नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने से भाजपा के पुराने नेताओं में बढ़ने लगी बेचैनी?

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नई दिल्‍ली। नितिन नवीन (Nitin Naveen) के भाजपा (BJP) अध्यक्ष बनने के बाद अब नई टीम को लेकर विमर्श चल रहा है। इसमें युवाओं व महिलाओं को तरजीह देने की बात चल रही है। इससे संगठन में काम कर रहे कई मौजूदा और पुराने नेताओं व भावी दावेदारों में बेचैनी है। कई नेताओं को उम्र के आड़े आने का डर भी सता रहा है। हाल में विभिन्न नेताओं को दी गई खास चुनावी जिम्मेदारियों से हाशिए पर रहे नेताओं में उम्मीद तो जगी है, लेकिन जब पूरी टीम बनेगी, तब कौन कहां होगा इसे लेकर ऊहापोह बरकरार है।

अगले माह के मध्य में भाजपा की नई टीम आने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इसे लेकर काफी चर्चा हो चुकी है और अब उचित समय पर केवल अंतिम रूप दिया जाना है। पूरी केंद्रीय टीम यानी उपाध्यक्ष, महासचिव व सचिवों में बड़े बदलाव की संभावना है। तीनों स्तरों पर लगभग आधे-आधे नए चेहरे होंगे। कुछ नेताओं को ही टीम में इधर से उधर किया जाएगा, लेकिन बाकी को बदला जाना तय है। इसकी बड़ी वजह नए नेतृत्व को सामने लाना है। युवा नेताओं के टीम में होने से पार्टी के नए अध्यक्ष नई ऊर्जा का बेहतर ढंग से संचालन कर सकेंगे।

 

टीम में महिलाओं की बढ़ेगी संख्या

आने वाले समय में लोकसभा व विधानसभाओं में अब महिलाओं को आरक्षण दिया जाना है, ऐसे में भाजपा की नई टीम में पिछली टीम से ज्यादा महिलाएं होंगी। हालांकि, भाजपा के संविधान में केंद्रीय पदाधिकारियों को एक तिहाई पद देने की व्यवस्था है, लेकिन उसका पालल इस बार भी हो पाने की संभावना कम है। पार्टी के व्यापक विस्तार को देखते हुए केंद्रीय टीम में राज्यों में काम कर रहे कई चेहरे आ सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि राज्यों के प्रभारी व सह प्रभारियों की नियुक्ति में केंद्रीय पदाधिकारी को ही जगह दी जाए, यह जरूरी नहीं है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों को भी यह जिम्मेदारी दी जा सकती है। चूंकि प्रभारियों का काम अनुभव के लिहाज से काफी अहम होता है इसलिए इसमें वरिष्ठ नेताओं को ज्यादा जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

‘OP सिंदूर में भारत ने दिखाया दम, सीजफायर के लिए गिड़गिड़ाया पाकिस्तान’, इस विदेशी रिपोर्ट ने PAK के झूठ की खोली पोल

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Swis Think Tank Report: स्विस मिलिट्री थिंक टैंक ‘सेंटर फॉर मिलिट्री हिस्टी एंड पर्सपेक्टिव स्टडीज’ की रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि भारत ने किस प्रकार से ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को पटखनी दी थी. भारत ने पाकिस्तान के अंदर मौजूद कई आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले कर उनको खत्म कर नुकसान पहुंचाया. भारतीय हथियार एस-400 और हवाई रक्षा नेटवर्क ने पाकिस्तान को उसकी औकात दिखाई. भारत से हार के बाद डरे-सहमें पाकिस्तान ने युद्धविराम की गुजारिश की थी, जिसके बाद भारत ने युद्ध रोक दिया.

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायुसेना के राफेल और मिराज-2000 विमानों ने पाकिस्तान को करारा झटका दिया था. वायुसेना ने इस दौरान बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद और मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को निशाना बनाया था. पाकिस्तान ने इस दौरान भारत पर करीब पीएल-15 मिसाइलें और 900 से ज्यादा ड्रोन दागे, लेकिन भारत ने सबको नष्ट कर दिया.

सीजफायर की गुहार लगाने के लिए मजबूर हुआ था पाक
पाकिस्तान ने भारत में पहलगाम आतंकी हमला किया. जिसका मुहतोड़ जवाब देने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था. ऑपरेशन सिंदूर के संघर्ष की शुरुआत 7 मई की रात को हुई थी. जिसमें भारतीय वायुसेना ने सीमा पार कर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया.
इस दौरान पाकिस्तान अपने बचाव के लिए 30 से ज्यादा लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की मिसाइलों के साथ संघर्ष की कोशिश की लेकिन नाकाम रहा. भारत के अत्याधुनिक टेक्नालॉजी हथियारों को देखते ही उसने सीजफायर की गुहार लगाई, जिसके बाद भारत ने अपनी कार्रवाई रोक दी. इस दौरान भारतीय वायुसेना का ‘आकाशतीर’ नेटवर्क और इलेक्ट्रानिक जैमिंग काफी साथ दिया.

रिपोर्ट में हुआ खुलासा
जब भारत ने पाकिस्तान की सीमा के अंदर घुसकर वार करना शुरू कर दिया तो पाकिस्तान के हाथ-पाव फूलने लगे. इस हमले को रोकने के लिए पाकिस्तान ने अपने सभी लड़ाकू विमान, रडार और कमांड सेंटर खत्म कर दिए. जब पाकिस्तान के पास युद्धविराम के अलावा कोई और तरकीब नहीं बची तो उसने भारत से युद्ध रोकने की गुहार लगाई. हालांकि भारत ने इसे स्वीकार्य करते हुए रोक दिया. यह खुलासा हाल ही में आई एक रिपोर्ट में हुआ है.

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‘देश हिंदू राष्ट्र ही है’ मोहन भागवत बोले- ‘हिंदुओं को 3 बच्चे पैदा करने से किसने रोका है’

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मुजफ्फरपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने रविवार को मुजफ्फरपुर में एक महत्वपूर्ण सामाजिक सद्भाव विचार गोष्ठी सह संवाद को संबोधित किया. उन्होंने समाज में एकता और सद्भाव पर जोर देते हुए कहा कि जब हर जाति और बिरादरी उन्नत होगी, तभी समाज और देश वास्तविक प्रगति कर पाएगा.

जनसंख्या नियंत्रण और हिंदू राष्ट्र पर विचार: जनसंख्या नियंत्रण से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने नहीं रोका है, जबकि सरकार 2-1 बच्चों की नीति की बात करती है. हिंदू राष्ट्र के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह पहले से ही हिंदू राष्ट्र है. भारत में विविधता है, अलगाव नहीं. अंग्रेजों ने अलगाव बढ़ाकर शासन किया, अब उस अलगाव को समाप्त कर समाज को एकजुट करना है.

 

“हिंदू समाज को तीन बच्चे पैदा करने से किसी ने नहीं रोका है. सरकार भी 2-1 बच्चों की बात करती है. देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह हिंदू राष्ट्र है ही. भारत में विविधता है, अलगाव नहीं.”–मोहन भागवत, आरएसएस प्रमुख

विदेशी शक्तियों की चिंता और भारत की प्रगति: डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि आज भारत के आगे बढ़ने की अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. कुछ विदेशी शक्तियां भारत की प्रगति नहीं चाहतीं, क्योंकि उन्हें अपनी ‘दुकान’ बंद होने का डर है. इसी कारण वे भारत के विकास के मार्ग में बाधाएं खड़ी करने का प्रयास कर रही हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि डर और कमजोरी को दूर करने के लिए आत्मनिर्भरता आवश्यक है, जो समस्याओं का स्थायी समाधान प्रदान कर सकती है.

सद्भाव की आवश्यकता और ऐतिहासिक सबक: सरसंघचालक ने विश्व स्तर पर सद्भाव की कमी पर चिंता जताई और कहा कि यदि सद्भाव नहीं रहा तो लोग आपस में लड़कर नष्ट हो जाएंगे. उन्होंने इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि कोई विदेशी शक्ति ने अपनी ताकत से भारत को पराधीन नहीं बनाया, बल्कि हमारी आपसी फूट का फायदा उठाकर शासन किया. यदि समाज में सद्भाव बना रहेगा तो लोग एक-दूसरे के सुख-दुख में भागीदार बनेंगे और समस्याएं स्वतः हल होती जाएंगी.

समाज की जागृति और स्थानीय स्तर पर समाधान: डॉ. भागवत ने कहा कि समाज अब जाग रहा है और देश तेजी से आगे बढ़ रहा है. यदि खंड या प्रखंड स्तर पर समाज अपनी समस्याओं पर बैठकर विचार-विमर्श करे तो लोगों को किसी नेता पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने विभिन्न जातियों और बिरदरियों के उत्थान के साथ अन्य समाजों की समस्याओं के समाधान के प्रयासों की जानकारी भी ली. कार्यक्रम में क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंह ने विषय प्रवेश कराया, जबकि क्षेत्र संघचालक देवव्रत पाहन, उत्तर बिहार प्रांत संघचालक गौरीशंकर प्रसाद सहित कई वरिष्ठ स्वयंसेवक उपस्थित रहे.

प्रश्नोत्तर सत्र में सज्जन शक्ति पर जोर: दूसरे सत्र में प्रश्नोत्तर के दौरान सरसंघचालक ने कहा कि केवल समस्या बताने के बजाय उसका समाधान भी सुझाना चाहिए. आज देश सज्जन शक्ति के भरोसे आगे बढ़ रहा है, जहां लोग अपने स्तर पर समाज की समस्याएं दूर कर रहे हैं. लेकिन इस प्रयास को और नीचे तक ले जाना जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल व्यवस्था से समस्याओं का समाधान नहीं होगा, बल्कि समाज के लोग आपस में चिंतन करेंगे तभी स्थायी हल निकलेगा.

जाति संगठनों की भूमिका और सेवा भाव: डॉ. भागवत ने कहा कि प्रखंड स्तर पर समाज और जाति के संगठनों को भौतिक तथा नैतिक उत्थान पर गंभीरता से विचार करना होगा. उन्होंने जोर दिया कि केवल संपन्न लोग ही समाज सेवा कर सकते हैं, ऐसा नहीं है. जिसके मन में सद्भाव होगा, वही पीड़ितों और जरूरतमंदों की सेवा कर सकता है. कई गांवों के उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि समाज ने बिना सरकारी मदद के भी अपनी समस्याओं का समाधान किया है.

विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्य: गोष्ठी में विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपने कार्यों की जानकारी दी. तैलिक साहू समाज ने कोरोना काल में मुजफ्फरपुर के छोटी कल्याणी क्षेत्र में कोरोना वॉरियर्स की सेवा का उल्लेख किया. एक संगठन ने समाज की लड़कियों के सामूहिक विवाह कराने की बात बताई, जबकि सहरसा में रोटी बैंक चलाने वाले संगठन ने दिव्यांग और जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने तथा सेवा के विस्तार की जानकारी साझा की. यह कार्यक्रम संघ के शताब्दी वर्ष में सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ.

रामवन पथ गमन मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, पुलिसकर्मियों से भरी बस को ट्रक ने मारी टक्कर, कई पुलिसकर्मी घायल

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सतना। उचेहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत रामवन पथ गमन मार्ग पर सोमवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रक ने पुलिसकर्मियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी।

हादसे में बस चालक, कंडक्टर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

बस में सतना जिले की पुलिस टीम सवार थी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस में सतना जिले की पुलिस टीम सवार थी, जिसे धार जिले में कानून-व्यवस्था (लाइन ऑर्डर) की ड्यूटी पर भेजा गया था। ड्यूटी पूरी कर पुलिस टीम बस से वापस सतना लौट रही थी। इसी दौरान रामवन पथ गमन मार्ग पर सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने रॉन्ग साइड में आकर बस को टक्कर मार दी।

 

बस में लगभग 50 पुलिसकर्मी सवार थे

बताया जा रहा है कि बस में लगभग 50 पुलिसकर्मी सवार थे। टक्कर के बाद बस के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कई पुलिसकर्मी सीटों से गिर पड़े, जिससे उन्हें हाथ-पैर और सिर में चोटें आईं। हादसे की सूचना मिलते ही उचेहरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

सभी घायलों को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार

वहीं, दुर्घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और रॉन्ग साइड ड्राइविंग सामने आ रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

भारी बर्फबारी ने सफेद चादर से ढंक दिया हिमाचल प्रदेश को

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शिमला । हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को भारी बर्फबारी ने सफेद चादर से ढंक दिया (Heavy Snowfall covered in White Blanket) ।

राजधानी शिमला के जाखू में पिछले 24 घंटों में जहाँ आधा फीट बर्फ गिरी है, वहीं मशहूर पर्यटन स्थल कुफरी और नारकंडा में 1-1 फीट तक बर्फ जम चुकी है। मनाली, चंबा और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों में भी भारी हिमपात दर्ज किया गया है। मौसम के इस मिजाज ने पर्यटकों के चेहरे तो खिला दिए हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और निवासियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

तापमान में भारी गिरावट और ब्लैक-आउट बर्फबारी और बारिश के कारण हिमाचल के तापमान में भारी गिरावट आई है। प्रदेश का अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री नीचे चला गया है, जबकि पिछले 24 घंटों में पारे में करीब 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी शिमला में शुक्रवार को ‘ब्लैक-आउट’ जैसी स्थिति बनी रही, जहाँ शहर के 95 प्रतिशत इलाकों में बिजली गुल रही। वर्तमान में प्रदेशभर में 950 से अधिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर ठप हैं, जिससे कड़ाके की ठंड में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भारी बर्फबारी के कारण प्रदेश की रफ्तार थम गई है। ठियोग, रोहड़ू, रामपुर और चौपाल सहित अपर शिमला का संपर्क कट गया है। लाहौल-स्पीति, चंबा के भरमौर और पांगी क्षेत्रों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। प्रदेशभर में करीब 550 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। खराब मौसम के बीच कई सैलानी रास्तों में फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर शिमला पहुंचाया है।

27 जनवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते 27 जनवरी तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है। विभाग ने ‘कोल्ड-डे’ और घने कोहरे के साथ तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

गोवा हत्याकांड के आरोपी का दावा, 19 रशियन महिलाओं को मारा

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मुंबई। गोवा में दो रशियन महिलाओं (Russian women) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार रूसी नागरिक एलेक्सी लियोनोव (alexey leonov) ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है. 37 वर्षीय लियोनोव ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह गोवा, दिल्ली और उत्तराखंड में 19 रूसी महिलाओं की हत्या कर चुका है. हालांकि पुलिस ने उसके दावे को खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक जांच की गई, जिसमें यह बात गलत साबित हुई है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा पुलिस के महानिरीक्षक केआर चौरसिया ने साफ किया कि लियोनोव ने यह बयान केवल सुर्खियों में आने और सनसनी फैलाने के लिए दिया. उन्होंने कहा, ‘आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर है. जांच में सामने आया है कि वह सिर्फ दो हत्याओं में ही शामिल रहा है, बाकी दावे निराधार हैं.’
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, लियोनोव ने जिन महिलाओं के नाम बताए, उनकी गहन जांच की गई. जांच में पाया गया कि अधिकतर महिलाएं सुरक्षित हैं या फिर भारत छोड़ चुकी हैं. केवल एक मामले में यह पुष्टि हुई कि आरोपी मृतका को जानता था.

लियोनोव ने यह भी दावा किया था कि उसने गोवा में ही आठ महिलाओं की हत्या की है. इस पर पुलिस ने साफ कहा कि अब तक की जांच में इस तरह की किसी भी घटना के सबूत नहीं मिले हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपी कई रूसी महिलाओं को जानता था, क्योंकि भारत में रहने वाले रूसी नागरिक आमतौर पर एक-दूसरे की जानकारी रखते हैं.

 

बताया जा रहा है कि एलेक्सी लियोनोव को गोवा के अरामबोल इलाके में 37 वर्षीय रूसी महिला एलेना कास्थानोवा की हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया था. एलेना का शव उनके किराए के घर से बरामद हुआ था. इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को दूसरी हत्या का भी पता चला, जिसमें रूसी महिला एलिना वानीएवा की जान गई थी. एलिना दोनों की करीबी मित्र थी.

 

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब तीन साल से भारत में रह रहा है. उसने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताया है और यह भी कहा है कि वह कभी-कभी एक थेरेपी सेंटर में काम करता है और रूसी डांस ग्रुप के साथ मंच पर प्रस्तुति देता है.

फिलहाल गोवा पुलिस दोनों हत्याओं के मामलों की गहराई से जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

लालू, केजरीवाल, सोरेन के बाद अगला नंबर किसका? रडार पर ममता क्यों

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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी से टकराव भारतीय राजनीति में नया नहीं है। बीते वर्षों में लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे मुख्यमंत्री इस टकराव के चलते गिरफ्तारी और जेल तक जा चुके है। अब इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि क्या ममता भी उसी राह पर बढ़ रही हैं? दरअसल ममता बनर्जी ने 2011 में वामपंथियों के 35 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की और 2021 में लगातार तीसरी बार बंगाल में जीत दर्ज की। भाजपा तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें सत्ता से हटा नहीं सकी। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और भाजपा बंगाल में सत्ता पाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बंगाल दौरे इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इसतरह के माहौल में ममता का केंद्रीय एजेंसियों से खुला टकराव उन्हें राजनीतिक और कानूनी संकट में डालता दिख रहा है। इतिहास बताता है कि सीबीआई-ईडी से पंगा लेने का अंजाम क्या हो सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव पर पशुपालन घोटाले का आरोप लगा था। लेकिन समर्थकों के विरोध और राजनीतिक दबाव के बावजूद सीबीआई ने 1997 में लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। लेकिन गिरफ्तारी से पहले उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन सजा से नहीं बच सके। यह आजादी के बाद पहली बार था जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। वहीं हाल के सालों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में ईडी के नोटिसों को नजरअंदाज किया। नौ नोटिसों की अवहेलना के बाद मार्च 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वे मुख्यमंत्री रहते गिरफ्तार होने वाले भारत के इतिहास में पहले नेता बने। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया। करीब छह महीने तक उन्होंने जेल से सरकार चलाई, फिर मजबूर होकर उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। ईडी से टकराव केजरीवाल पर भी भारी पड़ा।  केजरीवाल के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। कई नोटिसों के बावजूद उन्होंने ईडी के सामने पेश होने से बचने की कोशिश की। अंततः जनवरी 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा देकर चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया। जमानत के बाद हेमंत फिर सत्ता में लौट आए, लेकिन वे भी ईडी से बच नहीं सके। अब ममता बनर्जी का मामला सामने है। हाल के महीनों में ईडी ने कोयला घोटाले से जुड़े मामले में आई-पैक से संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की। आरोप है कि ममता खुद वहां पहुंचीं, ईडी की कार्रवाई में बाधा डालकर दस्तावेज व मोबाइल अपने साथ ले गईं। जांच एजेंसी ईडी ने गंभीर मामला बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत की शुरुआती टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वह इस व्यवहार से नाराज है। पहले फरवरी 2019 में सीबीआई कोलकाता के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर सीबीआई के अधिकारी पूछताछ के लिए गए तो उन्हें न सिर्फ रोकने की कोशिश हुई थी, बल्कि राज्य पुलिस ने सीबीआई टीम को गिरफ्तार भी कर लिया था। ममता तब भी वहां पहुंची थीं। रात भर सीबीआई की इस गतिवधि के खिलाफ वहां उन्होंने धरना दिया। वहीं पर कैबिनेट बैठक भी की थी। ममता ने वर्ष 2018 में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।  इन घटनाओं ने यह आशंका बढ़ा दी है कि क्या ममता बनर्जी भी लालू, केजरीवाल और हेमंत सोरेन की तरह केंद्रीय एजेंसियों से टकराव के चलते कानूनी संकट में फंस सकती हैं। अंतिम फैसला अदालतों का होगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि सीबीआई-ईडी से सीधी टक्कर अक्सर नेताओं को भारी पड़ती है।

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News Desk

धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, दुबई-मलेशिया तक फैला नेटवर्क

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मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मिर्जापुर के धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग (Conversion and blackmailing) रैकेट के मास्टरमाइंड इमरान को पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है. वो विदेश भागने की फिराक में था. पुलिस ने उसके सिर पर 25 हजार का इनाम घोषित किया हुआ था. लगातार उसकी तलाश की जा रही थी.

इस केस की जांच में चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं. आजतक के पास मौजूद एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का अहम किरदार इमरान 27 जनवरी 2024 को दुबई गया था. जांच एजेंसियों को उसके पासपोर्ट की कॉपी भी हाथ लगी है. साल 2024 में धर्मांतरण गतिविधियों के दौरान वह विदेश यात्रा पर था.

सूत्रों के अनुसार, दुबई में इमरान ने धर्मांतरण के संगठित नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध लोगों से मुलाकात की थी. इन बैठकों में न सिर्फ नेटवर्क को विस्तार देने पर चर्चा हुई, बल्कि फंडिंग को लेकर भी बातचीत हुई. इमरान की जीवनशैली और विदेश यात्राओं पर हो रहा लाखों रुपए का खर्च जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है. यह भी खुलासा हुआ है कि इमरान केवल दुबई तक सीमित नहीं था.

 

वो मलेशिया भी बार-बार जा रहा था. मलेशिया में बैठकर भी इस नेटवर्क के कुछ हिस्सों को ऑपरेट किया गया. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशों से आने वाला पैसा किन रास्तों से भारत पहुंच रहा था. इस पूरे मामले की जड़ मिर्जापुर में चल रहे एक जिम सिंडिकेट से जुड़ी हुई है. यहां पांच जिम की चेन के जरिए अवैध धर्म परिवर्तन और ब्लैकमेलिंग का रैकेट चलाया जा रहा था.

इस गैंग ने कम से कम 30 महिलाओं को निशाना बनाया, जिनमें से ज़्यादातर हिंदू महिलाएं थीं. ये महिलाएं फिजिकल ट्रेनिंग के लिए इन जिम से जुड़ी थीं. आरोपी पहले महिलाओं से दोस्ती करते थे, फिर उनके निजी फोटो और वीडियो हासिल करते थे. इसके बाद AI टूल्स की मदद से अश्लील कंटेंट तैयार कर पीड़ितों को ब्लैकमेल किया जाता था. उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी.

इन मांगों में यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव शामिल था. इस मामले में GRP हेड कांस्टेबल इरशाद खान समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार आरोपियों में जिम मालिक और ट्रेनर मोहम्मद शेख अली आलम, फैज़ल खान, ज़हीर, शादाब और फरीद अहमद शामिल हैं. मुख्य आरोपी फरीद अहमद को पुलिस पर फायरिंग के बाद एक एनकाउंटर में पकड़ा गया.

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से दर्जनों AI-जेनरेटेड अश्लील वीडियो, तस्वीरें और चैट बरामद की हैं. यह रैकेट 2021 से सक्रिय था और इसका मकसद सिर्फ ब्लैकमेलिंग नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए महिलाओं का मानसिक और सामाजिक शोषण करना था. मिर्जापुर के डीएम पवन कुमार गंगवार ने जांच के दायरे में आए सभी पांच जिम को 27 फरवरी तक सील करने के आदेश दिए हैं.

बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगी कांग्रेस, सोनिया गांधी करेंगी बैठक की अध्यक्षता

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नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी 27 जनवरी को दोनों सदनों के सीनियर नेताओं के साथ एक स्ट्रेटेजी मीटिंग करेंगी. इसमें 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद बजट सत्र के दौरान एनडीए सरकार का मुकाबला करने का प्लान बनाया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पुराने ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा में बदलाव के अलावा, जिसके खिलाफ कांग्रेस पूरे देश में कैंपेन चला रही है. खासकर दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में गवर्नर की भूमिका का राजनीतिकरण, कई राज्यों में वोटर लिस्ट के चल रहे एसआईआर में गड़बड़ियां, चीन और पाकिस्तान के संबंध में विदेश नीति की चुनौतियां और खासकर हाल के अमेरिकी टैरिफ के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियां, इन सभी मुद्दों को बजट सेशन के दौरान कांग्रेस उठा सकती है.

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मोहम्मद जावेद ने ईटीवी भारत से कहा, ‘मनरेगा हमारे लिए एक अहम मुद्दा है, लेकिन कई और मामले भी हैं जिन पर हम बजट सेशन के दौरान चर्चा करना चाहेंगे. इसमें विदेश नीति, अर्थव्यवस्था की हालत, बेरोजगारी, लोगों के लिए साफ पीने का पानी और हवा, नागरिकों के वोट देने के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं.’

28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा दोनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी. वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की उपलब्धियों पर एक स्पीच पढ़ेंगी, जिसे कैबिनेट ट्रेडिशन के हिसाब से तैयार करेगी. कांग्रेस के अंदर के लोगों ने कहा कि पार्टी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के गवर्नर से जुड़े हालिया विवादों से नाराज है. जिनके विधानसभाओं में बर्ताव पर राज्य सरकारों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. कांग्रेस कर्नाटक में राज करती है और तमिलनाडु में डीएमके की सरकार का समर्थन करती है. केरल में सीपीआई-एम की एलडीएफ सरकार है.

पार्टी के अंदर के लोगों के मुताबिक तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने विधानसभा में आम भाषण देने से मना कर दिया और कैबिनेट का तैयार किया हुआ भाषण पढ़े बिना ही चले गए. केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कैबिनेट से मंजूरी पाए भाषण के कुछ खास हिस्सों को नहीं पढ़ा, और कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने असेंबली के स्पेशल जॉइंट सेशन में कैबिनेट के तैयार किए हुए भाषण की कुछ ही लाइनें पढ़ीं और फिर सदन से बाहर चले गए.

जावेद ने कहा, ‘हम कहते रहे हैं कि संवैधानिक ऑफिस और संस्थाओं को बचाने की जरूरत है. हम हाल ही में दक्षिणी राज्यों में गवर्नर के ऑफिस के राजनीतिकरण को लेकर चिंतित हैं. मुझे यकीन है कि विपक्ष इस मुद्दे को एक साथ उठाना चाहेगा.’ कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सैयद नसीर हुसैन ने बीजेपी पर गवर्नर के संवैधानिक पद का राजनीतिकरण करके संघवाद को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे काम संविधान के नियमों के खिलाफ हैं.

हुसैन ने ईटीवी भारत को बताया, ‘संविधान के आर्टिकल 176 के तहत, गवर्नर का भाषण चुनी हुई सरकार का पॉलिसी स्टेटमेंट होता है, जिसे काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स तैयार करती है. आर्टिकल 163 के तहत, गवर्नर काउंसिल की मदद और सलाह पर काम करने के लिए मजबूर है. कैबिनेट का भाषण पूरा न देना अपनी मर्जी का इस्तेमाल नहीं है, बल्कि संवैधानिक ड्यूटी से साफ तौर पर भटकना है.

इस तरह का व्यवहार बीजेपी की जानी-पहचानी चाल को दिखाता है, जिसमें गैर-बीजेपी राज्य सरकारों पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए संवैधानिक ऑफिसों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे गवर्नर का ऑफिस एक न्यूट्रल संवैधानिक अथॉरिटी से राजनीतिक टकराव का एक टूल बन जाता है.’

कांग्रेस सरकार से विदेश नीति के मामलों, खासकर चीन के भारतीय इलाकों पर झूठे दावों और पाकिस्तान से बॉर्डर पार आतंकवाद पर सवाल पूछ रही है. वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कपड़ा निर्यात पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ के बुरे असर की बात कही, जिससे नौकरियां गईं, फैक्ट्रियां बंद हुई और ऑर्डर कम हुए.

पार्टी के अंदर के लोगों ने बताया कि बजट सेशन के दौरान कांग्रेस मध्य प्रदेश के इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई कई मौतों, दिल्ली में एयर पॉल्यूशन के हाई लेवल और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को निशाना बनाने जैसे मुद्दों को भी उठा सकती है. यह सबसे पुरानी पार्टी बजट सेशन के दौरान एनडीए का मुकाबला करने के लिए दूसरी एक जैसी सोच वाली पार्टियों के साथ कॉमन ग्राउंड बनाने की कोशिश करेगी और सत्र की शुरुआत में I.N.D.I.A. ब्लॉक के साथियों के साथ एक स्ट्रेटेजी सेशन करेगी. अंदर के लोगों ने बताया कि कांग्रेस चीफ और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी यह रोल निभाएंगे.

हुसैन ने कहा, ‘ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर हम सरकार से जवाब चाहते हैं. जिस तरह से एसआईआर के तहत राज्य की वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जा रहे हैं, उससे इस काम पर शक पैदा हुआ है. यह मुद्दा पार्टी लाइन से ऊपर है और इसलिए जरूरी है. आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करने की जरूरत है क्योंकि 1 अमेरिकी डॉलर का एक्सचेंज रेट 91 रुपये हो गया है. हम आने वाले सेशन के लिए एक जॉइंट स्ट्रैटेजी के लिए अपने सहयोगियों से भी बात करेंगे.’

गणतंत्र दिवस पर सेना को मिला सबसे बड़ा सम्मान पैकेज, हजारों सैनिकों को मिली ऑनररी रैंक

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नई दिल्‍ली। सबसे पहले बात करें एक्टिव सर्विस पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। तो गजट नोटिफिकेशन (gazette notification) संख्या 01 (ई) के तहत एक्टिव ड्यूटी पर कार्यरत जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स को यह सम्मान दिया गया है। इस श्रेणी में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, इंटेलिजेंस, मिलिट्री पुलिस, पायनियर कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी जैसी विभिन्न शाखाओं के 437 सीनियर जेसीओ को ऑनररी कैप्टन और 1804 अधिकारियों को ऑनररी लेफ्टिनेंट बनाया गया है। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया गया है, जिनकी सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह संतोषजनक रही है और जिन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी।

इसके बाद दूसरी बड़ी श्रेणी है रिटायरमेंट के समय ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 02 (ई) के अनुसार, इस कैटेगरी में 4014 जेसीओ को उनकी सेवा पूरी होने पर यह मानद रैंक दी गई है। इनमें सूबेदार मेजर, रिसालदार मेजर और सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जो लंबे समय तक सेना की अलग-अलग यूनिट्स और रेजीमेंट्स में सेवा दे चुके हैं। इस सूची में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी के सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हैं।

 

तीसरी और सबसे बड़ी संख्या वाली कैटेगरी है ऑनररी नायब रिसालदार/ऑनररी सूबेदार की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 03 (ई) के तहत, 805 एनसीओ को यह सम्मान दिया गया है। इनमें हवलदार, दफेदार और नायब सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जिन्होंने कई वर्षों तक फील्ड एरिया, सीमावर्ती इलाकों और ऑपरेशनल यूनिट्स में सेवा दी है। यह कैटेगरी संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी रही, जो यह दिखाती है कि सेना अपने निचले और मध्य स्तर के नेतृत्व को भी समान सम्मान देती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो गणतंत्र दिवस 2026 पर हजारों सैनिकों को विभिन्न स्तरों पर ऑनररी रैंक देकर उनकी लंबी, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा को औपचारिक सम्मान दिया गया है।

क्या होती है ऑनररी रैंक
ऑनररी रैंक भारतीय सेना में दिया जाने वाला एक विशेष मानद सम्मान है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ देश की सेवा की हो। यह रैंक वास्तविक कमांड या ऑपरेशनल पावर नहीं देती, लेकिन सैनिक की पूरी सेवा को आधिकारिक मान्यता देती है।

ऑनररी रैंक दो तरह से दी जाती है। पहली, एक्टिव सर्विस के दौरान, जैसे ऑनररी कैप्टन या ऑनररी लेफ्टिनेंट। दूसरी, रिटायरमेंट के समय, जब सैनिक अपनी यूनिट से विदा लेता है। आमतौर पर यह सम्मान गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर घोषित किया जाता है।

क्या हैं ऑनररी रैंक के फायदे?
ऑनररी रैंक का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा पेंशन से जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सूबेदार ऑनररी लेफ्टिनेंट बनता है, तो उसकी पेंशन उच्च रैंक के अनुरूप तय की जाती है। मौजूदा 7वें पे कमीशन और वन रैंक वन पेंशन के तहत यह बढ़ोतरी लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकती है, जो व्यक्ति की सेवा अवधि और अंतिम रैंक पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, सामाजिक और प्रोटोकॉल सम्मान भी एक बड़ा लाभ है। रिटायरमेंट के बाद सैनिक अपने नाम के साथ ऑनररी रैंक का इस्तेमाल कर सकता है, जैसे “ऑनररी कैप्टन” या “ऑनररी सूबेदार”। सैन्य कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में उन्हें उच्च स्थान और सम्मान मिलता है, जिससे परिवार और समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

मेडिकल सुविधाओं और कैंटीन जैसी सुविधाओं की बात करें तो ईसीएचएस मेडिकल स्कीम, सीएसडी कैंटीन और ट्रैवल कंसेशन पहले की तरह जारी रहते हैं। हालांकि रैंक बढ़ने से कुछ मामलों में प्रोटोकॉल और सुविधा स्तर बेहतर हो जाता है।