वनडे सीरीज में कोहली के निशाने पर बड़े रिकॉर्ड

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भारत और न्यूजीलैंड के बीच होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज से पहले फैंस की निगाहें एक बार फिर Virat Kohli पर टिकी हैं। न्यूजीलैंड वह टीम रही है जिसने कई बार भारतीय समर्थकों को निराश किया है, लेकिन जब बात विराट कोहली की आती है तो तस्वीर पूरी तरह अलग नजर आती है। ‘रन मशीन’ के नाम से मशहूर कोहली का रिकॉर्ड कीवी टीम के खिलाफ हमेशा से शानदार रहा है। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि वह इस सीरीज में भी बड़ा असर छोड़ेंगे।

न्यूजीलैंड के खिलाफ कैसा है कोहली का वनडे रिकॉर्ड

Virat Kohli का न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे रिकॉर्ड दुनिया के किसी भी बल्लेबाज से कम नहीं है। उन्होंने अब तक 33 वनडे मैचों में करीब 55 के औसत से 1657 रन बनाए हैं। इस दौरान उनके बल्ले से 6 शतक और 9 अर्धशतक निकले हैं। कोहली का सर्वोच्च स्कोर 155 रन है, जो उन्होंने 2016 में मोहाली में बनाया था।
इसके अलावा 2023 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही कोहली ने अपना ऐतिहासिक 50वां वनडे शतक लगाया था, जो वानखेड़े स्टेडियम में खेला गया था।

इस सीरीज में बन सकते हैं कई महारिकॉर्ड

आगामी सीरीज में Virat Kohli कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम कर सकते हैं। न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत की ओर से सबसे ज्यादा वनडे रन बनाने का रिकॉर्ड फिलहाल सचिन तेंदुलकर (1750 रन) के नाम है। कोहली को इस रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए सिर्फ 94 रनों की जरूरत है।
इसके अलावा कोहली और वीरेंद्र सहवाग दोनों के नाम न्यूजीलैंड के खिलाफ 6-6 वनडे शतक हैं। एक और शतक लगाते ही कोहली इस मामले में सबसे आगे निकल जाएंगे।
वहीं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 28,000 रन पूरे करने के लिए कोहली को सिर्फ 25 रन चाहिए। यह उपलब्धि हासिल करने वाले वह दुनिया के तीसरे बल्लेबाज बन सकते हैं।

 

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News Desk

असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले नई स्कीम से वोटरों को रिश्वत दे रही बीजेपी- कांग्रेस का बड़ा आरोप

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नई दिल्ली: कांग्रेस को डर है कि बिहार जैसी स्थिति असम में आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दोहराई जा सकती है, जहां विधानसभा चुनावों से पहले और उसके दौरान लाखों महिलाओं को करीब 10000 रुपये दिए गए थे, जिससे विपक्ष को नुकसान हुआ था.

असम में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होंगे और राज्य सरकार ने 1 जनवरी को पेमेंट का अनाउंसमेंट किया था. चल रही ओरुनोदोई स्कीम के तहत 2020 से 37 लाख महिला लाभार्थियों को टारगेट किया गया. उन्हें हर महीने 1250 रुपये दिए गए. अब राज्य सरकार 20 फरवरी को इस स्कीम के तहत हर लाभार्थियों को 8000 रुपये का बिहू फेस्टिवल एडवांस देने का प्लान बना रही है.

राज्य सरकार 1 फरवरी से एक नई स्कीम भी शुरू करेगी जिसके तहत योग्य पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को हर महीने 2,000 रुपये और योग्य अंडरग्रेजुएट को हर महीने 1,000 रुपये दिए जाएंगे. ऐसे स्टूडेंट की घरेलू इनकम हर साल 4 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी असम बीजेपी सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए हाल ही में घोषित की गई आर्थिक सहायता राशि योजना को चुनाव से ठीक पहले वोटरों को रिश्वत देने जैसा मानती है और जल्द ही इन कल्याणकारी योजनाओं का मुकाबला करने के लिए एक अभियान शुरू करने की योजना बना रही है.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी का अभियान अप्रैल में होने वाले चुनाव से कुछ महीने पहले घोषित की गई आर्थिक सहायता की टाइमिंग पर सवाल उठाएगा और वोटरों को बताएगा कि राज्य सरकार पिछले पांच सालों में यह सब क्यों नहीं कर सकी. इसके अलावा, कांग्रेस का अभियान मतदाताओं को यह भी बताएगा कि आखिरी समय में पेमेंट यह दिखाता है कि राज्य सरकार युवाओं में बेरोजगारी की समस्या को हल करने और महिला लाभार्थियों की मदद करने में नाकाम रही है और वह पेमेंट के जरिए अपनी पॉलिसी की नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है, जिसे चुनाव के बाद रोका या कम किया जा सकता है.

यह सबसे पुरानी पार्टी वोटर्स को यह भी बताएगी कि कांग्रेस ने हमेशा अपने वादे पूरे किए हैं और वोटर्स से अपने ऑप्शन ध्यान से चुनने के लिए कहेगी. ‘बीजेपी महिलाओं और युवाओं को पैसे का लालच देकर वोट खरीदने की साजिश कर रही है, लेकिन असम के लोग इस धोखे को समझते हैं. जब हम अगली सरकार बनाएंगे तो हर महिला, हर युवा और हर परिवार को पक्के और सही फायदे मिलेंगे. जनता की हर मांग बिना किसी बहाने के पूरी की जाएगी.

हम जल्द ही बीजेपी का कड़ा जवाब देंगे जो वोटरों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है. हम वोटरों को बताएंगे कि चुनाव से ठीक पहले ऐसी योजनाओं की घोषणा क्यों की जा रही थी और राज्य सरकार ने उन्हें पहले लागू क्यों नहीं किया. हम उन्हें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में हमारी सरकारों द्वारा किए गए वादों और उन्हें पूरा करने के बारे में भी बताएंगे.’ असम के एआईसीसी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने ईटीवी भारत को बताया.

एआईसीसी के असम इंचार्ज सेक्रेटरी पृथ्वीराज साठे ने ईटीवी भारत को बताया,’कांग्रेस के अंदर के लोगों ने आरोप लगाया कि यह पैटर्न पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हाल ही में बिहार जैसे दूसरे बीजेपी शासित राज्यों जैसा ही है, जहाँ 10000 रुपये के पैसे ट्रांसफर ने चुनाव के नतीजे एनडीए के पक्ष में कर दिए. चुनावी साल में गरीबों, महिलाओं और युवाओं को धोखा देना, वादे करना और फिर उनसे मुकर जाना, यह बीजेपी की आम रणनीति है.

उन्होंने मध्य प्रदेश में महिलाओं के भत्ते से शुरुआत की, फिर महाराष्ट्र में भी यही आइडिया आजमाया लेकिन बाद में किसी न किसी बहाने या तो रकम कम कर दी या लाभार्थियों की संख्या कम कर दी. उन्होंने दिल्ली में भी ऐसा ही वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद इसे भूल गए. बिहार में राज्य सरकार पुरुषों के खातों में गलत तरीके से दिए गए पैसे वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘बिहार में एनडीए सरकार ने वोट पाने के लिए चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए. वे अब असम में भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह सब पहले भी किया जा सकता था. असल में उनका मकसद कभी भी विकास नहीं रहा, बल्कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल करके सिर्फ वोट हथियाना रहा है.

यह पब्लिक फंड का इस्तेमाल उन चुनावों को प्रभावित करने जैसा है जो निष्पक्ष होने चाहिए.’ असल में कांग्रेस नेतृत्व वाला विपक्ष एनडीए को हटाने के लिए बेताब है जो 2016 से सत्ता में है. हालांकि, यह काम उस पुरानी पार्टी के लिए मुश्किल है जो 2021 के चुनावों में कुल 126 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 29 सीटें जीत सकी थी. इसके उलट, बीजेपी ने 60 सीटें जीती थी. 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस असम की कुल 14 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 3 जीत सकी, जबकि भगवा पार्टी ने 9 सीटें जीती.’

प्रयागराज में ही क्यों लगता है माघ मेला? हरिद्वार-उज्जैन और नासिक में भी तो गिरी थीं अमृत की बूंदें

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प्रयागराज: माघ मेले (Magh Fair) को आस्था, साधना और पुण्य का विशेष अवसर माना जाता है. साल २०२६(Year 2026) में 3 जनवरी से लेकर 15 फरवरी तक प्रयागराज (Prayagraj) में माघ मेला लगेगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, माघ मेले के दौरान गंगा स्नान करने से पूर्ण के पूर्ण जन्मों के पापों से मुक्ति मिलती है और सेहत अच्छी रहती है. लेकिन क्या आपने कभी इस बात पर गौर किया है कि माघ मेला प्रयागराज में ही क्यों लगता है? यदि नहीं, तो चलिए जानते हैं इसके पीछे के रहस्य के बारे में.

प्रयागराज से जुड़ा रहस्य
मत्स्य पुराण और पद्म पुराण के मुताबिक, सृष्टि के निर्माण के समय ब्रह्मा जी ने प्रयागराज में ‘अश्वमेध यज्ञ’ करवाया था, जो कि धरती पर होने वाला सबसे पहला यज्ञ था. अश्वमेध यज्ञ के कारण ही इस स्थान का नाम प्रयागराज रखा गया. जब हम प्रयागराज का संधि विच्छेद करेंगे तो प्रथम + यज्ञ (प्र- प्रथम, याग- यज्ञ) आएगा.

माघ मेला प्रयागराज में ही क्यों लगता है?
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से जब अमृत का कलश निकला था, तो उसे लेने के लिए देवताओं और असुरों के बीच लड़ाई हो रही थी. इसी दौरान अमृत की 4 बूंदें धरती पर गिर गई. ये बूंदें हरिद्वार, उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में गिरी थीं. माना जाता है कि माघ के महीने में प्रयागराज के संगम का जल अमृत के समान (Same) हो जाता है, जिसमें स्नान करने से व्यक्ति को विशेष लाभ होता है. इसी वजह से हर बार प्रयागराज में ही माघ मेले का आयोजन किया जाता है.

माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान
पौष पूर्णिमा- 3 जनवरी 2026 (शनिवार)
मकर संक्रांति- 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
मौनी अमावस्या- 18 जनवरी 2026 (रविवार)
बसंत पंचमी- 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
माघी पूर्णिमा- 01 फरवरी 2026 (रविवार)
महाशिवरात्रि- 15 फरवरी 2026 (रविवार)

कल्पवास का महत्व
प्रयागराज के संगम तट पर माघ मेले के दौरान एक विशेष साधना की जाती है, जिसे कल्पवास कहते हैं. इसमें श्रद्धालु व धर्म गुरु एक निश्चित अवधि तक संगम के समीप रहकर संयमित जीवन जीते हैं.

कांग्रेस सरकार के सर्वे में ही राहुल के दावे फेल, कर्नाटक में जनता ने ईवीएम पर जताया भरोसा

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बैंगलुरु, कर्नाटक की कांग्रेस सरकार द्वारा कराए गए एक आधिकारिक सर्वे के नतीजों ने देश में ईवीएम की विश्वसनीयता पर चल रही बहस को नया मोड़ दे दिया है। सर्वे के मुताबिक कर्नाटक की जनता का एक बड़ा हिस्सा ईवीएम से चुनाव को सुरक्षित और सटीक मानता है। इन नतीजों के सामने आने के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी के वोट चोरी वाले आरोपों को लेकर कांग्रेस पर हमला बोला है। इस सर्वे को कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के जरिए कराया गया था। इसमें 102 विधानसभा क्षेत्रों के 5,100 लोगों की राय ली गई।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल 83.61फीसदी लोगों ने कहा कि वे ईवीएम को भरोसेमंद मानते हैं। 69.39फीसदी लोग इस बात से सहमत थे कि ईवीएम सटीक परिणाम देती है, जबकि 14.22फीसदी ने इस पर अपनी पूर्ण सहमति जताई। ईवीएम को लेक कलबुर्गी में सबसे ज्यादा भरोसा देखा, जहां 94.48 लोग वोटिंग मशीन के पक्ष में थे। मैसूर में 88.59फीसदी लोगों ने इसकी विश्वसनीयता पर मुहर लगाई। बेंगलुरु में भी 63.67फीसदी लोग इससे सहमत थे।
सर्वे के नतीजे सार्वजनिक होते ही बीजेपी ने इसे कांग्रेस के लिए शर्मिंदगी का विषय बताया। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने एक्स पर लिखा- सालों से राहुल गांधी देश भर में एक ही कहानी सुना रहे हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है और ईवीएम अविश्वसनीय है। लेकिन खुद कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के सर्वे ने एक अलग कहानी बयां की है। यह कांग्रेस के मुंह पर तमाचा है।
बीजेपी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस केवल हारने पर संस्थाओं पर सवाल उठाती है और जीतने पर उसी सिस्टम का जश्न मनाती है। उन्होंने इसे सुविधा की राजनीति करार दिया। यह सर्वे ऐसे समय में सामने आया जब सीएम सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने आगामी स्थानीय निकाय चुनावों को बैलेट पेपर से कराने का प्रस्ताव दिया है। सरकार का तर्क है कि जनता का ईवीएम से भरोसा कम हो रहा है। बीजेपी ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जब उनका अपना सर्वे जनता का भारी भरोसा दिखा रहा है, तो सरकार राज्य को पीछे की ओर क्यों ले जा रही है? 
बता दें राहुल गांधी ईवीएम की पारदर्शिता पर सवाल उठाते रहे हैं। लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भी उन्होंने ब्लैक बॉक्स और वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की आलोचना की थी। हालांकि, उनकी अपनी ही राज्य सरकार के इस सर्वे ने अब कांग्रेस को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है।

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बिहार के इस जलाशय में रूस-चीन-अमेरिका से पहुंचे प्रवासी पक्षी, अंतरराष्ट्रीय परिंदों का बना सुरक्षित आशियाना

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पटना : बिहार की राजधानी पटना का शांत और सुंदर राजधानी जलाशय इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है. यह जलाशय इस समय दुनिया भर के प्रवासी पक्षियों का एक प्रमुख पड़ाव बना हुआ है.

रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों से उड़ान भरकर हजारों मील का सफर तय करने वाले ये खूबसूरत परिंदे यहां अपना अस्थायी ठिकाना बना रहे हैं. जिससे यह जलाशय एक जैवविविधता का एक सुंदर हॉटस्पॉट में तब्दील हो गया है. यह नजारा न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है बल्कि भ्रमण पर आने वाले स्कूली छात्रों को भी रोमांचित कर रहा है.

सचिवालय परिसर के पास : राजधानी जलाशय पटना में मुख्य सचिवालय परिसर के समीप स्थित है. इसका शांत वातावरण, पर्याप्त जल और आसपास का हरा-भरा क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श विश्राम स्थल के रूप में है. यहां मौजूद कीट, छोटी मछलियां और जलीय पौधे इन पक्षियों के लिए प्रचुर मात्रा में भोजन का स्रोत उपलब्ध कराते हैं.

ठंड के मौसम में जब उत्तरी गोलार्ध के देश बर्फ से ढक जाते हैं और भोजन की कमी हो जाती है, तब ये पक्षी गर्म और अनुकूल जलवायु की तलाश में भारत जैसे देशों की ओर रुख करते हैं. यात्रा में बिहार आते हैं तो बिहार में पटना में कई सारे वाटर बॉडीज हैं, यहां तक कि गंगा नदी का एक बड़ा तट है. लेकिन यह पक्षी शहर के बीचों-बीच स्थित राजधानी जलाशय में ही आश्रय लेते हैं.

ठंडे प्रदेशों से आते हैं प्रवासी पक्षी : पटना जिला के डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर राजीव कुमार ने बताया कि ठंड के मौसम में अभी के समय रूस और चीन के क्षेत्र में काफी ठंड पड़ती है. जिसके कारण पक्षी हजारों मील की दूरी तय कर राजधानी जलाशय में पहुंचते हैं. अभी के समय में इस सीजन में जलाशय में जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं, उनमें कॉम्ब डक, लालसर, गड़वाल, कॉमन कूट, नॉर्दर्न पिनटेल और लेसर विसलिंग डक शामिल हैं. इनमें से कई प्रजातियां मध्य एशिया, साइबेरिया, मंगोलिया और यहां तक कि यूरोप के दूरदराज के इलाकों से यहां तक का सफर तय करती हैं.

पक्षियों के लिए बना है यहां शांत वातावरण : डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि बर्फीले रूस और चीन के झीलों को छोड़कर पटना के इस जलाशय तक पहुंचना इन पक्षियों की अद्भुत उड़ान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण है. उन्होंने बताया कि पटना में बहुत सारे वाटर बॉडी है लेकिन यहीं पर यह पक्षियां नजर आती हैं. इसके पीछे कारण है की राजधानी जलाशय को मानव गतिविधि से दूर रखा गया है.

”इन पक्षियों को एकांत वातावरण चाहिए होता है, जहां भोजन और ठहरहने की व्यवस्था रहे. इसलिए यहां एक शांत वातावरण पक्षियों के लिए उपलब्ध रहता है. तालाब के बीच में टापू बने हुए हैं. इसके अलावा जगह-जगह बांस और लकड़ी की संरचना है, जहां पक्षियां आराम कर सकते हैं.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

मानवीय गतिविधि है वर्जित : राजीव कुमार ने बताया कि राजधानी जलाशय से परिसर में पशु पक्षियों पर अध्ययन करने वाले शोधार्थियों और स्कूली बच्चों के एक छोटे समूह को ही एक बार में एंट्री दी जाती है. इसके अलावा जो लोग फोटोग्राफी करना चाहते हैं उन्हें परमिशन पर एंट्री मिलती है. इसके पीछे का प्रमुख वजह यही है कि मानवीय गतिविधि के कारण इन पक्षियों को कोई व्यवधान न हो.

”तालाब का वाटर लेवल हमेशा मेंटेन रखा जाता है और तालाब में नियमित अंतराल पर छोटी मछलियां डाली जाती हैं, ताकि प्रवासी पक्षियों को भोजन की कमी ना हो. कई पक्षियां तालाब के मछली और कीड़े खाते हैं तो कई पक्षियां पानी में उगे हुए पौधों और आसपास मौजूद पेड़ पौधों की मुलायम पत्तियां खाती हैं.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

30 से अधिक प्रकार के पक्षी आते हैं यहां : डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि इस जलाशय में 30 प्रकार के अधिक पक्षियों का समूह अलग-अलग समय आता है. यह तालाब खासकर मानसून के बाद से गुलजार होना शुरू होता है. साइबेरियन पक्षियां यहां नवंबर महीने से आनी शुरू होती है. जनवरी-फरवरी महीने में यह जलाशय इन पक्षियों की मधुर आवाज से गुलजार रहता है. मार्च और अप्रैल के महीने में यह पक्षी वापस लौटना शुरू कर देते हैं लेकिन इस जलाशय में हमेशा अलग-अलग जगह के प्रवासी पक्षी आते रहते हैं.

”अभी के समय पानी पर तैरती विभिन्न प्रजातियों की बतखों के झुंड, आकाश में उड़ते हुए लालसर और जलाशय के किनारे विश्राम करते गड़वाल का नजारा मनमोहक है. इनकी विशिष्ट आवाजे, जैसे विसलिंग डक की सीटी जैसी आवाज, पूरे इलाके को रोमांस से भरपूर बना देती है.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

स्थानीय पक्षियों की भी है बड़ी संख्या : इस जलाशय की चहल-पहल केवल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक ही सीमित नहीं है. राजीव कुमार कहते हैं कि स्थानीय पक्षियों की भी यहां अच्छी-खासी आबादी है, जो इस इकोसिस्टम का स्थायी हिस्सा हैं. हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव जैसे पक्षी भी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं.

”इतनी विविध प्रजाति के पक्षियों का यहां आगमन दर्शाता है कि जलाशय का इकोसिस्टम अच्छी स्थिति में है और यह प्रवासी पक्षियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है. इस जलाशय के जो केयरटेकर हैं, वह जल से घूमने आने वाले लोगों को जागरुक करते हैं कि पक्षियों के विश्राम और भोजन में बाधा न डालें और दूर से ही देखकर आनंद लें.” राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

प्रकृति की सीमाएं देशों की सीमाओं से पड़े हैं : पटना के राजधानी जलाशय में रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप से पहुंचे ये प्रवासी पक्षी एक सुखद संदेश देते हैं कि प्रकृति की सीमाएं देशों की सीमाओं से परे हैं. ये पक्षी बिना किसी पासपोर्ट-वीजा के हजारों मील का सफर तय कर हमें एकता और सहअस्तित्व का संदेश देते हैं.

ऐसे में राज्य के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि इन मेहमानों के स्वागत के लिए राजधानी जलाशय में सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें, यहां पक्षियों को कभी परेशान नहीं करें. ताकि आने वाले वर्षों में भी वे यहां लौटते रहें और जैवविविधता के इस अद्भुत और रोचक दृश्य से रोमांचित होते रहे.

जयशंकर की दो टूक, आप पानी की मांग करते……..दूसरी ओर आंतकवादियों को भेजते हैं 

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नई दिल्ली । केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सिंधु जल समझौते के बहाने पाकिस्तान को फिर खरी-खोटी सुना दी है। उन्‍होंने पाकिस्‍तान का नाम लिए बिना कहा कि भारत के पास बुरे पड़ोसियों से खुद की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। विदेश मंत्री ने कहा कि आप हमसे पानी बांटने का आग्रह नहीं कर सकते हैं, वहां भी तब जब आप (पाकिस्‍तान) हमारे यहां आतंकवाद फैला रहे हैं। वहीं, भारत ने जम्‍मू-कश्‍मीर में निलंबित सिंधु जल समझौते के तहत पाकिस्‍तान के हिस्‍से वाली चेनाब नदी पर नया पावर प्रोजेक्‍ट (दुलहस्‍ती स्‍टेज-दूसरा पावर प्रोजेक्‍ट) बनाने का फैसला किया है। भारत के इस कदम से पाकिस्‍तान फिर से रोने लगा है। पड़ोसी देश ने कहा कि नई दिल्‍ली की ओर से चेनाब नदी पर पावर प्रोजेक्‍ट बनाने का ऐलान किया गया, लेकिन हमें इसकी जानकारी तक नहीं है। पाकिस्‍तान ने भारत के फैसले के खिलाफ दुनियाभर में जाकर शिकवा-शिकायतें कीं, पर कुछ लाभ नहीं हुआ। भारत के नए कदम से इस्‍लामाबाद को और मिर्ची लगी है। 
जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना पड़ोसी देश पर तीखा हमला कर कहा है कि भारत का एक ‘बुरा पड़ोसी’ है, जो लगातार आतंकवाद को बढ़ावा देता रहा है और इसके बाद भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की प्रतिक्रिया कैसी होगी, यह फैसला केवल नई दिल्ली करेगी, किसी बाहरी दबाव या नसीहत को स्वीकार नहीं किया जाएगा। जयशंकर ने कहा कि दुनिया में कई देशों के पड़ोसी मुश्किल हो सकते हैं, लेकिन भारत की स्थिति इसलिए ज्यादा गंभीर है, क्योंकि उसके पड़ोस में एक ऐसा देश है जिसने आतंकवाद को सुनियोजित तरीके से अपनी नीति के रूप में अपनाया है। 
जयशंकर ने कहा, ‘जब बात इसतरह के बुरे पड़ोसी की हो जो आतंकवाद को जारी रखता है, तब भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने जोड़ा कि भारत यह स्वीकार नहीं कर सकता कि कोई देश एक ओर पानी साझा करने की मांग करे और दूसरी तरफ भारत में आतंकवाद फैलाए। जयशंकर ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की नीति और कार्रवाई पूरी तरह संप्रभु निर्णय हैं। 
जयशंकर ने भारत-पाकिस्तान के बीच जल बंटवारे के समझौतों का जिक्र कर कहा कि इसतरह के समझौते अच्छे पड़ोसी संबंधों की बुनियाद पर टिके होते हैं। जयशंकर ने कहा कि भारत ने कई दशक पहले पानी साझा करने की व्यवस्था पर सहमति दी थी, लेकिन यह मानकर कि दोनों देशों के बीच न्यूनतम स्तर की सद्भावना और अच्छे संबंध होते है। 

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भारत की पहली बुलेट ट्रेन 2027 तक पटरी पर दौड़ेगी, जान लीजिए पूरी डिटेल

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नई दिल्ली: देश की बहुप्रतिक्षित बुलेट ट्रेन को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को इसके बारे में संकेत दिया था. उन्होंने कहा था कि, 15 अगस्त, 2027 को पहली बुलेट ट्रेन मिलने की संभावना है.

रेल मंत्री ने कहा था कि, देश अगले साल अपनी पहली बुलेट ट्रेन को पटरियों पर दौड़ते हुए देखेगा. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के चालू होने के बाद, यह मिडिल क्लास को तेज, भरोसेमंद और सस्ती आने-जाने की सुविधा देकर इंटरसिटी यात्रा को बदल देगी. यह कम किराए में लगभग दो घंटे की दूरी तय करेगी.’

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को कहा कि, बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट का काम तेजी से चल रहा है. यह परियोजना 2027 तक पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि, पालघर में माउंटेन टनल-5 के बनने के साथ ही प्रोजेक्ट ने आज एक और मील का पत्थर हासिल कर लिया है. रेल मंत्री ने बताया कि, प्रोजेक्ट में कुल 7 माउंटेन टनल और एक अंडरसी टनल है.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि, बुलेट ट्रेनें 2027 तक पटरी पर आ जाएंगी. इसका पहला सेक्शन सूरत से बिलिमोरा तक चालू किया जाएगा. दूसरा सेक्शन वापी से सूरत, फिर वापी से अहमदाबाद, फिर ठाणे से अहमदाबाद और आखिर में मुंबई से अहमदाबाद में शुरू होगा.

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के बारे में बताते हुए वैष्णव ने आगे कहा कि, पोल लगाने के लिए एक नई तरह की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें पोल ​​को ज़मीन से उठाकर वायडक्ट तक ले जाया जाता है. यह टेक्नोलॉजी भारत में डेवलप की गई है. अब जापान भी अपने प्रोजेक्ट्स में इसका इस्तेमाल करेगा.

केंद्रीय मंत्री ने ट्रैक सिस्टम की नई टेक्नोलॉजी के बारे में आगे बताया कि, उन्हें J-Slab के लिए एक बहुत अच्छा इनोवेशन मिला है. यह वह स्ट्रक्चर है जिस पर ट्रैक बिछाया जाता है. वैष्णव ने कहा कि, यह स्लैब फैक्ट्री में तैयार किया जाता है, साइट पर लाया जाता है, और फिर मशीनों का इस्तेमाल करके एक-एक करके बिछाया जाता है.

बुलेट ट्रेन के 12 स्टेशन हैं, महाराष्ट्र में मुंबई, थाने, विरार और बोइसर. गुजरात में वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती. हालांकि, साबरमती और मुंबई टर्मिनल स्टेशन हैं. मुंबई स्टेशन BKC (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) में है, और तीन डिपो बनाए गए हैं.

महाराष्ट्र में दूसरी टनल का निर्माण
पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में से एक, 1.5 किलोमीटर की पहाड़ी सुरंग, विरार और बोइसर बुलेट ट्रेन स्टेशनों के बीच है. ठाणे और BKC के बीच पहली 5 किलोमीटर की अंडरग्राउंड सुरंग पिछले साल सितंबर में पूरी हुई थी.

प्रोजेक्ट की कुल लंबाई
प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 508 किलोमीटर और टनल की लंबाई 27.4 किलोमीटर है. इसमें से 21 किलोमीटर अंडरग्राउंड टनल और 6.4 किलोमीटर सरफेस टनल है. कुल 8 माउंटेन टनल हैं. जिसमें से 7 महाराष्ट्र में 6.05 किलोमटर और एक गुजरात में 350 मीटर टनल है.

ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप
घनी आबादी वाले शहरों, ऊबड़-खाबड़ इलाकों और सुरक्षित वाइल्डलाइफ़ सैंक्चुअरी से अपना रास्ता बनाते हुए, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट देश में अब तक की सबसे मुश्किल इंजीनियरिंग चुनौतियों का सामना कर रहा है.

फिर भी, हर माइलस्टोन हासिल करने के साथ, हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर असलियत के करीब आता जा रहा है, एक बार पूरा होने के बाद, यह प्रोजेक्ट भारत के ट्रांसपोर्टेशन लैंडस्केप में एक बड़ा बदलाव लाने वाला अध्याय होगा. पूरे कॉरिडोर में कंस्ट्रक्शन का काम तेजी पकड़ रहा है. जियोटेक्निकल जांच पूरी होने वाली है, रणनीतिक तौर पर ज़रूरी पहाड़ी सुरंगों पर काम शुरू हो गया है, और लगभग 11 किलोमीटर तक पियर बनाने के लिए ओपन फाउंडेशन का काम पूरा हो चुका है.

नॉइज बैरियर
जैसे-जैसे कॉरिडोर बन रहा है, इसके रास्ते में रहने वाले समुदायों पर भी ध्यान दिया जा रहा है. केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आगे कहा कि, ट्रेन के चलने से होने वाले शोर को कम करने के लिए, हाई-स्पीड रेल कॉर्पोरेशन ने वायडक्ट के दोनों तरफ नॉइज बैरियर लगाना शुरू कर दिया है.

उन्होंने कहा कि, शिंकानसेन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, इन नॉइज बैरियर में खास तौर पर इंजीनियर्ड कंक्रीट पैनल होते हैं जो आवाज को सोखने और मोड़ने के लिए डिजाइन किए गए हैं. हर पैनल रेल लेवल से दो मीटर ऊपर उठता है और एक मीटर चौड़ा होता है, जो एलिवेटेड कॉरिडोर के साथ एक लगातार अकूस्टिक शील्ड बनाता है. एक बार लग जाने पर, इन बैरियर से ट्रेनों और सपोर्टिंग सिविल स्ट्रक्चर दोनों से होने वाले ऑपरेशनल शोर में काफी कमी आने की उम्मीद है, जिससे आस-पास के निवासियों के लिए शांत माहौल पक्का करने में मदद मिलेगी.

‘पुजारा-रहाणे जैसा धैर्य दिखाएं’, मेलबर्न में फेल हुए ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को इस दिग्गज ने दी सलाह

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मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) में खेले गए चौथे एशेज टेस्ट में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजी के पूरी तरह बिखर जाने के बाद टीम की रणनीति और तकनीक पर सवाल खड़े हो गए हैं। ऑस्ट्रेलिया पहली पारी में 152 और दूसरी पारी में महज 132 रन पर सिमट गया, जिसके चलते उसे इंग्लैंड के खिलाफ 15 साल से ज्यादा समय बाद घरेलू धरती पर टेस्ट हार का सामना करना पड़ा।

रॉबिन उथप्पा की अहम सलाह

पूर्व भारतीय क्रिकेटर रॉबिन उथप्पा ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को सलाह दी है कि मुश्किल पिचों पर उन्हें चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे की तरह धैर्य के साथ बल्लेबाजी करनी चाहिए। अपने यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए उथप्पा ने कहा, ‘यह स्थिति थोड़ी विरोधाभासी है। यह कोई नामुमकिन विकेट नहीं है। मेलबर्न में ऐसी पिचें होती हैं जो तेज गेंदबाजों के लिए मददगार होती हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि आजकल जिस तरह से क्रिकेट खेला जा रहा है, उसी का असर दिखता है। ये पिचें भले ही मुश्किल लगें, लेकिन सही तकनीक, सही माइंडसेट और जुझारूपन हो तो समाधान निकल सकता है।’

250 रन भी हो सकते हैं काफी

उथप्पा का मानना है कि ऐसे विकेट पर बहुत बड़े स्कोर की उम्मीद करना गलत है। उन्होंने कहा, ‘यह 300 प्लस का मैच नहीं होगा, लेकिन इस विकेट पर 250 रन भी संभव हैं। आपको संघर्ष करना होगा। इसे पुजारा और अजिंक्य रहाणे की तरह खेलिए, निश्चित तौर पर रन आएंगे।’

जो रूट भी दिखे असमंजस में

रॉबिन उथप्पा ने इंग्लैंड के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट का उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे विकेट पर बल्लेबाजी करना किसी के लिए आसान नहीं होता। उन्होंने कहा, ‘जो रूट भी उस टेस्ट में असमंजस में दिखे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आक्रामक खेलें या अपने स्वाभाविक अंदाज में बल्लेबाजी करें।’ उन्होंने टेस्ट मैचों के जल्दी खत्म होने पर भी निराशा जताई। ख्वाजा ने कहा, ‘मैं थोड़ा संकोच के साथ यह कह रहा हूं, लेकिन दो दिन में खत्म होने वाले एशेज टेस्ट मुझे पसंद नहीं आते। हम मनोरंजन के नाम पर खेल के साथ क्या कर रहे हैं?’

एससीजी पिच पर भी नजरें

अब सभी की निगाहें सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (एससीजी) की पिच पर हैं, जहां एशेज 2025-26 का पांचवां और आखिरी टेस्ट 4 जनवरी से खेला जाना है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिच पर अच्छी-खासी घास मौजूद है। हाल ही में इसी मैदान पर खेला गया बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी टेस्ट ढाई दिन में खत्म हो गया था, जहां चार पारियों में कोई भी टीम 185 रन तक नहीं पहुंच पाई थी। ऐसे में क्यूरेटर एडम लुईस पर दबाव है कि वह एक संतुलित और ‘स्पोर्टिंग विकेट’ तैयार करें, ताकि बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों को बराबर मौका मिल सके।

जेसन होल्डर ने फेंकी अजीबोगरीब गेंद! हंसी नहीं रोक पाए रसेल; वीडियो ने इंटरनेट पर मचाया तहलका

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टी20 क्रिकेट को आमतौर पर लंबे छक्कों, तेज रन और सटीक यॉर्कर के लिए जाना जाता है, लेकिन 2025 इंटरनेशनल लीग टी20 (ILT20) में वेस्टइंडीज के अनुभवी ऑलराउंडर जेसन होल्डर ने कुछ ऐसा कर दिया, जिसने फैंस को हंसी से लोटपोट कर दिया। दुबई कैपिटल्स की ओर से खेलते हुए होल्डर की एक गेंद इतनी भटकी हुई थी कि वह बल्लेबाज को पार करते हुए सीधे चौथी स्लिप की दिशा में जा पहुंची। स्लिप में फील्डिंग कर रहे आंद्रे रसेल भी हंसी नहीं रोक पाए।

हाथ से फिसली गेंद

होल्डर रन-अप लेकर आए और एक सामान्य तेज गेंद डालने की कोशिश की, लेकिन रिलीज पॉइंट पर गेंद उनके हाथ से फिसल गई। नतीजा यह रहा कि गेंद न सिर्फ बल्लेबाज को चकमा दे गई, बल्कि विकेट और विकेटकीपर के बीच आधा रास्ता भी तय कर गई। गेंद ठीक उस जगह पहुंची, जहां टेस्ट क्रिकेट में चौथी स्लिप फील्डर खड़ा होता है।

हंस पड़े फैंस

टी20 में आमतौर पर इतनी आक्रामक स्लिप फील्डिंग नहीं होती, इसलिए वहां कोई फील्डर मौजूद नहीं था। जैसे ही इस अजीब डिलीवरी का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, फैंस हंसते-हंसते बेहाल हो गए। कई यूजर्स ने इसे सिस्टम में गड़बड़ी करार दिया, तो कुछ ने मजाक में कहा कि होल्डर टी20 में टेस्ट मैच की तैयारी कर रहे थे।

कमेंटेटर भी हैरान

इस पूरी घटना के बाद जेसन होल्डर ने ज्यादा प्रतिक्रिया नहीं दी। वह बिना किसी झिझक के अपने मार्क पर लौटे और अगली गेंद डालने की तैयारी में जुट गए। अपनी ऊंचाई, नियंत्रण और सटीकता के लिए मशहूर होल्डर से ऐसी गेंद देखना फैंस और कमेंटेटर्स दोनों के लिए हैरान करने वाला था।

ILT20 ने भी किया शेयर

दिलचस्प बात यह रही कि ILT20 के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट ने भी इस वीडियो को शेयर किया। देखते ही देखते यह क्लिप वायरल हो गई और इसे हाल के वर्षों की सबसे अजीब गेंदों में से एक बताया जाने लगा। अंपायर ने नो बॉल का भी इशारा किया और बल्लेबाज को फ्री हिट मिला।

विश्वकप टीम से ड्रॉप हुए गिल तो भड़के युवराज के पिता योगराज, कपिल देव को भी घसीटा

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पूर्व भारतीय क्रिकेटर युवराज सिंह के पिता योगराज सिंह ने शुभमन गिल के टी20 विश्व कप स्क्वॉड से बाहर होने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि चयनकर्ता अपने उपकप्तान का समर्थन नहीं कर पा रहे हैं। इस दौरान योगराज ने पूर्व विश्व कप विजेता कप्तान कपिल देव का भी जिक्र किया।

गिल के ड्रॉप होने पर भड़के योगराज

रवि बिष्ट के यूट्यूब चैनल पर बात करते हुए योगराज सिंह ने कहा, ‘शुभमन गिल उपकप्तान हैं। क्या वजह है उन्हें टीम से बाहर करने की? क्या 4-5 पारियों में उनका बल्ला नहीं चला तो उन्हें ड्रॉप कर दिया गया? भारतीय क्रिकेट में कई ऐसे खिलाड़ी रहे हैं जिन्होंने 100 मौकों में से सिर्फ 10 बार ही अच्छा प्रदर्शन किया है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन तब भी वो खेले। आपको पहले से ही बता है क्या वजह रही होगी। युवा बल्लेबाज अभिषेक शर्मा कुछ साल पहले आया। अगर वो चार पारियों में नहीं चला तो क्या आप उसे भी ड्रॉप कर देंगे?’

योगराज ने किया कपिल देव का जिक्र

इस दौरान योगराज ने पूर्व भारतीय कप्तान कपिल देव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, ‘चलिए मैं आपको महान कपिल देव का उदाहरण देता हूं। जब हम पाकिस्तान के दौरे पर गए थे, उस वक्त बिशन सिंह बेदी कप्तान थे। लगातार गेंद और बल्ले से खराब प्रदर्शन के बावजूद कपिल देव को मौके मिले। बिशन सिंह बेदी उन्हें अगले इंग्लैंड दौरे पर भी लेकर गए।’

टी20 विश्व कप टीम में शामिल नहीं हैं गिल

उल्लेखनीय है कि इस साल सात फरवरी से शुरू हो रहे टी20 विश्व कप के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने टीम इंडिया का एलान कर दिया है। इस टीम में शुभमन गिल शामिल नहीं हैं। माना जा रहा है कि उनका टी20 प्रारूप में हालिया प्रदर्शन उनके लिए मुसीबत बन गया।  एशिया कप के दौरान  टीम में वापसी के बाद से उन्होंने 15 मैचों में सिर्फ 291 रन बनाए हैं। उनका स्ट्राइक रेट 137.26 रहा है, जिसमें एक भी अर्धशतक या शतक शामिल नहीं है। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हाल ही में खत्म हुई टी20 सीरीज में भी गिल का बल्ला खामोश रहा और उन्होंने तीन मैचों में सिर्फ 32 रन बनाए, जिससे उनके चयन पर दबाव और बढ़ गया।