पीएम मोदी ने कहा, सवा सौ साल भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों का भारत वापस लौटना शुंभ संकेत 

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नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र पिपरहवा अवशेषों की भव्य अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, सवा सौ साल के इंतजार के बाद भारत की विरासत लौटी है, भारत की धरोहर लौटी है। आज से भारतीय जनमानस, भगवान बुद्ध के इन पवित्र अवशेषों के दर्शन कर सकेगा, भगवान बुद्ध के आशीर्वाद ले पाएगा। मैं इस शुभ अवसर पर यहां मौजूद सभी अतिथियों का स्वागत और अभिनंदन करता हूं। 
उन्होंने कहा, 2026 के शुरुआत में ही यह शुभ उत्सव बहुत प्रेरणादायी है और मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि 2026 का ये मेरा पहला सार्वजनिक कार्यक्रम है, जो भगवान बुद्ध की चरणों से शुरू हो रहा है। मेरी कामना है कि भगवान बुद्ध के आशीर्वाद से 2026 दुनिया के लिए शांति, समृद्धि और सद्भाव का नया दौर लेकर आए। 
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष को अपने बीच पाकर हम सभी धन्य हैं। इनका भारत से बाहर जाना और लौटकर फिर भारत आना… ये दोनों ही पड़ाव अपने-आप में बहुत बड़ा सबक है। सबक ये है कि गुलामी कोई राजनीतिक और आर्थिक नहीं होती, गुलामी हमारी विरासत को तबाह करती है। भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष के साथ यहीं हुआ। गुलामी के कालखंड में इन्हें भारत से छीना गया। तब से करीब सवा सौ साल तक ये देश से बाहर ही रहे हैं। इसलिए उन्होंने इन पवित्र अवशेषों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नीलाम करने का प्रयास किया। 
उन्होंने कहा, भगवान बुद्ध का ज्ञान, उनका दिखाया मार्ग… पूरी मानवता का है। यह भाव हमने बीते कुछ महीनों में बार-बार अनुभव किया। बीते कुछ महीनों में भगवान बुद्ध के पावन अवशेष जिस भी देश में गए, वहां आस्था और श्रद्धा का ज्वार उमड़ आया।
प्रधानमंत्री ने कहा, भगवान बुद्ध सबके हैं… सबको जोड़ते हैं। मैं खुद को बहुत भाग्यशाली समझता हूं, क्योंकि भगवान बुद्ध का मेरे जीवन में बहुत ही गहरा स्थान रहा है। मेरा जन्म जिस वडनगर में हुआ, वो बौद्ध शिक्षा का बहुत बड़ा केंद्र था। जिस भूमि पर भगवान बुद्ध ने प्रथम उपदेश दिए, वो सारनाथ आज मेरी कर्मभूमि है। भारत केवल भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों का संरक्षक नहीं है, बल्कि उनकी परंपरा का जीवंत वाहक भी है। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध से जुड़े अवशेष बुद्ध के संदेश की जीवित उपस्थिति है।

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 महिला ने चलती ट्रेन में  बच्ची को जन्म दिया 

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नई दिल्ली। माता वैष्णो देवी कटरा से लौट रही एक महिला ने चलती ट्रेन में ही बच्ची को जन्म दिया। ट्रेन में मौजूद महिलाओं की सूझबूझ और आपसी सहयोग से डिलीवरी सुरक्षित तरीके से कराई गई।दंपति मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के सिटोली गांव का रहने वाला है। महिला आठ महीने की गर्भवती थी और उसकी डिलीवरी समय से पहले हो गई।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, यह घटना श्री माता वैष्णो देवी कटरा–जबलपुर एक्सप्रेस (11450) में हुई। पति-पत्नी दोनों जम्मू-कश्मीर में रहकर काम करते हैं। डॉक्टरों की सलाह को देखते हुए पति महिला को लेकर गांव लौट रहा था, क्योंकि डिलीवरी कभी भी हो सकती थी।
शुक्रवार दोपहर ट्रेन दिल्ली पहुंची, जहां महिला को हल्का दर्द महसूस होने लगा। तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन पार करते ही दर्द अचानक तेज हो गया और महिला की हालत बिगड़ने लगी। पत्नी की हालत देखकर पति ने घबराकर आसपास मौजूद महिलाओं से मदद मांगी। कोच में मौजूद महिलाओं ने तुरंत स्थिति को भांप लिया। उन्हें समझ आ गया कि डिलीवरी का वक्त आ चुका है। इसके बाद यात्रियों की मदद से सीटों के आसपास जगह बनाई गई और बाकी लोगों को दूसरी ओर भेज दिया गया।
महिलाओं ने अपने पास मौजूद चादर, शॉल और कंबल इकट्ठा कर पर्दा बनाया, ताकि महिला को निजता मिल सके। कुछ अनुभवी महिलाओं की मदद से चलती ट्रेन में ही सुरक्षित डिलीवरी कराई गई और महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी होते ही यात्रियों ने तुरंत रेलवे को सूचना दी। ट्रेन को ओल्ड फरीदाबाद रेलवे स्टेशन पर रोका गया। रेलवे मेडिकल की महिला स्टाफ मौके पर पहुंची और मां व नवजात बच्ची की जांच की। इसके बाद आरपीएफ और जीआरपी की महिला पुलिसकर्मियों की मदद से मां और बच्ची को एंबुलेंस के जरिए बीके अस्पताल पहुंचाया गया। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि मां और नवजात दोनों पूरी तरह सुरक्षित हैं। 

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चुनाव से पहले बंगाल में कांग्रेस को आई खुशखबर………….टीएमसी सांसद मौसम नूर की कांग्रेस में वापसी 

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कोलकत्ता । पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव से पहले एक अहम मोड़ सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद मौसम बेनजीर नूर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में आधिकारिक तौर पर वापसी की है। 2026 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुआ घटनाक्रम कांग्रेस के लिए बड़ी सियासी राहत और बंगाल से आई “खुशखबरी” के रूप में देखा जा रहा है। इस घटनाक्रम को सिर्फ दल-बदल नहीं, बल्कि राज्य की बदलती राजनीतिक धुरी का संकेत माना जा रहा है।
बात दें कि मौसम नूर का ताल्लुक मालदा के प्रभावशाली खान चौधरी परिवार से है। वे उत्तर बंगाल के दिग्गज नेता रहे गनी खान चौधरी की भतीजी हैं, जिनका मुस्लिम बहुल इलाकों में दशकों तक मजबूत जनाधार रहा। इसके बाद उनकी कांग्रेस में घर वापसी से पार्टी को उत्तर बंगाल, खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में संगठनात्मक मजबूती मिलने की उम्मीद है। ये वे इलाके हैं जहां कभी कांग्रेस का दबदबा था, लेकिन समय के साथ टीएमसी और बीजेपी के उभार ने पार्टी को कमजोर कर दिया।
शनिवार को मौसम नूर ने दिल्ली स्थित एआईसीसी के मुख्यालय में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। इस मौके पर कांग्रेस नेतृत्व और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार की मौजूदगी ने कदम को और राजनीतिक वजन दिया। पार्टी ने इस “बंगाल ब्रेकथ्रू” करार दिया, जो यह संकेत देता है कि कांग्रेस अब राज्य में दोबारा सियासी जमीन मजबूत करने के मूड में है। गौरतलब है कि मौसम नूर का राज्यसभा कार्यकाल अप्रैल 2026 में समाप्त होना है, लेकिन उससे पहले उनकी वापसी कांग्रेस की चुनावी रणनीति के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
टीएमसी से उनकी दूरी की वजह भी सियासी हलकों में चर्चा का विषय रही है। सूत्रों के मुताबिक 2019 में टीएमसी में शामिल होने के बाद शुरुआत में उन्हें जिला अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारी मिली, लेकिन बाद में उन्हें हाशिए पर डाल दिया गया। पार्टी के भीतर निर्णय प्रक्रिया और कार्यक्रमों में उनकी भूमिका लगातार सीमित होती गई, जिससे असंतोष बढ़ता गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि टीएमसी में उन्हें वह सम्मान और प्रभाव नहीं मिला, जिसकी वह अपेक्षा कर रही थीं।

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फिजिक्स के पेपर में बड़ा उलटफेर! बोर्ड ने रातों-रात बदला 12वीं का पैटर्न, जानें अब कैसे पूछे जाएंगे सवाल

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CBSE 12th Physics Exam 2026: बोर्ड ने साफ किया है कि एग्जाम से पहले सही रणनीति और पैटर्न की समझ छात्रों को बेहतर स्कोर करने में मदद करेगी. नए बदलावों के मुताबिक, रटने के बजाय कॉन्सेप्ट और केस स्टडी पर ज्यादा जोर दिया गया है. 2026 की परीक्षा में फिजिक्स के पेपर में कुल 33 प्रश्न होंगे और सभी अनिवार्य हैं. बोर्ड ने प्रश्न पत्र को 5 अलग-अलग सेक्शन (A से E) में बांटा है.

कैसा होगा क्वेश्चन पेपर का पैटर्न?
2026 की परीक्षा में फिजिक्स के पेपर को 5 अलग-अलग सेक्शन (A से E) में विभाजित किया गया है. सेक्शन A में 16 प्रश्न होंगे जिनमें 12 MCQ और 4 एसेरशन-रीजनिंग शामिल हैं और प्रत्येक प्रश्न 1 अंक का होगा, जबकि सेक्शन B में 2 अंकों के 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे. सेक्शन C में 3 अंकों वाले 7 लघु उत्तरीय प्रश्न दिए गए हैं और सेक्शन D विशेष रूप से केस स्टडी पर केंद्रित होगा जिसमें 4 अंकों वाले 2 प्रश्न शामिल होंगे.

प्रश्न पत्र का समापन सेक्शन E के साथ होगा जिसमें सबसे बड़े यानी 5 अंकों के 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न होंगे और बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इन सभी सेक्शनों में ऑप्शन भी दिए जाएंगे ताकि छात्र अपनी पसंद के अनुसार उत्तर लिख सकें. सीबीएसई ने नए पेपर के सैंपल पेपर के साथ-साथ मार्किंग स्कीम भी जारी की है. यह छात्रों को बदलावों को समझने में मदद करेगी.

सैंपल पेपर और मार्किंग स्कीम कैसे डाउनलोड करें?
सबसे पहले cbseacademic.nic.in पर जाएं।
होम पेज पर दिख रहे ‘Sample Question Paper’ लिंक पर क्लिक करें।
नए पेज पर ‘Class XII’ का चुनाव करें।
विषयों की सूची में ‘Physics’ को खोजें।
यहां आपको SQP और मार्किंग स्कीम के दो लिंक दिखेंगे, जहां से आप पीडीएफ सेव कर सकते हैं.
 

अखिलेश की ‘बाटी-चोखा’ पार्टी या 2027 की बड़ी घेराबंदी? जानें इस भोज के पीछे का वो सियासी संदेश, जिसने बीजेपी की बढ़ाई टेंशन

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UP Politics: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को अब पूरे 2 साल भी नहीं बचे हैं. लेकिन इससे पहले ही यूपी की सियासत ने रफ्तार पकड़ ली है. हाल ही में यूपी के सभी ब्राह्मण विधायक एकजुट हुए तो सियासी पारा हाई हो गया. इसके जवाब में समाजवादी पार्टी ने भी नई चाल चली है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ब्राह्मण विधायक की बैठक के बाद भाजपा ने एक्शन लेने की बात कही है. सपा का मानना है कि यही सही समय है ब्राह्मणों को मनाने का, इसलिए उसने भी चोखा-बाटी पार्टी रखी और ब्राह्मणों की काफी तारीफ की. हालांकि इस पार्टी में सिर्फ समाजवादी पार्टी के ही नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए. फिलहाल, यूपी के सूबे का मुखिया कौन होगा. यह तय करने में अभी बहुत दिन बचे हैं लेकिन लगातार हो रही पार्टियां हलचल जरूर पैदा कर दी हैं.

अखिलेश यादव की चोखा-बाटी पार्टी लखनऊ स्थिति सपा कार्यालय में रखी गई थी. इस दौरान अखिलेश यादव के साथ उनके चाचा शिवपाल यादव भी मौजूद रहे. शिवपाल यादव ने तो साफ कहा कि अगर ब्राह्मण समाज के लोग हमारी पार्टी में आते हैं तो हम उनका सम्मान करेंगे. यानी सपा की चाल यहां साफ नजर आती है कि पार्टी भले चोखा-वाटी की रही हो लेकिन निशाना सिर्फ ब्राह्मण और भाजपा पर ही था. सपा का मानना है कि योगी से ब्राह्मण नेता नाराज हैं, ऐसे में उनका झुकाव सपा की तरफ हो सकता है, इसलिए वे पूरी ताकत के साथ ब्राह्मण वोटरों को साधने में लगे हुए हैं. हालांकि इसका कितना असर पड़ेगा, यह तो चुनाव परिणाम ही तय करेगा.

यूपी में क्या है जाति वर आंकड़ा?
यूपी की राजनीति में हमेशा जाति आधारित वोट निर्णायक भूमिका में रहे हैं. हालांकि जाति वर जनगणना नहीं हुई है लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव के अगर आंकड़ों को देखा जाए तो सवर्ण वोटर यानी कि ब्राह्मण और ठाकुर की सबसे चहेती पार्टी भाजपा रही है. आंकड़ों के अनुसार लगभग 89 प्रतिशत ब्राह्मण वोटर और 87 प्रतिशत ठाकुर वोटर भाजपा के साथ रहे. जबकि सपा के खाते में यादव करीब 83 प्रतिशत और मुस्लिम 79 प्रतिशत वोटिंग किए. भाजपा में सबसे ज्यादा ब्राह्मण नेताओं का प्रतिनिधित्व है.

यूपी भाजपा में कितने ब्राह्मण कर रहे प्रतिनिधित्व?
यूपी में ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या लगभग 10 प्रतिशत है लेकिन उनका प्रतिनिधित्व सबसे अधिक है. सत्ता और संगठन में भाजपा के 46 विधायक, 7 मंत्री, एक डिप्टी सीएम, दो उपाध्यक्ष और 19 जिलाध्यक्ष हैं. जबकि आबादी के हिसाब से देखा जाए तो 40-42 प्रतिशत के करीब ओबीसी वोटर और 20-21 प्रतिशत दलित वोटर हैं. इसके बावजूद भी राजनीति में सबसे ज्यादा भागेदारी ब्राह्मणों की ही है. अब तक यूपी को 6 सीएम मिल चुके हैं.

TMC कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर भीड़ का हमला, 6 जवान घायल

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल (West Bengal) के उत्तर 24 परगना जिले (Parganas District) के संदेशखाली इलाके (Sandeshkhali Area) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक कार्यकर्ता को गिरफ्तार करने के बाद भीड़ ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस हमले में छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।

जानकारी के मुताबिक नजात पुलिस थाने की टीम शुक्रवार रात संदेशखाली ब्लॉक के बोयरमारी गांव में टीएमसी कार्यकर्ता मूसा मोल्लाह को गिरफ्तार करने गई थी। अधिकारी ने बताया कि पुलिसकर्मियों पर गांव के एक समूह ने हमला किया और पुलिस की गाड़ी को भी नुकसान पहुंचाया।

घायल छह पुलिसकर्मियों, जिनमें एक अधिकारी भी शामिल है, उनको स्थानीय अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। बताया जा रहा है कि जब पुलिस टीम मोल्लाह को उसके घर से उठाकर पुलिस की गाड़ी में ले जा रहे थे, तो गांव वालों के एक समूह ने टीम पर पत्थर फेंके, जिससे वे घायल हो गए।

एक अधिकारी ने बताया कि मोल्लाह को इलाके में मछली पालन के लिए जबरन तालाबों पर कब्जा करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अतिरिक्त पुलिस बल भेजे जाने और भीड़ को खदेड़ने के बाद आखिरकार उसे पुलिस स्टेशन ले जाया जा सका। अधिकारी ने बताया कि उसके अलावा, भीड़ को उकसाने के आरोप में ग्राम पंचायत प्रधान सहित दो स्थानीय टीएमसी नेताओं को भी हिरासत में लिया गया है।

परमाणु ऊर्जा रेलवे के लिए व्यवहार्य और व्यावहारिक समाधान प्रदान करती है

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केंद्रीय मंत्री ने कहा- देश भविष्य की नई अर्थव्यवस्था के लिए तैयार 

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि छोटे और मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर एआई-आधारित अर्थव्यवस्था और रेलवे के लिए डेटा केंद्रों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए व्यवहार्य और व्यावहारिक समाधान प्रदान करते हैं। रेल मंत्री ने कहा कि भारत में बदलाव के लिए परमाणु ऊर्जा के सतत दोहन और विकास विधेयक के पारित होने से देश भविष्य की नई अर्थव्यवस्था के लिए तैयार हो गया है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वैष्णव ने दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि जैसे-जैसे दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता को अपना रही है, डेटा केंद्र एआई-आधारित अर्थव्यवस्था को शक्ति प्रदान करेंगे। इन डेटा केंद्रों को भारी मात्रा में ऊर्जा की जरुरत होगी, जो केवल परमाणु ऊर्जा से ही प्राप्त की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि परमाणु ऊर्जा ही एकमात्र ऐसा स्रोत है जो बिना किसी प्रदूषण के सतत आधार भार और भारी विद्युत धारा प्रदान कर सकती है। उन्होंने कहा कि नए डिजाइन से कंटेनर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करना संभव हो जाता है, जिसे 14 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जा सकता है।

वैष्णव ने कहा कि जहाजों को बिजली देने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले 15-30 मेगावाट क्षमता वाले परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का इस्तेमाल रेलवे परिचालन के लिए भी किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रेलवे देश भर में 700 स्थानों पर ग्रिड से बिजली लेता है। छोटे और मॉड्यूलर रिएक्टरों को भी बिजली के एक स्थायी स्रोत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में कई अंतर्निहित सुरक्षा विशेषताएं हैं जो उनके बड़े पैमाने पर उपयोग को संभव बनाती हैं। वैष्णव ने कहा कि शांति विधेयक इसलिए पारित किया गया ताकि परमाणु ऊर्जा स्वच्छ ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत बन सके। निजी क्षेत्र की कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने की अनुमति देने वाला शांति विधेयक पिछले महीने शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा द्वारा पारित किया गया था। राष्ट्रपति ने शांति अधिनियम को अपनी मंजूरी दे दी है।

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दिल्ली के मंदिर में गला घोंटकर की थी हत्या पुजारी और पत्नी दोषी करार

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नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर में साल 2017 में हुई चंद्रशेखर की हत्या के मामले में अदालत ने मंदिर के पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी ठहराया है, जिन्होंने साजिश के तहत गला घोंटकर शव को जलाने का प्रयास किया था। पूर्वी दिल्ली के कैलाश नगर इलाके में वर्ष 2017 में मंदिर के भीतर एक व्यक्ति की हत्या के मामले में अदालत ने पुजारी और उसकी पत्नी को दोषी करार दिया है। कड़कड़डूमा स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश अनुराग ठाकुर की अदालत ने पुजारी लखन दुबे और उसकी पत्नी कमलेश को हत्या, सबूत मिटाने और आपराधिक साजिश से जुड़े आरोपों में दोषी ठहराया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि मृतक चंद्रशेखर का शव 27 सितंबर 2017 को उसी मंदिर के कमरे में मिला था, जहां लखन दुबे पुजारी के रूप में कार्यरत था। मंदिर के सभी कमरों और सीढ़ियों की चाबियां उसी के पास थीं। परिस्थितिजन्य साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह स्पष्ट होता है कि हत्या में पुजारी और उसकी पत्नी की संलिप्तता थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 25 सितंबर 2017 को कमलेश चंद्रशेखर को यह कहकर दिल्ली लाई कि उसका पति बाहर गया हुआ है। आरोप है कि उसने खाने में नींद की गोलियां मिलाईं। जब चंद्रशेखर बेहोश हो गया, तो दोनों ने मिलकर रस्सी से उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद पहचान छिपाने और सबूत नष्ट करने के उद्देश्य से शव को आग लगा दी गई। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित करने में सफल रहा है। दोषी दंपति की सजा पर सात जनवरी को दलीलें सुनी जाएंगी।

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पवित्र कलश को पहुंचाया नुकसान, 3 घंटे तक किया हंगामा

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तिरुपति। आध्यात्मिक नगरी तिरुपति स्थित तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधीन आने वाले श्री गोविंदराजस्वामी मंदिर में मंगलवार की रात उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब नशे की हालत में एक युवक मंदिर के ऊंचे गोपुरम (मुख्य भवन के शिखर) पर चढ़ गया। इस घटना से न केवल मंदिर परिसर में अफरा-तफरी मच गई, बल्कि वहां स्थापित पवित्र कलशों की सुरक्षा को लेकर भी भारी चिंता पैदा हो गई। यह वाकया रात करीब 10 बजे का है, जब एकांत सेवा के बाद मंदिर परिसर में अमूमन शांति रहती है।
जैसे ही सुरक्षाकर्मियों को मुख्य भवन के शिखर पर किसी बाहरी व्यक्ति के होने की सूचना मिली, प्रशासन में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि आरोपी युवक मंदिर की ऊंची चारदीवारी को लांघकर अंदर दाखिल हुआ था। सुरक्षा और सतर्कता विभाग के कर्मचारी उसे रोक पाते, उससे पहले ही वह तेजी से महाद्वारम के पास स्थित गोपुरम के शीर्ष पर जा पहुँचा। वहां पहुँचकर उसने पवित्र माने जाने वाले दो कलशों को आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त कर दिया, जिससे श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है।
आरोपी की पहचान तेलंगाना के निजामाबाद जिले के निवासी कुट्टाड़ी तिरुपति के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार, वह भारी नशे की स्थिति में था और उसे अपनी जान की कोई परवाह नहीं थी। जब पुलिस और दमकल विभाग के कर्मचारियों ने उसे नीचे आने के लिए समझाने का प्रयास किया, तो उसने सहयोग करने के बजाय हंगामा शुरू कर दिया। हद तो तब हो गई जब उसने नीचे उतरने के बदले में शराब की मांग रख दी। उसने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक उसे शराब नहीं दी जाएगी, वह नीचे नहीं आएगा।स्थिति बिगड़ती देख पुलिस और दमकल विभाग ने एक संयुक्त बचाव अभियान चलाया। करीब तीन घंटे तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के दौरान लोहे की सीढ़ियों और रस्सियों का सहारा लिया गया। बचाव दल ने काफी मशक्कत के बाद आरोपी को सुरक्षित रूप से काबू किया और उसे नीचे उतारा। इस दौरान किसी भी बड़ी अनहोनी को टाल दिया गया। नीचे उतारने के बाद आरोपी को तुरंत तिरुपति ईस्ट पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जहाँ उसने पूछताछ के दौरान शराब की मांग करने की बात कबूल की है। इस घटना ने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर एक व्यक्ति का दीवार फांदकर गोपुरम तक पहुँच जाना सुरक्षा में बड़ी चूक माना जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि सुरक्षा घेरे में कमी कहाँ रह गई। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर परिसर की निगरानी और कड़ी करने के निर्देश दिए गए हैं।
 

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संगम तट पर श्रद्धा का सैलाब, पहले दिन सुबह 8 बजे तक ही 6.5 लाख ने लगाई डुबकी

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प्रयागराज। यहां हुए महाकुंभ के भव्य आयोजन के पश्चात पहले माघ मेले का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। आस्था और श्रद्धा के इस पावन पर्व पर देश के विभिन्न कोनों से श्रद्धालु त्रिवेणी संगम में डुबकी लगाने के लिए उमड़ पड़े हैं। मेले के पहले ही दिन जनसैलाब का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सुबह आठ बजे तक ही लगभग 6.5 लाख श्रद्धालुओं ने गंगा में पवित्र स्नान कर लिया था। विभिन्न अखाड़ों के संत-महात्मा और प्रमुख आध्यात्मिक गुरु अपने अनुयायियों के साथ संगम तट पर पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर कल्याणी नंद गिरी ने भी अपने शिष्यों के साथ स्नान किया। संगम की रेती पर लाखों कल्पवासी और संन्यासी पहले ही डेरा डाल चुके हैं, जहाँ वे एक माह तक कठिन जप-तप और साधना में लीन रहेंगे। प्रशासनिक अनुमानों के अनुसार, मेले के शुरुआती चरण में ही करीब 15 लाख लोग क्षेत्र में पहुँच चुके हैं।
इस वर्ष माघ मेले को महाकुंभ की तर्ज पर ही आधुनिक और सुविधाजनक बनाया गया है। पहली बार इस मेले का अपना एक विशिष्ट लोगो जारी किया गया है, जो इसकी अलग पहचान को दर्शाता है। श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही के लिए प्रशासन ने निजी कंपनियों के सहयोग से बाइक सेवा की शुरुआत की है, जिससे लोग संगम के निकटतम बिंदु तक आसानी से पहुँच सकेंगे। तकनीक का लाभ उठाते हुए बिजली के खंभों पर क्यूआर कोड लगाए गए हैं। यदि किसी श्रद्धालु को कोई समस्या होती है, तो वे इसे स्कैन कर तुरंत शिकायत दर्ज करा सकते हैं, जिस पर त्वरित कार्रवाई का दावा किया गया है। साथ ही, मेले में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए मोबाइल कंपनियों के साथ समन्वय किया गया है ताकि डिजिटल मेले की संकल्पना साकार हो सके।
पर्यटन और रोमांच को बढ़ावा देने के लिए इस बार हेलीकॉप्टर सेवा और पैराग्लाइडिंग जैसी गतिविधियाँ भी आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इसके अलावा, सांस्कृतिक संध्याओं के लिए विख्यात कलाकारों को आमंत्रित किया गया है। सुरक्षा के मोर्चे पर प्रशासन ने अभेद्य व्यवस्था की है। पूरे मेला क्षेत्र में एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित सीसीटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है। सुरक्षा के लिए 10 चक्रों का एक विशेष घेरा तैयार किया गया है, जो समय और भीड़ के दबाव के अनुसार लागू किया जाएगा। महावीर और अक्षयवट कॉरिडोर जैसे संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। जल पुलिस, वॉच टावर और नियंत्रण कक्षों के माध्यम से हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है। यातायात प्रबंधन के लिए प्रयागराज कमिश्नरेट ने विशेष टीमें तैनात की हैं ताकि शहर और मेला क्षेत्र में जाम की स्थिति पैदा न हो। संतों के शिविरों में कथा, भजन और प्रवचनों का सिलसिला भी शुरू हो चुका है, जिससे पूरी रेती आध्यात्मिक ऊर्ज से सराबोर नजर आ रही है।

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