रामनगर के कोसी ‘लट्ठा’ को 100 साल पूरे, 1926 से आज तक खड़ी है ये ब्रिटिश कालीन सुरक्षा दीवार

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रामनगर (नैनीताल): उत्तराखंड के रामनगर में स्थित कोसी तटबंध ने अपने निर्माण के 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं. वर्ष 1926 में ब्रिटिश शासन के दौरान निर्मित यह विशाल तटबंध आज भी कोसी नदी की बाढ़ से रामनगर और आसपास के क्षेत्रों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है. एक सदी का यह सफर केवल ईंट-पत्थर की कहानी नहीं, बल्कि उस दूरदर्शी सोच का प्रतीक है, जिसने रामनगर की बसावट, खेती, सिंचाई और सामाजिक जीवन को नई दिशा दी.

माना जाता है कि रामनगर की स्थापना कुमाऊं के तत्कालीन कमिश्नर सर हेनरी रैमजे द्वारा की गई थी. पानी, घने जंगल और ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के कारण यह क्षेत्र रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था. रामनगर को कुमाऊं और गढ़वाल का प्रवेश द्वार माना जाता है. यही नहीं, यह विश्व प्रसिद्ध कॉर्बेट नेशनल पार्क का मुख्य प्रवेश बिंदु भी है, जो दुनिया में बाघों की सर्वाधिक घनत्व वाली आबादी में से एक के लिए जाना जाता है.

 

बाढ़ की त्रासदी से जन्मी योजना: 20वीं सदी के शुरुआती वर्षों में कोसी नदी रामनगर क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. जानकारों के अनुसार, वर्ष 1910 और 1913 में यहां भीषण बारिश हुई, जिससे कोसी नदी उफान पर आ गई. हजारों एकड़ कृषि भूमि बह गई. गांव-बस्तियां उजड़ गईं और भारी तबाही मची. उस समय की इन विनाशकारी बाढ़ों ने ब्रिटिश सरकार को एक स्थायी समाधान पर सोचने के लिए मजबूर कर दिया.

 

इसी के परिणामस्वरूप वर्ष 1926 में कोसी नदी के किनारे एक मजबूत तटबंध का निर्माण किया गया, जिसे स्थानीय लोग ‘लट्ठा’ या ‘बंदा’ के नाम से जानते हैं. यह तटबंध पत्थर, चूना और सुर्खी से तैयार किया गया था, जिसकी बुनियाद इतनी मजबूत रखी गई कि यह एक सदी बाद भी अपनी जगह मजबूती से खड़ा है.

 

क्या है कोसी ‘लट्ठा’: कोसी ‘लट्ठा’, एक विशाल सुरक्षा दीवार है, जिसका उद्देश्य कोसी नदी की बाढ़ को नियंत्रित करना और रामनगर शहर, खेत-खलिहानों और बस्तियों को सुरक्षित रखना था. दरअसल, बरसात के मौसम में कोसी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ जाता है और उसके साथ भारी मलबा और तेज बहाव आता है. लट्ठा इस उफनते पानी को नियंत्रित कर शहर की ओर बढ़ने से रोकता है.

 

स्थानीय जानकार विनोद पपने बताते हैं कि जब भी बाढ़ आती थी, लोग इस लट्ठे पर चढ़कर कोसी नदी का विकराल रूप देखने आते थे. हजारों की संख्या में रामनगर शहर और आसपास के लोग यहां इकट्ठा होते थे. कोसी के पानी की गड़गड़ाहट सुनकर लोग समझ जाते थे कि नदी उफान पर है. यह लट्ठा उस समय न सिर्फ सुरक्षा का साधन था, बल्कि लोगों के लिए एक तरह का देखने-समझने का केंद्र भी बन गया था.

 

कोसी ‘लट्ठा’ को उसकी असाधारण मजबूती के कारण ‘चाइना वॉल’ के नाम से भी जाना जाता है. लगभग पौने एक किलोमीटर लंबा यह तटबंध उस समय की इंजीनियरिंग क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण है. इसकी दीवारें बड़े-बड़े पत्थरों से बनाई गईं, जिन्हें चूना और सुर्खी से जोड़ा गया. यही वजह है कि 100 साल बीत जाने के बाद भी यह संरचना आज तक खड़ी है. कोसी ‘लट्ठा’ के साथ-साथ तीन महत्वपूर्ण नहरों का निर्माण भी किया गया.
– विनोद पपने, स्थानीय जानकार –

विनोद पपने कहते हैं कि, रामनगर की बेलगढ़ नहर, रामनगर नहर और चिलकिया नहर आज भी संचालित हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का अहम साधन बनी हुई हैं. इससे साफ है कि यह परियोजना केवल बाढ़ नियंत्रण तक सीमित नहीं थी, बल्कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने की भी एक दूरदर्शी योजना थी.

 

कोसी ‘लट्ठा’ केवल एक तटबंध नहीं, बल्कि रामनगर की ऐतिहासिक धरोहर है. इसे औपचारिक रूप से हेरिटेज घोषित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां इसके इतिहास और महत्व को जान सके. रामनगर एक ऐतिहासिक शहर रहा है और यहां कई हेरिटेज इमारतें मौजूद हैं. अंग्रेजों द्वारा बनाया गया कोसी लट्ठा भी उसी विरासत का हिस्सा है.
– संजय छिम्वाल, स्थानीय जानकार –

संजय बताते हैं कि, उस समय रामनगर की बसावट इसी तटबंध के आसपास विकसित हुई. कुमाऊं के कमिश्नर रहे सर हेनरी रैमजे के नाम पर ही रामनगर को कभी-कभी ‘रैमजे सिटी’ भी कहा जाता था, जो बाद में रामनगर के नाम से प्रसिद्ध हुआ.

बाढ़ से सुरक्षा की दृष्टि से यह दीवार आज भी बेहद महत्वपूर्ण है. कोई भी मानव-निर्मित संरचना अगर 100 वर्ष पूरे कर लेती है तो वह हेरिटेज की श्रेणी में आती है. कोसी ‘लट्ठा’ रामनगर के लिए एक मिसाल है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बढ़ते भूमि कटाव के कारण इसके कुछ हिस्से कमजोर हुए हैं.
– संजय छिम्वाल, स्थानीय जानकार –

आज भी रामनगर की जीवनरेखा: जानकार नरेंद्र शर्मा का कहना है कि रामनगर शहर की स्थापना हेनरी रैमजे द्वारा की गई थी और यह कुमाऊं-गढ़वाल का प्रवेश द्वार रहा है. कोसी ‘लट्ठा’ वर्ष 1926 में बनाया गया और आज इसके 100 वर्ष पूरे हो चुके हैं. एक समय इस लट्ठे के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई का व्यापक उपयोग किया जाता था.

गुणवत्ता और मजबूत निर्माण के कारण यह लट्ठा आज भी खड़ा है और मौजूदा परिस्थितियों में भी रामनगर को बाढ़ से बचाने में जीवनरेखा की तरह काम कर रहा है. यह साफ दर्शाता है कि इसके निर्माण के पीछे कितनी बड़ी और दूरदर्शी सोच रही होगी.
– नरेंद्र शर्मा, स्थानीय जानकार –

वहीं इस ऐतिहासिक सुरक्षा दीवार की सुरक्षा को लेकर किए गए सवाल पर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता राजीव खनुलिया कहते हैं कि, कोसी लट्ठे का रखरखाव सिंचाई विभाग द्वारा लगातार किया जाता है. जहां कहीं भी क्षति होती है, वहां मरम्मत और दुरुस्ती का कार्य कराया जाता है. उन्होंने मांग की है कि इस धरोहर को हेरिटेज घोषित करना चाहिए, क्योंकि इस तरह के स्ट्रक्चर काफी दुर्लभ हो गए हैं, जो आज के समय में मिलते नहीं हैं. विभाग की कोशिश है कि इस ऐतिहासिक तटबंध को सुरक्षित रखा जाए, ताकि यह आगे भी रामनगर को बाढ़ से बचाता रहे.

विमान हादसे में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का निधन

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मुंबई।  महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार नहीं रहे. महाराष्ट्र के बारामती में विमान हादसे में मौत हुई. हादसे में अजित पवार समेत विमान सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई.अजित पवार चुनाव प्रचार के लिए मुंबई से बारामती जा रहे थे. लो विजिबिलिटी की वजह से लैंडिंग के वक्त प्लेन क्रैश हुआ. बारामती में सुबह 8:45 बजे हादसा हुआ. अजित पवार का परिवार दिल्ली से बारामती के लिए रवाना हुआ. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार के असमय निधन के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ. अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में, वे महाराष्ट्र के विकास और समृद्धि के लिए समर्पित रहे. वे लोगों के प्रति अपनी करुणा और सार्वजनिक सेवा के प्रति अपने अटूट समर्पण के लिए जाने जाते थे. मैं उनके परिवार, शुभचिंतकों और प्रशंसकों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना व्यक्त करता हूं. आपको बता दें कि महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसा हुआ. महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार की विमान हादसे में मौत हो गई. लैंडिंग के समय अजित पवार का विमान क्रैश हुआ था. DGCA के मुताबिक अजित पवार सहित विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौत हो गई. इससे पहले महाराष्ट्र के बारामती में बड़ा विमान हादसे की खबर सामने आई थी. लैंडिंग के वक्त डिप्टी सीएम अजित पवार का विमान क्रैश हुआ था. डिप्टी सीएम अजित पवार क्रैश हुए विमान में सवार थे.अजित पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे.  हादसे में अजित पवार गंभीर रूप से घायल होने की सूचना मिली थी.घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया. तकनीकी खराबी के चलते विमान हादसा होने की सूचना मिली.आपको बता दें कि मुंबई से बारामती जा रहा चार्टर प्लेन आज सुबह 8.45 बजे महाराष्ट्र के बारामती में क्रैश लैंड हो गया. उपमुख्यमंत्री अजीत पवार प्लेन में सवार थे। 

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बहाना बना लो और वर्ल्ड कप में मत ही आओ, ये लड़के बहुत पीटेंगे; दिग्गज ने पाकिस्तान को चेताया

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पाकिस्तान टी20 विश्व कप में खेलेगा या नहीं, इस पर सस्पेंस बना हुआ है। अगर विश्व कप खेलता भी है तो भारत के खिलाफ 15 फरवरी के मैच में उतरता है या नहीं, इस पर सवाल बने हुए हैं। जवाब सोमवार को मिलेगा जब पाकिस्तान सरकार के निर्देशों पर पीसीबी वर्ल्ड कप को लेकर अपने फैसले का ऐलान करेगा। इस बीच 1983 की वर्ल्ड कप विजेता टीम के सदस्य रहे क्रिस श्रीकांत ने भारतीय टीम की जरबरदस्त फॉर्म का जिक्र करते हुए पाकिस्तान के मजे लिए हैं कि वे वर्ल्ड कप में न आएं तभी बेहतर है क्योंकि वैसे भी टीम इंडिया से वो रौंदी जाएगी।पूर्व राष्ट्रीय मुख्य चयनकर्ता रहे श्रीकांत ने अपने यूट्यूब चैनल पर न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में भारतीय टीम के जबरदस्त प्रदर्शन की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा, ‘पिछले (दूसरे) मैच में भारत ने 15 ओवर में 208 रन बना लिए। इस मैच (तीसरे) में उन्होंने 10 ओवर में 150 बना लिए। इसे देखते हुए कई टीमें तो कह रही होंगी- नहीं, हम नहीं आ रहे हैं। आप कप रख सकते हो।’

पाकिस्तान का टी20 वर्ल्ड कप या भारत से मैच का बहिष्कार करना क्यों है मुश्किल?

बहिष्कार राग पर पाकिस्तान के मजे लेते हुए श्रीकांत ने कहा, ‘हे पाकिस्तान, तम आओ। तुम्हारे मोहसिन नकवी इस बारे में बात कर रहे हैं- मत आओ। आप पीटे जाओगे। कोलंबो में लगा सिक्स मद्रास में गिरेगा। सावधान। सबसे अच्छा विकल्प दूर रहना ही है। बहाना बना लो और मत आओ। ये लड़े बहुत बुरी तरह पीटेंगे। ये दुनिया की हर क्रिकेट टीम को एक खतरे का सिग्नल भेजेगा। टी20 क्रिकेट में इस तरह की हिटिंग! मैंने इस तरह का कभी भी कुछ नहीं देखा है।’बांग्लादेश का टी20 वर्ल्ड कप से पत्ता कटने के बाद पाकिस्तान इस टूर्नामेंट के बहिष्कार का राग गा रहा है। सोमवार को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष मोहसिन नकवी ने पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ से मुलाकात की। उसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि टी20 विश्व कप में हिस्सा लेने को लेकर पीसीबी अपना आखिरी फैसला अगले सोमवार को लेगा। इस बीच पाकिस्तानी मीडिया में इस तरह की अटकलें भी लग रही हैं कि पाकिस्तान भले टी20 विश्व कप का बहिष्कार न करे लेकिन वह 15 फरवरी को भारत के साथ होने वाले ग्रुप मैच का बहिष्कार कर सकता है।

टी20 वर्ल्ड कप: भारत से मैच का बायकॉट किया PAK तो 1062 करोड़ का मुकदमा झेलेगा!

टी20 वर्ल्ड कप 7 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इसकी संयुक्त मेजबानी भारत और श्रीलंका कर रहे हैं। टूर्नामेंट में कुल 20 टीमें हिस्सा ले रही हैं जिन्हें 5-5 के कुल 4 ग्रुप में बांटा गया है। भारत ग्रुप ए में है जिसमें उसके अलावा पाकिस्तान, अमेरिका, नीदरलैंड और नामीबिया हैं। बांग्लादेश को ग्रुप सी में रखा गया था लेकिन उसके भारत में मैच खेलने से इनकार के बाद उसकी जगह स्कॉटलैंड को जगह मिली है। 8 मार्च को वर्ल्ड कप फाइनल खेला जाएगा।

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चुनाव अधिकारियों के ट्रांसफर को लेकर ECI ने पश्चिम बंगाल सरकार को लिखा पत्र

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नई दिल्ली: भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने मंगलवार को मतदाता सूची पर्यवेक्षकों के स्थानांतरण के संबंध में पश्चिम बंगाल सरकार को पत्र लिखा, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया में शामिल किसी भी अधिकारी का पूर्व अनुमोदन के बिना स्थानांतरण नहीं किया जाएगा.

पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को संबोधित एक पत्र में चुनाव आयोग के सचिव एसके मिश्रा ने लिखा, ‘मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि आयोग ने 27 अक्टूबर, 2025 के अपने पत्र के माध्यम से पश्चिम बंगाल राज्य में एसआईआर की घोषणा की है.

पत्र के पैराग्राफ 4 में अन्य बातों के साथ-साथ यह भी प्रावधान है कि एसआईआर अवधि के दौरान, मुख्य सचिवों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि एसआईआर प्रक्रिया में शामिल किसी भी अधिकारी का आयोग से पूर्व अनुमोदन के बिना तबादला न किया जाए.’

पत्र में लिखा, ‘इसके अलावा, मुझे यह भी बताना है कि आयोग ने 28 नवंबर, 2025 के अपने पत्र के जरिए 5 डिविजनल कमिश्नरों के साथ 12 इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर नियुक्त किए हैं. ये अधिकारी एसआईआर के मकसद से चुनाव आयोग में डीम्ड डेप्युटेशन पर हैं.’

आयोग के संज्ञान में आया है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने क्रमशः 1 दिसंबर, 2025, 20 जनवरी और 21 जनवरी की अधिसूचनाओं के माध्यम से अश्विनी कुमार यादव आईएएस, डब्ल्यूबी: 2001 (उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण दिनाजपुर के लिए मतदाता सूची पर्यवेक्षक), रणधीर कुमार, आईएएस, डब्ल्यूबी: 2006 (उत्तर 24 परगना और कोलकाता उत्तर के लिए मतदाता सूची पर्यवेक्षक) और स्मिता पांडे, आईएएस, डब्ल्यूबी: 2005 (पश्चिम बर्धमान, पूर्बा बर्धमान और बीरभूम के लिए मतदाता सूची पर्यवेक्षक) के विभागीय स्थानांतरण/ पोस्टिंग का आदेश दिया है.

हालांकि, इन अधिकारियों के ट्रांसफर का आदेश चुनाव आयोग की पहले से मंजूरी के बिना दिया गया है, जो आयोग के 27 अक्टूबर, 2025 के निर्देशों का उल्लंघन है, जैसा कि ऊपर बताया गया है. इसमें आगे कहा गया, ‘ऊपर बताई गई बातों को देखते हुए, मुझे यह कहने का निर्देश दिया गया है कि ट्रांसफर ऑर्डर तुरंत कैंसल कर दिए जाएं.

साथ ही आपसे अनुरोध है कि भविष्य में ऐसे ऑर्डर जारी करने से पहले कमीशन से पहले मंजूरी लें. इस बारे में एक कंप्लायंस 28 जनवरी को दोपहर 3 बजे तक कमीशन को भेजा जा सकता है.’ यह बताना जरूरी है कि वोटर लिस्ट सुधार करने के मकसद से एसआईआर अभी पश्चिम बंगाल के साथ-साथ आठ दूसरे राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहा है.

2 घंटे के शो के लिए करोड़ों चार्ज, जानें सिंगर अरिजीत सिंह की कितनी है नेटवर्थ

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Arijit Singh Net Worth: बॉलीवुड के मशहूर प्लेबैक सिंगर अरिजीत सिंह किसी पहचान के मोहताज नहीं है. उन्होंने दर्जनों फिल्मों से सैकड़ों हिट गाने दिए हैं. वहीं 27 जनवरी को उन्होंने फिल्मों में प्लेबैक सिंगिंग से रिटायरमेंट ले लिया.

अरिजीत सिंह बेहद साधारण तरीके से अपनी जिंदगी जीते हैं. बिना किसी ब्रांड, बिना किसी लग्जरी गाड़ी के वो हमेशा बड़ी ही सादगी से रहते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपनी आवाज से करोड़ों दिलों को सुकून देने वाले अरिजीत की कमाई और नेट वर्थ कितनी है? जानकारों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक उनकी संपत्ति ने नए रिकॉर्ड बना लिए हैं.

2 घंटे के शो के लिए करोड़ों चार्ज करते हैं अरिजीत
अरिजीत सिंह का सोर्स ऑफ इनकम केवल गाने ही नहीं हैं बल्कि उनका एक स्टूडियो भी है ओरियन म्यूजिक के नाम से. सिंगर यूट्यूब, स्पॉटिफाई, गाना जैसे कई प्लेटफॉर्म्स से करोड़ों कमाते हैं.
अरिजीत देश और विदेशों में कई लाइव कॉन्टर्ट करते हैं, जिसके लिए वो महज दो घंटे के 14 करोड़ तक चार्ज करते हैं.
इसके अलावा कुछ छोटे या प्राइवेट शोज के वो 2 करोड़ रुपये चार्ज करते हैं.
बॉलीवुड हो या टॉलीवुड, सिंगर एक प्लेबैक गाने के लिए 10 से 20 लाख रुपये लेते हैं. हालांकि राइट्स और रॉयल्टी मिलाकर ये फीस और भी बढ़ जाती है.
अरिजीत सिंह की नेटवर्थ
मुर्शिदाबाद के एक छोटे से गांव के रहने वाले अरिजीत सिंह ने हर भाषा के मिलाकर करीब 400 गाने गाए हैं और उन्होंने कई लाइव शोज भी किए हैं. ऐसे में उनकी नेटवर्थ करोड़ों में होना तो लाजमी है. लाइव मिंट की रिपोर्ट्स की मानें तो अरिजीत सिंह की नेट वर्थ करीब 414 करोड़ रुपये है. जिसमें उनका 8 करोड़ का नवी मुंबई में घर और 3.4 करोड़ रुपये की लग्जरी कारों का कलेक्शन भी शामिल है. उनके पास हाई-एंड ब्रांड्स जैसे रेंज रोवर और मर्सिडीज की गड़ियां हैं.

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बारामती में विमान हादसा: अजित पवार का निधन

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Maharashtra Plane Crash Baramati Live Updates: NCP नेता और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार को ले जा रहा एक विमान के साथ बड़ा हादसा सामने आया है. बुधवार सुबह महाराष्ट्र के बारामती में लैंड के वक्त प्लेन के क्रैश होने की जानकारी सामने आई है. वह किसी कार्यक्रम के लिए बारामती जा रहे थे. अभी तक यहा साफ नहीं हो पाया है कि विमान ने क्रैश लैंडिंग की या कोई तकनीकी खराबी चलते ये हादसा हुआ है. घटना के बाद प्राइवेट चार्टर्ड विमान पूरी तरह से जल गया है.

हादसे को देखने वाले स्थानीय लोगों ने बताया कि 66 साल के नेता को अस्पताल ले जाया गया. हादसे की वजह, नुकसान की हद और NCP चीफ की हालत के बारे में अभी पता नहीं चल पाया है.

जानकारी के मुताबिक, प्लेन क्रैश की घटना में 5 लोगों की मौत हो गई है.अजित पवार कल यानी मुंबई में हुई कैबिनेट मीटिंग में शामिल हुए थे. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, अजित पवार के साथ 3 लोग थे. वे मुंबई से बारामती जा रहे थे. यह एक प्राइवेट कंपनी का प्लेन था. जब चार्टर्ड प्लेन बारामती एयरपोर्ट पर लैंड कर रहा था, तो उसका एक्सीडेंट हो गया.

 

करियर के शिखर पर क्यों लिया बड़ा फैसला? अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने की बताई वजह

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नई दिल्ली. बॉलीवुड (Bollywood) और फैंस के फेवरेट सिंगर अरिजीत सिंह (Arijit Singh) ने प्लेबैक सिंगिंग (playback singing) से संन्यास (Renunciation) ले लिया है. अरिजीत का प्लेबैक सिंगिंग युग अचानक और चौंकाने वाले तरीके से खत्म हो गया है. ठीक उसी समय जब उनके फैंस, सिंगर के तीन चार्टबस्टर गानों- ‘गहरा हुआ’, ‘घर कब आओगे’ और ‘मातृभूमि’ को एन्जॉय कर रहे थे. यह खबर पूरी इंडस्ट्री को भावुक कर गई हैं. फैंस भी बेहद परेशान हो गए हैं. सभी जानना चाहते हैं कि आखिर अरिजीत ने ये निर्णय क्यों लिया?

 

क्यों अरिजीत ने छोड़ी प्लेबैक सिंगिंग?
इस साल अरिजीत सिंह के पास कई प्रोजेक्ट्स लाइनअप में थे. लेकिन अब वे कोई नया प्रोजेक्ट साइन नहीं कर रहे हैं. इस बात का ऑफिशियल ऐलान उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए से खुद किया है. सबसे पहले अरिजीत ने अपने प्राइवेट X अकाउंट पर, उसके बाद इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने बताया कि अब वो प्लेबैक सिंगिंग नहीं करेंगे. इसके बाद एक नए ट्वीट में अरिजीत सिंह ने इस अचानक लिये फैसले के पीछे का कारण बताया.

अरिजीत के ट्वीट में प्लेबैक सिंगिंग करियर खत्म करने का कारण बताया. उन्होंने अपने प्राइवेट एक्स (पहले ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, ‘इसके पीछे कोई एक कारण नहीं है, कई कारण हैं और मैं काफी लंबे समय से यह करने की कोशिश कर रहा था. आखिरकार मैंने सही हिम्मत जुटाई. एक कारण तो सरल है- मैं जल्दी बोर हो जाता हूं. इसलिए मैं स्टेज पर वही गाने अलग-अलग अरेंजमेंट्स में परफॉर्म करता हूं. तो बात ये है कि मुझे बोरियत हो गई. मुझे कुछ दूसरा म्यूजिक करने की जरूरत है ताकि जी सकूं. एक और कारण ये है कि मैं किसी नए सिंगर को उभरते हुए देखकर असली मोटिवेशन पाना चाहता हूं.’

सिंगर के ऐलान से फैंस को लगा झटका
संन्यास का ऐलान करते हुए अरिजीत सिंह ने लिखा था, ‘हैलो, सभी को हैप्पी न्यू ईयर. मैं आप सभी को इतने सालों से मिले प्यार के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं. आप सबने मुझे सुनने वाले के रूप में इतना प्यार दिया. मैं खुशी से ऐलान करता हूं कि अब मैं प्लेबैक वोकलिस्ट के रूप में कोई नया असाइनमेंट नहीं लूंगा. मैं इसे खत्म कर रहा हूं. ये एक शानदार सफर रहा.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘भगवान ने मुझ पर बहुत मेहरबानी की है. मैं अच्छे म्यूजिक का फैन हूं और भविष्य में और ज्यादा सीखूंगा और खुद एक छोटे-से कलाकार के रूप में और ज्यादा करूंगा. फिर से सभी का सपोर्ट देने के लिए धन्यवाद. अभी कुछ पेंडिंग कमिटमेंट्स पूरे करने हैं, उन्हें खत्म करूंगा. तो इस साल कुछ रिलीजेज आपको मिल सकती हैं. साफ कर दूं कि मैं म्यूजिक बनाना नहीं छोड़ रहा हूं.’

इसी के साथ सलमान खान की फिल्म ‘बैटल ऑफ गलवान’ का गाना ‘मातृभूमि’ अरिजीत सिंह का गाया गया आखिरी गाना बन गया है. उनके भविष्य के प्रोजेक्ट्स की जानकारी अभी पब्लिक नहीं की गई है. वे लाइव शो और कॉन्सर्ट में परफॉरमेंस जारी रखेंगे. साथ ही इंडिपेंडेंट म्यूजिक प्रोडक्शन भी करेंगे.

संसद में आज से बजट सत्र, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर टिकी रहेंगी निगाहें

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नई दिल्ली. संसद (Parliament) का बजट सत्र (budget session) बुधवार, 28 जनवरी यानी आज से राष्ट्रपति (President) द्रौपदी मुर्मू (Droupadi Murmu) के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में अभिभाषण के साथ शुरू हो रहा है. यह सत्र दो चरणों में होगा, जो 2 अप्रैल तक चलेगा, इसमें कुल 30 बैठकें होंगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी. सत्र का पहला चरण 28 जनवरी से 13 फरवरी तक चलेगा और दूसरा चरण 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल को खत्म होगा.

बजट सत्र के लिए रणनीति बनाने के लिए आज सुबह 10 बजे विपक्षी पार्टियों की बैठक होगी. सत्र के बेहतर ढंग से संचालन के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई है.

 

वहीं, कांग्रेस पार्टी ने सोनिया गांधी की अध्यक्षता में अपनी संसदीय रणनीति समूह की बैठक कर मनरेगा, विशेष गहन संशोधन (SIR) और पर्यावरणीय मुद्दों को उठाने का फैसला लिया है. इस बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी भी शामिल हुए.

दो चरणों में चलेगा 30 बैठकों का सत्र
बजट सत्र की रूपरेखा काफी लंबी है. पहले चरण में 13 फरवरी तक राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट पर चर्चा की जाएगी. इसके बाद एक अंतराल (ब्रेक) होगा. सदन की कार्यवाही दोबारा 9 मार्च को शुरू होगी और 2 अप्रैल तक चलेगी. रविवार होने के बावजूद 1 फरवरी को बजट पेश करने की स्पेशल तैयारी की गई है, जिस पर पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं.

विपक्ष ने तैयार किया मुद्दों का पिटारा
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल सरकार को विभिन्न मोर्चों पर घेरने की तैयारी में हैं. सोनिया गांधी के आवास पर हुई बैठक के बाद सांसद सैयद नसीर हुसैन ने बताया कि उनके लिए मनरेगा (MGNREGA) सबसे बड़ा मुद्दा है. इसके अलावा विपक्ष लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, विदेश नीति और राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार विधेयक से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग करेगा. विशेष गहन संशोधन (SIR) की कवायद और पर्यावरण से जुड़े संकट भी सदन में गूंजेंगे.

सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक
सत्र शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता की. इसमें संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित कई दलों के नेता मौजूद रहे. सरकार की कोशिश है कि दोनों सदनों की कार्यवाही बिना किसी बड़े गतिरोध के चले. विपक्षी एकता को मजबूत करने के लिए मल्लिकार्जुन खरगे ने भी बुधवार सुबह एक अलग मीटिंग बुलाई है, जिससे सदन के अंदर एक संयुक्त रणनीति के तहत सरकार को चुनौती दी जा सके.

सुप्रीम कोर्ट में महाकाल मंदिर की वीआईपी दर्शन याचिका खारिज,

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हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा,गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा कलेक्टर ही तय करेंगे
महाकाल के सामने कोई वीआईपी नहीं

उज्जैन। उज्जैन के ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर मंदिर के गर्भगृह में नेताओं और वीआईपी को प्रवेश देने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। इससे पहले इस मामले पर हाईकोर्ट में सुनवाई हो चुकी थी। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही इंदौर हाईकोर्ट का फैसला महाकाल मंदिर समिति पर लागू रहेगा, जिसमें उज्जैन कलेक्टर को यह अधिकार दिया गया था कि वे तय करें कि कौन वीआईपी है और कौन नहीं।
दरअसल, महाकाल मंदिर में आम श्रद्धालुओं के गर्भगृह में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के बाद इंदौर के अधिवक्ता चर्चित शास्त्री और दर्पण अवस्थी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि देशभर से लाखों श्रद्धालु महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें गर्भगृह के बाहर से ही दर्शन करने पड़ते हैं, जबकि नेता और प्रभावशाली लोग आसानी से गर्भगृह में प्रवेश कर पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने को कहा।

गर्भगृह में प्रवेश का फैसला फिलहाल कलेक्टर करेंगे
करीब छह महीने पहले इंदौर हाईकोर्ट में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने स्पष्ट किया था कि गर्भगृह में किसे प्रवेश मिलेगा, यह तय करने का अधिकार उज्जैन कलेक्टर के पास है। अदालत ने कहा कि यदि कलेक्टर किसी विशेष दिन किसी व्यक्ति को अनुमति देते हैं, तो उसे वीआईपी माना जाएगा।

ढाई साल से बंद है गर्भगृह
दरअसल, 4 जुलाई 2023 को सावन महीने में आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का गर्भगृह 11 सितंबर 2023 तक बंद कर दिया गया था। उस समय मंदिर समिति ने कहा था कि सावन माह के समाप्त होते ही गर्भगृह आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जाएगा। लेकिन इसके बाद गर्भगृह खुला नहीं है। महाकाल लोक बनने से पहले मंदिर में रोजाना 20 से 30 हजार श्रद्धालु आते थे। अक्टूबर 2022 में महाकाल लोक बनने के बाद भक्तों की संख्या चार गुना बढक़र डेढ़ से दो लाख तक पहुंच गई।

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काशी विश्वनाथ धाम में ध्वजारोहण समारोह, आरती श्रृंगार में राष्ट्रीय पर्व की झलक दिखी

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वाराणसी। भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर काशी विश्वनाथ धाम में तिरंगा फहराया गया। यह कार्यक्रम सुबह 8:30 बजे काशी विश्वनाथ धाम स्थित प्रशासनिक कार्यालय, नीलकंठ भवन में संपन्न हुआ। इस ध्वजारोहण समारोह में काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण, उप जिलाधिकारी पवन प्रकाश, डिप्टी कलेक्टर शम्भू शरण, नायब तहसीलदार मिनी एल शेखर समेत मंदिर न्यास के सभी अधिकारीगण एवं कार्मिकगण मौजूद थे। ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान गाकर मातृभूमि को नमन किया गया।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ध्वजारोहण समारोह के उपरांत, पिछले दो सालों में शुरु किए गए नवाचार की निरंतरता में काशी विश्वनाथ धाम स्थित भारत माता की प्रतिमा पर श्रद्धा एवं राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ भारत माता आराधना संपन्न की गई। इस अवसर पर डमरू वादन एवं शास्त्रीगणों द्वारा स्वस्तिवाचन के साथ तिरंगा ध्वज पर पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में मंदिर न्यास के सभी अधिकारीगण, कार्मिकगण एवं जनसामान्य की सहभागिता रही, जिन्होंने भारत माता के चरणों में नमन कर देश की समृद्धि एवं शांति की कामना की। सभी उपस्थित व्यक्तियों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इस अवसर पर सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, संप्रभुता, शांति, प्रगति एवं विश्व कल्याण की कामना की। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने दायित्वों का पूर्ण निष्ठा एवं ईमानदारी से निर्वहन करते हुए देश की सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे।
गणतंत्र दिवस कार्यक्रमों एवं आरती श्रृंगार में राष्ट्रीय पर्व की स्पष्ट झलक देखने को मिली। सोमवारीय रुद्राभिषेक में अविमुक्तेश्वर महादेव के अर्घ्य को राष्ट्रीय ध्वज के साथ अभिषेक किया गया। समस्त आरती श्रृंगार में भी तिरंगा थीम आधारित श्रृंगार किया गया। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की ओर से गणतंत्र दिवस के इस पावन अवसर पर समस्त श्रद्धालुओं, नागरिकों एवं देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि हम सभी के जीवन में सत्य और धर्म के मार्ग चलना सदैव बना रहे और हमारा राष्ट्र निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो।

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