डोडा में जवानों की गाड़ी खाई में गिरी, 10 की मौत

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डोडा, 22 जनवरी 2026 – जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में गुरुवार को एक बड़ा सड़क हादसा हो गया, जब जवानों से भरी एक सैन्य गाड़ी खाई में गिर गई। यह दुर्घटना खन्नीटॉप इलाके में हुई, जहां वाहन अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरा। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में 10 जवानों की मौत हो गई है, जबकि वाहन में कुल 17 जवान सवार थे।

मौके पर चल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की सूचना मिलते ही सेना और पुलिस की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। घायलों को खाई से निकालकर नजदीकी अस्पताल भेजा गया है, जहां उनका इलाज जारी है। स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों की टीमें राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई हैं।

दुर्घटना के कारणों की जांच

फिलहाल दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर सड़क की स्थिति और वाहन के अनियंत्रित होने की आशंका जताई जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि घटना की विस्तृत जांच की जा रही है और आगे की जानकारी जल्द साझा की जाएगी।

इलाके में शोक की लहर

इस हादसे से पूरे इलाके में शोक की लहर है। देश ने अपने बहादुर जवानों को खो दिया है, जिन्होंने राष्ट्र सेवा में अपनी जान गंवाई। प्रशासन ने मृत जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है।

बीएमसी मेयर महिला ही होगी, महाराष्ट्र निकाय चुनाव पर बड़ा फैसला

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न्मुबई।  बीएमसी में मेयर पद महिला को ही मिलेगा। ये साफ हो चुका है। महाराष्ट्र में निकाय चुनाव से जुड़े इस बड़े अपडेट के मुताबिक भाजपा-शिवसेना मिलकर महापौर का नाम तय करेंगे। बीएमसी के अलावा नवी मुंबई में भी महापौर पद महिला को मिलेगा, जबकि ठाणे में मेयर अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग से बनेगा। शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को लॉटरी के जरिए आरक्षण तय किया, जिसके आधार पर बीएमसी मेयर पद पर महिला की ताजपोशी होगी। 

क्या है लॉटरी सिस्टम?

महाराष्ट्र सरकार के शहरी विकास विभाग ने गुरुवार को एक लॉटरी व्यवस्था के तहत विभिन्न नगर पालिकाओं के लिए आरक्षण व्यवस्था तय की। शहरी निकाय के नियमों के तहत बीएमसी समेत सभी नगर पालिकाओं में मेयर पद अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग और महिलाओं को रोटेशन प्रणाली के आधार पर दिया जाता है। हालांकि यह आरक्षण व्यवस्था पहले से तय नहीं होती और इसके लिए लॉटरी सिस्टम बनाया गया है। जब तक यह लॉटरी नहीं निकाली जाती, तब तक राजनीतिक पार्टियां मेयर पद के लिए उम्मीदवारों को नाम का एलान नहीं कर सकतीं। संविधान के 74वें संशोधन के बाद नगर निकाय में नेतृत्व के लिए सामाजिक प्रतिनिधित्व का उल्लेख किया गया है। यह लॉटरी व्यवस्था मेयर चुनाव की प्रक्रिया को निष्पक्ष रखने के लिए की गई है। 

महाराष्ट्र की अन्य महानगरपालिकाओं में महापौर यानी मेयर पद को लेकर क्या फैसला लिया गया है? जानिए तमाम सवालों के जवाब नीचे दी गई सूची से
 
अ.क्र.    महानगरपालिका का नाम    आरक्षित श्रेणी 
   1                     बृहन्मुंबई (BMC)                    ओपन (महिला)
   2                             ठाणे                   अनुसूचित जाति (एससी)
   3                    कल्याण-डोंबिवली        अनुसूचित जनजाति (एसटी)
   4                          नवी मुंबई                     ओपन (महिला)
   5                           वसई-विरार                           ओपन
   6                         भिवंडी-निजामपुर             सर्वसाधारण (महिला)
   7                            मीरा-भाईंदर                   ओपन (महिला)
   8                         उल्हासनगर                                ओबीसी
   9                               पुणे                                    ओपन
  10                        पिंपरी-चिंचवड                            ओपन
  11                            नागपुर                           ओपन (महिला)
  12                           अहिल्यानगर                  ओबीसी (महिला)
  13                                 नाशिक                         ओपन
  14                          छत्रपति संभाजीनगर               ओपन
  15                            अकोला                      ओबीसी (महिला)
  16                             अमरावती                         ओपन
  17                               लातूर                    अनुसूचित जाति (एससी)
  18                          नांदेड़-वाघाला                   ओपन (महिला)
  19                               चंद्रपुर                            ओबीसी (महिला)
  20                               धुले                              ओपन (महिला)
  21                             जलगांव                          ओबीसी (महिला)
  22                           मालेगांव                                  ओपन
  23                          कोल्हापुर                                ओबीसी
  24                         सांगली-मीरज-कुपवाड़                ओपन
  25                          सोलापुर                                  ओपन
  26                         इचलकरंजी                              ओबीसी

राजनीतिक पार्टियों में किस वर्ग के कितने पार्षद?

ओपन कैटेगरी में भाजपा के पास 31 पार्षद हैं, जबकि शिवसेना यूबीटी के 20 पार्षद ओपन कैटेगरी के हैं। वहीं एकनाथ शिंदे की शिवसेना में इनका आंकड़ा 11 है। महिलाओं की बात करें तो भाजपा की 25 महिला पार्षद हैं। शिवसेना यूबीटी में 18 और शिंदे शिवसेना की 9 महिला पार्षद हैं। 
अन्य पिछड़ा वर्ग में भाजपा के पास 17 पार्षद हैं। शिवसेना यूबीटी में 11 और शिवसेना में तीन पार्षद अन्य पिछड़ा वर्ग से हैं। ओबीसी वर्ग में महिला पार्षदों की बात करें तो भाजपा में 13, शिवसेना यूबीटी में सात और शिंदे शिवसेना में 3 महिला ओबीसी पार्षद हैं। 
अनुसूचित जाति वर्ग की बात करें तो भाजपा के दो, शिंदे शिवसेना के एक और शिवसेना यूबीटी के तीन पार्षद अनुसूचित जाति के हैं। अनुसूचित जाति महिला वर्ग में शिवसेना यूबीटी की चार पार्षद, शिंदे शिवसेना की दो और भाजपा की एक पार्षद हैं। 
अनुसूचित जनजाति वर्ग में शिवसेना यूबीटी का ही एक पार्षद है, जबकि भाजपा और शिंदे शिवसेना का एक भी पार्षद इस वर्ग से नहीं है। 

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तकनीकी खराबी थी दुर्घटना की असली वजह

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अहमदाबाद। पिछले वर्ष 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे की जांच में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। अमेरिका में पेश की गई एक हालिया व्हिसल ब्लोअर रिपोर्ट ने उन शुरुआती दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें इस भीषण हादसे के लिए पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल को जिम्मेदार ठहराया गया था। पूर्व में कहा गया था कि पायलट ने अनजाने में फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद कर दिए थे, जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हालांकि, अमेरिका की संस्था फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति के समक्ष सबूत पेश करते हुए दावा किया है कि इस हादसे की जड़ें विमान की पुरानी और गंभीर तकनीकी खामियों में छिपी थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में पायलट की गलती बताने का पैटर्न वैसा ही है जैसा बोइंग 737 मैक्स के पिछले हादसों के दौरान देखा गया था, ताकि कंपनी की विनिर्माण खामियों को छुपाया जा सके। रिपोर्ट में दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि दुर्घटना का शिकार हुआ एयर इंडिया का यह बोइंग 787 विमान अपनी सेवा के पहले दिन से ही तकनीकी समस्याओं से ग्रस्त था। रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 फरवरी 2014 को भारत पहुंचने के दिन से ही इसमें सिस्टम फेल्योर की शिकायतें दर्ज होने लगी थीं। एफएएस का दावा है कि 11 साल की सर्विस के दौरान इस विमान में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी कई गंभीर कमियां लगातार बनी रहीं।
रिपोर्ट में उन तकनीकी विफलताओं की एक लंबी सूची दी गई है, जिनसे यह विमान बार-बार जूझता रहा। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर खराबियां, सर्किट ब्रेकर का अचानक ट्रिप होना, वायरिंग डैमेज, शॉर्ट सर्किट और पावर सिस्टम के हिस्सों का अत्यधिक गर्म (ओवरहीट) होना शामिल है। संस्था ने खुलासा किया कि जनवरी 2022 में भी इस विमान के प्राइमरी पावर पैनल में आग लगी थी, जिससे मुख्य वायरिंग को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके ठीक तीन महीने बाद, अप्रैल 2022 में लैंडिंग गियर इंडिकेशन सिस्टम फेल होने के कारण विमान को कई दिनों तक उड़ान भरने से रोका गया था।
विशेषज्ञों ने बोइंग 787 बेड़े के लगभग 18 प्रतिशत हिस्से का गहन विश्लेषण किया है, जिसमें 2,000 से अधिक सिस्टम फेल्योर रिपोर्ट्स का अध्ययन किया गया। इस विश्लेषण से पता चला कि बिजली आपूर्ति बाधित होने और धुएं या बदबू आने जैसी घटनाएं केवल इस एक विमान तक सीमित नहीं थीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में पंजीकृत इसी मॉडल के अन्य विमानों में भी देखी गई हैं। ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हादसा किसी मानवीय भूल का नतीजा नहीं, बल्कि विमान के भीतर लंबे समय से चली आ रही जटिल तकनीकी समस्याओं का चरम बिंदु था।
दूसरी ओर, इस गंभीर रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विमान निर्माता कंपनी बोइंग के रुख पर भी सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने फिलहाल इन दावों पर कोई सीधी टिप्पणी करने के बजाय केवल इतना कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जा रही आधिकारिक जांच पर ही भरोसा करेंगे। हालांकि, व्हिसल ब्लोअर की इस रिपोर्ट ने वैश्विक विमानन सुरक्षा मानकों और कंपनियों की जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय विमानन नियामकों के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस नए खुलासे के बाद जांच की दिशा बदलते हैं या नहीं।

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सुप्रीम कोर्ट बोला-अरावली में रोक के बाद भी अवैध खनन

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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में अरावली पहाडिय़ों पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि रोक बावजूद भी अवैध खनन चल रहा है। इससे ऐसे हालात बनेंगे, जिन्हें सुधार नहीं सकेंगे। सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कहा कि खनन रोकने के लिए विशेषज्ञों की एक एक्सपर्ट कमेटी गठित करेगा। कोर्ट ने राजस्थान सरकार से गारंटी ली कि अरावली क्षेत्र में किसी भी तरह का खनन नहीं होने दिया जाएगा।
सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा- पहले जारी अंतरिम आदेश जारी रहेगा। सीजेआई ने कहा- कुछ तरह की अवैध गतिविधियां अब भी जारी हैं। अवैध खनन से ऐसे हालात बन सकते हैं, जिन्हें सुधारा नहीं जा सकेगा। नई रिट याचिकाएं दाखिल न करें। हमें पता है कि ये याचिकाएं क्यों दायर की जा रही हैं।
इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल (हस्तक्षेपकर्ता की ओर से) कहा कि हम अरावली का इतिहास जानते हैं। इसकी परिभाषा के पीछे विज्ञान होना चाहिए। इस पर सीजेआई ने कहा- हमें अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की जरूरत है। सभी लोग नाम सुझाएं। हम चरणबद्ध तरीके से एक्सपर्ट्स की टीम बनाएंगे।
कपिल सिब्बल ने अपील की कि कृपया 30 मिनट की प्रारंभिक सुनवाई हो। हिमालय और अरावली जैसी पर्वतमालाओं को परिभाषित नहीं किया जा सकता। इनमें टेक्टोनिक मूवमेंट होते रहते हैं। एक अन्य वकील ने कहा- हम कोर्ट के सुओ मोटो आदेश का स्वागत करते हैं। हमने किसानों के साथ जमीनी स्तर पर काम किया है, जियो-टैगिंग भी की है।
इस पर सीजेआई ने कहा कि 29 दिसंबर 2025 के आदेश के संदर्भ में, कोर्ट के सामने एक व्यापक नोट और अहम सवाल रखे जाएंगे, ताकि सही फैसला लिया जा सके। सीजेआई बोले- राजस्थान सरकार की ओर से के.एम. नटराजन ने कहा है कि राज्य तुरंत सुनिश्चित करेगा कि प्रदेश में कोई अवैध खनन न हो। उन्होंने कहा- कपिल सिब्बल की ओर से दायर अंतरिम आवेदन मंजूर किया जाता है।

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कहां किसे मिलेगी मेयर की कुर्सी, 11 बजे उठेगा पर्दा, शिंदे की लॉटरी से खुलेगी किस्मत

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नई दिल्ली .महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई की बीएमसी (BMC) सहित 29 नगर महापालिका (Nagar Municipal Corporation) में अब बारी मेयर (mayor) के चुनाव की है, जिस पर सभी की निगाहें लगी हुई है. किस शहर में महिला मेयर होगी और किस शहर में ओबीसी, सामान्य वर्ग या फिर अनुसूचित जाति से होगा. गुरुवार को सुबह 11 बजे इससे पर्दा उठ जाएगा, क्योंकि शहरी विकास विभाग आरक्षण की प्रक्रिया के जरिए तय कर देगा.

बीएमसी सहित सभी महानगरपालिका में नए मेयर का चुनाव निगम सदन में पार्षदों के मतदान के जरिए किया जाएगा. अलग-अलग शहरों में नवनिर्वाचित पार्षदों की बुलाई जाने वाली विशेष बैठक में मेयर का चुनाव होगा, लेकिन उससे पहले मेयर किस जाति और किस वर्ग का होगा, ये फॉर्मूला एकनाथ शिंदे के मंत्रालय के द्वारा ‘लॉटरी सिस्टम’ से तय किया जाना है.

 

महाराष्ट्र में किस नगर महापालिका का मेयर किस जाति और किस वर्ग से होगा, इसका फैसला राज्य के अर्बन डेवलपमेंट डिपार्टमेंट यानि शहरी विकास विभाग के द्वारा तय किया जाता है. राज्य के शहरी विकास विभाग का जिम्मा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पास है. ऐसे में मेयर पद के आरक्षण के लिए शहरी विकास विभाग गुरुवार को लाटरी के जरिए तय करेगा.

मेयर आरक्षण 11 बजे लाटरी से होगा तय
मुंबई बीएमसी समेत महाराष्ट्र की 29 महानगरपालिका में मेयर पद के लिए नगर विकास विभाग आज आरक्षण लॉटरी निकालेगा. शहरी विकास मंत्रालय में सुबह 11 बजे से लॉटरी प्रक्रिया शुरू होगी. कार्यक्रम के अनुसार 29 नगर निगमों की लॉटरी शहरी विकास राज्य मंत्री माधुरी मिसल की अध्यक्षता में निकलेगी. लॉटरी निकले के बाद ही तय होगी किस मुंबई सहित 29 शहरों के मेयर महिला और पुरुष में किस वर्ग का होगा. इसके अलावा सामान्य वर्ग, ओबीसी, अनुसूचति जाति या अनुसूचित जनजाति में किस कैटेगरी से होगा.

रोटेशन के आधार पर तय होगा आरक्षण
महाराष्ट्र में मेयर का पद रोटेशन के आधार पर सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति, ओबीसी और महिलाओं के लिए आरक्षित होता है.कि मुंबई के बीएमसी में पिछली बार मेयर का पद सामान्य के निकला थाा. ऐसे में सामान्य को लॉटरी में नहीं रखा जाएगा. इसी तरह से महाराष्ट्र के बाकी 28 नगर महापालिका में पिछला मेयर जिस वर्ग और जिस कैटेगरी का था, उसे इस बार के लॉटरी सिस्टम में शामिल नहीं किया जाएगा. इस तरह से सभी की निगाहें आरक्षण की लाटरी सिस्टम पर ही टिकी हुई है.

महाराष्ट्र में कैसे होगा मेयर पद का चुनाव
मेयर पद पर आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 29 महानगरपालिका के नए मेयर का चुनाव होगा. इस तरह से महाराष्ट्र के मुंबई को आखिरकार चार साल बाद मेयर मिलने जा रहा है. मुंबई के मेयर का पद संभालने वाली आखिरी शख्स शिवसेना की किशोरी पेडनेकर थीं, जो इस बार भी जीतकर आईं है, लेकिन उद्धव की सेना को बहुमत का नंबर नहीं मिल सका है. इसके चलते उनका मेयर बनने की राह काफी मुश्किल है.

मुंबई के बीएमसी में अलग-अलग वॉर्डों से कुल 227 पार्षद चुनाव जीतकर आए हैं, जिन्हें मुंबई में नगर सेवक या फिर कॉरपोरेटर कहा जाता है. ऐसे में जिस पार्टी का बहुमत होता है, उसी पार्टी का मेयर चुना जाता है. बीएमसी सहित सभी नगर महापालिका चुनाव जीतकर आने वाले पार्षद अपने-अपने निगम में मेयर का चुनाव करते हैं.

28 जनवरी को मेयर और उपमेयर का चुनाव?
मेयर का कार्यकाल ढाई साल का होता है, वहीं पार्षद 5 साल के लिए चुने जाते हैं. एक मेयर का कार्यकाल पूरा होने के बाद दूसरे मेयर का चुनाव होता है. ऐसे में प्रशासन नवनिर्वाचित निगम पार्षदों की विशेष बैठक बुलाएगा, जिसमें मेयर और उपमेयर का चुनाव होगा. 28 जनवरी को नगर प्रशासन पार्षदों की विशेष बैठक बुला सकता है. बैठक में मेयर पद के लिए सभी निर्वाचित पार्षद मतदान करेंगे और जिसे सबसे अधिक वोट मिलेंगे, वही मेयर चुना जाएगा.

हालांकि. यह जरूरी नहीं है कि सबसे ज्यादा पार्षदों वाली पार्टी का उम्मीदवार ही मेयर बने, लेकिन बीते वर्षों के चुनावी अनुभव बताते हैं कि आमतौर पर बहुमत या मजबूत गठबंधन वाली पार्टी इस पद पर काबिज होती रही है. माना जा रहा है कि बीजेपी पहली बार मुंबई में अपने मेयर बना सकती है. इसी तरह से जिस शहर में जिस पार्टी के सबसे ज्यादा पार्षद चुनकर आए हैं, उस पार्टी का मेयर चुनाव जा सकता है.

नागपुर में ‘सिक्सर’ शर्मा शो! अभिषेक ने जड़े 8 गगनचुंबी छक्के, युवराज सिंह को छोड़ा पीछे

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IND vs NZ: कल नागपुर में भारत और न्यूजीलैंड के बीच 5 मैचों की सीरीज का पहला मुकाबला खेला गया. भारत ने इस मैच में 48 रन से जीत के साथ सीरीज में 1-0 की बढ़त बनानी ली है. अभिषेक शर्मा ने इस मैच में क्रिकेट प्रेमियों को पुराने ‘युवराज सिंह’ की याद दिला दी. पहले टी20 में अभिषेक ने शुरू से ही आक्रामक रुख अपनाया और मैदान के हर कोने में बाउंड्री की बौछार कर दी.

अभिषेक शर्मा ने अपनी पारी में केवल चौकों और छक्कों से ही न्यूजीलैंड के गेंदबाजों के होश उड़ा दिए. उन्होंने 35 गेंदों में 86 रन की पारी खेली. जिसमें 8 छक्के और 5 चौके जड़े. अभिषेक ने इस मैच में टी20 क्रिकेट में 5000 रन भी पूरे कर लिए. उन्होंने केवल 165 पारियों में यह मुकाम हासिल कर विराट कोहली को पीछे छोड़ दिया है.

गुरु युवराज सिंह को छोड़ा पीछे
इस पारी के दौरान अभिषेक शर्मा ने वह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली, जिसका इंतजार मैच शुरू होने से पहले ही किया जा रहा था. उन्होंने इस मैच में दो छ्क्के लगाते ही युवराज सिंह (74 छक्के) को पीछे छोड़ दिया है. अभिषेक ने टी20 अंतरराष्ट्रीय में अपने 81 छक्के पूरे कर लिए हैं. युवी ने जहां 74 छक्के 58 मैचों में लगाए थे, वहीं अभिषेक ने यह कारनामा मात्र 34वें मैच में कर दिखाया.

न्यूजीलैंड के खिलाफ नया भारतीय रिकॉर्ड
अभिषेक शर्मा अब न्यूजीलैंड के खिलाफ एक टी20 अंतरराष्ट्रीय पारी में सबसे ज्यादा छक्के (8) लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं. इससे पहले यह रिकॉर्ड सूर्यकुमार यादव और रोहित शर्मा के नाम था, जिन्होंने कीवी टीम के खिलाफ एक मैच में 7-7 छक्के लगाए थे.

वर्ल्ड कप 2026 के लिए ‘तैयार’ हैं अभिषेक
अभिषेक की इस पारी ने चयनकर्ताओं को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वे वर्ल्ड कप में ओपनिंग के लिए सबसे प्रबल दावेदार हैं. उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि उन्होंने बिना किसी डर के 180+ के स्ट्राइक रेट से रन बनाए, जो आधुनिक टी20 क्रिकेट की सबसे बड़ी मांग है.

प्राण प्रतिष्ठा के 2 साल, 10 करोड़ श्रद्धालुओं ने किए दर्शन

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Ayodhya Ram Mandir: इतिहास में आज एक महत्वपूर्ण दिन है। गुरुवार, 22 जनवरी 2026 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे हो गए हैं। 22 जनवरी 2024 को भव्य समारोह के साथ राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, जिसके बाद अयोध्या विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बन गई। पिछले दो वर्षों में 10 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने रामलला के दर्शन किए हैं। देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर से सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे, जिनमें कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति भी शामिल रहे।

राम मंदिर निर्माण का सफर आसान नहीं था। मंदिर निर्माण के लिए हिंदू समाज को करीब 500 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा। कई वर्षों तक यह मामला न्यायालय में चला और आखिरकार 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन किया गया और 5 अगस्त 2020 को भव्य भूमि पूजन संपन्न हुआ।

Ayodhya Ram Mandir के निर्माण के बाद अयोध्या की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। अब यह शहर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि एक आधुनिक धार्मिक नगरी बन चुका है। यहां आधुनिक अस्पताल, हाई-क्लास एयरपोर्ट और आधुनिक रेलवे स्टेशन विकसित किए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए 100 फीट चौड़ा राम जन्मभूमि पथ, सुव्यवस्थित दर्शन मार्ग, एलईडी स्क्रीन से सूचना प्रसारण, स्थायी कैनोपी, शुद्ध पेयजल और स्वच्छ शौचालय की व्यवस्था की गई है।

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राहुल गांधी को मिला दादा फिरोज गांधी का ऐतिहासिक दस्तावेज, मां सोनिया को भेजा

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rahul soniaरायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली (Raebareli, Uttar Pradesh) के दो दिवसीय दौरे पर आए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) के लिए मंगलवार का दिन बेहद खास रहा। उन्हें उनके दादा और पूर्व सांसद फिरोज गांधी (Feroze Gandhi) का दशकों पुराना ड्राइविंग लाइसेंस भेंट किया गया, जो वर्षों से गुमनाम था। रायबरेली प्रीमियर लीग क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान आयोजन समिति के सदस्य विकास सिंह ने राहुल गांधी को यह ऐतिहासिक दस्तावेज सौंपा।

विकास सिंह ने बताया कि उनके ससुर को यह लाइसेंस कई साल पहले एक कार्यक्रम के दौरान मिला था। उनके निधन के बाद उनकी सास ने इसे एक अमानत की तरह सुरक्षित रखा था।

विकास सिंह ने कहा, “हमें लगा कि यह गांधी परिवार की धरोहर है और राहुल जी के रायबरेली दौरे के दौरान इसे उन्हें सौंपना हमारा कर्तव्य है।”

 

जैसे ही राहुल गांधी को यह लाइसेंस मंच पर सौंपा गया, उन्होंने इसे बहुत ध्यान से देखा। पुरानी यादों से जुड़ा यह दस्तावेज देखकर राहुल गांधी काफी प्रभावित नजर आए। उन्होंने तुरंत अपने मोबाइल से लाइसेंस की फोटो खींची और व्हाट्सऐप के जरिए अपनी मां सोनिया गांधी को भेज दी।

 

आपको बता दें कि फिरोज गांधी का जन्म दिसंबर 1912 में हुआ था। उन्होंने 1952 में भारत के पहले आम चुनाव में रायबरेली सीट का प्रतिनिधित्व किया था। 7 सितंबर 1960 को उनका निधन हो गया था। आपको बता दें कि रायबरेली न केवल राहुल गांधी का वर्तमान निर्वाचन क्षेत्र है, बल्कि उनके दादा फिरोज गांधी और मां सोनिया गांधी का भी कार्यक्षेत्र रहा है।

 

 

रंगारेड्डी में 100 आवारा कुत्तों को जहर देकर मारा

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रंगारेड्डी।  तेलंगाना के रंगारेड्डी जिले के एक गांव में किसी अज्ञात व्यक्ति ने 100 आवारा कुत्तों को जहर देकर मार डाला। एक एनिमल एक्टिविस्ट ने इस मामले में एफआईआर कराई है। पुलिस ने गांव के सरपंच और दो अन्य लोगों पर केस दर्ज किया है। हालांकि कुत्तों के शव अभी तक बरामद नहीं हुए हैं। कुछ दिन पहले भी तेलंगाना में 500 से ज्यादा कुत्तों की हत्या की गई थी। पुलिस पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कुत्तों की लाशों को कहां दफनाया गया है।

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ट्रंप के दावे को लेकर कांग्रेस का PM मोदी पर तंज, कहा-70 बार मजाक उडा… फिर भी चुप्पी

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नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान (India and Pakistan) के बीच पिछले साल हुए तनाव को खत्म करने का श्रेय एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने लिया है। ट्रंप के इस ताजा दावे के बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) पर हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस ने तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप अब तक 70 बार इस तरह का दावा कर चुके हैं, लेकिन भारत सरकार की ओर से इस पर कोई कड़ा रुख नहीं दिख रहा। वाइट हाउस में अपने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष की उपलब्धियां गिनाते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया की 8 अंतहीन लड़ाइयां रुकवाई हैं।

भारत-पाक के संदर्भ में उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और भारत एक-दूसरे पर हमला कर रहे थे। आठ विमान मार गिराए गए थे। मेरी राय में दोनों देश परमाणु युद्ध की ओर बढ़ रहे थे। अगर मैं हस्तक्षेप नहीं करता, तो करोड़ों लोग मारे जाते।” ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने 10 महीनों में कंबोडिया-थाईलैंड, कोसोवो-सर्बिया और इजरायल-ईरान जैसे आठ बड़े संघर्षों को शांत कराया है।

 

जयराम रमेश का तीखा हमला
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, “कल से पहले यह संख्या 68 थी। लेकिन कल ही यह आंकड़ा 69 नहीं, बल्कि सीधे 70 पर पहुंच गया। एक बार व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ़्रेंस के अपने शुरुआती बयान में और बाद में सवाल-जवाब के दौरान। यही वह संख्या है, जितनी बार प्रधानमंत्री के ‘अच्छे दोस्त’ और जिन्हें कई बार पीएम की जबरन झप्पी मिल चुकी है- ने यह दावा किया है कि 10 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के अचानक और अप्रत्याशित रूप से रुकने के लिए वही जिम्मेदार थे।”

नोबेल शांति पुरस्कार की चाहत
ट्रंप ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी मलाल जताया कि इन युद्धों को रुकवाने के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकने से कम से कम 1.5 से 2 करोड़ लोगों की जान बची है, जो उनके लिए नोबेल से बड़ी बात है।

गौरतलब है कि भारत सरकार हमेशा से यह कहती रही है कि पाकिस्तान के साथ किसी भी मुद्दे पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, 10 मई 2025 को ट्रंप ने सोशल मीडिया पर घोषणा की थी कि वाशिंगटन की मध्यस्थता के बाद दोनों देश पूर्ण युद्धविराम पर सहमत हुए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि ट्रंप के बार-बार इस तरह के दावे करना भारतीय संप्रभुता और प्रधानमंत्री के दावों पर सवाल खड़ा करता है।