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Friday, September 25, 2026
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तकनीकी खराबी थी दुर्घटना की असली वजह

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अहमदाबाद। पिछले वर्ष 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया के बोइंग 787 विमान हादसे की जांच में एक नया और सनसनीखेज मोड़ आ गया है। अमेरिका में पेश की गई एक हालिया व्हिसल ब्लोअर रिपोर्ट ने उन शुरुआती दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें इस भीषण हादसे के लिए पायलट कैप्टन सुमीत सभरवाल को जिम्मेदार ठहराया गया था। पूर्व में कहा गया था कि पायलट ने अनजाने में फ्यूल कंट्रोल स्विच बंद कर दिए थे, जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। हालांकि, अमेरिका की संस्था फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने अमेरिकी सीनेट की स्थायी जांच उपसमिति के समक्ष सबूत पेश करते हुए दावा किया है कि इस हादसे की जड़ें विमान की पुरानी और गंभीर तकनीकी खामियों में छिपी थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जांच में पायलट की गलती बताने का पैटर्न वैसा ही है जैसा बोइंग 737 मैक्स के पिछले हादसों के दौरान देखा गया था, ताकि कंपनी की विनिर्माण खामियों को छुपाया जा सके। रिपोर्ट में दस्तावेजों के हवाले से बताया गया है कि दुर्घटना का शिकार हुआ एयर इंडिया का यह बोइंग 787 विमान अपनी सेवा के पहले दिन से ही तकनीकी समस्याओं से ग्रस्त था। रिकॉर्ड बताते हैं कि 1 फरवरी 2014 को भारत पहुंचने के दिन से ही इसमें सिस्टम फेल्योर की शिकायतें दर्ज होने लगी थीं। एफएएस का दावा है कि 11 साल की सर्विस के दौरान इस विमान में इंजीनियरिंग, मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़ी कई गंभीर कमियां लगातार बनी रहीं।
रिपोर्ट में उन तकनीकी विफलताओं की एक लंबी सूची दी गई है, जिनसे यह विमान बार-बार जूझता रहा। इनमें मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक और सॉफ्टवेयर खराबियां, सर्किट ब्रेकर का अचानक ट्रिप होना, वायरिंग डैमेज, शॉर्ट सर्किट और पावर सिस्टम के हिस्सों का अत्यधिक गर्म (ओवरहीट) होना शामिल है। संस्था ने खुलासा किया कि जनवरी 2022 में भी इस विमान के प्राइमरी पावर पैनल में आग लगी थी, जिससे मुख्य वायरिंग को भारी नुकसान पहुंचा था। इसके ठीक तीन महीने बाद, अप्रैल 2022 में लैंडिंग गियर इंडिकेशन सिस्टम फेल होने के कारण विमान को कई दिनों तक उड़ान भरने से रोका गया था।
विशेषज्ञों ने बोइंग 787 बेड़े के लगभग 18 प्रतिशत हिस्से का गहन विश्लेषण किया है, जिसमें 2,000 से अधिक सिस्टम फेल्योर रिपोर्ट्स का अध्ययन किया गया। इस विश्लेषण से पता चला कि बिजली आपूर्ति बाधित होने और धुएं या बदबू आने जैसी घटनाएं केवल इस एक विमान तक सीमित नहीं थीं, बल्कि अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में पंजीकृत इसी मॉडल के अन्य विमानों में भी देखी गई हैं। ऐसे में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि हादसा किसी मानवीय भूल का नतीजा नहीं, बल्कि विमान के भीतर लंबे समय से चली आ रही जटिल तकनीकी समस्याओं का चरम बिंदु था।
दूसरी ओर, इस गंभीर रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद विमान निर्माता कंपनी बोइंग के रुख पर भी सवाल उठ रहे हैं। कंपनी के प्रवक्ता ने फिलहाल इन दावों पर कोई सीधी टिप्पणी करने के बजाय केवल इतना कहा है कि वे अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत भारत के एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) द्वारा की जा रही आधिकारिक जांच पर ही भरोसा करेंगे। हालांकि, व्हिसल ब्लोअर की इस रिपोर्ट ने वैश्विक विमानन सुरक्षा मानकों और कंपनियों की जवाबदेही पर एक नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की निगाहें भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय विमानन नियामकों के अगले कदम पर टिकी हैं कि वे इस नए खुलासे के बाद जांच की दिशा बदलते हैं या नहीं।

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News Desk

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