अब तक इन कलाकारों ने जीती ‘द गोल्डन बॉय’ ट्रॉफी

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फिल्म जगत के सबसे प्रमुख ऑस्कर अवॉर्ड के 98वें संस्करण का आयोजन 15 मार्च को होगा। लॉस एंजिल्स के डॉल्बी थिएटर में आयोजित होने वाले इस अवॉर्ड समारोह में भारतीय अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा भी प्रेजेंटर के तौर पर शामिल होंगी। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। भारत में इस अवॉर्ड्स समारोह को 16 मार्च की सुबह लगभग 4:30 बजे से देखा जा सकेगा। जानते हैं कि ऑस्कर में अब तक कैसा रहा है भारत का इतिहास और किन भारतीय कलाकारों ने जीता है अब तक ये अवॉर्ड?

भारत की किसी फिल्म को नहीं मिला ऑस्कर

ऑस्कर अवॉर्ड को अकादमी अवॉर्ड भी कहते हैं। इन्हें साल 1927 में शुरू किया गया था, लेकिन पहला अवॉर्ड 1929 में आयोजित हुआ था। 98 साल के इतिहास में भारत की तरफ से 50 से ज्यादा फिल्में ऑस्कर अवॉर्ड के लिए भेजी गईं, लेकिन एक भी भारतीय फिल्म को ये अवॉर्ड नहीं मिल सका।साल 1957 में पहली बार भारत से महबूब खान की फिल्म ‘मदर इंडिया’ को ऑस्कर भेजा गया था। लेकिन फिल्म सिर्फ एक वोट से हॉलीवुड फिल्म ‘नाइट्स ऑफ कैबिरिया’ से पीछे रह गई और अवॉर्ड जीतने से चूक गई।इसके बाद 1989 में ‘सलाम बॉम्बे’, 2003 में ‘लगान’ और 2004 में मराठी फिल्म ‘श्वास’ को फाइनल नॉमिनेशन मिला, लेकिन तीनों ही फिल्में अवॉर्ड नहीं जीत सकीं।

सिर्फ 9 भारतीयों को मिला ऑस्कर

भारत की तरफ से 13 कलाकार ऐसे रहे हैं, जिन्हें अब तक ऑस्कर में नॉमिनेशन मिला। इनमें से सिर्फ नौ भारतीय कलाकार ऐसे हैं, जिन्हें ऑस्कर अवॉर्ड्स मिला है। इनमें भानू अथैया से लेकर, सत्यजीत रे, एआर रहमान, गुलजार, रेसुल पूकुट्टी, एमएम कीरवानी, चंद्रबोस, गुनीत मोंगा और कार्तिकी गोंजाल्विस के नाम शामिल हैं। 

प्रियंका चोपड़ा बनेंगी प्रेजेंटर

भारतीय फैंस के लिए इस बार का ऑस्कर और भी खास है। इस बार ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा इस समारोह में प्रेजेंटर के तौर पर नजर आएंगी। वह मंच पर विजेताओं को अवॉर्ड देती दिखाई देंगी। उनके साथ रॉबर्ट डाउनी जूनियर और ऐन हैथवे जैसे बड़े हॉलीवुड सितारे भी मंच पर नजर आएंगे, जिससे इस साल का शो और भी ग्लैमरस होने की उम्मीद है।

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीदार

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नई दिल्ली। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (स्रिपी) ने ग्लोबल आर्म्स सेल्स को लेकर ताजा रिपोर्ट दी है। इसमें कहा गया है कि भारत अभी भी अपनी 48 प्रतिशत रक्षा साम्रगी की सप्लाई रूस से कर रहा है लेकिन रूस पर भारत की निर्भरता कम हो रही है। वहीं भारत अब अपने 24 प्रतिशत हथियार फ्रांस से खरीद रहा है। भारत अब दुनिया भर में दूसरा सबसे बड़ा हथियार खरीददार है और यूक्रेन पहले नंबर पर पहुंच गया है। स्रिपी रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस से भारत का मोहभंग हो चुका है और नई दिल्ली तेजी से पश्चिमी देशों की तरफ मुड़ गया है।
फ्रांस जो 2021-2025 में बड़े हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा सप्लायर है उसका सबसे बड़ा खरीददार अब भारत बन चुका है। इसी टाइम फ्रेम में रूस का सबसे बड़ा खरीददार अभी भी भारत (48प्रतिशत) बना हुआ है। भारत के बाद चीन (13प्रतिशत) सबसे ज्यादा रूसी हथियार खरीद रहा है जबकि बेलारूस (13प्रतिशत) रूसी हथियार खरीदने के मामले में तीसरे नंबर पर है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत के कुल आयात का 48 प्रतिशत हिस्सा अब भी रूस से आता है, लेकिन यह पहले की तुलना में कम हुआ है। भारत अब फ्रांस (24प्रतिशत) और अन्य पश्चिमी देशों की ओर देख रहा है। इसके अलावा पाकिस्तान अपने हथियारों के लिए पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है। पाकिस्तान 80 प्रतिशत से ज्यादा हथियार सप्लाई के लिए चीन पर निर्भर हो चुका है। जो भारत के खिलाफ एक टू फ्रंट वॉर की स्थिति बनाता है। वहीं, यूक्रेन अब दुनिया का सबसे बड़ा हथियार आयातक बन गया है (9.7प्रतिशत), जबकि अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक (42 प्रतिशत शेयर) बना हुआ है।
स्रिपी रिपोर्ट से पता चला है कि 2016-20 के बीच यूक्रेन दुनिया के कुल हथियार आयात का सिर्फ 0.1 प्रतिशत हिस्सा था। लेकिन अब (2021-25) वह 9.7 प्रतिशत के साथ दुनिया का नंबर 1 हथियार खरीदने वाला देश बन गया है। यह दिखाता है कि युद्ध ने कैसे एक देश को हथियारों की सबसे बड़ी मंडी बना दिया। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बना हुआ है। दुनिया के कुल हथियारों का 42 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ अमेरिका बेचता है। पिछले 5 सालों में अमेरिका का हथियारों का निर्यात 27 प्रतिशत बढ़ गया है। बीतें 5 सालों में यूरोप में हथियारों का आयात 210 प्रतिशत बढ़ा है। यह द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य हलचल है। रूस-यूक्रेन युद्ध से यूरोपीय देशों का डर बढ़ गया है। पोलैंड, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देश अब अपनी जीडीपी का बड़ा हिस्सा रक्षा पर खर्च कर रहे हैं। अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन यूक्रेन के मुख्य सप्लायर अभी भी बने हुए हैं जिन्होंने उसे एयर डिफेंस सिस्टम, टैंक और मिसाइलें बेची हैं।

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युवा विधायकों ने बनाई टीम निशांत, संभाली कमान

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पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव के संकेत मिलते दिख रहे हैं। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के युवा विधायकों ने अब स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार को राज्य की कमान सौंपने की मांग बुलंद कर दी है। हाल ही में विधायक रूहेल रंजन के आवास पर पार्टी के 14 युवा विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें खुद को टीम निशांत बताते हुए इन नेताओं ने घोषणा की कि वे भविष्य में निशांत कुमार के नेतृत्व में ही काम करना चाहते हैं।
बैठक में शामिल विधायकों ने दावा किया कि वर्ष 2030 का विधानसभा चुनाव निशांत कुमार के नेतृत्व में ही लड़ा जाना चाहिए। विधायकों का तर्क है कि 2025 के चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के चेहरे पर भरोसा जताते हुए एनडीए को भारी बहुमत दिया है, लेकिन अब समय आ गया है कि विकास की इस विरासत को निशांत कुमार आगे बढ़ाएं। विधायक रूहेल रंजन ने खुलकर कहा कि निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए, जबकि शुभानंद मुकेश ने उन्हें नीतीश कुमार का वर्जन टू करार दिया। वहीं, समृद्ध वर्मा और चेतन आनंद जैसे युवा नेताओं का मानना है कि निशांत ही बिहार की वर्तमान जरूरतों और उम्मीदों पर खरे उतर सकते हैं। विधायक नचिकेता और विशाल ने खुलासा किया कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समक्ष अपनी यह मांग मजबूती से रखी है। उन्होंने निशांत कुमार से भी सीधा संवाद कर उन्हें बताया है कि अब राजनीति में आने या न आने का विकल्प उनके पास नहीं बचा है, बल्कि यह बिहार की जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी बन चुकी है। विधायकों के अनुसार, बिहार की युवा पीढ़ी निशांत में अपना भविष्य देख रही है। इन चर्चाओं के बीच, निशांत कुमार ने खुद भी सक्रिय राजनीति की ओर कदम बढ़ाने के संकेत दिए हैं। सोमवार को पटना के कंकड़बाग स्थित एक पार्क में अपनी माता स्वर्गीय मंजू सिन्हा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे निशांत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि वे जल्द ही पूरे बिहार के दौरे पर निकलेंगे। उन्होंने बताया कि वे राज्य के सभी 38 जिलों का भ्रमण कर आम लोगों से सीधा संवाद करना चाहते हैं ताकि जमीनी हकीकत और जनता की समस्याओं को करीब से समझ सकें। निशांत कुमार ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें अपनी मां की बहुत याद आती है और आज के हालातों को देखकर वे बेहद प्रसन्न होतीं। हालांकि, जब पत्रकारों ने उनसे युवा विधायकों द्वारा उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर सवाल पूछा, तो वे कुछ भी बोलने के बजाय केवल मुस्कुराकर रह गए। राजनीतिक गलियारों में निशांत कुमार के चंपारण से अपनी यात्रा शुरू करने की संभावना जताई जा रही है, जिसे जेडीयू के भविष्य के संगठनात्मक विस्तार और नेतृत्व परिवर्तन के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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Dr. Sanjeev Sinha Featured in the London Book of World Records, a Landmark Achievement in the Field of Education

Giridih (Jharkhand).
Recognized educationist Dr. Sanjeev Sinha has been featured in the prestigious London Book of World Records for his unique and historic contributions to the field of competitive exam preparation. For the past 24 years, he has been single-handedly teaching all subjects for the preparation of almost all major competitive exams in the country, a unique achievement in itself, a rare and inspiring example.

Dr. Sinha’s most significant distinction is his innovative and bold initiative to offer a “written guarantee of success” in competitive exam coaching. With his unique teaching methodology, in-depth subject knowledge, and unwavering dedication to student success, he has guided thousands of candidates towards achieving their goals.

In his 24 years of teaching experience, Dr. Sanjeev Sinha has guided over 2,000 students to success in the UPSC, various State Public Service Commissions (PCS), SSC, Banking, Railway, and other national-level competitive exams.

Dr. Sinha’s visionary approach to education—which integrates career-oriented competitive exam preparation right from the beginning with schooling—has opened doors to new opportunities for thousands of students.

His innovative model and dedicated efforts in education are not only leading students to success but are also considered a significant contribution to quality education and nation-building in the country

लोकसभा में सभापति ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश

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नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों ने स्पीकर ओम बिरला को पद से हटाने के लिए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया। इस प्रस्ताव के समर्थन में 50 से अधिक सांसदों ने वोट किया, जिसके बाद पीठासीन अधिकारी ने इसे सदन में पेश करने की अनुमति दे दी।  प्रस्ताव पर लोकसभा में 10 घंटे तक चर्चा होना संभावित है। 
विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला पर सदन की कार्यवाही के संचालन में पक्षपात करने का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों का कहना है कि स्पीकर की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में ऐसा नहीं दिख रहा है। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने यह अविश्वास प्रस्ताव लाया है। चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार और नेतृत्व पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि देश का नेतृत्व कमजोर और बुजदिल साबित हो रहा है। गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि जब स्पीकर अनुपस्थित हों तो डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति क्यों नहीं की गई। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में पीठासीन सदस्य जगदंबिका पाल किस अधिकार से सदन की कार्यवाही चला रहे हैं। 
दरअसल, लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली है। परंपरा के अनुसार यह पद आमतौर पर विपक्ष को दिया जाता रहा है। 16वीं लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार के दौरान सहयोगी दल अन्नाद्रमुक के एम. थंबीदुरई को डिप्टी स्पीकर बनाया गया था। हालांकि 17वीं और 18वीं लोकसभा में अब तक इस पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई है, जिसे लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। 
सदन की कार्यवाही के दौरान एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने नियमों का हवाला देते हुए पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाया। उन्होंने कहा कि जब स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा हो रही हो, तब स्पीकर स्वयं कार्यवाही की अध्यक्षता नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी कहा कि चूंकि अभी तक डिप्टी स्पीकर नियुक्त नहीं किया गया है और चेयर पर बैठे सदस्य भी स्पीकर की अनुमति से ही आए हैं, इसलिए उन्हें इस प्रस्ताव पर कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं होना चाहिए। ओवैसी ने मांग की कि बहस शुरू होने से पहले सदन की सहमति से तय किया जाए कि कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा। 
इस पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा कि नियमों के अनुसार चेयर पर बैठा कोई भी सदस्य स्पीकर की तरह कार्यवाही संचालित करने की शक्ति रखता है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने भी इस तर्क का समर्थन किया। वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने डिप्टी स्पीकर की नियुक्ति न होने को लेकर सरकार की आलोचना की और कहा कि बहस शुरू करने से पहले सदन की सहमति जरूरी है। अंत में चेयर पर बैठे जगदंबिका पाल ने स्पष्ट किया कि स्पीकर का पद खाली नहीं है, इसलिए उन्हें कार्यवाही संचालित करने का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि जो सदस्य पॉइंट ऑफ ऑर्डर उठाना चाहते हैं, उन्हें बाद में बोलने का अवसर दिया जाएगा।  

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26 सदस्य निर्विरोध चुने गए अब 3 राज्यों की 11 सीटों पर होगा मुकाबला 

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नई दिल्ली। देश के 10 राज्यों की 37 राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख भी सोमवार को गुजर गई है। इसके बाद सात राज्यों की 26 सीटों पर उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं, जबकि अब तीन राज्यों की 11 सीटों पर मतदान होना तय माना जा रहा है। इन सीटों पर 16 मार्च को वोटिंग होगी और कई जगहों पर दिलचस्प राजनीतिक मुकाबले की संभावना है।
राज्यसभा चुनाव जिन राज्यों में हो रहे हैं उनमें पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, बिहार, असम, ओडिशा, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश शामिल हैं। इनमें से अधिकांश राज्यों में सीटों के बराबर उम्मीदवार होने के कारण कई सदस्य निर्विरोध चुन लिए गए। हालांकि बिहार, हरियाणा और ओडिशा में निर्धारित सीटों से अधिक उम्मीदवार मैदान में होने के कारण मुकाबला होना तय है। 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति भी तेज कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने बिहार, हरियाणा और ओडिशा में चुनाव की निगरानी के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं। इससे संकेत मिलता है कि इन राज्यों में चुनाव के दौरान राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। 

ओडिशा में चौथी सीट पर रोचक मुकाबला
ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों के लिए कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा ने मनमोहन सामल और सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि दिलीप रे को समर्थन दिया है। वहीं बीजू जनता दल (बीजेडी) ने संतृप्त मिश्रा को और कांग्रेस ने डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा को समर्थन दिया है। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार भाजपा के दो और बीजेडी के एक उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि चौथी सीट के लिए दिलीप रे और दत्तेश्वर मिश्रा के बीच मुकाबला रोचक होने की संभावना है।

बिहार में पांचवीं सीट पर मुकाबला
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे यहां मुकाबला दिलचस्प हो गया है। भाजपा ने नितिन नवीन और शिवेश कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि जनता दल (यूनाइटेड) ने नीतीश कुमार और रामनाथ ठाकुर को मैदान में उतारा है। एनडीए की ओर से उपेंद्र कुशवाहा को भी उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने अमरेंद्र धारी सिंह को मैदान में उतारकर चुनाव को और रोमांचक बना दिया है। ऐसे में पांचवीं सीट पर मुकाबला कड़ा रहने की संभावना है।

हरियाणा में भी मुकाबले की स्थिति
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने संजय भाटिया को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने कर्मवीर बौद्ध को मैदान में उतारा है। इसके अलावा सतीश नांदल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल किया है और उन्हें भाजपा का समर्थन प्राप्त है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार एक सीट पर भाजपा उम्मीदवार की जीत लगभग तय मानी जा रही है, जबकि दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है। राजनीतिक दलों के बीच जारी रणनीतिक गतिविधियों के बीच अब सबकी निगाहें 16 मार्च को होने वाली वोटिंग और उसके नतीजों पर टिकी हैं।

कश्मीर में झूठी खबर फैलाने पर कड़ी कार्रवाई, 150 लोगों से पूछताछ

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जम्मू। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस ने इस मामले में अब तक करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही ऐसे कई सोशल मीडिया अकाउंट, पेज और अन्य प्लेटफार्म को ब्लॉक किया है।
आला अफसर ने बताया कि साइबर पुलिस स्टेशन में इस संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है। जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है उनमें नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी और श्रीनगर के पूर्व मेयर जुनैद मट्टू भी शामिल हैं। करीब 150 लोगों से पूछताछ करने के साथ ही अन्य कई प्रोफाइल की पहचान कर उनको साइबर सेल में बुलाया जा रहा है। जल्द ही इनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। कुल मिलाकर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई की हत्या के बाद कश्मीर घाटी में पैदा हुए तनावपूर्ण हालात के बीच झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारियां फैलाने वालों के खिलाफ श्रीनगर पुलिस की कार्रवाई जारी है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि जानबूझकर झूठी, मनगढ़ंत और गुमराह करने वाली जानकारी फैलाने के मामले को गंभीरता से लिया गया है। इस कोशिश के पीछे मकसद अशांति फैलाना है। करीब एक सप्ताह से श्रीनगर पुलिस की विशेष साइबर टीम न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों का सर्विलांस कर रही है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर पुलिस ने पहले ही एडवाइजरी जारी कर ऐसे तत्वों के खिलाफ चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि झूठी खबर, भड़काऊ पोस्ट या बिना सत्यापन वाली जानकारियां फैलाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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पूरे परिवार के साथ पीएम मोदी से भेंट की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने

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जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उनका परिवार नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचा। इस दौरान वसुंधरा राजे के साथ उनके परिवार के सदस्य भी मौजूद थे। यह मुलाकात शिष्टाचार की रूप में देखी जा रही है, लेकिन मरुधार के राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चाएँ शुरू हो गई हैं।
मुलाकात के दौरान विशेष ध्यान विनायक प्रताप सिंह पर गया, जो अपनी दादी की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने की संभावनाओं के कारण चर्चा में हैं। विनायक ने 2023 में पहली बार मतदान किया था और कुछ चुनावी कार्यक्रमों में भी दिखाई दिए थे। उनकी फिटनेस के प्रति सजगता और यूट्यूब चैनल पर फिटनेस वीडियो साझा करने के कारण युवा वर्ग में उनकी लोकप्रियता है।
इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी और विनायक के बीच मुलाकात में खास बातचीत देखी गई, जिससे यह अटकलें लग रही हैं कि विनायक राजनीति में जल्द ही कदम रख सकते हैं। वर्तमान में वह दिल्ली से कानून की पढ़ाई कर रहे हैं और जिमिंग व ओपन एक्सरसाइज पर विशेष ध्यान देते हैं। राजनीतिक विशेषज्ञ मान रहे हैं कि विनायक की पृष्ठभूमि और युवा छवि उन्हें राजनीतिक क्षेत्र में एक मजबूत उपस्थिति बनाने में मदद कर सकती है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह मुलाकात वसुंधरा राजे और उनके परिवार के भविष्य की रणनीतियों का हिस्सा हो सकती है। फिटनेस और कानून की पढ़ाई के साथ विनायक अपनी दादी की विरासत को आधुनिक अंदाज में आगे बढ़ा सकते हैं। मुलाकात के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं, जिससे जनता और समर्थकों में उत्सुकता बढ़ी है। इस तरह, यह मुलाकात सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भविष्य की राजनीतिक संभावनाओं का संकेत भी मानी जा रही है।

Previous articleसुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता को दी जमानत, महाराष्ट्र सरकार का विरोध
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सुप्रीम कोर्ट ने नाबालिग आरोपी के पिता को दी जमानत, महाराष्ट्र सरकार का विरोध

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नई दिल्ली|सुप्रीम कोर्ट ने पुणे के चर्चित पोर्श कार दुर्घटना मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मंगलवार को उस नाबालिग के पिता को जमानत दे दी, जिस पर 2024 में पुणे में शराब के नशे में पोर्श कार चलाकर दो लोगों की मौत का आरोप है। यह घटना 19 मई, 2024 की है, जब कथित तौर पर 17 वर्षीय लड़के द्वारा शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्श कार ने पुणे के कल्याणी नगर इलाके में दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।

आरोपी को मिली राहत

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुयान की बेंच ने विशाल अग्रवाल को राहत दी है। विशाल पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे को बचाने के लिए ब्लड सैंपल बदलवाने की साजिश रची थी। वे चाहते थे कि मेडिकल रिपोर्ट में शराब की पुष्टि न हो सके। टॉप कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि इस मामले के दूसरे सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने यह भी देखा कि आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में बंद है। बेंच ने आदेश दिया कि ट्रायल कोर्ट जो नियम और शर्तें तय करेगा, उनके आधार पर विशाल अग्रवाल को बेल दी जाए।

सरकार ने किया विरोध

महाराष्ट्र सरकार ने इस जमानत का विरोध किया। सरकार का तर्क है कि विशाल अग्रवाल का मामला दूसरे आरोपियों जैसा नहीं है, इसलिए उन्हें बराबरी के आधार पर राहत नहीं मिलनी चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने विशाल अग्रवाल पर कुछ पाबंदियां भी लगाई हैं। कोर्ट ने उन्हें आदेश दिया है कि वे इस मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने की कोशिश नहीं करेंगे। अगर वे किसी भी शर्त का उल्लंघन करते हैं, तो राज्य सरकार उनकी जमानत रद्द करने की मांग कर सकती है। इसके साथ ही कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी की जाए।

इससे पहले 27 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ससून जनरल हॉस्पिटल के पूर्व मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. अजय टावरे को भी जमानत दी थी। उन पर ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप था। कोर्ट ने 2 फरवरी को तीन अन्य आरोपियों-अमर सतीश गायकवाड़, आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल को भी जमानत दी थी। ये लोग करीब 18 महीनों से हिरासत में थे। आदित्य सूद और आशीष मित्तल पर अपने ब्लड सैंपल देने का आरोप था ताकि उनके बच्चों को बचाया जा सके, जो दुर्घटना के समय कार में मौजूद थे।

दस को भेजा गया था जेल

इस मामले की शुरुआत में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को बहुत आसान शर्तों पर जमानत दी थी। उसे सड़क सुरक्षा पर सिर्फ 300 शब्दों का निबंध लिखने को कहा गया था। इस फैसले के बाद पूरे देश में भारी गुस्सा देखा गया। इसके बाद पुणे पुलिस ने बोर्ड से अपने फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा। फिर नाबालिग को ऑब्जर्वेशन होम भेज दिया गया। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने उसे रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, ब्लड सैंपल बदलने के मामले में विशाल अग्रवाल, उनकी पत्नी शिवानी अग्रवाल और डॉक्टरों समेत 10 लोगों को जेल भेजा गया था।

नीतीश के दिल्ली रवाना होने पर उनके किचेन कैबिनेट के मंत्रियों की जिम्मेदारी बदलेगी 

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पटना। सीएम नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा सदस्य चुने जाएंगे। इसके बाद वे दिल्ली कूच करने वाले है। बिहार की राजनीति में 20 साल बाद पहला मौका है, जब सूबे में बिना नीतीश के चेहरे की सरकार होगी।
वहीं एनडीए सरकार में पहली बार भाजपा का सीएम बनने जा रहा है। साथ ही मंत्रिमंडल में भी बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अभी जेडीयू की ओर से नीतीश के कई बेहद करीबी नेता अहम मंत्रालयों को संभाल रहे हैं। संभव है कि नए सीएम बनने के नीतीश के किचेन कैबिनेट के मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल दी जाएगी। 
मौजूदा कैबिनेट में जेडीयू की ओर से सबसे मजबूत और ताकतवार मंत्री हैं। नीतीश के बेहद करीबी और भरोसेमंद हैं। जानकार बताते हैं कि नीतीश इनके फैसलों को ना नहीं करते। कोई बड़ा फैसला करने से पहले इनके साथ विचार कर सहमति लेते हैं। बिजेंद्र यादव की छवि ईमानदार और बिना लाग-लपेट के सीधी बात कहने वाले नेता की है। नीतीश को सीएम की कुर्सी तक पहुंचाने में इनका बड़ा योगदान है। बताया जा रहा कि बिजेंद्र यादव नई सरकार में मंत्री बने रहने से परहेज कर रहे हैं। उन्होंने नीतीश को बताया है कि जब आप नहीं तब मैं भी कैबिनेट में नहीं रहूंगा। बात दें कि बिजेंद्र के पास कई विभागों की जिम्मेदारी है। वित्त मंत्री के रूप में फरवरी 2026 में बिहार विधानसभा में 3.47 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। उनके पास ऊर्जा विभाग का कार्यभार है। वह बिजली क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की जिम्मेदारी भी दी गई है।

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News Desk