24.8 C
London
Sunday, June 21, 2026
HomeLatest Newsबिहार के इस जलाशय में रूस-चीन-अमेरिका से पहुंचे प्रवासी पक्षी, अंतरराष्ट्रीय परिंदों...

बिहार के इस जलाशय में रूस-चीन-अमेरिका से पहुंचे प्रवासी पक्षी, अंतरराष्ट्रीय परिंदों का बना सुरक्षित आशियाना

#LatestNews #BreakingNews #NewsUpdate #IndiaNews #HindiNews

पटना : बिहार की राजधानी पटना का शांत और सुंदर राजधानी जलाशय इन दिनों प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट से गुलजार है. यह जलाशय इस समय दुनिया भर के प्रवासी पक्षियों का एक प्रमुख पड़ाव बना हुआ है.

रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप के विभिन्न देशों से उड़ान भरकर हजारों मील का सफर तय करने वाले ये खूबसूरत परिंदे यहां अपना अस्थायी ठिकाना बना रहे हैं. जिससे यह जलाशय एक जैवविविधता का एक सुंदर हॉटस्पॉट में तब्दील हो गया है. यह नजारा न केवल प्रकृति प्रेमियों को आकर्षित कर रहा है बल्कि भ्रमण पर आने वाले स्कूली छात्रों को भी रोमांचित कर रहा है.

सचिवालय परिसर के पास : राजधानी जलाशय पटना में मुख्य सचिवालय परिसर के समीप स्थित है. इसका शांत वातावरण, पर्याप्त जल और आसपास का हरा-भरा क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के लिए आदर्श विश्राम स्थल के रूप में है. यहां मौजूद कीट, छोटी मछलियां और जलीय पौधे इन पक्षियों के लिए प्रचुर मात्रा में भोजन का स्रोत उपलब्ध कराते हैं.

ठंड के मौसम में जब उत्तरी गोलार्ध के देश बर्फ से ढक जाते हैं और भोजन की कमी हो जाती है, तब ये पक्षी गर्म और अनुकूल जलवायु की तलाश में भारत जैसे देशों की ओर रुख करते हैं. यात्रा में बिहार आते हैं तो बिहार में पटना में कई सारे वाटर बॉडीज हैं, यहां तक कि गंगा नदी का एक बड़ा तट है. लेकिन यह पक्षी शहर के बीचों-बीच स्थित राजधानी जलाशय में ही आश्रय लेते हैं.

ठंडे प्रदेशों से आते हैं प्रवासी पक्षी : पटना जिला के डिस्ट्रिक्ट फारेस्ट ऑफिसर राजीव कुमार ने बताया कि ठंड के मौसम में अभी के समय रूस और चीन के क्षेत्र में काफी ठंड पड़ती है. जिसके कारण पक्षी हजारों मील की दूरी तय कर राजधानी जलाशय में पहुंचते हैं. अभी के समय में इस सीजन में जलाशय में जो प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रवासी पक्षी देखे जा रहे हैं, उनमें कॉम्ब डक, लालसर, गड़वाल, कॉमन कूट, नॉर्दर्न पिनटेल और लेसर विसलिंग डक शामिल हैं. इनमें से कई प्रजातियां मध्य एशिया, साइबेरिया, मंगोलिया और यहां तक कि यूरोप के दूरदराज के इलाकों से यहां तक का सफर तय करती हैं.

पक्षियों के लिए बना है यहां शांत वातावरण : डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि बर्फीले रूस और चीन के झीलों को छोड़कर पटना के इस जलाशय तक पहुंचना इन पक्षियों की अद्भुत उड़ान क्षमता और सहनशक्ति का प्रमाण है. उन्होंने बताया कि पटना में बहुत सारे वाटर बॉडी है लेकिन यहीं पर यह पक्षियां नजर आती हैं. इसके पीछे कारण है की राजधानी जलाशय को मानव गतिविधि से दूर रखा गया है.

”इन पक्षियों को एकांत वातावरण चाहिए होता है, जहां भोजन और ठहरहने की व्यवस्था रहे. इसलिए यहां एक शांत वातावरण पक्षियों के लिए उपलब्ध रहता है. तालाब के बीच में टापू बने हुए हैं. इसके अलावा जगह-जगह बांस और लकड़ी की संरचना है, जहां पक्षियां आराम कर सकते हैं.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

मानवीय गतिविधि है वर्जित : राजीव कुमार ने बताया कि राजधानी जलाशय से परिसर में पशु पक्षियों पर अध्ययन करने वाले शोधार्थियों और स्कूली बच्चों के एक छोटे समूह को ही एक बार में एंट्री दी जाती है. इसके अलावा जो लोग फोटोग्राफी करना चाहते हैं उन्हें परमिशन पर एंट्री मिलती है. इसके पीछे का प्रमुख वजह यही है कि मानवीय गतिविधि के कारण इन पक्षियों को कोई व्यवधान न हो.

”तालाब का वाटर लेवल हमेशा मेंटेन रखा जाता है और तालाब में नियमित अंतराल पर छोटी मछलियां डाली जाती हैं, ताकि प्रवासी पक्षियों को भोजन की कमी ना हो. कई पक्षियां तालाब के मछली और कीड़े खाते हैं तो कई पक्षियां पानी में उगे हुए पौधों और आसपास मौजूद पेड़ पौधों की मुलायम पत्तियां खाती हैं.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

30 से अधिक प्रकार के पक्षी आते हैं यहां : डीएफओ राजीव कुमार ने बताया कि इस जलाशय में 30 प्रकार के अधिक पक्षियों का समूह अलग-अलग समय आता है. यह तालाब खासकर मानसून के बाद से गुलजार होना शुरू होता है. साइबेरियन पक्षियां यहां नवंबर महीने से आनी शुरू होती है. जनवरी-फरवरी महीने में यह जलाशय इन पक्षियों की मधुर आवाज से गुलजार रहता है. मार्च और अप्रैल के महीने में यह पक्षी वापस लौटना शुरू कर देते हैं लेकिन इस जलाशय में हमेशा अलग-अलग जगह के प्रवासी पक्षी आते रहते हैं.

”अभी के समय पानी पर तैरती विभिन्न प्रजातियों की बतखों के झुंड, आकाश में उड़ते हुए लालसर और जलाशय के किनारे विश्राम करते गड़वाल का नजारा मनमोहक है. इनकी विशिष्ट आवाजे, जैसे विसलिंग डक की सीटी जैसी आवाज, पूरे इलाके को रोमांस से भरपूर बना देती है.”– राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

स्थानीय पक्षियों की भी है बड़ी संख्या : इस जलाशय की चहल-पहल केवल अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक ही सीमित नहीं है. राजीव कुमार कहते हैं कि स्थानीय पक्षियों की भी यहां अच्छी-खासी आबादी है, जो इस इकोसिस्टम का स्थायी हिस्सा हैं. हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव जैसे पक्षी भी बड़ी संख्या में देखे जाते हैं.

”इतनी विविध प्रजाति के पक्षियों का यहां आगमन दर्शाता है कि जलाशय का इकोसिस्टम अच्छी स्थिति में है और यह प्रवासी पक्षियों की आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम है. इस जलाशय के जो केयरटेकर हैं, वह जल से घूमने आने वाले लोगों को जागरुक करते हैं कि पक्षियों के विश्राम और भोजन में बाधा न डालें और दूर से ही देखकर आनंद लें.” राजीव कुमार, डीएफओ, पटना

 

प्रकृति की सीमाएं देशों की सीमाओं से पड़े हैं : पटना के राजधानी जलाशय में रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप से पहुंचे ये प्रवासी पक्षी एक सुखद संदेश देते हैं कि प्रकृति की सीमाएं देशों की सीमाओं से परे हैं. ये पक्षी बिना किसी पासपोर्ट-वीजा के हजारों मील का सफर तय कर हमें एकता और सहअस्तित्व का संदेश देते हैं.

ऐसे में राज्य के हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि इन मेहमानों के स्वागत के लिए राजधानी जलाशय में सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करें, यहां पक्षियों को कभी परेशान नहीं करें. ताकि आने वाले वर्षों में भी वे यहां लौटते रहें और जैवविविधता के इस अद्भुत और रोचक दृश्य से रोमांचित होते रहे.

Subset by Kriya Veda Brings Cellular Health to the Forefront of Wellness

As the wellness industry continues to evolve, cellular health is becoming a central focus for individuals seeking sustainable ways to support long-term vitality. Subset...

Dharmendra Asimi: The Technology Consultant Behind 500+ Client Success Storie

Dharmendra Asimi is a technology consultant, SEO specialist, and WordPress professional who has contributed to the success of more than 500 client projects over...