ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त, कैप्टन व ट्रेनी घायल

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विजयपुरा। कर्नाटक के विजयपुरा जिले के बाबलेश्वर तालुक के मंगलूर गांव में रविवार को रेड बर्ड एविएशन का निजी ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में कैप्टन और एक ट्रेनी पायलट सवार थे, दोनों को गंभीर चोटें आई हैं। स्थानीय लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी। यह विमान कलबुर्गी से बेलगावी जा रहा था। उड़ान के दौरान इंजन में अचानक खराबी आ गई, जिससे पायलट कंट्रोल खो बैठे और खेत में क्रैश लैंडिंग हो गई। विमान सीसना 172 मॉडल का दो सीटर ट्रेनिंग प्लेन था। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह विमान रेड बर्ड एविएशन कंपनी का था और ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। शुरुआती जांच में हादसे की वजह इंजन की तकनीकी खराबी सामने आई है, लेकिन दुर्घटना के सही कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चलेगा। प्रशासन और पुलिस ने साफ़ किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी जरूरी तकनीकी और कानूनी जांच की जा रही है तथा जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

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बेंगलुरु–पुणे रूट पर प्रीमियम ट्रेन, कर्नाटक को दो वंदे भारत

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बेंगलुरु: कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बेंगलुरु और पुणे के बीच एक नई प्रीमियम ट्रेन चलाने की घोषणा की है. यह फैसला राज्य के जनप्रतिनिधियों और आम जनता की लंबे समय से चली आ रही मांग को देखते हुए लिया गया है.

 

तटीय कर्नाटक के लिए बड़ी सौगात

पुणे के अलावा, रेल मंत्री ने तटीय कर्नाटक के निवासियों के लिए बेंगलुरु-मंगलुरु-कारवार रूट पर बहुप्रतीक्षित वंदे भारत एक्सप्रेस जल्द शुरू करने की घोषणा की. रेल मंत्री ने कहा- “मंगलुरु और हासन के बीच बिजलीकरण (Electrification) का काम पूरा हो चुका है. सुरक्षा जांच और टेस्ट रन सफल होते ही हम बेंगलुरु-कारवार वंदे भारत का टाइमटेबल जारी कर देंगे.” उन्होंने कहा कि रेलवे बेंगलुरु-कारवार मार्ग पर दो वंदे भारत ट्रेनें चलाने पर विचार कर रहा है. एक बेंगलुरु से शुरू होगी और दूसरी कारवार से. उन्होंने आगे कहा, “इस ट्रेन के साथ हम कर्नाटक के पूरे तटीय क्षेत्र को कवर कर लेंगे.”

 

बेंगलुरु उपनगरीय रेल परियोजना

 

उन्होंने कहा कि भाजपा शासन के दौरान कर्नाटक में रेल पटरियों के निर्माण, स्टेशनों के कायाकल्प और सुरक्षा उपायों के लिए 52,950 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है. वर्तमान में कर्नाटक के 61 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है, जिनमें से नौ का काम पहले ही पूरा हो चुका है. उन्होंने बताया कि “स्टेशनों के पुनर्निर्माण पर 2,110 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं.”

ट्रेड डील से घरेलू सेब किसानों की रोज़ी-रोटी पर खतरा

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श्रीनगर: हिमालयी राज्यों के किसानों में चिंता बढ़ रही है क्योंकि उन्हें डर है कि भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार ढांचे के हिस्से के तौर पर अमेरिका से आयात होने वाले फलों से वे आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएंगे. दो दर्जन से अधिक किसान संगठनों के समूह, संयुक्त किसान मंच के संयोजक हरीश चौहान ने कहा कि यह देश में सेब की अर्थव्यवस्था के लिए तीसरा झटका होगा.

हिमाचल प्रदेश के किसान नेता यूरोपीय संघ के बाद न्यूजीलैंड के साथ भारत के व्यापार समझौते का जिक्र कर रहे थे, जिसे ‘सभी सौदों की जननी’ बताया जा रहा है, जो आयात शुल्क कम होने के बाद किसानों के लिए मुसीबत बन सकता है. मुक्त व्यापार समझौतों के तहत, भारत ने न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ से सेब और अन्य फलों पर आयात शुल्क 50% से घटाकर 20% कर दिया है.

चौहान ने ईटीवी भारत को बताया, “सेब फलों में सबसे ऊपर है और सरकार साफ-साफ कहती है कि आयात शुल्क घटाकर 25 प्रतिशत कर दिया जाएगा. न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) 80 रुपये प्रति किलो है. बेस रेट MIP होगा. इसलिए, यह सेब की अर्थव्यवस्था को खत्म कर देगा क्योंकि हम अमेरिका या न्यूजीलैंड के किसानों से मुकाबला नहीं कर सकते. इससे तीन ट्रेड डील में आयातित सेब भारतीय बाजारों में 15-20 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ता हो जाएगा.”

चौहान ने कहा, “अमेरिका से आने वाले सेब के एक बॉक्स (20 किलोग्राम) पर अभी जो ड्यूटी लगती है, उसकी कीमत भारतीय बाजारों में 2500-2700 रुपये के बीच है. लेकिन लैंडिंग और इम्पोर्ट कॉस्ट हटने के बाद यह आधी कीमत पर बिकेगा. इससे हमारे प्रीमियम सेबों को नुकसान होगा क्योंकि उनके रेट बहुत कम हो जाएंगे. घरेलू बाजार में, अमेरिकी उत्पादों को आसान बनाने के लिए हमारे सेब सस्ते हो जाएंगे.”

भारत में 2.5 एमटी (मीट्रिक टन) सेब पैदा होते हैं, जो दुनिया के कुल उत्पादन का 2 प्रतिशत है. इसमें से, कश्मीर में कुल पैदावार का 75 प्रतिशत पैदा होता है, जिससे सालाना 12,0000 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई होती है. सेब की खेती 2 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि पर होती है, जिसमें जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड सेब पैदा करने वाले मुख्य राज्य हैं. लेकिन, सेब किसानों और ट्रेड यूनियनों का अंदाजा है कि भारत के हालिया व्यापार समझौतों से कीमतों में 50 प्रतिशत की गिरावट आएगी.

जम्मू-कश्मीर, जो सेब का मुख्य उत्पादक है, में यह सेक्टर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सात लाख से अधिक परिवारों को गुजारा देता है. मोहम्मद अब्बास को भारत-अमेरिका ट्रेड डील की बेसिक जानकारी पता चलने के बाद चिंता हो रही है, जिससे उनके जैसे छोटे किसान प्रभावित हो रहे हैं. शोपियां के 35 साल के तीसरी पीढ़ी के सेब उगाने वाले अब्बास के पास 20 कनाल के बाग हैं जो पिछले साल बाढ़ में फसल खराब होने के बाद पहले से ही कर्ज में डूबे हुए हैं.

यह मेरे जैसे किसानों को वित्तीय संकट में और धकेल देगा. हम पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से जूझ रहे हैं जैसे कि अचानक बाढ़, कम बर्फबारी, बारिश, कम उत्पादन आदि. इन स्थितियों ने नई बीमारियों को जन्म दिया है और उनके लिए कीटनाशकों की आवश्यकता होती है जो महंगे होते हैं. इन स्प्रे ने हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित किया है और अब हमें आर्थिक रूप से भी नुकसान उठाना पड़ेगा.”

शुक्रवार (6 फरवरी) को, भारत और अमेरिका ने परस्पर लाभकारी ट्रेड के बारे में अंतरिम एग्रीमेंट के लिए एक फ्रेमवर्क की घोषणा की. साझा बयान में कहा गया कि यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुरू किए गए बड़े बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) बातचीत के लिए देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, जिसमें अतिरिक्त बाजार तक पहुंच की प्रतिबद्धता शामिल होगी और अधिक मजबूत सप्लाई चेन को समर्थन मिलेगा.

बयान के मुताबिक, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक सामानों और कई तरह के खाने और खेती के उत्पादों पर टैरिफ खत्म कर देगा या कम कर देगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन (DDGs), जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स और अन्य प्रोडक्ट्स शामिल हैं.

शनिवार को, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत-अमेरिका अंतरिम ट्रेड फ्रेमवर्क डेयरी या दूसरे सेंसिटिव घरेलू प्रोडक्ट्स पर कोई छूट दिए बिना एक्सपोर्ट के मौके बढ़ाता है, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए सबसे पसंदीदा ड्यूटी शर्तों के तहत लगभग 30 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था तक पहुंच खुलती है. उन्होंने कहा कि भारतीय किसानों के हितों का पूरा ध्यान रखा गया है.

लेकिन हिमाचल प्रदेश से लेकर कश्मीर तक, इस भरोसे से किसानों का डर दूर नहीं हुआ है, क्योंकि उन्हें डर सता रहा है कि जब आयातित सेब भारतीय बाजारों में आने लगेंगे, तो उनकी रोजी-रोटी पर 50 प्रतिशत तक असर पड़ेगा.

एक किसान ने कहा, “अमेरिका के सेब हमारी किस्मों के मुकाबले पौष्टिक नहीं हो सकते हैं. लेकिन वे पॉलिश किए हुए और लाल रंग के होते हैं. इससे वे ग्राहकों को अधिक पसंद आते हैं.”

कश्मीर के किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर किसानों की सुरक्षा के लिए आयातित सेब पर 100 प्रतिशत ड्यूटी लगाने की मांग की. कश्मीर वैली फ्रूट ग्रोअर्स कम डीलर्स यूनियन के अध्यक्ष बशीर अहमद बशीर ने पत्र में लिखा, “हर साल घाटी, हिमाचल और उत्तराखंड के सेब उद्योग के लिए नई चुनौतियां सामने आती हैं. कभी सेब ईरान से आयात किए जाते हैं तो कभी अमेरिका और दूसरे देशों से भी.”

फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में क्रैश हुआ झूला, इंस्पेक्टर की मौत, 12 लोग घायल

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फरीदाबाद : हरियाणा के फरीदाबाद में बड़ा हादसा हुआ है. यहां पर सूरजकुंड मेले में झूला गिरने से जहां पलवल के रहने वाले इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की मौत हो गई है, वहीं 12 लोग हादसे में घायल हुए हैं. हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने पूरे मामले में दुख जताया है.

 

सूरजकुंड मेले में गिरा झूला : फरीदाबाद के सूरजकुंड मेले में स्विंग बोट झूला अचानक गिर गया जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई. हादसे के वक्त झूले में 12 से ज्यादा लोग सवार थे. झूले के गिरने से 13 लोग घायल हो गए जिसमें से पलवल के रहने वाले इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की मौत हो गई है. बाकी सभी घायलों को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है कि शाम करीब 6 बजे ये हादसा हुआ है. तकनीकी खराबी से झूले की मोटर फेल हो गई और बेरिंग के टूटने से ये हादसा हो गया. घटना के तुरंत बाद झूलों को फौरन रोक दिया गया. पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद है. मामले की जांच शुरू कर दी गई है. झूला संचालक से पूछताछ की जा रही है. साथ ही सुरक्षा मानकों की जांच भी जारी है. इसके अलावा मेले में लगे अन्य झूलों की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं.

 

डीसी ने क्या कहा ? : सूरजकुंड में हुए हादसे को लेकर डीसी आयुष सिंह ने कहा है कि “पलवल में तैनात इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद की हादसे में मौत हो गई है. कुल 13 लोग घायल हुए जिसमें इंस्पेक्टर की मौत इलाज के दौरान हुई है. शाम करीब 6.15 बजे ये हादसा हुआ है. हादसे के लिए जांच कमेटी बना दी गई है जो पूरे हादसे की जांच करेगी.”

 

हादसे पर जताया दुख : वहीं हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी ने पूरे हादसे पर दुख जताया है. सीएम ने पोस्ट करते हुए लिखा कि ” फरीदाबाद में आयोजित सूरजकुंड मेले के दौरान हुए हादसे से अत्यंत दुखी हूं. इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं. साथ ही, घायल हुए लोगों के समुचित एवं तत्काल उपचार के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं. हरियाणा सरकार पूरी तत्परता और संवेदनशीलता के साथ घायलों तथा उनके परिजनों को हर संभव सहायता प्रदान करने में जुटी है.”

 

 

जांच के आदेश : इसके अलावा पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा ने कहा है कि ” आज शाम 39वें सूरजकुण्ड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 के दौरान झूला क्षेत्र में एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा हुआ. पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं. हमारी सबकी संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं. सभी घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध करवाया जा रहा है. मैं सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं.”

 

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आरएसएस प्रमुख प्रमुख मोहन भागवत ने कहा -हिंदू शब्द विदेश से आया, देश में चार तरह के हिंदू…  हम विश्व गुरु बनेंगे. लेकिन सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि उदाहरणों के जरिए। 

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मुंबई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने आरएसएस के 100 वर्ष पूरा होने के अवसर पर मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि संघ ने पहले से तय किया कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है। 
भागवत ने कहा कि हम विश्व गुरु बनेंगे. लेकिन सिर्फ भाषणों से नहीं बल्कि उदाहरणों के जरिए।  अगर आप भारतीय हैं तो ये हुनर आपको विरासत में मिला है। भारत के मुस्लिम और ईसाई भारत के हैं। 
उन्होंने कहा कि भारत में चार तरह के हिंदू हैं. पहले वो जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं. दूसरे वो जो कहते हैं कि हम हिंदू हैं तो क्या? इसमें गर्व करने वाली क्या बात है. तीसरे, वो जो कहते हैं कि धीरे से बोलो कि हम हिंदू हैं। अगर आप हमसे घर में पूछेंगे तो हम आपको बताएंगे कि हम हिंदू हैं और चौथे, वो जो भूल गए हैं कि हम हिंदू हैं।  या फिर जिन्हें भूलने को विवश किया गया है कि वे हिंदू हैं। 
भागवत ने हेडगेवार का जिक्र करते हुए कहा कि संघ ने पहले से तय किया है कि संपूर्ण समाज को संगठित करने के अलावा संघ को और कोई दूसरा काम नहीं करना है. बहुत कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा. एक, अपनी पढ़ाई में हमेशा फर्स्ट क्लास आना; दूसरा, देश के लिए जो कुछ चल रहा था उसमें सक्रिय भाग लेना।  ये उनके जीवन के स्थायी कार्य थे।  संघ को लोकप्रियता नहीं चाहिए. संघ को पावर नहीं चाहिए. जितने भी भले काम देश में हो रहे हैं, वे ठीक से हो जाएं, उन्हें करने के लिए संघ है। 
उन्होंने कहा कि हिंदू संज्ञा नहीं, विशेषण है, भारत में रहने वाले सभी हिंदू ही हैं।  धर्मनिरपेक्षता गलत शब्द है. उसे पंथनिरपेक्षता कहना चाहिए क्योंकि धर्म जीवन का आधार है। 

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‘नीच’ शब्द पर नहीं लग सकता SC/ST एक्ट, राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

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Rajasthan High Court: राजस्थान हाई कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कहा कि किसी व्यक्ति को ‘नीच’ जैसे अपमानजनक शब्द कह देने मात्र से एससी/एसटी एक्ट अपने-आप लागू नहीं होता. जाति के आधार पर अपमान करने पर यह एक्ट लगता है. कोर्ट ने कहा कि दो लोगों के बीच हुए विवाद में नीच कहने पर जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता. इसके तहत कोर्ट ने आरोपी पर लगे एससी/एसटी एक्ट को खारिज कर दिया है.

दरअसल, कोर्ट ने जिस मामले को लेकर फैसला सुनाया है. वह साल 2011 का है. जहां IIT जोधपुर में सरकारी अधिकारी को अतिक्रमण की जांच के दौरान कुछ लोगों ने ‘नीच’ कह दिया. अधिकारियों ने इसे जातिगत अपमान माना और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया. जिन लोगों को इस मामले में आरोपी बनाया गया, वे सभी अतिक्रमण हटाने का विरोध कर रहे थे. विरोध करने पर विवाद बड़ा और ‘नीच’ जैसे शब्दों तक पहुंच गया.

आरोपियों की ओर से दायर याचिका में क्या कहा?

जब यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा तो आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि उन्हें किसी की जाति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी. मामूली कहासुनी हुई थी और ये शब्द जाति के संकेत नहीं देते. इसलिए इसे जातिगत अपमान नहीं माना जा सकता है. इसके अलावा मौके पर कोई भी स्वतंत्र गवाह मौजूद नहीं था. जिस पर विचार करते हुए हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है.

एससी-एसटी एक्ट लगाने के लिए ठोस सबूत जरूरी

हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा, विवाद के दौरान इस्तेमाल किए गए शब्द किसी जाति विशेष की ओर संकेत नहीं करते और न ही ऐसा कोई प्रमाण है. आरोपियों को अधिकारियों की जाति के बारे में पहले से पता था, इसका कोई ठोस सबूत नहीं मिला है. एससी-एसटी एक्ट लगाने के लिए ठोस सबूत का प्रमाण होने जरूरी है. हाई कोर्ट ने सुनवाई करते हुए एससी-एसटी के आरोपों को रद्द कर दिया है, लेकिन सरकारी कार्य में बाधा डालने और अधिकारियों के साथ धक्का मुक्की करने का केस चलता रहेगा.

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राहुल गांधी की सोच सड़ी हुई है… कंगना रनौत ने ‘माल’ और ‘कबाब’ वाले बयान पर दी तीखी प्रतिक्रिया

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नई दिल्ली। संसद परिसर में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) द्वारा एपस्टीन फाइल्स (Epstein Files) को लेकर दिए गए विवादित बयान पर भाजपा सांसद कंगना रनौत (BJP MP Kangana Ranaut) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने राहुल गांधी (Rahul Gandhi.) की भाषा और शब्द चयन को निशाना बनाते हुए कहा कि उनकी टिप्पणियां उनकी मानसिकता को स्पष्ट रूप से दिखाती हैं।

 

कंगना का हमला
हिमाचल प्रदेश की मंडी लोकसभा से सांसद कंगना रनौत ने कहा, “उनके शब्दों की पसंद देख लीजिए। जिस तरह उन्होंने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में कहा कि उसमें और ‘माल’ और ‘कबाब’ है, ऐसी सड़ी हुई और भ्रष्ट मानसिकता वाले व्यक्ति से और क्या उम्मीद की जा सकती है?” उन्होंने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक जीवन में बैठे नेताओं को हमेशा जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ बोलना चाहिए। कंगना ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार ऐसे बयान देते हैं, जो राजनीतिक स्तर को गिराते हैं।

 

कांग्रेस का पलटवार
वहीं, कांग्रेस पार्टी ने लगातार आरोप लगाया है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोका जा रहा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने कहा, “पिछले तीन दिनों से लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने नहीं दिया जा रहा है और उन्हें अपना भाषण पूरा करने का अवसर नहीं मिला।” रमेश ने आगे बताया कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है क्योंकि राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे उठाते हैं।

 

पीएम मोदी पर आरोप और संसद में बहस
कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी आरोप लगाया कि चीनी घुसपैठ के नाजुक समय में उन्होंने राजनीतिक जिम्मेदारी से हाथ खड़े कर सेना को अकेला छोड़ दिया। राहुल गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की पुस्तक का हवाला देते हुए यह आरोप संसद में उठाए। इसके बावजूद कहा जा रहा है कि संसद में उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने नहीं दिया गया। यह मामला राजनीतिक बहस और सोशल मीडिया पर भी गहरी चर्चा का विषय बन गया है, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों ने अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं जारी की हैं।

‘मियां, तैयार हो जाओ…’, सूर्या ने किया फोन, विदेश जाने का प्लान छोड़ टीम के साथ जुड़े सिराज, फिर मचाया धमाल

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T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए हर्षित राणा की जगह मोहम्मद सिराज को शामिल कर लिया गया है. यह फैसला टूर्नामेंट शुरू होने से 2 दिन पहले लिया गया. इसका खुलासा खुद मोहम्मद सिराज ने किया. उन्होंने बताया कि जब खेलने के लिए फोन आया तो लगा कि कप्तान सूर्य कुमार यादव मजाक कर रहे हैं. जानें मोहम्माद सिराज ने क्या कहा?

फोन पर क्या बोले सूर्य कुमार यादव?
मोहम्मद सिराज ने बताया कि मैच शुरू होने से 2 दिन पहले कप्तान सूर्यकुमार यादव का फोन आया. फोन उठाते ही उन्होंने कहा, “मियां, तैयार हो जाओ, बैग पैक करो और आ जाओ. यह सुनते ही मैंने कहा, सूर्या भाई अभी मजाक मत करो. आप बहुत मजाक करते हो, लेकिन इस बात मजाक नहीं. सूर्या भाई ने फिर कहा, मैं सीरियस हूं. हालांकि मुझे यकीन नहीं हुआ लेकिन जब ओझा भाई का फोन आया, तब मुझे यकीन हुआ कि सच में खेलने जाना है.

सूर्या ने सिराज को क्यों किया फोन?
दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप 2026 के लिए चयनित खिलाड़ी हर्षित राणा चोटिल हो गए थे. जिसकी वजह से बीसीसीआई ने मोहम्मद सिराज को टीम में शामिल करने का फैसला किया. सीनियर गेंदबाज मोहम्मद सिराज के टीम में शामिल होने से अर्शदीप सिंह और जसप्रीत बुमराह का साथ मिलेगा. लेकिन इस दौरान जसप्रीत बुमराह भी अचानक से बीमार हो गए, जिसकी वजह से उन्होंने मैच नहीं खेला. सिराज को बिना तैयारी के खेलने का मौका मिल गया.

4 ओवर में झटके 3 विकेट
बता दें, जुलाई 2024 के बाद मोहम्मद सिराज अपना पहला टी20 इंटरनेशनल मैच खेल रहे हैं. सिराज ने पहले ही दिन भारत-अमेरिका मैच में अपना काफी शानदार प्रदर्शन दिखाया. उन्होंने शुरुआती दो ओवरों में दो विकेट झटक दिए. सिराज ने कुल चार ओवरों में 29 रन देकर तीन विकेट हासिल किए. यानी जिस काम के लिए सिराज को लाया गया. उन्होंने अपना काम कर दिया. अमेरिका की टीम का स्कोर चार ओवरों में 3 विकेट पर 13 रन था. भारतीय टीम ने इस मैच में 29 रन से जीत हासिल कर ली.

इस CM का राज्य के प्रबुद्धजन ही कर रहे विरोध… Ex IAS, डॉक्टरों और लेखकों ने चीफ जस्टिस से लगाई ये गुहार?

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नई दिल्ली। असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा (Assam Chief Minister Himanta Biswa Sarma) के खिलाफ राज्य के 40 से अधिक रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों (Retired IAS officers), डॉक्टरों, शिक्षाविदों, लेखकों, पत्रकारों और अन्य प्रसिद्ध नागरिकों ने खुलकर विरोध जताया है। इन प्रबुद्ध नागरिकों ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मुख्यमंत्री के कथित “नफरती भाषण” और एक विशेष समुदाय के खिलाफ दिए गए विवादित बयानों पर स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है। उनका कहना है कि संवैधानिक उल्लंघनों के प्रति चुप्पी या निष्क्रियता संविधान की नैतिक शक्ति को कमजोर कर सकती है।

पत्र में आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ( Chief Minister Himanta Biswa Sarma) ने कई सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं जो प्रथम दृष्टया नफरती भाषण, सरकारी धमकी और एक खास समुदाय को बदनाम करने जैसे प्रतीत होते हैं। चिट्ठी में विशेष रूप से मुख्यमंत्री के ‘मियां’ (बांग्ला भाषी मुसलमानों) के खिलाफ दिए गए टिप्पणियों का उल्लेख किया गया है। इन लोगों ने चीफ जस्टिस से मांग की है कि वह इस मामले में संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करें।

CM के बयान को संविधान विरोधी बताया
पत्र में कहा गया है कि बांग्ला भाषी मुसलमान असम के समाज का हिस्सा बन चुके हैं, और मुख्यमंत्री के बयान अमानवीय, सामूहिक बदनामी और राज्य प्रायोजित उत्पीड़न की धमकियों जैसे हैं। यह टिप्पणी संविधान की भावना के खिलाफ मानी जा रही है। यहाँ यह भी महत्वपूर्ण है कि ‘मियां’ शब्द असम में बांग्ला भाषी मुसलमानों के लिए अपमानजनक रूप से इस्तेमाल होता है। गैर-बांग्ला भाषी लोग इन्हें अक्सर बांग्लादेशी प्रवासी मानते हैं, जिससे समुदाय पर सामाजिक और राजनीतिक दबाव बढ़ता है।

 

पत्र पर साइन करने वालों में कौन-कौन?
गुवाहाटी हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी इस चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने वालों में कई प्रतिष्ठित नाम शामिल हैं। इनमें विद्वान डॉ. हिरेन गोहेन, असम के पूर्व DGP हरेकृष्ण डेका, गुवाहाटी के पूर्व आर्कबिशप थॉमस मेनमपारामपिल, राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां, रिटायर्ड IAS अधिकारी, वरिष्ठ पत्रकार, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों ने कहा है कि वे मौलिक अधिकारों के संरक्षक के रूप में गुवाहाटी हाई कोर्ट की संवैधानिक भूमिका में पूर्ण विश्वास रखते हैं और इसी विश्वास के साथ अदालत से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।

 

हाई कोर्ट से क्या मांग की गई?
पत्र में हाई कोर्ट से कई महत्वपूर्ण निर्देशों की मांग की गई है, जिनमें शामिल हैं:
उचित मामले दर्ज करने के निर्देश
प्रभावित समुदाय की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपाय
सार्वजनिक पद धारकों के लिए संवैधानिक अनुशासन की पुष्टि

धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखने का निर्देश
विशेष रूप से, यह मांग की गई है कि गुवाहाटी हाई कोर्ट संविधान की मूल संरचना के हिस्से के रूप में धर्मनिरपेक्षता की रक्षा सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाए। यह ज्ञापन असम में बढ़ते सामाजिक तनाव और भाषणों के संभावित प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता का संकेत है, और इससे राज्य में संवैधानिक मूल्यों और साम्प्रदायिक सौहार्द की रक्षा के मुद्दे फिर से सामने आए हैं।

 ऑपरेशन सिंदूर पर जैश आंतकी का बड़ा कबूलनामा

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नई दिल्ली। जैश-ए-मोहम्मद के टॉप आतंकी ने ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बड़ा कबूलनामा किया है। आतंकी इलियास कश्मीरी ने खुलासा किया है कि पाकिस्तानी सेना के चीफ ने आतंकियों से कहा था कि ये गजवा ए हिंद है। पीओके के रावलकोट में पांच फरवरी को जैश के टॉप कमांडर इलियास कश्मीरी ने जैश के आतंकियों के बीच यह खुलासा किया। कश्मीरी ने कहा कि हमारे सिपहसालार ने युद्ध का ऐलान करते हुए कहा था कि ये युद्ध गजवा ए हिंद है।  कश्मीरी ने कहा कि जब जंग छिड़ गई, असलहा निकल आया। फाइटर जेट टकरा गईं, टैंक आमने-सामने खड़े हो गए। तब सिपहसालार ने ऐलान कर दिया कि ये गजावत उल हिंद है। ये बुनयान अल मरसूस है। ये रैली जैश ए मोहम्मद में भर्ती किए गए आतंकियों के लिए की गई थी।
इलियास कश्मीरी ने आतंकवाद फैलाने के लिए इन ट्रेंड आतंकियों के सामने ये कबूलनाम किया। इलियास कश्मीरी ने कहा हमारा नाम, हमारी पहचान, हमारा मोटो जिहाद (आतंकवाद) है। उन्होंने कहा कि जब सरकार साथ थी, तब भी जेहाद जब सरकार साथ नहीं थी, तब भी जेहाद, जिहाद हमारा मकसद है। हम जेहाद करेंगे और कश्मीर को आजाद करवाएंगे। बता दें कि इलियास कश्मीरी वही आतंकी है, जिसने सबसे पहले खुलासा किया था कि सात मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जैश आतंकी मौलाना मसूद अजहर का परिवार बहावलपुर में भारतीय हमले में मारा गया था। मालूम हो कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत के खिलाफ पाकिस्तान ने अपने ऑपरेशन का नाम बुनयान अल मरसूस रखा था, जिसका मतलब होता है- शीशे जैसी मजबूत दीवार यानी एक ऐसी दीवार जो बहुत मजबूती से रक्षा करती है। इस नाम के साथ पाकिस्तान खुद को दुनिया के सामने मजबूत दिखाना चाहती थी।

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News Desk