लगातार बुखार, थकान और हड्डियों में दर्द? बच्चों में दिखें ये लक्षण तो न करें नजरअंदाज

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What Are The First Signs Of Cancer In A Child: बचपन में होने वाला कैंसर बाकी कैंसर की तुलना में कम दिखता है, लेकिन यह उतना रेयर भी नहीं है जितना आमतौर पर समझ लिया जाता है. भारत में हर साल लगभग 50,000 से 75,000 नए बच्चों के कैंसर के मामले सामने आते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया और लिंफोमा प्रमुख हैं. अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान और इलाज से 80 प्रतिशत से अधिक बच्चों के ठीक होने की संभावना रहती है. असली चुनौती शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानने की है. चलिए आपको बताते हैं कि इसको लेकर डॉ. क्या कहते हैं|

क्या करने की होती है जरूरत?

डॉ. श्रावण कुमार बोडेपुडी, मणिपाल हॉस्पिटल, विजयवाड़ा  बचपन के कई कैंसर बहुत हल्के और सामान्य से लगने वाले लक्षणों के साथ शुरू होते हैं. लंबे समय तक रहने वाला बुखार, लगातार थकान या शरीर पर छोटी-सी गांठ, ये सब अक्सर सामान्य बीमारी समझकर टाल दिए जाते हैं. कई बार सही जांच और इलाज में हफ्तों या महीनों की देरी हो जाती है, खासकर उन इलाकों में जहां स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं. अगर माता-पिता सतर्क रहें और संकेतों को गंभीरता से लें, तो इलाज जल्दी शुरू किया जा सकता है|

किन लक्षणों पर ध्यान रखने की जरूरत होती है?

डॉ. श्रावण बताते हैं कि अगर कोई लक्षण दो हफ्तों से ज्यादा बना रहे या बार-बार लौटे, तो उसे नजरअंदाज न करें. बिना वजह गर्दन, बगल या पेट में गांठ या सूजन दिखाई देना, बार-बार नाक से खून आना, मसूड़ों से खून आना या त्वचा पर छोटे लाल धब्बे उभरना चेतावनी हो सकते हैं. लगातार बुखार, बार-बार इंफेक्शन, असामान्य थकान, बिना कारण वजन कम होना या भूख न लगना भी संकेत हैं. हड्डियों या जोड़ों में दर्द, जिससे बच्चा लंगड़ाकर चले या रात में दर्द की शिकायत करे, उसे भी गंभीरता से लें. सुबह के समय सिरदर्द के साथ उल्टी, दृष्टि या संतुलन में समस्या, पेट में सूजन या चेहरा पीला पड़ना, ये सब जांच की मांग करते हैं. तस्वीरों में आंखों में सफेद चमक दिखना दुर्लभ आंख के ट्यूमर का संकेत हो सकता है. जरूरी नहीं कि हर लक्षण कैंसर हो, लेकिन इनकी अनदेखी ठीक नहीं|

आपको क्या करना चाहिए?

ल्यूकेमिया में अक्सर बुखार, थकान, पीलापन और आसानी से चोट लगना दिखता है. लिंफोमा में गर्दन या बगल में सख्त और बढ़ती हुई गांठें नजर आती हैं. ब्रेन ट्यूमर सुबह के सिरदर्द और संतुलन की समस्या से जुड़ा हो सकता है, जबकि कुछ ठोस ट्यूमर पेट में सूजन या गांठ के रूप में दिखते हैं. अगर बच्चे के लक्षण बने रहें या बढ़ते जाएं, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें. सामान्य खून की जांच और इमेजिंग से शुरुआती संकेत मिल सकते हैं|

पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह की बढी मुश्किल, उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई को दिए जांच के आदेश

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सागर।  सागर जिले के बहुत चर्चित दलित महिला अंजना हत्याकांड में उच्चतम न्यायालय की युगल खंडपीठ ने राज्य सरकार के पुरजोर विरोध के बाद इस दलित महिला हत्याकांड में सीबीआई के आदेश उच्चतम न्यायालय ने जारी किए सूत्रों अनुसार इस प्रकरण में पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह हत्या के इस आरोप में षड्यंत्रकारी बताए जाते हैं। राजनीतिक क्षेत्र में अब भूपेंद्र सिंह की मुश्किल है और अधिक बढ़ गई है। पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह को लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया है और सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को आदेश दिया है। 

क्या है पूरा मामला

पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ कुछ गंभीर आरोपों को लेकर एक याचिका अदालत में दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि मामले की स्थानीय स्तर पर सही और निष्पक्ष जांच नहीं हो रही और इसमें बड़े लोगों की भूमिका हो सकती है। इस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच जरूरी है। इसलिए अदालत ने CBI को पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

अदालत ने कहा कि अगर किसी मामले में निष्पक्ष जांच पर सवाल उठते हैं या आरोप गंभीर और प्रभावशाली लोगों से जुड़े हों तो ऐसी स्थिति में केंद्रीय एजेंसी से जांच कराना जरूरी हो सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने CBI को पूरे मामले की जांच शुरू करने को कहा।

अब आगे क्या होगा

CBI जांच के बाद इन कदमों की संभावना रहती है:

संबंधित लोगों से पूछताछ

दस्तावेज़ और सबूतों की जांच

जरूरत पड़ने पर एफआईआर दर्ज

सबूत मिलने पर गिरफ्तारी या चार्जशीट

यानि अब पूरा मामला CBI के हाथ में होगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे कानूनी कार्रवाई होगी।

राजनीतिक मायने:

राजनीति में इसे पूर्व मंत्री के लिए बड़ी मुश्किल माना जा रहा है, क्योंकि CBI जांच शुरू होने के बाद मामला और गंभीर हो सकता है।

जानिए दुनिया के नंबर-1 बल्लेबाज, गेंदबाज और ऑलराउंडर

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आईसीसी टी20 रैंकिंग:टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बाद ICC ने ताजा टी20 इंटरनेशनल रैंकिंग जारी कर दी है. नई रैंकिंग में बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं. खास बात यह है कि बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा नजर आ रहा है|

बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा टॉप पर

आईसीसी की ताजा टी20 बल्लेबाजी रैंकिंग में अभिषेक शर्मा पहले स्थान पर पहुंच गए हैं. उनके खाते में 874 रेटिंग पॉइंट्स हैं और शानदार फॉर्म की बदौलत उन्होंने दुनिया के कई बड़े बल्लेबाजों को पीछे छोड़ दिया है.दूसरे स्थान पर साहिबजादा फरहान हैं, जिनके 848 रेटिंग पॉइंट्स हैं. वहीं इंग्लैंड के फिस सॉल्ट 803 पॉइंट्स के साथ तीसरे नंबर पर मौजूद हैं.  भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज ईशान किशन भी टॉप-5 में जगह बनाने में सफल रहे हैं. वह 783 रेटिंग पॉइंट्स के साथ चौथे स्थान पर हैं. इसके अलावा श्रीलंका के पथुम निसांका पांचवें नंबर पर हैं|टॉप-10 में भारत के और भी खिलाड़ी शामिल हैं. तिलक वर्मा छठे और सूर्यकुमार यादव सातवें स्थान पर मौजूद हैं. वहीं साउथ अफ्रीका के डिवॉल्ड ब्रेविस 8वें नंबर पर हैं. इंग्लैंड के जोस बटलर नौवें और न्यूजीलैंड के टिम सीफर्ट 10वें स्थान पर हैं |

गेंदबाजी में वरुण चक्रवर्ती नंबर 1

गेंदबाजी रैंकिंग की बात करें तो भारत के स्पिनर वरुण चक्रवर्ती  771 रेटिंग पॉइंट्स के साथ दुनिया के नंबर 1 टी20 गेंदबाज बन गए हैं. दूसरे स्थान पर अफगानिस्तान के स्टार स्पिनर राशिद खान हैं, जिनके 753 पॉइंट्स हैं. पाकिस्तान के अबरार अहमद तीसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. वहीं साउथ अफ्रीका के कॉर्बिन बॉश चौथे, इंग्लैंड के अनुभवी स्पिनर आदिल राशिद पांचवें और ऑस्ट्रेलिया के एडम जम्पा छठे स्थान पर हैं.भारतीय तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी टॉप-10 में शामिल हैं और वह सातवें स्थान पर काबिज हैं. उनकी शानदार गेंदबाजी ने टी20 वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया की जीत में अहम भूमिका निभाई थी |

ऑलराउंडर रैंकिंग में सिकंदर रजा शीर्ष पर

ऑलराउंडर रैंकिंग में जिम्बाब्वे के स्टार खिलाड़ी सिकंदर रजा पहले स्थान पर हैं और उनके 328 रेटिंग पॉइंट्स हैं. भारत के स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या 284 पॉइंट्स के साथ दूसरे नंबर पर मौजूद हैं. पाकिस्तान के युवा खिलाड़ी साइम अयूब तीसरे स्थान पर हैं. इसके अलावा भारत के शिवम दुबे भी टॉप-10 ऑलराउंडर की सूची में शामिल हैं और वह नौवें नंबर पर हैं|

भारतीय खिलाड़ियों का दिखा दबदबा

नई आईसीसी टी20 रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों की मजबूत मौजूदगी साफ दिखाई देती है. बल्लेबाजी, गेंदबाजी और ऑलराउंडर तीनों कैटेगरी में भारत के कई खिलाड़ी टॉप-10 में शामिल हैं, जो टीम की मौजूदा मजबूत स्थिति को दर्शाता है|

क्या है एस्मा कानून? जानिए कब और क्यों लागू करती हैं सरकारें

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नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिलाकर रख दिया है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। आपूर्ति में संभावित बाधाओं को देखकर भारत सरकार ने अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून (एस्मा) के तहत आपातकालीन शक्तियां लागू कर दी हैं। अब लोगों के मन में ये सवाल उठा रहा हैं कि आखिरकार ये एस्मा क्या है। 

एस्मा क्या है और क्यों लगाया गया?
एस्मा का मतलब है, जब सरकारों को लगता है कि किसी अनिवार्य सेवा (जैसे बिजली, पानी, या गैस) की कमी से आम जीवन अस्त-व्यस्त हो सकता है, तब वहां एस्मा लगाती है। इसके लागू होने के बाद तेल और गैस सेक्टर के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी काम करने से मना करता है, तब पुलिस उस अधकारी और कर्मचारी को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है और जेल या जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यदि आपूर्ति बनाए रखने के लिए कर्मचारियों को अतिरिक्त समय काम करने को कहा जाता है, तब वे मना नहीं कर सकते।एस्मा का पूरा नाम अत्यावश्यक सेवा अनुरक्षण कानून है। यह भारत सरकार और राज्य सरकारों द्वारा बनाया गया एक ऐसा कानून है, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब सरकार को लगता है कि किसी जरूरी सेवा के रुकने से आम जनता का जीवन संकट में पड़ सकता है।

एस्मा की मुख्य बातें:
दरअसल एस्मा लागू होने के बाद, उस विभाग के कर्मचारी हड़ताल पर नहीं जा सकते। उन्हें काम करना ही होगा। यदि कर्मचारी पहले से हड़ताल पर हैं, तब एस्मा लगते ही उन्हें काम पर लौटना पड़ता है। ऐसा न करने पर उनकी हड़ताल को अवैध माना जाता है। इस कानून का उल्लंघन करने वाले या हड़ताल के लिए उकसाने वाले लोगों को बिना वारंट के गिरफ्तार किया जा सकता है। इसमें एक साल तक की जेल या जुर्माना (या दोनों) का प्रावधान है। सरकार कर्मचारियों को अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) काम करने के लिए मजबूर कर सकती है और कर्मचारी इसके लिए मना नहीं कर सकते।

एस्मा किन सेवाओं पर लगाया जा सकता है?
दरअसल सरकार आमतौर पर उन सेवाओं पर एस्मा लगाती है जो जनता के लिए लाइफलाइन होती हैं, जैसे: स्वास्थ्य सेवाएं (अस्पताल और डॉक्टर) परिवहन सेवाएं (रेलवे, बस, हवाई सेवा) बिजली और पानी की आपूर्ति, बैंकिंग और डाक सेवाएं, गैस और तेल की आपूर्ति (जैसा कि अभी युद्ध के हालातों में किया गया है)भारत सरकार या राज्य सरकारें एस्मा को तब लागू करती हैं जब देश या किसी राज्य में ऐसी स्थितियाँ पैदा हो जाएं कि जनजीवन के लिए अनिवार्य सेवाओं (जैसे बिजली, पानी, स्वास्थ्य, या परिवहन) के ठप होने का खतरा हो। मुख्य रूप से तब लगाया जाता है जब इन सेवाओं के कर्मचारी हड़ताल पर चले जाते हैं या काम करने से मना कर देते हैं, जिससे जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, युद्ध, प्राकृतिक आपदा या वैश्विक संकट (जैसे वर्तमान में जारी अमेरिका-ईरान युद्ध और उससे उपजा गैस संकट) के समय भी सरकार इस लागू करती है ताकि जरूरी चीजों की सप्लाई चेन न टूटे और जमाखोरी या कृत्रिम कमी को रोका जा सके।एस्मा लागू करने का सबसे बड़ा क्यों यह है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सामूहिक सुरक्षा और जनहित को व्यक्तिगत या कर्मचारी हितों से ऊपर रखा जाता है। सरकार इस कानून के जरिए यह सुनिश्चित करती है कि अस्पताल में इलाज, घरों में रसोई गैस की सप्लाई और सड़कों पर परिवहन जैसी मूलभूत जरूरतें किसी भी विरोध या विवाद के कारण रुकने न पाएं। चूँकि एस्मा लागू होने के बाद हड़ताल करना गैर-कानूनी हो जाता है और पुलिस को बिना वारंट गिरफ्तारी के अधिकार मिल जाते हैं, इसलिए यह कानून एक सख्त निवारक के रूप में कार्य करता है, जो संकट के समय राष्ट्र की कार्यक्षमता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य हो जाता है। 

अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फैंस को बड़ा सरप्राइज, फिल्म ‘AA22xA6’ का टीजर होगा लॉन्च

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अल्लू अर्जुन के जन्मदिन पर फैंस को एक बड़ा सरप्राइज मिलेगा। एक्टर की अपकमिंग फिल्म ‘AA22xA6’ का टाइटल सामने आया। इस फिल्म का टीजर एक खास इवेंट में बॉलीवुड के सुपरस्टार शाहरुख खान रिवील करेंगे। फिल्म ‘AA22xA6’ के डायरेक्टर एटली शाहरुख खान को फिल्म ‘जवान’ में निर्देशित कर चुके हैं। 

बड़े पैमाने पर लॉन्च होगा फिल्म का टाइटल

वैरायटी इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक फिल्म ‘AA22xA6’ के मेकर्स अल्लू अर्जुन के जन्मदिन (8 अप्रैल) पर ऑफिशियल टाइटल फैंस काे बताएंगे। टाइटल की घोषणा खास अंदाज में हाेगी। टाइटल और टीजर वीडियो में वीएफएक्स का इस्तेमाल होगा। साथ ही दर्शकों को फिल्म की कहानी की झलक भी मिलेगी। 

फिल्म में दीपिका के अलावा ये एक्ट्रेसेस भी आएंगी नजर 

अल्लू अर्जुन और दीपिका पादुकोण फिल्म ‘AA22xA6’ का हिस्सा हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसमें मृणाल ठाकुर, रश्मिका मंदाना और जान्हवी कपूर भी नजर आएंगी। डायरेक्टर एटली अलग तरह की कहानी फिल्म में दिखाएंगे। साथ ही इसमें एक्शन भी भरपूर होगा।

30 की उम्र में छोटी-छोटी बातें भूल रहे हैं? कहीं ‘ब्रेन फॉग’ का संकेत तो नहीं

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Why Do I Feel Mentally Slow In My 30s: तीस की उम्र में याददाश्त कम होना आम बात नहीं है.  लेकिन कई लोग एक अलग तरह की परेशानी महसूस कर रहे हैं जैसे कि दिमाग में धुंध-सा छाया रहना, सोचने की रफ्तार धीमी पड़ जाना, मीटिंग में ध्यान न टिक पाना, या बात करते-करते साधारण शब्द भूल जाना. जो काम पहले आसानी से हो जाते थे, अब बोझ जैसे लगते हैं. चलिए आपको बताते हैं कि यह किन कारणों के चलते हो रहा है और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है. 

क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विवेक कुमार ने TOI को बताया कि यह डिमेंशिया नहीं, बल्कि ‘ब्रेन फॉग’ है. इसमें मेंटल थकान, उलझन और एकाग्रता में कमी की दिक्कत का सामना करना पड़ता है.  एक्सपर्ट के अनुसार,  लगातार तनाव, नींद की कमी, पोषण की कमी, अत्यधिक स्क्रीन टाइम और कुछ मामलों में कोविड के बाद की रिकवरी इसकी बड़ी वजहें हैं. यानी दिमाग जवाब नहीं दे रहा, वह संकेत दे रहा है कि उसे संभालने की जरूरत है|

क्या यह कोई बीमारी है?

ब्रेन फॉग कोई आधिकारिक बीमारी नहीं, बल्कि लक्षणों का मेल है जिसमें मानसिक सुस्ती, छोटी-छोटी बातें भूलना, मल्टीटास्किंग में दिक्कत और दोपहर तक थकावट शामिल होती है. दिमाग शरीर की लगभग 20 प्रतिशत ऊर्जा इस्तेमाल करता है. जब नींद अधूरी हो, तनाव ज्यादा हो या पोषण कम मिले, तो सबसे पहले सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है. ब्रेन बंद नहीं होता, बस लो पावर मोड में चला जाता है|

क्यों होती है इस तरह की दिक्कत?

तीस की उम्र बॉयोलॉजिकल रूप से मेंटल क्षमता का अच्छा दौर माना जाता है, लेकिन लाइफस्टाइल बदल चुकी है. काम का दबाव, आर्थिक जिम्मेदारियां, बच्चों की परवरिश, सोशल मीडिया की तुलना और लगातार डिजिटल एक्सपोजर तनाव बढ़ाते हैं. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन बताते हैं कि लंबी कार्य अवधि और कम नींद ध्यान और वर्किंग मेमोरी को कमजोर करती है. सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, एक तिहाई एडल्ट पर्याप्त नींद नहीं ले पाते, जबकि नींद के दौरान ही दिमाग खुद को रिपेयर करता है|

आपको किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

पोषक तत्वों की कमी भी अहम कारण हो सकती है. विटामिन B12, विटामिन D3 और आयरन की कमी से एकाग्रता और एनर्जी घटती है. इसके साथ में थकान, झुनझुनी, बाल झड़ना या पीली त्वचा जैसे संकेत मिलें तो ब्लड टेस्ट कराना जरूरी है. नींद, नियमित व्यायाम और पानी की पर्याप्त मात्रा, ये तीन चीजें अक्सर नजरअंदाज होती हैं. रोज 30 मिनट हल्का-फुल्का एक्सराइज ब्लड फ्लो बढ़ाता है और ध्यान सुधारता है. हल्का डिहाइड्रेशन भी फोकस बिगाड़ सकता है. संतुलित आहार और स्क्रीन से दूरी भी मददगार है. अगर भूलने की समस्या रोजमर्रा के काम या नौकरी को प्रभावित करे, या अचानक भ्रम, तेज सिरदर्द, बोलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें|
 

Gujarat Legislative Assembly में घमासान, Bharatiya Janata Party और Indian National Congress के बीच तीखी नोकझोंक

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अहमदाबाद| गुजरात विधानसभा के चल रहे सत्र के दौरान एक बार फिर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। खास तौर पर मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता जीतू वाघाणी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक शैलेष परमार के बीच हुई तीखी बहस से सदन का माहौल काफी गरमा गया। 
चर्चा की शुरुआत में जीतू वाघाणी ने आक्रामक अंदाज में कहा कि भाजपा पहले ही सात विधानसभा सीटें जीत चुकी है और आने वाली आठवीं सीट भी भाजपा के खाते में ही जाएगी। उन्होंने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन्हें पूरी तरह नकार दिया है। हालांकि विवाद उस समय बढ़ गया जब वाघाणी ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर व्यक्तिगत टिप्पणी करनी शुरू कर दी। सदन में बोलते हुए उन्होंने कई बार सोनिया गांधी का नाम लेते हुए कटाक्ष किया। उन्होंने विदेशी मूल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता “इम्पोर्ट होकर आए हैं”, जबकि देश को नरेंद्र मोदी जैसे स्वदेशी नेता की जरूरत है।
वाघाणी द्वारा सोनिया गांधी को “इम्पोर्टेड नेता” कहने पर विपक्षी बेंचों पर बैठे कांग्रेस विधायकों ने कड़ा विरोध जताया और सदन में शोरगुल शुरू हो गया। वाघाणी के इन तीखे बयानों के जवाब में कांग्रेस विधायक शैलेष परमार ने मोर्चा संभालते हुए उन्हें कड़ी चेतावनी दी। परमार ने कहा, “आप अपनी सीमा में रहें। यदि आप मर्यादा पार करेंगे तो मुझे पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना पड़ेगा।” उन्होंने आगे कहा कि यदि पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया गया तो पूरी टिप्पणी सदन के आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज होगी, जिससे भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।
मांगों पर चर्चा के दौरान जब शैलेष परमार ने इस तरह का कड़ा रुख अपनाया तो कुछ देर के लिए सदन में सन्नाटा छा गया। परमार ने स्पष्ट कहा कि बार-बार सोनिया गांधी और विदेशी मूल का मुद्दा उठाना सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। इस दौरान दोनों पक्षों के विधायकों के बीच जोरदार नारेबाजी और तीखी बहस भी देखने को मिली, जिससे विधानसभा का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया।

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News Desk

जसप्रीत बुमराह की घातक स्लोअर गेंद का राज क्या है? पाक मूल के पेसर ने किया बड़ा दावा

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यूएई के तेज गेंदबाज जाहूर इन दिनों अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में उन्होंने दावा किया है कि भारतीय टीम के स्टार तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह की घातक स्लोअर गेंद की तकनीक को बेहतर बनाने में उनका योगदान रहा है।जाहूर खान के मुताबिक यह घटना साल 2020 में हुई, जब कोविड-19 के कारण आईपीएल का आयोजन यूएई में किया गया था। उस दौरान वह मुंबई इंडियंस के लिए नेट बॉलर के रूप में टीम से जुड़े थे। उन्होंने कहा कि बुमराह पहले भी स्लोअर गेंद डालते थे, लेकिन उनकी तकनीक को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने कुछ सुझाव दिए थे।

अबू धाबी मैच के बाद शुरू हुई बातचीत

जाहूर खान ने उस समय की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि अबू धाबी में खेले गए एक मुकाबले में बुमराह, ट्रेंट बोल्ट और नाथन कूल्टर-नाइल ने काफी रन खर्च कर दिए थे। उन्होंने कहा, ‘एक कहानी सुनाता हूं। बुमराह पहले भी स्लोअर गेंद डालते थे, लेकिन सामान्य एक्शन से। अबू धाबी के एक मैच में उन्होंने, ट्रेंट बोल्ट और नाथन कूल्टर-नाइल ने काफी रन दे दिए थे। उस समय सितंबर में यूएई में तापमान करीब 50 डिग्री होता है और इतनी गर्मी में गेंद पकड़ना भी मुश्किल हो जाता है।’

मुंबई इंडियंस के साथ अभ्यास सत्र में बुलाया गया

जाहूर ने बताया कि इसके बाद उन्हें मुंबई इंडियंस के साथ अभ्यास सत्र में बुलाया गया और उन्होंने अपनी गेंदबाजी से सभी का ध्यान खींचा। जाहूर ने वीडियो में कहा, ‘मुंबई इंडियंस ने मुझे बुलाया। मैंने छह दिन क्वारंटीन किया और सातवें दिन प्रैक्टिस के लिए गया। उस रात मैं टीम के साथ था। जहीर खान और रॉबिन सिंह मुझे जानते थे, क्योंकि मैंने टी10 लीग में एक मेडन ओवर फेंका था। मैंने पहली गेंद यॉर्कर डाली और अगली पांच गेंदें स्लोअर थीं। हम सब साथ बैठे हुए थे, बुमराह आकर टेबल के सामने बैठ गए, रोहित शर्मा भी वहीं बैठ गए और मैं भी वहीं बैठा था, बस सब देख रहा था।’

मुंबई इंडियंस मैनेजमेंट को पहले से पता थी खासियत

जाहूर खान ने बताया कि मुंबई इंडियंस का टीम मैनेजमेंट उनकी स्लोअर गेंदों के बारे में पहले से जानता था। टी10 लीग में उनके प्रदर्शन की वजह से टीम के कई सदस्य उनकी गेंदबाजी से परिचित थे। उन्होंने याद किया कि इसी दौरान उनकी भारतीय स्टार पेसर जसप्रीत बुमराह के साथ स्लोअर गेंद की तकनीक को लेकर लंबी बातचीत हुई। इसके बाद दोनों ने नेट्स में साथ गेंदबाजी भी की। जाहूर के मुताबिक, उन्होंने बुमराह से कहा, ‘वही एक्शन और वही ग्रिप रखकर स्लोअर गेंद डाली जाती है। उन्होंने पूछा कि यह कैसे संभव है? मैंने कहा कि प्रैक्टिस में बताऊंगा। उन्होंने कहा कि ठीक है, अगली प्रैक्टिस में अपनी ग्रिप जरूर दिखाना।’

नेट्स में दिखाई स्लोअर गेंद की तकनीक

जाहूर ने बताया कि जब अगला अभ्यास सत्र शुरू हुआ तो उन्होंने नेट्स में अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया। उस समय मुंबई इंडियंस के गेंदबाजी कोच शेन बॉन्ड और मुख्य कोच महेला जयवर्धने भी वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा, ‘जब प्रैक्टिस शुरू हुई तो मैं गेंदबाजी कर रहा था। उस समय शेन बॉन्ड गेंदबाजी कोच थे और महेला जयवर्धने नेट्स के पीछे खड़े थे। मैंने एक स्लोअर बाउंसर डाली, जिस पर बल्लेबाज चकमा खा गया। तब शेन बॉन्ड ने मुझसे पूछा कि तुम्हारी ग्रिप क्या है? क्या तुम ऑफ-कटर डालते हो? मैंने कहा नहीं, यह उसी ग्रिप से डाली गई गेंद है।’

कोच शेन बॉन्ड और जयवर्धने भी हुए हैरान

जाहूर के मुताबिक, शेन बॉन्ड ने जयवर्धने से कहा कि यह क्रिकेट में नई चीज है, देखो कैसे यह एक ही एक्शन और आर्म स्पीड में स्लोअर गेंद डाल रहा है। जाहूर का कहना है कि उनकी इस तकनीक ने टीम के कोचिंग स्टाफ को भी प्रभावित किया था। जाहूर खान ने आगे बताया कि जब उनसे ग्रिप दिखाने को कहा गया तो उन्होंने नेट्स में वही तकनीक दोहराकर दिखाई। उन्होंने कहा, ‘उन्होंने मुझसे कहा कि दिखाओ कैसे करते हो। मैंने ऐसे ही गेंद फेंककर दिखाई और फिर दो-तीन स्लोअर गेंदें डालीं। इसके बाद उन्होंने जयवर्धने से कहा कि यह क्रिकेट में नई चीज है। उन्होंने कहा- देखो यह कितनी शानदार स्लोअर गेंद डालता है, वही एक्शन और वही आर्म स्पीड रखते हुए।’

बुमराह ने खुद पूछा था स्लोअर गेंद का राज

जाहूर के मुताबिक, इसके एक-दो दिन बाद उनकी नेट्स में जसप्रीत बुमराह के साथ गेंदबाजी हुई। उसी दौरान बुमराह ने उनसे स्लोअर गेंद की ग्रिप के बारे में पूछा। उन्होंने कहा, ‘बुमराह ने मुझसे कहा- पाजी, आपकी ग्रिप क्या है, मुझे दिखाओ।’ मैंने उन्हें वही ग्रिप दिखा दी और बताया कि गेंद उसी एक्शन में आनी चाहिए। फिर उन्होंने गेंद डाली और कहा, यह तो नेक्स्ट लेवल चीज है।’ जाहूर ने अंत में कहा कि उन्हें यह बात काफी पसंद आई कि इतने बड़े स्टार गेंदबाज होने के बावजूद बुमराह नई चीजें सीखने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने कहा, ‘मैं इस समय यूएई के लिए खेल रहा हूं और वह विश्व स्तरीय गेंदबाज हैं। मुझे यह बात बहुत अच्छी लगी कि इतने बड़े स्टार होने के बावजूद वह मुझसे पूछ रहे थे।’हालांकि जाहूर खान के इस दावे पर आधिकारिक तौर पर जसप्रीत बुमराह और मुंबई इंडियंस की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन यह वीडियो सामने आने के बाद क्रिकेट फैंस के बीच इस दावे को लेकर चर्चा जरूर तेज हो गई है।
 

लद्दाख में राज्य का दर्जा देने की मांग तेज, 12 मार्च को विरोध मार्च का आह्वान

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श्रीनगर: लद्दाख के संगठनों ने राज्य का दर्जा और अन्य मांगों को लेकर 12 मार्च को शांतिपूर्ण विरोध मार्च का आह्वान किया है. राजनीतिक और धार्मिक निकायों के समूह, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने लद्दाख के लोगों से शांतिपूर्ण मार्च में भाग लेने का आग्रह किया है. इसका उद्देश्य अपनी मांगों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय समिति के साथ बातचीत के एक और दौर के लिए दबाव बनाना है.एलएबी और करगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) भारतीय संविधान में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची का दर्जा पाने के लिए अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

गृह मंत्रालय द्वारा गठित उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के सदस्य और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन चेरिंग दोरजे लकरुक ने कहा कि विरोध मार्च का मकसद केंद्र सरकार पर अपनी मांगों पर बातचीत करने और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वानचुक की रिहाई के लिए दबाव डालना है. दो अन्य एक्टिविस्ट भी हिरासत में हैं.

दोरजे ने ईटीवी भारत से कहा, “बातचीत में देरी हो रही है. सरकार गंभीर नहीं लग रही है. पिछले साल के विरोध प्रदर्शनों के बाद बनाया गया न्यायिक आयोग धीमा रहा है, जिससे युवा अदालतों के चक्कर लगा रहे हैं. हम उनके केस वापस लेने की मांग कर रहे हैं.”

जलवायु कार्यकर्ता वांगचुक के नेतृत्व में 14 दिन की भूख हड़ताल के बाद 24 सितंबर 2025 को लद्दाख में विरोध प्रदर्शन हुए, जो पुलिस के साथ हिंसक झड़पों में बदल गया. इसमें चार लोग मारे गए और लगभग 90 घायल हो गए. तब से वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) के तहत हिरासत में रखा गया है. वह राजस्थान के जोधपुर जेल में कैद हैं. हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है.

दोरजे ने कहा कि केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के नेतृत्व वाली लद्दाख पर हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) ने फरवरी की मीटिंग में इन मांगों को ‘उपयुक्त’ नहीं पाया. उन्होंने कहा, “बातचीत बेनतीजा रही, क्योंकि वे हमारी मांगों को लेकर गंभीर नहीं थे. उनके अनुरोध पर हमने अपनी मांगों को सही ठहराते हुए 26 पन्नों का मसौदा प्रस्ताव दाखिल किया. लेकिन उन्होंने बैठक में हमसे कहा कि मांगें संभव नहीं हैं. हमसे प्रस्ताव मांगने का क्या उद्देश्य था?”

पिछले साल अक्टूबर में लद्दाख के प्रतिनिधियों ने केंद्र सरकार के साथ तब तक बातचीत करने से मना कर दिया था, जब तक कि हत्याओं की न्यायिक जांच समेत उनकी मांगें पूरी नहीं की जाती हैं. तब HPC के साथ बातचीत रुक गई थी.

विरोध मार्च के शुरुआती प्लान के मुताबिक, लेह चौक से एक जुलूस शुरू होगा और पोलोग्राउंड पर इकट्ठा होगा. दोरजे ने कहा कि इजाजत मिलने के बाद लेह एपेक्स बॉडी के नेता दिन में मार्च को संबोधित करेंगे.

लेकिन इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी कि अधिकारियों ने विरोध मार्च के लिए इजाजत दी है या नहीं, क्योंकि लेह के उपायुक्त (DC) से संपर्क करने की बार-बार कोशिश करने पर भी बात नहीं हो पाई.

दूसरी ओर, न्यायिक जांच आयोग के संयुक्त सचिव रिगजिन स्पैलगन (Rigzin Spalgon) ने तीन सदस्यों वाले आयोग की प्रगति रिपोर्ट दी. उन्होंने जोर देकर कहा कि जांच सही, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से की जा रही है और जिन लोगों ने हलफनामा जमा किया है, उन पर आयोग की निर्धारित प्रक्रिया के हिसाब से ध्यान दिया जाएगा. उनके अनुसार, आयोग को आम जनता के साथ-साथ प्रशासन के अलग-अलग विभागों के अधिकारियों से बड़ी संख्या में हलफनामे मिले हैं और उनकी जांच की गई है.

स्पैलगन ने आगे कहा, “दिसंबर 2025 तक प्रशासन की तरफ से कुल 22 गवाहों से पूछताछ की गई थी. मार्च 2026 में जांच फिर से शुरू हुई और अब तक 18 प्रशासनिक गवाहों से पूछताछ की जा चुकी है. इसके अलावा 45 पब्लिक एफिडेविट जमा किए गए हैं.”

उन्होंने कहा कि आयोग अभी प्रशासन के जमा किए गए एफिडेविट की जांच कर रहा है और सरकारी और नागरिक गवाहों से पूछताछ करेगा. स्पैलगन ने कहा, “उनके बयान चल रही न्यायिक कार्यवाही के हिस्से के रूप में दर्ज किए जाएंगे.”

प्रियंका चोपड़ा ने बेटी मालती को पब्लिक से दूर रखने की वजह बताई, बोलीं– ‘अजनबी ने स्कूल से घर तक पीछा किया’

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प्रियंका और निक जोनस ने 2018 में शादी की थी। 2022 में सरोगेसी के जरिए उनकी बेटी मालती का जन्म हुआ। प्रियंका चोपड़ा अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस को सार्वजनिक जीवन से दूर रखना चाहती हैं। उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में इस फैसले का कारण बताया। प्रियंका और उनके पति निक जोनस अपनी बेटी की पर्सनल लाइफ और सुरक्षा को बहुत महत्व देते हैं।

क्यों मालती को पब्लिक से दूर रखती हैं प्रियंका

प्रियंका ने ‘नॉट स्किनी बट नॉट फैट’ पॉडकास्ट में बताया कि जैसे-जैसे मालती बड़ी हो रही है, वह उसे ज्यादा छिपाकर रखने की कोशिश कर रहे हैं। वह चाहती हैं कि मालती आम जीवन जी सके, बिना किसी डर के। वह नहीं चाहते कि लोग उसकी तस्वीरें या वीडियो बिना इजाजत के बनाएं।

प्रियंका ने बताया एक किस्सा

इस दौरान प्रियंका ने एक घटना का जिक्र किया, जिसमें एक अजनबी व्यक्ति स्कूल से घर लौटते समय मालती का पीछा कर रहा था और उसका वीडियो बना रहा था। इसी वजह से जब भी मालती बाहर जाती हैं सुरक्षा गार्ड उनके साथ रहते हैं। प्रियंका कहती हैं कि उन्होंने खुद सार्वजनिक जीवन चुना है, लेकिन बेटी को यह फैसला खुद लेने का हक मिलना चाहिए। लोगों की एक्साइटमेंट अच्छी है, लेकिन सुरक्षा सबसे पहले आती है।

‘वाराणसी’ में नजर आएंगी प्रियंका

हाल ही में उनकी फिल्म ‘द ब्लफ’ रिलीज हुई, जो समुद्री डाकुओं पर आधारित एक्शन फिल्म है। अब प्रियंका जल्द ही एसएस राजामौली की फिल्म ‘वाराणसी’ में नजर आएंगी। इस फिल्म में महेश बाबू और पृथ्वीराज सुकुमारन भी हैं। यह एक टाइम-ट्रैवल एडवेंचर फिल्म है। इसका बजट लगभग 1300 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। यह फिल्म अप्रैल 2027 में रिलीज होगी। इसके अलावा प्रियंका वेब सीरीज ‘सिटाडेल’ के दूसरे सीजन में भी नजर आएंगी।