नए साल में राजस्थान कांग्रेस को मिला टास्क

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जयपुर । बीते दिसंबर माह अरावली के मुद्दे पर प्रदेश में सडक़ों पर धरने-प्रदर्शन कर चुकी कांग्रेस अब नए साल में भी मुखरता से धरने-प्रदर्शन करेगी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के मुद्दे पर कांग्रेस को मोदी सरकार और भाजपा के खिलाफ सडक़ों पर उतरने के निर्देश दिए है 5 जनवरी से इन धरने-प्रदर्शनों की शुरुआत होगी, जोकि 30 जनवरी तक चलेंगे।
मनरेगा के नाम बदलने और कई अन्य बदलावों को लेकर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है और अब इसी कड़ी में सभी राज्यों में धरने-प्रदर्शनों को लेकर सर्कुलर जारी कर दिया गया है राजस्थान में भी 5 जनवरी से कांग्रेस सडक़ों पर उतरेगी और इसके लिए रोड मैप भी तैयार कर लिया गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि मनरेगा के मुद्दे पर कांग्रेस पार्टी पूरे जनवरी माह धरने-प्रदर्शन करेगी, जो प्रदेश, जिला, ब्लॉक, मंडल और बूथ स्तर पर आयोजित होंगे. उन्होंने कहा कि इसका रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है कि कहां पर कितने और किस तरह से आंदोलन किए जाएंगे. उन्होंने कहा कि खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में इस पर खास फोकस रखा जाएगा. ग्रामीण इलाकों में जन जागरण अभियान चलाए जाएंगे, क्योंकि मनरेगा में ग्रामीण इलाकों के लोगों को ही रोजगार मिलता रहा है और अब उनका रोजगार छीना जा रहा है. पहले प्रदेश स्तर पर धरना आयोजित होगा, उसके बाद जिलों में धरने-प्रदर्शन आयोजित होंगे। पीसीसी अध्यक्ष का कहना है कि मनरेगा के नाम बदलने और उसमें कई प्रकार के संशोधन किए जाने को लेकर कांग्रेस पार्टी धरना-प्रदर्शन करेगी. हालांकि प्रदेश स्तर पर धरने-प्रदर्शन की तारीख अभी तय नहीं हुई है लेकिन 10 जनवरी के बाद प्रदेश स्तर पर धरना-प्रदर्शन आयोजित होगा. उसके बाद सभी जिलों में जिला मुख्यालय पर धरने आयोजित किए जाएंगे. उसके बाद मंडल, बूथ और ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शन होंगे, जिसमें राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर को ज्ञापन देकर मनरेगा के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं करने और जो बदलाव केंद्र सरकार ने किए हैं उन्हें वापस लेने की मांग की जाएगी।

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पश्चिम बंगाल में एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग और टीएमसी के बीच विवाद तेज

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टीएमसी ने बीएलए को सुनवाई सत्रों में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी
 

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर निर्वाचन आयोग और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बीच विवाद तेज हो गया है। यह मामला अब अदालत तक पहुंचने की कगार पर है। निर्वाचन आयोग ने टीएमसी की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें पार्टी के बीएलए को मतदाता सूची के मसौदे पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई सत्रों में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी।
राज्य में तीन चरणों वाली एसआईआर प्रक्रिया का पहला चरण पूरा हो चुका है। घर-घर सर्वे, फॉर्म वितरण, फॉर्म भरवाने और डिजिटल एंट्री के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो चुकी है। अब दूसरा चरण दावों और आपत्तियों की सुनवाई पर केंद्रित है, जो 15 जनवरी 2026 तक चलेगा। निर्वाचन आयोग के सूत्रों के मुताबिक यदि टीएमसी की मांग मान ली जाती, तो अन्य सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की समान मांगें भी स्वीकार करनी पड़तीं। 
इससे सुनवाई में कम से कम 11 अतिरिक्त व्यक्ति उपस्थित होते, जिसमें दावेदार, उसके सहायक और कम से कम आठ दलों के बीएलए शामिल होते। इसमें चुनावी पंजीकरण अधिकारी, सहायक ईआरओ, माइक्रो ऑब्जर्वर के अलावा मतदाता और उसके साथी भी होते। ईसीआई सूत्रों का कहना है कि इतनी भीड़ में सुनवाई प्रक्रिया संचालित करना असंभव हो जाता और अलग-अलग एजेंट अपनी-अपनी व्याख्या करते, जिससे अराजकता फैलती। पश्चिम बंगाल में मान्यता प्राप्त राज्य स्तरीय पार्टियां टीएमसी और फॉरवर्ड ब्लॉक हैं, जबकि राष्ट्रीय पार्टियां बीजेपी, कांग्रेस, सीपीआई(एम), आम आदमी पार्टी, बसपा और एनपीपी हैं। 
आयोग के इनकार पर टीएमसी ने आरोप लगाया कि यह जानबूझकर किया गया, क्योंकि अन्य दलों, खासकर बीजेपी के पास सभी सुनवाई टेबलों के लिए पर्याप्त बीएलए नहीं हैं। टीएमसी ने कहा कि बीजेपी के पास तो उम्मीदवार उतारने लायक कार्यकर्ता भी नहीं हैं। आयोग के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि वे किसी पार्टी की कथित ताकत या कमजोरी की कल्पना पर फैसले नहीं ले सकते। सभी दलों के लिए समान नियम लागू करने होते हैं, जो व्यावहारिक और उपयोगी हों। चुनाव आयोग ने कहा कि सुनवाई में दस्तावेजों के जांच और सवाल-जवाब होते हैं, जिसमें बीएलए की कोई राजनीतिक भूमिका नहीं है। इसलिए सभी दलों के बीएलए को अनुमति न देना तर्कसंगत है, ताकि प्रक्रिया बिना बाधा के पूरी हो। टीएमसी आयोग के इस फैसले को 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की पारदर्शिता का मुद्दा बता रही है, जबकि आयोग इसे प्रक्रिया की सुचारूता के लिए जरूरी कदम मानता है।

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सरकार दे रही है बिना गारंटी के बिजनेस लोन! जानें क्या आप भी PM विश्वकर्मा योजना के लिए पात्र हैं? देखें पूरी लिस्ट

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PM Vishwakarma Yojana: देश में कई सरकारी योजनाएं चल रही हैं, जिनका लाभ बड़ी संख्या में लोग उठा रहे हैं. इसी दिशा में केंद्र सरकार ने ‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा कौशल सम्मान योजना’ की शुरुआत की है. इस योजना की शुरुआत सितंबर 2023 में की गई थी और इसका संचालन केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है. आइए जानते हैं कि इस योजना का लाभ उठाने के लिए कौन लोग पात्र हैं.

पीएम विश्वकर्मा योजना में क्या लाभ मिलते हैं?
पीएम विश्वकर्मा योजना से जुड़ने के बाद लाभार्थियों को सबसे पहले कुछ दिनों की ट्रेनिंग दी जाती है. इस ट्रेनिंग में उनके काम से जुड़ी नई और उन्नत तकनीकें सिखाई जाती हैं, ताकि वे अपना काम और अच्छे तरीके से कर सकें. ट्रेनिंग के दौरान जितने दिन प्रशिक्षण चलता है, हर दिन के लिए लाभार्थी को 500 रुपये की आर्थिक सहायता (स्टाइपेंड) दी जाती है. इसके साथ ही अपने काम के लिए जरूरी औजार खरीदने के लिए सरकार की ओर से 15,000 रुपये की टूलकिट सहायता भी दी जाती है.

कितने महीने में चुकाना होता है लोन?
अगर आप इस योजना से जुड़ते हैं तो आपको कम ब्याज दर पर लोन लेने की सुविधा भी मिलती है. यह लोन आपको अपने काम को शुरू करने या आगे बढ़ाने के लिए दिया जाता है. योजना के तहत सबसे पहले आपको 1 लाख रुपये का लोन मिलता है, जिसे 18 महीनों में चुकाना होता है. जब आप यह लोन समय पर वापस कर देते हैं, तो उसके बाद आप 2 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन भी ले सकते हैं, जिसे 30 महीनों की अवधि में चुकाना होता है.

विश्वकर्मा योजना के लिए कौन हैं पात्र
बता दें कि पीएम विश्वकर्मा योजना का लाभ केवल उन कारीगरों को मिलेगा जो सरकार द्वारा तय किए गए 18 चुनिंदा पुश्तैनी धंधों से जुड़े हैं और जिनकी उम्र कम से कम 18 वर्ष हो चुकी है.

नाई यानी बाल काटने वाले
जो अस्त्रकार हैं
जो लोग लोहार का काम करते हैं
जो लोग राजमिस्त्री हैं
टोकरी/चटाई/झाड़ू बनाने वाले
गुड़िया और खिलौना निर्माता
पत्थर तराशने वाले
जो लोग मूर्तिकार हैं
धोबी और दर्जी
जो नाव निर्माता हैं
मोची/जूता बनाने वाले कारीगर
पत्थर तोड़ने वाले
अगर आप मालाकार हैं
फिशिंग नेट निर्माता
हथौड़ा और टूलकिट निर्माता
जो ताला बनाने वाले हैं
 

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फैमिली के साथ विदेश से छुट्टियां मनाकर लौटे शाहरुख खान, यूजर्स ने किया ट्रोल

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कई बॉलीवुड सेलेब्स अपने परिवार के साथ न्यू ईयर मनाने देश से बाहर गए थे। कई सेलेब्स अब वापस आ रहे हैं। शाहरुख भी अपनी फैमिली के साथ न्यू ईयर मनाकर देश लौटे हैं। एयरपोर्ट से उनके वीडियो वायरल हैं। इन वीडियो को देखकर यूजर्स ने शाहरुख को जमकर ट्रोल किया है। इसकी वजह क्या रही, जानिए।

एयरपोर्ट पर बेटी सुहाना का हाथ थामे दिखे शाहरुख 

शाहरुख खान के पत्नी गौरी और बेटी सुहाना के साथ कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। इन वीडियो में वह एक परफेक्ट फैमिली नजर आ रहे हैं। कई फैंस ने इस बात की तारीफ की है। लेकिन कुछ लोगों ने शाहरुख को जमकर ट्रोल किया है। इस ट्रोलिंग के पीछे की वजह पिछले दिनों हुआ एक विवाद रहा है। इस विवाद के केंद्र में शाहरुख खान ही रहे हैं।

यूजर्स ने किंग खान को जमकर ट्रोल किया 

सोशल मीडिया यूजर्स ने शाहरुख को लेकर ट्रोल करने वाले कमेंट किए। एक यूजर ने लिखा, ‘बांग्लादेश से आ रहे हैं।’ एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, ‘अगर थोड़ी सी शरम बची हो तो शाहरुख खान हिंदुस्तान से मांफी मांगे।’ एक अन्य यूजर ने कमेंट किया, ‘क्या देश छोड़कर भाग रहे हो।’ आखिर में इस ट्रोलिंग की असल वजह पर एक यूजर ने कमेंट किया, ‘बांग्लादेशी क्रिकेटर को बाहर करो।’ दरअसल, यह सब ट्रोलिंग इसी वजह से हो रही है। दरअसल, शाहरुख खान आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के मालिक हैं। इस आईपीएल टीम में हाल ही में एक बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिज़ुर रहमान को शामिल करने की बात सामने आई। इस खबर के सामने आते ही शाहरुख खान विवादों में घिर गए। 

क्यों बांग्लादेशी क्रिकेटर के कारण विवाद में घिरे शाहरुख? 

पिछले दिनों बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के हिंसा की घटनाएं हुईं। भारत और बांग्लादेश के राजनीतिक रिश्ते भी खराब चल रहे हैं। इन्हीं घटनाओं के बीच शाहरुख की आईपीएल टीम में बांग्लादेशी क्रिकेटर को शामिल करने की बात सामने आई। इस वजह से शाहरुख पर कई लोगों ने तीखी टिप्पीणियां कींं। कुछ राजनीतिक दल भी उनका विरोध करने लगे। यहां तक की कथावाचक जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य और कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी शाहरुख का विरोध किया, उन पर विवादित बयान भी दिए। साथ ही सोशल मीडिया पर भी शाहरुख की ट्रोलिंग हुई। कई लोग बांग्लादेशी खिलाड़ियों का बहिष्कार करने की सलाह शाहरुख खान को देते नजर आए। 

इंदौर जल संकट पर RJD नेता मनोज झा का हमला, बोले– इंसानी ज़िंदगियों को समझिए

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इंदौर।   इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित सरकारी पानी पीने से अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, करीब 200 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें 4 की हालत गंभीर बनी हुई है. इस पूरे संकट से लगभग 1500 लोग प्रभावित बताए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश के अलावा कई राज्यों में इस मामले पर प्रतिक्रियाएं तेज है. बिहार से आरजेडी नेता मनोज झा ने इंदौर जल प्रदूषण त्रासदी पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के लिए ये मौतें बस सरकारी आंकड़े हैं। 

आपको चुनाव जीतने की कला आती है- मनोज झा

मनोज झा ने कहा, “कभी कभी शब्दों से पेट नहीं भरता, आपके भाव में परिलक्षित नहीं हुआ, आपकी कार्यशैली में परिलक्षित नहीं हुआ. उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय पर निशाना साधते हुए कहा, ‘बाकी चीजें छोड़ दीजिए.. एक पत्रकार के सवाल पूछने पर मंत्री (कैलाश विजयवर्गीय) के जवाब देने का तरीका… उसमें जरा भी सहानुभूति नहीं दिखी’ उसमें मजाक दिखता है क्योंकि आपको पता है कि आपको चुनाव जीतने की कला आपको आती है। “

आप खुद वो पानी कभी नहीं पीएंगे- मनोज झा

उन्होंने आगे पीटीआई को दिए बयान में कहा, “आप खुद वो पानी कभी नहीं पीएंगे और जो मर जाएगा उसे मुआवजा देंगे… मरने वाले सिर्फ एक आंकड़ा नहीं हैं. हर मौत आपके सरकार फाइल में आंकड़ा है. लेकिन वो परिवार के लिए आंकड़ा नहीं है. आप मुआवजा दे देते हैं फिर हम अगले आंकड़े का इंतजार करते हैं। “

रेखा आर्य के पति के बयान पर बोले मनोज झा

उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य के पति के बयान पर मनोज झा ने कहा देखिए इस तरह का बयान कोई पहली बार नहीं आया है. ये सोच ही घटिया है और इस सोच के लोग बड़े-बड़े ओहदे पर पहुंच गए है या यूं कहे पहुंचाए गए हैं. मेरे लिए ये चिंता नहीं है कि मेरे राज्य के बारे में ऐसा कहा गया है और इतनी अशोभनीय टिप्पणी की गई क्योंकि एक बड़े मंत्री में सदन के अंदर मेरे से बात चीत के क्रम में मेरे राज्य के अशोभनीय टिप्पणी की थी. उन्होंने सवाल करते हुए कहा, “इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री जी क्यों चुप हैं? ये कौन सा निजाम गढ़ा जा रहा है और ये जो डबल इंजन में हमारे राज्य के कई मंत्री हैं क्या उन्हें चोट नहीं पहुंचती ऐसे टिप्पणियों से? अगर नहीं पहुंची तो आईना सामने रखी है और ऐलान करिए की आपकी संवेदना मर चुकी है। “

मुंबई में वोटिंग से पहले ही बड़ा ‘खेला’! चुनाव से पहले ही महायुति के 68 उम्मीदवार जीते; उद्धव गुट का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

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BMC Election: महाराष्ट्र की राजनीति में नगर निकाय चुनाव से पहले दो घोर विरोधी दल और ठाकरे परिवार एक साथ आ गए कि इस बार महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव में अपना दबदबा बनाएंगे. लेकिन उनको इस चुनाव से पहले ही जोर का झटका लगा है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के चुनाव से पहले ही भाजपा नेतृव्य वाली महायुति ने 68 नगर निकाय सीटों पर जीत दर्ज कर ली है. यानी महायुति के 68 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं. महायुति के निर्विरोध जीतने पर उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना ने चुनाव आयोग पर चुप्पी साधने का आरोप लगाया है. फिलहाल, बची हुई सीटों पर 15 जनवरी को चुनाव कराए जाएंगे.

बता दें, जिन 68 सीटों पर महायुति के उम्मीदवारों ने निर्विरोध जीत दर्ज की है, जिसमें एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 22 सीटें, बीजेपी को 44 सीटें और अजित पवार की एनसीपी को 2 सीटें मिली हैं. वहीं इसमें सबसे ज्यादा निर्विरोध जीतने वालों की संख्या ठाणे जिले की कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में है. जीत को लेकर केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल ने कहा कि यह जनता का भरोसा और भाजपा के कामकाज का परिणाम है. उन्होंने तो यह भी दावा कि पुणे का अगला मेयर बीजेपी का ही होगा.

चुनाव आयोग पर उठे सवाल
जहां एक ओर भाजपा नेताओं ने सरकार के अच्छे कामों को गिनाते हुए जनता की जीत बताई तो वहीं उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने चुनाव आयोग और महायुति पर गंभीर आरोप लगाए हैं. शिवसेना ने कहा कि महायुति विपक्षी उम्मीदवारों को ईडी-सीबीआई की धमकी और सौदेबाजी करके नाम वापस लेने पर मजबूर किया. सासंद प्रियंका चतुर्वेदी ने तो चुनाव आयोग पर ही सवाल खडे़ कर दिए.

15 जनवरी को होंगे चुनाव
प्रियंका चतुर्वेदी ने निर्विरोध प्रत्याशियों की जीत के बाद मुंबई में प्रेसवार्ता किया. जिसमें कहा कि लोकतंत्र को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है. विपक्षी उम्मीदवारों को सीबाआई और ईडी का डर दिखाकर और रिश्वत देकर उनको खरीदने की कोशिश की जाती है. लेकिन इसमें सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि चुनाव आयोग भी इस पर चुप्पी साधे हुए है. महाराष्ट्र की 29 नगर निगम सीटों का विजेता कौन होगा. यह तो परिणाम आने के बाद ही तय होगा लेकिन अब तक महायुति ने बढ़त बना ली है.

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यश की टॉक्सिक से तारा सुतारिया का फर्स्ट लुक रिवील, बोल्ड लुक में दिखीं; जानिए निभाएंगी कौन सा किरदार?

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साउथ स्टार यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ इन दिनों चर्चा में है। हाल ही में इस फिल्म से कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी और नयनतारा का लुक सामने आया है। अब तारा सुतारिया का फर्स्ट लुक भी सामने आ चुका है। 

बोल्ड अंदाज में दिखीं तारा सुतारिया 

अभिनेता यश ने और फिल्म ‘टॉक्सिक’ के मेकर्स ने तारा सुतारिया का लुक शेयर किया है। पोस्ट के साथ उनके किरदार का नाम भी शेयर किया गया है। इस फिल्म में वह रेबेका नाम का किरदार निभाएंगी। फिल्म ‘टॉक्सिक’ के नए पोस्टर में तारा सुतारिया ने हाथ में बंदूक ली हुई है। साथ ही उनका लुक भी बोल्ड है। 

चर्चा में रहे कियारा से लेकर हुमा कुरैशी तक के लुक 

‘टॉक्सिक’ के मेकर्स ने तारा सुतारिया से पहले नयनतारा, हुमा कुरैशी और कियारा आडवाणी के लुक भी शेयर किए थे। हर एक्ट्रेस का लुक बिल्कुल हटकर रहा। इन एक्ट्रेस के लुक देखकर लगता है कि फिल्म में उनके किरदार काफी स्ट्रॉन्ग हाेने वाले हैं। 

कब रिलीज होगी यश की फिल्म 

फिल्म ‘टॉक्सिक’ 19 मार्च को सिनेमाघरों में रिलीज होनी है। इसमें यश लीड रोल में नजर आएंगे। फिल्म को गीतू मोहनदास ने डायरेक्ट किया है। यह एक मेगा बजट फिल्म है, इसे लेकर यश के फैंस काफी उत्साहित भी हैं। वैसे इस फिल्म का मुकाबला थिएटर में फिल्म ‘धुरंधर 2’ से होने वाला है। 
 

‘सड़क के बीच में आ रहा था ससुर का घर, मैंने बिना सोचे चलवा दिया बुलडोजर

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Nitin Gadkari: भारत के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में यूट्यूबर फराह खान को इंटरव्यू दिया है. इस दौरान उनकी पत्नी कंचन भी साथ रहीं. दोनों ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहानी बताई. गडकरी ने यह भी बताया कि अपने पावर का कहां इस्तेमाल किया. इंटरव्यू काफी मजेदार रहा. यहां जानिए क्या-कुछ कहा?

बता दें, फराह खान जहां भी जाती हैं वो अपने कुक दिलीप को जरूर ले जाती हैं. इस इंटरव्यू के दौरान भी वे दिलीप के साथ ही पहुंची थीं. फराह के सवालों का जवाब देने के लिए नितिन गडकरी के साथ उनकी पत्नी कंचन भी साथ रहीं. इस दौरान फराह के कुक दिलीप ने नितिन गडकरी से अपने गांव में छोटी सी सड़क बनाने को कहा. इससे पहले वह कई बार फराह से भी आग्रह कर चुका है. फराह उसकी बातों को सुनकर थोड़ी नाराजगी के साथ बोलीं कि मंत्री जी दिलीप के घर के बीच से सड़क बना दें.

सड़क बढ़ाने के लिए ससुर का गिराया था घर
फराह की यह बात सुनकर गडकरी की पत्नी कंचन ने उन्हें टोका और कहा कि फिर तो उसके पास कोई घर ही नहीं बचेगा. इस दौरान कंचन ने पुराना किस्सा सुनाया और कहा कि ठीक उसी प्रकार जैसे मेरे पिता का घर गया. यह सुनकर फराह चौंक गईं. तब नितिन गडकरी बोले कि मैने इसके पिता का घर तोड़ा था, क्योंकि मुझे वहां पर सड़क बढ़ानी थी. यह सुनकर जब फराह ने पूछा कि नया घर बनाया कि नहीं तो उन्होंने कहा कि नया घर नहीं दिया.

शादी की सालगिरह भूल गए गडकरी
इसके बाद फराह ने नितिन गडकरी से पर्सनल सवाल पूछे. उन्होंने पहला सवाल किया कि आपकी शादी को कितने साल हो गए. यह सुनकर गडकरी मुस्कुराए और थोडे़ से कन्फ्यूज्ड दिखे और फिर बोले कि आपको ये उत्तर कंचन बता देगी. यह सुनकर फराह ने तंज कसते हुए कहा कि बिल्कुल मर्दों जैसा, शादी की सालगिरह भूल गए. फिर कंचन ने बताया कि शादी को 41 साल हो गए.

सुनाई कोलकाता की कहानी
अंत में उन्होंने एक मजेदार कहानी सुनाई. उन्होंने बताया कि हाल ही में कोलकाता के एक रेस्टोरेंट में खाना खाने गया, जहां मुझे रेस्टोरेंट का चाइनीज फूड बहुत पसंद आया. इसके बाद हमने रेस्टोरेंट में कहा कि हमारे पर्सनल शेफ को भी ट्रेन करो ताकि यह स्वाद हमें घर पर ही मिल सके. यह सुनकर उन्होंने मना कर दिया. बोले कि यह हमारी पॉलिसी के खिलाफ है. फिर हमने पूछ का कि क्या आपको पता है कि यह रेस्टोरेंट किसका है? मेरा है क्योंकि यह कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट की जमीन पर है और मैं शिपिंग मिनिस्टर हूं. अगर मेरे शेफ को नहीं सिखाया तो लीज कैंसिल कर दूंगा. यह सुनकर फराह हंस पड़ीं और बोलीं कि आपने पावर का सही जगह इस्तेमाल किया.

दौलत में आगे कौन? नाम जानकर चौंक जाएंगे

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हैदराबाद । बॉलीवुड के अलावा साउथ की कई ऐसी प्रसिद्ध अभिनेत्रियां हैं, जो करोड़ों की मालकिन हैं। साउथ की ये सात अभिनेत्रियां नेटवर्थ के मामले में किसी हीरो से कम नहीं हैं। देखें पूरी लिस्ट।

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                                                                       नयनतारा

नयनतारा को साउथ इंडियन सिनेमा की ‘लेडी सुपरस्टार’ कहा जाता है। नयनतारा कन्नड़ एक्टर यश की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में नजर आएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक फिल्म के लिए नयनतारा 10-15 करोड़ रुपये तक चार्ज करती हैं। उनके पास मुंबई, हैदराबाद और तमिलनाडु में लग्जरी घर हैं। इसके अलावा, एक 50 करोड़ का प्राइवेट जेट भी है। चेन्नई में उनका एक लग्जरी बंगला है। ब्रांड एड्स और बिजनेस से भी अच्छी कमाई होती है। उनकी नेटवर्थ लगभग 183-200 करोड़ रुपये है।

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                                                                    अनुष्का शेट्टी

‘बाहुबली’ फेम अनुष्का शेट्टी तेलुगु और तमिल सिनेमा की बड़ी एक्ट्रेस हैं। वे एक फिल्म के लिए 5-7 करोड़ रुपये लेती हैं। अनुष्का के पास हैदराबाद में लग्जरी घर, फार्महाउस और महंगी कारें हैं। उनकी नेटवर्थ 130 करोड़ रुपये के आस आसपास है।

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                                                            तमन्ना भाटिया

तमन्ना तेलुगु, तमिल और बॉलीवुड में काम करती हैं। तमन्ना भाटिया फिल्म ‘वन फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ नजर आएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तमन्ना एक फिल्म के लिए 4-8 करोड़ रुपये चार्ज करती हैं। ब्रांड डील्स से भी करोड़ों कमाती हैं। मुंबई और अन्य जगहों पर लग्जरी घर हैं। उनकी नेटवर्थ 110-120 करोड़ रुपये है।

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                                                          सामंथा रुथ प्रभु

सामंथा तेलुगु और तमिल की पॉपुलर स्टार हैं। सामंथा वेब सीरीज ‘रक्त ब्रह्मांड: द ब्लडी किंगडम’ और तेलुगु फिल्म ‘मां इंति बंगाराम’ में नजर आएंगी। सामंथा फिल्मों और वेब सीरीज के लिए 3-10 करोड़ तक चार्ज करती हैं। हैदराबाद और मुंबई में उनका घर है। उनकी नेटवर्थ लगभग 100-110 करोड़ रुपये है।

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                                                                        तृषा कृष्णन
तृषा कृष्णन तमिल और तेलुगु की वेटरन एक्ट्रेस हैं। तृषा ‘विश्वंभरा’ में नजर आएंगी। तृषा एक फिल्म के लिए 3-12 करोड़ रुपये लेती हैं। चेन्नई और हैदराबाद में लग्जरी घर और महंगी कारें हैं। उनकी नेटवर्थ 85 करोड़ रुपये है।

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                                                             रश्मिका मंदाना
‘नेशनल क्रश’ रश्मिका साउथ और बॉलीवुड में हिट हैं। रश्मिका फिल्म ‘मैसा’ और ‘कॉकटेल 2’ में नजर आएंगी। रश्मिका एक फिल्म के लिए 4-10 करोड़ रुपये चार्ज करती हैं। उनके पास लग्जरी घर और कारें हैं। उनकी नेटवर्थ लगभग 66 करोड़ रुपये है।

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                                                            साई पल्लवी
साई पल्लवी अपनी नेचुरल एक्टिंग के लिए फेमस हैं। साई निर्देशक नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में नजर आएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्मों के लिए साई 3-6 करोड़ रुपये फीस लेती हैं। कोयंबटूर में उनका एक घर और कुछ कारें हैं। उनकी नेटवर्थ 45-50 करोड़ रुपये है।

 महाराष्ट्र निकाय चुनाव में भाजपा -शिंदे सेना के 24 उम्मीदवार निर्विरोध जीते

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मुंबई ।  महाराष्ट्र में  जलगांव चुनाव में बीजेपी और शिवसेना (शिंदे गुट) ने इतिहास रचते हुए 6-6 सीटों पर निर्विरोध जीत हासिल कर ली है। इसके अलावा भिवंडी व धुले में 4-4 और पुणे व अहिल्यानगर में एक-एक प्रत्याशी को निर्विरोध विजयी घोषित कर दिया गया है। वोटिंग से पहले ही मिली इस जीत से गठबंधन में जश्न का माहौल है। हालांकि सोलापुर में विवाद और हंगामा भी देखने को मिला। 
जलगांव महानगरपालिका में नामांकन वापसी के अंतिम दिन 12 उम्मीदवारों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया, जिनमें भाजपा के 6 और शिवसेना (शिंदे गुट) के 6 प्रत्याशी शामिल हैं। 
भिवंडी महानगरपालिका चुनाव में भी बीजेपी ने मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है। यहां नामांकन प्रक्रिया खत्म होने तक अब तक पार्टी के 4 उम्मीदवार निर्विरोध विजयी घोषित किए जा चुके हैं। 

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News Desk