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Thursday, October 1, 2026
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असम विधानसभा चुनाव 2026 से पहले नई स्कीम से वोटरों को रिश्वत दे रही बीजेपी- कांग्रेस का बड़ा आरोप

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नई दिल्ली: कांग्रेस को डर है कि बिहार जैसी स्थिति असम में आने वाले विधानसभा चुनावों में भी दोहराई जा सकती है, जहां विधानसभा चुनावों से पहले और उसके दौरान लाखों महिलाओं को करीब 10000 रुपये दिए गए थे, जिससे विपक्ष को नुकसान हुआ था.

असम में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होंगे और राज्य सरकार ने 1 जनवरी को पेमेंट का अनाउंसमेंट किया था. चल रही ओरुनोदोई स्कीम के तहत 2020 से 37 लाख महिला लाभार्थियों को टारगेट किया गया. उन्हें हर महीने 1250 रुपये दिए गए. अब राज्य सरकार 20 फरवरी को इस स्कीम के तहत हर लाभार्थियों को 8000 रुपये का बिहू फेस्टिवल एडवांस देने का प्लान बना रही है.

राज्य सरकार 1 फरवरी से एक नई स्कीम भी शुरू करेगी जिसके तहत योग्य पोस्टग्रेजुएट स्टूडेंट्स को हर महीने 2,000 रुपये और योग्य अंडरग्रेजुएट को हर महीने 1,000 रुपये दिए जाएंगे. ऐसे स्टूडेंट की घरेलू इनकम हर साल 4 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस पार्टी असम बीजेपी सरकार द्वारा बेरोजगार युवाओं और महिलाओं के लिए हाल ही में घोषित की गई आर्थिक सहायता राशि योजना को चुनाव से ठीक पहले वोटरों को रिश्वत देने जैसा मानती है और जल्द ही इन कल्याणकारी योजनाओं का मुकाबला करने के लिए एक अभियान शुरू करने की योजना बना रही है.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार पार्टी का अभियान अप्रैल में होने वाले चुनाव से कुछ महीने पहले घोषित की गई आर्थिक सहायता की टाइमिंग पर सवाल उठाएगा और वोटरों को बताएगा कि राज्य सरकार पिछले पांच सालों में यह सब क्यों नहीं कर सकी. इसके अलावा, कांग्रेस का अभियान मतदाताओं को यह भी बताएगा कि आखिरी समय में पेमेंट यह दिखाता है कि राज्य सरकार युवाओं में बेरोजगारी की समस्या को हल करने और महिला लाभार्थियों की मदद करने में नाकाम रही है और वह पेमेंट के जरिए अपनी पॉलिसी की नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है, जिसे चुनाव के बाद रोका या कम किया जा सकता है.

यह सबसे पुरानी पार्टी वोटर्स को यह भी बताएगी कि कांग्रेस ने हमेशा अपने वादे पूरे किए हैं और वोटर्स से अपने ऑप्शन ध्यान से चुनने के लिए कहेगी. ‘बीजेपी महिलाओं और युवाओं को पैसे का लालच देकर वोट खरीदने की साजिश कर रही है, लेकिन असम के लोग इस धोखे को समझते हैं. जब हम अगली सरकार बनाएंगे तो हर महिला, हर युवा और हर परिवार को पक्के और सही फायदे मिलेंगे. जनता की हर मांग बिना किसी बहाने के पूरी की जाएगी.

हम जल्द ही बीजेपी का कड़ा जवाब देंगे जो वोटरों को रिश्वत देने की कोशिश कर रही है. हम वोटरों को बताएंगे कि चुनाव से ठीक पहले ऐसी योजनाओं की घोषणा क्यों की जा रही थी और राज्य सरकार ने उन्हें पहले लागू क्यों नहीं किया. हम उन्हें कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में हमारी सरकारों द्वारा किए गए वादों और उन्हें पूरा करने के बारे में भी बताएंगे.’ असम के एआईसीसी इंचार्ज जितेंद्र सिंह ने ईटीवी भारत को बताया.

एआईसीसी के असम इंचार्ज सेक्रेटरी पृथ्वीराज साठे ने ईटीवी भारत को बताया,’कांग्रेस के अंदर के लोगों ने आरोप लगाया कि यह पैटर्न पहले मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और हाल ही में बिहार जैसे दूसरे बीजेपी शासित राज्यों जैसा ही है, जहाँ 10000 रुपये के पैसे ट्रांसफर ने चुनाव के नतीजे एनडीए के पक्ष में कर दिए. चुनावी साल में गरीबों, महिलाओं और युवाओं को धोखा देना, वादे करना और फिर उनसे मुकर जाना, यह बीजेपी की आम रणनीति है.

उन्होंने मध्य प्रदेश में महिलाओं के भत्ते से शुरुआत की, फिर महाराष्ट्र में भी यही आइडिया आजमाया लेकिन बाद में किसी न किसी बहाने या तो रकम कम कर दी या लाभार्थियों की संख्या कम कर दी. उन्होंने दिल्ली में भी ऐसा ही वादा किया था लेकिन सत्ता में आने के बाद इसे भूल गए. बिहार में राज्य सरकार पुरुषों के खातों में गलत तरीके से दिए गए पैसे वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है.’

उन्होंने कहा, ‘बिहार में एनडीए सरकार ने वोट पाने के लिए चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए. वे अब असम में भी ऐसा ही करने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि यह सब पहले भी किया जा सकता था. असल में उनका मकसद कभी भी विकास नहीं रहा, बल्कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल करके सिर्फ वोट हथियाना रहा है.

यह पब्लिक फंड का इस्तेमाल उन चुनावों को प्रभावित करने जैसा है जो निष्पक्ष होने चाहिए.’ असल में कांग्रेस नेतृत्व वाला विपक्ष एनडीए को हटाने के लिए बेताब है जो 2016 से सत्ता में है. हालांकि, यह काम उस पुरानी पार्टी के लिए मुश्किल है जो 2021 के चुनावों में कुल 126 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 29 सीटें जीत सकी थी. इसके उलट, बीजेपी ने 60 सीटें जीती थी. 2024 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस असम की कुल 14 लोकसभा सीटों में से सिर्फ 3 जीत सकी, जबकि भगवा पार्टी ने 9 सीटें जीती.’

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