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Wednesday, October 14, 2026
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BJP में संगठनात्मक सर्जरी की तैयारी, प्रदर्शन के आधार पर नवीन की नई टीम का गठन

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नई दिल्ली। भाजपा (BJP) के नए अध्यक्ष नितिन नवीन (New President Nitin Naveen) के कार्यभार संभालने के बाद पार्टी में बड़े बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों (Assemblies Elections) के लिए देश भर से चुने गए भाजपा नेताओं (BJP leaders) के प्रदर्शन के आधार पर ही उन्हें नवीन की नई राष्ट्रीय टीम (New National Team) में जगह मिलने की संभावना है।

असम के लिए विशेष टीम की तैनाती
भाजपा ने असम के लिए लगभग एक दर्जन राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की सूची तैयार की गई है। इस पूरी टीम का मार्गदर्शन राज्य के चुनाव प्रभारी बैजयंत ‘जय’ पांडा कर रहे हैं। इस टीम में दिल्ली की सांसद बांसुरी स्वराज, प्रवेश वर्मा, विधायक अनिल शर्मा और पवन शर्मा जैसे नाम शामिल हैं। राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश और राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर जैसे ‘परखे हुए’ नेताओं को भी इस मिशन में जोड़ा गया है। यह टीम राज्य में भाजपा, आरएसएस और नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करेगी।

 

नेताओं की जिम्मेदारियां और कार्य
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन नेताओं को केवल प्रचार तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि उन्हें जमीनी स्तर के ठोस काम सौंपे गए हैं। जैसे हर नेता को एक से दो लोकसभा सीटों के भीतर चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। जनसांख्यिकीय आंकड़ों का विश्लेषण और बूथ स्तर की रणनीति बनाना का काम भी दिया गया है। इसके अलावा, चुनाव करीब आने पर ये नेता टिकटों के बंटवारे से जुड़े फैसलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वे मतदाताओं के बीच पार्टी की छवि को मजबूत करेंगे।

चयन का आधार क्या है?
इन नेताओं के चयन में उनकी आरएसएस पृष्ठभूमि, ABVP और युवा मोर्चा के साथ उनके पुराने जुड़ाव को प्राथमिकता दी गई है। हालांकि भाजपा पहले भी अन्य राज्यों के नेताओं को चुनावी ड्यूटी पर लगाती रही है, लेकिन इस बार का उद्देश्य नए अध्यक्ष के तहत ‘संगठनात्मक निरंतरता’ बनाए रखना है। चुनाव परिणामों के बाद किए जाने वाले विश्लेषण में जिन नेताओं का प्रदर्शन शानदार रहेगा, उन्हें नितिन नवीन की टीम में राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

पीढ़ीगत बदलाव के संकेत
45 वर्षीय नितिन नवीन की नियुक्ति को भाजपा में एक पीढ़ीगत बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि नबीन की टीम में नए चेहरों और अनुभवी दिग्गजों का मिश्रण होगा। चूंकि इस साल कई बड़े नेता राज्यसभा से रिटायर हो रहे हैं और एनडीए सरकार के तीसरे कार्यकाल का आधा समय पूरा होने वाला है, ऐसे में कैबिनेट फेरबदल की भी संभावनाएं हैं। वर्तमान में असम के लिए जो टीम बनाई गई है, वैसी ही टीमें जल्द ही पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी के लिए भी घोषित की जाएंगी। इन नेताओं के लिए यह चुनाव केवल जीत-हार का सवाल नहीं है, बल्कि भाजपा के नए सांगठनिक ढांचे में अपने भविष्य को सुरक्षित करने का एक मौका है।

नितिन नवीन की पहली परीक्षा
असम और पश्चिम बंगाल के आगामी 2026 विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं। नए अध्यक्ष नितिन नबीन के लिए ये चुनाव उनकी नेतृत्व क्षमता की पहली बड़ी परीक्षा होंगे। असम में भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में आने (हैट्रिक) के लक्ष्य के साथ मैदान में है। भाजपा का पूरा जोर ‘घुसपैठ’ और ‘जनसांख्यिकीय परिवर्तन’ जैसे मुद्दों पर है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार ‘मियां’ वोटर्स और बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे को उठाकर हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश कर रहे हैं।

नितिन नवीन ने असम में बूथों की संख्या को 28,000 से बढ़ाकर 31,400 करने का लक्ष्य रखा है, ताकि माइक्रो-मैनेजमेंट को मजबूत किया जा सके। कांग्रेस ने इस बार प्रियंका गांधी को असम के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। कांग्रेस विपक्षी एकजुटता के जरिए भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रही है। भाजपा अपने पुराने सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी। मुख्यमंत्री ने संकेत दिया है कि गठबंधन लगभग 103 सीटों पर मजबूती से चुनाव लड़ने की स्थिति में है।

हालांकि असम के मुकाबले बंगाल में भाजपा के लिए चुनौती थोड़ी कठिन है क्योंकि यहां वह 14 साल के ममता बनर्जी के शासन को चुनौती दे रही है। भाजपा के पास बंगाल में ममता बनर्जी के कद का कोई एक ‘मास लीडर’ नहीं है। इसलिए पार्टी एक बार फिर प्रधानमंत्री मोदी के चेहरे और ‘विकास’ के मॉडल पर निर्भर है। भाजपा ने बंगाल को अलग-अलग जोन में बांटकर ‘क्षेत्रीय वॉर-रूम’ बनाए हैं। हर जोन के लिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को तैनात किया गया है। पार्टी भ्रष्टाचार, तुष्टिकरण और कानून-व्यवस्था को मुख्य चुनावी मुद्दा बना रही है। साथ ही, केंद्रीय योजनाओं के लाभ को सीधे जनता तक पहुँचाने का वादा किया जा रहा है। नितिन नवीन ने पद संभालते ही बंगाल का दौरा शुरू कर दिया है। उन्होंने दुर्गापुर में कोर टीम के साथ बैठक कर जमीनी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने का ‘रोडमैप’ तैयार किया है।

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