रामवन पथ गमन मार्ग पर भीषण सड़क हादसा, पुलिसकर्मियों से भरी बस को ट्रक ने मारी टक्कर, कई पुलिसकर्मी घायल

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सतना। उचेहरा थाना क्षेत्र अंतर्गत रामवन पथ गमन मार्ग पर सोमवार को एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। रॉन्ग साइड से तेज रफ्तार में आ रहे एक ट्रक ने पुलिसकर्मियों से भरी बस को जोरदार टक्कर मार दी।

हादसे में बस चालक, कंडक्टर समेत कई पुलिसकर्मी घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

बस में सतना जिले की पुलिस टीम सवार थी

प्राप्त जानकारी के अनुसार, बस में सतना जिले की पुलिस टीम सवार थी, जिसे धार जिले में कानून-व्यवस्था (लाइन ऑर्डर) की ड्यूटी पर भेजा गया था। ड्यूटी पूरी कर पुलिस टीम बस से वापस सतना लौट रही थी। इसी दौरान रामवन पथ गमन मार्ग पर सामने से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने रॉन्ग साइड में आकर बस को टक्कर मार दी।

 

बस में लगभग 50 पुलिसकर्मी सवार थे

बताया जा रहा है कि बस में लगभग 50 पुलिसकर्मी सवार थे। टक्कर के बाद बस के अंदर अफरा-तफरी मच गई और कई पुलिसकर्मी सीटों से गिर पड़े, जिससे उन्हें हाथ-पैर और सिर में चोटें आईं। हादसे की सूचना मिलते ही उचेहरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।

सभी घायलों को एंबुलेंस की मदद से नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका उपचार जारी है। डॉक्टरों के अनुसार अधिकांश घायलों की हालत स्थिर बताई जा रही है।

ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार

वहीं, दुर्घटना के बाद ट्रक चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया। पुलिस ने ट्रक को जब्त कर लिया है और चालक की तलाश शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में हादसे का कारण तेज रफ्तार और रॉन्ग साइड ड्राइविंग सामने आ रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

भारी बर्फबारी ने सफेद चादर से ढंक दिया हिमाचल प्रदेश को

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शिमला । हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) को भारी बर्फबारी ने सफेद चादर से ढंक दिया (Heavy Snowfall covered in White Blanket) ।

राजधानी शिमला के जाखू में पिछले 24 घंटों में जहाँ आधा फीट बर्फ गिरी है, वहीं मशहूर पर्यटन स्थल कुफरी और नारकंडा में 1-1 फीट तक बर्फ जम चुकी है। मनाली, चंबा और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले इलाकों में भी भारी हिमपात दर्ज किया गया है। मौसम के इस मिजाज ने पर्यटकों के चेहरे तो खिला दिए हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और निवासियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

तापमान में भारी गिरावट और ब्लैक-आउट बर्फबारी और बारिश के कारण हिमाचल के तापमान में भारी गिरावट आई है। प्रदेश का अधिकतम तापमान सामान्य से 8 डिग्री नीचे चला गया है, जबकि पिछले 24 घंटों में पारे में करीब 13 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। राजधानी शिमला में शुक्रवार को ‘ब्लैक-आउट’ जैसी स्थिति बनी रही, जहाँ शहर के 95 प्रतिशत इलाकों में बिजली गुल रही। वर्तमान में प्रदेशभर में 950 से अधिक बिजली के ट्रांसफॉर्मर ठप हैं, जिससे कड़ाके की ठंड में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

भारी बर्फबारी के कारण प्रदेश की रफ्तार थम गई है। ठियोग, रोहड़ू, रामपुर और चौपाल सहित अपर शिमला का संपर्क कट गया है। लाहौल-स्पीति, चंबा के भरमौर और पांगी क्षेत्रों में सड़क संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। प्रदेशभर में करीब 550 सड़कें यातायात के लिए बंद हैं। खराब मौसम के बीच कई सैलानी रास्तों में फंस गए थे, जिन्हें पुलिस ने सुरक्षित रेस्क्यू कर शिमला पहुंचाया है।

27 जनवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के चलते 27 जनवरी तक बारिश और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहने का अनुमान जताया है। विभाग ने ‘कोल्ड-डे’ और घने कोहरे के साथ तेज हवाओं की चेतावनी जारी की है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को ऊंचे पहाड़ी इलाकों में न जाने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

गोवा हत्याकांड के आरोपी का दावा, 19 रशियन महिलाओं को मारा

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मुंबई। गोवा में दो रशियन महिलाओं (Russian women) की हत्या के आरोप में गिरफ्तार रूसी नागरिक एलेक्सी लियोनोव (alexey leonov) ने बेहद चौंकाने वाला दावा किया है. 37 वर्षीय लियोनोव ने पुलिस पूछताछ में बताया कि वह गोवा, दिल्ली और उत्तराखंड में 19 रूसी महिलाओं की हत्या कर चुका है. हालांकि पुलिस ने उसके दावे को खारिज कर दिया है. पुलिस का कहना है कि दिल्ली से लेकर उत्तराखंड तक जांच की गई, जिसमें यह बात गलत साबित हुई है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक, गोवा पुलिस के महानिरीक्षक केआर चौरसिया ने साफ किया कि लियोनोव ने यह बयान केवल सुर्खियों में आने और सनसनी फैलाने के लिए दिया. उन्होंने कहा, ‘आरोपी मानसिक रूप से अस्थिर है. जांच में सामने आया है कि वह सिर्फ दो हत्याओं में ही शामिल रहा है, बाकी दावे निराधार हैं.’
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, लियोनोव ने जिन महिलाओं के नाम बताए, उनकी गहन जांच की गई. जांच में पाया गया कि अधिकतर महिलाएं सुरक्षित हैं या फिर भारत छोड़ चुकी हैं. केवल एक मामले में यह पुष्टि हुई कि आरोपी मृतका को जानता था.

लियोनोव ने यह भी दावा किया था कि उसने गोवा में ही आठ महिलाओं की हत्या की है. इस पर पुलिस ने साफ कहा कि अब तक की जांच में इस तरह की किसी भी घटना के सबूत नहीं मिले हैं. पुलिस का कहना है कि आरोपी कई रूसी महिलाओं को जानता था, क्योंकि भारत में रहने वाले रूसी नागरिक आमतौर पर एक-दूसरे की जानकारी रखते हैं.

 

बताया जा रहा है कि एलेक्सी लियोनोव को गोवा के अरामबोल इलाके में 37 वर्षीय रूसी महिला एलेना कास्थानोवा की हत्या के बाद गिरफ्तार किया गया था. एलेना का शव उनके किराए के घर से बरामद हुआ था. इसी मामले की जांच के दौरान पुलिस को दूसरी हत्या का भी पता चला, जिसमें रूसी महिला एलिना वानीएवा की जान गई थी. एलिना दोनों की करीबी मित्र थी.

 

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह पिछले करीब तीन साल से भारत में रह रहा है. उसने खुद को सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताया है और यह भी कहा है कि वह कभी-कभी एक थेरेपी सेंटर में काम करता है और रूसी डांस ग्रुप के साथ मंच पर प्रस्तुति देता है.

फिलहाल गोवा पुलिस दोनों हत्याओं के मामलों की गहराई से जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

लालू, केजरीवाल, सोरेन के बाद अगला नंबर किसका? रडार पर ममता क्यों

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नई दिल्ली। केंद्रीय जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी से टकराव भारतीय राजनीति में नया नहीं है। बीते वर्षों में लालू प्रसाद यादव, अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन जैसे मुख्यमंत्री इस टकराव के चलते गिरफ्तारी और जेल तक जा चुके है। अब इसी कड़ी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का नाम चर्चा में है। सवाल उठ रहा है कि क्या ममता भी उसी राह पर बढ़ रही हैं? दरअसल ममता बनर्जी ने 2011 में वामपंथियों के 35 साल पुराने शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की और 2021 में लगातार तीसरी बार बंगाल में जीत दर्ज की। भाजपा तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें सत्ता से हटा नहीं सकी। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं और भाजपा बंगाल में सत्ता पाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के शीर्ष नेताओं के बंगाल दौरे इसी रणनीति का हिस्सा हैं। इसतरह के माहौल में ममता का केंद्रीय एजेंसियों से खुला टकराव उन्हें राजनीतिक और कानूनी संकट में डालता दिख रहा है। इतिहास बताता है कि सीबीआई-ईडी से पंगा लेने का अंजाम क्या हो सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री रहते लालू प्रसाद यादव पर पशुपालन घोटाले का आरोप लगा था। लेकिन समर्थकों के विरोध और राजनीतिक दबाव के बावजूद सीबीआई ने 1997 में लालू प्रसाद यादव को गिरफ्तार किया। लेकिन गिरफ्तारी से पहले उन्होंने इस्तीफा देकर अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया, लेकिन सजा से नहीं बच सके। यह आजादी के बाद पहली बार था जब किसी पूर्व मुख्यमंत्री को सीबीआई ने गिरफ्तार किया। वहीं हाल के सालों में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में ईडी के नोटिसों को नजरअंदाज किया। नौ नोटिसों की अवहेलना के बाद मार्च 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। वे मुख्यमंत्री रहते गिरफ्तार होने वाले भारत के इतिहास में पहले नेता बने। बाद में सीबीआई ने भी उन्हें तिहाड़ जेल से गिरफ्तार किया। करीब छह महीने तक उन्होंने जेल से सरकार चलाई, फिर मजबूर होकर उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री बनाना पड़ा। ईडी से टकराव केजरीवाल पर भी भारी पड़ा।  केजरीवाल के बाद झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगा। कई नोटिसों के बावजूद उन्होंने ईडी के सामने पेश होने से बचने की कोशिश की। अंततः जनवरी 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी से ठीक पहले उन्होंने इस्तीफा देकर चंपाई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया। जमानत के बाद हेमंत फिर सत्ता में लौट आए, लेकिन वे भी ईडी से बच नहीं सके। अब ममता बनर्जी का मामला सामने है। हाल के महीनों में ईडी ने कोयला घोटाले से जुड़े मामले में आई-पैक से संबंधित ठिकानों पर छापेमारी की। आरोप है कि ममता खुद वहां पहुंचीं, ईडी की कार्रवाई में बाधा डालकर दस्तावेज व मोबाइल अपने साथ ले गईं। जांच एजेंसी ईडी ने गंभीर मामला बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। अदालत की शुरुआती टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि वह इस व्यवहार से नाराज है। पहले फरवरी 2019 में सीबीआई कोलकाता के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के आवास पर सीबीआई के अधिकारी पूछताछ के लिए गए तो उन्हें न सिर्फ रोकने की कोशिश हुई थी, बल्कि राज्य पुलिस ने सीबीआई टीम को गिरफ्तार भी कर लिया था। ममता तब भी वहां पहुंची थीं। रात भर सीबीआई की इस गतिवधि के खिलाफ वहां उन्होंने धरना दिया। वहीं पर कैबिनेट बैठक भी की थी। ममता ने वर्ष 2018 में सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति वापस ले ली थी।  इन घटनाओं ने यह आशंका बढ़ा दी है कि क्या ममता बनर्जी भी लालू, केजरीवाल और हेमंत सोरेन की तरह केंद्रीय एजेंसियों से टकराव के चलते कानूनी संकट में फंस सकती हैं। अंतिम फैसला अदालतों का होगा, लेकिन इतिहास गवाह है कि सीबीआई-ईडी से सीधी टक्कर अक्सर नेताओं को भारी पड़ती है।

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News Desk

धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग रैकेट का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, दुबई-मलेशिया तक फैला नेटवर्क

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मिर्जापुर: उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मिर्जापुर के धर्मांतरण और ब्लैकमेलिंग (Conversion and blackmailing) रैकेट के मास्टरमाइंड इमरान को पुलिस ने दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया है. वो विदेश भागने की फिराक में था. पुलिस ने उसके सिर पर 25 हजार का इनाम घोषित किया हुआ था. लगातार उसकी तलाश की जा रही थी.

इस केस की जांच में चौंकाने वाले अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन सामने आए हैं. आजतक के पास मौजूद एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का अहम किरदार इमरान 27 जनवरी 2024 को दुबई गया था. जांच एजेंसियों को उसके पासपोर्ट की कॉपी भी हाथ लगी है. साल 2024 में धर्मांतरण गतिविधियों के दौरान वह विदेश यात्रा पर था.

सूत्रों के अनुसार, दुबई में इमरान ने धर्मांतरण के संगठित नेटवर्क से जुड़े कई संदिग्ध लोगों से मुलाकात की थी. इन बैठकों में न सिर्फ नेटवर्क को विस्तार देने पर चर्चा हुई, बल्कि फंडिंग को लेकर भी बातचीत हुई. इमरान की जीवनशैली और विदेश यात्राओं पर हो रहा लाखों रुपए का खर्च जांच एजेंसियों के लिए बड़ा सवाल बन गया है. यह भी खुलासा हुआ है कि इमरान केवल दुबई तक सीमित नहीं था.

 

वो मलेशिया भी बार-बार जा रहा था. मलेशिया में बैठकर भी इस नेटवर्क के कुछ हिस्सों को ऑपरेट किया गया. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि विदेशों से आने वाला पैसा किन रास्तों से भारत पहुंच रहा था. इस पूरे मामले की जड़ मिर्जापुर में चल रहे एक जिम सिंडिकेट से जुड़ी हुई है. यहां पांच जिम की चेन के जरिए अवैध धर्म परिवर्तन और ब्लैकमेलिंग का रैकेट चलाया जा रहा था.

इस गैंग ने कम से कम 30 महिलाओं को निशाना बनाया, जिनमें से ज़्यादातर हिंदू महिलाएं थीं. ये महिलाएं फिजिकल ट्रेनिंग के लिए इन जिम से जुड़ी थीं. आरोपी पहले महिलाओं से दोस्ती करते थे, फिर उनके निजी फोटो और वीडियो हासिल करते थे. इसके बाद AI टूल्स की मदद से अश्लील कंटेंट तैयार कर पीड़ितों को ब्लैकमेल किया जाता था. उनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी जाती थी.

इन मांगों में यौन शोषण और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव शामिल था. इस मामले में GRP हेड कांस्टेबल इरशाद खान समेत नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. गिरफ्तार आरोपियों में जिम मालिक और ट्रेनर मोहम्मद शेख अली आलम, फैज़ल खान, ज़हीर, शादाब और फरीद अहमद शामिल हैं. मुख्य आरोपी फरीद अहमद को पुलिस पर फायरिंग के बाद एक एनकाउंटर में पकड़ा गया.

पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन से दर्जनों AI-जेनरेटेड अश्लील वीडियो, तस्वीरें और चैट बरामद की हैं. यह रैकेट 2021 से सक्रिय था और इसका मकसद सिर्फ ब्लैकमेलिंग नहीं, बल्कि तकनीक के जरिए महिलाओं का मानसिक और सामाजिक शोषण करना था. मिर्जापुर के डीएम पवन कुमार गंगवार ने जांच के दायरे में आए सभी पांच जिम को 27 फरवरी तक सील करने के आदेश दिए हैं.

बजट सत्र में सरकार को घेरने की रणनीति बनाएगी कांग्रेस, सोनिया गांधी करेंगी बैठक की अध्यक्षता

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नई दिल्ली: कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी 27 जनवरी को दोनों सदनों के सीनियर नेताओं के साथ एक स्ट्रेटेजी मीटिंग करेंगी. इसमें 28 जनवरी से शुरू हो रहे संसद बजट सत्र के दौरान एनडीए सरकार का मुकाबला करने का प्लान बनाया जाएगा. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करेंगी.

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक पुराने ग्रामीण रोजगार कानून मनरेगा में बदलाव के अलावा, जिसके खिलाफ कांग्रेस पूरे देश में कैंपेन चला रही है. खासकर दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में गवर्नर की भूमिका का राजनीतिकरण, कई राज्यों में वोटर लिस्ट के चल रहे एसआईआर में गड़बड़ियां, चीन और पाकिस्तान के संबंध में विदेश नीति की चुनौतियां और खासकर हाल के अमेरिकी टैरिफ के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियां, इन सभी मुद्दों को बजट सेशन के दौरान कांग्रेस उठा सकती है.

लोकसभा में कांग्रेस के व्हिप मोहम्मद जावेद ने ईटीवी भारत से कहा, ‘मनरेगा हमारे लिए एक अहम मुद्दा है, लेकिन कई और मामले भी हैं जिन पर हम बजट सेशन के दौरान चर्चा करना चाहेंगे. इसमें विदेश नीति, अर्थव्यवस्था की हालत, बेरोजगारी, लोगों के लिए साफ पीने का पानी और हवा, नागरिकों के वोट देने के अधिकार जैसे मुद्दे शामिल हैं.’

28 जनवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा दोनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी. वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार की उपलब्धियों पर एक स्पीच पढ़ेंगी, जिसे कैबिनेट ट्रेडिशन के हिसाब से तैयार करेगी. कांग्रेस के अंदर के लोगों ने कहा कि पार्टी कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु के गवर्नर से जुड़े हालिया विवादों से नाराज है. जिनके विधानसभाओं में बर्ताव पर राज्य सरकारों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. कांग्रेस कर्नाटक में राज करती है और तमिलनाडु में डीएमके की सरकार का समर्थन करती है. केरल में सीपीआई-एम की एलडीएफ सरकार है.

पार्टी के अंदर के लोगों के मुताबिक तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि ने विधानसभा में आम भाषण देने से मना कर दिया और कैबिनेट का तैयार किया हुआ भाषण पढ़े बिना ही चले गए. केरल के गवर्नर राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने कैबिनेट से मंजूरी पाए भाषण के कुछ खास हिस्सों को नहीं पढ़ा, और कर्नाटक के गवर्नर थावरचंद गहलोत ने असेंबली के स्पेशल जॉइंट सेशन में कैबिनेट के तैयार किए हुए भाषण की कुछ ही लाइनें पढ़ीं और फिर सदन से बाहर चले गए.

जावेद ने कहा, ‘हम कहते रहे हैं कि संवैधानिक ऑफिस और संस्थाओं को बचाने की जरूरत है. हम हाल ही में दक्षिणी राज्यों में गवर्नर के ऑफिस के राजनीतिकरण को लेकर चिंतित हैं. मुझे यकीन है कि विपक्ष इस मुद्दे को एक साथ उठाना चाहेगा.’ कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सैयद नसीर हुसैन ने बीजेपी पर गवर्नर के संवैधानिक पद का राजनीतिकरण करके संघवाद को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया और कहा कि ऐसे काम संविधान के नियमों के खिलाफ हैं.

हुसैन ने ईटीवी भारत को बताया, ‘संविधान के आर्टिकल 176 के तहत, गवर्नर का भाषण चुनी हुई सरकार का पॉलिसी स्टेटमेंट होता है, जिसे काउंसिल ऑफ मिनिस्टर्स तैयार करती है. आर्टिकल 163 के तहत, गवर्नर काउंसिल की मदद और सलाह पर काम करने के लिए मजबूर है. कैबिनेट का भाषण पूरा न देना अपनी मर्जी का इस्तेमाल नहीं है, बल्कि संवैधानिक ड्यूटी से साफ तौर पर भटकना है.

इस तरह का व्यवहार बीजेपी की जानी-पहचानी चाल को दिखाता है, जिसमें गैर-बीजेपी राज्य सरकारों पर लगातार दबाव बनाए रखने के लिए संवैधानिक ऑफिसों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे गवर्नर का ऑफिस एक न्यूट्रल संवैधानिक अथॉरिटी से राजनीतिक टकराव का एक टूल बन जाता है.’

कांग्रेस सरकार से विदेश नीति के मामलों, खासकर चीन के भारतीय इलाकों पर झूठे दावों और पाकिस्तान से बॉर्डर पार आतंकवाद पर सवाल पूछ रही है. वहीं, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कपड़ा निर्यात पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ के बुरे असर की बात कही, जिससे नौकरियां गईं, फैक्ट्रियां बंद हुई और ऑर्डर कम हुए.

पार्टी के अंदर के लोगों ने बताया कि बजट सेशन के दौरान कांग्रेस मध्य प्रदेश के इंदौर में गंदा पानी पीने से हुई कई मौतों, दिल्ली में एयर पॉल्यूशन के हाई लेवल और उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को निशाना बनाने जैसे मुद्दों को भी उठा सकती है. यह सबसे पुरानी पार्टी बजट सेशन के दौरान एनडीए का मुकाबला करने के लिए दूसरी एक जैसी सोच वाली पार्टियों के साथ कॉमन ग्राउंड बनाने की कोशिश करेगी और सत्र की शुरुआत में I.N.D.I.A. ब्लॉक के साथियों के साथ एक स्ट्रेटेजी सेशन करेगी. अंदर के लोगों ने बताया कि कांग्रेस चीफ और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी यह रोल निभाएंगे.

हुसैन ने कहा, ‘ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर हम सरकार से जवाब चाहते हैं. जिस तरह से एसआईआर के तहत राज्य की वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम हटाए जा रहे हैं, उससे इस काम पर शक पैदा हुआ है. यह मुद्दा पार्टी लाइन से ऊपर है और इसलिए जरूरी है. आर्थिक चुनौतियों पर चर्चा करने की जरूरत है क्योंकि 1 अमेरिकी डॉलर का एक्सचेंज रेट 91 रुपये हो गया है. हम आने वाले सेशन के लिए एक जॉइंट स्ट्रैटेजी के लिए अपने सहयोगियों से भी बात करेंगे.’

गणतंत्र दिवस पर सेना को मिला सबसे बड़ा सम्मान पैकेज, हजारों सैनिकों को मिली ऑनररी रैंक

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नई दिल्‍ली। सबसे पहले बात करें एक्टिव सर्विस पर ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। तो गजट नोटिफिकेशन (gazette notification) संख्या 01 (ई) के तहत एक्टिव ड्यूटी पर कार्यरत जूनियर कमीशंड ऑफिसर्स को यह सम्मान दिया गया है। इस श्रेणी में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, इंटेलिजेंस, मिलिट्री पुलिस, पायनियर कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी जैसी विभिन्न शाखाओं के 437 सीनियर जेसीओ को ऑनररी कैप्टन और 1804 अधिकारियों को ऑनररी लेफ्टिनेंट बनाया गया है। यह सम्मान उन सैनिकों को दिया गया है, जिनकी सेवा रिकॉर्ड पूरी तरह संतोषजनक रही है और जिन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई लंबित नहीं थी।

इसके बाद दूसरी बड़ी श्रेणी है रिटायरमेंट के समय ऑनररी कैप्टन/लेफ्टिनेंट की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 02 (ई) के अनुसार, इस कैटेगरी में 4014 जेसीओ को उनकी सेवा पूरी होने पर यह मानद रैंक दी गई है। इनमें सूबेदार मेजर, रिसालदार मेजर और सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जो लंबे समय तक सेना की अलग-अलग यूनिट्स और रेजीमेंट्स में सेवा दे चुके हैं। इस सूची में आर्मर्ड कॉर्प्स, आर्टिलरी, इंजीनियर्स, आर्मी एजुकेशनल कॉर्प्स, डिफेंस सिक्योरिटी कॉर्प्स और टेरिटोरियल आर्मी के सैनिक बड़ी संख्या में शामिल हैं।

 

तीसरी और सबसे बड़ी संख्या वाली कैटेगरी है ऑनररी नायब रिसालदार/ऑनररी सूबेदार की। गजट नोटिफिकेशन संख्या 03 (ई) के तहत, 805 एनसीओ को यह सम्मान दिया गया है। इनमें हवलदार, दफेदार और नायब सूबेदार स्तर के सैनिक शामिल हैं, जिन्होंने कई वर्षों तक फील्ड एरिया, सीमावर्ती इलाकों और ऑपरेशनल यूनिट्स में सेवा दी है। यह कैटेगरी संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी रही, जो यह दिखाती है कि सेना अपने निचले और मध्य स्तर के नेतृत्व को भी समान सम्मान देती है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो गणतंत्र दिवस 2026 पर हजारों सैनिकों को विभिन्न स्तरों पर ऑनररी रैंक देकर उनकी लंबी, निष्ठावान और अनुकरणीय सेवा को औपचारिक सम्मान दिया गया है।

क्या होती है ऑनररी रैंक
ऑनररी रैंक भारतीय सेना में दिया जाने वाला एक विशेष मानद सम्मान है। यह उन सैनिकों को दिया जाता है, जिन्होंने लंबे समय तक ईमानदारी, अनुशासन और समर्पण के साथ देश की सेवा की हो। यह रैंक वास्तविक कमांड या ऑपरेशनल पावर नहीं देती, लेकिन सैनिक की पूरी सेवा को आधिकारिक मान्यता देती है।

ऑनररी रैंक दो तरह से दी जाती है। पहली, एक्टिव सर्विस के दौरान, जैसे ऑनररी कैप्टन या ऑनररी लेफ्टिनेंट। दूसरी, रिटायरमेंट के समय, जब सैनिक अपनी यूनिट से विदा लेता है। आमतौर पर यह सम्मान गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय अवसरों पर घोषित किया जाता है।

क्या हैं ऑनररी रैंक के फायदे?
ऑनररी रैंक का सबसे बड़ा व्यावहारिक फायदा पेंशन से जुड़ा होता है। उदाहरण के तौर पर, यदि कोई सूबेदार ऑनररी लेफ्टिनेंट बनता है, तो उसकी पेंशन उच्च रैंक के अनुरूप तय की जाती है। मौजूदा 7वें पे कमीशन और वन रैंक वन पेंशन के तहत यह बढ़ोतरी लगभग 10 से 20 प्रतिशत तक हो सकती है, जो व्यक्ति की सेवा अवधि और अंतिम रैंक पर निर्भर करती है।

इसके अलावा, सामाजिक और प्रोटोकॉल सम्मान भी एक बड़ा लाभ है। रिटायरमेंट के बाद सैनिक अपने नाम के साथ ऑनररी रैंक का इस्तेमाल कर सकता है, जैसे “ऑनररी कैप्टन” या “ऑनररी सूबेदार”। सैन्य कार्यक्रमों और आधिकारिक आयोजनों में उन्हें उच्च स्थान और सम्मान मिलता है, जिससे परिवार और समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढ़ती है।

मेडिकल सुविधाओं और कैंटीन जैसी सुविधाओं की बात करें तो ईसीएचएस मेडिकल स्कीम, सीएसडी कैंटीन और ट्रैवल कंसेशन पहले की तरह जारी रहते हैं। हालांकि रैंक बढ़ने से कुछ मामलों में प्रोटोकॉल और सुविधा स्तर बेहतर हो जाता है।

पीएम और सीएम को पद से हटाने वाला बिल राजनीतिक दुरुपयोग का हो सकता है शिकार

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नई दिल्ली। एक नए भ्रष्टाचार विरोधी बिल पर कानूनी थिंक टैंक और दो लॉ विश्वविद्यालयों ने चिंता जताई है। उन्होंने संसदीय समिति को बताया है कि पीएम, सीएम या मंत्री को गंभीर आपराधिक आरोपों में 30 दिन की गिरफ्तारी के बाद पद से हटाने का प्रावधान राजनीतिक दुरुपयोग का शिकार हो सकता है। विधि सेंटर फॉर लीगल पॉलिसी, नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी ओडिशा और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ ज्यूरिडिकल साइंसेज, कोलकाता के प्रतिनिधियों ने संयुक्त संसदीय समिति के सामने यह बात रखी। उन्होंने बिल में कई खामियां गिनाईं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उनका कहना है कि यह बिल जनता की इच्छा के विरुद्ध भी जा सकता है। इनमें से दो संस्थाओं ने तो यह भी सुझाव दिया कि किसी को पद से हटाने के लिए आरोप तय होने को आधार बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से इस प्रक्रिया में न्यायिक जांच का एक तत्व जुड़ जाएगा। विधि सेंटर ने यह भी चेतावनी दी कि बिल के कुछ प्रावधान अदालतों में चुनौती दिए जा सकते हैं। इन संस्थाओं का मानना है कि बिल का इरादा अच्छा है और यह संवैधानिक सिद्धांतों के अनुरूप है। हालांकि, दो संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने बताया कि स्थापित लोकतंत्रों में मंत्रियों को पद से हटाने के लिए आम तौर पर न्यायिक सजा का प्रावधान होता है। प्रस्तावित कानून इससे अलग है और इसमें पद से हटाने की सीमा बहुत कम रखी गई है। यह भी बताया कि मौजूदा आपराधिक कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में पुलिस आरोपी को 90 दिनों तक हिरासत में रख सकती है, जबकि बिल में 30 दिनों की यह सीमा मौजूदा प्रक्रिया से मेल नहीं खाती।
एनयूजेएस का कहना है कि भले ही इस कानून का मकसद राजनीति में अपराध को रोकना हो, लेकिन इसमें केंद्र और राज्य की सरकारों को गंभीर रूप से अस्थिर करने की उच्च संभावना है। इस विश्वविद्यालय का मानना है कि इससे केंद्र और राज्यों में नीति-निर्माण का काम रुक सकता है। एनएलयू ने कहा कि एक जांच संभावित सत्ता परिवर्तन अभियान बन सकती है। एनएलयू ने यह भी जोड़ा कि यह बिल बदले की कार्रवाई को बढ़ावा देता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर केंद्रीय एजेंसियां किसी मुख्यमंत्री या राज्य के मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो राज्य की पुलिस किसी केंद्रीय मंत्री के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है, जो दिल्ली में हों।
विधि सेंटर ने कहा कि यह ढांचा राजनीतिक दुरुपयोग की गुंजाइश पैदा करता है। गिरफ्तारियां समय देखकर या चुनिंदा तरीके से की जा सकती हैं। एनएलयू का कहना है कि विरोधी दल इन प्रावधानों का इस्तेमाल वैध सरकारों को अस्थिर करने के लिए कर सकते हैं। पिछले कुछ दशकों का रुझान बताता है कि इसके दुरुपयोग की संभावना है और इसका देश के लोकतंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सरकार इस बिल का समर्थन कर रही है। सरकार ने ऐसे उदाहरण दिए हैं जहां मंत्री और यहां तक कि एक सीएम भी भ्रष्टाचार के आरोपों में लंबे समय तक जेल में रहने के बावजूद पद पर बने रहे। हालांकि सरकार ने इस बिल को आगे की चर्चा के लिए संसदीय पैनल को भेजने पर सहमति जताई है। इस पैनल की अध्यक्षता बीजेपी सांसद अपराजिता सारंगी कर रही हैं। ज्यादातर विपक्षी दलों ने इस पैनल का हिस्सा बनने से इनकार कर दिया है।

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News Desk

इंडिगो पर सरकार का बड़ा एक्शन, 700 से ज्यादा उड़ानों पर चलीइंडिगो पर सरकार का बड़ा एक्शन, 700 से ज्यादा उड़ानों पर चली कैंची! कैंची!

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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो ने घरेलू हवाई अड्डों पर अपने 700 से ज्यादा ‘स्लॉट’ छोड़ दिए हैं. यह कदमDGCA की उस सख्त कार्रवाई के बाद उठाया गया है, जिसमें एयरलाइन की सर्दियों की उड़ानों में कटौती का आदेश दिया गया था. दरअसल, यह पूरा मामला पिछले साल दिसंबर की शुरुआत में हुई भारी अव्यवस्था से जुड़ा है. दिसंबर में कोहरे और अन्य कारणों से उड़ानों में भारी देरी हुई थी. उस दौरान यात्रियों को घंटों एयरपोर्ट पर इंतजार करना पड़ा था और हजारों उड़ानें रद्द हुई थीं. आंकड़ों पर नजर डालें तो 3 से 5 दिसंबर के बीच इंडिगो की करीब 2,507 उड़ानें रद्द हुईं और 1,852 उड़ानें देरी से चली थीं. इसका असर देश भर के तीन लाख से ज्यादा यात्रियों पर पड़ा था.

इसी अव्यवस्था को देखते हुए डीजीसीए ने कड़ा रुख अपनाया और इंडिगो के विंटर शेड्यूल (शीतकालीन कार्यक्रम) में 10 प्रतिशत की कटौती कर दी. इसका सीधा मतलब था कि एयरलाइन को अपनी कुछ सेवाएं बंद करनी पड़ेंगी. इसी आदेश का पालन करते हुए इंडिगो ने अब मंत्रालय को 717 स्लॉट की लिस्ट सौंप दी है, जिन्हें उसने खाली कर दिया है. ‘स्लॉट’ वह तय समय होता है जो किसी एयरपोर्ट पर विमान के उतरने और उड़ान भरने के लिए दिया जाता है.

 

मेट्रो शहरों पर सबसे ज्यादा असर
इंडिगो द्वारा खाली किए गए स्लॉट्स का सबसे बड़ा हिस्सा देश के प्रमुख महानगरों से जुड़ा है. सूत्रों के मुताबिक, कुल 717 में से 364 स्लॉट दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे छह बड़े मेट्रो एयरपोर्ट्स के हैं. इसमें भी सबसे ज्यादा स्लॉट हैदराबाद और बेंगलुरु के बताए जा रहे हैं. ये स्लॉट जनवरी से मार्च तक की अवधि के लिए खाली किए गए हैं.

इस स्थिति को संभालते हुए नागर विमानन मंत्रालय ने तुरंत हरकत में आते हुए अन्य एयरलाइनों से आवेदन मांगे हैं. सरकार चाहती है कि इंडिगो द्वारा छोड़े गए इन स्लॉट्स का इस्तेमाल दूसरी कंपनियां करें ताकि यात्रियों को परेशानी न हो. हालांकि, मंत्रालय ने स्पष्ट हिदायत दी है कि कोई भी एयरलाइन इन नए स्लॉट्स को पाने के लिए अपने मौजूदा रूट को बंद नहीं करेगी.

दूसरी एयरलाइंस की राह भी नहीं है आसान
भले ही सरकार ने दूसरी एयरलाइंस को न्योता दिया है, लेकिन विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियां शायद इसमें बहुत ज्यादा दिलचस्पी न दिखाएं. इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं. पहली यह कि नेटवर्क की प्लानिंग करना और नए रूट शुरू करना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसे इतनी जल्दी अंजाम देना मुश्किल है. किसी नए रूट को शुरू करके उसे महज एक-दो महीने बाद बंद कर देना व्यावहारिक नहीं होता.

दूसरी बड़ी वजह यह है कि खाली हुए अधिकतर स्लॉट ‘रेड-आई’ फ्लाइट्स (Red-Eye Flights) के हैं. ये वो उड़ानें होती हैं जो देर रात या तड़के संचालित होती हैं. आमतौर पर यात्री इन समयों पर सफर करना कम पसंद करते हैं, इसलिए एयरलाइंस के लिए ये स्लॉट मुनाफे के लिहाज से बहुत आकर्षक नहीं माने जाते.

डीजीसीए हुआ सख्त
डीजीसीए इस बार एयरलाइंस की मनमानी को लेकर काफी सख्त मूड में नजर आ रहा है. स्लॉट कटौती के अलावा, नियामक ने 17 जनवरी को परिचालन में खामियों के चलते इंडिगो पर 22.20 करोड़ रुपये का भारी-भरकम जुर्माना भी लगाया था. साथ ही एयरलाइन के सीईओ पीटर एलबर्स को चेतावनी भी जारी की गई थी. मामला यहीं खत्म नहीं हुआ, बल्कि डीजीसीए ने इंडिगो को 50 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करने का भी निर्देश दिया है.

होमवर्क करके सदन में आए सांसद… बजट सत्र पर BJP का फोकस! विपक्ष को साधने की तैयारी

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नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) नए बदलाव के साथ ही पार्टी को चुनावी और संसदीय मोड में पूरी तरह शिफ्ट करने का संकेत दे रही है. जनवरी के अंत में आगामी बजट सत्र जो 28 जनवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा, इसे लेकर पार्टी विशेष तैयारियां कर रही है.

पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा में नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने 20-21 जनवरी को भाजपा मुख्यालय में वरिष्ठ पदाधिकारियों, प्रदेश प्रभारियों, राज्य अध्यक्षों और अन्य नेताओं के साथ लंबी बैठकें कीं, जो लगभग 8 घंटे तक चली.

इन बैठकों के दौरान ही पार्टी के प्रवक्ताओं की भी बैठक हुई और इन बैठकों का फोकस मुख्य रूप से आगामी विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु आदि) पर था, लेकिन संसद सत्र की तैयारियों पर भी चर्चा हुई. इसमें विपक्ष की तरफ से सरकार पर आरोप प्रत्यारोप लगाए जाने वाले संभावित विषयों पर भी पूरी तैयारी के साथ मीडिया में जाने की नेताओं को सलाह दी गई.

बैठक में सांसदों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संसद में लाइव डिबेट, जीरो ऑवर, प्रश्नकाल, मीडिया बाइट्स या किसी भी सार्वजनिक इंटरैक्शन से पहले पूर्ण होमवर्क जो तथ्य-आधारित तैयारी हो जरूर करके जाएं. ना सिर्फ प्रवक्ताओं को बल्कि हर सांसद को विशिष्ट ब्रिफिंग मटेरियल प्रदान किया जा रहा है, जिसमें सरकार की प्रमुख उपलब्धियां जैसे आर्थिक सुधार, योजनाओं का प्रभाव, बजट से जुड़े पॉइंट्स आदि, विपक्ष के संभावित हमलों के काउंटर पॉइंट्स, आंकड़े, और पार्टी लाइन शामिल हैं.

सूत्रों के मुताबिक नए अध्यक्ष नितिन नबीन ने जोर दिया कि कोई भी बयान या जवाब अनुशासित, तथ्यपूर्ण और आक्रामक रक्षा वाला होना चाहिए, ताकि विपक्ष के घेराव में सरकार मजबूत दिखे. विपक्ष (खासकर INDIA गठबंधन) इस सत्र में महंगाई, बेरोजगारी, किसान मुद्दे, आर्थिक असमानता, आरक्षण, मणिपुर/अन्य हिंसा जैसे कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की योजना बना रहा है.

पार्टी सूत्रों की माने तो भाजपा ने सांसदों को इन सभी मुद्दों पर डिटेल्ड रिस्पॉन्स तैयार करने को कहा है, जिसमें सरकार की उपलब्धियां जैसे डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत,और हालिया योजनाओं का डेटा प्रमुखता से पेश किया जाए.

संसद सत्र से पहले 27 जनवरी 2026 को सर्वदलीय बैठक हो रही है, जहां सत्र की रूपरेखा पर चर्चा होगी. साथ ही भाजपा के नेताओं को स्पष्ट निर्देश हैं कि यहां भी वो मजबूत तैयारी के साथ जाएं. सूत्री की माने तो पार्टी का लक्ष्य है कि सत्र के दौरान सरकार की छवि मजबूत रहे और कोई कमजोरी न दिखे, खासकर मीडिया कवरेज में.

हालांकि, इस मुद्दे पर पर पार्टी के नेताओं को बोलने से मना किया गया है. नाम न लेने की शर्त पर एक राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी में बैठक होती रहती है और जहां तक बात बजट सेशन की है विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है. पश्चिम बंगाल और कई राज्यों के चुनाव हैं.

उन्होंने कहा कि, खासतौर पर कांग्रेस और टीएमसी एसआईआर से लेकर तमाम ऐसे मुद्दे पर हंगामा कर रही है, ताकि वो चुनावी मैदान में जनता को दिखा सके कि वो उनके लिए काम कर रही है. मगर अब जनता समझ गई है और इन पार्टियों की साजिश नाकाम होने वाली है.