यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब खाड़ी देश भी भारत के साथ व्यापार समझौता करने को तैयार

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नई दिल्ली। यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार समझौतों में तेजी दिखाने के बाद अब खाड़ी देश भी भारत के साथ हाथ मिलाने को बेकरार दिख रहे हैं। यह केवल संयोग नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत की बढ़ती आर्थिक ताकत को दिखाता है। दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं अब भारत को बाजार भर नहीं, बल्कि साझेदार शक्ति के रूप में देख रही हैं। बता दें कि भारत और खाड़ी क्षेत्र के छह देशों के समूह खाड़ी सहयोग परिषद के बीच मुक्त व्यापार समझौते की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की उपस्थिति में दोनों पक्ष वार्ता की रूपरेखा पर हस्ताक्षर कर रहे हैं। यह रूपरेखा आने वाली बातचीत का दायरा, तरीका और प्राथमिकताएं तय करेगी। इस तरह करीब दो दशक से अटकी प्रक्रिया अब फिर गति पकड़ती दिख रही है। खाड़ी सहयोग परिषद में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं। भारत पहले ही संयुक्त अरब अमीरात के साथ मुक्त व्यापार समझौता कर चुका है और ओमान के साथ व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते पर भी हस्ताक्षर हो चुके हैं। इसके बाद अब पूरे समूह के साथ व्यापक समझौता भारत की व्यापार नीति का अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत और खाड़ी देशों के बीच व्यापार का आधार अभी तक ऊर्जा रहा है। भारत अपने कच्चे तेल और गैस का बहुत बड़ा हिस्सा इन्हीं देशों से मंगाता रहा है। सऊदी अरब और कतर भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रमुख स्तंभ हैं। दूसरी ओर भारत इन देशों को मोती, कीमती और अर्ध कीमती पत्थर, धातु, कृत्रिम आभूषण, बिजली उपकरण, लोहा, इस्पात और रसायन भेजता है। आंकड़े बताते हैं कि दोनों पक्षों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है। हाल के वर्ष में भारत का निर्यात करीब 57 अरब डॉलर के आसपास रहा, जबकि आयात 121 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच गया। कुल द्विपक्षीय व्यापार 178 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है। यह स्तर अपने आप में इस संबंध की गहराई बताता है।
खाड़ी देश भारतीय प्रवासी श्रमिकों के लिए भी बड़ा केंद्र हैं। करीब तीन करोड़ से अधिक भारतीय जो विदेश में रहते हैं, उनमें से बड़ी संख्या इसी क्षेत्र में काम करती है। वह हर वर्ष भारी धनराशि भारत भेजते हैं, जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए महत्त्वपूर्ण सहारा है। पहले भी भारत और समूह के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी थी, पर 2008 के बाद प्रक्रिया रुक गई। शुल्क में कटौती, निवेश सुरक्षा और समूह की आंतरिक प्राथमिकताओं पर मतभेद के कारण बातचीत ठंडी पड़ गई थी। अब निवेश संधि और व्यापार समझौते को अलग अलग रास्ते पर रखकर गतिरोध तोड़ने की कोशिश की गई है।
भारत ने हाल में यूरोपीय संघ और अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता में प्रगति दिखाई है। इसतरह के माहौल में खाड़ी क्षेत्र के साथ नई पहल यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब व्यापार समझौतों को केवल आर्थिक नहीं बल्कि सामरिक साधन के रूप में भी देख रही है।
खाड़ी देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते की ओर बढ़ता कदम केवल बदलती विश्व राजनीति का संकेत भी है। दुनिया की ताकत अब केवल हथियार से नहीं, बाजार, आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा मार्गों से तय हो रही है। जो देश अपने लिए स्थिर ऊर्जा स्रोत और खुले बाजार सुरक्षित कर लेगा, वही आने वाले दशकों में मजबूती से खड़ा रहेगा। भारत लंबे समय तक सतर्क और कभी कभी संकोची व्यापार नीति अपनाता रहा। पर अब हालात बदल रहे हैं। वैश्विक शक्ति बनने के लिए भारत को अपने बड़े बाजारों को खोलना ही होगा। खाड़ी क्षेत्र इसमें स्वाभाविक साथी है, क्योंकि यहां ऊर्जा है, धन है, निवेश की क्षमता है और भारत के लिए काम करने वाली विशाल जनशक्ति भी यहीं मौजूद है।
बहरहाल, पर इस उत्साह में आंख मूंद लेना भी ठीक नहीं होगा। मुक्त व्यापार समझौते का अर्थ है अपने बाजार को खोलना। यदि घरेलू उद्योग तैयार नहीं हुए तो सस्ता आयात कई क्षेत्रों पर चोट कर सकता है। इसलिए सरकार को केवल समझौते पर हस्ताक्षर करने की जल्दी नहीं, बल्कि घरेलू उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को मजबूत करने की भी उतनी ही चिंता करनी होगी। 

पीएम मोदी ने राज्यसभा में संबोधन के दौरान ली चुटकी और बोले- खड़गे जी बैठकर करें नारेबाजी, उनकी उम्र का ख्याल… 

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नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के जवाब के दौरान गुरुवार को राज्यसभा में माहौल काफी गरम रहा। दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जैसे ही संबोधन शुरू किया विपक्षी सदस्यों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसी हंगामे के बीच पीएम मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में चुटकी ली, जिस पर सत्ता पक्ष में ठहाके गूंज उठे। जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सांसदों ने सदन से वाकआउट किया, जिस पर पीएम मोदी ने फिर चुटकी ली।   
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, आदरणीय सभापति जी, मेरी एक प्रार्थना है। आदरणीय खड़गे जी की उम्र को देखते हुए मेरा अनुरोध है कि वे बैठकर नारेबाजी करें। खड़े होकर नारे लगाने का काम नौजवानों के लिए छोड़ दें। उन्होंने यह भी कहा कि बैठ कर नारे लगाने से खड़गे जी को कष्ट नहीं होगा और विपक्ष के युवा सदस्य खड़े होकर नारे लगा सकते हैं। 
पीएम मोदी के इस बयान के बाद सदन में शोर और बढ़ गया। विपक्षी सदस्य लगातार नारेबाजी करते रहे, जबकि प्रधानमंत्री बिना रुके अपना जवाब देते रहे। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साफ है— हमें न रुकना है, न पीछे मुड़कर देखना है, हमें अपने लक्ष्य को प्राप्त करना है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में देश की आर्थिक स्थिति और वैश्विक छवि का जिक्र करते हुए कहा कि भारत आज विकास की नई ऊंचाइयों को छू रहा है। उन्होंने कहा कि दुनिया का भारत के प्रति भरोसा बढ़ा है और आज वैश्विक मंच पर भारत को गंभीरता से सुना जा रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि देश तेज विकास दर और कम महंगाई के साथ आगे बढ़ रहा है, जो वैश्विक स्तर पर बहुत कम देखने को मिलता है। 
पीएम मोदी ने कहा, कि हमें फ्रेजाइल फाइव इकोनॉमी के रूप में छोड़ा गया था, लेकिन आज हम दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुके हैं और बहुत जल्द तीसरे स्थान की ओर बढ़ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति बना दी गई थी कि दुनिया का कोई देश भारत से डील करने को तैयार नहीं होता था। 

विपक्ष ने सदन से किया वाकआउट 
हंगामे के बीच विपक्षी सांसदों ने सदन से वाकआउट कर दिया। इस पर भी पीएम मोदी ने चुटकी लेते हुए कहा, जो लोग थक गए, बिचारे चले गए, लेकिन कभी न कभी उन्हें जवाब देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान सत्ता पक्ष के सांसद मेज थपथपाते रहे, जबकि विपक्ष की नारेबाजी और वाकआउट ने सदन की कार्यवाही को और तनावपूर्ण बना दिया। इसके बावजूद पीएम मोदी ने बिना व्यवधान के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा का अपना जवाब पूरा किया।

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खराब मौसम और तकनीकी गड़बड़ी बनी हादसे की वजह!

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मुंबई। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार से जुड़े विमान हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट में अहम शुरुआती निष्कर्ष सामने आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, जांच में दो प्रमुख कारक सामने आए हैं जो घटना के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं। विस्तृत विश्लेषण अभी जारी है। सूत्रों के अनुसार, रनवे पर कम दृश्यता के बावजूद विमान ने लैंडिंग का प्रयास किया। 
दृश्यता की समस्या के साथ-साथ, प्रारंभिक जांच के दौरान संदिग्ध तकनीकी खराबी सामने आई है। अधिकारी यह जांच कर रहे हैं कि क्या किसी सिस्टम की खराबी के कारण विमान के उतरने और लैंडिंग के दौरान उसके प्रदर्शन पर असर हुआ। अधिकारियों ने विमान के ब्लैक बॉक्स से डेटा रिकवर करना शुरू किया है। पूरा डेटा प्राप्त और विश्लेषण हो जाने के बाद, पूरी जांच रिपोर्ट जारी की जाएगी। अधिकारियों ने जोर दिया कि अंतिम निष्कर्ष इस महत्वपूर्ण उड़ान डेटा पर निर्भर करेगा। 
बारामती हवाई पट्टी के पास दुर्घटनाग्रस्त हुए ब्लैक बॉक्स को घटना के एक दिन बाद बरामद किया गया था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) बारामती टेबलटॉप हवाई पट्टी पर विमान के दूसरे लैंडिंग प्रयास के दौरान हुई दुर्घटना की जांच कर रहा है। बता दें कि एनसीपी प्रमुख का बुधवार सुबह (28 जनवरी) मुंबई से ब्रह्मंती जाते समय एक चार्टर विमान दुर्घटना में निधन हो गया। 

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डीएमके और डीएमडीके के बीच चुनवी गठबंधन की कवायद तेज

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चेन्नई । डीएमके और डीएमडीके के बीच (Between DMK and DMDK) चुनवी गठबंधन की कवायद (Efforts for Electoral Alliance) तेज हो गई (Have Intensified) । द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों की शुरुआती तैयारियों में देसिया मुरपोक्कू द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) को एक अहम सहयोगी के तौर पर पाया है।

दोनों पार्टियां सीट-शेयरिंग और लंबे समय के राजनीतिक सहयोग को लेकर बातचीत कर रही हैं। डीएमके, जो चुनाव से काफी पहले ही अपनी चुनावी गणित को मजबूत करना चाहती है, उसने कथित तौर पर डीएमडीके को सात विधानसभा सीटों के साथ-साथ एक राज्यसभा सीट की पेशकश की है, जो अप्रैल में खाली होने वाली है। इस प्रस्ताव को सत्ताधारी पार्टी की बड़ी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद अपने गठबंधन के आधार को मजबूत करना और अपने लिए ज्यादा सीटों पर कब्जा बनाए रखना है।

हालांकि, डीएमडीके ने कथित तौर पर ज्यादा सीटों की मांग की है। पार्टी ने 14 विधानसभा सीटों तक की मांग की है, साथ ही, पार्टी ने एनडीए के साथ समानांतर बातचीत करके अपने विकल्प खुले रखे हैं, जिससे बातचीत में सस्पेंस का माहौल बन गया है। इसके बावजूद, डीएमके नेताओं को उम्मीद है कि जल्द ही कोई समझौता हो जाएगा।
सत्ताधारी पार्टी गठबंधन की व्यवस्था को जल्दी से अंतिम रूप देना चाहती है ताकि वह अपनी संगठनात्मक तैयारियों के साथ आगे बढ़ सके। उसने अपने सहयोगियों के साथ सीटों के बंटवारे को औपचारिक रूप से अंतिम रूप देने से पहले चुनावी सूचियों का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) पूरा करने की योजना बनाई है।

पार्टी सूत्रों ने बताया कि डीएमके का इरादा 234 विधानसभा सीटों में से कम से कम 170 सीटों पर चुनाव लड़ने का है, जो 2021 के चुनावों में लड़ी गई 173 सीटों से थोड़ी ही कम हैं। यह मौजूदा सत्ता को बनाए रखने में उसके आत्मविश्वास को दिखाता है। जहां डीएमडीके के साथ बातचीत मुख्य केंद्र में है, वहीं डीएमके ने अपने गठबंधन को बड़ा करने के लिए चुपचाप दूसरे राजनीतिक विकल्पों पर भी विचार किया है।

इनमें अन्नाद्रमुक से निकाले गए नेता ओ. पन्नीरसेल्वम भी शामिल हैं। शुरुआती बातचीत में यह देखा गया कि क्या वह कोई अलग पार्टी बना सकते हैं या सीधे डीएमके के साथ गठबंधन कर सकते हैं। हालांकि, पार्टी के अंदर के आकलन से पता चला कि वोटों को ट्रांसफर करने की उनकी क्षमता सीमित हो सकती है, जिससे ऐसे किसी समझौते की जरूरत कम हो गई है। फिर भी, बातचीत के रास्ते खुले हुए हैं। कई बातचीत चल रही हैं, डीएमके नेतृत्व प्रतीकात्मक साझेदारियों के बजाय एक व्यावहारिक और संख्यात्मक रूप से मजबूत गठबंधन बनाने पर ध्यान केंद्रित करता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह तय होने की उम्मीद है कि डीएमडीके सत्ताधारी मोर्चे का एक मुख्य स्तंभ बनेगा या कोई अलग राजनीतिक रास्ता अपनाएगा।

यूपीएससी सेवा में रहते हुए नहीं दे सकेंगे अब बार-बार परीक्षा, रैंक सुधारने का सिर्फ एक अवसर मिलेगा 

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नई दिल्ली। संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) ने सिविल सेवा परीक्षा-2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इस बार कुल 933 पदों के लिए भर्ती की जाएगी। आवेदन की अंतिम तिथि 24 फरवरी तय की गई है। नोटिफिकेशन के साथ ही आयोग ने परीक्षा प्रक्रिया और सेवा नियमों में कई अहम बदलाव किए हैं, जिनका असर लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा।
यूपीएससी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा केंद्रों पर अब फेस ऑथेंटिकेशन के बाद ही प्रवेश मिलेगा। इसके साथ ही सबसे बड़ा बदलाव चयन के बाद दोबारा परीक्षा देने से जुड़े नियमों में किया गया है। अब सेवा में रहते हुए बार-बार सिविल सेवा परीक्षा देने की सुविधा पहले जैसी नहीं रहेगी। यह नए नियम 2026 से लागू होंगे। 
आयोग के अनुसार, आईएएस और आईएफएस से जुड़े पुराने नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन अन्य सेवाओं, खासकर ग्रुप-ए और आईपीएस के लिए रैंक सुधारने का मौका सीमित कर दिया गया है। नए प्रावधानों के तहत चयनित अधिकारी को सिर्फ एक बार परफॉर्मेंस बेहतर करने का अवसर मिलेगा। 
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी अभ्यर्थी का 2026 में आईपीएस में चयन होता है, तो वह 2027 में रैंक सुधारने के लिए दोबारा परीक्षा दे सकता है। हालांकि इसके बाद अगर वह फिर से परीक्षा देना चाहता है, तो उसे सेवा से इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। यानी सेवा में रहते हुए बार-बार परीक्षा देने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया गया है। 
इसके अलावा, जो उम्मीदवार पहले से आईपीएस में चयनित या नियुक्त हैं, वे सीएसई-2026 से दोबारा आईपीएस नहीं पा सकेंगे। वहीं, प्रीलिम्स के बाद लेकिन मेन्स से पहले यदि किसी अभ्यर्थी का आईएएस या आईएफएस में चयन हो जाता है, तो उसे मेन्स परीक्षा लिखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 
यूपीएससी ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीएसई-2026 में चयनित उम्मीदवार अगर सीएसई-2027 में रैंक सुधारना चाहते हैं, तो इसके लिए अनुमति लेनी होगी। यह छूट केवल फाउंडेशन कोर्स तक सीमित रहेगी और इसे “वन-टाइम एक्जेम्पशन” माना जाएगा। यदि उम्मीदवार न तो ट्रेनिंग जॉइन करता है और न ही यह छूट लेता है, तो सीएसई-2026 और सीएसई-2027 दोनों के आधार पर मिली सेवा स्वतः रद्द हो जाएगी। सीएसई-2028 या उसके बाद परीक्षा देने के लिए इस्तीफा देना अनिवार्य होगा। 
गौरतलब है कि हर साल 10 लाख से अधिक अभ्यर्थी सिविल सेवा परीक्षा में शामिल होते हैं। 2025 में करीब 10 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 14,161 अभ्यर्थी मेन्स तक पहुंचे और 979 पदों पर अंतिम चयन हुआ। 2024 और 2023 में भी करीब 13 लाख आवेदन आए थे। नए नियमों के बाद सिविल सेवा परीक्षा की रणनीति और करियर प्लानिंग में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

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‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में प्रति लाभार्थी 500 रुपए की वृद्धि की पश्चिम बंगाल सरकार ने

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कोलकाता । पश्चिम बंगाल सरकार (West Bengal Government) ने ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना में प्रति लाभार्थी 500 रुपए (‘Lakshmi Bhandar’ scheme by Rs. 500 per Beneficiary) की वृद्धि की (Increased) ।

पश्चिम बंगाल सरकार की मासिक सहायता योजना ‘लक्ष्मी भंडार’ के तहत मिलने वाली रकम में हर लाभार्थी के लिए 500 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। यह प्रस्ताव गुरुवार को पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सदन में पेश किए गए वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतरिम (वोट-ऑन-अकाउंट) बजट में रखा। फिलहाल, जनरल कैटेगरी की महिलाओं को हर महीने 1 हजार रुपए मिलते हैं, जबकि शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब कैटेगरी की महिलाओं को 1,200 रुपए मिलते हैं। अंतरिम बजट प्रस्ताव के अनुसार, जनरल कैटेगरी की महिलाओं को अब से हर महीने 1,500 रुपए मिलेंगे, जबकि शेड्यूल कास्ट और शेड्यूल ट्राइब कैटेगरी की महिलाओं को 1,700 रुपए मिलेंगे। अंतरिम बजट प्रस्तावों में ‘लक्ष्मी भंडार’ प्रोजेक्ट के तहत 15 हजार करोड़ रुपए का बजट अलॉट किया गया था।

भट्टाचार्य ने गुरुवार को राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते में भी चार प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी की। राज्य के अंतरिम बजट प्रस्ताव में एक नए प्रोजेक्ट की घोषणा की गई। इस प्रोजेक्ट का नाम ‘बांग्लार युवा साथी’ है। भट्टाचार्य ने अंतरिम बजट प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा, “अगर हम इस साल विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में वापस आते हैं, तो यह प्रोजेक्ट इस साल 15 अगस्त से शुरू किया जाएगा। 21 से 40 साल की उम्र के सेकेंडरी परीक्षा पास युवाओं को हर महीने 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा।”

उन्होंने सिविक वॉलंटियर्स और ग्रीन पुलिसकर्मियों के पेमेंट में हर महीने 1 हजार रुपए की बढ़ोतरी करने की घोषणा की। इसके लिए 150 करोड़ रुपए का बजट अलॉट किया गया। उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान (एसएसए) स्कीम में ग्रास-रूट लेवल पर काम करने वाले ‘शिक्षा बंधुओं’ के लिए भी 1 हजार रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की। साथ ही, उन्होंने राज्य के लिए सातवें वेतन आयोग की भी घोषणा की। अंतरिम बजट का आकार 4,600 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का पूरा बजट इस साल के आखिर में होने वाले महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों के बाद नई कैबिनेट पेश करेगी।

शादी का झांसा और दुष्कर्म…सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, केस रद्द

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Supreme Court Rape Case : गुरुवार को शीर्ष अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मानना मुश्किल है कि एक विवाहित महिला को शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के लिए उकसाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसी आधार पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में दर्ज एक मुकदमे को रद्द कर दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि केवल शादी का वादा कर सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंध को हर परिस्थिति में दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने दोहराया कि भारतीय दंड संहिता की धारा 375 के तहत अपराध तभी बनता है, जब यह साबित हो कि आरोपी ने शुरू से ही शादी न करने की मंशा रखते हुए केवल यौन संबंध बनाने के उद्देश्य से सहमति प्राप्त की हो।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया। हाईकोर्ट ने पहले आरोपी वकील के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे को रद्द करने से इनकार कर दिया था। जस्टिस नागरत्ना ने फैसले में कहा कि कथित संबंध की पूरी अवधि के दौरान शिकायतकर्ता महिला कानूनी रूप से विवाहित थी, क्योंकि उसका तलाक का मामला अदालत में लंबित था।

पीठ ने यह भी कहा कि शिकायतकर्ता स्वयं एक वकील हैं और कानून की इस स्थिति से अनजान नहीं हो सकती थीं। दोनों पक्षों को महिला की वैवाहिक स्थिति की जानकारी थी, ऐसे में शादी के वादे के आधार पर दुष्कर्म का आरोप टिकाऊ नहीं है।

उल्लेखनीय है कि शिकायतकर्ता 33 वर्षीय वकील, एक बच्चे की मां हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि सितंबर 2022 से जनवरी 2025 तक संबंध रहे, इस दौरान गर्भावस्था और जबरन गर्भपात की स्थिति बनी। हालांकि, Supreme Court Rape Case में सभी तथ्यों को देखते हुए शीर्ष अदालत ने आरोपी वकील के खिलाफ दर्ज मुकदमा रद्द कर दिया।

भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर सरकार को सदन में जवाब देना होगा – कांग्रेसी सांसद

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नई दिल्ली । कांग्रेसी सांसदों (Congress MPs) ने कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर (On India-US Trade Deal) सरकार को सदन में जवाब देना होगा (Government will have to answer in the House) । इसके साथ ही, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति मिलनी चाहिए ।

कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में विपक्ष के नेता को बोलने और बहस शुरू करने का अधिकार होता है, जिसे इस सदन में पूरी तरह नकार दिया गया है। हमारा एकमात्र एजेंडा यह है कि विपक्ष के नेता को बोलने की अनुमति दी जाए। असली बात यह है कि भारत के किसान इस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बहुत चिंतित हैं। संसद बहस और चर्चा के लिए होती है। हम संसदीय प्रणाली को अच्छी तरह जानते हैं। हमारा एकमात्र मकसद है कि विपक्ष के नेता को बोलने दिया जाए।

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कहा कि संसद में जवाब तो देना पड़ेगा। आपने पूरा देश अमेरिका के हाथों गिरवी रख दिया है। आपने देश के किसानों को तबाह और बर्बाद कर दिया। यह देश की रीढ़ पर सीधा हमला है। ट्रंप ने जो कहा और जो डील सामने आई है, वह बिल्कुल स्पष्ट है। आपने अभी कहा है कि आटा और चावल नहीं लिया जाएगा, लेकिन मक्का, सोयाबीन, सेब आदि सब शामिल कर दिए गए हैं। हमारे किसानों का क्या होगा। उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष किसी मुद्दे पर बोलना चाहें तो उन्हें बार-बार रोका जा रहा है। यह लोकतंत्र पर सीधा हमला है। विपक्ष चाहता है कि सदन चले और विपक्षी सांसदों की बात सुनी जाए, लेकिन बार-बार सदन को स्थगित कर दिया जाता है।

कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने कहा कि अमेरिका के साथ हुई संधि को लेकर लोगों में, खासकर किसानों में बड़ी बेचैनी है। जिस तरह का दबाव दिख रहा है और अमेरिका के सामने जिस तरह सरेंडर किया गया, वह देशहित में नहीं है। विपक्ष इस मुद्दे को उठाना चाहता था, लेकिन उससे पहले ही स्पीकर ने सदन स्थगित कर दिया। हम चाहते हैं कि लोकसभा में इस पर विस्तार से चर्चा हो। पता चले कि किस मजबूरी या दबाव के कारण हमारी सरकार को अमेरिका के सामने झुकना पड़ा।

उन्होंने कहा कि भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने संसद में जिस तरह की अपमानजनक और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया, उसके बाद विपक्ष, खासकर कांग्रेस के सदस्यों में भारी रोष था। उसी भावना को व्यक्त करने के लिए चैंबर में जाना पड़ा। ऐसा लगता है कि यह पूरी साजिश सरकार की ओर से थी, ताकि विपक्ष पर, खासकर राहुल गांधी पर हमला किया जा सके। निशिकांत दुबे जैसे लोग देश की परंपरा, संस्कृति और संस्कार खत्म करने पर लगे हुए हैं। संसद में इस तरह की भाषा का इस्तेमाल शायद पहली बार हुआ होगा।

कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने कहा कि हमारी मांग बहुत आसान है, राहुल गांधी को बोलने दिया जाए। सारे विपक्षी दलों के नेताओं को बोलने का मौका मिलना चाहिए। प्रधानमंत्री को भी बोलना चाहिए। ‘मन की बात’ कर सकते हैं, लेकिन लोकसभा में भी उन्हें बोलना चाहिए। राहुल गांधी को बोलने नहीं दिया जा रहा है, लोकतंत्र कहां है?

 

अजित पवार की अस्थियां हरिद्वार में विसर्जित, एनसीपी के युवा नेता ने गंगा में कीं प्रवाहित

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हरिद्वार। महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार की अस्थियों का गुरुवार को हरिद्वार में विधिवत गंगा विसर्जन किया गया। राष्ट्रवादी युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष धीरज शर्मा अस्थि कलश लेकर हरिद्वार पहुंचे और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गंगा घाट पर अस्थियों को प्रवाहित किया। इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के कई वरिष्ठ और युवा नेता मौजूद रहे, हालांकि पवार परिवार का कोई सदस्य इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ। 
एनसीपी नेताओं के अनुसार, हरिद्वार में हुआ यह विसर्जन एक व्यापक अस्थि कलश यात्रा की शुरुआत है। यह यात्रा देश के विभिन्न धार्मिक स्थलों और पवित्र नदियों तक जाएगी, जहां पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह अस्थि कलश यात्रा करीब 14 राज्यों से होकर गुजरेगी और हर स्थान पर विधि-विधान से विसर्जन और शोक सभाएं आयोजित की जाएंगी।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि अजित पवार की अस्थियों को देश की प्रमुख नदियों और महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों पर विसर्जित करने का निर्णय इसलिए लिया गया है, ताकि देशभर में फैले उनके समर्थक और शुभचिंतक अपने प्रिय नेता को श्रद्धांजलि दे सकें। हरिद्वार के बाद अस्थि कलश यात्रा उत्तर प्रदेश के प्रयागराज संगम और वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पहुंचेगी। इसके बाद यह यात्रा बिहार की राजधानी पटना जाएगी, जहां शोक सभा और प्रार्थना कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आगे यह यात्रा पंजाब, जम्मू-कश्मीर, झारखंड और अन्य राज्यों से होती हुई तमिलनाडु के कन्याकुमारी तक पहुंचेगी। एनसीपी नेताओं के मुताबिक, इस दौरान 14 से अधिक राज्यों में श्रद्धांजलि सभाएं, प्रार्थना कार्यक्रम और जनसंपर्क आयोजन किए जाएंगे। 
गौरतलब है कि अजित पवार का 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर एक चार्टर्ड विमान दुर्घटना में निधन हो गया था। यह हादसा उस समय हुआ, जब विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से पहले गिर गया और उसमें आग लग गई। इस भीषण दुर्घटना में अजित पवार के साथ दो पायलट, एक महिला क्रू मेंबर और एक सुरक्षाकर्मी सहित कुल पांच लोगों की जान चली गई थी। इस हादसे से महाराष्ट्र की राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई थी। 

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सरकार संसद में चर्चा से मुंह मोड़ रही है – कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा

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नई दिल्ली । कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा (Congress MP Priyanka Gandhi Vadra) ने कहा कि संसद में चर्चा से (From discussions in Parliament) सरकार मुंह मोड़ रही है (Government is shying away) ।

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला द्वारा दिए गए बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, “…प्रधानमंत्री स्पीकर के पीछे छिप रहे हैं। कल उनमें सदन में आने की हिम्मत नहीं थी, क्योंकि तीन महिलाएं बेंच के सामने खड़ी थीं। यह क्या बकवास है ?.. कोई चर्चा नहीं हो रही है, क्योंकि सरकार चर्चा नहीं चाहती है।”

आपको बता दें कि आज सदन की कार्यवाही स्थगित होने से पहले, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा, “देश ने देखा कि कल सदन में क्या हुआ। सबने देखा कि कैसे सांसदों ने सदन में पीएम की कुर्सी की तरफ जाने की कोशिश की। मुझे जानकारी मिली थी कि कोई अप्रिय घटना हो सकती थी। ऐसी स्थिति दोबारा न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने पीएम मोदी से कहा कि वे सदन में न आएं।”

संसद के बजट सत्र का आज 7 वां दिन है. बजट सत्र के सातवें दिन लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच ध्वनिमत से पास हो गया। लगभग 22 सालों बाद ऐसा हुआ है कि जब प्रधानमंत्री के भाषण के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पास हुआ है। हालांकि पीएम मोदी के भाषण न होने के पीछे की वजह भी सामने आ चुकी है। इसके मुताबिक कांग्रेस ने पीएम मोदी पर शारीरिक हमले की तैयारी की थी। यही वजह है कि भाषण नहीं हुआ ।

 

 

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News Desk