प्रेग्नेंट सोनम कपूर को मुंबई इवेंट में चलते समय एक दोस्त ने दिया सहारा, बदली शक्ल और हाइट को देख लोग हुए हैरान

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बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनम कपूर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। सोनम अपनी फिल्मों के अलावा अपने ड्रेसिंग सेंस के लिए भी जानी जाती हैं। सोनम जल्द ही दूसरी बार मां बनने वाली हैं। सोनम हाल ही में मुंबई में एक इवेंट में पहुंची। इस दौरान सोनम ने सारी लाइमलाइट लूटी। इस दौरान एंट्री करते समय सोनम का एक दोस्त उन्हें प्यार से सहारा दे रही थीं। ऐसे में पैपराजी ने सोनम को अपने वीडियो में कैप्चर करने का एक भी मौका हाथ से जाने नहीं दिया। इस इवेंट के कई वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

ड्रेसिंग सेंस ने जीता दिल

सोनम कपूर बीते दिनों मुंबई के लोअर परेल में एक इंटरनेशनल ब्यूटी ब्रांड के इवेंट में शामिल हुईं। इस दौरान एक्ट्रेस ने नीले रंग की लॉन्ग ड्रेस पहनी थी, जिसे उन्होंने स्टाइल के साथ पूरा किया। इस ड्रेस के साथ सोनम ने अपने बाल खुले रखे थे। सोनम का कॉन्फिडेंस देखने लायक था। सोनम का ये लुक उनके फैंस को काफी पसंद आ रहा है। हर कोई एक्ट्रेस के लुक के साथ उनके ड्रेसिंग सेंस की भी तारीफ कर रहा है।

बदली शक्ल देखकर फैंस हुए हैरान

इवेंट के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियोज में साफ देखा जा सकता है कि इवेंट में आते समय, एक दोस्त उनका हाथ पकड़े हुए और उनसे बातचीत करते हुए नजर आई। वेन्यू की ओर चलते हुए सोनम ने कैमरे के लिए मुस्कुराया भी। साथ ही एक्ट्रेस ने बेबी बंप फ्लॉन्ट करते हुए पैप्स को पोज देती दिखीं। लेकिन इस दौरान लोग सोनम कपूर की हाइट के बारे में भी पूछ रहे हैं। ज्यादातर लोग उनकी बदली शक्ल को देखकर भी हैरान रह गए।

लोगों ने हाइट पर किए सवाल

इस वीडियो के सामने आते ही लोगों ने कमेंट सेक्शन में सोनम कपूर की खूब तारीफ की। सोनम के चेहरे पर प्रेग्नेंसी ग्लो साफ नजर आ रहा था। लेकिन ज्यादातर लोगों ने सोनम की हाइट के बारे में सवाल पूछे कि ये कितनी है। सोनम को बड़े दिनों बाद देखकर उनके बदले चेहरे पर भी सवाल हुए। रिपोर्ट्स की मानें तो सोनम कपूर की हाइट 5’9 है।

सोनम कपूर और आनंद आहूजा की शादी

बता दें कि सोनम कपूर ने साल 2018 में बिजनेसमैन आनंद आहूजा संग शादी की थी। शादी के बाद साल 2022 में उनके पहले बेटे वायु का जन्म हुआ। वहीं, अब सोनम कपूर दूसरी बार प्रेग्नेंट हैं और वह 40 साल की उम्रे में दूसरी बार मां बनने वाली हैं।

BJP में संगठनात्मक सर्जरी की तैयारी, प्रदर्शन के आधार पर नवीन की नई टीम का गठन

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नई दिल्ली। भाजपा (BJP) के नए अध्यक्ष नितिन नवीन (New President Nitin Naveen) के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों (Assemblies Elections) के लिए देश भर से चुने गए भाजपा नेताओं (BJP leaders) के प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें नवीन की नई राष्ट्रीय टीम (New National Team) में जगह मिलने की संभावना है।

असम के लिए विशेष टीम की तैनाती
भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की गई है। इस पूरी टीम का मार्गदर्शन राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत ‘जय’ पांडा कर रहे हैं। इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे ‘परखे हुए’ नेताओं को भी इस मिशन में जोड़ा गया है। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी।

 

नेताओं की जिम्मेदारियां और कार्य
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं को केवल प्रचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर के ठोस काम सौंपे गए हैं। जैसे हर नेता को एक से दो लोकसभा सीटों के भीतर चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण और बूथ स्तर की रणनीति बनाना का काम भी दिया गया है। इसके अलावा, चुनाव करीब आने पर ये नेता टिकटों के बंटवारे से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करेंगे।

चयन का आधार क्या है?
इन नेताओं के चयन में उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि भाजपा पहले भी अन्य राज्यों के नेताओं को चुनावी ड्यूटी पर लगाती रही है, लेकिन इस बार का उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत ‘संगठनात्मक निरंतरता’ बनाए रखना है। चुनाव परिणामों के बाद किए जाने वाले विश्लेषण में जिन नेताओं का प्रदर्शन शानदार रहेगा, उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

पीढ़ीगत बदलाव के संकेत
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों का मिश्रण होगा। चूंकि इस साल कई बड़े नेता राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का आधा समय पूरा होने वाला है, ऐसे में कैबिनेट फेरबदल की भी संभावनाएं हैं। वर्तमान में असम के लिए जो टीम बनाई गई है, वैसी ही टीमें जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए भी घोषित की जाएंगी। इन नेताओं के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे में अपने भविष्य को सुरक्षित करने का एक मौका है।

नितिन नवीन की पहली परीक्षा
असम और पश्चिम बंगाल के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए ये चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ मैदान में है। भाजपा का पूरा जोर ‘घुसपैठ’ और ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ जैसे मुद्दों पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार ‘मियां’ वोटर्स और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

नितिन नवीन ने असम में बूथों की संख्या को 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके। कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को असम के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गठबंधन लगभग 103 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की स्थिति में है।

हालांकि असम के मुकाबले बंगाल में भाजपा के लिए चुनौती थोड़ी कठिन है क्योंकि यहां वह 14 साल के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। भाजपा के पास बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई एक ‘मास लीडर’ नहीं है। इसलिए पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और ‘विकास’ के मॉडल पर निर्भर है। भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर ‘क्षेत्रीय वॉर-रूम’ बनाए हैं। हर जोन के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को तैनात किया गया है। पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। साथ ही, केंद्रीय योजनाओं के लाभ को सीधे जनता तक पहुँचाने का वादा किया जा रहा है। नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्गापुर में कोर टीम के साथ बैठक कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का ‘रोडमैप’ तैयार किया है।

Earn ₹2.5 Lakh Yearly with UNAccc’s Solar Power, EV Charging & LPG-Free Kitchen Deal!

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The UNAccc Solar Energy Home Project stands out as a next-generation green investment for Indian households. Built on a robust ESG framework, the initiative enables families to invest ₹79,000 in solar energy and enjoy both environmental benefits and reliable financial returns.

Each solar installation helps reduce greenhouse gas emissions and minimizes dependence on LPG, petrol, and grid electricity. By promoting decentralized power generation, the project strengthens India’s renewable energy infrastructure and supports long-term sustainability goals.

Social empowerment is a core outcome of the initiative. Households earn ₹15,000+ per month by selling surplus energy, while electricity savings and income generation together create lifetime benefits exceeding ₹20 lakh over 25 years.

UNAccc ensures strong governance through transparent investment models, ethical business practices, and a clear payback period of 5–6 years. Easy financing options, Section 80C tax benefits, and 0% GST further improve project viability.

This project demonstrates how ESG-focused investments can deliver practical, household-level impact.

UNAccc Solar Energy Home Project Sets a New ESG Benchmark in Sustainable Living

New Delhi: As India accelerates toward a clean-energy future, the UNAccc Solar Energy Home Project is emerging as a powerful example of how ESG (Environmental, Social, and Governance) principles can translate into real financial and social impact at the household level.

Designed to make renewable energy accessible, profitable, and transparent, the project enables families to invest in solar power with a one-time investment of ₹79,000, unlocking long-term savings, stable monthly earnings, and a reduced carbon footprint.

This ESG report highlights how UNAccc is reshaping residential energy adoption while creating sustainable income opportunities for consumers and partners alike.

A Strong ESG Framework with Measurable Impact

The UNAccc Solar Energy Home Project is built on a well-defined ESG model that balances environmental responsibility, social empowerment, and transparent governance.

🌱 Environmental Impact

The project significantly reduces dependence on fossil fuels by promoting clean solar energy at the household level. Each solar installation helps:

Lower carbon emissions

Reduce LPG and petrol consumption by up to 99%

Support India’s renewable energy and climate goals

By encouraging decentralized energy generation, UNAccc contributes to a cleaner, greener, and more resilient energy ecosystem.

👨‍👩‍👧‍👦 Social Empowerment

At its core, the initiative is designed for people. Households not only save on electricity costs but also earn through energy trading, selling surplus power and generating additional income.

  • Key social benefits include:
  • Monthly earnings of ₹15,000+
  • Annual income potential of ₹2,50,000
  • Long-term savings exceeding ₹20 lakhs over 25 years

Greater financial stability and energy independence

This model transforms homes from energy consumers into energy producers.

 

🏛️ Governance & Transparency

UNAccc emphasizes clear investment structures, predictable payback periods, and ethical business practices. With a payback period of just 5–6 years, consumers benefit from clarity, trust, and long-term sustainability aligned with global ESG standards.

Why UNAccc Solar Energy Home Stands Out

🌟 Investment: ₹79,000/-
🌟 Earnings: ₹15,000/-+ per month
🌟 Electricity Bill Savings: Significant reduction
🌟 Fuel Savings: Up to 99% on LPG and petrol
🌟 Energy Trade: Sell excess power and earn more
🌟 Long-Term Value: ₹20 lakhs+ savings in 25 years

This makes the project one of the most attractive residential solar propositions in today’s market.

Partnership Opportunities & Growth Strategy

The UNAccc Solar Energy Home Project also presents strong collaboration opportunities for institutions, corporates, and channel partners.

🤝 Partnership Benefits

Strong CSR & ESG alignment

Expansion into urban and rural clean-energy markets

Enhanced brand credibility and social impact positioning

📈 Sales & Market Strategy

Customized solutions for urban and rural households

Easy bank finance options

Referral-based incentive programs to accelerate adoption

💰 Tax & Financial Benefits for Consumers

  • Section 80C tax deductions up to ₹1.5 lakh
  • 0% GST on residential solar panels
  • Structured earnings potential of ₹2,50,000 per year
  • Easy Financing Makes Solar Accessible
  • To remove cost barriers, UNAccc offers attractive financing options:
  • 80% project cost financed by bank
  • Tenure: 5 years (72 months)
  • EMI: Approx. ₹890 per month
  • Interest rate: 9%

This ensures affordability without compromising returns.

Call to Action: Switch to Solar, Secure Your Future

Now is the time to turn your home into a power-generating asset.

⚡ Invest ₹79,000
⚡ Earn ₹15,000+ monthly
⚡ Save lakhs on energy over 25 years

🎁 Limited-Time Offer:
Get ₹5,000 OFF plus a FREE e-bike charging kit worth ₹10,000

Switch to Solar. Earn Smart. Live Sustainable.
The UNAccc Solar Energy Home Project is not just an energy solution—it’s a future-ready ESG investment for every household.

Organisation Target to Sold 100,000 Kits in first Phase , in 2nd Phase UNAccc Planning to include a E Scooter within Affordable Range of Lower Income Group
https://unaccc.org/unaccc-project/

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भारत बनाम पाकिस्तान महामुकाबले के लिए हो जाएं तैयार, जानें क

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 इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप का बहुप्रतीक्षित मैच रविवार, 1 फरवरी को खेला जाना है। आमतौर पर आईसीसी इवेंट में भारत और पाकिस्तान की टीमें एक ही ग्रुप में होती है और शुरुआती चरण में ही फैंस को भारत बनाम पाकिस्तान मुकाबला देखने को मिल जाता है। मगर अंडर-19 वर्ल्ड कप में भारत और पाकिस्तान की टीमों को अलग-अलग ग्रुप में रखा गया था, अब सुपर-6 में इन दो चिर-प्रतिद्वंद्वियों के बीच यह ‘महामुकाबला’ खेला जाना है। इंडिया वर्सेस पाकिस्तान का यह मैच रोमांच से भरा होगा, क्योंकि इन दोनों में से ही एक टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई करेगी IND-PAK के बीच U19 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल की आखिरी रेस, 3 टीमों ने किया क्वालीफाई अंडर-19 वर्ल्ड कप के लिए अभी तक ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और अफगानिस्तान की टीमें क्वालीफाई कर चुकी है। चौथी टीम का फैसला इंडिया वर्सेस पाकिस्तान मैच से होगा। अगर भारत जीतता है तो उसे सीधा-सीधा सेमीफाइनल का टिकट मिल जाएगा, वहीं अगर पाकिस्तान जीतता है तो मामला नेट रन रेट पर फंसेगा। आईए इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप मुकाबले से जुड़ी अहम जानकारियों पर एक नजर डलते हैं-

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच कब खेला जाएगा?

इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच रविवार, 1 फरवरी को खेला जाएगा।

 सुपर-6 का 12वां मैच कहां खेला जाएगा?

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच क्वींस स्पोर्ट्स क्लब, बुलावेयो में खेला जाएगा।

इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच कितने बजे शुरू होगा?

सुपर-6 का 12वां मैच भारतीय समयानुसार दोपहर 1 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस के लिए दोनों कप्तान आधा घंटा पहले मैदान पर उतरेंगे।

हरमनप्रीत कौर ने छीनी ऑरेंज कैप, मंधाना टॉप-5 में; पर्पल कैप किसके पास?

अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच टीवी पर कैसे देखें लाइव?

इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 का 12वां मैच टीवी पर आप लाइव स्टार स्पोर्ट्स पर देख सकते हैं।

सुपर-6 के 12वें मैच की लाइव स्ट्रीमिंग कैसे देखें?

इंडिया वर्सेस पाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप 2026 सुपर-6 के 12वें मैच की लाइव स्ट्रीमिंग का लुत्फ आप जियोहॉटस्टार पर उठा सकते हैं।

इंडिया वर्सेस पाकिस्तान स्क्वॉड

भारतीय अंडर-19 वर्ल्ड कप स्क्वॉड- आयुष म्हात्रे (कप्तान), आरएस अंबरीश, कनिष्क चौहान, दीपेश देवेन्द्रन, मोहम्मद एनान, आरोन जॉर्ज, अभिज्ञान कुंडू, किशन कुमार सिंह, विहान मल्होत्रा, उधव मोहन, हेनिल पटेल, खिलान पटेल, हरवंश पंगालिया, वैभव सूर्यवंशी, वेदांत त्रिवेदीपाकिस्तान अंडर-19 वर्ल्ड कप स्क्वॉड- उमर ज़ैब, समीर मिन्हास, नकाब शफीक, मोहम्मद शायान, मोहम्मद सय्याम, मोमिन कमर, हुजैफा अहसन, हमजा जहूर, दानियाल अली खान, अली रजा, अली हसन बलूच, अहमद हुसैन, अब्दुल सुभान, उस्मान खान, फरहान यूसुफ (कप्तान)

तिरुपति लड्डू विवाद में क्लीनचिट खबरों को लेकर TTD चेयरमैन ने बताई सच्‍चाई, जानिए क्‍या कहा ?

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नई दिल्ली। तिरुपति में लड्डू प्रसाद (Laddu Prasad) में मिलावटी घी (Adulterated Ghee) के विवाद पर तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) के अध्यक्ष बीआर नायडू ने कहा कि इस मामले में क्लीनचिट (Clean Chit) देने की खबर झूठी है। उन्होंने बताया कि यह केवल श्रद्धालुओं (Devotees) को भ्रमित करने के लिए फैलाया जा रहा है। नायडू ने कहा कि हिंदुओं के पवित्र मंदिर में इस तरह का मिलावटी प्रसाद बांटकर उनकी भावनाएं (Sentiments) आहत हुईं, और किसी को भी क्लीनचिट नहीं मिली है।

मीडिया से बातचीत में नायडू ने बताया
बीआर नायडू ने कहा कि वाईएसआरसीपी सरकार के दौरान लड्डू प्रसाद में मिलावटी घी का इस्तेमाल किया गया था। अब लोगों में भ्रम फैलाया जा रहा है कि इस मामले में क्लीनचिट मिल गई है, जो पूरी तरह गलत है। SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से लिखा गया कि लड्डू में मिलावटी घी का प्रयोग हुआ था और कुछ कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए यह किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट नियमों का उल्लंघन किया और ऐसे कंपनियों को ठेका दिया जो योग्य नहीं थीं।

ठेका देने में बड़ी लापरवाही
नायडू ने बताया कि जिस कंपनी के पास गाय नहीं थी, दुग्ध उत्पादन का कोई जरिया नहीं था और शुद्ध घी बनाने की क्षमता भी नहीं थी, उसे ठेका दे दिया गया। इसके बाद टीटीडी ने कंपनी से 60 लाख किलो घी खरीदा, जिसकी कीमत 250 करोड़ रुपये थी। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की जांच में पता चला कि इस घी में जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल किया गया। नायडू ने कहा कि इस घी से लगभग 20 करोड़ श्रीवरी लड्डू बनाए गए, और यह देश में मिलावट का सबसे बड़ा मामला है।

SIT ने क्या कहा?
SIT ने अपनी फाइनल चार्जशीट कोर्ट में दायर की और कहा कि इसमें जानवरों की चर्बी का उल्लेख नहीं था। इसके बाद वाईएसआरसीपी ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और डिप्टी CM पवन कल्याण पर आरोप लगाया कि दोनों मिलकर हिंदुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। चार्जशीट में कहा गया कि घी बनाने के लिए पाम तेल, पाम कर्नेल तेल और केमिकल एडिटिव्स का इस्तेमाल हुआ था, लेकिन जानवरों की चर्बी का कोई जिक्र नहीं था।

सीएम नायडू के आरोप
सितंबर 2024 में चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया था कि जगन मोहन रेड्डी की सरकार के दौरान तिरुपति लड्डू बनाने में जानवरों की चर्बी वाले घी का इस्तेमाल किया जाता था। इस विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट ने SIT का गठन किया। इस मामले में उत्तराखंड की भोले बाबा ऑर्गेनिक डेयरी के डायरेक्टर पोमिल जैन और विपिन जैन को भी आरोपी बनाया गया। TDP का कहना है कि SIT की चार्जशीट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि घी मिलावटी था और इसमें एक भी बूंद भी शुद्ध घी का इस्तेमाल नहीं हुआ।

 

 

 

रानी मुखर्जी की ‘मर्दानी 3’ का बॉक्स ऑफिस पर जलवा, पहले दिन की इतने करोड़ की मोटी कमाई

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Mardaani 3 BOcollection: एक तरफ जहां बॉलीवुड में साल 2026 की सबसे बड़ी ओपनर फिल्म ‘बॉर्डर 2’ कोहराम मचा रही है, वहीं दूसरी तरफ लंबे समय के बाद बड़े पर्दे पर नजर आईं रानी मुखर्जी को ‘मर्दानी 3’ के जरिए बॉक्स ऑफिस पर शानदार ओपनिंग मिली है. महीने की आखिरी तारीख, 30 जनवरी 2026 को रिलीज हुई ‘मर्दानी 3’ को फैंस का भरपूर प्यार मिल रहा है, जिस वजह से यह फिल्म रानी मुखर्जी के करियर की ‘बेस्ट सोलो ओपनिंग’ फिल्म बन गई है.

‘मर्दानी 3’ पहले दिन कितनी कमाई की?
रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘मर्दानी 3’ की एडवांस बुकिंग सनी देओल की फिल्म ‘बॉर्डर 2’ के मुकाबले कम रही है. ‘बॉर्डर 2’ के जबरदस्त क्रेज के कारण रानी मुखर्जी की फिल्म को शुरुआत में सही माहौल नहीं मिल पाया, लेकिन इसके बावजूद फैंस का भरपूर प्यार देखने को मिला. फैंस ने रानी मुखर्जी के दमदार अभिनय और उनके किरदार की खूब सराहना की है. सैकनिल्क (Sacnilk) की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ‘मर्दानी 3’ ने बॉक्स ऑफिस पर 4 करोड़ रुपये के साथ अपना खाता खोला है.

रानी मुखर्जी की सोलो फिल्में कौन-कौन सी हैं?
साल 2010 के बाद से एक्ट्रेस रानी मुखर्जी ने सोलो फिल्मों पर विशेष ध्यान दिया है. इस दौरान उन्होंने आमिर खान के साथ ‘तलाश’ और सैफ अली खान के साथ ‘बंटी और बबली 2’ जैसी कुछ ही बड़ी मल्टी-स्टारर फिल्में कीं.
जहां सैफ के साथ उनकी फिल्म सफल नहीं रही, वहीं आमिर खान स्टारर ‘तलाश’ उनके करियर की सबसे बड़ी ओपनिंग वाली फिल्म बनी.
रानी ने कई सफल सोलो फिल्में भी दी हैं, जिनमें ‘मर्दानी’, ‘हिचकी’ और नेशनल अवार्ड विजेता ‘मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे’ प्रमुख हैं.
इन सोलो प्रोजेक्ट्स के जरिए रानी ने न केवल फैंस का भरपूर प्यार पाया, बल्कि अपने करियर को एक नई ऊंचाई पर भी पहुंचाया है.

रानी की बेस्ट सोलो ओपनिंग फिल्म कौन सी है?
साल 2019 में आई रानी मुखर्जी की सोलो फिल्म ‘मर्दानी 2’ ने 3.80 करोड़ रुपये के साथ ओपनिंग की थी. अब ‘मर्दानी 3’ इस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ते हुए रानी मुखर्जी के करियर की सबसे बड़ी सोलो ओपनिंग वाली फिल्म बन गई है. सैकनिल्क (Sacnilk) के शुरुआती आंकड़ों और फैंस से मिले इस प्यार को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि ‘मर्दानी 3’ बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा सकती है.

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News Desk

कैसे बची शरद पवार की रक्षा मंत्री की कुर्सी, बारामती सीट स्वैपिंग की पूरी कहानी

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नई दिल्‍ली । बात 1991 की है। देश में लोकसभा के चुनाव हो रहे थे। इसी बीच पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) की लिट्टे उग्रवादियों ने एक आत्मघाती बम विस्फोट में हत्या कर दी। देश का राजनीतिक मिजाज बदल गया और उन चुनावों में कांग्रेस पार्टी की जीत हुई। पीवी नरसिम्हा राव (P.V. Narasimha Rao) को प्रधानमंत्री बनाया गया। उस समय प्रधानमंत्री राव ने क्षेत्रीय छत्रपों का संतुलन बिठाते हुए कई दिग्गजों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। उन्हीं में एक थे शरद पवार (Sharad Pawar), जिन्हें रक्षा मंत्री बनाया गया था लेकिन जब उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी, तब वह संसद के किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे।

शरद पवार उस समय महाराष्ट्र विधानसभा में बारामती से विधायक थे, जबकि उनके भतीजे अजित पवार पहली बार बारामती संसदीय सीट से चुनकर सांसद बने थे। संविधान के नियमानुसार छह महीने के अंदर शरद पवार को संसद के किसी भी सदन का सदस्य बनना था। अन्यथा रक्षा मंत्री की कुर्सी खतरे में थी। ऐसे में भतीजे अजित पवार ने अपनी सांसदी छोड़ दी। उधर, शरद पवार ने भी अपनी विधायकी छोड़ दी। इसके बाद बारामती में सांसद और विधायक दोनों के लिए नवंबर 1991 में उप चुनाव हुए। शरद पवार भतीजे की छोड़ी सीट पर सांसद बन गए और अजित पवार चाचा द्वारा छोड़ी गई MLA की सीट पर जीतकर पहली बार महाराष्ट्र विधानसभा पहुंचे।

 

अजित मुंबई तो शरद पवार दिल्ली में जमे
महाराष्ट्र की राजनीति में 1991 का बारामती सीट स्वैप आज भी एक अनोखे और निर्णायक अध्याय के रूप में याद किया जाता है। यह वही दौर था, जब एक युवा नेता अजित पवार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत में ही ऐसा फैसला लिया, जिसने उनके चाचा शरद पवार को देश का रक्षा मंत्री बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई। दिल्ली की राजनीति में बने रहने के लिए शरद पवार का सांसद बनना अनिवार्य था। इस तरह, अजित पवार विधानसभा में पहुंचे और शरद पवार ने दिल्ली में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी।

अजित पवार: राजनीति में शुरुआती त्याग
बारामती दशकों से पवार परिवार का गढ़ रहा है। ऐसे में सीट बदलने का फैसला जोखिम भरा नहीं था। बड़ी बात यह है कि 1991 में अजित पवार महज 32 साल के थे। उन्होंने उसी साल लोकसभा चुनाव में बीजेपी उम्मीदवार को भारी मतों से हराया था। लेकिन चाचा के राजनीतिक भविष्य और पारिवारिक विश्वास के चलते उन्होंने बिना हिचक अपनी सीट छोड़ दी। सीट स्वैपिंग के बाद विधायक बने अजित पवार को तब महाराष्ट्र सरकार में राज्य मंत्री बनाया गया था और यहीं से उनका लंबा और प्रभावशाली राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

दंगा, दिल्ली और वापसी
1992-93 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद मुंबई में भयानक दंगे हुए। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक हालात बिगड़ने पर शरद पवार को दिल्ली छोड़कर फिर से महाराष्ट्र की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाली, जबकि अजित पवार बारामती से लगातार मजबूत होते चले गए।

बारामती और अजित पवार: अटूट रिश्ता
1991 के बाद से बारामती विधानसभा सीट से अजित पवार कभी भी चुनाव नहीं हारे। वह यहीं से विधायक बनकर वित्त मंत्री, उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े पदों पर रहे। उनकी पूरी राजनीति बारामती से जुड़ी रही और संयोग ऐसा कि उनकी मौत भी बारामती में ही हुई। उस अदला-बदली के लगभग 35 साल बाद, अजित पवार की बुधवार को बारामती में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई। लेकिन वह अब 1991 की तरह राजनीतिक नौसिखिया नहीं थे। अजीत पवार अपने आप में महाराष्ट्र के शक्तिशाली नेताओं में से एक थे।

अजित पवार की मृत्यु ने उनके राजनीतिक जीवन के 1991 के दिलचस्प अध्याय पर ध्यान खींचा है। सीटों की अदला-बदली ने महाराष्ट्र की राजनीति और अजित पवार के करियर को आकार दिया। अजित पवार के जुलाई 2023 में चाचा शरद से अलग होने और NCP के टूटने की ताज़ा यादों को देखते हुए, आज कई लोगों को 1991 की बारामती सीट की अदला-बदली दिलचस्प लग सकती है।

विराट कोहली और रोहित शर्मा की अनुपस्थिति से कमजोर हो गई है भारतीय टेस्ट टीम: टेम्बा बावुमा

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दक्षिण अफ्रीका के कप्तान टेम्बा बावुमा ने क्रिकइंफो के लिए लिखे अपने एक लेख में भारतीय टेस्ट टीम के मौजूदा हालात पर अपनी राय साझा की है। उनका मानना है कि जहां सफेद गेंद (वनडे और टी20) के क्रिकेट में भारत एक बेहद मजबूत टीम है, वहीं टेस्ट क्रिकेट में वह फिलहाल एक ‘ट्रांजिशन फेज’ यानी बदलाव के दौर से गुजर रही है।

आयरलैंड
156/7
19.0 ov

संयुक्त अरब अमीरात
YTB

संयुक्त अरब अमीरात ने गेंदबाज़ी का फैसला

बांग्लादेश अंडर-19
6/0
1.2 ov

जिम्बाब्वे अंडर-19
YTB

बांग्लादेश अंडर-19 बल्लेबाज़ी का फैसला

बंगाल
200/10
193/10

हरियाणा
68/4
100/10

हरियाणा को जीतने के लिए 226 रन की जरूरत

उत्तराखंड
460/7d

असम
57/1
140/10

असम 263 रन से पीछे

बड़ौदा
375/10

तमिलनाडु
230/1

तमिलनाडु 145 रन से पीछे

छत्तीसगढ
283/10

हैदराबाद
585/7

हैदराबाद को 302 रन की बढ़त

पंजाब
309/10

कर्नाटक
274/6

कर्नाटक 35 रन से पीछे

मध्य प्रदेश
244/8
187/10

महाराष्ट्र
179/10

मध्य प्रदेश को 252 रन की बढ़त

हिमाचल प्रदेश
168/10

जम्मू एंड कश्मीर
538/7

जम्मू एंड कश्मीर को 370 रन की बढ़त

सर्विसेज
83/4
343/10

रेलवेज
212/10

सर्विसेज को 214 रन की बढ़त

गुजरात
352/10

त्रिपुरा
323/4

त्रिपुरा 29 रन से पीछे

नागालैंड
0/0
366/10

आंध्र
536/9d

नागालैंड 170 रन से पीछे

दिल्ली
49/0
221/10

मुंबई
317/10

दिल्ली 47 रन से पीछे

उत्तर प्रदेश
165/7
237/10

विदर्भ
237/10

उत्तर प्रदेश को 165 रन की बढ़त

ओडिशा
82/2
282/10

झारखंड
263/10

ओडिशा को 101 रन की बढ़त

बावुमा के अनुसार, टेस्ट मैचों में विराट कोहली और रोहित शर्मा जैसे दिग्गज खिलाड़ियों की अनुपस्थिति ने टीम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है। उन्होंने इस स्थिति की तुलना 2019 के उस दौर से की है, जब दक्षिण अफ्रीका को भी अपने बड़े खिलाड़ियों के जाने के बाद ऐसी ही मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। बावुमा ने कहा कि वनडे में विराट कोहली और रोहित शर्मा की मौजूदगी भारत को मजबूती देती है, लेकिन टेस्ट में इन दोनों की अनुपस्थिति ने टीम की कमजोरी उजागर की है। उन्होंने 2019 की साउथ अफ्रीकी टेस्ट टीम से तुलना करते हुए कहा कि बड़े खिलाड़ियों के जाने के बाद ऐसा दौर हर टीम को झेलना पड़ता है और इसमें कुछ भी असमान्य नहीं है।हेड कोच गौतम गंभीर का पक्ष लेते हुए बावुमा ने बीसीसीआई को सलाह दी है कि वह उन पर दबाव न बनाए और उन्हें 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक का पूरा समर्थन और लंबा समय दे। बावुमा ने अलग-अलग फॉर्मेट के लिए अलग-अलग कोच रखने के मॉडल का विरोध करते हुए कहा कि इससे खिलाड़ियों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। उनके मुताबिक, गंभीर के पास सफेद गेंद के क्रिकेट में अच्छे संसाधन मौजूद हैं और वनडे में कोहली व रोहित की मौजूदगी कोच के लिए राहत का कारण बनी रहेगी, जो उन्हें टेस्ट की चुनौतियों से निपटने का समय दे सकती है।बावुमा ने यह भी रेखांकित किया कि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट में शुभमन गिल की चोट भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुई, जिससे टीम को ऋषभ पंत को अस्थायी कप्तान के रूप में उतारना पड़ा और इसका फायदा विपक्षी टीम ने उठाया। उन्होंने अंत में सुझाव दिया कि इस बदलाव के कठिन दौर में भारतीय टीम को शांत रहने की जरूरत है और सीनियर खिलाड़ियों को आगे बढ़कर जिम्मेदारी लेनी चाहिए। बावुमा का मानना है कि भले ही यह समय चुनौतीपूर्ण है, लेकिन यही भविष्य की एक मजबूत टेस्ट टीम की नींव रखने का सही रास्ता है।

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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 2025 के आखिरी महीनों में जब दक्षिणी अफ्रीकी की टीम भारत के दौरे पर थी तो उसने भारत से 2 टेस्ट, तीन वनडे और 5 टी-20 मैचों की सीरीज खेली थी। भारत ने वनडे सीरीज को 2-1 से अपने नाम किया था, वहीं सूर्या की कप्तानी में टी-20 में भारतीय टीम का दबदबा रहा था। लेकिन दक्षिण अफ्रीका ने इतिहास रचते हुए पहली बार भारतीय सरजमीं पर भारत के खिलाफ क्लीन स्वीप किया था और दो मैचों की टेस्ट सीरीज में भारत को 2-0 से पटखनी दी थी, जिसके बाद गंभीर की कोचिंग पर सवाल उठे थे, साथ ही इस बात की भी चर्चा चली थी कि आखिर क्या कारण थे कि विराट कोहली और रोहित शर्मा को असमय टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 709.41 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर

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रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) (Reserve Bank of India – RBI) ने शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया कि 23 जनवरी को समाप्त हफ्ते में विदेशी मुद्रा भंडार का अहम घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां 2.36 अरब डॉलर बढ़कर 562.88 अरब डॉलर हो गईं। इस दौरान स्वर्ण भंडार का मूल्य 5.63 अरब डॉलर बढ़कर 123.08 अरब डॉलर हो गया। इस अवधि में विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 3.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 18.73 अरब डॉलर हो गया। आंकड़ों के अनुसार इस दौरान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास भारत की आरक्षित स्थिति भी 1.8 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.70 अरब डॉलर हो गई। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सितंबर, 2024 में 704.89 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चतम स्तर पर पहुंचा था।

 

 

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सनी देओल और रानी की मूवी का जानें पूरा हाल

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बॉलीवुड की 2 बड़ी फिल्में बॉर्डर 2 और मर्दानी 3 थिएटर्स पर लगी हुई हैं। सनी देओल, वरुण धवन, दिलजीत दोसांझ और अहान शेट्टी की बॉर्डर 2, 23 जनवरी को रिलीज हुई थी। वहीं मर्दानी इसी शुक्रवार को रिलीज हुई है। बॉर्डर 2 ने अब तक 235 करोड़ कमा लिए हैं। वहीं मर्दानी ने पहले दिन 4 करोड़ कमाए। अब आपको बताते हैं दोनों फिल्मों से जुड़े अपडेट्स।खबर लिखे जाने तक फिल्म ने अब तक 4.22 करोड़ कमा लिए हैं।रानी मुखर्जी की फिल्म ने इस समय तक शनिवार को यानी दूसरे दिन के 11 बजे सुबह तक 0.22 करोड़ कमाए।बॉर्डर 2 ने शुक्रवार को 10.75 करोड़ कमाए हैं।शाहरुख खान ने रानी मुखर्जी के लिए स्पेशल मैसेज किया कि उन्हें पता है कि वह फिल्म में स्ट्रॉन्ग परफॉर्मेंस दे रही होंगी।सोशल मीडिया पर मर्दानी 3 को अच्छा ही रिस्पॉन्स मिल रहा है। रानी की परफॉर्मेंस को सब काफी पसंद कर रहे हैं।फिल्म के डायरेक्टर अनुराग ने सनी देओल के लिए स्पेशल मैसेज लिखा। उन्होंने लिखा कि ढ़ाई किलो का हाथ और 5 किलो का दिल। दहाड़ काफी लिजेंड्री है। इसके साथ ही उनकी हंसी जो सेट पर सबको खुश कर देती थी। आपके साथ काम करते मजा आया। वहीं सनी ने इस पर कमेंट किया, मुझे एक्सपोज करने के लिए शुक्रिया।रिपोर्ट्स के मुताबिक रानी ने मर्दानी 3 के लिए 7 करोड़ फीस ली है। वहीं मल्लिका प्रसाद जो विलेन हैं उन्होंने 50 लाख रुपये लिए हैं।अहान शेट्टी का कहना है कि वह चाहते हैं कि उनकी भांजी यानी केएल राहुल और अथिया की बेटी, उनकी फिल्म बॉर्डर 2 देखें।बॉर्डर 2 की बात करें तो इस फिल्म को अनुराग सिंह ने डायरेक्ट किया है। फिल्म में सनी, वरुण, दिलजीत और अहान के अलावा मोना सिंह, सोनम बाजवा, मेधा राणा और अन्या सिंह हैं। फिल्म 1997 में रिलीज हुई बॉर्डर का सीक्वल है। पहली फिल्म से सिर्फ सनी देओल ही सीक्वल में हैं। वहीं अक्षय खन्ना और सुनील शेट्टी की भी फिल्म में झलक दिखती है।वहीं मर्दानी 3 की बात करें तो यह उनकी फिल्म मर्दानी का तीसरा पार्ट है। फिल्म का पहला पार्ट साल 2014 में रिलीज हुआ था। इस फिल्म ने 59.30 वर्ल्डवाइड कमाई की थी। वहीं दूसरा पार्ट 2019 में रिलीज हुआ था। इस फिल्म ने 67 करोड़ कमाए थे वर्ल्डवाइड।

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