पुरुष लीग को तीन शहरों में रखा है जिससे अधिक से अधिक प्रशंसक इस विश्वस्तरीय हॉकी का आनंद ले पायें।”
वहीं हॉकी इंडिया लीग की गवर्निंग कमेटी के सदस्य भोला नाथ सिंह ने कहा, हीरो हॉकी इंडिया लीग में भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों को खेलते हुए देखने का अवसर मिलेगा। ऐसे में आगामी सत्र अब तक का सबसे बेहतर सत्र होगा। इस कार्यक्रम के दौरान रांची रॉयल्स का आधिकारिक लोगो भी जारी किया गया। ये लोगो टीम की जीवंत भावना और झारखंड की समृद्ध हॉकी विरासत के साथ मजबूत संबंध को दिखाता है।
महिला लीग
28 दिसंबर से 10 जनवरी 2026 तक रांची में होने वाली महिला लीग में कुल 13 मैच खेले जाएंगे। इसमें शामिल चार टीमों रांची रॉयल्स, एसजी पाइपर्स, जेएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब, और श्राची रारह बंगाल टाइगर्स के बीच डबल राउंड-रॉबिन प्रारूप में मुकाबले होंगे। वहीं अंक तालिका की शीर्ष दो टीमों के बीच 10 जनवरी को फाइनल होगा। इस टूर्नामेंट में नीदरलैंड, बेल्जियम, ऑस्ट्रेलिया, अर्जेंटीना और ग्रेट ब्रिटेन जैसे 10 से अधिक देशों की महिला खिलाड़ी भाग लेंगी।
पुरुष लीग
3 जनवरी से 26 जनवरी 2026 तक चलेगी। पहला चरण चेन्नई में, दूसरा रांची में और तीसरा भुवनेश्वर में होगा।पुरुष लीग में आठ टीमें तमिलनाडु ड्रैगन्स, हैदराबाद तूफान, जीएसडब्ल्यू सूरमा हॉकी क्लब, श्राची रारह बंगाल टाइगर्स (वर्तमान चैंपियन), वेदांता कलिंग लांसर्स, रांची रॉयल्स, एसजी पाइपर्स और एचआईएल गवर्निंग काउंसिल हिस्सा लेंगी। पुरुष लीग में 33 मैच खेले जाएंगे, जिनमें अर्जेंटीना, बेल्जियम, जर्मनी, इंग्लैंड, स्पेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे शीर्ष हॉकी राष्ट्रों के खिलाड़ी शामिल होंगे। सभी टीमें सिंगल राउंड-रॉबिन प्रारूप में एक-दूसरे से खेलेंगी। शीर्ष चार टीमें प्लेऑफ में पहुंचेंगी। क्वालिफायर 1 और एलिमिनेटर 23 जनवरी (भुवनेश्वर) को खेला जाएगा। वहीं दूसरा क्वालिफायर 25 जनवरी को खेला जाएगा। फाइनल और तीसरे स्थान के लिए मैच 26 जनवरी को कलिंग स्टेडियम, भुवनेश्वर में खेला जाएगा।

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राजामौली ने दो फिल्मों को मिलाकर बनाया नया संस्करण

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मुंबई । सुपरहिट फिल्मों ‘बाहुबली: द बिगिनिंग’ और ‘बाहुबली: द कंक्लूजन’ को एक साथ जोड़कर फिल्ममेकर एस.एस. राजामौली एक नया सिनेमाई अनुभव पेश करने जा रहे हैं। राजामौली की इस नई फिल्म का नाम ‘बाहुबली: द एपिक’ रखा गया है।
हालांकि, इस संयुक्त संस्करण में कई महत्वपूर्ण दृश्यों को हटा दिया गया है, ताकि फिल्म की कहानी और भावनात्मक प्रवाह को और अधिक सशक्त बनाया जा सके। हाल ही में एक इंटरव्यू में राजामौली, प्रभास और राणा दग्गुबाती ने बताया कि फिल्म में कई ऐसे सीन काटे गए हैं, जो पहले दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहे थे। इनमें तमन्ना भाटिया का मशहूर गाना ‘पाचा बोट्टेसिना’ भी शामिल है। राजामौली के अनुसार, फिल्म का उद्देश्य केवल दोनों फिल्मों को जोड़ना नहीं था, बल्कि कहानी को इस तरह गढ़ना था कि दर्शकों को यह एक नई और निरंतर यात्रा जैसा अनुभव दे। निर्माताओं के अनुसार, ‘बाहुबली: द एपिक’ का प्रारंभिक रनटाइम 5 घंटे 27 मिनट का था, जिसे एडिटिंग के बाद घटाकर 3 घंटे 43 मिनट किया गया है।
इस दौरान कई सीन छोटे किए गए और कुछ पूरी तरह हटाए गए, ताकि कहानी का प्रवाह बाधित न हो। राजामौली ने बताया कि फिल्म के फाइनल कट से पहले इसे दो अलग-अलग दर्शक समूहों सिनेमा विशेषज्ञों और आम दर्शकों के लिए स्क्रीन किया गया, ताकि उनकी प्रतिक्रियाओं के आधार पर संपादन को और परिष्कृत किया जा सके। राजामौली ने यह भी साझा किया कि उन्हें इस प्रोजेक्ट का विचार करीब पांच साल पहले आया था।
उन्होंने शुरुआत में दोनों फिल्मों को लिनियर नैरेशन के रूप में जोड़ने की कोशिश की, लेकिन वह तरीका प्रभावी नहीं लगा। बाद में उन्होंने सीन को छोटा करने और कुछ हिस्सों को हटाने का निर्णय लिया, ताकि कहानी अपनी भावनात्मक गहराई और सिनेमाई प्रभाव को बनाए रख सके। राजामौली के अनुसार, हर सीन का अपना इमोशनल महत्व है, लेकिन कहानी को संक्षिप्त और सशक्त बनाए रखने के लिए कुछ त्याग करने पड़े। दर्शकों में अब इस नई एडिटेड फिल्म को लेकर जबरदस्त उत्सुकता है।

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स्वस्थ दिमाग और फिट बॉडी के लिए नट्स, AIIMS के डॉक्टर ने बताया बादाम-पाइन समेत 7 नट्स का सही टाइमिंग

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बादाम, अखरोट, काजू, पिस्ता खाने से ताकत आती है। यह आपको दिल और दिमाग की कई सारी बीमारियों से भी बचाते हैं। लेकिन इसके लिए इन्हें खाने का सही समय पता होना चाहिए। जो कि एम्स-हार्वर्ड से ट्रेंड डॉक्टर ने बताया है।

पोषण की खान हैं नट्स
बचपन से बादाम, काजू, अखरोट खिलाया जाता है ताकि सिर से लेकर एड़ी तक जान रहे। इन्हें पोषण का भंडार माना जाता है, प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स, फाइबर आदि की कमी पूरी की जाती है। यह आपकी ब्रेन हेल्थ, हार्ट हेल्थ और वेट मैनेजमेंट के लिए फायदेमंद होते हैं। लेकिन क्या आप इन्हें खाने का सही वक्त जानते हैं। एम्स और हार्वर्ड से ट्रेंड गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी ने 7 नट्स को खाने का सही टाइम बताया है।

तेज दिमाग के लिए बादाम
​बादाम खाने का सही वक्त सुबह का है। यह विटामिन ई, मैग्नीशियम का बढ़िया सोर्स है। जो ब्लड शुगर बैलेंस रखने, ब्रेन फंक्शन बढ़ाने में मदद करता है। इन्हें सुबह ही खाना चाहिए।

अखरोट कब खाएं?
सौरभ सेठी ने दिल की सेहत और स्लीप क्वालिटी सुधारने के लिए अखरोट खाने की सलाह दी है। इसे शाम के वक्त खाने की सलाह दी है। जिससे ओमेगा 3 फैटी एसिड और मेलाटोनिन आराम से काम कर सकें।

प्रोटीन के लिए पिस्ता
पिस्ता खाने से प्रोटीन-फाइबर मिलता है और इसे दोपहर के वक्त खाना चाहिए। यह भूख कंट्रोल करने और ब्लड शुगर को स्टेबल करने में सपोर्ट करता है। साथ ही पूरे दिन लगातार एनर्जी बनी रहती है।

काजू खाने का तरीका
डॉक्टर ने लंच के साथ काजू खाने की सलाह दी है। इसमें जिंक, आयरन होता है, जो आपकी इम्यूनिटी बूस्ट करता है। एनर्जी देता है और मेटाबॉलिज्म को सपोर्ट करता है। मेटाबॉलिज्म सही रहने से वजन आसानी से कंट्रोल होता है।

पीकन
पीकन नट्स को डिजर्ट के रूप में खाना चाहिए। यह पॉलीफेनोल्स से भरा होता है, जो एलडीएल कोलेस्ट्रॉल और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करता है। इसे डिजर्ट में खाने से दिल को सुधारा जा सकता है और सेल्स को डैमेज होने से बचाया जा सकता है।

वेट लॉस के लिए पाइन नट्स
पाइन नट्स को नाश्ते और लंच के बीच खाना चाहिए। यह भूख कंट्रोल करने और फैट मेटाबॉलिज्म को तेज करने में मदद करता है। मोटापे से परेशान लोगों के लिए यह बढ़िया उपाय है।

मूंगफली
आप मू्ंगफली को दिन में कभी भी खा सकते हैं। इसका रेस्वेराट्रोल और नियासिन दिल और दिमाग के स्वास्थ्य को बढ़ाता है। भारत में सर्दियों के वक्त इसका खूब सेवन किया जाता है।

अगर ना पता हो सही वक्त
डॉक्टर ने बताया कि अगर आपको नट्स खाने का सही वक्त नहीं पता है तो एक सामान्य नियम है। एक मुट्ठी मिक्स्ड नट्स को आप लंच के साथ खा सकते हैं। सही वक्त पर लेने से पूरा फायदा मिलता है।

20 नवंबर के बाद बदल जाएगा कर्नाटक का CM? सिद्धारमैया OUT, DK शिवकुमार IN की चर्चा तेज!

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बेंगलुरु।  कर्नाटक की सियासत में इन दिनों एक सवाल हर जुबान पर है कि अगला सीएम कौन? मौजूदा मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल 20 नवंबर को पूरा हो रहा है. इसके ठीक बाद उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को कमान सौंपने की खबरें जोरों पर हैं. स्थानीय मीडिया में दावा है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार विधानसौध में सीएम पद की शपथ ले सकते हैं. लेकिन जब ये सवाल सिद्धारमैया से पूछा गया, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा. आइए क्या है पूरा मामला विस्तार से जानते हैं.

ढाई साल का फॉर्मूला–सच या अफवाह?
2023 में कांग्रेस ने कर्नाटक जीता था. उस वक्त पार्टी के अंदर दो बड़े चेहरे थे, सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार. दोनों के बीच कथित तौर पर एक समझौता हुआ था कि पहले ढाई साल सिद्धारमैया, अगले ढाई साल शिवकुमार. अब जब 20 नवंबर को सिद्धारमैया का आधा कार्यकाल खत्म हो रहा है, तो ये फॉर्मूला फिर से चर्चा में है. लेकिन सवाल ये है कि क्या ये लिखित समझौता था या सिर्फ राजनीतिक गलियारे की बातें?

सिद्धारमैया ने क्या कहा?
शुक्रवार को विधानसौध में पत्रकारों ने सिद्धारमैया से पूछा, “सर, खबर है कि 21 या 26 नवंबर को शिवकुमार सीएम बन जाएंगे?” बस इतना सुनते ही सिद्धारमैया भड़क गए. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा, “ये किसने बताया? क्या शिवकुमार ने तुम्हें फोन करके कहा? ये सब बकवास है.” फिर बिना कुछ और बोले, वो चले गए. ये पहली बार नहीं जब सिद्धारमैया ने ऐसी खबरों पर नाराजगी जताई हो. लेकिन इस बार उनकी बौखलाहट ने सबको हैरान कर दिया.

शिवकुमार चुप, लेकिन दावा मजबूत
दूसरी तरफ डीके शिवकुमार खामोश हैं. न उन्होंने सिद्धारमैया पर कोई तंज कसा, न ही कोई बयान दिया. लेकिन उनके करीबी कहते हैं कि डीके ने हाईकमान से साफ कह दिया है कि 20 नवंबर के बाद कुर्सी उनकी है.” शिवकुमार वोक्‍कलिगा समुदाय के बड़े नेता हैं. उनके पास पार्टी संगठन की कमान है. 2023 में उन्होंने सिद्धारमैया को सीएम बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. अब वो अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं. सिद्धारमैया खेमे के नेता खुलकर सामने आ गए हैं. आवास मंत्री बीजेड जमीर अहमद खान ने कहा कि सिद्धारमैया 2028 तक सीएम रहेंगे. शिवकुमार को इंतजार करना चाहिए. वो बीजेपी में नहीं जाएंगे, उनका खून कांग्रेस का है. समाज कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा ने कहा, “हमें दलित सीएम चाहिए. आंदोलन जारी रहेगा. लेकिन फैसला हाईकमान करेगा.” यानी एक तरफ शिवकुमार की दावेदारी, दूसरी तरफ दलित चेहरों की मांग और बीच में सिद्धारमैया की कुर्सी.

हाईकमान की चुप्पी
सबकी नजर दिल्ली पर टिकी है. कांग्रेस आलाकमान अभी तक चुप हैं. पिछले हफ्ते खड़गे बेंगलुरु आए थे, लेकिन कोई फैसला नहीं हुआ. सूत्र बताते हैं कि हाईकमान 10 नवंबर तक स्थिति साफ कर सकता है. अगर शिवकुमार सीएम बने, तो सिद्धारमैया को क्या मिलेगा? क्या दलित नेताओं की नाराजगी पार्टी को नुकसान पहुंचाएगी और सबसे बड़ा सवाल कि क्या ये ढाई साल का फॉर्मूला सच में था?